किसान एहतेजाज मज़ीद पेचीदा हो रहा है, जिसमे मोदी हुकूमत के एक और बदनुमा भद्दा और अड़ियल रुख नुमाया किरदार अदा कर रहा है। अब यह एहतेजाज महज़ हिन्द तक महदूत ना रह कर बेरुन मुल्क तक इन चीख़ बाज़ किसानों की चीखों की गूँज सुनाई दे रही है। दूसरी जानिब चीख़ बाज़ किसानों के इस एहतेजाज की चीख़ अब महज़ मर्द किसानों तक महदूत ना रह कर मस्तूरातों तक पहुंच गई है।
तारीख़ ८ दिसम्बर बरोज़ मंगल को कुल हिन्द मजलिसे किसान आंदोलन ने भारत बंद का आगाज़ किया था। जो की बोहोत ही कामयाब रहा था। शाम होते होते हुकूमते हिन्द के तोते मैना बुलबुल सब उड़ गए और होश फ़ाक्ता हो गए तब वज़ीरे दाख़ला ने अपनी हार तस्लीम करते हुए किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से मुजाकेरात करने में ही अपनी मर्दानगी समझी। और शाम आठ बजे बैठक का वक्त तय हुआ। लेकिन यह क्या उस जानवर की दुम की तरह से कभी भारतीय जनखा पार्टी वाले सीधे हुए हैं, जब उसकी दुम सीधी नहीं हुई तो इनका ज़हन कैसे सीधा होगा। यह बीजेपी वाले लातों के भूत हैं बातों से नहीं मानेगे।
हुआ वही जो आज तक बीजेपी की हिटलर हुकूमत की जानिब से होता आया है। हर वक़्त की दुश्वारी और परेशानी। मीटिंग तो हुई लेकिन रही बेनतीजा और हुकूमत ने किसानों की कोई भी मांग को मानने से साफ़ इंकार कर दिया बरक्स, और कृषि कानून वापस लेने साफ़ इंकार कर दिया। हुकूमत की जानिब से कुछ तरमीमों के साथ तहरीरी तजवीज़ देने की बात कही गई है। बरोज़ बुध को हुकूमत तजवीज़ देगी जिसके ऊपर किसान तब्सिरा और बेहेस करेंगें।
वही दूसरी जानिब अब किसान एहतेजाज की गूँज बेरुन मुल्क भी सुनाई देने लगी है। पहले कनाडा उसके बाद इंलैण्ड और अब अमेरिका के जिओ बाइडन ने मोदी इंतेज़ामिया पर लानत भेजी है। अमेरिका के एक राकूने पार्लिअमान ने किसानों के पुर अमन एहतेजाज को बंदूक की गोलिओं, आंसूं गैस और वाटर केनन जैसे जानलेवा हथियारों से कुचलने की मोदी इंतेज़ामिया की हिकमते अमली की मज़म्मत की है।
फिलहाल तना तनी को देखते हुए ऐसा नहीं लगता की अभी हालात जल्द ही क़ाबू में आने वाले हैं। मिडिया के हवाले से खबरे आम तो की जा रही हैं की किसानों के तेवर ठीले पड़े। लेकिन जो जानकारी इस सहाफी के पास आई है उससे ऐसा हरगिज़ नहीं लगता है की किसानों के तेवर और उनके हौसले टूट गए हैं। जो हौसला और अज़्म पहले दिन एक ६० या ७० साल के ज़ाइफ़ किसान में था अपने हक़ को लेने का वही हौसला और जज़्बा आज २० दिन बाद भी मौजूद है। इस दौरान मीडया पर किसानों ने जम कर भड़ास निकाली।
सहाफी जुबेर का नुक़्ता
नाज़रीन भारत और ख़ास मोदी की फजीती हो और पाकिस्तान, मुस्लिम, आई.अस.आई., इस्लामिक स्टेट जैसे नाम ना आएं तो बात कुछ हज़म नहीं होती है। जैसा की किसानों का एहतेजाज कुछ २० दिनों से ज़ाइद चल रहा था और पाकिस्तान का नाम नहीं आया तो यह सहाफी इसी पशो पेश में था की अभी तक इस एहतेजाज के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत कैसे हूकूमते हिन्द को नहीं मिले। और कल परसों से ख़बरें आम होना शुरू हो गई की किसान एहतेजाज के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। वोह किसानों को भड़का कर ख़ालिस्तान तहरीक को तेज़ कर रहा है।
इतना ही नहीं ५ अफ़राद दिल्ली पुलिस की क़ाबिल टीम ने गिरफ्तार भी कर लिए जो किसी ख़ालिस्तान मुस्लिम एकता इदारे से जुड़े हुए थे। वह क्या बात है। दूसरी एक और खबर २००९ से फरार चल रहा सिमी का एक कारकून भी गिरफ्तार किया गया। वह २००९ से फरार चल रहा था और दिल्ली में मुक़ीम था फिर अभी तक दिल्ली पुलिस भारत की तहक़ीक़ाती इदारे एन.आई.ऐ., सी.बी.आई. क्या कर रहे थे। दूसरी बात २०१४ से तो मरकज़ में जनखों की हुकूमत है तो अभी तक क्या सो रहे थे या सही मौक़े का इंतज़ार था। तीसरी बात यह महज़ इत्तिफ़ाक़ है या ज़ाफ़रानी सोची समझी साजिश की जब भी हुकूमत के ऊपर कोई आंच आती है तभी काहे को गड़े हुए मुर्दे उठ कर पड़के जाने लगतें हैं। सिमी का कारकून २००९ से फरार चल रहा था और उनको दिसम्बर २०२० में गिरतार किया जाता है, तो नाहेली निकम्मा पन किसका साबित हो रहा है। एक शख्स जिसने भारत को तोड़ फोड़ डाला और वोह २००९ से दिल्ली में मौजूद था और तुमको तुम्हारी तहक़ीक़ाती इदारों को तुम्हारे वाज़ारतख़ानों को इसकी खबर तक नहीं हुई। तो यह समझा जाए की सिमी का एक अकेला कारकून तुम जैसे ताक़तवर फौज के मालिक, बड़े रकबे वाले मुल्क और ज़हीन तहक़ीक़ाती इदारों से ज़्यादा अक़लमंद साबित हुआ, जो २००९ से तुमको अपनी बनाई हुई सारंगी पर नचा रहा था और तुम नाच रहे थे।
इससे पेश्तर छी न्यूज़ का २ रूपये की चिप वाला सुधीर तिहाड़ी एडिटर इन २ रूपये की चिप इलज़ाम तराशी करता है की किसान एहतेजाज में ख़लिस्तानी मुवाफ़िक़ आ गए हैं। इतना ही नहीं उसको एक ८० साला ज़ाइफ़ा में ख़लिस्तानी दिख गया। वह क्या बात है। यह वही दूरंदेश सज़ाये अफ्ता मुजरिम इन चीफ है जिसको की २००० की नोट में नेनो चिप दिख रही थी, और उसकी तस्दीक़ धंधा करने वाली स्वेता सिंह ने की थी। इसके ऊपर पूरा एक न्यूज़ कवरेज दिया गया था। यह सब गुलाम हैं। इनकी अपनी कोई सोच और हक़ीक़त नहीं हैं। जैसा इन गुलामों को "आश्रम" (मीडया हाउस) में भर दिया जाता है वैसा ही इनको बोलना और करना होता है।
असल ग़द्दार पाकिस्तान, किसान या ख़ालिस्तानी नहीं हैं, बल्कि बीजेपी में छुपे हुए वतन के वोह दुश्मन और ग़द्दार हैं जो मुम्बाई को पाकिस्तान को सौंप चुके हैं। और बीजेपी ऐसे ग़द्दारों पर कोई भी कारवाही करने के बजाये उनको Y+ सिक्योरिटी देती है। में ऐसे ही ग़द्दारों को कहना चाहता हूँ वापिस करो मेरा मुम्बाई महाराष्ट्र को जो तुमने पाक को दे दिया है। नहीं तो कल जब बात बढ़ेगी तो फिर कोई पाकिस्तानी, आई.अस.आई. या इस्लामिक स्टेट का कारकून बरसों पुराना निकल कर आ जाएगा। असल मुजरिम बीजेपी के अंदर ही है उनको गिरफ्तार करो ग़द्दारी ख़तम होगी।
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