Saturday, 29 February 2020

भाइयों और बहनों, मेरे देस के १३० करोड़ देस वासिओं.......

अज़ीज़ नाज़रीन,

मोदी काफी दिनों से बेरुन मुल्क दौरे पर नहीं गया.  शायद ज़लालत और बेइज़्ज़ती की वजह से नहीं गया होगा.  ये बेरुन मुल्क उसको उसके कपड़ों और दांतों पर लगे खून से पहचान जाते होंगे की ये ही है ड्रैकुला, शैतान इंसानी खून और इंसानी लाशों को ख़ाने वाला दरिंदा. बरक्स अब तो जो बेइज़्ज़ती और रूसवाई बेरुन मुल्कों में होती थी अब घर में जो बेरुनी सिफारत ख़ाने हैं उन्होंने मोदी इन्तेज़ामियाँ और हूकूमते हिन्द पर ऐतेराज़ात और तनक़ीद करना शुरू कर दी है.  आप भले ही बोलते रहो मेरा बाप चाय फ़रोख़्त करता था.  अरे तू क्या करता हैं, तू तो लाशें फ़रोख़्त करता है.  मौत का सौदागर.  

हाल ही में दिल्ली हिन्दू दहशतगर्द हमले के बाद फ़्रांस ने सख़्त अलफ़ाज़ में हुकूमते हिन्द के सामने मज़्ज़म्मत पेश की है.  और दहशतगर्दी पर एक क़रारनामे पर दस्तख़त किये हैं.  जिसमे वाज़े अलफ़ाज़ में लिखा गया है दोनों ही हूकूमते किसी भी दहशतगर्दी के अमल को फ़रोग़ नहीं देंगी.  इस क़रार नामे में ये भी कहा गया है दोनों ही मुल्क अपनी ज़मीन को दहशतगर्दी का पनाह गाह नहीं बनने देंगे.  और ना ही दहशतगर्दों के लिए उनका मुल्क मेहफ़ूज़ जन्नत साबित होगा.  दोनों ही मुल्क दहशतगर्दों को फ़राहम की जाने वाली इमदाद पर रोक लगाएंगे, फ्रांस ने कहा की दहशतगर्दों की माशी नॉब्स काट कर उनको पस्त और लाचार करने की ज़रुरत है.  भारत   का नाम ना लेते हुए फ्रांस के सिफारातख़ाने के सरबराह ने कहा क़रारनामे की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने वाले मुल्क के ख़िलाफ़ हमारी हुकूमत अक़वामे मुताहिदा में जायेगी और फटा से उसकी माशियत पर चोट करेगी.

सहाफी जुबेर का हलाते हाजरा पर नुक़्ता ऐ नज़र      

जो जो कहा वो वो हुआ.  हर्फ़ बा हर्फ़ हो रहा है और आगे भी वैसा ही होगा जैसा हमने कहा है या जो हम चाहते हैं.  कितना भी आसमान पर परवाज़ करने की ख्वाहिश रखें ये बीजेपी वाले या ख़ाक की आखिर सतह तक जा कर पोशीदा होने की कोशिश करे लेकिन होगा वही जो में और मेरा खुदा चाहेगा.  हरगिज़ हरगिज़ हरगिज़ किसी भी सूरत से नहीं होगा जो ये संघी दहशतगर्द और बीजेपी वाले चाहते हैं. 

नाज़रीन चंद्रयान III आपको याद होगा.  बोहोत आस्मां तक उछाल मार रहे थे संघी.  लंगूर और लँगूरनियाँ इश्तेआल अंगेज़ी कर रहे थे.  इनको हर मुद्दे में पाकिस्तान नज़र आने लगता है.  इस चंद्रयान को भी ऐ पाकिस्तान की निस्बत से देखने लगे.  अब पाकिस्तान की ख़ैर नहीं.  हम भी ख़ामोश रहे ठीक है इनको इनकी कर लेने दो जब बिक्लुल मंज़िले मक़सूद पर पहुंचने वाले होंगे तब इनके कारवाँ को लूटा जाएगा, तबाह किया जाएगा, बर्बाद किया जाएगा, नेस्त नाबूत किया जाएगा.  और हुआ वही महज़ ५ किलोमीटर की दूरी पर चंद्रयान तबाह हो गया, अंधेरों में ग़र्क़ाब हो गया.  जब संघी बोहोत मायूस हो गए फिर पाकिस्तान को बीच में ले आये पाकिस्तान ने तो उतना भी नहीं किया जितना भारत ने किया.  क्या किया पाकिस्तान ने बताओ.  तो उसके बाद आज तक और नव भारत में कमैंट्स डाला था, पाकिस्तान ने तुमको तुम्हारी औक़ात दिखा दी.  आस्मां में पहुंच कर महज़ ५ किलो मीटर की दूरी से तुमको फिर से ज़मीन पर ला पटका.  अगर इन दोनों न्यूज़ पेपर्स ने वो कमेंट मेहफ़ूज़ कर के रखें होंगे तो एडिटर उसको वापिस से उसका मुताला कर सकतें हैं. 

फिर ग़रीब नवाज़ की एक करामात बताई उनके हयाते ज़िन्दगी में उस दौर के शैतानी मरकज़ और हिन्दू दहशतगर्द पृथ्वी राज चौहान शैतान जगतपाल जोगी को ले कर आया था वो आस्मां तक उड़ा और ग़रीब नवाज़ की खड़ाऊँ उसको ज़मीन पर ला पटकी तो आज के दौर में उन्ही ग़रीब नवाज़ के लिए चंद्रयान क्या बड़ी चीज़ है.   

अज़ीज़ाने मिल्लते इस्लामियां, आप तमाम को किसी भी सूरत से ख़ौफ़ज़दा होने की ज़रुरत नहीं है.  और इन जैसे शिद्दत पसंदों से तो हरगिज़ नहीं.  वही होगा जो अल्लाह चाहेगा.  मेने मेरे कई कमैंट्स और मज़मूनों में इस बात को वाज़े किया है की एक एक बीजेपी, संघ और उनका मुहाफ़िज़ रोड पर काटा जाएगा.  भले ही वो मुसलमान ही क्यों ना हो हर वो मुसलमान मारा जाएगा जो हर मुद्दे पर बीजेपी और संघ की हिमायत करतें हैं.  गुफ्तगू या मुबाहसे में अपनी और अपनी तंज़ीम की गलती और ग़फ़लत को तस्लीम करने के बजाये मिंतक़ लगाते हैं हुज्जत करतें हैं. 

जिसकी शुरूवात हुई.  सोशल मीडिया पर एक पैग़ाम मक़तूल की फोटो के साथ आम हो रहा है.  जिसने हाल ही में दिल्ली दहशतगर्द हमले में जान गवाई है.   इस शख़्स का नाम मोहसिन अली है जो २५/०२/२०२० शाम तक़रीबन ५ बजे नोयडा सेक्टर ५ से अपनी सफ़ेद रग की अल्टो कार जिसका No. UP 37 3691 से वजीराबाद दिल्ली की जानिब रवाना हुआ था.  ये जनरेटर मैकेनिक है ! रेंट पर जनरेटर लगाता है।

बरोज़ २८ तारीख को हिन्द ख़बरनामे के पेज पर इनकी गुमशुदगी की पोस्ट की गई थी। और आज ख़ूंरेज़ी में उसकी जली हुई कार मिली और GTB हॉस्पिटल में खून से सनी हुई लाश।
२६-२७ साल उम्र थी उसकी ।
कुछ वक्त हुआ था शादी को ।

उसे बुरी तरह पीटा गया था सर पर बहुत चोट है और तमाम बदन पर डंडे के निशान।

हर वो मुसलमान जो बीजेपी में था २०१४ से पेश्तर और उसके बाद अगर ये सोच रहा हे कि वो बच जाएगा तो वो मोहसिन अली का हश्र देख कर इबरत ले सकते हैं.   मोहसिन अली बीजेपी का अक़लियतों के मोर्चे का नायाब सदर था लेकिन अपनी जान नही बचा पाया।
भारत के बेहद बेहद सख़्त दिन आने वाले हैं.  संघी, शिद्दत पसंद और बीजेपी वाले पुर एतेमाद ना रहें जो हम देख सकतें है वो ऐ संघी नहीं देख सकते.  लंगूर और लँगूरनिओं ने मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ ज़हर के बीज बोये थे, हर मसले पर हिन्दू मुस्लिम पाकिस्तान हिंदुस्तान.  तो अब वही होगा जो ऐ लोग चाहते थे लेकिन नतीजा वो निकलेगा जो हम चाहते हैं. 
इस जंग में वही बचेगा जो अल्लाह के ख़ौफ़ और जलाल से लरज़ जाएगा और अपने गुनाहों पर बे पनाह अश्क बार होगा. और अल्लाह से  पनाह तलब करेगा.  गिरवज़ारी करेगा, मिन्नतें करेगा, माफ़ी मागेगा.  इन लोगों में सिर्फ वही होंगे जिनको हिदायत नसीब होगी. जो गुमराह हो चुके हैं वो सब हलाक हो जायेगे.  जब मज़ीद बूरा वक़्त आएगा बीजेपी के इन नस्ली जानवर मुसलमानों की अक़ल और ज़हानत पर क़ैद लगा दी जायेगी.  उनको हक़ क्या है और फरेब क्या है इसमें फ़र्क़ ही नहीं महसूस होगा.   फिर ज़वाल आएगा, और आएगा मौत का सैलाब.  हर जानिब इंसानी सर होंगे.  एक लाख नहीं दो लाख नहीं करोड़ों में लोग मारे जायेगे. 
जिनको तू कपड़ों से पहचान जाता था फिर उन्ही कपड़ों की वजह से तू और तेरे तंज़ीम के लोग मारे जायेगे.  जो मरने आया है वो कैसे बच सकता है.  लंगूर और लँगूरनियाँ ना चाहते हुए भी उस जगह पहुंच जायेगे जहाँ मौत उनका पहले से इंतज़ार कर रही होगी.  कुछ लंगूर हठधर्मी दिखाएंगे जो मारे जायेगे कुछ नर्म हो कर अपनी ग़लती मान लेंगे और हक़ पर आ जायेगे वो बच जायेगे.
तीन लँगूरनिओं की अस्मतदरी की जायेगी.  बरहना मजमूई अस्मत होगी.  एक लँगूरनी बच जायेगी.   
इस तमाम गहमा गहमी में मेरे अज़ीज़ सहाफी पंडित जी जो हक़ पर होंगे और अपने मज़हब की मश्क भी बा कसरत करतें होंगे वो एक सतून के जैसे क़ायम रहेंगे.  और हिन्दू नस्ल फिर इन ही जैसे आला किरदार बा विक़ार लोगों से चलेगी.  राम के नाम पर जिन लोगों ने ग़दर मचाया है.  जय जय श्री..... का नारा लगा कर बे गुनाह अवाम को काटा है उनकी इबादत गाहों को मिस्मार किया है जलाया है उसका ज़वाल तो आएगा.  और ज़रूर आएगा.  और खुद राम लायेगें ऐ ज़वाल.  क्योंकि जिन लोगों ने गुनाहे अज़ीम किया वो सब रावण की औलादों से हैं.  और राम का फलसफा रहा है हक़ के साथ अपने हक़ की लड़ाई करना.  फिर इन जिसे झूठे और फरेबी राम भक्तों के साथ राम कैसे रहे सकतें हैं.  
लंगूर लँगूरनिओं के ताहिर हुसैन को मुजरिम क़रार देने पर बूल डॉग का भोकना याद आ गया. 
भाइयों और बहनों ऐ जो बे गुनाह पकडे जा रहें हैं, और गुनहगार छोड़े जा रहे हैं इनके कपड़ों की वजह से आप इनकी पहचान कर सकतें हैं.

Thursday, 27 February 2020

मुबारक ताहिर आप दुसरे एहसान ना बन सके.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था हम दिल्ली में अब दूसरा १९८४ नहीं बनने देंगे.  ख़ैर कोर्ट के नज़ारिये को तो पुलिस और आतंकिओं ने अपनी शर्मगाह से निकलते हुए पानी में उड़ा दिया.  लेकिन ताहिर जिनके पीछे आज लंगूर और लँगूरनिया फ़िज़ूल पड़े हैं में उनसे कहना चाहता हूँ मुबारक आप दुसरे एहसान जाफरी नहीं बने.  ये मुबारक बाद आपको सिर्फ सहाफी जुबेर की जानिब से है और तमाम १५ करोड़ मुस्लिम अवाम की जानिब से नहीं है.  क्या पता कोई जुम्मन मियां उठ के बोल दे तुम्हारे १५ करोड़ मुसलमानों मे, में नहीं शामिल हूँ.  दिल्ली को जो सज़ा मिली है वो इन जुम्मन मियाओं की वजह से ही मिली है.  हर मसले पर जो अपनी एक टांग ले कर भागते हैं उसकी सज़ा है.  घरों से निकाल निकाल कर काट डाला.

दिल्ली हिन्दू दहशतगर्द हमले की कालिख़ जैसे जैसे साफ़ हो रही है बे हद डरावनी तस्वीरें मज़ीद सामने आ रही हैं.  किस तरह से मस्जिद के इमाम साहब का चेहरा पूरी तरह से जल चूका है.  किस तरह से खूनम झार मुस्लिम शख़्स बरहना अपनी जान बचा के भागते हुए देखा जा सकता है.   इस दंगे मे ३ मस्जिदे २ मज़ार और एक मदरसा पूरी तरह जला के राख कर दिया गया.  लेकिन मज़े की बात ये रही की चाँद पुर ७०% मुस्लिम आबादी और महज़ ५% ब्राह्मण बाक़ी दीगर अवाम लेकिन एक भी मौत किसी भी हिन्दू भाई की नहीं हुई और जो तीन मंदिरें थी वो भी मेहफ़ूज़ हैं.  अभी तक किसी भी मंदिर को तोड़ने या किसी भी हिन्दू इबादत गाह को इज़ा या नुकसान पहुंचाने की कोई ख़बर नहीं है.

ख़ैर जो होना था सो तो हो गया जो दहशतगर्द सरग़ना कपिल मिश्रा चाहता था वो तो हो गया.  अब उसके महज़ निशान बाक़ी रहेंगे.  जो कभी नहीं मिटेंगे और जब जब अवाम उनको देखेगा अगली पारी खेलेगा.  इस सब गहमा गहमी में ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ कहाँ से एक मुस्लिम कॉर्पोरेटर को पकड़ लाये की उन्होंने दंगों में अपने घर पर पथ्तर और बम जमा किये थे.  अव्वलन तो ये सब बकवास है और झूट है फरेब है सिर्फ और सिर्फ हिन्दू दहशत को पोशीदा रखने की एक कावायत और कपिल मिश्रा जैसे आतंकी को बचाने की साजिश. 

दूसरी बात ताहिर हुसैन ने अगर कुछ भी अपनी हिफाज़त के लिहाज़ से किया है तो बिलकुल सही है दुरुस्त है. में ताईद करता हूँ उनके इस जज़्बे की और अमल की, उनका अमल बाइसे फख्र है ना की बाइसे मज़्ज़म्मत.  लंगूर क्या चाहते थे की वो दुसरे एहसान जाफरी बन जाते और उनकी बेवा भारत की अंधी अदालत के चक्कर पे चक्कर लगाती रहती.  जैसे की आज बुढ़ापे में एहसान की बेवा अदालत के चक्कर लगा लगा कर मायूस हो गई लेकिन इन्साफ नहीं मिला. 

अगर ये दंगा होता और पुलिस का मुनसेफाना किरदार होता सभी फ़रीक़ों के एक नज़र से देख कर दंगा रोकने की हिकमत होती तो ताहिर का अमल मज़्ज़मत के काबिल होता.  लेकिन ये ना तो ये दंगा था और ना ही वो पुलिस जो अवाम की हिफाज़त करती है. पुलिस तो खुद ही दंगा कर रही थी, मुस्लिम अवाम की दुकाने तोड़ रही थी.  दहशतगर्दों के साथ गोलिया चला रही थी.  बे गुनाह मुसलमानों को घरों से निकाल कर रोड पर गन्दी गन्दी गालियां दे कर पीट पीट के शहीद कर रही थी.  इतना ही नहीं ज़ख़्मियों को हॉस्पिटल नहीं जाने दे रही थी. मर जाने दो इनको इनके लिए इस देश में कोई जगह नहीं है, ऐसे तास्सुरात.  पुलिस का काम होता है अवाम को तहफ़्फ़ुज़ देना उनकी जान माल की हिफाज़त करना.  लेकिन जब पुलिस एक दहशतगर्द की तरह काम करना शुरू कर दे, पुलिस जब डाकू की तरह काम करना शुरू कर दे पुलिस जब शैतानों दरिंदों की तरह काम करना शुरू कर दे, बे गुनाहों को सिर्फ मज़हब की बुनयाद पर जब्र करना शुरू कर दे खून करना शुरू कर दे तो उसको पुलिस तसुव्वर करना फ़िज़ूल है अब ऐसे दरिंदे, शैतान, ज़ालिम और दहशतगर्द की जो सजा है वही पुलिस को भी देना चाहिए मतलब सज़ा ये मौत.

फिर जिस दहशतगर्द कपिल मिश्रा ने तमाम दंगे की शुरूवात की थी जिसकी संगे बुनयाद उसने इंतेखाब से क़ब्ल ही रख दी थी और अपनी खुनी दरिंदा सिफ़त सोच को ज़ाहिर कर दिया था जब उसने कनॉट पैलेस पर कम से कम ५ से १० हज़ार वाली भारी भरकम हुजूम को उकसाने वाला नारा दिया था.  उसके बाद गोलियां भी चली.  फिर दंगा हो गया.  अब उसके बाद भी संघी और उसकी मुहाफ़िज़ कपिल मिश्र के मुवाफ़ेक़त मे बयान दे रहे हैं.  बोल रहे हैं हमें फख्र है कपिल तुम पर मुल्लो को अच्छा सबक़ सिखाया. 

जब आतंकिओं की ये सोच है तो हमारी सोच भी फिर वैसी है बनेगी.  बात ये है की ऐसे तमाम हालात किस की पैदा करदा है.  मोदी और बीजेपी के.  क्या वजह है की आज अवाम का ख़ास मुस्लिम अवाम का पुलिस, क़ानून, फौज पर से यक़ीन उठता जा रहा है. उनकी सुप्रीम कोर्ट पर एतेमाद की धज्जियाँ किस ने उड़ाई.  क़ानून पर उनके यक़ीन का क़त्ल किस ने किया खुद सुप्रीम कोर्ट ने.  उसके ऊपर पुलिस का एक तरफ़ा हमला और कारवाही तो ये दिन अभी आगे मज़ीद देखने को मिलेंगे. 

अगर ताहिर ने कुछ भी अपनी हिफाज़त के लिए किया है तो कुछ भी गलत नहीं है.  इससे पहले की अवाम उनको हलाक कर देता और पुलिस खड़ी खड़ी तमाशबीन बनी रहती कम से कम आज वो ज़िंदा तो हैं.  उन्होंने ना सिर्फ अपनी बल्कि अपने अहले ख़ाना की दरिंदों से दहशतगर्दों से खाकी आतंकिओं (पुलिस) से जान बचाई है.  एहसान जाफरी को खूब एतेमाद था मोदी पर क्या हुआ.  फोन पर फोन लगाते रहे. अस.ओ.अस. भेजते रहे लेकिन ना सिर्फ उनको बल्कि उनके साथ ९७ लोगों को ज़िंदा जला दिया.  इतना ही नहीं पहले उनके हाथ पैर काटे फिर उनकी दौलत लूटी बिल आखिर आतिशे नार कर दिया.  

केजरीवाल अपना पड़ला झाड़ रहे हैं और बोल रहे हैं ताहिर को दुगुनी सज़ा दीजिये बिल फ़र्ज़ अगर मुजरिम आप ही पाए गए तो क्या सज़ा तज़वीज़ करते हो अपने लिए. 

Journalist Zuber 

France strict on Terrorism. Delhi Hindu Terror Attack.

Wednesday, 26 February 2020

हमको मालूम है भारत में क़ानून की हक़ीक़त .......

अज़ीज़ नाज़रीन,

 see the link in English

SoS call. Pakistan PM Imran Khan: Save our soul 

Pakistan Prime Minister Mr. Imran Khan Save our Soul (SoS)

दिल्ली में जो कुछ भी बरहना रक्स हिन्दू दहशतगर्दों ने किया है वो सब उस मश्क़, आलूद और ज़हर का नतीजा है जो मुतवातिर उनके ज़ेहनों में वतन परस्ती के फरेब के नाम पर भरा जा रहा था.  नाज़रीन यहाँ ये बात वाज़े रहे की अभी तक जितने भी गद्दारी, बगावत या भारत की एहम ख़ुफ़िया, फौजी या इन्तेज़ामियाँ जानकारी पाकिस्तान को मोहिय्या करवाते हुए पकडे गए हैं वो सभी हिन्दू आला ज़ात मिश्रा, चौबे, चतुर्वेदी शिद्दत पसंद और संघ या बीजेपी से ताल्लुक़ रखने वाले ही हैं.  हाल ही में ट्रम्प के दौरे से महज़ दो दिन क़ब्ल कुछ १० आला ज़ात के हिन्दू पाकिस्तान को एहम जानकारी फ़राहम करने के इलज़ाम में पकडे गए हैं.  लेकिन वो खबर ऐसी पोशीदा कर दी गई जैसे कुछ हुआ ही नहीं.  बरक्स अगर कोई जुम्मन मियां पकड़ा जाता तो उसको पीट पीट के पुलिस नहीं बल्कि हिन्दू शिद्दत पसंद ही हलाक कर डालते.  उसके बाद उन हिन्दू शिद्दत पसंदों के मुवाफ़ेक़त में संघी, बीजेपी और शिद्दत पसंदों की तैयार करदा सोशल मिडिया की फौज रहती जो गद्दारों को मारने जैसे अमल पर हौसला अफ़ज़ाई करते हुए उनके मुवाफ़ेक़त में एक मोहीम तैयार करती.  
नाज़रीन इन दहशतगर्दों को सभी मुसलमान गद्दार नज़र आतें हैं.  वो भी जो हुकूमत के सियाह क़ानून के खिलाफ आवाज़ उठाये और वो भी जो हुकूमत के किसी भी ना ज़ेबा फैसले पर तब्सिरा चाहे.  ये सभी चीज़ें तो दस्तूर और जमुहरियत का एक एहम हिस्सा हैं.  हुकूमत के किसी भी ना ज़ेबा अमल पर एहतेजाज करना कहाँ से कहाँ तक गद्दारी हो जाती है. 

दिल्ली की फ़िज़ा को गर्द ग़ुबार के आलूद और खून से सुर्ख़ करने में ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और लँगूरनियों का बड़ा किरदार रहा है.  उन्होंने ही शाहीन बाग़ की मस्तूरातों के खिलाफ इश्तेयाल अंगेज़ी भरी खबरे शाया करना शुरू की थी.  ताहम आज ३ महीनों से ज़ाइद मस्तूरातें धरने में शामिल थी लेकिन एक भी दंगा फसाद या क़त्ले आम नहीं हुआ.  और २ दिन क़ब्ल हिन्दू दहशतगर्द और जंग में हारा हुआ फौजी आया और उसने मस्तूरातों के खिलाफ ज़हर अंगेशी कर के मसले को हिन्दू मुस्लिम रंग दे दिया और दंगा भड़का दिया जिसकी  वजह से १३ मुस्लिम शहीद हुए.  
दिल्ली के दहशतगर्दाना हमले को असदुद्दीन ने फ़िरक़ावाराना फ़सादा मानने से इंकार करते हुए इसको हुकूमत के ज़ेरे क़यादत हमला क़रार दिया.  जो बिलकुल दर हक़ीक़त है उसपे तास्सुरात ऐसे जिससे इन शिद्दत पसंदों में पेवस्त आलूद और ज़हर की अक्सरियत का अंदाजा हो जाता है.

John3750 comments4422 votes1 follower
John18h
अससुद्दीन, हरा मज़ादे, अब पुलिस उठवायेगी तेरे कोठेवालिओं को. बेहतर है की तू अपने भाई और लावारिस पठान के साथ कहीं छुप जा.

manish agrawal2537 comments10 votes0 followers
जैसे ही आज डोनाल्ड ट्रम्प का हवाई जहाज एयरफोर्स-१ , हमारे रनवे से अमेरिका के लिए परवाज़ करे,  दिल्ली पुलिस को चाहिए किमिनिट भी रुके बग़ैर दंगाइयों पर crackdown शुरू करे !

शाहीन बाग़ की मस्तूरातों के लिए महज़ एक दो शिद्दत पसंद काफिरों की ज़ेहनियत एक जैसी पस्त और अदना नहीं है बरक्स सभी दहशतगर्दों, शिद्दतपसंदों, संघी, बीजेपी वाले और लंगूर-लँगूरनियों की ज़ेहनियत एक जैसी है.  दूसरी बात जहाँ तक मुस्लिम सियासत का सवाल है सभी सियासतदां एक अहमक़ के जैसे क़ानून, सुप्रीम कोर्ट, ऐवान, दस्तूर, हुकूमत, पुलिस, फौज से मदद की बात करतें हैं. 

मेरा उन सभी सियासतदाओं ख़ास असदुद्दीन ओवेसी जैसे आला तालीमी आफ़ता बेरिस्टर से सवाल है जब हुकूमत ने आपको पूरी तरह से नज़र अंदाज़ कर दिया है.  जब हुकूमत ने आपके क़त्ल के पूरे साज सामान तैयार कर लिए हैं फिर भी अगर आप हुकूमत से किसी मदद की उम्मीद रख रहे हो तो ये आपकी नाहेली है.  एक तरफ तो आप हुकूमत की ज़ेरे क़यादत दहशत हुई इस फलसफे पर ज़ोर डाल रहे हो दूसरी जानिब आप ये बयान दे कर की दिल्ली को फौज के हवाले कर दो, सेना पर एतेमाद दिखा रहे हो.    ये कैसे मुमकिन हैं अगर हुकूमत ने दहशत फैलाई और वो आपका क़त्ले आम करना चाहती है तो कैसे वो आपकी मदद करेगी. 
आपको तो खुल के अब पाकिस्तान और दीगर मुस्लिम मुमालिकों से मदद तलब करना चाहिए.  जंग का आगाज़ हो चूका है और अगर आप अब भी मोदी हुकूमत से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हो तो में समझता हूँ की आप १९७१ में जिस तरह से अमेरिका की फरेब पर पाकिस्तान पुर एतेमाद था की इमदाद आएगी वैसा ही कर रहे हो.  फिर जिस हिसाब से ज़ुल्म, जब्र के ख़िलाफ़ मुजीबुर्रहमान ने भारत से मदद तलब की थी उसी तर्ज़ पर पाकिस्तान से आज के हालात में मदद तलब करने में कोई शर्म और हया नहीं होनी चाहिए.   शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम के ना ज़ेबा तास्सुरात और असदुद्दीन के बयान के बाद एक ट्वीट कर चूका हूँ.

जैसे ही ट्रम्प अमेरिकन एयर फ़ोर्स से उड़ान भरें की हमको एक मिनिट भी नहीं रूकना चाहिए पाकिस्तान के साथ मिल के जंग शुरू कर देना चाहिए. ओवेसी जी क्या आपको पता है जिस पाकिस्तान ज़िंदाबाद को आप पानी पी पी के कोसते हो और हिंदुस्तान मुर्दाबाद की क़ानून, पुलिस, संसद की दुहाई देते रहते हो तुम्हारे और तुम्हारी क़ौम पर बूरा वक़्त पड़ने पर पाकिस्तान ज़िंदाबाद ही साथ आता है. हिंदुस्तान मुर्दाबाद और वहां के काफिर कट्टरपंथी आतंकिओं के ऊपर भरोसा कर के तुम खुद अपनी क़ौम को मौत की आगोश में धकेल रहे हो. इमरान खान ने लीचिंग पर थोड़ा सा बयान क्या दिया था की तुमको अंगार लग गई थी. बोलते थे इमरान खान अपना देश सम्भालो हम हिन्दुस्तान के M0SLMAN सरकार से अपना हक़ लेना जानते हैं. चाहे वो मोदी जैसा सख्त मिजाज़ ही क्यों हो. हमारे पास संविधान है क़ानून है सुप्रीम कोर्ट है. क्या हुआ सब ने मिल कर घुसा दिया अंदर.
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जब हुकूमत आपसे आपके जीने का हक़ छीन ले तो आपको ज़िंदा रहने के लिए हर किस्म की जद्दो जेहद करने का हक़ है.  किसी भी दरवाज़े को खटखटाने का हक़ है.  ये बात तो वाज़े हो चुकी है की, आलूद की अक्सरियत हिन्दुस्तान में इस क़दर बढ़ गई है की अब आपको पाकिस्तान पर ही एतेमाद दिखाना पड़ेगा.  वैसे भी मारे जा रहे हो मदद मांग के भी अगर मारे जाते हो तो कोई हर्ज नहीं.  फिर अगर मदद मांगने पर ज़िंदा रहे तो हो सकता है आप अपने मक़सद में ना सिर्फ कामयाब हो जावो बल्कि आती नस्ले आपको दुआ दें. 

जो अवाम आज तख़्तियां ले कर हिन्दू मुस्लिम एकता ज़िंदाबाद, हम सब एक हैं. जैसे नारे लगा रहे हैं वो सब सिर्फ और सिर्फ फरेब है. हो सकता है वो संघी और दहशतगर्दों की चाल हो कहीं पाकिस्तान के साथ मिल कर मुस्लिम जंग का आगाज़ ना कर दें.  दूसरी वजह इस बटवारे की  मोहीम को कमज़ोर करने की कवायत.  अब अगर सेक्युलर हिन्दू बचे हैं तो वो सिर्फ १००० में से एक या दो ही होंगे.  यहाँ पर में उस स्वाति खन्ना नाम की ख़ातून का नाम लेना चाहूंगा जिनको दिल की गहराइयों से सलाम करता हूँ. ऐसे सच्चे सेक्युलर हिन्दू आज कल सिर्फ ना के बराबर ही बचे होंगे.  अब अगर जो कोई भी हिन्दू मुस्लिम एकता की बात करता है उसमे उसका कुछ तो जाती मफ़ात पोशीदा होता है.  क्योंकि जिस तरह के तास्सुरात और नज़ारियात आतें हैं मुसलमानों के ख़िलाफ़ उससे ज़ाहिर हो जाता है की बरियानी अब पक चुकी है.

में सहाफी जुबेर अपनी तंज़ीम की जानिब से पाकिस्तान के वज़ीरे अज़ाम इमरान ख़ान से मदद की दर्ख़्वास्त करता हूँ.  में मेरी तंज़ीम की जानिब से अस..अस.  (सेव अवर सोल) भेज रहा हूँ.  इस अपील में मेने तमाम भारत के मुस्लिम अवाम को शामिल नहीं किया है.  और ना ही मेरे अपने एहले ख़ाना को शरीक किया है.  हो सकता है कोई जुम्मन मियाँ उठ कर बोल दे सून ले जुबेर तुम्हारे १५ करोड़ मुसलमानों की मदद की दरख़ास्त में शामिल नहीं हूँ.  या हो सकता है कोई जावेद अख्तर जैसा उठ कर बोल दे की हमको हमारे वज़ीरे अज़ाम मोदी पर यक़ीन हैं हम पाकिस्तान से मदद नहीं लेंगे. 

जिन मुसलमानों को अभी तक मोदी के फरेब पर यकीन है की उनके साथ किसी किस्म का धोखा नहीं हो रहा है और उनके क़त्ल के पूरे साज सामन तैयार कर के नहीं रखे गए हैं.  वो मोदी पर यकीन करें, भारत के क़ानून, सुप्रीम कोर्ट, पुलिस, हुकूमत, इंतेज़ामिया, फौज पर यकीन करें.  हमें तो वज़ीरे अज़ाम इमरान ख़ान पर ज़्यादा एतेमाद है बजाये मोदी के.  यहाँ तक की में दावे के साथ कह सकता हूँ, अगर इमरान ख़ान सच्चे मुस्लिम होंगे और क़ुरान, हदीस, इस्लाम के फलसफे को पूरी तरह से अमल करतें होंगे तो ना सिर्फ मुस्लिम बल्कि कोई भी गैर मुस्लिम हिन्दू, सिख, जैन, बोध, खिच्चन, पारसी सभी मेहफ़ूज़ रह सकतें हैं.  जो मोदी हुकूमत में अपने आपको दहशत के ज़ेरे साये पाते हैं.

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...