Thursday, 29 February 2024

मुजस्समा परस्तिश (मूर्ती पूजा) पर पाबंदी होना चाहिए।

मेरी रसाई सिर्फ़ माशूक के क़दमों तक ही रही,

उनके रुख़सार को देखने की कहाँ हैसियत मेरी।

सहाफ़ी ज़ुबेर

अज़ीज़ नाज़रीन, 

भारत में तमाम मीडिया सिर्फ़ और सिर्फ़ मुसलमान और इस्लाम पर हमला कर के अपने सियासी आक़ाओं को उसका फ़ायदा पहुंचाने की हिकमत करतें हैं।  सौरभ नामी लंगूर संघी दहशत से मुत्तासिर है। इस मरदूत ने साधु के साथ मिल कर हाल ही के एक मुबाहिसे में किसान एहतेजाज को योगी से बात करते हुए मुस्लिम बनाम हुकूमत करने की नाकाम कोशिश की थी।  कियोंके अगर किसान एहतेजाज मुस्लिम बनाम हुकूमत हो गया तो किसानों को बख़्श कर बेगुनाह मुस्लिम अवाम को धना धन गोलियां मार कर अपनी भड़ास निकालेेंगे।  मुसलमानों को झूठे इल्ज़ाम मै घरों से निकाल कर जेल करेगें उनके घरों को इल्ज़ाम लगा कर तोड़ेगे।  ऐसे ही लँगूर सिस्टम और हुकूमत मे ज़हर भरतें हैं।

जब लंगूर मुसलमानों के खिलाफ हुकूमत के ज़ेहन में ज़हर भर सकतें हैं और उनकी बर्बादी पर जश्न बनातें हैं तो में बहैसियत सहाफ़ी यह कहना चाहता हूँ जो तंज़ीम यह वादा करती है की अगर हम जीत कर आये तो मूर्ती पूजा पर पाबन्दी लगा देंगें तो हमारा वोट उसको मिलेगा।     

वैसे भी सनातन मज़हब में कहीं भी मूर्ती पूजा का ज़िक्र नहीं है।  वेद, उपनिषद, गुरू ग्रन्थ साहिब कही भी मूर्ती पूजा का कोई ज़िक्र नहीं मिलता है।  फिर यह कैसे मुमकिन है एक पत्थर का मुजस्समे में "प्राण प्रतिष्ठा" कर के वोह ज़िंदा हो जाए और इंसान के सुख दुःख की बात जान ले और उसका मुदावा भी करे।

२२ जनवरी से क़ब्ल जिस हिसाब से लंगूर लँगूरनियों ने "प्राण प्रतिष्ठा" पर बवाल काटा था तो राम की मूर्ती के अंदर बिला वास्ता प्राण फूंक कर बेक डोर एंट्री की क्या ज़रुरत थी।  बराहे रास्त उसी राम को ज़िंदा कर देना था।  

जब २२ जनवरी का मीडिया में बोहोत हंगामा हो रहा था एक मुबाहिसे में मेने यही बात कही थी।  एक मूर्ती में प्राण डालने की बात कर रहे हो में चुनौती देता हूँ प्राण प्रतिष्ठा वाले रोज़ जितने हिन्दू हादसों में, खुदकशी कर के, दिल के दौरे से या किसी और वजह से मरेगें उन सब को नहीं सिर्फ़ एक को ज़िंदा कर दो तो में मान जाऊंगा।  उस कमेंट को Standing Committee में काफ़ी सरहाना मिली और बोहोत मवाफ़िक़ नतीजे मिले उसके बाद कई एक हस्तियों ने ऐसे सवाल उठाये। 

मौत एक ऐसी सच्चाई है जिस पर हर इंसान का यक़ीन है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई यहूदी यहाँ तक जो ख़ुदा को नहीं मानते वोह भी मौत की हक़ीक़त पर यक़ीन रखतें हैं।  एक दिन तो हमको भी मरना है।  मौत पर यक़ीन हैं लेकिन ख़ुदा पर नहीं। 

मेरी सियासी तंज़ीमों से यही गुज़ारिश है।  इस्लामिक शरीयत में तो ख़ूब मुदाख़ेलत कर दी।  ट्रिपल तलाक़, हिजाब, मस्जिद, नमाज़, अज़ान और इन मुद्दों पर ऐसे ऐसे मुनाफ़िक़ आ कर इल्म देना शुरू कर देते थे जिनको इस्लामिक जुरिसपिडेन्स का बुनयादी इल्म भी नहीं था।  मज़े की बात ऐसे जाहिलों हूकूमती ग़ुलामो को इस्लामिक दुश्मन मुनाफ़िक़ों को मीडिया के लोग इस्लामिक स्कॉलर्स बोलते थे।  जहाँ शरीयत पर इस्लाम पर कोई भी बात होती सभी ज्ञान पेलने लगते थे चलो अब बनाओ मूर्ती पूजा की पाबन्दी का क़ानून।

हिजाब, ट्रिपल तलाक़ पर ऐसी ऐसी ओबाश बदकार ख़ातूने ज्ञान देने लगी जो अवामी हलके में बरहना नंगी पूतंगी घूमना पसंद करती हैं।  हिजाब पर बेन के पीछे उनकी भी अपनी वजह है।  दुम कटी कुतिया चाहती है सबकी दुम कट जाए ताके वोह जब नंगी होगी तो अलग नहीं दिखेगी। 

एक आम राये है इस्लाम में औरतों को आज़ादी नहीं है।  में मीडिया और समाजी तंज़ीमों के नुमाइंदों को चुनौती देता हूँ मेरी एहलिया से आ कर जब चाहें पूछ लें की उसको कितनी आज़ादी है।  कियोंके में इस्लामिक हिसाब से जीता हूँ और औरत के हुक़ूक़ क़ुरान हदीस के हिसाब से जानता हूँ।  औरत ग़ुलाम नहीं है बल्कि मोहसीना है।  दोस्त साथी। 

जो लोग औरत को ग़ुलाम समझ कर हर बात पर उसके हाकिम बनते हैं तो उसमे इस्लामिक तालीम की कोई गलती नहीं है बल्कि उस शख्स की लाइल्मी है। 

मूर्ती पूजा पर पाबन्दी के क़ानून में जो मुनाफ़िक़ मुस्लिम नाम रख कर हिन्दुआना रस्म इख़्तेयार करते हैं हिजाब पहन कर ऊल जलूल बयान बाज़ी करते हैं।  हिन्दू से शादी यह बोल कर करतें हैं की हमें इस्लाम की क़ैद में नहीं रहना है एक घुटन होती थी अब आज़ाद हैं ऐसों के खिलाफ जो तंज़ीम सख़्त क़ानून बनाने का वादा करेगी हमारा वोट उसको मिलेगा।   उस क़ानून में गिरफ्तारी से ले कर मौत की सज़ा तक होना चाहिए।  अगर फ़रार है तो उसके असासे ज़प्त करना चाहिए।  उसके ऊपर इकनोमिक एम्बार्गो लगाना चाहिए।  फ़िर देखतें हैं कैसे कोई मुनाफ़िक़ बड़ी बड़ी बातें करता है में मुल्लों के किसी फ़तवे से नहीं डरती या डरता। 

इसलिए नहीं की उन्होंने इस्लामिक शरीयत के ख़िलाफ़ काम किया बल्कि इसलिए की उन्होंने फ़रेब किया धोखा दिया, थे हिन्दू ही लेकिन नाम मुस्लिम रख कर तमाम भारत और आलम के अवाम को गुमराह किया।  अगर कोई मुस्लिम हिन्दू मज़हब अपनाता है तो कोई क़ैद नहीं है।  

और ऐसे तमाम मामले २०१४ के बाद से लेना होंगे जो मुस्लिम नाम से इस्लाम में बदगुमानी पैदा करते थे सब की गिरफ्तारी होना चाहिए।  सऊदी अरब में कई ऐसे मुनाफ़िक़ पकड़े गए हैं जो थे हिन्दू लेकिन मुस्लिम नाम से दाढ़ी टोपी के साथ गलत हदीस बयान करते थे मोदी संघ राम मंदिर पर मुवाफ़िक़ बयान देतें थे।  अभी हाल ही में जनवरी को ऐसा ही एक मुनाफ़िक़ गिरफ्तार हुआ उसका सर क़लम करने का हुकुम नाफ़िज़ हो चूका है उसकी गिरफ्तारी पर संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू यहाँ तक की वज़ीर ऐ खारजा तक को अंगार लगी।  रवी शंकर तक का बयान आया मतलब इस बदगुमानी और मुनाफ़ेक़त के तार भारत की सरकार से जुड़े हुए हैं। 

इस क़ानून से हिन्दू, सिख, क्रिस्टी और दलित बहार रखना चाहिए वोह हिन्दू मज़हब के ख़िलाफ़ कुछ भी बोल सकतें हैं कियोंके भारत एक हिन्दू मुल्क है।  लेकिन जहाँ कोई मुस्लिम इस्लाम और उसके क़ानूनों के ख़िलाफ़ बोले शरीयत के ख़िलाफ़ बयान दे फौरन उसकी गिरफ्तारी होना चाहिए।  उसके मज़हब की पूरी तफ़्तीश उसकी पिछली पुश्तों के बारे में जानकारी हासिल करना चाहिए।  अगर वोह सच्चा मुस्लिम है तो उसको छोड़ देना चाहिए कियोंके अब उसका मामला उलेमा ते करेंगे की वोह इस्लाम से खारिज है या अभी भी वोह मोमीन है।  लेकिन अगर गिरफ्तार किया हुआ बन्दा या बंदी अपने बाप दादा और अहले खाना की पूरी जानकारी नहीं दे पाई या पाया मतलब वोह हिन्दू है और मुस्लिम नाम से बदगुमानी फैला रहा है तो वोह अब सज़ा का मुस्तहिक़ होगा। 

फ़िर देखतें हैं यह बरसाती मेंढक कितने दिन ज़िंदा रहतें हैं।  जो सिर्फ़ बरसात में ही आ कर टर टर करतें हैं।  २०१४ या उससे पहले के ऐसे तमाम मामलों को लेने की हिकमत यह है की इन्होने जुर्म तो कर दिया।  इस्लाम और मुसलमानों की इज्तेमाई अस्मतदरी कर दी अब इनको इनके जुर्म की सज़ा मिलनी चाहिए।  अगर एक ज़ानी, ख़ूनी, डाकू जुर्म कर के फ़रार हो जाए तो उसका जुर्म माफ़ नहीं होता है।  कियोंके वोह जुर्म कर चूका जब मिलेगा उसको सज़ा होगी।  उसी हिसाब से जिस हिन्दू ने मुस्लिम नाम रख कर शरीयत के ख़िलाफ़ बयान बाज़ी की उसकी गिरफ्तारी होना चाहिए।  कियोंके उसने इस्लाम की इज्तेमाई अस्मतदारी की है और तमाम आलम के मुस्लिम अवाम को गुमराह किया है। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Wednesday, 28 February 2024

गज़वा ए हिन्द के फ़तवे पर भगवा से ख़ौफ़ज़दा हुआ देवबंद

अज़ीज़ नाज़रीन,

गज़वा ए हिन्द होगा और ज़रूर होगा और हिन्द बनेगा इस्लामिक रियासत।  जितना ज़ुल्म शिद्दत बर्बरियत नाइंसाफी करनी थी इन काफ़िर ज़ालिम हुकुमरानों ने कर ली अब बदले की बारी है।  एक एक ज़ालिम का हिसाब अगर वोह नहीं दे सका तो उसकी नस्लों से लिया जाएगा। 

अल्लाह, नबी, क़ुरान, इस्लाम, मुसलमान सब के ऊपर इन काफिरों ने बेहद अदना दर्जे की बातें कहीं हैं।मेरे नबी का हर अमल हक़ था है और रहेगा।  जब नबी किसी जंग में सिपाहा सालार होंगे तो वोह जंग है कोई जो जीत सके।

मोदी, योगी, बीजेपी,  संघी दहशतगर्दों और भारत हुकूमत से सवाल होना चाहिए। योगी धामी ने मुस्लिम अवाम पर धना धन गोलियां चला दी उसके उपर योगी अवामी हल्क़ों मे सियासी नफ़ा लेने की कोशिश कर रहा है।  मस्जिदों पर डाका डालने पर बोलता है "कहीं से कुछ दंगा फ़साद की ख़बर आई"  "कोई दन्गा हुआ नहीं हुआ और होगा भी नहीं"। "हमें आता है ठीक करना"। एक और बयान मे बोलता है गोली खाओ चैन की नींद सो जाओ। दूसरी बात डकैती दिन २२ जनवरी को तुमने मूर्ती मे डाका डाला और पूरे हिंदुस्तान मे बवाल मचा दिया। तुमने कर लिया ना प्राण प्रतिष्टा फ़िर उसका प्रचार कियों। मज़हब के ऊपर सियासत कियों

नाज़रीन हिन्दू दहशत (हिन्दू आतंक) अब अपने ख़ात्मे पर है।  अरतागुल ग़ाज़ी के क़बीले पर जब मंगोलों ने हमला किया था कुछ भी बाक़ी नहीं रहने दिया था सब कुछ जला कर राख कर दिया था।छोटे छोटे बच्चों के सर क़लम कर के पेड़ों से लटका दिया था।   अरतागुल ग़ाज़ी को यारगमाल बना कर उनके ऊपर शदीद शिद्दत की उनके दोनों पाँव तोड़ डाले जिस हाथ से तलवार पकड़ते थे उस हथेली में किला ठोंक के उनको हाथ पैर से मफ़लूज बना दिया।  लेकिन उनके साथ उनके मुर्शिद इबनुल अरबी थे उनकी रूहानी ताक़त से वोह भाग निकले फ़िर उनको एक ग़ार में कई दिनों तक रखा और मुर्शिद ने उनको रूहानी फ़ैज़ और दवाइयों से ठीक किया। 

उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया और उलटे हाथ से तलवार की मश्क की।  फ़िर वही सब ज़ालिम नोयान और उसके साथियों को वापिस लौटा दिया जो ज़ुल्म बर्बरियत उसने काई कबीले को दी थी।  ठीक होने के बाद ग़ाज़ी ने नोयान को हर महाज़ पर शाकिस्त दी पहले उसकी माश (इकॉनमी) को तबाह किया उसके थोड़े थोड़े फौजी मार गिराए  फ़िर बड़ी जंग का आग़ाज़ किया।  

जब हर महाज़ हर दावं नोयान का उलटा पड़ रहा था हर हल्क़े में उसको शाकिस्त मिल रही थी तो नोयान पागल हो गया और अरतागुल ग़ाज़ी से ख़ौफ़ खाने लगा।  उसका एक नूजूमी था वेलू बिल्जी वोह मुस्तक़बिल देख कर बता देता था की आगे क्या होने वाला है।  उस ही बल पर नोयान ज़ुल्म करता था।  उसने देखा तो घबरा गया और बोला नोयान तुम्हारा खात्मा ते है अरतागुल तुमको मार डालेगा, उसका साथ कोई बोहोत बड़ी रूहानी ताक़त दे रही है।  चारो जानिब आग ही आग है तुम्हारे सारे फौजी मारे जायेगें, तुम भी मारे जाओगे। 

फ़िर वही हुआ जिस बेदर्दी से नोयान ने काई की औरतों बच्चो ज़ईफ़ों को क़तल कर के पेड़ से टांग दिया था और पूरे काई क़बीले को आग लगा कर तबाह कर के क़ब्रस्तान बना दिया था उस ही अंदाज़ में हमला हुआ और हज़ारों लाखों की तादात में मंगोल मारे गए मुज़ाहिदों ने सब को ज़िबह कर के पेड़ों से लटका दिया और पूरे शैतानी मरकज़ को आतिशे नार कर दिया।  वेलू बिल्जी जान बचा कर भाग निकला। 

उधर कारवां सराये में जिस अंदाज़ में नोयान ने दरवेशों को ज़िबाह किया था और मुस्लिम अवाम के सर काटे थे मुस्लिम बच्चिओं को उठा कर ले गया और अपनी हवस का शिकार बनाया था।  उसका बदला भी अरतगुल ग़ाज़ी ने ले लिया।  इस हमले में नोयान के ५० से ६० फौजी बेदर्दी से ज़िबह कर दिए गए।  और नोयान वहां से भाग निकला।

बताने का मक़सद वही है जिस जंग में और जिस मुजाहिद को एक सच्चे वली की मदद रहती है तो वोह नहीं हारता है।  जैसे मुहम्मद ग़ोरी को उस दौर के ज़ालिम तरीन दहशतगर्द शैतान पृथ्वी राज चौहान के ख़िलाफ़ गरीब नवाज़ की मदद शामिल थी तो शैतान को शाकिस्त हुई।  तो जिस जंग की क़ियादत खुद नबी करेगें तो वोह जंग कैसे कोई मोमीन हार पायेगा।  ज़ुल्म करने से बड़ा गुनाह ज़ुल्म सहना है और ज़ालिम के नाइंसाफ के ख़िलाफ़ हथियार उठाना कोई गुनाह नहीं है। 

१९४७ से मुसलमान ज़ुल्म सेहता आ रहा था, पहले तो एक एक दंगे में ३ हज़ार ४ हज़ार मुसलमान गाजर मूली की तरह काट डाले जाते थे।  अब सोशल मीडिया का इंटरनेट का ज़माना है तो चीज़ें बड़ी जल्दी वायरल हो जाती हैं।  लेकिन ज़ुल्म नाइंसाफी तो अभी भी बदस्तूर जारी है।  

मुस्लिम घरों, मस्जिदों, मदरसों, रोज़गार पर बिलडोज़र चलाने से ले कर मुसलमानों की अनदेखी स्कूल कॉलेज और नौकरी की जगह उनको हक़ीर जान कर उनकी अनदेखी करना स्कूल में उनको पीटना मारना उनके टेलेंट को दबाना और बोहोत से ज़ुल्म सेहता है मुस्लिम बच्चा।  हॉस्पटल में पैदा होने से ले कर तो नौकरी तक ना जाने किन किन ज़हर के प्यालों को पी पी कर जवान होता है। 

गज़वा ए हिन्द पर हिन्दू आतंकी कितना ही आसमान तक उछले देवबंद के फतवे पर शिकायत करें पुलिस हिकमत करे लेकिन हक़ीक़त को कैसे टालेगें।  जो होने वाला है उसको कैसे रोकेगें।  अगर होनी को टाल सकते हो तो 

१.           होने वाले सड़क हादसे रोक दो

२.          ख़ुदकुशीयाँ रोक दो

३.          जिगर के फटने से होने वाली मौतें रोक दो

४.          कैंसर से होने वाली मौतें रोक दो।

५.         बल्कि हिंदुस्तान पर आने वाली मुसीबत और तबाही रोक दो।  

एक बार कोशिश की थी लंगूर भी मिल गए थे मोदी मोदी मोदी जो तूफ़ांन हिन्दुस्तान के गुजरात को तबाह करने वाला था उसको मोदी का नाम ले कर पाकिस्तान की तरफ मोड़ना चाहा।   लेकिन उसके पहले ही हम रब से पाकिस्तान की हिफाज़त मांग चुके थे और हिंदुस्तान की बर्बादी।  फ़िर क्या हुआ वही जो हमने माँगा था।  पाकिस्तान के कराची से कोसों दूर हो गया तूफ़ान और पूरा गुजरात हुआ तबाह।   

में तो अल्लाह से दुआ गो हूँ मुझे उस जंग का हिस्सा बनाये और काफ़िरों के सर क़लम करने का शर्फ़ अता करे।   आमीन सुम्मा आमीन

सहाफ़ी ज़ुबेर

Tuesday, 27 February 2024

ज़ाफ़रानी दहशत में जिगर फटने से मरने वालों में इज़ाफ़ा।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

हाल ही में ज़ाफ़रानी दहशत में अगर कुछ चीज़ों में इज़ाफ़ा हुआ है तो वोह है ज़ाफ़रानी जानवरों (गाये, बैल, सांड, लंगूरों) की दहशत से, सड़क हादसों में, ख़ुदकशी और  जिगर फट कर (दिल का दौरे से ) मरने वालो की तादात में बेइख़्तयार इज़ाफ़ा हुआ है। 

नाज़रीन आपको करोना का वोह झूठा इलज़ाम याद है जो तबलीग़ी जमात पर लगाया गया था जिसकी वजह से आम मुस्लिम अवाम का इन काफ़िरों ने जीना दूभर कर दिया था।  यहाँ तक की मौलाना साद साहब की रूहानियत को भी इन मरदूत काफिरों की फौज और उनके पालतू कुत्तों ने नहीं बक्शा था।  अरे तूरे की बदकलामी के साथ उनको आतंकवादी करोना बम और ना जाने किन किन नाज़ेबा अलफ़ाज़ से मुख़ातिब किया गया था। 

फिर अल्लाह के वली के साथ बदतमीज़ी के बदले का हुआ आग़ाज़ और मोदी ने भारत के नाम पर शुरू किया करोना वेक्सीन उसमे भी सिर्फ़ और सिर्फ़ मुस्लिम अवाम को निशाना बनाने का मक़सद था।  जिसने वेक्सीन नहीं लगाई उसको अवामी हल्क़े और आमद ओ रफ़्त पर आने जाने नहीं दिया जाएगा, राशन नहीं मिलेगा, हॉस्पिटल में नहीं जा सकते, कोर्ट पुलिस स्टेशन में नहीं जा सकते।  इतना सब होने के बाद भी मेने तो नहीं लिया। 

मेने जान बूझ कर नहीं लिया मोदी जैसे ज़ालिम तरीन हाकिम का कोई हुकुम नहीं मानूगा।  

जैसे करोना के आग़ाज़ के वक़्त बरोज़ इतवार पब्लिक कर्फ्यू की अनदेखी कर मिशन बरियानी कामयाब बनाया था उसके बाद मिशन वैक्सीन नहीं लेना कामयाब बनाया। 

नाज़रीन अब हालात ऐसे हो चुके हैं आये दिन जिगर फटने (दिल का दौरा) पड़ने से हिंदी अवाम मौत की आग़ोश में जा रहा है।  जिस हिसाब से मौलाना साद साहब की रूहानियत पर हमला किया था अब जिगर फटने से मारे जा रहें हैं। 

इन मरने वालों में ८-१० साल के बच्चों से ले कर २४-२६ साल के जवान और ४५ से ६० साल के ज़ाईफ सभी की मौत शामिल है।  ख़ास बात लंगूरों की जमात का रोहित सरदाना ४५ साल और रिपब्लिक टीवी का  एडिटर इन चीफ शर्मा और बोहतो से लंगूरों का मारा जाना शामिल है। 

क्रिकेट और फूटबाल खिलाड़ी यंग चुस्त और तंदरुस्त यकायक चक्कर खा कर गिर गया फिर उठा ही नहीं।  हॉस्पिटल ले जाने पर पता पड़ा की दिल का दौरा पड़ा था और दिल ने काम करना बंद कर दिया था।   

मौलाना साद साहब पर इलज़ाम तराशी करने और करोना वेक्सीन लेने के बाद अभी तक जिगर फटने (दिल का दौरा) से कुछ ५ लाख के क़रीब या उससे ज़्यादा अफ़राद मौत के मुँह में जा चुके हैं।  जो हदीस ए क़ुदसी की सदाक़त को बयान करतें हैं।  अल्लाह के नबी ने फ़रमाया जिस बन्दे ने अल्लाह के वलिओं को तकलीफ़ दी उनसे बुग्ज़, कीना रखा उसके खिलाफ अल्लाह का एलान ए जंग है।  अब जिसके खिलाफ अल्लाह एलान ए जंग कर रहा है तो है कोई काफ़िर सूरमा शैतान योगी, भोगी या मोदी जो अल्लाह से जंग जीत जाए।   

नाज़रीन जिस अंदाज़ में गाये के नाम पर बेगुनाह मुस्लिम अवाम को बेदर्दी से मार दिया जाता था उसी गाये ने ना जाने कितने काफिरों को मौत की नींद सूला दिया।  रही सही कसर बैल सांड ने सींघ मार मार के भगवा चोले वाले आतंकवादिओं, रकून ए पार्लियमान, असेंबली और बल्दिया तक को मौत की नींद सूला दिया है।  मज़े की बात इन हलाक शुदा अवाम में ८० फीसद खूँखार दहशतगर्द तंज़ीम बीजेपी, बजरंगदल या संघ से जुड़े हुए आतंकवादी थे।  जो मुस्लिम अवाम को गाये, बैल के झूठे इलज़ाम में हलाक कर देतें थे।  फिर लंगूर भी पीछे नहीं है उसने भी खूब बवाल काटा है और उसके हमले में भी काफ़िर मारे गए हैं लेकिन उतने नहीं।  

किसान आंदोलन को मरदूत शैतान योगी मुस्लिम अवाम के ऊपर लादने वाला था।  एक टीवी मुबाहिसे में बोलता है हमें किसानों से कोई एतेराज़ नहीं है लेकिन किसानों की आड़ में जो हूकूमती असासों को निकसान पहुंचा रहें हैं पुलिस के ऊपर पत्थर फेंक रहें हैं हम उनको चिन्हित कर के उनसे सख़्ती से निपटेगें। 

उस पर लंगूर सौरभ अंगार लगा रहा था।  बाद में योगी करोना की मिसाल देता है आपने देखा करोना के समय क्या हुआ था कैसे इन लोगों ने बवाल मचाया था।  वोह तो तबलीग़ी जमात का या मुस्लिमानों का  सीधा नाम नहीं लिया कियोंके आला अदालतों से साबित हो गया था  की तबलीग़ी जमात की कोई साजिश नहीं थी और तमाम तबलीग़ी बाइज़्ज़त बरी हो गए थे।  अगर सीधा तब्लीगी जमात का नाम लेता तो अदालत की तौहीन कर बैठता। 

दिल का दौरा अभी ख़तम भी नहीं हुआ की कुत्ते के हमले का आग़ाज़ हो गया।  मुफ्ती सलमान अज़हरी साहब को गिरफ़्तार कर लिया।  अब तो गुज्जू का कुछ सच्ची नहीं लग रहा है।  

में इस बात को पूरे यक़ीन के साथ कह सकता हूँ की हिंदुस्तान इस्लामिक रियासत बनेगा और हर हाल में बनेगा।  कितना ही आसमान तक उछल जायें योगी भोगी मोदी अमित लेकिन अब तो होगा वही जो मेरा रब चाहेगा।  बोहोत बेदर्दी से मारे जायेगें ज़ालिम, मुनाफ़िक़, ज़ाफ़रानी दहशतगर्द।   

सहाफ़ी ज़ुबेर

Thursday, 22 February 2024

ख़ौफ़ज़दा ज़ाफ़रानी हरे को लुभाने लगे।

अज़ीज़ नाज़रीन

जैसे-जैसे ज़ाफ़रानी भारत में पार्लियामेंट इन्तेख़ाब नज़दीक आ रहे हैं, ज़ाफ़रानी दहशत वोट बैंक की सियासत के लिए कुत्ते की तरह इधर-उधर भागता हुआ डरा हुआ दिख रहा है। लेकिन हर जगह इस भगवा जानवर को ज़ोरदार झटका लग रहा है. मुख़ालिफ़ के तौर पर सेक्युलर हिंदू और अक़लियत इसे सियासी अछूत मान रहे हैं।

सूबे शुमाल से ख़बरें आ रहीं हैं कि मुस्लिम वोट बैंक को मज़बूत करने के लिए ज़ाफ़रानी शिद्दत तंज़ीम बीजेपी ने मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों और ख़ानकाहों से अपनी मोहीम का आग़ाज़ किया है. जहाँ मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों और ख़ानकाहों के बाहर उर्दू में पोस्टर दिखाई दे रहे हैं, "मोदी है तो मुमकिन है।" भाजपा के ज़ाफ़रानी दहशत ने मन की बात का उर्दू तर्जुमे शुरू किया है, ताकी  यह ज़्यादातर मुस्लिम अवाम तक पहुंच सके।

मुस्लिम क़ौम में मौजूद कुछ मुनाफ़िक़ों ने ज़ाफ़रानी दहशत और अवाम के क़साई की सरहाना की। एक बोलता है कि बीजेपी दिलों को मिलाने का अच्छा काम कर रही है. एक और मुनाफ़िक़ बोलता है की ज़्यादातर मुस्लिम दरगाहों, मस्जिदों और मदरसों में जातें हैं, हमने मुस्लिम बरादरी के ज़्यादातर लोगों को बैदार करने के लिए यहां से अपनी मोहीम का आग़ाज़ किया है।

ये सभी मुनाफ़िक़ हैं और सर कलम किये जाने की सज़ा के हक़दार हैं "सरतन से जुदा"। मुख्तार अब्बास, मोहसिन रज़ा, शाहनवाज हुसैन, बासित अली, वसीम रिजवी समेत ये सभी मुनाफ़िक़ एक ही ग्रुप के मेंबर हैं। जो लोग बीजेपी का सरहाना कर रहे हैं.

मोहसिन रज़ा अब मुसलमान नहीं रहा, मैंने उसे लक्ष्मण सीता मंदिर में जाते और रात की तारीकी में पूरे भगवा चोले और पेशानी पर तिलक लगाकर लंगूर चिम्पांज़ी की पूजा करते देखा है।  जब वह यूपी का कैबिनेट में वज़ीर था। अब सवाल यह उठता है सीता और लक्ष्मण की पूजा कर के वोह किस चीज़ को फ़रोग़ दे रहा है।  हनुमान नौकर था जबकी लक्ष्मण और सीता देवर भाभी थे। कहाँ गये राम, क्यों सीता, लखमन और हनुमान। जबकि उसे राम और सीता की परस्तिश करनी थी।  और मियां बीवी के रिश्ते को बढ़ावा देना चाहिए था.   उसने न सिर्फ़ इस्लामी शरीयत के हिसाब से गुनाह ए अज़ीम किया बल्कि हिंदू अफ़सानवी क़िस्सों के हिसाब से भी गुनाह किया है।  उसकी इस तरह की वाहियात और नाज़ेबा हरकत की वजह से ही हो सकता है उसे योगी ने वाज़ारतख़ाने से हकाल पट्टी किया होगा। लेकिन उसके बीजेपी में होने की वजह से हिंदुओं की कोई मज़हबी अक़ीदा नहीं टूटता है. अगर इस तरीक़े का अमल  किसी मुख़ालिफ़ तंज़ीम के फ़र्द ने किया होता तो भाजपा और ज़ाफ़रानी शिद्दत पसन्द तबाही मचा देते।

एक सहाफ़ी होने के नाते मैं यक़ीनन कुछ सवाल बीजेपी और उन सभी मुनाफ़िक़ों से पूछना चाहूंगा जिन्होंने बीजेपी की तारीफ में क़सीदे कसे हैं ब्रद्राने मिल्लत से ज़ाफ़रानी तंज़ीम के लिए वोट करने के लिए कहा। 

१.     ज़ाफ़रानी तंज़ीम के १० साल के दौर ए हुकूमत में मुसलमानों का जो नुक़सान हुआ उसका क्या? मुसलमानों की जान, घर, कारोबार, माश,  मस्जिद, दरगाह, ख़ानक़ाह, मदरसे के नुकसान के बारे में क्या?

२.     उन बेगुनाह मुसलमानों का क्या जो बिना किसी मुकदमे के जेल में हैं।

३.     उन ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों और सियासी नुमाइंदों के बारे में क्या जो मुसलमानों पर फ़िरक़ावाराना तशद्दुत और दहशतगर्दाना हमले भड़काने के मुजरिम हैं। 

        हमारी ब्रदारी पर ज़ुल्म की उन तमाम वाक़ेयात पुलिस और अदालत के दिमाग़ में भाजपा की जानिब से पेवस्त शदीद ज़हर की वजह से तबाह हुए नौजवान मुसलमानों की ज़िन्दगी को हम कैसे भूलेंगे, और तुमको माफ़ करेंगे। ना ही हम उनको फ़रामोश करगें ना ही ज़ाफ़रानी ज़ालिमों को माफ़ करेगें।  

अब मिस्टर ५६ इंची ऐसी बकवास करना बंद करें, हम मस्जिद और मदरसे के लिए अपना सब कुछ क़ुर्बान कर सकतें हैं।  मदरसे, मस्जिद, दरगाह या ख़ानक़ाह से मुसलमानों के लिए कोई पैग़ाम देने की जरूरत नहीं है. हमारा न सिर्फ़ तुम पर बल्कि तुम्हारी इन्तेज़ामियाँ और तुम्हारी अदलिया पर से भी यक़ीन उठ चूका है।  अब तुमको मुसलमानों की फ़लाह के बारे में बोलने की हाजत नहीं है।  अगर कुछ करना है तो अब मुसलमानों के लिए एक और वतन या पाकिस्तान की सरहद की तोहसीह के बारे में बात करो या पूरी तरह से मुसलमानों के लिए एक अलग सूबा।  जिसमे फ़ौज और करेंसी भारतीय होगी लेकिन इन्तेज़ामियाँ, लॉ एंड आर्डर मुसलमानों का होगा।

सहाफ़ी ज़ुबेर

Tuesday, 20 February 2024

चीन ग्रेट के आगे भारत की ज़ाफ़रानी दहशत पस्त

अज़ीज़ नाज़रीन

भारत में पनप रहा ज़ाफ़रानी दहशत अब अपने ख़ात्मे की जानिब गामज़न है।  जितना ज़ुल्म शिद्दत दहशत मोदी योगी अमित हेमंत कट्टर धामी जैसे दरिंदों, शैतानों रावण की औलादों को करना था कर चुके।  वैसे एक बात आप लोगों के ज़ेहन को ताज़ा करने के लिए बताता चलूँ की यह ज़न्खे (हिजड़े) निहत्ते मासूम अवाम पर ही गोलियां चलाना जानते हैं।  जहाँ इनसे कोई ज़्यादा ताक़तवाला आया की कुत्ते की तरह दुम दबा कर पियाऊं पियाऊं कर के भाग जातें हैं।  

मसला है नार्थ ईस्ट को क़ब्ज़े में करने के बाद अब चीन ने भूटान भारत के सरहदी इलाक़े में नये गाँव तैयार करने के बाद घर बनाने शुरू कर दिए हैं।  चीन ने फ़िलहाल ऐसे ३ नये गाँवों को तैयार किया है जिनका रक़बा पहले से कई गुना बड़ा है।  वहां पर मुक़ीम १८ ख़ानदान के अवाम को भूटान छोड़ कर जाने का हुकुम नाफ़िज़ कर दिया है।   चीन अपने अवाम को इन मज़ीद बढाए हुए गाँवों में बसा रहा है। इन गाँवों में श्रिजिनपिंग और चीन के नक़्शे की तस्वीरें लगी हुई हैं

अब सवाल यह बड़ा है जो मोदी ५६ इंची छाती लिए फ़िरता है योगी कुत्ते की तरह भोंकता है हेमंत ज़न्खे की तरह ताली मारता है वैसे ही धामी कट्टर और तमाम ज़ाफ़रानी दहशतगर्द चीन का नाम आते ही अपनी पतलून काहे को आगे से गीली और पीछे से पीली कर देंतें हैं।  इन हिजड़ों को सिर्फ़ गोली मारने के लिए घरों, रोज़गार, मस्जिद, मदरसों पर बिलडोज़र चलाने के लिए मुस्लिम ही नज़र आतें हैं।  वैसे भी अवाम कितना भी ताक़तवर कियों ना हो किसी भी मुल्क की फ़ौज या हथियारों वाली पुलिस से हरगिज़ मुक़ाबला नहीं कर सकती।  कियोंके किसी भी अवाम में फ़ौज जैसी सलाहाहियत नहीं होती है। 

श्रीमान ५६ इंची अगर मर्द हो तो करो चीन से मुक़ाबला और भेजो अपने फौजी चीन में।  योगी बड़े बड़े भोंकता है मस्जिद पर हमने बिलडोज़र चलाया कहीं कुछ हुआ कुछ नहीं हुआ कियोंके हम थे कोर्ट के आदेश का पालन करवाने के लिए।  अबे भगवा जानवर कहीं से कुछ नहीं हुआ कियोंके हमारे नौजवान ख़ामोश रहे उसमे तेरी कुछ हिकमत नहीं है।  अगर मर्द की औलाद है तो चल चला चीन पर बिलडोज़र। 

वैसे  भी भारत और भूटान के दरमियान मोहायेदा है भूटान की कोई फ़ौज नहीं होगी और भूटान नरेश को जब भी किसी मुल्क से ख़तरा होगा भारत की फ़ौज उनकी मदद करेगी। 

चलो मिस्टर ५६ इंची भेजो अपने आतंकवादी भूटान और करो भूटान से भारत की हुई संधी को पूरा।  भेजो अपनी फ़ौज मौत से जंग लड़ने।  तुम्हारी फ़ौज को नार्थ ईस्ट में बग़ैर असलहे के खून से निलहा दिया था।  पीट पीट कर गानवा लाल कर दिया था।  जिसमे सैकड़ों भारत के फौजी ज़ख़्मी हुए थे और ४५ ढेर हो गए थे।  

तुम ज़ाफ़रानी कीचड़ सिर्फ़ भोंकने के आदी हो वोह भी सिर्फ़ अपनी गली में ही भोंकते हो।  मुफ़्ती सलमान अज़हरी साहब का क़ौल बार बार दोहराया जाएगा हर बार दोहराया जाएगा

थोड़ी देर की ख़ामोशी है फिर शेर आएगा कुत्तों का वक़्त आया हमारा दौर आएगा

हमारे मज़हबी पेशवाओं को ग़िरफ़्तार करते हो फ़िर अवामी हलके में उसका सियासी नफ़ा लेने की कोशिश करते हो।  अरे मर्द हो तो अपने मुक़ाबले के फ़ौजिओं से लड़ो फ़िर देखो तुम्हारी पतलून उतार कर नंगा कर के भेजेगा चीन।  तुम्हारी फ़ौज तो बोहोत ताक़तवर है दुनियां की किसी भी फ़ौज से मुक़ाबला करने की सलाहियत रखती है।   तुम लोग सिर्फ़ भोंकते हो और मासूम निहत्तों पर गोलियां चला कर खुश होते हो। 

तुम्हारी फ़ौज की सलाहियत तो ख़ूब देखी है २०१९ से एक भी जंगी तय्यारा हमारी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ फ़िज़ा में परवाज़ नहीं कर सके ताहम अभी ३ रोज़ क़ब्ल राजिस्थान से लगी पाकिस्तानी सरहद पर पोखरान में जंगी मश्क़ में तुम्हारी मिसाइल हदफ़ को टारगेट करने से चूक गई जब हमारे सामने तुम्हारा पायजामा गीला हो जाता है तो चीन और पाकिस्तान से पंगा लेने की सोचना भी मत बोहोत बुरी मार खाओगे। 

अगर मर्द हो तो मर्दों जैसे काम करो अगर हिजड़ों जैसा मासूम अवाम को तंग करने का काम करोगे तो तुम्हारे को हिजड़ा ही कहा जाएगा।  दूसरी बात फ़ौज, पुलिस अवाम के तहफ़्फ़ुज़ के लिए होतें हैं अगर मासूम निहत्ते सिर्फ़ मुस्लिम अवाम पर धना धन गोलियां चला कर दहशत फैलाओगे तो तुमको फौजी नहीं बल्कि दहशतगर्द ही बोला जाएगा।  गोली चलाने का इतना शौक़ है तो चलाओ गोली जंगी महाज़ पर अपने बराबर के फ़ौजिओं पर फ़िर देखेगें तुम्हारी फ़ौज ज़्यादा क़ुव्वत वाली है या दुसरे मुल्क की। 

फ़िर ज़ालिम दरिंदे योगी जैसे मुँह से हगने वाले हमारी मौतों पर खुशी का इज़हार करतें हैं कहीं कुछ हुआ कुछ नहीं हुआ कियोंके हम थे हमें आता है न्यालय का आदेश का पालन करवाना वैसे ही हम तुम्हारे फौजियों की मौत पर कुछ कुछ बोलेगें, लिखेगें ख़ुशी बनायेगें। 


सहाफ़ी ज़ुबेर 

Thursday, 15 February 2024

बॉलीवुड का नचौड़ा हिजड़ा अदलिया क़ानून से ऊपर हो गया।

अज़ीज़ नाज़रीन,

भारत के ज़ाफ़रानी दहशतगर्द और जासूसी के इलज़ाम में इस्लामिक ममलेकत क़तर ने ८ रा के एजेंटों, जासूसों को मुसलमानों के दुश्मन और इस्लाम के ग़द्दार यहूदी दहशतगर्दों को इस्लामिक ममलेकत क़तर की फ़ौज, असलाह, नेवी की ख़ूफ़ियाँ जानकारी चोरी कर कर के स्मग्गल करने के इलज़ाम में सज़ा ए मौत सुनाई थी।   

भारत में २०२४ के इन्तेख़ाब को देखते हुए चिंपांज़ी ने अपने लंगूरों को हुकुम सूना दिया की ८ दहशतगर्द वापिस आ गए हैं और उनको क़तर ने बाइज़्ज़त बरी कर दिया है।  क्या बकवास है। "हसो" जब बात का बतंगड़ बना और चिंपांज़ी से सवाल होना शुरू हुए तो उसको लगा की कहीं सर मुडाते ही ओले ना पड़े और इन्तेख़ाब में बजाये ऐसी फ़रेबी ख़बरें मुफ़ीद नताईज देने के मुज़िर नतीजे ना दे दें।  ऐसी सूरत ए हाल में चिंपांज़ी ने पालतू कुत्ते को आगे कर दिया और अब ऐसी हवा छोड़ दी के बॉलीवुड के हिजड़े नचोड़े कुत्ते के भोंकने से ८ हिन्दू दहशतगर्द जेल से वापिस आ गए।  दूसरी बार हसो हसो।     

अब सवाल यह उठता है भारत के लुक्खों ने किसी भी देश की अदलिया को भारत की अदालत ए उज़मा समझ रखा है जो आस्ता को क़ानून के ऊपर ग़ालिब कर के फ़सलें दे देगी।  जितनी बदनामी भारत में अदालतों की हो रही है उतनी तो एक तवाइफ़ की भी नहीं होती होगी। 

मतलब यह समझ लिया जाए की भारत में जिस तरह हिन्दू अक़ीदा क़ानून के ऊपर अपना रौब रखता है वैसे ही बॉलीवुड का नचोड़े हिजड़ा इस्लामिक क़ानून और मुफ़्ती की अदालतों में दख़ल रखता है और फैसले अब मुस्लिम देशों में सबूतों के आधार पर नहीं किसी हिजड़े नचोड़े के इसरार पर बदल सकतें हैं।फिर उस हिजड़े नचोड़े का केस से क्या लोकस स्टेन्डी है जो वोह इंटरनेशनल मुद्दे पर किसी भी मुल्क की अदलिया में मुदखेलत कर सकता है।  वोह क्या भारत सरकार का सफीर है, उसका क्या उन दहशतगर्दों से कुछ रिश्ता है वोह कोई आलमी अदालत का जज या किसी आला ओहदे पर फ़ाइज़ है। 

फिर अगर उसने उन ८ दहशतगर्दों को छुड़वाने के लिए क़तर हुकूमत पर ज़ोर डाला था तो उसका भी दहशत से लिंक निकालना होगा और उसको गिरफ्तार कर पूरे सिंडिकेट की जानकारी लेनी होगी।  वैसे उसके लोंडे पर आलमी ड्रग्स सिंडिकेट का मेंबर होने के इलज़ाम लगें हैं।  बॉलीवुड के नचोड़े के लिंक दहशतगर्दी से हो सकतें हैं और वोह भारत में दहशतगर्दी का एक मेंबर हो सकता है। 

फिर अगर बेरुन मुल्क अदालतें एक नचोड़े की बात को सुन कर दहशतगर्दों जासूसी इस्लामिक ममलेकत की जानकारी दुश्मन को देने जैसे इलज़ाम में मौत की सज़ा पाए लोगों को छुड़वा सकता है तो भारत की अदालत ए उज़मा उसके सामने किसी गुलाम की मानिंद होगी फिर अपना हुकुम चलाये भारत की अदालत पर और कहे इस दहशतगर्द को छोड़ दो उस जासूस को छोड़ दो जिस बन्दे को मौत की सज़ा सूना दी गई है उसको बरी करवा ले।  जब भारत में वोह सब मुमकिन नहीं तो बेरुन मुल्क इतने संगीन इलज़ाम में मौत की सज़ा पाए ८ दहशतगर्दों को नाच गा कर अपना पेट पालने वाले की बात पर कैसे कोई अदालत अपना फ़ैसला तब्दील कर सकती है।  अहम बात जिसका उस मसले से कोई लिंक ही नहीं हो। 

यह वैसा ही है जैसा दहशतगर्द कुलभूषण जादव और अभिनदं पर झूटी खबर आम की थी की मोदी की कारगरदेगी से बहार आये।  आज तक दोनों जेलों में सड़ रहें हैं और उनकी पाकिस्तानी फ़ौज, आई.अस. आई. हर रोज़ ख़ूब पुठ्ठे लाल कर रही है। 

अगर क़तर से ८ दहशतगर्द छूट गए हैं तो कहाँ है अदालत और मुफ़्ती का हुकुमनामा कहाँ है उनको वापिस भारत आने का इजाज़तनामा और दीगर ज़रूरी क़ाग़ज़ भारत आने के लिए एयर टिकट कहाँ हैं। 

अगर किसी भी मुल्क का क़ानूनी निज़ाम अदालतें किसी नचोड़े के हुकुम पर चलने लगेगी तो वोह दिन दूर नहीं जब अदालतों में हिजड़ों की फ़ौज फ़ाइज़ होगी ना की क़ानूनी जानकार।  जो फ़ैसले तवाइफ़ों और नचोड़ों का नाच देख कर दिया करगें।  और फ़ैसले नाच देख कर तब्दील कर दिया करेगें ना की क़ानून की दफ़ा और सबूतों के आधार पर। 

जब भारत में कोई आम क़ैदी जेल से छूटता है तो हज़ार रसूमियात (Formalities) होतीं हैं फिर बेरुन मुल्क वोह भी दहशतगर्द मौत की सज़ा पाए और इतनी आसानी से छूट जायेगें।  झूठी खबर है। 

मेने क़तर अम्बेस्डर से बात की है।  इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है।

सहाफ़ी ज़ुबेर 

Wednesday, 14 February 2024

हल्द्वानी में ज़ाफ़रानी ज़ालिम हुकूमत की मुस्लिम नस्ल कुशी।

अज़ीज़ नाज़रीन,

मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़ाफ़रानी ज़हर और दहशत का वोह आलम हो गया है की अब ज़ाफ़रानी हुकूमत ख़ुद मुस्लिम नस्लों को तबाह और बर्बाद करने के उनका क़त्ले आम करने की हिकमत इख़्तेयार कर रही है।  इससे मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिन्दू ज़ालिमाना और हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम दहशतगर्दी को ख़ूब फ़रोग़ मिल रही है।  

जब वज़ीर आला की कुर्सी पर फ़ाइज़ शख़्स ही ख़ूनी दरिंदा शैतानी फ़ितरत रखता होगा मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ निहायत ही ज़हरीला ज़ेहन रखता होगा तो कलेक्टर, कमिश्नर और पुलिस के आला ओहदेदार तो पहले ही मुस्लिम अवाम से हद दर्जे का बुग्ज़ को कीना रखतें हैं वोह तो दो क़दम आगे चल कर मुस्लिम अवाम को गोलिओं से भूनने में ज़र्रा भर गुरेज़ नहीं करतें हैं।  

जब सय्या भये कोतवाल तो अब डर काहे का।

नाज़रीन उत्तराखंड के हल्द्वानी में जिस हिसाब से मुस्लिम अवाम का क़त्ले आम किया गया है जिस बेदर्दी से दुख्तरान ए मिल्लत पर लाठीयां भांची हैं उससे इन ज़ालिमों ने अपनी तमाम हद पार कर दी है। 

जमहूरियत में हुकूमत के किसी भी नाज़ेबा अमल पर एहतेजाज करना अवाम का जमहूरी हक़ होता है।  अमन पसंद अवाम पर गोलिओं की बौछार करना उसके ऊपर फौज को बुला कर किसी भी अवाम को देखते ही बेइख़्तयार गोली मारने का हुकुम नाफ़िज़ करना क्या दिखाता है।  क्या जंग का आग़ाज़ हो गया है।  जिस तरह का सुलूक २०१४ के बाद से मुसलमानों के साथ हो रहा है ताहम चीज़ें दुरुस्त होने के बजाये ज़ुल्म और ज़्यात्ती मज़ीद बढ़ती ही जा रही है।  

जिस तरह से फौज और पुलिस की मिली झूली टोली ने दहशतगर्दी, ज़ालिमाना, ज़हरीले ज़ेहन का मुज़ाहेरा अपने ही अवाम के साथ किया है वैसा चीन के साथ कर के दिखाए भारत के फौजी खून से निलहा दिए जायेगें। 

गुजिश्ता बार जब चीन ने दिपसांग और दीमचौक पर क़ब्ज़ा किया था तब बग़ैर असलहे के भारत के सैकड़ों फ़ौजिओं को पीट पीट कर कील लगे नान चाकू से खून से लाल कर दिया था।  जिसमे से ४५ भारत के फौजी ढेर हो गए थे।  तब मर्दानगी दिखानी थी।  वहां से तो नामर्दों की फौज ने भगोड़े की तरह फ़रारी इख़्तेयार कर ली।   और आम शहरी वोह भी निहत्ते ख़ातूनों, २० साल से २५ साल तक के मासूम बच्चों के ऊपर गोलियां बरसा कर तवक़्क़ो कर रहे हो तुमने बड़ा बहादुरी का काम सर अंजाम दिया है। 

वैसे भी अवाम किसी भी फौज का मुक़ाबला नहीं कर सकता जंगी महाज़ पर ४५ पुलवामा में ढेर कर दिए थे और चीन ने ४५ ढेर कर दिए।  हक़ीक़ी फ़ौजिओं से जंग लड़ने में भारत के फ़ौजिओं की पतलून गीली हो जाती है और आम अवाम पर अपनी मर्दानगी दिखाते हैं। 

अवाम एहतेजाज कर रहा था तो तुमको पानी को बौछार करने की ज़रुरत थी।  हल्का लाठी चार्ज करने की ज़रुरत थी।  जिस बेदर्दी से औरतों को लाठी मारी जा रही थी उससे उन पुलिस वालों के अंदर भरा हुआ ज़हर और गुबार साफ़ दिख रहा था।  

आज के दौर ए मौजूदा में हर हिन्दू ज़हरीला हो गया है।  यकसां क़ानून नाफ़िज़ करने के एहतेजाज पर बोहोत से बेवक़ूफ़ जाहिल हिन्दू बोलतें हैं सिविल लॉ में मुस्लिम अपना मफ़ात देखतें हैं इसलिए मुख़ालेफ़त करते हैं।  हमें इस्लामिक सिविल ला चाहिए।  अगर हिम्मत है तो क्रिमिनल जुरसीपिडेन्स भी इस्लामिक हिसाब से कर लो। 

 

इससे क़ब्ल ट्रिपल तलाक़ पर शरई अदालत पर एक तवील मज़मून लिखा है।  उसमे साफ़ अलफ़ाज़ में यही लिखा है भारत की अदालतें मुतस्सिब हो गयी हैं और हिन्दू अदालतों को मुस्लिम मसाइल क़ुरान, हदीस फ़िक़ह के बारे में क्या जानकारी होती है जो वोह इस्लामिक मसले पर कोई राये या फ़ैसला दे सकता है।  उसके लिए मुफ़्ती साहब अदालत की कुर्सी पर फैसला देने के लिए नॉमिनेट होना चाहिए। 

अंग्रेज़ी में एक मज़मून शाया किया है की भारत को क्रिमिनल जुरिसपेंडन्स के लिए पाकिस्तानी क़ानून को मद्दे नज़र रख कर फ़ैसला देना चाहिए।  फिर लाहौर हाई कोर्ट और पाकिस्तान की दीगर अदालतों की रूलिंग को हिंदुस्तान की अदालतों में रेफ़्रेन्स मिलना चाहिए। 

जिस हिसाब से भारत में मुसलमानों के इंसानी, मज़हबी और समाजी हुक़ूक़ की खिलाफवर्जी हो रही है तो शरई अदालतों को नाफ़िज़ किया जाए।  वैसे भी बाबरी मस्जिद से ले कर तो तमाम काले क़ानूनों के नाफ़िज़ होने के बाद मुस्लिम अवाम का भारत के किसी भी इदारे और अदलिया पर यक़ीन नहीं रहा। 

इन्तेज़ामियाँ ( एवान, कमिश्नर, कलेक्टर, पुलिस, फौज) पर से तो पहले ही एतेमाद उठ गया था, रही सही कसर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की मुस्लिम मसाइल और क़त्ल ए आम पर ख़ामोशी और इन्साफ के क़त्ल पर अदालतों से भी पूरा एतेबार उठ गया है।  

ज़ाफ़रानी ज़ालिमों को बोहोत शौक़ है मासूम निहत्ते मुस्लिम अवाम पर धना धन मशीन गन और जदीद अस्लेह से गोलियां चलाने की तो हमको भी हमारी फ़ौज तैयार करने की इजाज़त दी जाए।  उन फौजियों को पाकिस्तान की फ़ौज से किनारा हुए या आई.अस.आई. से तालीम आफ़ता या आला ओहदेदार या तालिबान जंगजू मश्क़ दें।  फिर देखतें हैं भारतीय फ़ौज में कितनी क़ुव्वत और ताक़त है।  निहत्ते, ग़ैर तरबियती आफ़ता अवाम को तो गोली कोई भी मार सकता है।  फिर देखतें हैं योगी जैसे रावण कैसे भोंक सकतें हैं।  

मजलिस के सरबराह और मोहतरम से गुज़ारिश की जाती है। 

१.           शराई अदालतों को नाफ़िज़ करने के लिए मोहीम चलाई जाए।

२.          मजलिस में नई भर्ती के वक़्त एक हलफ़ क़ुरान को हाथ में ले कर बावज़ू लिया जाए।  की फलां बिन फलां मजलिस की यकजेहदी, फ़रोग़ और सालमियत के लिए काम करेगें।  वोह मुस्लिम अवाम के फलाह और उनके ख़िलाफ़ हो रही नाइंसाफी के लिए दिल और जान से क़ुव्वत के साथ काम करेगें 

३.    मजलिस की जानिब से अकसरियत से लिए गए किसी भी फ़ैसले पर अदम ए एतिमाद नहीं दिखाऊंगा।

४.          मजलिस के वेक़ार और इज़्ज़त की फलाह के लिए हर वक़्त काम करूंगा।      

५.       इस हलफ़ में मुल्क की यकजेहदी, सालमियत का कोई तसव्वुर नहीं होना चाहिए कियोंके वोह हलफ़ एवान में दिया जाता है। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Tuesday, 13 February 2024

पाकिस्तानी लाचार कमज़ोर ईमान।

अज़ीज़ नाज़रीन,

दौर ए मौजूदा में जो हालात पाकिस्तान उसकी क़ौम और पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के हुई  हैं उससे उनके अंदर कमज़ोर ईमान और एहसास ए कमतरी साफ़ ज़ाहिर हो रही है।  दरअसल यह हालात उनके मौजूदा सियसतदांओं की बद ईमानी और अल्लाह के उसूलों को तोड़ने की वजह से हो रही है। 

पाकिस्तानी कमज़ोर ईमान पर ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों का ऐसा ख़ौफ़ तारी हुआ है की गुजिश्ता आलमी कप २०२३ में सेमी फाइनल में हार की अहम वजह फाइनल में दहशतगर्दों से ज़लालत भरी शाकिस्त से बचने की हिकमत थी। 

वही रवैया पाकिस्तान का अंडर -१९ के आलमी कप सेमी फाइनल में देखने को मिला।  यहाँ पर भी तक़रीबन रवैया वही रहा।  ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों से फाइनल में हार की ज़लालत से बचने के लिए सेमी फाइनल हार गए पाकिस्तानी।

नाज़रीन जैसा की में हमेशा कहता रहता हूँ किसी भी मुल्क के हाकिम के बद और आला किरदार का असर उसकी रियाया पर होता है।  मौजूदा दौर में पाकिस्तान के हाकिम बेईमान, अपने फ़र्ज़ से ग़द्दारी करने वाले हैं तो पाकिस्तान की शाकिस्त हर हल्क़े में हो रही है।  मियां नवाज़ शरीफ शाहबाज़ और मरियम यह तो ज़ाफ़रानी दहशत,  मोदी और भारत के गुलाम हैं।  जैसा की अफ़ग़ानिस्तान में अशरफ़ ग़नी था।  मोदी का ग़ुलाम।  लेकिन तालिबान के आते ही अफ़ग़ानिस्तान के हालात बोहोत बेहतर हुए हैं।  अफ़ग़ानिस्तान का रुपया और जीडीपी आज भारत से बेहतर है।  जबकि अभी तो तालिबान को आये महज़ ढाई साल ही हुआ है।  हालांके भारत के ज़ाफ़रानी दहशत, मोदी और भारत ने तालिबान को लुभा कर इस्लाम, मुसलमानों और पाकिस्तान की पीठ में खंजर घोपने की भरपूर कोशिश की लेकिन मोदी, भारत को हर वक़्त मुँह की खानी पडी और ज़लालत हाथ लगी।

नाज़रीन जब तक पाकिस्तान के हाकिम मुजाहिद इमरान ख़ान थे तो तमाम इस्लाम और पाकिस्तान दुश्मनों के पेट में दर्द होता रहता था।  और पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की इमरान ख़ान के वज़ीर ए आज़म होते हुए कभी भी दज्जाल भारत और उसके दहशतगर्दों से शाकिस्त नहीं हुई। २०२१ में पाकिस्तान पहली बार दज्जाल और ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को वर्ल्ड कप में हराने में कामयाब हुआ था।  इतना ही नहीं पाकिस्तानी टीम ने तमाम ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को मौत की नींद सूला दिया और अपना एक भी फौजी हलाक नहीं होने दिया।  १० विकेट से फ़तह।

दरअसल में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम और उनके अवाम पर भारत, मोदी और ज़ाफ़रानी दहशत को महसूस कर सकता हूँ जिसने पकिस्तानिओं को एक कमज़ोर इंसान के मानिंद भारत के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया है।  इस मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिआ की सरहाना करना होगी उनके पादरी फादर ग्रैहम स्टैन उनके दो मासूम बच्चों फिल्प १० साल और लुइस ६ साला को हिन्दू हुजूम और दहशतगर्द दारा सिंह ने बेदर्दी से ज़िंदा आतिश ए नार कर दिया था।  अपनी जान बचाने के लिए जब वोह बहार आना चाहते थे तो ज़बरदस्ती उनको डंडों से वापिस से गाड़ी में ठूस दिया।  जिसके चलते उन मासूमों की मौत हो गई।

उसका बदला आज तक ऑस्ट्रेलिआ ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों से पीट पीट कर ले रहा है।  और हर वक़त भारत के तमाम हिन्दू दहशतगर्दों को ऐसे ही बेदर्दी से अज़ीयत दे कर हलाक कर रहा है जैसी की हिन्दू आतंकिओं ने बेदर्दी से फादर को मौत दी थी।

दरअसल यह तो पाकिस्तानियों की कमज़ोरी और हाकिम की भारत ज़ाफ़रानी दहशत से गुलामी का सबूत है की ज़ाफ़रानी दहशतगर्द भारत की जानिब से पाकिस्तान को हर मुद्दे पर ज़बरदस्त झटके लग रहें हैं।  भारत के मुसलमान हर दुसरे रोज़ हिन्दू दहशतगर्दों हुकूमत की गोली का शिकार हो रहे हैं मारे जा रहें हैं फिर भी पाकिस्तानी टीम भारत से मौजूदा दौर में कभी नहीं जीत पाई।  यह कमज़ोर पाकिस्तानी इस हालत में हैं ही नहीं की वोह भारत से पकिस्तानिओं की मौत और ज़लालत का बदला ले सकें।  जो उनको रॉ और हिन्दू दहशतगर्दों की साजिश की वजह से मिलती है।     

पाकिस्तानी जब अपनी क़ौम की मौत का बदला दुश्मन से नहीं ले सकतें हैं तो भारत की ज़ाफ़रानी हुकूमत के ज़ारिये मुसलमानों पर होने वाले मज़ालिम, मौत का कैसे बदला लेंगें।

नवाज़ शरीफ शाहबाज़ तो भारत के ग़ुलाम थे और वोह भारत से ख़ौफ़ज़दा होते थे जबकि इमरान ख़ान से मोदी भोगी योगी और ज़ाफ़रानी दहशत ख़ौफ़ज़दा था तभी उनको तकलीफ़ दी गई।   उन्होंने अमेरिका, भारत और इजराइल के सामने झुकने से इंकार कर दिया और पाकिस्तान पाकिस्तानियों की अज़मत विक़ार को सर ए फेहरिस्त रखा। 

आज ज़ाफ़रानी मीडिया को जो अंगार इमरान ख़ान से लगती है वोह वजह ही वही है हर मुद्दे पर भारत के वजूद और इंटरेस्ट को ज़बरदस्त झटका दिया था। 

अगर ज़ाफ़रानी, यहूद दहशत घबराता है तो वोह नाम इमरान से घबराता है।

सहाफ़ी ज़ुबेर

Friday, 2 February 2024

कांग्रेस रकून ने किया भारत के एक और बटवारे के बिगुल का आग़ाज़।

अज़ीज़ नाज़रीन,

कांग्रेस के आला किरदार रकून पार्लियमान जनाब मौअज़िज़ डीके सुरेश ने बटवारे का बिगुल फूंक दिया है।  

मरकज़ी बजेट पर जवाब देते हुए कांग्रेस रकून पार्लियमान जनाब डी के सुरेश ने बरोज़ जुमेरात को कहा अगर मुख़्तलिफ़ महसूल से वसूल होने वाली रक़म के बटवारे में जुनूब के साथ हो रही नाइन्साफ़ी को दुरस्त नहीं की गई तो जुनूबी सूबे अलहदा मुल्क की मांग करने पर मजबूर हो जायेगें।  उन्होंने मज़ीद दावा किया की जुनूब से जमा रक़म को हुकूमत शुमाली भारत में बाँट रही है, और जुनूबी भारत को उनका माक़ूल हक़ नहीं मिल रहा है। 

कांग्रेस सियासतदां जनाब डी के सुरेश ने एवान में मज़ीद कहा हमारी मांग है की हमें अपने सूबे से जी. अस.टी., सरहद टैक्स और बराहे रास्त टैक्स में अपना हिस्सा मिलना चाहिए।  हम जुनूबी भारत के साथ बोहोत नाइन्साफ़ी देख चुके हम हमारे हिस्से के पैसे को शुमाली भारत में बँटते हुए देख रहे हैं।  अगर आज हम इसकी मज़म्मत नहीं करेगें तो आने वाले दिनों में जुनूबी भारत के लिए एक अलहदा मुल्क की तजवीज़ रखने की नौबत जाएगी। 

कांग्रेस के सियसतदाँ की इस दिलेरी के लिए यह सहाफ़ी उनकी हौसला अफ़ज़ाई करता है।  आज  के नए भारत में जहाँ दहशतगर्दी, गुंडागर्दी, ज़ुल्म, नाइन्साफ़ी, हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम दहशत अपने ऊरूज पर है ख़्वाह उस पर मोदी, योगी, अमित शाह जैसे ज़ालिमों दरिंदों की नस्ल कुशी और इंसानी क़त्ल आम की ज़ेहनियत के होते हुए इस तरह का जारिहाना बयान क़ाबिल तारीफ़ है।    

कम से कम यह तो साबित हो गया की कांग्रेस तंज़ीम और उनके कोई भी नुमाइंदे आने वाले दिनों में मोदी की हिटलर शाही ज़ुल्म और बर्बरियत के आगे झुकने वाले नहीं हैं।  अगर झुकने की नौबत आई तो मोदी हुकूमत को ही झुकना पडेगा नहीं तो होगी मज़ीद तबाही और मौजूदा ख़ाना जंगी पहुंचेगी अपने हतमी मरहले की जानिब।  

जुमेरात का बयान मुस्लिम क़ियादत के मुँह पर एक तमाचा है।  आज के नए भारत में जिस हिसाब से मुस्लिम अवाम को गाये बैल की तरह तसव्वुर कर के हकाला जा रहा है और उनके तमाम इंसानी हुक़ूक़ छीने जा रहें हैं उससे तो बेहतर होता कोई मुस्लिम नुमाइंदा एवान में ना ही होता तो बेहतर होता।   मस्जिदों से ले कर घरों रोज़गार, मज़हब, तालीम, तिब्बी इमदाद, खान पान, पहनावे से ले कर हर मुद्दे पर मुस्लिम हक़ तलाफ़ी की जा रही है।  यहाँ तक की अब तो हिन्दू शिद्दत के सामने उनकी बहिन बेटियां भी मेहफ़ूज़ नहीं हैं।   फ़िर भी एवान के किसी मुस्लिम नुमाइंदों ने कभी यह नहीं बोला अगर हमारी नाइन्साफ़ी बंद नहीं हुई तो हम तोहसीह के बारे में सोच सकतें हैं। 

अमूर अकलियती मामलों के वाज़ारतख़ाने ने अकलियतों के बजट में कटौती कर दी थी।  फ़िर भी तमाम मुस्लिम नुमाइंदे ख़ामोश रहे।  मुसलमानों की स्कॉलरशिप कम कर दी फ़िर भी चारों जानिब ख़ामोशी छाई रही।   मुस्लिम तालिब इल्म और तुलबात को आला तालीम से महरूम कर दिया फ़िर भी ख़ामोशी छाई रही।  मुसलमानों के घरों, रोज़गार, ज़मीन असासे ज़प्त कर उनके ऊपर दहशत गर्द ज़ालिम खूंखार क़ाफ़िरों की बस्ती बसा दी गई, एवांन से नुमाइंदगी ख़तम की गई फ़िर भी ख़ामोशी छाई रही। 

ख़ुदारा अब तो बोलो अपना मुँह खोलो अब जो बटवारे की चिंगारी कांग्रेस ने सुलगाई है उसको बूझने मत दो और मज़ीद उसके अंदर आतिशी मसाले डालते रहो।  

बिलडोज़र से मुस्लिम अवाम को तबाह करने की हिकमत योगी ले कर आया था उसके बाद वोह हिकमत आम हो गई और तमाम हिंदुस्तान में मुस्लिम बस्तियां घर बंगले रोज़गार मस्जिदें मदरसे तबाह किये गए। 

मुस्लिम नुमाइंदों अब तो जागो।  अगर क़ौम के लिए मिल्लत के लिए काम नहीं कर सके तो तुम्हारी एवान में मौजूदगी किसी काम की नहीं है।  और यह वतन से गद्दारी हरगिज़ नहीं होगी।  जब हुकूमत में बैठे हुए लोग सरकार हिन्दू राष्ट्र के लिए काम कर रही है अपने ही बनाये हुए क़ानून को नहीं मान रही है तो तुमको भी हक़ है भारत के बटवारे के लिए मिल्लत के हक़ के लिए काम करो।  अगर वतन वतन खेलते रहे और सरकार मुस्लिम अवाम को तबाह करती रही बिल आखिर जब सब तबाह हो जायेगे तो ना ही तुम्हारा वतन रहेगा और ना ही तुम क़ौम और मिल्लत के लिए हमदर्द साबित होंगे।  कियोंके जब भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा तब तुम्हारा किया बनेगा। 


सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...