Wednesday, 31 October 2018

हाफ नेकर धारिओं और लंगूरों को तोहफा

आधी अधूरी मानसिकता वाले हाफ प्याली चाय संघी हर उस काम को करने में आधे है जिसको के पूरी क्षमता से करना चाहिए.  इन लोगो की मानस्किता ही पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाई है इसलिए ये लोग हाफ माइंड है या क्रेक.  विवाह का नाम आते ही इनको बुखार आने लगता है लेकिन पराई नारी इनको बोहोत ही पसंद है.  और जो विवाह करते है वो पत्नी की इच्छा को अधूरी छोड़ के भाग जाते है.    

संघ का एक पसंदीदा गाना आज कल खूब चर्चा का विषय बना हुआ है, और संघ को इस गाने से खासी चिढ़ और परेशानी हो रही है.  उक्त गाने में संघी और उसके आका को पूरी तरह से नग्न कर डाला है.

जनाब मोदी जी ठहरे आखिर संघी और लगे एक मूर्ती के ऊपर कसीदे पड़ने उनको लगा था २०१९ से पहले पटेल की मूर्ती बनवा के उसको समूचे भारत में लोकप्रियता और यूनिटी की मिसाल पेश करूंगा और इस मूर्ती की बैसाखी लेकर मोदी जी अपने २०१९ के फिर से प्रधान मंत्री बनने की इच्छा को दबाये चल दिए गुजरात की ज़मीन पे. लेकिन ये क्या गुजरात अब पहले जैसा कदापि नहीं लग रहा था और मोदी जी को ज़लील होना पड़ा.  फिर जिस तरह से मीडिया का कवरेज करना था वो भी फ्लॉप शो ही रहा क्योंकि जनता नदारद थी.  जिसके ऊपर इस पत्रकार ने टवीट कर के चुटकी ली है.  २  टवीट बीजेपी को किये है और २ प्रधान मंत्री ऑफिस को किये है.   



Replying to @BJP4India

बेवकूफों कितनी जनता साथ थी, अकेले मोदी जा के मूर्ती राष्ट्र को समर्पित कर दी. जो कुछ थोड़ी बोहोत बीड थी वो मोदी के सुरक्षा कर्मी और संघी आतंकी ही थे. भक्त भी कम नज़र आये. जिस तरह से प्रायोजित किया था ऐसा प्रतीत हो रहा था समूचा विश्व उमड़ आएगा. उस हिसाब से टोटल फ्लॉब शो रहा.




Replying to @BJP4India


जहा तक इस पत्रकार की जानकारी है किसानो और जनता ने मोदी तुम्हारा सुवागत नहीं है के बोर्ड लगाए थे.

Replying to @PMOIndia
Mr. Modi how many people have attended your inaugural function of a statue. Those who attended were your security people and Sanghi Terrorists to safeguard you from possible attack.


Replying to @PMOIndia
In a way you projected the inaugural function it was expected the international people will attend the event but it is a flop show even local people have not come in your function. Reports are coming of play card Modi you are not welcome here by the people.


आखिर कार मोदी जी ने पटेल की मूर्ति राष्ट्र को नहीं अपितु लंगूर पत्रकारों और संघी जनता को ही समर्पित करनी पड़ी. और जिस मूर्ति का नाम स्टेचू ऑफ़ यूनिटी रखा गया था उसमे ना तो हिन्दू शामिल था और न मुस्लिम ना सिख शामिल था और ना ईसाई.  फिर अगर मोदी जी भारत की यूनिटी की बात कर रहे है तो इस यूनिटी में कश्मीर कहा आया जो हिस्सा चीन ने दबा के रखा है वो किधर आया.  

कौन है असली गद्दार, और भारत विरोधी


हिंदी में एक प्रसिद्ध  कहावत है "बद अच्छा, बदनाम बूरा"   जो कांग्रेस शासन के दौरान कई बार सही साबित हुई जब सरकार ने आतंकवाद के आरोप लगाए और मुसलमानों को फंसाया, जबकि असली अपराधी पकड़ से बोहोत दूर थे। बीजेपी शासन में भी यह कहावत सही साबित हुई और उसने भी यही नीति अपनाई है। 

कुछ चुनिंदा सवालों पे मुसलमान सदा है मीडिया कर्मिओं और भगवा समाज के हाशिये पर होते है जिनमे शामिल है

.     आतंवादी कार्यवाही में लिप्त पाए जाना
.     पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति
.     भारत विरोधी रवैया

मीडिया और जनता हमेशा मुसलमानों को संदिग्ध और शक की निगाहो से देखते हैं कि वे राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं, लेकिन क्या वजह है मुस्लिमों में से किसी को भी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में गिरफ्तार नहीं किया गया है। मुस्लिम राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं लेकिन गिरफ्तार हिंदू लोग होते हैं। निश्चित रूप से मुस्लिम नहीं बल्कि बीजेपी और विशेष रूप से संघ के लोग पाकिस्तान से सहानुभूति रखते हैं, जो देश की खुफिया और महत्वपूर्ण जानकारी पाक को मोहिय्या करते है। कुछ प्रमुख मुसलमानों को पकिस्तान और ISI के लिए जासूसी करते देशविरोधी गतिविधिओं में पकड़ा गया है उनके नाम हैं
१.     त्रिलोक सिंह भदोरिया (हिंदू)
२.     कुश पंडित (हिंदू)
३.     मनीष गांधी (हिंदू)
४.     माधुरी गुप्ता (हिंदू)
५.     मोहित अग्रवाल (हिंदू)
६.     ध्रुव सक्सेना (हिंदू)
७.    संदीप शर्मा (हिंदू)
८.     बलराम सिंह (हिंदू)
९.     रितेश सिंह (हिंदू)
१०.   जितेंद्र ठाकुर (हिंदू)
११.   अयचित मिश्रा बीएसएफ जावन (हिंदू)
१२.   निषात अग्रवाल (हिंदू)।

सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस की तकनिकी जानकारी और डाटा पाकिस्तानी खुफिया  एजेंसी ISI को बेचने वाला।  

आजादी के बाद इन सभी वर्षों में 'गद्दार' नाम या पाकिस्तानी केवल मुसलमानों को दिया गया था। मैं मीडिया और पुलिस को चुनौती देता हूं जो एक भी मुस्लिम ले कर आये जिसने देश के संसाधनों पे डाका डाल उनका दुरुपयोग किया और व्यक्तिगत लाभ पाने के लिए राष्ट्र के खिलाफ षड्यंत्र खेला।

जब भारतीय मीडिया को एहसास हुआ कि मुस्लिम धोखेबाज नहीं हैं और ही उन्होंने राष्ट्रीय खजाने का दुरुपयोग किया है और ही वे साजिशकर्ता हैं, लेकिन किसी और ने इसका दुरुपयोग किया है और वही है मुसलमानों को दिए गए बदनामी के नाम और तमगे के पीछे देश के खिलाफ असली साजिशकर्ता ; इसलिए मीडिया खुलेआम बाहर गया है और मोदी की व्यक्तिगत आलोचना शुरू कर दी है। केवल खुले दिमागी पत्रकारों ने बल्कि भक्त और भगवा विचारधारा के पत्रकारों ने भी सत्य समाचार देना शुरू कर दिय हैं। कितने समय तक ये लंगूर काली रात के अंधेरे में किए गए कुकर्मो पाप और गुनाहों को छिपाने की कोशिश करेंगे। 


चूंकि धूल की परत मीडिया कर्मियों की मानसिकता से साफ हो रही हैऔर धुंध वाष्पित हो जाने पर सब कुछ स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जो इंडियन मीडिया अभी तक वेंटिलेटर पर था और इस्लामोफोबिया के कारण एक दशक से अधिक समय तक आईसीयू में रही, जिसके कारण उसके मानसिक दिवालिया होने के बाद उसने अपने सोचने और समझने की शक्ति खो दी थी; अब मिडिया मानसिक दिवालियापन के अस्पताल से ठीक हो रहा है और उसको छुट्टी दी गई है। जल्द ही इस पत्रकार का शोध मुख्य धारा के मीडिया में आएगा कि वर्ष २००२ में साबरमती एक्सप्रेस को जलाना मोदी का मृत भाजपा को 'संजीवनी बूटी' देने के लिए पूर्व नियोजित कार्य था, जो गुजरात में अपना जनादेश खो चुकी थी। जिस बात का ज़िक्र इस पत्रकार ने २०१० से २०१३ के बीच अपने कई लेखों में किया है, तथा गुजरात और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अनुबंधों के साथ पत्र भेजे हैं।
      
लेकिन अभी भी भारत के लोग और मीडिया के एक धड़ा मुस्लिम समाज, मौलाना और मुगलों के लिए मन में घृणा रखते हैवह लोग आलमगीर औरग़ज़ेब रेहमतुल्लाह के खिलफ ज़हरीली भाषा का उपयोग करतें हैं इतना ही नहीं वो अल्लाह के वली  के ऊपर तोहमत लगातें हैं की औरंगज़ेब एक ज़ालिम बादशाह था उन्होंने महिलाओं के साथ ज़िनाकारी की और हिन्दू जतना का क़त्ले आम कियाजिसका ज़िक्र इतिहास में कही भी नहीं हैआलमगीर औरंगज़ेब एक वली सिफ़त बादशाह थे जो माले गनीमत यानि सरकारी ख़ज़ाने से कुछ भी उज्र नहीं लेते थे और अपने गुज़ारे के लिए क़ुरआन लिख के और टोपी बुन के पैसे का इंतज़ाम करते थेये सिर्फ उनकी रूहानियत और बुज़ुर्गी की वजह थी के सिर्फ उनकी बादशाहत में भारत ईरान बॉर्डर से लेकर बर्मा बॉर्डर तक और कश्मीर से लेकर तो कन्यकुमारी तक एक था. तभी उनको लक़ब दिया गया था आलमगीरआज समूचे हिन्दू समाज के मन में जिसमे लंगूर भी शामिल है सिर्फ मुगलों और ख़ास औरंगज़ेब के लिए इतना ज़हर काहे को है उसकी वजह सिर्फ औरंगज़ेब का समूचे भारत पे राज करना हैजबकि हिन्दू राजाओ में किसी में इतनी कुव्वत नहीं थी के समूचे भारत पे राज कर सके जैसे:-  

.     पृथ्वीराज चौहान
.     राणा प्रताप
.     शिवाजी।

उसके उलट सभी हिन्दू राजा टुकड़ों में बटे थे और आपस में ही लड़ते झगड़ते थे और मुगलों ने किया भारत का एकीकरण और दिया एक केंद्रीय नेतृत्वउसी को ये भगवा और हिन्दू समाज हज़म नहीं कर पाते है और इनके ज़हन में ज़हर भर जाता है.

भारत के लोगों की मुसलमानों के खिलाफ गलत धारणा है की वे उस जगह को धोखा देते हैं जहां वे रहते हैं, और जिस थाली में खाते है उसी में छेद करते है या जिसका खाते है उसी को धोखा देते हैं। अब मोदी के बारे में उन लोगों का क्या कहना है। क्या वह गद्दार नहीं है, जिस थाली में खाया उसी में छेद किया, उसने देश के लोगों को धोखा दिया जिन्होंने उस पर विश्वास दिखाया और उन्हें राष्ट्र के शीर्ष प्रशासनिक प्रमुख के रूप में चुना। अब भ्रष्टाचार पर उनके नारे का क्या हुआ। ना खाऊँगा, ना खाने दूंगा।   

See in English version

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...