Sunday, 31 October 2021

अब ख़ाकी दहशत पर हिसार और जायज़ा।

अज़ीज़ नाज़रीन,

भारतीय दहशतगर्द फ़ोर्स के बाद खाकी और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द दिफ़ाई फ़ौजिओं के हाशिये पर आ गए हैं और उनको हिसार में ले लिया है।   दिसम्बर २०१९ से ले कर फ़रवरी २०२० दिल्ली ख़ाकी और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द हमलों में जितने भी मुस्लिम अवाम को शहीद किया था उन तमाम ख़ाकी और ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों और उनको माशी इमदाद करने वाले ज़ाफ़रानी ताजिरों को चुन चुन के मौत की आगोश में भेजा जा रहा है।   इन ज़ाफ़रानी ताजिरों में गुप्ता, अग्रवाल, जैन, मिश्रा, मेहता, मोदी, शाह शामिल हैं।  

इस बार मौत की काली परछाई शहडोल के पुलिस सब इंस्पेक्टर का पीछा करते हुए उसको अपनी आगोश में ले गयी।   यहाँ पर एक सब इंस्पेक्टर हिरा सिंह परस्ते ने पहले अपनी बीवी को देश के गद्दारों को गोली मारो बीवी को उस नारे को सच्चा कर के गोली मार दी फिर खुदकश हमलावर बन के खुद को गोली मार ली।  अब ना रहा गद्दार और ना रहा साला, एक ही झटके में सब घोटाला हो गया काला।  रीवा जहाँ पर मज़मून निगार सहाफी जुबेर ने अपनी ज़िन्दगी के बेशक़ीमती २ साल गुज़ारे हैं।   उस ज़िले से उनको इश्क़ की चेतना का एहसास हुआ।   वोह ख़ाकी दहशतगर्द हिरा सिंह परस्ते भी रीवा ज़िले के पनवार थाने का मुलाज़िम था।   उसकी मौत के वक़्त वोह रीवा से शहडोल आया हुआ था।  दर हक़ीक़त उसकी मौत उसकी काली परछाई बन कर उसको रीवा से शहडोल खेच कर ले गयी।   

तेरी परछाई देख में तेरे पीछे आया

ख़ाकी दहशतगर्द शहडोल के पटेल नगर कॉलोनी में एक किराए के मकान में रह रहा था।  बरोज़ हफ्ते सनीचर खाकी दहशतगर्द हिरा सिंह शहडोल पंहुचा और एक कमरे में अपनी बेटी को ज़ोरदार आवाज़ में टीवी चालू कर के दुसरे कमरे में जा कर पहले अपनी अहलिया को गोली मारो ग़द्दारो को इस नारे सच्चा कर दिया फिर खुद को गोली मार के हलाक कर लिया।   दोनों की मौक़े पर ही मौत हो गई।

पुलिस ने दोनों की लाशों को अपने क़ब्ज़े में ले कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है, मज़ीद आगे की तफ्तीश का आगाज़ किया है।    

हरयाणा, उत्तराखंड, शुमाल, दिल्ली, राजिस्थान और मध्य प्रदेश में दिफ़ाई फौजी पहले ही खाकी दहशत के ऊपर क़ेहर बन कर टूट चुके हैं।   और आये दिन खाकी दहशत मौत की आगोश में भेजे जा चुके हैं।नाज़रीन गुजिश्ता महीने भोपाल में दो तीन खाकी दहशतगर्दों को फ़ासी दी  जा चुकी हैं।   पिछले हफ्ते भारतीय फ़िज़ाई तय्यारे को भोपाल के नज़दीक दीफ़ाई फ़ौजिओं ने तबाह कर दिया था।  

नाज़रीन भोपाल कुछ याद आया जी हाँ यह वही भोपाल है जहाँ पर आतंकवादी दरिंदे शिव राज ने बेगुनाह ५ मुसलमानों को सिमी का कारकून बोल कर खाकी आतंकवादिओं के हाथों शहीद करवा दिया था।   बदला तो बदला होता है जैसे की सरपच ने झूठा बयान दिया था की सभी के हाथों में लाठिया थी और वोह पत्थर उछाल रहे थे और आज़ादी आज़ादी के नारे लगा रहे थे।   उसके बाद रायसेन में सरपंच का भी काम तमाम किया जा चूका है।         

Zuber

कश्मीर में ३ हिन्दू दहशतगर्द हलाक़।

अज़ीज़ नाज़रीन,

कश्मीर में पाकिस्तान की अज़ीम फतह पर भारतीय दहशत अमलपेरा हो गई थी और कश्मीरी तालिबे इल्मों को गिरफ्तार किया गया था।   उसका बदला अब एक एक से लेंगें।  पहली क़िस्त चूका दी गई है।  जहाँ कश्मीर में भारतीय आतंकी फ़ोर्स (संघी आर्मी) के दहशतगर्द हलाक कर दिए गए हैं।   हालांकि इन में से एक सिख भी था जिसको मारते वक़्त हमें अज़हद तकलीफ हुई।  लेकिन मसला वही फस जाता है दुश्मन के साथ जंग फिर उसमे जो भी दुश्मन के ख़ेमे में खड़ा होगा उसको मारने का हमको हुकुम रहता है।

कल बरोज़ हफ्ता (सनीचर) भारत के क़ब्ज़े वाले कश्मीर के लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल (LoC) के नज़दीक ज़िल्हा राजोरी के नौशेरा सेक्टर में एक ज़ोरदार धमाके में एक हिन्दू दहशतगर्द के चिथड़े उड़ गए और मदीद दो मारे गए एक सिख जवान भी मारा गया है, लेकिन उसका शव सलामत है।  मारे गए तीसरे दहशतगर्द की तस्दीक़ नहीं हो पाई है।      

भारतीय दहशतगर्द फ़ोर्स की जानिब से बयान जारी कर मारे गए जवानों की तस्दीक़ की गयी है।   जिनमे से एक की पहचान बिहार का बेगूसराय  का लेफ्टनेंट कर्नल ऋषि कुमार के रूप में हुई है वहीँ दुसरे की तस्दीक़ सिपाही मंजीत सिंह की है जो पंजाब के भटिंडा ज़िल्हे के रहने वाले थे।  भारतीय दशशतगर्दों ने हिन्दू दहशत का मारा गया ऋषि कुमार की मौत पर बाल्टी भर भर आंसू बहाये हैं।  और उसको बहादुर बोल कर खिताब किया है।      

नाज़रीन एक बात वाज़े रहे की हर इंसान की अपनी अपनी पसंद और नापसंद होती है।  मोहब्बत कब किस से हो जाए उसके ऊपर किसी का ज़ोर नहीं होता।  जिस अंदाज़ में क्रिकेट में पाक की जीत पर खुशी का इज़हार करने वालों पर केसेस लादे जा रहें हैं उससे तो यह मोहब्बत के बांड को मज़ीद मज़बूत करने की हिकमत होगी।   फिर किसी पसंदीदा टीम की जीत पर इज़हारे खुशी करना वतन के साथ गद्दारी जैसे अमल कैसे हो सकतें हैं।   तुम जितना बंदिशे लगाओगे मज़ीद मोहब्बत उभर कर आएगी।   क्योंकि हर मोहब्बत इम्तेहान भी लेते है और क़ुर्बानी भी मांगती है।   हमारी पाक मोहब्बत भी क़ुर्बानी मांग रही है और इम्तेहान भी हम दे रहें हैं। 

Zuber

Saturday, 30 October 2021

पाकिस्तान आप हमारे क़ल्ब में बस्ते हैं।

अज़ीज़ नाज़रीन,

हाल ही में पाकिस्तान ने हिन्दू क्रिकेट टीम को आलमी टी-२० कप के पहले ही मैच में शाकिस्त दे कर तारीख़ के सफों में नए उन्वान का आगाज़ कर दिया।   गुजिश्ता ७० सालों में किसी भी आलमी क्रिकेट में पाकिस्तान ने कभी भी भारत को शाकिस्त नहीं दी थी, उस तारीख़ को पाकिस्तान ने तब्दील कर डाला।   पाकिस्तान की इस अज़ीम फतह पर पाक क्रिकेट टीम के फेन्स ख़ासे खुश हुए।   नाज़रीन जिस तरह हर शख्स का अपनी इज़हारे खुशी और ग़म का एक पैमाना होता है उसी तर्ज़ पर सहाफियों, दानिशमंदों, सियासतदानों का भी अंदाज़े बयां उनकी खुशी और ग़म का इज़ाहर करता है।   पाकिस्तान की फतह पर सहाफी जुबेर जो ना सिर्फ पाकिस्तान की क्रिकेट टीम बल्कि पूरे पाकिस्तान के फैन हैं।  उन्होंने अपनी खुशी का इज़हार अपने मज़मूनों के ज़रिये किया।

भारत की इस शाकिस्त पर पाकिस्तान के अज़ीम वज़ीरे दाख़ला भी ख़ासे खुश नज़र आये।  उन्होंने इस जीत को आलमे इस्लाम की जीत तसव्वुर किया।   अब क्रिकेट को मज़हब से जैसे ही उन्होंने मुनसलिक किया की भारत के ज़ाफ़रानी कीड़े कुलबुलाने लगे।  ज़ी न्यूज़ का तिहाड़ जेल का सज़ाई आफ़ता मुजरिम सुधीर चौधरी, मोदी की बांदी देसी कट्टा अंजना ॐ, फ़ौज की ग़द्दार स्वेता वग़ैरा अपने अपने अड्डों पर क्रिकेट को मज़हब से जोड़ने के ऊपर भोंकने लगे।    इन लोगों की शायद यादाश्त कमज़ोर है,  जब २००७ में पाकिस्तान से भारत टी-२० आलमी कप जीता था तब कैसे कैसे तास्सुरात आ रहे थे।   धोनी जैसे एक आम इंसान को राम के रूप में दिखाया गया था।   ट्रॉफी को राम मंदिर और बस को रथ की शकल दे कर तमाम भारत में फिरवाया गया था।  भारत की उस फतह को "जीत लिया पाकिस्तानऔर "हिन्दू योद्धाओं ने अधर्मियों से धर्म युध जीता", ऐसे उन्वानों से मुख़ातिब किया गया था।  इतना ही नहीं बीजेपी के ज़ाफ़रानी सियासत दान उनके ज़हरीले बोल भूल गए हिंदुस्तानी जो आज पाकिस्तान के ऊपर तनक़ीद कर रहें हैं। २००७ की उस जीत को बीजेपी और संघ ने हर इंतेखाब यहाँ तक की २०१३-१४ तक भुनाया था और उसमे ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ भी शामिल थे जो आज पाकिस्तान के वज़ीरे दाख़ला पर तनक़ीद कर रहें हैं।

जब तमाम भारतीय तनक़ीद की इस बहती गंगा में हाथ धो रहे थे तो हमारी तंज़ीम के रहनुमा असदुद्दीन कैसे इस तनक़ीद से अलहदा रह जाते।       

असद भाई ने पाकिस्तानी वज़ीर की ज़बरदस्त तनक़ीद की और ओछी ज़ुबान का इस्तेमाल भी किया।  जो ज़ुबान ओमूमन संघी दहशत, ज़ाफ़रानी कीड़ों के लिए की जाती है जिनको क़तल करने का हुकुम है।  वोह ज़ुबान उन्होंने एक मोमिन पाकिस्तान के वज़ीर के लिए की।  एक जानिब असदुद्दीन बोलतें हैं हमें पाकिस्तान से क्या करना है और दूसरी तरफ पाकिस्तान के सबर में लौट रहे थे।  यह कैसी सियासत है के असदुद्दीन को भी पाकितान को कौसे बगैर पेट में दर्द होना बंद नहीं होता। अरंडी का तेल क्यू नहीं पीते।

आगे असदुद्दीन बोलतें हैं पाकिस्तान सुनों तुम भारत से बोहोत पीछे हो तुम भारत का मुक़ाबला नहीं कर सकते।  जिस हिन्दू राष्ट्र (काफिर मुल्क) भारत को तुम बोल रहे हो बोहोत आगे है उससे पाकिस्तान बोहोत आगे है। जो आशियात इलेक्ट्रिकल लेडर, शॉपिंग मोल, गैस पाइप लाइन हमने पाकिस्तान में १९७९ में देख ली थी। जो आइसक्रीम मशीन से कोन में आइसक्रीम ट्री बनाते हैं वोह हमने १९७९ में शॉपिंग मॉल के बहार खाया था वोह सब चीज़े १९९५ या २००० में भारत में बंबई जैसे शहर में आयी हैं। 

असद उद्दीन मज़हबे इस्लाम का दर्स पाकिस्तान जैसे अज़ीम मुल्क के वज़ीर को देतें हैं।   भलां क्रिकेट का मज़हबे इस्लाम से क्या लेना।   मज़ीद असद साहब पाकिस्तानी वज़ीरे दाखला को पागल तक क़रार दे देंतें हैं।  इन असद साहब को हिन्दुस्तानी दरिंदा और दहशतगर्द कुलभूषण जादव की फ़ासी पर पाकिस्तान को दीने इस्लाम सिखाने पर पहले ही धो चूका हूँ।  उसके ऊपर एक मज़मून लिखा है, जिसमे असद साहब को सच्ची इस्लाम की तालीम दी है और जिस दरिंदे संघ के दहशतगर्द ने मुसलमानों का क़त्ले आम किया एक इस्लामिक रियासत को तोड़ने की साजिश की उसकी सज़ा के बारे में बता चूका हूँ।   मज़ीद क्रिकेट और इस्लाम में क्या ताल्लुक़ हो सकता है उसके ऊपर बताता हूँ। 

किसी दो मुमालिकों के दरमियान जब जंग होती है तो हर मुद्दे पर लड़ाई होती है. क्रिकेट क्या, ज़ुबानी, ज़ेहनी, या नफ़्सानी हर चीज़ जंग करती  है.  फिर कुफ्र और हक़ के दरमियान जब जब हालात ऐसे बने तो हर महाज़ पर जंग जैसे हालात हुए।   फिर इस जंग का आगाज़ ना पाकिस्तान ने किया है और ना ही मुसलमानों ने किया है।  २०१९ के इंतेखाब को धर्म युध का नाम किसने दिया था।  भोपाल में दहशत और रावण की सीता जीती थी तब उसके क्या तास्सुरात थे ज़रा मुल्हाइज़ा कीजिये।  यह जंग पाकिस्तान के ऊपर भारत के शिद्दत पसंद काफिर और हिन्दू दहशत ने मुस्सल्लद की है ना की पाकिस्तान की जानिब से जंग का आगाज़ हुआ है।  अब आप बताओ हक़ बनाम बातिल या कुफ्र बनाम इस्लाम की जंग में आप किस जानिब हो,  हक़ के सब्ज़ परचम के नीचे या कुफ्र के ज़ाफ़रानी परचम के  नीचे.

असद साहब को एक मशवरा है आप अपनी सियासत करो।  काफिरों की चमचा गिरी मत करो. आपकी ऐसी ही बातें मुसलमानो के वोट में बटवारा करती है. आप शुमाली सूबे में इंतेखाबी मरहले में हिस्सा लेने आएं हैं या पाकिस्तान में। दूसरी बात सूबे शुमाल का इन्तेख़ाब और पाकिस्तान की बात लिंक कहाँ से कहाँ तक बैठ रहा है। लेकिन हाँ संघ और बीजेपी का खौफ साफ़ दिख रहा है। उनके दबाव और ख़ौफ़ की वजह से ऊल जलूल बक रहे हो। क्या मिलेगा यह सब कर के बल्कि आप अपने ही वोट में बटवारा कर रहे हो मतलब बीजेपी का साथ दे रहे हो।  पाकिस्तान की बात कर के आपको क्या हासिल होगा यह इंतेखाब सूबे का है पार्लियामेंट का नहीं है। 

आपको लगता है संघ या बीजेपी से धमकी आई है।   सूबे का वज़ीर एक दरिंदा सिफ़त, ज़ाफ़रानी क़साई है वोह कब किस को हलाक कर दे कुछ कहते नहीं आता।   और आप अभी सूबे शुमाल की हदों में हैं।  जैसा उसने आपको हुकुम दे दिया आप ने वैसा ही बोल दिया।

आज पाकिस्तानी इंग्लैंड अमेरिका में आला ओहदों पर फ़ाइज़ हैं। क़ानून साज़ों के हेड ऑफ़ दी डिपार्टमेंट हैं और आप इलज़ाम लगाते हो की पाकिस्तान ने आलम को क्या दिया है।  अगर आज हमारे बुज़ुर्ग वहां चले गए होते तो हमें रशीद साहब जैसे लोगों के पागल पन को ठीक करना पड़ता।

आप हमेशा पाकिस्तान को कोसते हुए देखे जा सकते हो, संघ और BJP के दबाओ में काम करते हो।  आप वज़ीरे दाखला को बोलते हो की तुम्हारी नस्ले बर्बाद होंगी, इस तरह की ज़ुबान एक मुसलमान मुल्क की नस्लों के लिए कहाँ तक जाइज़ है।  वोह आप ही थे पुलवामा के बाद  पाक पर मोदी से हमले की सिफारिश की थी।  तबाह कर दो अगर पाकिस्तान तबाह हुआ तो मरेंगे मुस्लिम।  जबकि पुलवामा में किस का हाथ था उस वक़्त तो यह पता भी नहीं चला था।   बाद में सब बातें इस सहाफी ने शफ़्फ़ाफ़ कर दी की पुलवामा मोदी और बीजेपी का इन्तेख़ाब को जीतने के लिए किया हुआ अमल है।   सबूत के साथ मज़मून लिखा है, १३ फ़रवरी को संसद का इजलास ख़तम हुआ और १४ को पुलवामा मोदी को मालूम था की अब कोई इजलास होना नहीं है फिर जंग की हवा बांदी।  हगामी इजलास भी नहीं हो सकते थे क्योंकि राये शुमारी की हदें नाफ़िज़ हो चुकी थी।  

आप भारत से मोहब्बत कीजिये अपने मुल्क के लिए ख़ैर का जज़्बा रखिये लेकिन जब भी आप भारत बा मुक़ाबिल पाकिस्तान या मुसलमानों से करेगें तो आप इस सहाफी को अपने मुक़ाबले में खड़ा पायेगें।  और आपकी ज़ुबान से कई गुना तेज़ है मेरी ज़ुबान।  फिर जब आपके और हमारे दरमियान ज़ुबानी जंग का आगाज़ होगा तो नुकसान तो उम्मा का ही होगा।  और यही संघी चाहते हैं मुसलमानों को ही आपस में लाडवा दो।  आप भारत के मुसलमानों की आवाज़ हो, उम्मत का दर्द भी है काम करने का जज़्बा है लेकिन उसको लायानी बातों में फरामोश मत कीजिये।  पाकिस्तान में क्या हुआ, पाकिस्तान ने क्या किया  उससे आपको क्या करना है।     

Zuber

Tuesday, 26 October 2021

मेरी पाक मोहब्बत, तुम्हारा धर्म युद्ध या लव जिहाद।

अज़ीज़ नाज़रीन,

हाल ही में बाबारे आज़म की क़ियादत में पाकिस्तान ने टी-२० आलमी क्रिकेट मैच में भारत को १० विकेट से शाकिस्त दी।   इधर पाकिस्तान जीता उधर भारत की टीम के चाहने वालों के यहाँ मातम पसर गया।   पाकिस्तान के जीतते ही तमाम भारत में अँधेरा छा गया और रौशन भारत को रात को पूरी लाइटें बंद कर के अँधेरे में ग़र्क़ाब करने का आगाज़ हुआ।

उसके बाद इल्ज़ामात का दौर शुरू हुआ, फिर क़ुर्बानी किसी की तो देना थी, अब बली का बकरा ना मिला तो गाये को ही ज़िबाह कर डाला।  जी हां नाज़रीन इस क़ुर्बानी देने में सबसे बेहतर कौन हो सकता था सो मोहम्मद समी को ज़ाफ़रानी ट्रोल आर्मी ने ट्रोल किया और उस हद तक ट्रोल किया की उनके सोशल मीडिया के तमाम एकाउंट्स पर बेहद अदना दर्जे की गाली गलोच, पाकिस्तान परस्त, ग़द्दार जैसे अलफ़ाज़, रिश्वत ख़ौरी के इलज़ाम यहाँ तक की ज़ाती इलज़ाम भी लगा दिए गए।  

अब यह बात इस सहाफी को कहने में ज़र्रा भर गुरेज़ नहीं है की टीम इंडिया में १२ खिलाड़ी थे और सभी नाकाम साबित हुए।   फिर कमो बेश खिलाड़िओं ने गेंदबाज़ी की जो सभी नाकाम साबित हुए फिर अकेले मोहम्मद समी को हाशिये पर लेने के पीछे उनका मज़हब ही है।   और यह ज़ाफ़रानी ज़ेहनियत का अदना दर्जा है की अगर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोई भी मुसलमान अपनी बेहतरीन कारगरदेगी करते हुए भी नतीजे नहीं दे पाया तो उसको पाकिस्तानी और गद्दार बोल दिया जाता है।  और यही शिकायत इस सहाफी की तमाम मुस्लिम अवाम से है अगर तुमने भारत के लिए अपनी गर्दन भी कटवा ली तो यह संघी, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद हिन्दू कभी तुमको वतन का वफादार नहीं समझेगें।   बल्कि तुम्हारी क़ुर्बानी में भी वोह बोल देंगें की उसको तो गर्दन कटवाने का शौक़ था वतन की मोहब्बत में गर्दन थोड़ी कटवाई है।  तुम्हारे हर अमल पर तुमसे भारत की वफादारी का सबूत मागेंगे। 

उसके बाद बीजेपी के सियासी दीमकों ने इस मुद्दे पर अपना और तंज़ीम का सियासी नफ़ा देखने का आगाज़ कर दिया।  जम्मू में हिन्दू और घाटी के अवाम ने पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाया।  उसके ऊपर बवाल मच गया गिरफ्तारियों का दौर शुरू हुआ।   लेकिन इसमें भी मुत्तसिब और फ़िरक़ापरस्त ज़ेहनियत गिरफ्तार किये गए सिर्फ ख़ास मज़हब के बच्चे थे जबकि जम्मू के अवाम को हिदायत दे कर जाने दिया गया।  जो ज़ाफ़रानी दीमक पाक की जीत के जश्न पर तनक़ीद कर रहें हैं और ऊल जलूल बयान बाज़ी कर रहें हैं में उनसे एक सवाल करता हूँ।

क्यों भाई यह क्या शिद्दत पसंद काफिरों की हिटलर शाही है की जो भारत में रहें उसी की इबादत करें और उस ही टीम की जीत पर खुशियां मनाये, उसी के बारे में सोचे उससे आगे सोच ही नहीं सकता।  इंसान उसी की जीत और हार पर खुशी और सौग बनाता है जिससे उसकी मोहब्बत होती है।  और तुम लोगों ने तो मोहब्बत पर क़ैद लगा दी है अब जज़बात और एहसासात पर भी बंदिश लगा रहे हो।  हर इंसान की अपनी पसंदीदा टीम होती है, और वोह उसके लिए चीयर करता है अब किसी की टीम पाकिस्तान पसंदीदा है तो किसी की हिंदुस्तान।   फिर अपनी पसंद की टीम के जीतने पर अगर कोई खुशी का इज़हार कर रहा है तो तुम उसके इज़हारे ख़यालात और जज़बात पर ग़द्दारी का तमग़ा कैसे लगा सकते हो। 

बिल फ़र्ज़ जिस रोज़ भारत हारी थी उस रोज़ हिन्दू अक़ीदत मंदों के लिए कोई खुशी का मौक़ा होता, और वोह खुशी का इज़हार करते भारत की हार को फरामोश कर के तो क्या उनके ऊपर भी  वही फलसफा लगाते जो आज बीजेपी की दीमकें झूठे और बेबुनयाद इलज़ाम लगा कर मुस्लिम अवाम को हरासा करना चाहती है।  अपनों की खुशी हर कोई मनाता है उसमे वतन परस्ती और ग़द्दारी कहाँ से आ गई।    

अब बीजेपी वाले, संघी और शिद्दत पसंद हिन्दू हर मुद्दे पर मुस्लिम अवाम को हाशिये पर ले लेते हैं भले ही उनकी गलती हो या ना हो।   चलिए आपका फलसफा मान लिया की हिंदुस्तानी टीम से मोहब्बत का इज़हार करो।  लेकिन एक तरफा मोहब्बत कैसे ख़ुशगवार नताइज देगी।   हम हिंदुस्तानी टीम की मोहब्बत बा दिले नखास्ता कर लेंगें लेकिन जब किसी मुस्लिम लड़के और हिन्दू लड़की की मोहब्बत सामने आये तो उसको लव जिहाद का नाम मत देना। 

यहाँ पर हिन्दू शिद्दत को दो बातें वाज़े करना चाहता हूँ, पहली तुम्हारी ज़ेहनियत दोगली है तुम लोग हर उस मुद्दे पर बवाल करते हो जिसमे तुमको सियासी नफा दिखता है।   भारत से मोहब्बत का तो महज़ एक बहाना है, ऐसा कर के तुम सियासी नफा देख रहे हो।  बिलफार्ज पाकिस्तान की जीत पर किसी ने पटाखे जलाये या इज़हारे तश्क्कुर किया तो इतना वबेला क्यू मचाया जा रहा है। अगर बीजेपी वाले, संघी, इन्तेहापसन्द हिन्दू भारत की टीम से मोहब्बत करने की बात करतें हैं ठीक है हम हमारे दिल को भारत की टीम के लिए फ़ारिग़ रखेंगे। लेकिन अगर किसी हिन्दू लड़की से किसी मुस्लिम लड़के की मोहब्बात हो जाए तो लव जिहाद, हिन्दू खतरे में आ जायेगे और ना जाने क्या क्या बोल कर एक्शन मत लो। तुम ही तो क़ानून बना रहे हो ना। फिर मोहब्बत भी हम उसी से करेगें जिससे दिल मिलेगा। ठीक है तुम अपने क़ानून वापिस ले लो और पुलिस हिन्दू लड़की और मुस्लिम लड़के की शादी मोहब्बत के मुद्दे पर कोई एक्शन ना ले तो हम हिन्दुस्तान की क्रिकेट टीम के लिए सोच सकतें हैं। 

दूसरी बात लड़के और उसके घर वालों को पूरा इख़्तेयार होगा की वोह हिन्दू लड़की को अपने इस्लाम मज़हब पर चलाएं, फिर हिन्दू लड़की की किसी भी क़िस्म की कोई भी शिकायत और अर्ज़ी पर ग़ौर ना किया जाए, की मुझे ज़बरदस्ती इस्लाम क़ुबूल करवाया जा रहा है, कियोंके ऐसी शिकायतें आम तोर पर हिन्दू दहशतगर्दों के दबाव में आ कर दी जातें हैं, उनका हक़ीक़त से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है।

यही हिन्दू दहशत का दोग़ला और दोहरी नीति है एक जानिब मोहब्बत करने को कहते हो दूसरी जानिब मोहब्बत करने पर क़ानून बनाते हो गिरफ्तार करते हो.  मेरा एक ही फलसफा है या तो मोहब्बत करो या नफरत, फिर मोहब्बत करो तो माशूक़ की हर चीज़ से मोहब्बत होती है और नफरत में तो कोई गुंजाइश ही नहीं है.

Zuber

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...