अज़रबाइजान की अर्मेनिया पर ज़बरदस्त फतह के बाद अब दीफाई फौजों का कश्मीर की जानिब कूच करने का अज़्म हो चूका है। नाज़रीन जैसा की इस सहाफी ने अर्मेनिया और अज़रबाइजान के दरमियान दौराने जंग हर वक़्त इस बात का इज़हार किया था, की अज़रबाइजान की जीत के बाद अज़री फौजें मसला ऐ कश्मीर में पाक का साथ देंगी। क्योंकि जंग में पाक, तुर्की ने खुले दिल से अज़रबाइजान का साथ दिया था। अर्मेनिया के साथ भारत और इजराइल थे, और उन्होंने अर्मेनिया की मदद की थी। जंग फतह करने के बाद हूकूमते अज़र ने मुसर्रत ज़ाहिर की थी और पाक तुर्की को मुबारकबाद दी थी। मज़ीद कहा था अज़री हुकूमत पाक का साथ एक सच्चे हमसाये की तरह देगी और किसी भी मसले पर पाक के साथ शाना बा शाना खड़ी होगी। जिस तरह मुश्किल वक़्त और हालात में पाक तुर्की हुकूमत और फौज ने अज़रबाइजान का साथ दिया है, वोह क़ाबिले तारीफ़ है।
ज़राये इत्तेला मालूम हुआ है की मसलाये कश्मीर को जंग से हल करने के लिए तुर्की भी साथ आ गया है। गुजिश्ता ३०-४० सालों से अज़रबाइजान के नागोर्नो-काराबाख और दिगर इलाक़ों में जिस तरह से अर्मेनिया ने नाजाइज़ क़ब्ज़ा कर रखा है और अवाम को सख़्त तरीन अज़ीयत देंतें हैं उसी तर्ज़ पर कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, आसाम, जूनागढ़, निज़ाम हैदराबाद में भारत ने ७० सालों से ना जाइज़ क़ब्ज़ा कर रखा है और एक ख़ास मज़हब के अवाम को सख़्त तरीन अज़ीयत और ज़ुल्म का शिकार होना पड़ रहा है तो उसी तर्ज़ पर भारत से भी वोह तमाम इलाक़े खाली करवाने होंगे। अर्मेनिया की हार के बाद फ़ौरन अपने एक मज़मून में इस सहाफी ने कहा था जिस तरह अज़रबैजान ने अर्मेनिया के ३०-४० साल के नाजाइज़ क़ब्ज़े का धुव्वा निकाल दिया उसी हिसाब से भारत का कश्मीर पर ७० साल पुराना क़ब्ज़ा भी ख़तम जंग से ही होगा।
फिल वक़्त कश्मीर की आज़ादी के लिए तुर्की खुल के सामने आ गया है और उसने अपनी फौज को कश्मीर भेजने की तैयारी कर ली है। तुर्की फौज के सरबराह ने कुछ दिनों क़ब्ल अपने मेंबरान से कहा था की अंकारा चाहता है की वोह कश्मीर में भारत के ज़ुल्म, नाजाइज़ क़ब्ज़ा, क़त्लो ग़ारत, खातूनों की इज़्ज़त रेज़ी या इज्तेमाई इज़्ज़तरेज़ी को बंदूकों और मिसाइल से तोले।
यह है अपना वीर तुर्की पाक जैसा ना भोला था, भारत की ताक़त को जिसने बंदूकों से तोला था।
फौज के ब्रिगेडियर ने कहा है तुर्की फौज के आला ओहदेदारों से राब्ता क़ायम करने के बाद एक तहरीर में इन कमांडरों और फौज के आला ओहदेदारों की एक फेहरिस्त तैयार की जाएगी जो कश्मीर जाना चाहतें हैं।
पाक के बाद अब तुर्की फौज भारत के हिन्दू दहशतगर्दों के खिलाफ जंग में सामने आ गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ सीरिया के बाद अब तुर्की फौज को कश्मीर में मौजूद भारत के हिन्दू दहशतगर्दों के खिलाफ भेजने की तैयारी कर चूका है। अब कश्मीर में भारत की हिन्दू दहशत के खिलाफ पाक के साथ तुर्की और आज़रबाइजान भी आ गए हैं। मालूम रहे की हाल ही में आज़रबाइजान ने तुर्की और पाक की मदद से भारत और इजराइल समर्थित जंग में अर्मेनिया को धुल चटा दी थी और आज़रबाइजान ने अपने खोये हुए इलाक़े अर्मेनिया से वापिस हासिल किये थे।
ख़ैर जो भी होगा वोह तो बोहोत ही भयानक, डरावना और ख़तरनाक़ होने वाला है। इससे क़ब्ल हर मज़मून में इस सहाफी ने इस बात का इज़हार किया था की वज़ीरे आज़म इमरान ख़ान लाख कोशिश कर लें लेकिन कश्मीर मसला जंग से ही हल होगा। बातचीत की तमाम पेशकश नाकाम साबित होंगी। और अब हालात वैसे ही नज़र आ रहे हैं। दूसरी बात ज़ाफ़रानी दहशत ने जितने ज़ुल्म करना थे कर लिए अब तो तबाही देख रहा है यह सहाफी।
जब जंग शुरू होगी तो वोह महज़ कश्मीर तक महदूत नहीं रहेगी बरक्स कश्मीर, हिमाचल, हरयाणा, उत्तर प्रदेश, आसाम, जूनागढ़ ना जाने क्या
क्या पाक के क़ब्ज़े में चला जाएगा। साधू बोहोत
उछल कूद कर रहा है तमाम ज़ुल्मों सितम का बदला एक ही झटके में ले लिया जाएग।
यह सहाफी तो खुल के पाक फौज को चीयर करेगा और पाक के साथ होगा, उसकी दो वजूहात हैं एक क़ुरान का सुरा अल इमरान पारा ४ में ईमान वाले मुसलमानों को हिदायत की इस्लामिक रियासतों की सरहदों की हिफाज़त करो। दूसरी वजह भारत से क्या मिला है सिर्फ ज़ुल्म, ज्यात्ति, क़त्ल, नाइंसाफी, मुफलिसी, ग़ुरबत, बेरोज़गारी, जहालत। अगर मुस्लिम अवाम को रोज़गार में नहीं बल्कि तालीमी इदारों में रिज़र्वेशन देने की बात होती थी तो सबसे पहले ज़ाफ़रानी कीड़ों को खुजली होती थी। तो भारत से एक तरफ़ा मोहब्बत हम कभी नहीं करेगें। भारत की जानिब से मोहब्बत का कोई सबूत मिला ही नहीं।
अब हम भी भारत के साथ नहीं हैं जिसने हमसे मोहब्बत की उसी की बात करेंगे। पाक ने
अपनी मोहब्बत का इज़हार मुस्लिम अवाम के लिए किया और मुसलमानों पर दुखों के लिए अपने
पैगाम भेजे और भारत सरकार से उनको कम करने को कहा. जंग होगी तो हमारी पूरी हमदर्दी सबसे पहले पाक के
लिए सरे फेहरिस्त होगी।
मोहब्बत का भी पैमाना होता है। जैसा इस सहाफी ने देवी चंद्रलेखा जी के मोहब्बत के पैग़ाम और उनकी जानिब से की गई इज़हारे मोहब्बत का जवाब अपने ही अंदाज़ में शेरो शायरी में ही दिया है। मेरी चाहत पर अगर उनका फिर कोई जवाब ना आया तो वोह होगी मेरी एक तरफ़ा मोहब्बत। लेकिन उनकी जानिब से हाँ का जवाब मिला अगरचे वोह नज़म और शेरो शायरी की तर्ज़ पर भी मिल गया जिसमे हमारा नाम ख़ान का मज़ीद ख़ुलासे में ज़िक्र होगा तो वोह होगी दो तरफा मोहब्बत। देवी चंद्रलेखा शेरो शायरी के ज़रिये अपने इश्क़ का इज़हार करें और Youtube पर डालें तो हो जाएगी दो तरफा मोहब्बत।
इस सहाफी ने अपनी एक नज़म में लिखा है हुई बोहोत ज़हरीली बातें चल करे अब दो मीठी बातें।
इससे ज़ाहिर है जंग के बाद मोहब्बत का पैग़ाम आम होगा।
जुबेर
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