Thursday, 17 December 2020

करोना वेक्सीन शिफा ऐ मर्ज़ या ज़हर।

 अज़ीज़ नाज़रीन,

आज बोहोत ही अहम मुद्दे पर आप हज़रात के रू बरू आया हूँ, ज़रा मज़मून का पूरा मोतला करें।  नाज़रीन गुजिश्ता एक साल से ज़ाइद यानी नवंबर २०१९ से अभी तक तमाम आलम एक कुदरती वबा के क़ेहर से तबाह हो रहा है।   ख़ास यह वबा उन्ही मुमालिकों में क़ेहर बरपा कर रही है जो सख़्त ज़ालिम ना इन्साफ और इंसानियत के दुश्मन होते थे।   जिन्होंने हक़ीक़ी दहशत को तो फ़रोग़ दिया बरक़्स मासूम अवाम को अपनी बंदूक, मिसाइल और बम के गोलों से शहीद किया।  या ना जाइज़ क़ैद कर रखा है।   

नाज़रीन मई २०२० में जब वेक्सीन की ईजाद की बड़ी बड़ी बातें हो रही थी और भारत भी वेक्सीन को ख़रीद फ़रोख़्त करने वाले मुमालिकों की लिस्ट में सरे फेहरिस्त था।  हर रोज़ नए खुलासों के साथ ख़बरनामों की पहले सफ़ों की सुर्ख़ियां भरी पड़ी थी।   उस वक़्त मेरे बड़े फ़र्ज़न्द ने मुझसे पुछा पापा वेक्सीन के आने के बाद यह अमवात का सिलसिला रुक जाएगा और हम जंग जीत जायेगे ऐसा वज़ीरे अज़ाम मोदी जी का कहना है।  मेने उस के वेक्सीन के बाद अमवात रुक जाएगी इस इत्मीनान को मज़ीद सवालों के घेरे में खड़ा  कर दिया, जब उसको कहा नहीं रुकेगी बल्कि अमवात और दो गुनी बढ़ जाएगीजिस जिस अवाम ने वेक्सीन ली होगी यह तस्सव्वुर कर के की हमको अब करोना वबा कुछ इज़ा नहीं पहुंचा सकती उसको दो गुनी तकलीफ का सामना करना होगा।    इस ज़िम्न में हक़ीक़ी बयान बताता हूँ। 

हज़रते मूसा मालिके कायनात के अज़ीम शान पैग़म्बरों में से एक थे, जिनको यह शर्फ हासिल था की अल्लाह से बराहे रास हम कलाम होते थेना कोई पैग़ाम लाने वाला फरिश्ता और ना कोई ज़राये ऐ राब्ता। सीधा एक दरख़स्त के ज़ेरे साये बात पूछते और आस्मां से उसका जवाब आता।  तभी उनका लक़ब कलीमुल्लाह दिया गया यानी हमकलाम होने वाला। एक रोज़ मूसा कलीमुल्लाह नबीयूना के पेट में शदीद दर्द हुआ। दर्द की शिद्दत इतनी बढ़ गई के बर्दाश्त के बहार हो गई।  आप तूर पर पहुंचे और अर्ज़ की या बारी इलाहा मेरे पेट में शदीद दर्द है क्या करूँ।   निदा आई मूसा तूर पर एक जड़ी बूटी है उसको तोड़ो उसका अर्क़ निकाल कर पी जाओ शिफा होगी।   

चुनाचे उन्होंने ऐसा ही किया और उनको शिफा हुई।   कुछ अर्से के बाद फिर वही दर्द हुआ।  अब मूसा कालीमुल्लहा ने सोचा वही मर्ज़ है जिसकी दवा बारी इलाहा पहले ही बता चूका है, गए तूर पर वही जड़ी तोड़ी अर्क़ निकाल कर पी गए।  लेकिन अर्क़ पीने के बाद शिफा तो दूर दर्द की शिद्दत दो गुनी हो गई फिर तूर पर पहुंचे और अर्ज़ की या बारी इलाहा फिर से वही तकलीफ है तो निदा आई मूसा अगर पहले ही हमारे पास चले आते तो इतनी तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता।   अर्ज़ की या बारी इलाहा मर्ज़ भी वही दवाई भी वही जो तूने बताई थी फिर एक बार शिफा दूसरी बार सज़ा ऐसा क्यों।   निदा आई मूसा शिफा हमने हमारी मशीयत में रखी है ना की दवाई में।  पहले हमारी मर्ज़ी थी की तुम सेहतयाब हो दूसरी बार नहीं थी।  

इस बात से बताने का मक़सद वही है की शिफा देना और मर्ज़ को दुरुस्त करना माशियते इलाही पर मुन्नसर है ना की किसी जर्राह या तबीब के हाथ में है।  हाँ अल्लाह ने उनको ज़ारिया बनाया है, हाँ मर्ज़ होने पर दवाई लेनी चाहिए और डॉक्टर के पास भी जाना चाहिए, लेकिन गुमान यह कर लेना की हमने दवाई पी ली है तो अब हमें दुनिया क्या कायनात की कोई ताक़त कुछ इज़ा नहीं पंहुचा सकती गदगुमानी है गुमराही है।   

अगर दवाई में ही शिफा होती तो हालाते हाजरा में दिल्ली के वज़ीरे सेहत सतेंद्र जैन करोना वबा से मुत्तासिर हुए, दवाई ली मज़ीद बीमार पड़े, फिर कुछ ज़हन ने काम किया होगा और मालिके कायनात के सामने अपने गुनाहों का एतेराफ किया होगा और दवाई को छोड़ कर मालिक को याद किया होगा सेहत हुई।   वहीँ राम विलास पासवान वबा से मुत्तासिर हुआ और हठधर्मी दिखाई मारा गया। 

ताज़ा मामला हरयाणा का वज़ीर अनिल विज करोना से मुत्तासिर हुआ वेक्सीन ली मज़ीद हालात बद से बत्तर होते चले गए।   यह वही अनिल है जिसको मुस्लिम अवाम, इस्लाम, पाकिस्तान, कश्मीर से लिल्लाही बुग्ज़ और कीना है।   हर उस मसले पर ज़हरीली सोच जिससे मुस्लिम अवाम की दिल आज़ारी होती है।  उसके बयानात की पाकिस्तान, कश्मीर, बाबरी, ट्रिपल तलाक़, लव जिहाद, मुग़ल, ताज, का, एन आर सी, गौ कुशी, पर और बोहोत से मुद्दों पर एक लम्बी फेहरिस्त है।  वेक्सीन लेने के बाद भी आज मौत और ज़िन्दगी की जंग लड़ते हुए पड़ा है।        

नाज़रीन, जैसा की मेने मेरे हर मज़मून हर तब्सिरों में इस बात की पुर ज़ोर वकालत की है की हर शिद्दत पसंद हिन्दू, हर बीजेपी वाला, हर संघी मारा जाएगा उसकी वजह ही मेरा अपने रब पर कामिल ईमान है।  क्योंकि हर संघी, बीजेपी वाला, शिद्दत पसंद हिन्दू ज़ालिम होता है ज़ुल्म करना उसकी फितरत होती है दूसरी बात वोह अल्लाह उसके पैग़म्बर क़ुरान, बुर्जुर्गाने दीनों का माखौल उड़ाते थेआसमानी किताब। ७२ हज़ार हूरें। और क्या कहते थे।   नाज़रीन इन शिद्दत पसंद ज़ालिमों को कुछ सबूत तो हाल ही के कुछ दिनों में ताज़ा मिल गए।  कुछ मज़ीद मिलना बाक़ी हैं।  

जैसा की अम्बानी की लुगाई ने ट्वीट किया था की १४०० साल पहले लाउडस्पीकर तो होते नहीं थे फिर इनका अल्लाह सुनता कैसे था, जो आज यह लोग लाउडस्पीकर पर चिल्ला चिल्ला कर अल्लाह को जगाते हैं।   दूसरा उसने बोला था तमाम मुसलमान मक्कार होतें हैं और उनको अल्लाह ने सुधारने के लिए एक पैग़म्बर भेजा था लेकिन वोह अमित होगा यह नहीं बताया था।   उसके इस तरह के ना ज़ेबा ट्वीट के बाद तो उसकी निकल पड़ी है।   अब उसको भी भली भाँती यक़ीन हो गया होगा की अल्लाह सुनता कैसे है।  कैसे एक झटके में सुनी।  

दूसरी बात इस अम्बानी की लुगाई की लुगाई के यहाँ बेटा होने पर जो खुशियां बनाई जा रही हैं उसको क्या पता की वोह किस मुस्लिम या पाकिस्तानी का बीज है।  वाल्दैन का डी.एन.. टेस्ट करवा लो पता पड़ जाएगा,  अगर वालिद का डी.एन.. अम्बानी के लड़के से मैच नहीं हुआ तो ज़ाहिर हो जाएगा की अम्बानी की लुगाई के शिकम में ९ माह तक पल रहे बीज की जो ख़ातिर की गई वोह किसी और का है।  फिर जिस अंदाज़ में मुस्लिम अवाम पर तंज़ कसा था अब इस अम्बानी की नस्ल भी मुस्लिम ही बढ़ायेगें। 

नाज़रीन बताने का मक़सद वही है जिस तरह से दवाई में शिफा नहीं बल्कि अल्लाह की मशीयत में होती है उसी तरह जदीद आला तरीन हथियारों से जंग फतह नहीं होती, बल्कि फतह अल्लाह की मशीयत से होती है।  १९७१ की जंग पर तमाम कोंग्रेसी शिद्दत पसंद और भारत के संघी दहशतगर्द सेना से किनारा काश हुए अफसर, पाकिस्तान के लिए ज़हरीली ज़ुबान का मुज़ाहेरा करते नहीं थकते थे।  चीर दिया, फाड़ दिया दो टुकड़े कर दिया हमारी फौज आला तरीन हमारे पास जदीद हथियार।   हर वक़्त अपने हथियारों का मुज़ाहेरा और फेहरिस्त दिखाना और उसको पाक के हथियारों और फौज से मुवाज़ना (Comparison) मुक़ाबला करना।   एक बार हुआ हर बार ना होगा।   जंग हथियारों से नहीं बल्कि अल्ल्हा की मर्ज़ी से जीती जाती है।   क्योंकि अल्लाह ज़ालिमों के साथ नहीं है।  उस वक़्त पाक फौज ने बंगलादेशी अवाम पर ना जाइज़ ज़ुल्म किया तो वोह हारे और अब तुम वही मुस्लिम अवाम के साथ कर रहे हो तो कैसे जीतोगे।  

कुल मिला कर इस सहाफी का कामिल, सख़्त, सो फीसद यक़ीन है की अगर अल्लाह ने ज़ालिम फौजों (संघी दहशत), बीजेपी वालों और शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम को तबाह बर्बाद करने का इरादा कर लिया तो नस्ले बर्बाद होगी, और ज़रूर होंगी।   ना कोई वेक्सीन काम आएगी और ना ही जदीद हथियार आला तरीन फ़िज़ाई तय्यारे, ना ही बोहोत बड़ी फौज, क़वी रक़बा, कसीर अवाम सब धरे के धरे रह जायेगे।   ३१३ निहत्ते, बोसीदा कपड़ों वाले असहाब की लाखों करोड़ों काफिर फोजों और उनके आला तरीन हथियारों पर फतह तारीख़ में गवाही देती है।  लेकिन शर्त यही है हर मोमिन को अपना कामिल ईमान करना होगा, अपना खुद का महज़बा करना होगा की क्या काम वोह ख़िलाफ़े शरीयत कर रहा है और क्या काम करने का उसको शरीयत ने इजाज़त दी है।   रहा सवाल लव जिहाद जैसे मामलों पर भारत के क़ानून और इस्लामिक क़ानून में अगर जंग हो तो इस्लामिक क़ानून को फ़ौक़ियत दो भारत का क़ानून टूट जाए तो फ़िक्र नहीं लेकिन इस्लाम का दामन और क़ानून नहीं टूटना चाहिए तभी मदद मिलेगी।    अगर इश्क़ किया है तो लड़का या लड़की को पहले कलमा पढ़वाओ इस्लाम में दाखिल करो फिर निकाह।  गिरफ्तारी करतें हैं तो करने दो ज़ालिमों को बिल आखिर फतह तुम्हारी होगी। 

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...