अज़ीज़ नाज़रीन,
Please look at the English version of this article.
Let us change the name Muslim.
मुस्लिमों के नाम को तब्दील या मजलिस इतेहाद से इसे हटाने के हतमी फैसले पर पहुंचने से क़ब्ल आइए हम मज़मून पर एक बारीक़ नज़र डालें।
अमूमन हमने ऐसा देखा है कि मजलिस में लफ्ज़ मुस्लिम शिद्दत पसंद काफिर, भाजपा (भारतीय जनखा पार्टी) के मेमब्रान, संघ और यक़ीनन कुछ शिद्दत पसंद कांग्रेसी और सहाफियों को जलन दे कर परेशान कर रहा है। वे हमेशा खुद को जमहूरी फ्रेम वर्क के पीछे छिपा रहे हैं लेकिन मुस्लिम नाम से उनकी जलन, हसद पूरी तरह से उजागर हो रही है।
हाल ही में ग्रेटर हैदराबाद बल्दिया के इन्तेख़ाबात में मुस्लिम इत्तेहाद की मजलिस के मेमब्रान ने शानदार मुज़ाहेरा किया और अपने गुजिश्ता रिकॉर्ड को बरक़रार रखा। भाजपा -२ ने १९४८ में निज़ाम -१ को तबाह करने वाली बर्बाद करने वाली भाजपा -१ के नक़्शे क़दम चलते हुए भाजपा -२ ने निज़ाम -२ के क़िले पर कब्जा करने की नाकाम कोशिश की थी। भाजपा-२ अपने ज़हरीली, फ़िरक़ापरस्त, नफरत की उल्टी के ज़रिये निज़ाम २ की इज़्ज़त में दरअंदाज़ी (घुसपैठ) करने के लिए बेताब थी।
बीजेपी -२ की तमाम कोशिश नाकाम साबित हुई, और उनकी क़ुव्वत ज़ाइल हो गई। अब उन्होंने खुद साबित कर दिया कि वे पेनेट्रेशन करने के लिए हिजड़े हैं उनके अंदर इतनी क़ुव्वत और ताक़त नहीं है। जबी तो बीजेपी -२ पोटेंसी रेट (स्ट्राइक रेट) तीसरे नंबर पर है, जबकि निजाम -२ को जबरदस्त पोटेंसी रेट मिला है, जो अभी भी हैदराबाद में एक नंबर पर काबिज है।
हस्बे मामूल और हस्बे रिवायत हर इन्तेख़ाब के बाद बीजेपी की ढोल ताशे वालों की टीम अपने आक़ाओं के लिए ढोल पीटने लगे। ढोल वाले में से एक ने सांसद इम्तियाज जलील से पूछा कि आपकी पार्टी का नाम मुस्लेमीन क्यों है क्योंकि यह सेकुलरिस्म, दस्तूर और जम्हूरी निज़ाम की खिलाफ़वर्ज़ी वाला अमल है। हमें आपकी तंज़ीम में लफ़्ज़े मुस्लिम से एतेराज़ है। फिर भी आप खुद को जम्हूरियत का मुहाफ़िज़ रूप में पेश कर रहे हैं।
मैं असदुद्दीन ओवेसी और मजलिस के सरबराह से गुज़ारिश करता हूं कि वे ऑल इंडियन मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लेमीन से पार्टी का नाम बदलकर "पाक मजलिस के सभी मेमब्रान" या "ऑल इंडिया मजलिस के पाक मेंबर्स" कर दें। अब मुझे नहीं लगता कि पाक नाम से किसी को कोई परेशानी होगी। जैसा कि यह पाकीज़गी और साफ़ सफाई की अलामत है। दूसरी बात यह है कि ऐसा करते हुए, हम अपने मक़बूल वज़ीरे आज़म मोदी के नक़्शेक़दम पर चल रहे हैं, और उनके मिशन "स्वच्छ भारत" को आगे बढ़ा रहे हैं।
जैसा कि हमें पाक लफ्ज़ से रूहानी, मज़हबी, अलामती और ख़ुदाई झुकाव मिलता है, मुझे नहीं लगता कि पाक लफ्ज़ को इख़्तेयार करने बाद किसी को एतेराज़ होगा या कोई एतेराज़ उठाएगा। अब किसी को यह नहीं लगना चाहिए कि यह ख़िलाफ़े दस्तूर अमल है और आईन के दायरे में नहीं है। जैसा कि अल्लाह तआला पाक, उसके पैगंबर पाक है, सभी रूहानी और बुज़ुर्गाने दीन पाक थे। अल्लाह तआला पाक है इसीलिए वह पाकिज़गी को पसंद करता है। और पाकिज़गी निस्फ़ ईमान है।
में बतौर मजलिस के ग़ैर रस्मी मेंबर और असदुद्दीन अकबरुद्दीन के वफादार होने के नाते मुझे उम्मीद है कि पार्टी मेरे नुक़्ता ऐ नज़र को पहचान लेगी। दूसरे, जैसा कि ये लोग जमहूरियत के बारे में बोल रहे हैं, तो मेरी तंज़ीम उन्हें आईना दिखाएगी कि मजलिस अपने अनौपचारिक मेंबर के जज़बातों की भी इज़्ज़त करती है।
मेरी राये एक दम वाज़े है, अगरचे आप अपने मुख़ालिफ़ के लिए एक मसला हैं तो आपके मुख़ालेफ़त में वे हर जगह परेशानी पैदा करेंगे। अगर आप वतन की खातिर अपनी गर्दन काटेंगे, तो वे इसे कभी भी वतनपरस्ती की अलामत की हैसियत नहीं कहेंगे, बल्कि वे अपने नुक़्ता ऐ नज़र को दुरुस्त ठहराने के लिए ख़ामियों की ईजाद और खोज करेंगे कि आप गद्दार हैं और आपकी बहादुरी और वतनपरस्ती के अमल को बदनाम करेगें।
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