अज़ीज़ नाज़रीन,
भारत की ज़ाफ़रानी ग़ुलामी हासिल करने के बाद धीरे धीरे पड़ोसियों के साथ साथ आलमी बरादरी में भी भारत आउट या भारत के सामान के बायकाट की मोहीम तेज़ हो गई है।
मालदीव के बाद अब बंगलादेश में भी इंडिया आउट और उसके मसनूआत (प्रोडक्ट्स) को बॉयकॉट करने की मोहीम तेज़ी पकड़ रही है। जिस तरह मोहम्मद मुइज्जू ने भारत के ज़ाफ़रानी ज़हर को अपने “इंडिया आउट” मोहीम के साथ मालदीव के सदर राष्ट्रपति इन्तेख़ाब को जीता, और अब उस ही तर्ज़ पर बंगलादेश भी चल पड़ा है। हालांके मालदीव ने ज़ाफ़रानी ज़हर और ग़लीज़ नापाक पानी को अपने पाक वतन से निकालने के लिए चीन का साथ माँगा थ। बंगलादेश की एहम मुख़ालिफ़ तंज़ीम को भी ऐसा ही करना चाहिए और "इंडिया आउट" के नारे पर इन्तेख़ाब में ऐसा ही वादा करना चाहिए अगर मुंतख़िब हो कर आये तो भारत के हर साज सामान की होगी हकाल पट्टी और भारत के साज सामान को आतिशे ए नार कर के उसकी होलिका जलाई जाएगी।
नाज़रीन क्या आपको पता है जिस पाकिस्तान को मोदी, योगी और तमाम ज़ाफ़रानी हुकूमत ख़ूब पानी पी पी कर कोसते हैं उस पाकिस्तान ने ही सबसे पहले "इंडिया आउट" का नारा भारत की जानिब से पुलवामा पर ग़लत बयानी करने और पाकिस्तान के ऊपर हमला करने की झूटी ख़बरों के बाद दिया था। आज वोह नारा हर मुस्लिम मुल्क इख़्तेयार कर रहा है। अभी तो भारत की बोहोत फ़ज़ीहत होने वाली है। कश्मीर पर पेलेट गन से अवाम को गोली मारने और कश्मीरी अवाम की नस्ल कुशी के बाद भारत पर हथियार बंदी की गई है। अब आर्थिक बहिष्कार होगा।
नाज़रीन जिस अंदाज़ में २०१४ के बाद हिंदुस्तान में ज़ाफ़रानी हुकूमत ने मुसलमानों का क़त्ल ए आम किया है, मस्जिदें, मदरसों को तबाह किया है मुस्लिम इकॉनमी को मुनज़्ज़म हिकमत ए अमली के साथ बर्बाद किया है। या तो मुस्लिम ज़मीने झूठे इलज़ाम लगा कर हुकूमत ने डाका डाल दिया या उनके बंगले कोठियां तोड़ कर अब वहां हिन्दू सेंटर्स को बसाया जा रहा है। यह सब बातों के नतीजे में बंगलादेश में भारत मुख़ालिफ़ हवा चल पड़ी है। जिसको कुछ बंगला देश के सहाफ़ी और सोशल मीडिया हैंडल "भारत का बहिष्कार" के मुवाफ़िक़ में लिखे गए मज़मून को मज़ीद फ़रोग़ दे रहे हैं।
नाज़रीन जब मालदीव से ज़ालिम, दरिंदा सिफ़त इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मन भारत के फौजियों की पहली खेप दिल्ली पहुंची थी तब मेने अपने अंग्रेज़ी मज़मून में यही लिखा था। मालदीव जैसे छोटे से जज़ीरे ने यूं.ए.ई. के बादशाहों को राह दिखाई है। मुहम्मद माइज़्ज़ु का अमल उनके आला ईमान को साबित करता है जब्कि यूं.ए.ई. के बादशाहों का भारत के हिटलर ज़ालिम दरिंदे और भारत के क़वी रक़बे से ख़ौफ़ खाना उनके अंदर अदना दर्जे के ईमान को साबित करता है।
नाज़रीन जब मालदीव, बंगलादेश इंडिया
आउट कर सकतें हैं तो दुनियां के ५७ मुस्लिम मुल्कों के हाकिम कियों ऐसा नहीं करतें
हैं। भारत को मुस्लिम नस्ल कुशी, मुसलमानों
की बर्बादी, मस्जिदें-मदरसे तोड़ने और वोह ज़मीन हड़प करने की सज़ा तो मिलनी ही चाहिए। फिर अक़वाम ए मुताहिदा में भारत के ख़िलाफ़ नस्ल कुशी
का केस बोहोत पुख़्ता है। ज़ाफ़रानी हुकूमत ने
हर वोह काम किया है जो अक़वाम ए मुताहिदा के नाफ़िज़ क़रारदार की ख़िलाफ़ वर्ज़ी करता है और नस्ल
कुशी की क़िस्म में आता है। जिसमे भारत पर हुकूमत
के ज़ेरे इंतज़ाम दहशतगर्दी भी साबित होती है।
अमेरिका, जेर्मनी, मुत्तहिदा योरोप, कनाडा भारतीय हिटलर शाही और जब्र पर पहले ही ख़ासे ख़फ़ा हैं।
सहाफ़ी ज़ुबेर