Thursday, 28 March 2024

अब बंगलादेश ने आँख दिखाई "भारत आउट" नारा हुआ आम।

अज़ीज़ नाज़रीन,

भारत की ज़ाफ़रानी ग़ुलामी हासिल करने के बाद धीरे धीरे पड़ोसियों के साथ साथ आलमी बरादरी में भी भारत आउट या भारत के सामान के बायकाट की मोहीम तेज़ हो गई है।    

 

मालदीव के बाद अब बंगलादेश में भी इंडिया आउट और उसके मसनूआत (प्रोडक्ट्स) को बॉयकॉट करने की मोहीम तेज़ी पकड़ रही है।  जिस तरह मोहम्मद मुइज्जू ने भारत के ज़ाफ़रानी ज़हर को अपने “इंडिया आउट” मोहीम के साथ मालदीव के सदर राष्ट्रपति इन्तेख़ाब को जीता, और अब उस ही तर्ज़ पर बंगलादेश भी चल पड़ा है।  हालांके मालदीव ने ज़ाफ़रानी ज़हर और ग़लीज़ नापाक पानी को अपने पाक वतन से निकालने के लिए चीन का साथ माँगा थ।  बंगलादेश की एहम मुख़ालिफ़ तंज़ीम को भी ऐसा ही करना चाहिए और "इंडिया आउट" के नारे पर इन्तेख़ाब में ऐसा ही वादा करना चाहिए अगर मुंतख़िब हो कर आये तो भारत के हर साज सामान की होगी हकाल पट्टी और भारत के साज सामान को आतिशे ए नार कर के उसकी होलिका जलाई जाएगी।  

नाज़रीन क्या आपको पता है जिस पाकिस्तान को मोदी, योगी और तमाम ज़ाफ़रानी हुकूमत ख़ूब पानी पी पी कर कोसते हैं उस पाकिस्तान ने ही सबसे पहले "इंडिया आउट" का नारा भारत की जानिब से पुलवामा पर ग़लत बयानी करने और पाकिस्तान के ऊपर हमला करने की झूटी ख़बरों के बाद दिया था।   आज वोह नारा हर मुस्लिम मुल्क इख़्तेयार कर रहा है।  अभी तो भारत की बोहोत फ़ज़ीहत होने वाली है।  कश्मीर पर पेलेट गन से अवाम को गोली मारने और कश्मीरी अवाम की नस्ल कुशी के बाद भारत पर हथियार बंदी की गई है।  अब आर्थिक बहिष्कार होगा।  

नाज़रीन जिस अंदाज़ में २०१४ के बाद हिंदुस्तान में ज़ाफ़रानी हुकूमत ने मुसलमानों का क़त्ल ए आम किया है, मस्जिदें, मदरसों को तबाह किया है मुस्लिम इकॉनमी को मुनज़्ज़म हिकमत ए अमली के साथ बर्बाद किया है।  या तो मुस्लिम ज़मीने झूठे इलज़ाम लगा कर हुकूमत ने डाका डाल दिया या उनके बंगले कोठियां तोड़ कर अब वहां हिन्दू सेंटर्स को बसाया जा रहा है।  यह सब बातों के नतीजे में बंगलादेश में भारत मुख़ालिफ़ हवा चल पड़ी है।  जिसको कुछ बंगला देश के सहाफ़ी और सोशल मीडिया हैंडल "भारत का बहिष्कार" के मुवाफ़िक़ में लिखे गए मज़मून को मज़ीद फ़रोग़ दे रहे हैं। 

नाज़रीन जब मालदीव से ज़ालिम, दरिंदा सिफ़त इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मन भारत के फौजियों की पहली खेप दिल्ली पहुंची थी तब मेने अपने अंग्रेज़ी मज़मून में यही लिखा था।  मालदीव जैसे छोटे से जज़ीरे ने यूं.ए.ई. के बादशाहों को राह दिखाई है।  मुहम्मद माइज़्ज़ु का अमल उनके आला ईमान को साबित करता है जब्कि यूं.ए.ई. के बादशाहों का भारत के हिटलर ज़ालिम दरिंदे और भारत के क़वी रक़बे से ख़ौफ़ खाना उनके अंदर अदना दर्जे के ईमान को साबित करता है। 

नाज़रीन जब मालदीव, बंगलादेश इंडिया आउट कर सकतें हैं तो दुनियां के ५७ मुस्लिम मुल्कों के हाकिम कियों ऐसा नहीं करतें हैं।  भारत को मुस्लिम नस्ल कुशी, मुसलमानों की बर्बादी, मस्जिदें-मदरसे तोड़ने और वोह ज़मीन हड़प करने की सज़ा तो मिलनी ही चाहिए।  फिर अक़वाम ए मुताहिदा में भारत के ख़िलाफ़ नस्ल कुशी का केस बोहोत पुख़्ता है।  ज़ाफ़रानी हुकूमत ने हर वोह काम किया है जो अक़वाम ए मुताहिदा के नाफ़िज़ क़रारदार की ख़िलाफ़ वर्ज़ी करता है और नस्ल कुशी की क़िस्म में आता है।  जिसमे भारत पर हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम दहशतगर्दी भी साबित होती है।  

अमेरिका, जेर्मनी, मुत्तहिदा योरोप, कनाडा भारतीय हिटलर शाही और जब्र पर पहले ही ख़ासे ख़फ़ा हैं। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Monday, 25 March 2024

गाये के गोश्त से ले कर शौचालय तक।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज की कहानी थोड़ी मज़ाहिया थोड़ा सा तन्ज़िया सिर्फ़ ऐसे लोगों के लिए है जो सिर्फ़ अक़ीदत में अंधे हो गए हैं।   फिर ऐसे नाबीना अक़ीदत मंद (अंध भक्त) ना तारिख जानते हैं ना उनके अंदर इल्म है,  रही सही ज़हानत भी अदना दर्जे की भरी हुई है।  कियोंके दिमाग़ में ज़ेहन नहीं ज़हर और अंध भक्ति का गोबर भर रखा है।  मुस्लिम हाकिमों और मौजूदा दौर में मुसलमानों के कपडे पहन कर उनकी नक़ल करते हैं लेकिन उसमे भी पकडे जातें हैं।  

मघद, पाटलिपुत्र हसीना पुर की हाकिमियत कमज़ोर पर कमज़ोर होती जा रही थी।  जिससे राजा के दिल में अवाम की बग़ावत और अपनी हाकिमियत खो देने का एक ख़ौफ़ पनप रहा था।   

अब राजा के किसी भी झूठे वादों और जुमलों पर अवाम मज़ीद यक़ीन करने को तैयार नहीं था।  नए वादे करने से क़ब्ल अवाम उसको पहले के जुमले मुकम्मल करने की नसीहत दे रहा था।  उनको उसके तमाम वादे अब महज़ जुमले दिख रहे थे।  "वोह एक जुमला था", "चुनाव जीतने के लिए सब करतें हैं।  ऐसे कोई किसी को १५ लाख रूपये और करोड़ नौकरियां नहीं देता है"  यह आप भी जानते हैं जनता भी जानती है।  एक महान गोबर, ज़हर, झूठ की पैदावार करने वाला चनकिया तड़ी पार मुजरिम के क़ौल।

नस्ल कूशी, नाइंसाफ़ी, धीमा ज़हर, धोखा, क़त्ल, डाका ऐसे तमाम जुर्म में मुलव्विस होने के साथ साथ राजा पर अब एक बोहोत ही सघीन जुर्म साबित हो चूका था।  ताहम इतने तमाम जुर्म साबित होने के बाद राजा पर बदउनवानी (भ्रष्टाचार) का एटम बोम राजा के ऊपर कर गिरा।   जिसने राजा की इज़्ज़त, हैसियत और तंज़ीम को पाश पाश कर डाला।          

राजा इस बात से काफी दुखी था की उसके तमाम राज़ फ़ाश हो गए।  जो गंदगी वोह अभी तक बंद कमरों में करता था दुनियां वालों के सामने उसकी बदकारी, हरामख़ोरी ज़ाहिर हो गई।  लेकिन अवाम को राजा की मुनाफ़ेक़त से ज़्यादा इस बात पर गुस्सा था की जिन मुद्दों पर उसके अक़ीदत मंद मुस्लिम अवाम को मौत देते थे उन ही मुद्दों पर उसने वसूली और उगाही की।  "हिप्पोक्रेसी की भी सीमा होती है"  झूठवादी राजा धीरेन्द्रचन्द्र

गोमांस के झूठे इलज़ाम में मुस्लिम अवाम को मौत देने वाले राजा के अक़ीदत मंद यह देख कर बोहोत ही आहात हुए की राजा ने उन कंपनियों से भी पैसा खाया है जो गोमांस का बिज़नेस करती थी।   फिर जिस मुल्क पाकिस्तान को दुश्मन बता कर इंतेखाब में खूब उसके नाम से राजा वोट लेता था उस मुल्क ने भी राजा को भीक दी थी।  उस मुल्क से भी करोड़ों डॉलर की वसूली और उगाही की गई थी।   

राजा को घूमने फिरने का खूब शौक़ था।  वोह ज़्यादातर ख़लीज मुल्क में जा कर मस्जिदों और मदरसों के बाहर भीक माँगा करता था।  फ़िर किसी अरब बादशाह ने राजा को भीक दे कर उसके भगवान को ही ख़रीद लिया।  उस पर भी राजा बोहोत खुश हुआ  राजा को खुश देख कर  उसके अक़ीदत मंद खुशी से आसमान तक उछल गए।  लेकिन उनको यह नहीं मालूम था की उनका भगवान बिक चूका है उसमे कोई खुशी ज़ाहिर करने जैसी चीज़ नहीं है।  

एक बार राजा अरबी शहंशाह के यहाँ मेहमान बन कर गया उसके साथ उसके अक़ीदत मंद (भक्त) और नकलची बन्दर भी गए।   नक़लची बंदरों ने सोचा की हम शहंशाह की शान में कसीदे कसेगें तो वोह हमको इनाम देगा।  जब हमारे भगवान को भीक में ख़रीद सकता है तो हमारी  हैसियत और औक़ात ही क्या है मुफ़लिस मुल्क के गाये के पीछे मुँह लगाने वाले गलीज़ लंगूर हैं हम। 

राजा किसी की भी मेहमानवाज़ी क़ुबूल करते वक़त एक शर्त होती थी मुझे आपके यहाँ के पाख़ाना और पेशाब घर दिखाओगे। फ़िर उस ही तर्ज़ पर वोह अपने देश में शौचालय बनवाता था।  

उस अरब बादशाह के यहाँ गाये के गोश्त पर उसकी ज़बीहे पर कोई क़ैद नहीं थी।  बादशाह के हर खाने में गाये के गोश्त की अक्सरियत होती थी।  बरियानी,  कोरमा, भुना, तिक्का हर तरीके का गाये के गोश्त का खाना होता था।  राजा दस्तरख़ान पर बैठा खाना शुरू हुआ अरबी बादशाह के किसी ख़ास ने बोला आली जा बरियानी बोहोत लज़ीज़ बनी है।  सब ने बादशाह की वह वही की और लज़ीज़ बोलने वाले शख़्स को इनाम दिए।  यह देख कर फ़क़ीर राजा का ख़ास कारिंदा जो वज़ीर ख़ारजा था दिल में आरज़ू हुई के वोह कुछ अरबी बादशाह की शान बयान करे तो उसको, उसके राजा को भगवान् को भीक देने के बाद हमको भी भीक में कुछ मिल जाए।  उसने अपने पड़ोस में बैठे शख़्स से पूछा "लज़ीज़" क्या होता है।  उसने कहा उम्दा अच्छा।  अब बारी आई पाख़ाना देखने की।  

अरबी बादशाह के शाही महल में पाख़ाना भी वैसे ही शाही अंदाज़ में बने हुए थे।  फ़क़ीर राजा और उसका वफंद पैखाने गया।  और आने के बाद राजा के कारिंदे को बादशाह को उनकी ही जुबांन में कुछ बोल कर खुश करना था।  सो उसने नक़ल की लेकिन अक़ल नहीं लगाई, और बोल बैठा आली जा

आपका पाख़ाना बोहोत ही लज़ीज़ बना था हमारे राजा और उनके वफंद ने टेस्ट कर लिया

हम हमारे मुल्क में जा कर आपके ही पख़ाने बनवायेगें और तमाम अवाम को तक़सीम करेगें।  जो अवाम आपके पखाने घर में बनाएगा हम उसको सहूलियत भी देगें।     

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...