Wednesday, 28 April 2021

करोना फौजियों की ज़बरदस्त यलग़ार

सहाफी जुबेर

लखनऊ उत्तर प्रदेश २८, अप्रैल २०२१

करोना के साथ जंग में ज़ाफ़रानी फौजियों और उसके एरिया कमेंडेण्ट्स की हर दुसरे मौत से दहशत की कमर तोड़ डाली है।  इस बार बरेली के नवाबगंज से बीजेपी का एरिया कमेंडेन्ट रकूने असेंबली केसर सिंह गंगवार ढेर हुआ है।  उसको करोना फौजियों ने घेर का मौत की नींद सूला दिया।  मरने से पहले वोह करोना फौजियों से ना मारने की भीक मांग रहा है।   श्री राम की क़सम अब में कभी हिन्दू मुस्लिम नहीं करूंगा। और ना ही ऐसा नारा दूंगा अयोध्या तो झांकी है मथुरा काशी अभी बाक़ी है।  इस दहशतगर्द के ढेर होने से बीजेपी नामक दहशत की पालनहार और उसकी मददगार की बोलती बंद हो चुकी है।   इस हफ्ते का बीजेपी का यह तीसरा बड़ा दहशतगर्द करोना फ़ौजिओं ने ढेर किया है।  

गुजिश्ता हफ्ते केसर सिंह करोना फौजियों से घिर गया था।  उसको शदीद ज़ख़्मी हालत में शिफा खाने में दाखिल किया गया था।  उसका इलाज़ शिफा खाने में शुरू किया गया था।   लेकिन साधू का प्रदेश जहाँ आम दिनों में ज़रूरी साज़ सामान की कमी होती है तो दौराने जंग तो हालात मज़ीद पेचीदा होते हैं।   वैसे भी आज कल उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की क़िल्लत, दवाइयों की क़िल्लत, जो भी आला तालीमी आफ़ता जर्राह थे उनको योगी ने अपनी अना के चलते या तो जेल भेज दिया या फिर उनसे बदला लेने की वजह से उनको मुलाज़मत से निकाल दिया तो अब नतीजा वोही भुगत रहा है।  ऐसी सूरत में बेहतर इंतज़ाम ना होने की वजह से केसर सिंह की हालत बिगड़ती गई, और आखिर कार वोह मौत और ज़िन्दगी की जंग हार गया। 

केसर सिंह के फ़रज़न्द विशाल गंगावार ने अपनी तकलीफ सोशल मिडिया पर भी बयान की थी, लेकिन उसका कुछ ज़्यादा असर नहीं दिखा कियोंके अगर विशाल की अपील के बाद केसर को बचा लिया जाता तो बात सही होती। 

यह कुदरती वबा हर उस इंसान को ख़ौफ़ज़दा कर रही है जिसने अपनी ज़िन्दगी में कुछ तो नाइंसाफी और किसी की हक़तल्फ़ी की है।  हर मुद्दे पर फरेब इख़्तेयार करना और हिन्दू मुस्लिम बना कर अवाम की तवज्जो ही असल मुद्दे से हटा देना।  अब सबकी आएगी बारी। 

जंग का सूर फूंका जा चूका है, और रमज़ान शरीफ का आगाज़ होने से पहले ही इस ज़िम्न में पाकीज़ा फौजियों को एक एडवाइज़री जारी की गई थी।   जिसपे अमल हो रहा है।   अभी तो १५ रमज़ान ही हुए हैं, १५ अभी और हैं बाक़ी।  

 Zuber 

दहशत पर दोहरा क़ेहर

तेल अवीव फलस्तीन अप्रैल २८, २०२१

मुसन्निफ़ सहाफी जुबेर

 

आज कल हर क़िस्म के दहशत पर दोहरी मार पड़ रही है।  एक कुदरती मार दूसरी दीफ़ाई फौजियों की मार।  इस ज़िम्न में जहाँ एक जानिब भारत इस कुदरती मार से और बर्मा दोहरी मार से सख़्त तरीन मुत्तासिर हुए हैं।   वहीँ दहशत की पनाह गाह और मरकज़ इसराइल इस वक़्त दोहरी मार से ख़स्ता हाल होने की कगार पर पहुंच गया है।  यह दहशतगर्द मुल्क एक जानिब क़ुदरत की मार कोविद वबा से परेशान है, दूसरी जानिब मज़ीद मसाइल में मुब्तेला होता जा रहा है।

जिस तरह हिन्दू दहशतगर्द आज कल अपने अपने बिलों में पोशीदा हो गए हैं उसी तर्ज़ पर यहूद दहशत आज कल चौ जानिब से होने वाले हमलों से बेहद ख़ौफ़ज़दा और परेशान है।   यहूदी दहशगर्द इजराइल पर हमास के रॉकेट हमले के बाद हिज़्बुल्लाह का ड्रोन हमला हुआ है।  आज कल यहूद दहशतगर्द एक साथ ४ मुजाहिदीनों से ख़ौफ़ ज़दा है और जंग लड़ रहा है। 

अभी यहूद दहशतगर्द कोविद वबा से पूरी तरह उभर भी नहीं पाए थे की ग़ज़ा पट्टी में मौजूद मुजाहिद (पाकीज़ा फौजी) हमास के लगातार रॉकेट हमलों ने इजराइल को ख़ासा ख़ौफ़ज़दा और परेशान किया हुआ है।  उसके ऊपर यरूशलम में मौजूद यहूदी शिद्दत पसंद जो जंग को मज़ीद पेचीदा बना रहें हैं।  यह शिद्दत पसंद यहूद दहशतगर्दों और इजराइल के हिमायती बताये जातें हैं।  जैसा की भारत के संघी, बीजेपी और दीगर शिद्दत पसंद हिन्दू मुल्के हिन्द को अपना सब कुछ बताते हैं लेकिन दरअसल यह लोग ख़ुद ही मुल्क के ग़द्दार होतें हैं।  उसी तर्ज़ पर यहूद शिद्दत पसंद मासूम फलस्तीनी अवाम पर ज़ुल्म और जब्र करतें हैं जिससे इजराइल के अंदुरूनी हालात बेहद परेशांकुन होते चले जा रहें हैं।  

यहूदी शिद्दत पसंदों की वजह से ख़ुद उनका इजराइल और यरूशलम जंग का मैदान बना हुआ है।  हाल ही के दिनों में यहूद शिद्दत पसंदों और फलस्तीनी अवाम के दरमियान झड़पों में काफी इज़ाफ़ा हुआ है।   रमज़ान जुमे के रोज़ शिद्दत पसंद यहूदी अफ़राद ने मुस्लिम फलस्तीनी अवाम पर नमाज़ पर जाते हुए हमले किये थे।  जिसको काबू में करने के लिए पुलिस को काफी मशक़्क़त करना पड़ी थी और दोनों ही जानिब काफी अफ़राद ज़ख़्मी हुए थे।  

हमास की जानिब से गुजिश्ता रात ३६ राकेट यहूद दहशतगर्दों पर दाग़े गए हैं।  खबर है इससे दहशतगर्दों के ठिकानों को काफी नुक़सान हुआ है।   दहशत की पनाह गाह को हमास ने नेस्त नाबूत करने की क़सम उठा रखी है। 

 Zuber

Saturday, 24 April 2021

दिल्ली के ज़ालिमों को मिल रही है मालिके मुतलक़ की सज़ा

जब तक ख़ून का आख़िर क़तरा है बाक़ी जंग जारी रहेगी,

जब तक फतह नहीं लगती हाथ जंग जारी रहेगी,

जब तक हयात है एक भी क़ातिल, नाइंसाफ, ग़द्दार जंग जारी रहेगी,

जब तक फतह नहीं होता हिन्द, अक़्सा जंग जारी रहेगी,

इंसानी फ़रिश्ते का साथ ना सही, हक़ीक़ी फरिशते अब हैं साथ।   


 💗सहाफी जुबेर 💓💔  

मालिके कायनात ज़ालिमोंदरिंदोंनाइंसाफोंदहशतगर्दों पर बोहोत सख़्त रूख अपनाये हुए है।  ना सिर्फ दिल्ली के गुनाहगारों को दीफाई फौजों की जानिब से माक़ूल जवाब दिया जा रहा है बल्कि हर दुसरे रोज़ बड़ी तादात में हिन्दू अवाम की हलाकत से उनका मज़हब अब तो ख़तरे के निशान तक जा पंहुचा है। जिस भाजपासंघ और लंगूर- लँगूरनियों ने मुस्लिम अवाम को मुगलों को निशाना बनाया था की अभी हिन्दू नहीं चेता तो यह मुस्लिम तुमको अक़लियत बना डालेंगे।  हिन्दू धर्म ख़तरे में हैवही मुस्लिम अब बड़ी तादात में अवाम को बिला तफ़रीक़ मज़हब बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहें हैं।किसी मुस्लिम ताजिर ने अपनी पूरी पूरी ऑक्सीजन की फैक्टरी वक़्फ़ कर दी तो किसी ने अपनी २२ लाख की जदीद गाडी बेच दी।  तो किसी ने ऑक्सीजन का अम्बार लगा कर अवाम को मुफ्त देने की मोहीम शुरू की और बन गए ऑक्सीजन मैनमुस्लिम अवाम जहाँ ज़िन्दों की तीमारदारी में लगा हुआ है वहीँ जो हलाक शुदा अफ़राद हैं और उनके एहले ख़ाना कोरोना के खौफ या किसी और वजह से उनका आखिर सफर को पूरा नहीं कर पा रहें हैं तो ऐसी हालात में मुस्लिम आगे बढ़ कर उनकी लाशों को उनके मज़हबी एतेक़ाद के हिसाब से सुपुर्दे नार कर रहें हैं।

सज़ा की इस कड़ी में दिल्ली में पिछले २४ घंटों में दिल्ली पुलिस जिसने २०२० में दहशत मचाई थी और मुस्लिम अवाम को चुन चुन के मौत के घाट उतारा था उसके २ जवानों को करोना फ़ौजिओं ने मौत के घाट उतार दिया है।   पहला ख़ाकी दहशत जो करोना फ़ौजिओं से जंग लड़ते हुए मारा गया वोह भारत नगर में तैनात सब इंस्पेक्टर अंकित चौधरी था और दूसरा अस्सिस्टेंट सब इंस्पेक्टर सुरेश को करोना फ़ौजिओं ने मौत के घाट उतार दिया है।  दहशतगर्द अंकित २८ साल का था और उसे १८ तारीख को करोना फ़ौजिओं ने घेरा था। उसको शदीद ज़ख़्मी हालात में गाज़ियाबाद के पेलेटिव शिफा ख़ाने में दाखिल किया गया था और उसने बरोज़ जुमे को अल सुबह ७ बजे के दरमियान दम तोड़ दिया। 

अंकित चौधरी को प्लाज़्मा की सख़्त ज़रुरत थी, दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर और कांस्टेबल भागे भागे इधर से उधर प्लाज़्मा तलाशते रहे उसी तरह जिस तरह मौत का ख़ौफ़ दिखा कर २०२० में इन पुलिस वालों ने मुस्लिम अवाम की फ़ज़ीहत की थी।   अंकित का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमे वोह बोल नहीं पा रहा है, जिस जुबां से दिल्ली पुलिस ने मुस्लिम अवाम को गन्दी ग़ाज़ीज गाली गलोच की थी।  फिर उसने अपनी तकलीफ लिख कर बयान की और उसको प्लाज़्मा की ज़रुरत है ऐसा बताया।   

जहाँ एक जानिब गुजिश्ता साल इन लंगूर लँगूरनियों ने तब्लीगी जमात पर उधम मचाया था वहीँ अक्सर मुस्लिम अवाम प्लाज़्मा की इमदाद करने के लिए अपना रौज़ा तोड़ दे रहें हैं।  जो मुस्लिम अवाम अपने मज़हब का सबसे एहम फ़रीज़ा रौज़ा वक़्फ़ कर दे रहें हैं उसी मुस्लिम अवाम के लिए इन शिद्दत पसंदों ने बदगुमानी पैदा की थी और उनको दहशतगर्द, आक्रांता, थूक लगाया, नर्स के सामने नंगे हो गए मॉस मदिरा माँगा गंदे गंदे इशारे किये और ना जाने क्या क्या बोल कर बदनाम किया था।  

ऐसा नहीं है की इस क़ेहरे इलाही से सिर्फ आम अवाम ही मारा जा रहा है बल्कि आला ओहदेदार भी बड़ी तादात में मारे जा रहें हैं।   बिहार के सिवान ज़िले में तैनात ख़ातून अफसर BDO मनीषा प्रसाद करोना से मौत की आगोश में चली गईं हैं।   वोह सिवान ज़िले के हुसैन गंज प्रखंड की विकास पदाधिकारी (BDO) के ओहदे पर तैनात थी।  कुछ दिन पहले मनीषा करोना वाइरस से मुत्तासिर हो गयी थी।

इस कुदरती क़ेहर से आम अवाम से ले कर तो आला अफसर सब मुत्तासिर हो रहें हैं।   मध्य प्रदेश की अलीराजपुर ज़िले की जोबट की रकूने असेंबली और कांग्रेस सियसतदाँ कलावती भूरिया करोना फ़ौजिओं से जंग लड़ते हुए हार गई और इंदौर के एक शिफ़ाख़ाने में दम तोड़ दिया।  उन्होंने क़ब्ल अज़ सुबह ३ बजे उन्होंने अपने हिस्से की आख़िर सांस ली।   कलावती भूरिया झाबुआ के रकूने असेंबली कांतिलाल भूरिया की भतीजी थीं। 

बरोज़ जुमे को लखनऊ मग़रिब से भाजपा के रकूने असेंबली सुरेश श्रीवास्तव को भी करोना फ़ौजिओं ने ढेर कर दिया है।  वोह करोना से जंग लड़ते हुए शदीद ज़ख़्मी हो गया था और वेंटिलेटर पर मौत और ज़िन्दगी की जंग लड़ रहा था।  उसकी मौत पर वज़ीरे दीफा राजनाथ सिंह से लेकर भाजपा के तमाम आला ओहदेदारों समेत सूबे के सदर स्वतंत्र देव सिंह ने भी ताज़ियत पेश की है। 

हूकूमते हिन्द की करोना फ़ौजिओं से जंग में मुमकिन हार को देखते हुए बड़ी तादात में अवाम हिजरत करने पर मजूब हो रहा है।  खबर है की अवाम १० गुना ज़्यादा पैसा दे कर मेहफ़ूज़ दुबाई और दीगर मुस्लिम मुमालिकों की जानिब हिजरत कर रहें हैं।  यह वहीँ मुस्लिम मुमालिक हैं जिनसे अक्सरियत तबक़े को ख़ौफ़ था की हम हमारे ही मुल्क में अक़लियत हो जायेगें और मुस्लिम अक्सरियत पा लेंगें और अब हिन्दू ही ऐसे मुमालिकों में अपना मुल्क छोड़ कर हिजरत कर रहें हैं।  

भारत पर महज़ करोना फ़ौजिओं का हमला ही नहीं है बल्कि क़ुदरती आफ़ात, रोड हादसात में खुदकशी कर के बड़ी तादात में अवाम हलाक हो रहा है हर रोज़ ५० से १०० मारे जा रहें हैं।  हर रोज़ का पूरा रिकॉर्ड इस सहाफी के पास मौजूद है और जैसा उसने जान २१ में अपने एक मज़मून में हुकूमत को कहा था हर रोज़ के मौतों का रिकॉर्ड रखो और ३१ दिसम्बर २०२१ को आपसे हिसाब लिया जाएगा की कितने मौत की आगोश में चले गए। 

आज उत्तराखंड में चट्टान खिसकने से ८ अफ़राद मारे गए जबकि ३०० के क़रीब को बचा लिया गया है।   अजामगढ में एक सड़क हादसे में ४ अफ़राद की मौत।  पटना दानापुर नदी में पिकअप बस गिरी ८ लाशें बरामद हुई।  

करोना फ़ौजिओं से घिर जाने के बाद (पॉजिटिव रिपोर्ट) आने के बाद एक महिला डॉक्टर ने ग्रेटर नोयडा में १४ फ्लोर से कूद कर खुदकशी कर ली है।  मामला ग्रेटर नोयडा के सूरजपुर थाना इलाक़े का है।  खबर है की नक्सली दीफाई फौजियों ने दो अस आई को मौत की नींद सूला दिया है। 

Zuber

Thursday, 22 April 2021

दहशतगर्दों पर मौत का सियाह अक़्स।

  

मुजाहिद और दीफ़ाई फौजी दहशतगर्दों और उसकी मुहाफ़िज़ तंज़ीम भारतीय जनखा  पार्टी के नुमाइंदोंकारकूनोंरकूने ऐवानरकूने असेंबलीरकूने बल्दियामरकज़ी वज़ीरवज़ीरे आला को चुन चुन के मार रहें हैं।   इतना ही नहीं इनके अहले ख़ाना भी आये दिन मौत की आग़ोश में जा रहें हैं। 

फ़ासी देने की इस अगली कड़ी में मध्य प्रदेश के रतलाम से साबिक़ रकूने असेम्ली के बेटे को फ़ासी दी गई है।  उसकी लाश खेत में एक पेड़ से लटकी मिली है।   इस पूरे मामले से तमाम इलाक़े ख़ास रतलाम शहर में सनसनी फेल गई है।  और अवाम के ऊपर एक दहशत और ख़ौफ़ का माहौल देखा जा सकता है।  फ़ासी की इत्तेला मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और फ़ासी के फंदे से लाश को नीचे उतार कर लाश का पंचनामा किया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।  पुलिस को मौक़ा ऐ फ़ासी से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है लेकिन पुलिस इसे खुदकशी मान कर चल रही है।  मामले की मज़ीद तहक़ीक़ात चालू है। 

मामला रतलाम के कुंडाल गांव का है, जहाँ साबिक़ रकूने असेंबली माथुलाल डामोर अपने एहले ख़ाना के साथ रहते हैं।   बरोज़ जुमेरात अल सुबह भाजपा के साबिक़ रकूने असेंबली माथुलाल डामोर के बड़े फ़रज़न्द जगदीश की लाश उन्ही के खेत में एक पेड़ से लटकी हुई मिली।  साबिक़ विधायक के बेटे की खुदकशी की खबर इलाक़े में जंगल की आग की मानिंद फेल गई।  

पहली नज़र में यह मामला ख़ुदकशी का लग रहा है, लेकिन अभी तक पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है।  पुलिस का शक है की घरेलू तनज़िया और प्रॉपर्टी के विवाद के चलते जगदीश ने इतना बड़ा क़दम उठाया होगा।   बा मुताबिक़ भाजपा सियासतदां माथुलाल डामोर उनका बीटा क़रीब साढ़े ९ बजे घर से निकलकर अपने खेत में गया था।  और ११ बजे उसके फ़ासी लगा लेने की खबर आम हुई।  

नेता जी के बयान में काफी मुतज़ाद अलफ़ाज़ लग रहें हैं और यह कैसे मुमकिन है एक हस्ता खेलता लड़का बग़ैर किसी परेशानी या ज़ेहनी अज़ीयत के ९ बजे घर से निकले और अन्नान फानन में उसको फ़ासी पर लटका दिया जाए।   हुआ क्या होगा की घर में किसी मुद्दे पर सख़्त बेहेस और मुख़ालेफ़त हुई होगी और घर से वोह शख्स ख़ुदकशी करने की नियत से ही निकला होगा ना की हस्ते खेलते खुश खुर्रम माहौल में निकला होगा। 

मय्यत जगदीश अपने पीछे अहलिया और ७ बच्चे छोड़ गया है।   उसकी ५ बेटियां और २ बेटे हैं।  मय्यत जगदीश के भाई का कहना है की उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं है ओर वोह बोहोत ही सज्जन इंसान थे। 

पुलिस फ़ासी की वजह तलाश रही है।   उसके ऊपर ज़रूर कोई नावाक़िफ़ दबाव और ज़ेहनी अज़ीयत होगी जिसकी वजह से उसने इतना बड़ा क़दम उठाया। 

Zuber 

यहूद दहशतगर्दों से मुजाहिदों का बदला: तबाह किया इजराइल का जोहरी रिएक्टर (एटॉमिक रिएक्टर)


यरूशलेम फलस्तीन: मुझहीदीनों ने ईरान के एटॉमिक रिएक्टर को ब्लास्ट करने की यहूद दहशतगर्दों की साजिश का आज बदला ले लिया है।   सीरिया की जानिब से इसरायली दहशत पर बरोज़ जुमेरात क़ब्ल अज़ सुबह दागी गई मिसाइल से इजराइल के आला तरीन सीक्रिट न्यूक्लिअर रिएक्टर को भारी नुकसान हुआ है।   इस हमले बाद दहशतगर्द इजराइल में चारों जानिब ख़ौफ़ और दहशत के सायरन बजने लगे। 

नुक़सान और तबाही का जायज़ा लेने के बाद इसरायली फ़ौज ने हमले की जानकारी दी।  इसरायली फौज ने जवाबी हिकमते अमली इख़्तेयार करते हुए सीरिया में वाक़ेय मिसाइल लांचर और फ़िज़ाई दीफाई निज़ाम को निशाना बनाया है और उस पर हमला किया है।  जिसकी तस्दीक़ अभी तक ना तो ईरान ने की है और ना ही सीरिया से ऐसी कोई खबर आई है।   लेकिन इसरायली फौज जवाबी हमले की बात कह रही है। 

दहशत पर सख़्त इक़दाम के पेशे नज़र इजराइल पर अब चारों जानिब से हमले की खबरें हैं।  गुजिश्ता हफ्ते गाज़ा पट्टी की जानिब से भी इजराइल पर मिसाइल दागी गई थी।   जिसके जवाब में इजराइल ने गाज़ा पर हुकूमत करने वाले हमास के ठिकानों पर हमला किया था। 

भारत भी ऐसी ही हिकमते अमली से अछूता नहीं है।  अक़लियतों के हुक़ूक़ की हक़तल्फ़ी, इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी और मज़हबी आज़ादी के कई इलज़ाम लग चुके हैं।   हाल ही में  बरोज़ बुध अमेरिका की मज़हबी आज़ादी के ऊपर काम करने वाली तंज़ीम ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत में मज़हबी आज़ादी और अक़लियतों के हुक़ूक़ मज़ीद पस्ती की जानिब जा रहें हैं ऐसी रिपोर्ट शाया की है।   यह मुतावातिर दुसरे साल भारत में मज़हबी आज़ादी और अक़लियतों के हुक़ूक़ को ले कर ज़वाल देखा गया है जिससे भारत की साख़ मज़हबी आज़ादी और अक़लियतों के हुक़ूक़ को ले कर अमेरिका में खराब हुई है। 

 ख़ैर बात अभी इजराइल पर हमले की करतें हैं।   यह हमला हाल ही के सालों में दहशत पर और सीरिया इजराइल के दरमियान सबसे खुनी हमला माना जा रहा है।   इसमें ईरान के मुलव्विस होने के इमकानात हैं।  जिसकी ३ पुख़ता वजह जो इस सहाफी को माक़ूल लगतीं हैं।   

१ला.  क्योंकि पहल यहूद दहशत ने की थी ईरान के जोहरी रिएक्टर्स पर हमला कर के तो ऐसे हालात पैदा होने ही थे।  

२री.  बड़ी वजह ईरान के फौजी सीरिया में मौजूद हैं और उन्होंने अपनी मज़बूत पकड़ बनाई हुई है।

३री.  वजह ईरान पर दहशतगर्दाना हमलों का बदला ईरान ले कर रहेगा इसी बातें लगातार ईरान की जानिब से होती रही थी। 


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Tuesday, 20 April 2021

एक दहशतगर्द और हलाक। ५ दिन में ४था

अभी अभी ब्रेकिंग न्यूज़ 

इससे पेश्तर शाया मज़मून के आगे की कड़ी में शुमाली हिन्द में एक और दहशतगर्द हलाक किया जा चूका है.  उत्तर प्रदेश हुकूमत में दर्जा सूबा का वज़ीर हनुमान स्वरुप मिश्रा को करोना टुकड़ी ने  मौत के घाट  उतार दिया। ५५ साला   मिश्रा करोना अमराज़ से मुत्तासिर था और गुर्दे की बीमारी से भी जंग लड़ रहा था. 

हनुमान मिश्रा का शुमार बीजेपी के बेहद रसूख़दार सियासतदानों होता था.  गुजिश्ता हफ्ते १५ अप्रैल के आस पास उनको बुख़ार आने के बाद करोना  की तहक़ीक़ात की  गई थी, एहले  ख़ाना का कहना है उनमे कोरोना के एहसासात थे, जिसके बाद उनको लखनऊ शिफ्ट किया गया था जहाँ  उनकी मौत हो गई. 

मिश्रा संघ  बजरंगदल का कट्टर मुहाफ़िज़  था, दहशतगर्द तंज़ीम ABVP से किया था सियासत का आगाज़।  वोह कई सालों से लगातार भाजपा से मुनसलिक रहे थे.  

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दहशत पर बड़ा हमला इस महीने का तीसरा दहशतगर्द हलाक।


दहशत पर दीफाई फौजों की करारी चोट चालू है।  गुजिश्ता ५ रोज़ में दहशतगर्दों की मुहाफ़िज़ भाजपा के ३ आला सियासतदानों को मौत के घाट उतारा जा चूका है।  अभी ३  रोज़ क़ब्ल १७ अप्रैल २०२१ बरोज़ सनीचर को उत्तर प्रदेश के बांदा जिला  पंचायत में वार्ड नंबर १४ से इन्तेख़ाबी मरहले में बीजेपी की उम्मीदवार गीता सागर वर्मा को करोना टुकड़ी ने घेर कर हलाक कर दिया गया था।  

उससे क़ब्ल १५ अप्रैल २०२१ को उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीजेपी रकूने बल्दिया मुनीश उर्फ़ मिंटू (३८) की लाश उसकी गाडी में खून से लथ पथ मिली थी।  उसकी लाश के पास उसका सर्विस रिवाल्वर भी पुलिस को मिला था।  मुनीश वार्ड नंबर ४० का रकूने बल्दिया था उसकी लाश थाना कंकरखेड़ा के पावली ख़ास रेलवे स्टेशन के पास उसकी गाडी में मिली थी।   

दहशतगर्दों की मुहाफ़िज़ भारतीय जनखा पार्टी (बीजेपी) के सख़्त दिन चल रहें हैं।   आये दिन उनके आला ओहदेदार रकूने पार्लियमान, रकूने असेंबली रकूने बल्दिया मौत की आगोश में जा रहें हैं।   बीजेपी से मौजूदा मरकज़ी वज़ीर और वज़ीरे आला की भी मौत वाक़े हो चुकी है।   इस ज़िम्न में अगला नाम उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोक सभा हल्क़े से माज़ी रकूने पार्लियमान जगदीश राणा और बीजेपी सियासतदान मौत की आगोश में चले गए।   राणा ने बरोज़ पीर दिल्ली में वाक़े एक शिफा ख़ाने में उनके हिस्से की आखिर सांस ली। 

राणा ६७ साल के थे साबिक़ पार्लियमान की मौत की ख़बर सून कर तमाम सहरगहपुर सौग में डूब गया।   जगदीश राणा तंज़ीम समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी से कई एहम ज़िम्मेदारियाँ को अंजाम दे चुके थे।   साल २०१६ में वोह बीजेपी में शामिल हुए थे।  जगदीश के बड़े भाई महावीर राणा रकूने असेंबली रहे हैं।  जगदीश अपने पीछे दो फ़रज़न्द अजय प्रताप और विजय प्रताप और एक दुख्तर के साथ तमाम एहले खाना को छोड़ गए हैं। 

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Sunday, 18 April 2021

जिहाद फी सबिल्लिल्लाहा का आगाज़

ब्रादराने मिल्लते इस्लामियां, अस्सलामो अलयकुम,

इस सहाफी को बेहद मुसर्रत है की मुस्लिम उलेमाओं और मौलानाओं ने रसूले अरबी पर की हुई भद्दी, गलीज़ और नाज़ेबा कलेमात करने वाले शिद्दत पसंद हिन्दू दहशतगर्द यती नरसिंहानंद की गिरफ्तारी ना होने के सबब ०४ मई से जेल भरो एहतेजाज का आगाज़ किया है।   मुफ़्ती अज़हर साहब ने १७ रमज़ानुल मुबारक जंगे बद्र के रोज़ उस मलून शैतान को आग के अंदर दाख़िल होने की ललकार दी है।   अल्लाह तमाम फ़रज़न्दाने तौहीद के ग़ुलामों के हौसले जज़्बे को क़ायम रखे,  इनकी क़यादत में इस्लाम को सर बुलंद करे और बातिल ताक़तों को नेस्त नाबूत करे सफ़ा ऐ हस्ती से मिटा दे, महदूत कर दे।   आमीन।  

मौलाना बरादरी से यह सहाफी गुज़ारिश करेगा की गिरफ्तारी की क्या नोय्यत है, क्या मुख़तलिफ़ शहरों में कोई अमीर मुक़्क़र्र किया है जिसकी क़यादत में गिरफ्तारी दी जा सके।  यह सहाफी भी अपनी गिरफ्तारी देना चाहता है तो राब्ता किस से किया जाए।  

दूसरी बात उसी रोज़ भारत की बातिल ताक़तों, दहशतगर्दों और नाइंसाफ हाकिम-अदलिया के ख़िलाफ़ जिहाद का एलाने आम किया जाना चाहिए।  अब हालात साज़गार नहीं रहे और ना ही भारत में क़ानून नाम की कोई चीज़ मेहफ़ूज़ बची है।   जिसकी दुहाई आज तक मुसलमान देते रहते थे।   हमको अगर एवान से इन्साफ नहीं मिला तो आला अदालत हमारे साथ इन्साफ करेगा और सबूत के आधार पर हमको हमारा हक़ मिलेगा।   लेकिन आला अदालत तो सबसे बड़ा चड्डा निकला और सबसे पहले उसने अपना ख़ाकी रंग दिखाना शुरू किया।   

एक बार जिहाद का एलान हो गया तो उसका आगाज़ उत्तर प्रदेश के उस जज को काटने से करना चाहिए जिसने काशी की ज्ञानवापी जामी मस्जिद की खुदाई का हुकुम नाफ़िज़ किया है।   उसके बाद योगी को काटना होगा उसके बाद उन दावेदारों को जिन्होंने ऐसी बेतुकी बेबुनयाद फर्याद अदालत में पेश की थी।   जज और वज़ीरे आला योगी को काटने की वजह महज़ अपना गुस्सा और गुबार निकालना नहीं है बल्कि यह लोग नाइंसाफ थे और अपने खुद के क़ानून का पासो लिहाज़ नहीं रख सके नाइंसाफी कर इन्साफ का क़त्ल कर दिया।  क्योंकि बाबरी तनाज़िया के वक़्त १९९१ में नरसिम्हा राव हुकूमत ने Places of Worship Act 1991 बिल बना दिया है जिसमे बाबरी मस्जिद को छोड़ कर तमाम इबाबत गाह १९४७ में जिस हैसियत में थे उसी तरह रहेंगे।   फिर उस जज ने अपने ही मुल्क के क़ानून का पैसो लिहाज़ क्यों नहीं रखा, योगी को काटने के पीछे की वजह यही है जब नाइंसाफी हो रही थी अदालत में इन्साफ का क़त्ल हो रहा था तब वज़ीरे आला काहे को खामोश रहा।   अगर उसका एक हूकूमती पैग़ाम उस जज के पास जाता तो वोह अपनी कुर्सी से उठने से क़ब्ल ही पानी ख़ारिज कर देता।

जिहाद (जंग) लड़ने से क़ब्ल असलाह बंदूक, बम, राकेट लॉन्चर, मिसाइल और दिगर असलाह की ज़रुरत होती है तो क्या वोह सब असलाह मोहय्या किया हुआ है।   इस सहाफी ने २०१८ में आलमी बरदारी अमेरिका और अक़वामे मुत्तहिदा से मुख़ातिब हो कर कहा था की हिन्दुस्तान में मुसलमानों से जीने का हक़ छीना जा रहा है, उनकी नस्ल कुशी की जा रही है, उनकी तालीम, रोज़गार और इज़्ज़त (मस्तूराते) सख़्त दहशत में हैं।  इस दहशत से निबटने के लिए मुसलमानों को आलमी सतह पर असलाह खरीदने की इजाज़त दी जाए और जब हूकूमती नुमाइंदों से जंग हो तो मुसलमानों को दहशतगर्द ना मुख़ातिब कर के उनको आज़ादी के सिपाही मुख़ातिब किया जाए।  

मुस्लिम नौजवानों से गुज़ारिश हैं अगर कोई भी हूकूमती नुमाइंदा काशी जामी मस्जिद की खुदाई वग़ैरा के लिए आता हैं तो उसको काट डालो।  और नौजवान इस बात का अज़्म करें की उस जामी मस्जिद को दूसरी बाबरी नहीं बनने दिया जाएगा।   पुलिस वग़ैरा के ऊपर भी हमले करो क्योंकि वोह पुलिस नहीं बल्कि दहशतगर्दों को हिफाज़त देने वाले ऐसे अफ़राद होतें हैं जिनकी रगो में ज़ाफ़रानी मीडिया का भरा हुआ ज़हर पहुंच चूका हैं।  पुलिस वोह जो ग़ैर जानिब दार तरीक़ेकार हिकमत से क़ानून की बालादस्ती करे और इन्साफ से काम करे।  जो दहशत मचाये बंदूक के ज़ोर पर नाइंसाफी करे फिर वोह भलें ही हूकूमती नुमाइंदे हो लेकिन उनका अमल अब दहशतगर्दों जैसा हैं तो उनको क़तल करना तुम्हारे ऊपर वाजिब और हलाल हैं नहीं तो वोह तुमको क़त्ल कर डालेंगे। 

बिल आख़िर मौलाना हज़रात से गुज़ारिश करूंगा की गिरफ्तारी दीजिये बोहोत आला अमल हैं लेकिन महज़ एक जानिब महदूत हो कर काम मत करिये।  यह जंग है और दुशमन बोहोत शातिर बदमाश हैं।  आपको हर जानिब जंग का आगाज़ करना होगा।  कुछ मुजाहिद गिरफ्तारी दें कुछ जंग का आगाज़ करें और कुछ मुजाहिद जंग करें।   हर खित्ते में जीत मुस्लिम अवाम की ही हैं।  अगर शहीद हुए तो हज़रत इमामे हुसैन की सुन्नत अदा होगी और गिरफ्तार हुए तो जो सहाबी जंग में गिरफ्तार हो जाते थे उनकी सुन्नत अदा होगी और फतहयाब  हुए तो रसूले अरबी की सुन्नत और गाज़ी खालिद बिन वालिद।

जंग का सूर फूंक दीजिये।  बोहोत हुआ मुसलमानों पर अत्याचार अबकी बार जंग करो यार। 

Zuber  

Saturday, 17 April 2021

दौराने नमाज़ दहशत मचाने की नियत से पहुंचे दो हिन्दू दहशतगर्द गिरफ्तार।


गुरूग्राम में नमाज़े जुमे के दौरान दहशत मचा ने की नियत से पहुंचे दो दहशतगर्दों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।  दोनों दहशतगर्द नमाज़ में मुस्लिम अवाम की बड़ी तादात में हलाक कर के नमाज़ बंद करवाने के लिए जानलेवा असलाह और धमाका ख़ेज़ मशकूक मवाद ले कर पहुंचे थे।  पुलिस ने दोनों दहशतगर्दों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके क़ब्ज़े से काफी मशकूक मवाद भी बरामद कर लिया है।  दोनों खुद को दहशतगर्द भारत माता मुल्क के ओहदेदार बता रहे हैं।   और दोनों ही भारत माता वाहिनी तंज़ीम के आला ओहदेदार बोल कर नमाज़ियों पर तशद्दुत कर धमका रहे थे।  

गिरफ्तार किये गए दहशतगर्दों की पहचान दिनेश भारत और सुधीर के रूप में हुई है।  दोनों गाड़ियों में भर कर धमकाखेज़ मवाद और जानलेवा असलाह ले कर सेक्टर ५० में अदा की जा रही जुमे की नमाज़ में दहशतगर्दाना हमले को अंजाम देने के लिए पहुंचे थे।  नमाज़ियों की दानिशमंदी और ज़ाहानात काम आई और उन्होंने फ़ौरन पुलिस को इत्तेला दी और पुलिस ने दोनों दहशतगर्दों को धार दबोचा। 

फिलहाल पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी हलके पुलके केस मज़हबी नफरत फैलाने के जुर्म में की है जबकी इनका इरादा दहशतगर्दाना हमला करने का था।  पुलिस को दहशतगर्दों की गाडी से कई मशकूक हथियार लाठी डंडे तलवार वगेरा बरामद हुए हैं।   पुलिस ने दोनों दहशतगर्दों को आरोपी बता कर सेक्टर ५० के थाने में आई.पी.सी. की दफा 153A, 3A के तहत मामला दर्ज किया है।   

पुलिस ने इस बात को तस्लीम किया है की काफी वक़्त से साइबर सिटी के मुख्तलिफ हिस्सों में इन्तेज़ामियाँ और जिला कलेक्टर की मंज़ूरी से नमाज़ अदा की जा रही है।  और दोनों आरोपियों सुधीर और दिनेश का कई हलकों में नमाज़ बंद करवाने का मज़हबी नफरत फैलाने का किरदार रहा है।   दोनों पेशावर मुजरिम हैं और पुलिस की नज़रों में मशकूक हैं।  दोनों दहशतगर्दों से पुलिस मज़ीद मालूमात और तहक़ीक़ कर रही है। 


Zuber

दहशतगर्द नरसिंह मंदिर के एहम साधू की मौत।


नरसिंह मंदिर का अहम ओहदेदार और महामंडलेश्वर को दीफाई फौजों की करोना रेजिमेंट ने मौत के घाट उतार दिया है।   यह साधू कुंभ में हरिद्वार गया था।   जबलपुर में नरसिंह मंदिर का ख़ासम ख़ास महामडंलेश्वर जगतगुरू डाक्टर स्वामी श्याम देवाचार्य महाराज करोना फ़ौजिओं से जंग लड़ते हुए हलाक हुआ है।  

आज कल हरिद्वार में कुम्भ मेला चल रहा है।  इस दौरान शाही गुसल में शामिल होने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी देवाचार्य हरिद्वार गया था।  अब उसको क्या मालूम था की वोह अपने पाप धोने नहीं जा रहा है बल्कि इस दुनियां से ही जा रहा है।  उसको मौत ने कुंभ में बुलाया हैना की मज़हबी रिवायात पूरा करने के लिए।  उसको दीफाई फौजों ने घेर लिया था और वोह सख्त ज़ख़्मी हो गया था  (करोना से मुत्तासिर या संक्रमित)  वहां से लौटने के बाद बरोज़ जुमा उसकी मौत हो गई।  

मज़े की बात यह है की महामंडेश्वर ने करोना की दोनों डोज़ लगवा ली थी फिर भी वोह मर गया।  मतलब अब करोना की वेक्सीन के ऊपर भी सवालियां निशान लग रहें हैं।  वैसे भी यह देखने में आया है जिस जिस ने करोना वेक्सीन ली उसकी मौत वाक़े हुई।

इस साधू के मरने के बाद मध्य प्रदेश में भी करोना रेजीमेंट ने अपना दबदबा क़ायम कर लिया है, और तमाम ज़ाफ़रानी सूबे पर अब क़ाबिज़ हो चूका है।   इस साधू ने करोना कॅरियर के जैसा काम किया है।  मरते मरते हज़ारों लोगों को करोना बीमारी दे गया।   १५ अप्रैल को भोपाल में शमशानघाट पर कम से कम ४५ लाशें एक साथ जलाई गई।  बीबीसी के लिए फोटो जौर्नलिस्म करने वाले संजीव गुप्ता जी ने अपने कैमरे में क़ैद किया है।  कुछ बेहद जज़बाती किस्से भी उन्होंने अपने वीडियो में बयान किये हैं।   उनका कहना है की १९८४ के गैस काण्ड में भी उन्होंने बा एक वक़्त इतने बड़े पैमाने पर लाशों को आतिशे नार करते हुए नहीं देखा था।   साथ ही उन्होंने ज़ाफ़रानी हुकूमत के झूठ का पर्दा भी फाश कर दिया है जो कहती है की महज़ ४ लाशें जालाई गई है।   हमारे यहाँ करोना क़ाबू में है।    

यह साधू और तमाम कुम्भ में जाने वाले करोना वबा फैलाने में मदद कर रहें हैं।   यह देश के ग़द्दार हैंइनको जहाँ देखो गोली मार दो, नहीं तो यह लोग अपने साथ १० लोगों को  वबा फैलाने में मददगार साबित होंगे।   यह लोग साजिश के तहत भारत में वबा फैला रहें हैं और इसके तार इसराइल से जुड़े हुए मालूम पड़ते हैं।

कुम्भ में गए ५० से ज़्यादा साधुओं को करोना ने अपनी चपेट में ले लिया है।   और अब यह लोग जगह जगह फिरेगें और दूसरों को इस बीमारी से मुत्तासिर करेगें।   कुंभ में गए जितने भी लोग हैं वोह साजिश के तहत गए हैं और यह लोग करोना फैलाने में उसके करियर के जैसे इस्तेमाल किये जा रहे हैं।  

हुकूमत को चाहिए की जितने भी लोग कुंभ में नंगे हो कर महिलाओं और लड़कियों के साथ फहशई और अय्याशी करने गए थे उन सबको हरिदवार छोड़ने से क़ब्ल उनकी अच्छे से जांच होनी चाहिए।  अगर कोई भी करोना मुत्तासिर पाया जाता है तो उसको माक़ूल गोली देनी चाहिए, और उसको वहीँ ख़तम कर देना चाहिए।   ऐसा करने से इन करोना केरियर से आगे वबा नहीं फैलेगी।   नहीं तो यह लोग साजिश के तहत काम कर रहें हैं।  

इससे क़ब्ल गुजिश्ता हफ्ते भी निर्माड़ीं अखाड़ा के महामडलेश्वर की करोना के चलते मौत हो चुकी है। 

जुबेर

Thursday, 15 April 2021

सूबे महाराष्ट्र के वज़ीरे आला को पैग़ाम

आली जनाब उद्धव ठाकरे जी,

वज़ीरे आला

हुकूमत महाराष्ट्र

जनाब उद्धव ठाकरे जी,

दौरे हाजरा में जिस अज़ीयत से ना सिर्फ सूबा महाराष्ट्र बल्कि तमाम मुल्के हिन्द गुज़र रहा है उसकी अज़ीयत और क़ीमत सूबे महाराष्ट्र को भी अदा करना पड़ रही है।   लेकिन जो इक़दाम माज़ी में दाढ़ी वाले बाबा ने उठाये थे वोह ना काफी साबित हुए।   आज १ साल के बाद आप भी उसी तकलीफ कुन और तबाही वाले रस्ते को इख़्तेयार कर रहें हैं तो आपमें और उन बाबा (फ़क़ीर) में कुछ भी फ़र्क नहीं है।

उद्धव जी, आपने तमाम महाराष्ट्र पर बंद का हुकुम नाफ़िज़ कर दिया और अवाम को फिर से एक बार क़ैद कर दिया, आपका यह हुकुम इस सहाफी की समझ से परे है और वह यह समझने से क़ासिर है की जब गुजिश्ता तमाम भारत को क़ैद करने की हिकमते अमली कोविद-१९ वबा पर कोई असर नहीं दिखा पाई तो आज १ साल बाद आपकी उसी तर्ज़ की हिकमते अमली क्या ख़ैर ख़्वाह असरात दे सकेगी। 

बहैसियत सहाफी और तहक़ीक़ात इस बात का इल्म तो मुझे हो चूका था की महाराष्ट्र जल्द ही तालाबंदी की अज़ीयत को भोगने वाला है लेकिन पुराने तर्ज़े अमल को नया जामा पहना कर आप भी उन्ही लोगो के हमराह हो गए जो अवाम का ख़याल रखने के बजाये मुख़ालफ़ीनों के जज़बात का ज़्यादा ख्याल करतें है।आप भी उन्ही लोगो के हमराह हो गए जो तन्क़ीदीयों की हक़ गोई को नज़रअंदाज़ कर के चापलूसों की बातों को तवज्जो देतें हैं।   सियासत हो, इंसान की अज़वाजी या पेशावर ज़िन्दगी  हर मुद्दे पर दो रस्ते होतें हैं एक जंग करने का जज़बा और दूसरा फरारी इख़्तेयार करने की हिकमत।  

आप तो मराठा शिवजी के वारिस हो आपने इतनी जल्दी हथियार कैसे डाल दिए, और दिल्ली सल्तनत के तख़्त पर क़ाबिज़ बादशाह के हमराह हो गए. आपका तालाबंदी का हुकुम ना सिर्फ महाराष्ट्र के आम अवाम के लिए ज़हर साबित होगा बल्कि माशी एतेबार से अच्छे हज़रात की भी फ़ज़ीहत होगी।  

२०२० के तालाबंदी में अवाम पूरी तरह से मुफ़लिस नहीं हुआ था उसके पास थोड़ा बोहोत सरमायाकारी मेहफ़ूज़ थी जिसकी वजह से उसकी घरेलू गाडी एक साल तक तो चली अब मज़ीद घरों में बग़ैर रोज़गार और माशी आमदनी के किसी को क़ैद करना उसके ऊपर ख़ुदकशी के लिए दबाव बनाने जैसा है।   

वैसे भी बाबाजी के नोट बंदी, ताला बंदी जैसे ऊल जलूल फैसलों से अवामे हिन्द मुफ़लिस तो हो ही चूका था रही सही कसर उनकी मुफ़लसी के जनाज़ों पर ठोल ताशे बजवाना, फिर शमशान में उनकी लाशों पर दिये जलवाना बिल आखिर फूल बरसा कर उनकी मय्यतों पर तंज़ कसने और हसी मज़ाक़ करने जैसा अमल था।  आज मुफलिसी और ग़ुरबत के चलते गुजरात, हरयाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, राजिस्थान, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश में कई ताजिरों के पूरे पूरे एहले ख़ाना ने खुदकशी कर के अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर ली है।  वजह मुफलिसी, ग़ुरबत, रोज़गार में पस्ती- ज़वाल और क़र्ज़ की बेपनाह इज़ाफ़त। 

इस सहाफी ने कभी भी तालाबंदी जैसे मुज़िर असरात देने वाले हुकुम की पैरवी नहीं की थी, बल्कि हर वक़्त उस मुनाफ़ेक़त और दोहरी ज़ेहनियत की मुख़ालेफ़त की थी जो इन्तेख़ाब में तो अवाम को घरों से बुला बुला कर अवामी हलकों में हुजूम और गर्दी इकठ्ठा करने की हिमायत करतें हैं।  लेकिन जहाँ इन्तेख़ाब नहीं है वहां पर सख्त इक़दाम उठाने और लॉक डाऊन की वकालत की पैरवी करतें हैं।   

तालाबंदी-१ में जब तमाम हिन्द को बाबा जी ने क़ैद कर दिया था तभी "आज तक", नवभारत टाइम्स में अपने तास्सुरात में मध्य प्रदेश, राजिस्थान कर्नाटक, उत्तर प्रदेश में जहाँ कहीं भी इन्तेख़ाबी मरहले में हुजूम जमा होता था उस पर तनक़ीद की थी।  और यही बात कही थी वबा है तो उसको इंतिख़ाबी मरहले या बीजीपी के नुमाइंदों से काहे को ख़ौफ़ है।  इन्तेख़ाब में क्या करोना नहीं पहुंच पाता है।   वही बात आज कमो बेश एक साल बात फिर साबित हो रही है।  असम, वेस्ट बंगाल, केरला में इन्तेख़ाब में करोना वबा का क्या फीड बैक है और दीगर सूबों में जहाँ इन्तेख़ाब नहीं है वहां क्या हालत है।

पिछले साल तमाम संघी ज़ेहनियत और ज़ाफ़रानी मीडिया ने करोना वबा के लिए ज़िम्मेदार एक बली की गाये तब्लीग़ी जमात को तलाश लिया था, हर मीडिया के कारकून के ज़हर अंगेशी, मुत्तसिब ज़ेहनियत और झूट फरेब के चलते मुस्लिम अवाम पर संघी दहशत की आंधी आ गई थी।   मुस्लिम पेडलरों को रोड पर दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया उनका नाम पूछ पूछ कर तिजारत करने से उनको रोका गया लेकिन अब उससे ज़्यादा भयानक और हुजूम वाली सूरते हाल कुंभ के मेले में है।  तो अब करोना बम, करोना धर्म युध, साजिश, देश के ग़द्दार जैसे अलफ़ाज़ का इस्तेमाल उस हुजूम पर काहे को नहीं किया जा रहा है; जो सरे आम इन्तेज़ामियाँ के हुकुम की धज्जियाँ उड़ा रहा है और लड़के लड़किया आपस में बगलगीर हो कर नंगे नहा रहें हैं।     

ऐसे मेले ठेलों में मज़हब का कोई अमल दख़ल नहीं होता है बल्कि यहाँ तो मस्तूरातों, लड़कियों के खुले जिस्म को देखना और उनके साथ फाहाशाई, अय्याशी करने की निस्बत से ठोले कावड़ियाँ ले कर जातें हैं। लेकिन ऐसे सभी फोटों देख कर भी ज़ाफ़रानी मीडिया इसको जिस्म धर्म युद्ध नहीं बोलेगा क्योंकि बात अक्सरियत तबक़े के जज़बात और आस्ता से जुडी हुई है।    

ख़ैर बात यहाँ पर हिन्दू मज़हब की कुरीतियों, नियोग और देवदासी मय्यारे ज़िन्दगी (प्रथा)  बताना नहीं है बल्कि उस ज़ेहरीली ज़ेहनियत का पर्दा फाश करना है जो मीडिया के लंगूर और लँगूरनियों ने अपने ज़हन में भर रखी है।  और इनके खबरनामों को देख कर अवाम ज़हरीला होता चला जा रहा है।  हर उस मुद्दे पर जिसमे भारत का कुछ भी बूरा होता है तो ज़ाफ़रानी सहाफत को मुस्लिम नज़र आ जातें हैं पाकिस्तानी ज़ाविया (एंगल) दिखने लगता है।  लेकिन यह ज़ाफ़रानी ज़ेहनियत अपने खुद के किरदार और अमल पर कभी नज़र नहीं डालते की कही हमसे तो कुछ ख़ता नहीं हो गई जिसकी सज़ा के तोर पर हम पर यह मुसीबत मालिके मुतलक़ ने लादी है।  

आपसे गुज़ारिश है महाराष्ट्र को किसी भी तानाशाह और दहशत के ज़ेरे हुकुम ग़ुलाम ना बनाये।  महाराष्ट्र को उत्तर प्रदेश, बिहार ना बनाये बल्कि उसको माशी मज़बूत बनाएं।  ज़हीन हुकुम नाफ़िज़ कीजिये अपने खुद के लॉ बनाइये, हारे हुए घोड़े के नक़्शे क़दम मत चलिए।   करोना वबा का लॉक डाऊन से कोई ताल्लुक़ नहीं है अगर होता तो बाबा जी ने ९ माह का लॉक डाऊन किया था अभी तक तो विकास पैदा हो चूका होता लेकिन हुआ किया जो अवाम पहले माशी मज़बूत थे उनका भी खून निचोड़ लिया।   

आपसे गुज़ारिश है लॉक डाऊन के हुकुम पर नज़रे सानी कीजिये और अवाम को अपने रोज़गार के मौके फ़राहम कीजिये नहीं तो उत्तर प्रदेश बिहार की तर्ज़ पर जुर्म महाराष्ट्र में भी बे पनाह बढ़ जाएगा।  अवाम खुद को ज़िंदा रखने के लिए दूसरों का ख़ून करने से गुरेज़ नहीं करेगा।  जहाँ तक वबा को काबू करने का सवाल है तो सख़्त इक़दाम कीजिये क़ानून को तोड़ने वालों पर ३ गुना जुर्माना लगाइये लेकिन लॉक डाऊन नहीं।  लॉक डाऊन की हिकमते अमली एक बार नाकाम साबित हो चुकी है वोह फिर से कैसे कामयाब होगी। 

लॉक डाऊन कीजिये लेकिन फिर महाराष्ट्र के १२ करोड़ हर अवाम के खाते में बिला तफ़रीक़ उसके माशी हैसियत के १५ हज़ार रूपये जमा कीजिये।  अगर एक घर में ४ अफ़राद बालिग़ हैं तो फि मेंबर १५ हज़ार मतलब ६० हज़ार रूपये उस घर को माशी इमदाद फ़राहम कीजिये तो आपका ताला बंदी का हुकुम मुनासिब लगेगा नहीं तो अवाम से बदला लेने की हिकमत जैसा लग रहा है।  


सहाफी जुबेर

Wednesday, 14 April 2021

बाबर की बादशाहत का आगाज़: कोहली राज का ख़ात्मा।


नाज़रीन जिस बाबर के नाम से लंगूर लँगूरनियों और संघी दहशत को अंगार लगती थी उसी बाबर ने आज १२५८ साल बाद फिर से भारत को धुल चटा दी और कोहली राज का खत्मा किया।   जी हाँ नाज़रीन यहाँ पर बात पाकिस्तान के कप्तान अज़ीम बाबर की बादशाहत क़ायम और जंग में भारत के कोहली राज के खात्मे की हो रही है।    पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म एक रोज़ा बेनक़वामी क्रिकेट में पहले नंबर के बल्ले बाज़ बन गए हैं।  इस २६ साला बादशाह ने १२५८ दिनों से भारत पर क़ाबिज़ भारत के राजा विराट कोहली को जंग में ज़बरदस्त पटकनी देते हुए उनके सर का ताज छीन लिया।  जुनूबी अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मैचों से बाबार की दमदार खेल का उनको फायदा मिला।   

आई सी सी की जानिब से जारी ताज़ा रैंकिंग में अज़ीम बाबर के पास ८६५ पॉइंट्स हैंजो भारत के विराट कोहली से ८ पॉइंट्स ज़्यादा हैं।  विराट कोहली अब दुसरे पायदान पर खिसक गए हैं जबकी नायब कप्तान रोहित शर्मा तीसरे पायदान पर लुढ़क गए।    जिस विराट के ऊपर ज़ाफ़रानी लंगूर पोंगाते फिरते थे विराट स्कोर कियाविराट बाउंडरीविराट सेंचुरी उस विराट नाम को एकेले बाबर ने बोना बना कर दुसरे दर्जे में डाल दिया और उनके नायब को तीसरे दर्जे में धकेल दिया।    

नाज़रीन भारत के शिद्दत पसंद लंगूर लँगूरनियाँ अपने खुद के मुस्लिम अवाम को दुसरे और तीसरे दर्जे का शहरी बनाना चाहते थे और बाबर के नाम से दुश्मनी रखते थे उसी बाबार ने भारत की मट्टी के लालों को दुसरे और तीसरे दर्जे का बना दिया।

 Zuber

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...