Saturday, 24 June 2023

साहेब के दौरे के ऊपर दौरे भारत को पड़े मार दोहरे।

 

अज़ीज़ नाज़रीन

भारत के ऊपर दोहरी मार पढ़ी है और साहब हैं की दौरे के ऊपर दूसरा दौरा कर रहें हैं। हाल ही में ओर्रिसा के नज़दीक ३ ट्रेनों की आपस में  ज़बरदस्त टक्कर हो गई जिसकी वजह से कुछ ३०० के क़रीब लोग जहां बाक़ हुए फिर "बिपरजॉय" तूफ़ान से पूरा गुजरात, राजिस्थान तबाह हो गया लेकिन साहब हैं की चले गुलछर्रे उड़ाने अमेरिका।  इतना ही नहीं अभी और सुनिए।  अमेरिका का दौरा इक्तेदाम को पहुंचा की सीधा अमेरिका से जा पहुंच मिस्र। 

साहब को बोहोत ही गन्दी आदत है एक दौरा ख़तम होता है की उनको किसी की भी शादी याद आ जाती है और बिन बुलाये मेहमान के जैसे दवात उड़ाने पहुंच जातें हैं।  डैडी यह आपके गेस्ट हैं।  यह तो तिफ़्ले मकतब है यह यहाँ क्या कर रहा है।  आप रूकिये में बात करता हूँ।  “३-इडियट”. 

अबे गुलछर्रे उड़ाने के लिए अपना पैसा नहीं लगता, देश के पैसे पर उड़ाए जाते हैं।  बस तू हवाई जहाज़  उस जगह उतार दे जहाँ दवात हो रही हो। 

अब मिस्र का दौरा पहले से ते शुदा तो नहीं था।  फिर साहब को पाकिस्तान के जैसे क्या याद आ गया जो सीधा अपने वालिद का जहाज़ समझ कर मिस्र की जानिब घूमा दिया।  हाँ भाई हुकूमत से मिली हुई गाडी और लाड़ी है।  गाडी को जब चाहा जहाँ चाहा घूमा दिया और लाड़ी को जब चाहा जहां चाहा  ……… कर दिया। 

साहब की बोहोत ही गन्दी आदत है बिन बुलाये किसी भी दुसरे के घरों में घुसने की।  हाँ याद आया यह वही साहब हैं जो माननीय मनमोहन सिंह जी के बाथ रूम में झांका ताकी करते हुए पकडे गए थे।  फिर मेने उस मुद्दे पर बोहोत ही खिचाई की थी।  मनमोहन सिंह जी बाथरूम में बरसाती पहन कर नहाएं या  या कच्छे में नहाएं तुम काहे को किसी की निजी ज़िन्दगी में झांका ताकी कर रहे हो। 

ऑस्ट्रेलिया ने दौरा मंसूख किया फिर भी ऑस्ट्रेलिया पहुंचे और बीच रस्ते में ही फिजी याद आ गया वहां उतर गया। 

ख़ैर साहब की गन्दी और ओछी ज़ेहनियत की वजह से अब सभी ने अपने बाथरूम में ऐसी कारगरदेगी की है अगर किसी गलीज़ ज़ेहनियत ने झांका ताकी करने की जुर्रत की के उसकी आँख ही बहार आ जाएगी।  दूसरी बात बिन बुलाये इस मेहमान से अब तो आलमी बरादरी तंग आ चुकी है।  अब कभी भी यह दौरे पर जाता है तो सभी मुल्क अपने अपने रेडार सिस्टम को एक्टिव मोड पर कर देतें हैं कब आ धमकेगा बिन बुलाया मेहमान। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Islamophobia Saffron Indian Terror are in trouble globally.

AUTONOMOUS JOURNALIST

Islamophobia Saffron Indian Terror are in trouble globally. 

https://autojourna.wordpress.com/2023/06/24/islamophobia-saffron-indian-terror-are-in-trouble-globally/

Islamophobia saffron Terror Arrested in Dubai UAE.


Tuesday, 20 June 2023

मुस्लिम अवाम भारत में हूकूमती डाकूओं से होशियार रहें।

अज़ीज़ ब्रादराने मिल्लत ए इस्लामियाँ

भारत में २०१४ की ग़ुलामी और ज़ाफ़रानी दहशत के चलते अक़लियतों ख़ास मुस्लिम अवाम पर तशद्दूत फ़रेब धोखा बढ़ता ही जा रहा है।  हूकूमती डकैती की वारदात ख़ास रमज़ान और बकरा ईद पर खूब देखने को मिलती है।  बकरा ईद पर ज़ाफ़रानी दहशतगर्द बकरों, गायों, बेलों, भैसों को ज़िबह करने की निस्बत से ले जाते हुए ताजिरों पर तशद्दूत तो करते ही है ताहम हूकूमती डाकू घरों के बहार बंधे बकरों को डकैती कर के उठा ले जातें हैं। 

बृहन्मुम्बई के किसी भी इदारे को यह हक़ कहाँ से आ गया की बकरों को अपनी गाड़ियों में ज़बरदस्ती ले जाए।  फिर क्या ऐसा करने का हुकुम और क़रारदार नाफ़िज़ किया है। और अगर किया है तो उसकी मालूमात सहाफ़ियों को काहे को नहीं है।  अगर नहीं किया है तो क्या  इस तरह से इदारे की गाडी ला कर बकरों को ज़बरदस्ती उसमे डाल कर अपने ओहदे और हूकूमती निज़ाम के नाम के पीछे डाका डालना नहीं है।  ऐसे अनासिरों के ख़िलाफ़ हुकूमत को सख़्त इक़दाम करना चाहिए।

जब सूबे महाराष्ट्र के वज़ीरे दाख़ला और नायब वज़ीरे आला ने हुकुम नाफ़िज़ कर दिया की कोई भी ग़ैर ज़रूरी अनासिर किसी भी ताजिर को बकरा ईद पर ले जाते क़ुर्बानी के जानवरों को नहीं रोक सकता।  फिर बृहन्मुम्बई के इस फ़िर्क़ा परस्त, ज़ाफ़रानी ज़ेहनियत डाकू फितरत मुलाज़िम के पास ऐसी कौन सी क़ुव्वत आ गई के उसने घरों के बहार बंधे बकरों को गाडी में लादना शुरू कर दिया। 

क़ौम और मिल्लत से गुज़ारिश की जाती है जब तक भारत इन ज़ाफ़रानी गुलामी की ज़ंजीरों से आज़ाद नहीं हो जाता अपने आशियात की खुद हिफाज़त करें। 

यह मुगलियाँ और हुकूमत ए आलमगीरी का दौर नहीं हैं जिनकी रूहानी फैज़ की बदौलत किसी भी मज़हब की एक अकेली ख़ातून कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे सोने के ज़ेवरों से आरास्ता जा सकती थी और रस्ते में किसी क़िस्म की कोई दुशवारी या चोरी डकैती नहीं होती थी। 

जी हाँ नाज़रीन:-  

१.       यह अलामगिरी वही सुनहरा दौर है जिसमे हज़रत सूफी बाकमाल मोहीउद्दीन औरग़ज़ेब आलमगीर रेहमतुल्लाह अलैहे के दौर ए बादशाहत में भारत की सरहद फ़ारस (ईरान) से ले कर तो बर्मा तक फ़ैली हुई थी। 

२.    यह वही औरग़ज़ेब रेहमतुल्लाह अलैहे हैं जिनको की गंगा जमुनी तहज़ीब का मुजस्समा और मर्कज़ तस्लीम किया गया था।

३.    यह वही औरंगज़ेब रेहमतुल्लाह अलैहे हैं जिनके दौर ए बादशाहत में गद्दारों और इस्लामिक ममलेकत से बग़ावत करने वालों के सर क़लम कर दिए जाते थे।  

४.     यह वही औरंगज़ेब रेहमतुल्लाह अलैहे हैं जिनका नाम आते ही आज ८०० साल बाद भी ग़द्दारों दहशतगर्दों की नस्लों की जल जाती है।  जली जली तेरी भी जली ना।

५.       यह वही औरग़ज़ेब रेहमतुल्लाह अलैहे हैं जिनके नज़दीक इंसाफ़ और अवामुं नास की ख़िदमत फ़र्ज़ ए ऊला था। 

६.          यह वहीँ औरंगज़ेब रेहमतुल्लाह अलैहे हैं जिन्होंने माले गनीमत (सरकारी ख़ज़ाने) से कभी अय्याशी या बेरुन मुल्क गुलछर्रे नहीं उड़ाए और ना ही अपने ज़ाती नफ़े के लिए उसको इस्तेमाल किया।  वोह अपने इख़राजात क़ुरान लिख कर टोपी बून कर करते थे।  तभी उन्होंने कभी हज नहीं किया जो की इस्लाम का फ़रीज़ा है।  हुकूमत के ख़ज़ाने से करना नहीं था और उनके पास इतना सरमाया नहीं था।

सहाफ़ी ज़ुबेर

56 days crossed Christians are still burning in Manipur.

AUTONOMOUS JOURNALIST

56 days crossed Christians are still burning in Manipur. 

https://autojourna.wordpress.com/2023/06/20/56-days-crossed-christians-are-still-burning-in-manipur/ 

आलमी फ़क़ीर कटोरा फैलाने चला बेरुन मुल्क।

 अरे हम तो फ़क़ीर आदमी हैं झोला उठा कर चल पड़ेगे जी: आलमी फ़क़ीर

अज़ीज़ नाज़रीन,

ज़ाफ़रानी दरिंदों, मौत के सौदागर, लंगूर लँगूरनियों में एहसास तो जैसे फ़ौत हो चुके हैं।  बालासोर में हुए ३ ट्रैनों की टक्कर का क़िस्सा अभी पूरी तरह ख़तम भी नहीं हुआ था की चिड़ियाघर के खूंखार दरिंदे हैवान ज़ाफ़रानी लंगूर लँगूरनियों ने कटोरा फैलाने वाले फ़क़ीर की शान में क़सीदे लिखना शुरू कर दिए।  होना यह चाहिए था की मोदी से आँखों में आखें डाल कर सवाल पूछते रहना थे और तब पूछना था जब तक उन फ़ौत हुए अफ़राद का कफ़्फ़ारा नहीं ले लिया जाता तब तक उसको नहीं छोड़ना था।  ना ही रेलवे वज़ीर ने इस्तीफ़ा दिया ना ही फ़क़ीर की जानिब से कोई सख्त इक़दाम किये गए तो क्या यह समझा जाए की भारत का अवाम अब  बे-यार-ओ-मददगार है, जिसकी कोई सुध लेने वाला ना हो जिसकी कोई सुनने वाला ना हो। 

जांच के नाम पर एक अदना से मुलाज़िम सिग्नल मेन के पीछे सीबीआई पड़ी हुई है जो बिचारा हूकूमती ओहदे पर था और अपने बीवी बच्चो का पेट पाल रहा था।  अगर तहक़ीक़ करना है तो सब की करो।  सिग्नल मेन को मुअत्तिल कर दिया और बड़ा मगरमच्छ रेलवे वज़ीर अभी तक अपने ओहदे पर फ़ाइज़ है।  और फ़क़ीरी का जिसको ना आया सलीक़ा वोह बेरुन मुल्क गुलछर्रे उड़ाने निकल गया।   

फ़क़ीर की उस बेरुन मुल्क दौरे पर हर ख़बरनामे पर आज वही छाया हुआ है।  लंगूर लँगूरनियों कितने रुपयों में २.५ अवाम की जान का सौदा किया और हुकूमत से सवाल करना बंद कर दिया।  अभी तो दौरे का आग़ाज़ भी नहीं हुआ है और क़सीदों का दौर शुरू हो गया।   फिर दौरे पर क़सीदे उसके बाद क़सीदों पर क़सीदे मतलब फ़क़ीर के अमेरिका से आने के बाद कई दिनों तक क़सीदे लिखे जायेगें।  तब तक इंतेखाब आ जायेगें फिर उन इन्तेख़ाब में इस दौरे को भुनाया जाएगा।  

लंगूर लँगूरनियों की सियासी मजबूरी देखो जो अपने ओहदे के साथ ग़द्दारी के मुर्तकिब हो कर हर खबरनामे पर मोदी की शान में क़सीदे लिख रहें हैं ताके उसका फायदा २०२४ में ज़ाफ़रानी महाज़ को मिल सके।  जबकि मोदी के ऊपर तनक़ीद होना चाहिये थी। 

बाला सोरे ट्रैन हादसा वैसा ही है जैसा की आम तोर पर २००२ से मोदी की हिकमते अमली रही है।  जहाँ उसकी सियासी साख में पस्ती या ज़वाल आया की कुछ ऐसा कर दिया जिससे अवाम की पूरी हमदर्दी मोदी और ज़ाफ़रानी तंज़ीम की जानिब चली जाए।  ऐसे हादसों का इस सहाफ़ी  के पास पूरा रिकॉर्ड है। 

हर इंतेखाब से क़ब्ल ऐसा कुछ तो हो जाता है जिससे इंतेखाब को मुत्तासिर कर के ज़ाफ़रानी तंज़ीम की जानिब एक मुश्त अक्सरियत अवाम के वोट किये जा सकें।  गुजिश्ता ९ सालों में खूब हिन्दू मुस्लिम कर लिया हर मुद्दे पर पाकिस्तान को कौस लिया नहीं तो इस सहाफ़ी को कोई वजह नहीं समझ में आ रही थी की बालासोर पर पाकिस्तान या मुसलमानों के नाम पर वारंट फाड़ दिया जाए।  एक दो मासूम मुसलमानों को गिफ्तार कर के लंगूर लँगूरनियों को उस खबर के पीछे लगा देते और तब तक उधम मचवाया जाता जब तक अक्सरियत वोट ज़ाफ़रानी तंज़ीम की जानिब नहीं आ जातें।  तब तक इंतेखाब आ जाते और एक मुश्त वोट ज़ाफ़रानी तंज़ीम की झोली में चले जाते। 

लेकिन इन लंगूर और लँगूरनियों को भी इतने जूते पढ़ चुके हैं की मज़ीद ज़लालत हुई तो अवाम बरजस्ता लँगूरनियों को कोठे पर बैठी जिस्म फ़रोश तवायफ और लंगूरों को उनका दलाल मुखातिब करने लगेगा। 

वैसे इस सहाफ़ी ने तो इन लंगूर लँगूरनियों को ज़हन फ़रोश तो मुखातिब करना शुरू कर दिया है।  और इस सहाफ़ी के नज़दीक इनका विक़ार और इज़्ज़त दो कोड़ी की नहीं है।  जो किसी भी गलती और गफलत पर बजाये हुकूमत को कटघरे में खड़ा करने के मुख़ालिफ़ों से सवाल करतें हैं।  बालासोर हादसे पर भी मुख़ालिफ़ों के ऊपर लंगूर लँगूरनियाँ गर्मजोशी दिखा रहे थे।   जो मुखालिफ हुकूमत की गफलत और गलती को गिनवाता है वोह इन लंगूर लँगूरनियों का दुश्मन हो जाता है।  बस हुकूमत की आगे आगे कर के लो लो करते रहो।  

मोदी तो बड़ी बड़ी बातें करता है पूरे ट्रैन नेटवर्क को हाई टेक करने की बातें करता है।  उसके कहे के हिसाब से काम नहीं हुआ तो उसको इस्तीफ़ा देना चाहिये था।  इस्तीफ़ा नहीं दिया तो कम से कम लंगूर लँगूरनियों को हुकूमत से सवाल तो करना था।  तनक़ीद करनी थी।  अगर वोह भी नहीं तो एक दरिंदा सिफ़त, ज़ालिम मौत के सौदागर की शान में क़सीदे तो मत लिखो। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Friday, 16 June 2023

मी औरग़ज़ेब, ओरंगराये माझा: सहाफ़ी ज़ुबेर

अज़ीज़ नाज़रीन

आज का मज़मून ३ हिस्सों पर मुश्तमिल है। 

१.           दरिंदे फडणवीस के मुँह से ख़ारिज गंदगी का जवाब

२.          नये एवांन में मुताहिदा भारत का नक़्शा

३.          बेपोरजॉय से दहशत की ज़मीन गुजरात तबाह पाकिस्तान मेहफ़ूज़ 

१.       नाज़रीन गुजिश्ता हफ़्ते हिन्दू शिद्दत के ज़ेरे इंतज़ाम महाराष्ट्र के कोलहापुर को आतिशे नार करने की ज़ाफ़रानी तंज़ीम की हस्बे रिवायत ग़लीज़ और गन्दी सियासत देखने को मिली।  वजह इलज़ाम था मजलिस के रकूनों ने आलमगीर हज़रत सूफ़ी रूहानी ताक़त औरंगज़ेब रेहमतुल्लाह अलैहे की तस्वीर शाया की थी और उनकी शान में क़सीदे वाला स्टेट्स रखा था।  उसके ऊपर ज़ाफ़रानी दरिंदा ग़लीज़ ज़ुबान देवेंद्र फडणवीस फ़ौरन अमल पेरा हो गया।  देवेंद्र फडणवीस बोलता है महाराष्ट्र में यह ओरग़ज़ेब की इतनी ओलादे कैसे पैदा हो गयी।  इसकी तहक़ीक़ करेगें।  अबे ज़न्खे अभी तक २००८ में जो कसाब के नाम के पीछे बहादुर हेमंत करकरे को शहीद किया था उसकी तहक़ीक़ तू पूरी नहीं कर सका तो औरग़ज़ेब की औलादों की क्या तहक़ीक़ करेगा।    पुलवामा किस की सियासत का नतीजा था उसकी तहक़ीक़ नहीं कर पाया और मुँह से गंदी गर्म हवा छोड़ रहा है।  देवेंद्र फडणवीस में रखता हूँ औरग़ज़ेब की तस्वीर अपनी डीपी बना कर उनके शान में क़सीदे लिखता हूँ कर क्या करता है मेरा।  निकाल मेरी तहक़ीक़।  फिर औरंगज़ेब ज़ालिम थे।  एक आम फरेब और झूट है की उन्होंने १० हज़ार हिन्दू रोज़ मारे दूसरा उन्होंने २ लाख जैनो को रोज़ जालाया ऐसा कर के उनको तस्कीन मिलती थी।  अगर इतने ज़ालिम थे औरग़ज़ेब तो दहशतगर्द फांसी पर लटकाया गया नाथूराम की औलादें कैसे ज़िंदा बच गई।  उस हिसाब से तो काफ़िर शिद्दत की नस्ल ख़तम हो जानी चाहिए थी।   

      याद रखो शिद्दत पसंद काफ़िरों, बीजेपी वालों, संघी दहशतगर्दों लंगूर और लँगूरनियों की टोली जितना झूट फैलाओगे उतना सच साबित होगा।  फ़िर जो तोहमत औरग़ज़ेब और मुग़लों के ऊपर लगाते हो की औरंगज़ेब ने १० हज़ार हिन्दू एक दिन में मारे थे और वोह बोहोत ज़ालिम थे तो वोह सब तुमको और तुम्हारी नस्लों को भोगना पड़ेगा।  हिन्दुस्तान तेरे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह इंशाल्लाह अब हो रहें हैं टुकड़े तो भागे भागे फ़िर रहे हो।  फ़िर लव जिहाद पर झूट फैलाया तो अब खुद हिन्दू वाल्दैन मुस्लिम नौजवानों के साथ डंके की चोट पर अपनी दुख्तर का निकाह करवा रहें हैं।  शादी का कार्ड बाक़ायदा छपवा कर रिश्तेदारों को दिया जा रहा है।   

२.     नये एवान का इफ़्तेताह तानाशाह मोदी ने किया और उसमे वोह तमाम आशियात रखे गए जो मुस्तक़बिल में इस्लामिक ममलेकत के बनने में कारगर साबित होंगे।  नाज़रीन नये एवान में मुताहिदा भारत की ऐसी तस्वीर लगाई गई है जो दिवार में ही मौजूद है उसको अगर निकालने की हाजत हुए तो पूरी दिवार को तोड़ना पड़ेगा।  इससे मोदी की ज़ेहनियत का इल्म हुआ की कितनी ख़बासत और ज़हर उसके ज़हन में भरा हुआ है।  आज़ाद रियासतों को वोह जंग कर के भारत में शामिल करना चाहता है।  हाँ हम भी यही चाहते हैं की भारत मुत्तहिद रियासत बने लेकिन भारत पाकिस्तान, बंगलदेश और अफ़ग़ानिस्तान को मिला कर एक जो रियासत बनेगी वोह "हिन्दुराष्ट्र" नहीं होगी बल्कि वोह मुताहिदा इस्लामिक ममलेकत  बनेगी।

३.     तूफ़ान बोपरजॉय का आग़ाज़ हुआ था और ज़ाफ़रानी लंगूर लँगूरनियों के ज़हन में गंदा कीड़ा कुलबुलाने लगा था।  उनके हिसाब से पाकिस्तान में ज़्यादा तबाही आएगी और गुजरात बच जाएगा।  फिर तूफ़ान का आग़ाज़ भी नहीं हुआ था की पाकिस्तानी हुकूमत पर लतीफ़े और पाकिस्तानी अवाम को गाये बैल के ऊपर अपनी जान बचाते हुए हंसी मज़ाक का आग़ाज़ हो गया था।  ख़बरनामे पर एक संघी बोलता है पाकिस्तान तो तबाह हो जाएगा पहले ही गरीबी ऊपर से आटा गीला आगे लिखता है "बेपुरजोय तुम आगे बड़ों हम तुम्हारे साथ हैं।"  मेने उसी वक़्त अल्लाह से दुआ की या अल्लाह ऐसा कुछ कर दे की पाकिस्तान तो बच जाए और गुजरात तबाह हो जाए।  वही हुआ पाकिस्तान से इतना दूर रहा तूफ़ान की उसकी हवा तक नहीं पहुंची।      

बोलो शैतानों के वारिस बागेश्वर वाले महाराज तुमने तो खूब कोशिश की लेकिन तुम्हारी हर कोशिश नाकाम साबित हुई।  कियोंके जो काम शैतान तबाही का कर सकता है उसको अल्लाह रेहमत में बदल देता है।   यह पहली बार नहीं जब पाकिस्तान के ऊपर आने वाली तकलीफ पर संघी कट्टरपंथी काफ़िर लंगूर लँगूरनियाँ खुशियां बनाते थे वोह सब भारत के ऊपर लौट आई थी बल्कि ऐसा कई बार हुआ है और आगे भी होगा।     

याद रखो काफ़िर कट्टरपंथियों, संघी दहशतगर्दों, बीजेपी वालों लंगूर लँगूरनियों तुम्हारे ही मज़हबी अक़ीदे के हिसाब से पाकिस्तान प्रहलाद है और भारत होलिका।  हिरण्यकश्यप भारत का ज़ालिम तरीन मग़रूर और अकड़ू राजा मोदी है।  तो जब जब तुम पाकिस्तान का बुरा चाहोगे ख़ुद जल कर राख हो जाओगे।  बर्बाद हो जाओगे तबाह हो जाओगे। 


सहाफ़ी ज़ुबेर

पाकिस्तान मेरा वतन

हम पाकिस्तान के अवाम  …..

Pakistan is my country and all Pakistanis are my brothers and sisters. I love my country and I am proud of its rich and varied heritage. To my country and my people, I pledge my devotion. In their wellbeing and prosperity alone, lies my happiness”.      Journalist Zuber

आज का मज़मून अमेरिका में भारत के दो मक़बूल सियासदानों के दौरे पर मुश्तमिल है। AIMIM के जनाब असदुद्दीन ओवेसी मुस्लिम अवाम में मक़बूल हैं और नरेंद्र मोदी हिंदू अवाम में मक़बूल हैं। असदुद्दीन अमेरिकी दौरा कर चुके जबकी नंदू का दौरा मुतवक़्क़ो है।

रियासत हाय मुताहिदा अमेरिका में दौरान सवालात असदुद्दीन ने पाकिस्तानी मुसलमानों समेत सहाफ़ियों के सवालों का भी जवाब दिया? हमेशा की तरह उनका जवाब ज़हानत से लबरेज़ था बिना हदफ़ पर सीधा निशाने साधने के उन्होंने गोल मोल जवाब दिया। "कसाब वाक़िया" की तनक़ीद करते हुए १२ रोज़ की शादीशुदा ख़ातून की कहानी सुनाई, जिसका शोहर वीटी स्टेशन पर गोलीबारी में हलाक हो गया था।

यहां वही ख़ामी है जिसका ज़िक्र मैंने भारतीय मीडिया के ज़ाफ़रानी लंगूरों को कसाब वाक़िया के बाद हर बार जवाब दिया है, जब उन्होंने फायरिंग में मारे गए मुसलमानों का नाम लेकर पाकिस्तान की किरदार कूशी शुरू कर दी थी.

सभी लंगूरों-लंगूरियों और जनाब असद उद्दीन को मेरा दो टूक जवाब है क्या सबूत है कि १२ दिन की शादीशुदा ख़ातून के शोहर को कसाब ने हलाक किया। क्या आपके पास कोई पुख़्ता सबूत है? गोली लगने की सूरत ऐ हाल के बारे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट क्या कहती है? कसाब के पास एके-47 जैसे हाई-टेक हथियार या इससे भी जदीद हथियार थे। ज़्यादातर मारे गए अफ़राद के पोस्टमॉर्टम में कहा गया है कि उनकी मौत आम गोली लगने से हुई है। जो आमतौर पर फौज या पुलिस के पास होता है।

दूसरी बात, कसाब ने वीटी पर ७ मिनट से ज़्यादा वक़्फ़े तक गोलियां नहीं बरसाईं थी। इसके बाद उन्होंने वीटी स्टेशन छोड़ दिया था। मुसलमानों के हलाक होने का वक़्त क्या था, क्या वे कसाब के वीटी छोड़ने के बाद हलाक हुए थे या दौरान कसाब की गोलीबारी के बीच। इमकान ज़्यादा  है, जब मुहाफ़िज़ अफ़वाज ने इस बात का ख़ुलासा किया होगा कि यह पाकिस्तान द्वारा किया गया दहशतगर्द हमला है, तो मुहाफ़िज़ फोर्सेस ने मुसलमानों को दाढ़ी और बुर्का में देखकर गोली मार दी होगी. जैसा कि उस वक़्त हर मुसलमान दाढ़ी वाला दहशतगर्द था। भारत में आज भी पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट के नाम पर मुसलमानों का एनकाउंटर करना आम सक़ाफ़त है। दहशतगर्दी के नाम पर कश्मीर में फौज आम अवाम मुस्लिम मजदूरों का क़तल कर रही है। आज के हालात ज़्यादा इशारा दे रहें हैं कि वीटी स्टेशन पर मुसलमान अवाम को कसाब के बजाय मुहाफ़िज़ फौज ने गोली मार दी होगी। जैसा कि वे फर्जी मुठभेड़ में और दहशतगर्दी के पीछे सिर्फ़ मुसलमानों को मार रहे हैं। 

नंदू के अमेरिका दौरे से ठीक क़ब्ल, यूएसए इन्तेज़ामियाँ  "बीबीसी डॉक्यूमेंट्री ऑन गुजरात 2002" की स्क्रीनिंग करेगा।

जल्लाद मोदी के लिए यह कितना शर्मनाक और बेइज़्ज़त्ती का लम्हा होगा, उसके दौरे के एक दिन क़ब्ल वे सारे मंज़र अमेरिकी रकून एवांन वज़ीरों और अमेरिकी सदर को देखने को मिलेंगे, जिसमें १०-१० काफिर उस बेबस अकेली ख़ातूनों को दिन के उजाले में बरहना कर इजतेमाई असमतऱेज़ी कर रहे हैं। जो ज़ईफ़ भाग नहीं सकते थे, उन्हें कुएं में फेंक कर आतिश नार कर दिया, जो नौजवान भाग रहे थे, उनके पैर काट दिए गए और आग लगा दी गई; जो बच्चे दौड़ नहीं पा रहे थे उनके सिर क़लम कर दिए गए।

फिल्म में शूट किए गए सीन बिल्कुल हक़ीक़त पर मबनी हैं,  कुछ सीन मैंने अपने कैमरे से शूट किए हैं। उस वक़्त मैं हिंदू दहशत पर अपने तहक़ीक़ के काम पर था। फिर यही जानकारी और मनाज़िर २००२ के गुजरात में मुसलमानों पर हिन्दू हमले और मालेगांव से मुताल्लिक़  महाराष्ट्र हुकूमत के तब के वज़ीर ए आला मरहूम विलास राव देशमुख को भेजे थे और बेगम भोपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके बाद गुजरात के वो वीडियो तमाम आलमी मीडिया और अक़वामे मुताहिदा को भेजे गए थे.

बीबीसी की ख़बरों और फिल्म की एतेबार पर मोदी, बीजेपी, संघी शक और शुकूक कर सकते हैं, अमेरिकी नहीं. "गुजरात डॉक्यूमेंट्री" की स्क्रीनिंग के ठीक एक दिन बाद जब जल्लाद मोदी अमेरिका पहुंचेगा, तो उसे वहां पकड़कर गिरफ्तार करें और इंसानी हुकूक की शदीद खिलाफ़वर्ज़ी का मुकदमा चलायें.

कसाब वाक़िया भी ATS के तहक़ीक़ीक़ अफसर हेमंत करकरे को ख़तम करने के लिए हिंदू दहशत की एक साजिश का हिस्सा था। अगर वह शहीद नहीं होते तो नंदू, साधु, अमित, आडवाणी समेत हिंदू दहशतगर्द का पूरा नेटवर्क सलाख़ों के पीछे होता। और इज़राईल की इंटरनेशनल टेरर नेटवर्क फंडिंग का पर्दाफाश हो जाता।

सहाफ़ी ज़ुबेर

Monday, 12 June 2023

भारत और लंगूरों के लिए हर रोज़ नई मुसीबत अब जिलावतन करने का हुकुम।

अज़ीज़ नाज़रीन,

२०१४ के ग़ुलाम भारत में हर रोज़ कोई नई मुसीबत का आगाज़ हो रहा है।  अब भारत के ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के ख़ूँख़ार जानवर लंगूर-लँगूरनियों के ऊपर उनकी हरामख़ोरी, बेहयाई, बदमाशी, पेशावारना बदअमली और ग़द्दारी की वजह से शदीद रूसवाई और ज़लालत का सामना करना पड़ रहा है। 

नाज़रीन जिस हिसाब से यह ख़ूँख़ार जानवर लंगूर लँगूरनियाँ हर मुद्दे पर ना सिर्फ अपने पड़ोसी पाकिस्तान, चीन, नेपाल, श्रीलंका के ख़िलाफ़ ज़हर अंगेशी करते थे उससे भारत और चीन के बीच शदीद इन्तेशार पैदा हो गया है।   जिस तरह की ज़हरीली जुबांन यह लंगूर और लँगूरनियाँ भारत के मुक़ाबले दुसरे मुमालिकों के लिए इस्तेमाल करते थे उससे अभी तो उसकी आतिश चीन में लंगूरों तक पहुंच गई है.

हर मुद्दे पर अपने मुफ़लिस, फ़क़ीर, मुल्क भारत को सबसे अज़ीम तसव्वुर करना मोदी को दुनियां का सबसे अज़ीम मक़बूल सियसतदाँ बोल कर पेश करना।  यहाँ तक की अमेरिका के बाइडेन मोदी से मिलने के लिए बेकरार थे।  अगर इतना ही मोदी मक़बूल है तो बाइडेन की शर्तों पर भारत काहे को सजदा रेज़ हो गया।  काहे को मोदी बाइडेन की हर बात मानने पर मजबूर हो गया। 

झूठी फ़रेबी ख़बरों को शाया करना और सच्ची ख़बर को पोशीदा करना ऐसी हिमाक़त का असर अब दिखने लगा है। पड़ोसी मुल्क चीन में मौजूद एक भारतीय ज़ाफ़रानी लंगूर को ३० जून तक वतन छोड़कर जाने का हुकुम दे दिया है. बीते कुछ महीनों में चीन ने कई भारतीय ज़ाफ़रानी लंगूर लँगूरनियों को ज़लील कर के चीन से हकाल दिया और बहार का रास्ता दिखाया है. 

नाज़रीन आपको याद है ब्लफ मास्टर तिहाड़ जेल का क़ैदी और ज़ी न्यूज़ से ज़लील कर के हकाला गया सुधीर तिहाड़ी और टॉनिक वाली बाई।  इन दोनों को दुबाई में दाख़िल होने पर पाबन्दी लगा दी थी।  संघी दहशतगर्दों ने दुबाई में हिन्दू दहशत की फैक्टरी और दुर्गा वाहिनी की ब्रीडिंग प्लेस की इफ़्तेताह पर सुधीर तिहाड़ी को मदू किया था।  दुबाई की शहज़ादी ने वीज़ा देने से साफ़ अलफ़ाज़ इंकार कर दिया था।  सुधीर की झूटी फ़रेबी ख़बरों को फैलाने की आदत है जो इस्लाम मुखालिफ होती हैं।  वोह झूट और फ़रेब फ़ैलाने वाला अददतन मुजरिम है और ऐसे इंसान को हम हमरे मुल्क की फ़िज़ा को खराब करने के लिए वीसा नहीं दे सकते। 

चीन हुकूमत ने "प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया" (PTI) के एक लंगूर (सहाफ़ी) को वतन छोड़कर जाने का फ़रमान सुनाया है. चीन ने PTI के सहाफ़ी का वीजा रिन्यू करने से साफ़ इनकार कर दिया और ३० जून तक चीन छोड़ भारत लौट जाने को कह दिया. 

२०२३ की शुरुआत में भारत के चिड़ियाघर के चार ख़ूँख़ार जानवर ज़ाफ़रानी लंगूर चीन में मौजूद थे और वहां से झूठी फ़रेबी भारत के लिए जासूसी और चीन मुखालिफ ख़बरे भारत भेजते थे।  लेकिन इस साल अप्रैल में भारत के ऐसे दो ग़द्दार जानवरों का वीजा फ्रीज कर उन्हें भारत लौटने को कह दिया गया था. ग़द्दार इसलिए की यह ज़ाफ़रानी कीड़े जिस देश में रहते हैं जिस देश का खाते हैं भारत की मोहब्बत में उसके साथ ही ग़द्दारी करते हैं।  जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करतें हैं।  बाकी बचे दो भारतीय ज़ाफ़रानी खूंखार लंगूरों में से एक भारतीय लंगूर ने ११ जून को चीन छोड़ दिया था और अब आखिरी भारतीय लंगूर को जून के आख़िर तक चीन छोड़ने को कहा गया है. PTI के सहाफ़ी  के चीन छोड़ने के साथ ही अब चीन में भारत का एक भी लंगूर नहीं होगा.  और ना ही झूटी ख़बरे अब मीडिया की सुर्खियां बनेगी की चीन में मस्जिद को ढहा दिया और मुस्लिम अवाम पर चीन ज़ुल्म कर रहा है, तब भी आलमी बरादरी कियों खामोश है। 

वोह ख़बर मेने किसी भी आलमी ख़बरनामे में नहीं देखी थी।  उस ख़बर पर लंगूरों को बोहोत सख़्त जवाब दिया था।  और उस झूटी ख़बर की एक कॉपी चीन की हुकूमत को भेज दी थी।  अगर मेरा कमेंट मेहफ़ूज़ होगा तो मीडिया देख सकता है।  मेने यही लिखा था "चीन ज़िंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद, हम चीन के साथ हैं भारत को तबाह कर देंगें चीन का साथ देंगें"

नाज़रीन याद है अभी हाल ही में इमरान खान की अहलिया पर भारत के इन ज़ाफ़रानी लंगूरों ने कैसे झूठे इलज़ाम लगाए थे।  एक नकाबपोश दोशीज़ा के ऊपर झूठे इलज़ाम की वोह जादूगर है, काला जादू करती है, टोना टोटका करती है।  तुम एक नक़ाबपोश ख़ातून को सिर्फ इसलिए बदनाम कर रहे हो कियोंके उनके शोहर ने भारत को अक़वामे मुत्तहिदा में ज़लील कर दिया और भारत को इमरान खान की क़ियादत में सिफारती शाकिस्त का सामना करना पड़ा था।  मोदी इमरान खान के सामने हर महाज़ पर बोना साबित हुआ।  तो तुम उस शख़्स के घर की इज़्ज़त को झूट फ़रेब की बुनयाद पर बदनाम करोगे।  तो उसकी सज़ा तो तुमको भी मिलेगी।  अब जो बदनामी भारत की हो रही है। 

मौलाना साद पर इन लंगूरों ने उधम मचा दिया था।  उसकी सज़ा मिली।  अब दूसरी क़िस्त तैयार हो चुकी है।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

Sunday, 11 June 2023

साँच को आंच ही क्या, झूट, फरेब को रूसवाई।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

२०१४ के ग़ुलाम भारत में बीजेपी, संघी दहशत, शिद्दत पसंद काफ़िरों और लंगूर-लँगूरनिओं की यह आम सक़ाफ़त हो गई थी की झूट फ़रेब के ऊपर इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करना।  लेकिन जितना झूट इन लोगों ने इस्लाम और मुसलमानों की निस्बत से फ़ैलाया उतना ही खुद हिन्दू अवाम बैदार हुआ है।  हक़ और सच्चाई की तहक़ीक़ करने पर वोह तमाम अफ़राद दाख़िल ए इस्लाम हो गए जो इन लंगूर लँगूरनियों के झूट फ़रेब की तहक़ीक़ कर रहे थे।   या ऐसे मुस्लिम नौजावानों के बारे में मज़ीद जानकारी हासिल कर रहे थे जिनको फ़रेब के साथ झूठे इलज़ाम में जेलों में बंद कर रखा है या जो महज़ अपने मज़हब इस्लाम की वजह से २०१४ के ग़ुलाम भारत में बेपनाह सताये गए और उनके ज़ारिया ए माश को बीजेपी और शिद्दत ने तबाह कर दिया फिर भी वोह बेहद पुर सुकून हैं और उनके रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में ज़र्रा भर फ़र्क़ नहीं आया।  

इस तबदीली मज़हब में एक नाम और जुड़ गया है और वोह है अनामिका दुबे का जो मुस्लिम नौजवान से शादी कर के अब उज़मा फातिमा बन गई हैं। 

ख़बर सूबे दरमियान (मध्य प्रदेश) के शहर जबलपुर से है।  जहाँ के अमखेरा इलाक़े में रहने वाली अनामिका दुबे ने मोहम्मद अयाज नाम के मुस्लिम नौजावन के साथ ०२.०४.२०२३ को निकाह कर अपना मज़हब तब्दील कर लिया था. 

अपनी बेटी के इस क़दम से ग़मज़दा अहले ख़ाना ने बेटी को बेताल्लुक़ करते हुए बड़ा फ़ैसला लिया और अपनी हयात दुख्तर को अपने देवताओं की नज़र कर ज़ेरे आब कर दिया जिसको पिंडदान कहते हैं। अहले  ख़ाना ने दुखतर के इंतेक़ाल होने के ताज़ियाती पैग़ाम भी शाया किये थे जिसे अपने जानने वालों और रिश्तेदारों को भेजकर मौत के ख़ाने का एहतेमाम भी किया.  जानने वालों और रिश्तेदारों को नर्मदा के साहिल पर मुनअक़िद पिंडदान की रस्म में शामिल होने की दावत दी।   

नाज़रीन एक बात तो ते है जितना वबेला झूठी बातों पर किया जाएगा उतना हक़ मुस्तहकम होगा।  लव जिहाद से ले कर गौ मॉस फिर हूजूमी दहशत जितना मुस्लिम अवाम ने २०१४ के ग़ुलाम भारत में ज़हर को सहा है अब उस फसल के नतीजे मिलने लगें हैं। 

उत्तराखंड से शिद्दत की ज़मीन को छोड़ कर हिन्दू अवाम ने हिजरत करना शुरू कर दी है। उस हिजरत पर हिन्दू साधू संत बोल रहें हैं की भारत को साजिश के साथ इस्लामिक राष्ट्र बनाया जा रहा है।  में सहाफ़ी जुबेर उन तमाम लोगों से कहना चाहता हूँ साजिश नहीं बल्कि डंके के चोट पर भारत इस्लामिक ममलेकत बनेगा।  २०१४ से में चीख़ चीख़ कर मोदी इन्तेज़ामियाँ को और तमाम दानिशमंद आज़ाद सहाफ़ी असदुद्दीन बोल रहे थे की इन चीज़ों को कण्ट्रोल करो तब तो आपने हर तज़वीज़ पर हंसी मज़ाक में उड़ा दिया।  अब साजिश दिख रही है।  

जितना हिन्दू शिद्दत, दहशत और बीजेपी वालों ने उधम मचाना था मचा लिया अब तो फ़ैसले की घडी है।  और यही में बोलता था जब सब कुछ बर्बाद हो जाएगा तो महज़ रोने के अलावा तुम लोगों के पास कुछ नहीं रहेगा। 

आज जिन लंगूर और लँगूरनियों ख़ास सुधीर तिहाड़ी को बढ़ती हुए मुस्लिम आबादी में साजिश नज़र आ रही है यह वही झूठा, दोग़ला फ़रेबी शख़्स है जिसने २००० के नोट में नेनो चिप लगाई थी।  जिसकी तस्दीक़ चिप वाली बाई ने हाथों को ऊपर से नीचे तक उठा कर की थी।  फिर यह वही सुधीर तिहाड़ी है जिसने गाये के गोबर की खेप हवाई जहाज़ से भर कर अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस जैसे आला तालीमी आफ़ता मुल्कों में भेजी थी। और मोदी के बारे में क़सीदे पढ़े थे।  यह वही सुधीर तिहाड़ी है जिसको अपने झूट फ़रेब पर "ज़ी न्यूज़" से धक्के मार कर ज़लील कर के हकाला गया था।  अब यह "आज तक" पर गंदगी फैला रहा है और माहौल को बदबू नुमा कर रहा है। 

सुधीर कहता है की मुसलमान पैसे दे कर आला मुस्तक़बिल का लालच दे कर हिन्दू अवाम को इस्लाम में साजिश के साथ दाख़िल कर रहें हैं।  अगर मुसलमान पैसे दे कर हिन्दू अवाम को इस्लाम में दाख़िल कर रहें हैं तो उनकी ख़ुद की माशी हालात काहे को नहीं ठीक कर पा रहें हैं।  फिर कितने मुसलमान आला मुस्तक़बिल वाले हैं जिन्होंने हिन्दू लड़कियों से शादी की है।  

अगर कोई हिन्दू इस्लाम में दाख़िल हो रहा है तो उसको इस्लाम में आने के बाद ज़ेहनी क़ल्बी सुकून मिला।  आज भी इस्लाम में कई ज़िंदा वली हैं उसने उन वलियों अल्लाह वालों की करामात देखी।  फिर मेने इस मुद्दे पर कई तहक़ीक़ात की है जो बन्दा पहले डिप्रेशन में चला गया था कोई भी वुजूहात रही हो इस्लाम में आने के बाद नमाज़ और क़ुरआन की बरकत से वोह नार्मल ज़िन्दगी जीने लगा।    


सहाफ़ी ज़ुबेर

दो लंगूरों को दिफ़ाई फ़ौजिओं ने किया ढेर।

अज़ीज़ नाज़रीन,

दिफ़ाई फ़ौजियों की लंगूर लँगूरनियों को मौत देने की दूसरी क़िस्त का आगाज़ हो चूका है।  पहले ही झटके में दो लंगूरों की मौत हो गई है।  अभी ११ या १२ रोज़ क़ब्ल जब झूठी बेबुनयाद थेटर "केरल स्टोरी" पर लंगूर लँगूरनियाँ बोहोत उधम मचा रहे थे तभी इसी ब्लॉग पर लिखा था। कोविद-१९ में बोहोत उधम मचाया था इन लंगूर लँगूरनियों ने मौलाना साद को आतंकवादी बोल दिया था। रोहित सरदाना, रिपब्लिक टीवी का एडिटर इन चीफ अलोक शर्मा और बोहोत से लंगूर मारे गए थे।  बचे कूचे इस बार में मारे जायेगें।

वोह बात शायद दुरुस्त साबित हुई अभी ११ रोज़ भी नहीं गुज़रे की नतीजे मिलने लगे।  नियोडा के लंगूर-लँगूरनियों के ऊपर मौत के काले बादल मडराने लगे और दूसरी क़िस्त का हो चूका है आग़ाज़।

दिल्ली से नज़दीक यूपी के नोएडा में दो लंगूरों की मौत हो गई है. ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर के खूंखार लंगूरों की टोली में काम करने वाले दोनों लंगूर चिड़ियाघर में ख़ून ख़राबा (ख़बरनामा देने) के बाद  बाइक से घर जाने के लिए निकले थे.   मूर्तफ़ा रोड पर उनकी बाइक को पिकअप बस ने टक्कर मार दी. इस हादसे में दोनों लंगूर शदीद ज़ख़्मी हो गए. उन्हें इलाज के लिए ज़ाती शिफ़ा ख़ाने में भर्ती कराया गया था. मगर, यहां दौरान ए इलाज दोनों की हलाकत हो गई. नोएडा की सेक्टर 24 थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

गौरव और मनोज नाम के दोनों लंगूर चिड़ियाघर (मीडिया इंस्टिट्यूट) में काम करते थे. बरोज़ इतवार सुबह दोनों बाइक पर सवार होकर गाजियाबाद वाक़े अपने घर को जाने के लिए निकले थे. सुबह करीब ७ बजे मूर्तफ़ा रोड पर जाते वक्त उनकी बाइक को पिकअप बस ने टक्कर मार दी. इस हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए.

वहीँ नोएडा में ही बैडमिंटन खेल रहे खिलाड़ी महेंद्र (५२ साल) जो अपने साथियों के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे. तभी अचानक उनके सीने में शदीद दर्द महसूस हुआ और वो गिर गए. इससे साथी खिलाड़ियों में हड़कंप मच गया.  उसको हार्ट अटैक आया और वोह बेहोश होकर गिर गया. इससे स्टेडियम में अफरा-तफरी मच गई. इत्तेला मिलने पर आनन-फानन में पहुंचे डॉक्टर्स ने खिलाड़ी को सीपीआर भी दिया, फिर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. 

भारत के ऊपर क़ब्ल अज़ अमवातों का जैसे सैलाब आ गया है।  हर रोज़ की होने वाली क़ब्ल अज़ मौतों से मोदी इन्तेज़ामियाँ शदीद ग़म और फ़िक्र मंद है, लेकिन अपनी फिक्रमंदी बताये तो किस को बताये।  जब मोदी मोदी मोदी के नारे यही लंगूर लँगूरनियाँ लगाते थे।   चिड़ियाघर के लंगूर लँगूरनियाँ, संघी दहशत, बीजपी वाले, शिद्दत पसंद काफ़िर मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ ज़हर फ़ैलाते थे, हर मुद्दे पर लंगूरों को अब्दुल मिल ही जाता था।  बीजेपी हर मुद्दे पर हिन्दू मुस्लिम करते थे तब  तो मोदी इन्तेज़ामियाँ और बीजेपी वालों ने कभी मना नहीं किया और ना ही अपनी हुकूमत की ग़लती और गफलत को माना की ज़हर की मिक़्दार बोहोत बढ़ गई है, फ़िज़ा बोहोत ज़हरीली हो गई है।  अब किस मुँह से मीडिया के सामने जा कर रोना रोयेगें यह बीजेपी वाले। 

दरअसल सही कर रहें हैं दिफ़ाई फ़ौजी।  जहाँ कोई काफ़िर ज़्यादा फड़फड़ाये की दे रहें हैं मौत।  दूसरी बात यह पेशनगोई २०२० में कोविद के दरमियान हमने हमारे मज़मून में लिख दी थी।  भारत के काफ़िर चलते चलते खेलते खेलते टपा टप गिरेगें और मरेगें।  एक मज़मून में आख़िर में नारा दिया है।  टपा टप टपा टप टपा टप।  उसके बाद आये थे इन्तेख़ाब तो ओवेसी जी ने अपने अवामी इजलास में बोला था ठप्पे लगाते जाओ ठपा ठप ठपा ठप।  वोह भी सही थे लेकिन हमारे मज़मून में हमने मौत के लिए कहीं थी बात।  अब देखो वैसा ही हो रहा है चलते चलते गिर कर मर रहें हैं  

जब तब्लीगी जमात पर झूठा इलज़ाम लगाया था तब दिल दुखा और मज़मून में लिखा था।  अब बताओ ९ साल १२ ले कर तो २४, २९ और ५२ साल कोई हार्ट अटैक की उम्र होती है।  हाँ याद आया उस मज़मून के बाद आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टम में गैस लीक हुई थी और लोग चलते चलते गिर कर मर रहे थे।  कुछ २०० से २५० लोग मारे गए थे।  लेकिन उस टपा टप की हिकमत तो बोहोत आगे तक जाएगी।  मरते रहेगें

सहाफ़ी ज़ुबेर

Wednesday, 7 June 2023

दो ही महीने में मुस्लिम से हिन्दू बनी ख़ातून ने लगाई फांसी।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

"भगवा लव ट्रैप"  के जाल में फंस कर एक और मुस्लिम से हिन्दू बनी ख़ातून ने खुदकशी कर ली है।   मुरादाबाद की रहने वाली २२ साला सना की शादी रेहान से हो गयी थी।  इसी बीच सना "भगवा लव ट्रेप" का शिकार हो गई और ससुराल के पास साजिश के साथ कर रहने वाले अजय के साथ ट्रेप में गई।  उसने अपने शोहर रेहान से तलाक़ ले लिया और मज़हब तब्दील कर मुर्तद हो कर अजय के साथ फेरे ले लिए।  और वोह सना से सोनाम और मुसलमान से काफ़िर हो गई। लेकिन शादी के दो महीने के अंदर ही उस मुर्तद को दिन में चाँद तारे नज़र आने लगे।  जब उसके साथ बा एक वक़्त १०-१० और १२-१२ काफ़िर ज़िना करते उसकी आँखों पर से जादू का पर्दा हटा तो उसने महज़ दो महीने के अंदर ही खुदकशी कर ली। 

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के मुग़लपुरा का गोकुलदास मोहल्ला आज कल साजिश की नई इबारत लिख रहा है।  यह रहने वाली शन्नो बेगम को पुलिस ने फोन पर बताया की उसकी बेटी सना उर्फ़ सोनाम ने फांसी लगा कर अपनी तल्ख़ ज़िन्दगी को ख़तम कर लिया है।  शन्नो बेगम के मानो जिस्म से जान ही निकल गयी।  वोह फुट फुट कर रोने लगी।  

वहीँ मुसलमान से हिन्दू हुई सोनम की मुस्लिम माँ शन्नो बेगम ने कहा की उनकी बेटी खुदकशी नहीं कर सकती उसका बेरहमी से क़तल किया गया है।  मुसलमान से हिन्दू हुई सोनम के मुस्लिम भाई उस्मान ने भी यही इलज़ाम लगाया है।  दोनों माँ बेटे ने कहा की उसके हिन्दू शोहर ने सोनाम को क़तल किया है। 

वहीँ ढिटाई दिखाते हुए अजय दिवाकर बोला इलज़ाम बेबुनयाद फ़र्ज़ी और झूठे हैं।  अजय दिवाकर मुस्लिम से हिन्दू हुई सोनाम का हिन्दू शोहर ५६ इंची सीना दिखाते हुए पुलिस की मौजूदगी में बेख़ौफ़ और पुर इत्मीनान नज़र रहा था मानो उसने कोई जंग फतह कर ली हो और उसके हाव भाव से साफ़ ज़ाहिर हो रहा था की उसको इन्तेज़ामियाँ पुलिस और हुकूमत का पूरा ताऊन हासिल है और रहेगा। 

अजय दिवाकर जो एक बजरंग दल का दहशतगर्द है और उसको यह हदफ़ दिया गया है की वोह मुस्लिम बच्चिओं और नई शादी हुई लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर हिन्दू करे वोह शादी कर के घर से फरार हो गया था।  सोनम के साथ अजय की बुआ जो दुर्गा वाहिनी की कारकून है हर रोज़ नए नए काफिरों से ज़िना कारी करवाती थी।  जब फांसी की खबर अजय के पास पहुंची तो वोह वापिस आया। 

पुलिस का किरदार भी इस मसले में काफी मनफ़ी है।  वोह शक और शुकूक की हालात में है की अजय की बात पर यक़ीन करे की वोह बेगुनाह है या सोनम के मुस्लिम अहले ख़ाना की बात पर यक़ीन करे। 

अब ज़रा सिक्के का दूसरा रूख़ देखिये अगर कोई हिन्दू लड़की बालिग़ किसी मुस्लिम से शादी करती है और उसके वाल्दैन झूटी शिकायत करते हैं की हमारी लड़की को बेहला फुसला कर लव जिहाद में फांसा लिया गया है तो पुलिस उस मुस्लिम की ग्रहस्ती तबाह कर देती है।  भले ही लड़की ज़िंदा है और खुद बोले की में अपनी मर्ज़ी से अपने शोहर के साथ रहना चाहती हूँ लेकिन पुलिस कोई भी दहशतगर्दी का झूठा इलज़ाम लगा कर शोहर और उसके वाल्दैन को गिरफ्तार कर मुस्लिम होने के सज़ा लड़की को देती है ताके वोह इस्लाम से घर वापिसी कर ले।   

और अगर क़िस्सा ऐसा होता की हिन्दू शोहर को छोड़ कर मुस्लिम लड़के से हिन्दू लड़की ने शादी की होती तो अभी तक हिन्दुत्वादी उधम मचा देते।  भले ही लड़की ज़िंदा होती लेकिन उस मुस्लिम लड़के के पूरे ख़ानदान को तबाह कर दिया जाता।  सास बुआ ससुर देवर नन्द सभी को जेल में डाल दिया जाता। 

लेकिन इस मामले में लड़का हिन्दू है और बजरंगदल का दहशतगर्द बुआ दुर्गा वाहिनी की सरगना है जो मुस्लिम बच्चिओं के पीछे लगी रहती है और उनको बलगला कर हिन्दू नौजवानों से शादी करवाती है तो उनको पुलिस भी गिरफ्तार नहीं कर रही है।  पुलिस पशो पेश में है की कौन सच्चा है कौन झूठा।  कियोंके साधू का दबाव है की कारवाही मामूली करना।  लड़की मुस्लिम से हिन्दू हुई है और मर गई है लेकिन लड़का ज़िंदा है और हमारा आदमी है। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...