तिब्बी
उलूम के महरीन और जर्राह ये बताते हैं की जो नक़्श बच्चों के ज़हन में बचपन में पेवस्त
कर दिया जाता है वो उसको जवानी में फायदे या नुकसान का बाइस बनता है. अब अगर अच्छी बात अच्छे इल्म अच्छी सोच उनको बचपन
में सिखाये जायेगें तो उसका फायदा तरक़्क़ी याफ्ता कामों में मिलेगा और अगर ये ही दहशतगर्दाना
सोच, शिद्दत पसंदी, खून खराबे की बातें उनके दिलों दिमाग में ज़ेहन में पेवस्त कर दी
गई तो जवानी में उसके असरात अवाम पे तबाह कुन नुमाया होंगे और हुकूमत के लिए मुज़िर
साबित होंगे. ख्वाव वो दहशतगर्दाना सोच, शिद्दत
पसंदी, खून खराबे की बातें इनको तरबियाती केम्पों में पेवस्त की जायें या दौरान परवरिश
उनके घरेलू माहौल से ये बच्चे मुत्तासिर हों या अपनी माँ के शिकम में इनके ज़हन में
वो सारी बाते नक़्श हो जायें जिसकी मश्क़ इनके वाल्देन (माँ-बाप) दौरान ९ माह करते थे.
आज
जिस तरह के हालात भारत में चल पड़े हैं जिसकी वजह से भारत कुफ्रिस्तान, लचिस्तान, आतंकिस्तान,
रेपिस्तान बन चूका है उसकी संगे बुनयाद तो हालांकि १९२५ में ही रख दी गई थी लेकिन उसको
मुकम्मल करने के लिए तवील एक सदी का वक़्फ़ा गुज़र गया और अब जिसके असरात और नतीजे मिलना शुरू हो गए हैं.
भारत
अब पूरी तरह से दहशतगर्दों का अड्डा बन चूका है और हर उस इंसान को पूरा इख़्तेयार हासिल
है जो हिन्दू है के वो किसी भी मुस्लिम, दलित, क्रिस्टी और सिख अवाम का क़त्ले आम कर
सकता है, मार पीट कर सकता है उसको सख्त तरीन अज़ीयत पंहुचा सकता है. आज भारत के एवानों में रकून पार्लिअमानी, रकूने
असेंबली और रकूने बल्दिया जिस तरह से बरहना (नंगा) नाच करते हैं और हिन्दू शिद्दत का
मुज़ाहेरा करते हैं उससे इनको १९२५ से दी जाने वाली तालीम का खूब तजज़िया और तशख़ीस हो
रही है. आज भारत के एवानों में वो तमाम वाक़ियात
मुस्लिम रकूने पार्लिअमानों पे, रकूने असेम्ली पे रकूने बल्दिया पे होने वाले हर हमले
पे या मुस्लिम, क्रिस्टी या दलित अवाम पे होने वाले हर ज़ुल्म और हलाक़त पे ये हिन्दू
शिद्दत पसंदों, दहशतगर्दों के दौराने परवरिश इनके घरेलू माहौल और अपनी वल्दा के शिकम
में उन ९ महीने में दी जाने वाली हिन्दू शिद्दत,
दहशतगर्द, क़त्ल व ग़ारत की तालीम और मश्क़ की गवाही देतें हैं.
ये
बात किसी से भी अब तो पोशीदा ना रही की हिन्दू शिद्दत का ज़हर अब एवानों तक पहुंच चूका
है जिसका गवाह है, मुस्लिम रकून पार्लियामेंट को दौरान हलफबरदारी हिन्दू शिद्दत पसंद
रकूनों के इश्तेआल, ज़बरदस्त एहतेजाज और ना सिर्फ एक बल्कि तक़रीबन तमाम मुस्लिम रकूनों
पर हमलावर होना. उत्तर प्रदेश में बीजेपी के
रकूने असेंबली ने मुस्लिम रकून को ज़बरदस्ती ना ज़ेबा दहशतगर्दाना नारा लगाने का दबाव
बनाना और उस हिन्दू शिद्दत पसंद का उनपे हमलावार होना. औरंगाबाद कारपोरेशन में अटल बिहारी की मौत पे ऍम
आई ऍम के मुस्लिम कॉर्पोरेटर पे हमलावर होना और उनके साथ ज़बरदस्त मार पीट करना.
हिन्दू
शिद्दत, दहशतगर्दी और क़त्ल करने की तालीम ना सिर्फ इनको इनके तरबियती इदारों में बचपन
से ही दी जाती है बल्कि इनके माँ के शिकम में आने के बाद से ही वाल्दैन की मंसूबा बंदी
शुरू हो जाती है और इस तरह की बातें, फिल्मे और दहशतगर्दों की तरबियती किताबें माँ
की जानिब से पढ़ी जाती हैं ताके उसके असरात बच्चे में दहशतगर्द और शिद्दत पसंदी ज़ेहन
की तरक़्क़ी करने में मुफीद साबित हो सके.
अभी हाल ही में स्विट्जरलैंड के एक होटल ने भारतीय मेहमानों को कायदे से रहने के लिए नोटिस जारी की है. अगर इस तरह की कारगरदेगी पे भारतीय अवाम ख़ास हिन्दू अपनी शिद्दत और दहशतगर्दाना रवैये को ख़त्म नहीं करतें हैं बरक़्स ऐसी कारगरदेगी पे एहतेजाज करतें हैं तो अन क़रीब इनको सख्त हिदायत दी जा सकती है फिर भी अगर नहीं सुधरे तो सभी भारतीयों को किसी भी होटल में रूम नहीं दिया जाएगा और बेरुन मुल्क़ इनका समाजी बायकॉट किया जाएगा.
आज
जिस तरह से हिन्दू अवाम को बेरुन मुल्क़ हर खित्ते, में रूसवाई और ज़िल्लत का सामना करना
पड़ रहा है शायद वो किसी भी दौरे हुकूमत में नहीं हुआ होगा. कुछ तो गलती इनके अंदर पेवस्त किये हुए आलूद की
वजह से है और कुछ इनको मिले इनके घरेलू माहौल से है जिसकी वजह से अब तो होटल, एयरपोर्ट
और दीगर अवामी सतह पे बेरुन मुल्क़ हुकूमत रूबरू आ के टोकने लगे हैं. "भारतीय अपनी हैसियत से रहें".
बेरुन मुल्क़ भारतीयों के लिए अलग से क़ाइदे क़ानून बनने लगे हैं. हिन्दू शिद्दत पसंदी और दहशतगर्दी की वजह से सभी
भारतीय हिन्दू होने की वजह से ज़िल्लत का सामना कर रहें हैं. अभी तीन दिन पहले इंडोनेशिया के बाली में एक हिंदुस्तानी
हिन्दू कुनबे को तहक़ीक़ाति स्टाफ ने होटल से लाखों का सामान चुराने के इलज़ाम में रोड
पे ज़लील किया. फिर वो तमाम सामान उस हिन्दू
कुनबे के बैग से निकला. पहले वो कुनबा जांच
ऑफिसर्स से ऊँची आवाज़ में बात कर रहा था फिर जब कैमरे के सामने बैग से समान बरामद हुआ
तो हिन्दू कुनबे को ज़िल्लत का एहसास हुआ और फिर पैर पकड़ने लगे हाथ जोड़ने लगे.
अभी
१५ दिन पहले दिल्ली के एक पांच सितारा होटल से दो इंडियन एयरलाइन्स के पाइलेट्स को
होटल का सामान चोरी के इलज़ाम में गिरफ्तार किया गया था. उसके ५ रोज़ बाद भारीतय फौज
(मोदी सैनिक) के कुछ सी.आर.पी. एफ. के जवानों को होटल का सामन चोरी के
इलज़ाम में गिरफ्तार किया गया था.
जिस
तरह का ज़ुल्म और शिद्दत भारत में बढ़ते जा रहें हैं जिसकी ज़द में हर इंसान आ चूका है
और उसके दिलो दिमाग में ज़हर और आलूद भरा जा चूका है चाहे वो हूकूमति इदारो में काम
करने वाला सरकारी मुलाज़िम हों या आम शहरी हर हिन्दू मुत्तास्सिब हो चूका है. हुकूमत इस कारगरदेगी को हो सकता है अपनी जीत तसव्वुर
कर रही होगी लेकिन ऐसी सूरते हाल मुल्क़ की सालमियत के लिए खतरा है और इसके तवील नताइज
खतरनाक और तबाह कुन साबित होंगे. जिस हिसाब
से हिन्दू नुजूमियों ने पेशनगोई की है की २०५० तक इस्लाम के मानने वाले मुल्क़ में सबसे
ज़्यादा होंगे और मुस्लिम अक्सरियत होगी तो किसी हद तक ये सहाफी उन नजूमिओं से इत्तेफ़ाक़
रखता है. इसलिए नहीं के ये सहाफी उनकी नजूमीयत
का क़ाइल है और उनकी बात की तस्दीक़ करता है बल्कि वो अल्लाह के फरमान का क़ाइल है और
अल्लाह के फरमान की तस्दीक़ करता है. क़ुरआन
का खुला हुकुम है ज़ालिमों और ना इंसाफ को अल्लाह पसंद नहीं करता. ज़ालिमों के ऊपर अल्लाह और उसके फरिश्तों की लानत
है. अगर कोई क़ौम ज़ालिम होगी तो उसके असरात
उस क़ौम पे होंगे और अगर हाकिम ज़ालिम और ना इन्साफ होगा तो उसके असरात मुल्क़ के ऊपर पड़ेगे. भारत के मामले में हिन्दू क़ौम और हाकिम दोनों ही
ज़ालिम और ना इन्साफ हैं तो हिन्दू मज़हब और भारत पे इसके असरात मुज़िर साबित होंगे.
आज
तमाम बेरुन मुल्क से हिन्दू मज़हब अपने खात्मे की जानिब तेज़ी से गामज़न है, जबकि इस्लाम
के खिलाफ बावजूद ज़बरदस्त बदगुमानी के इस्लाम आज की तारिख में क्रिस्चियन मज़हब के बाद
दूसरा सबसे बड़ा और पसंदीदा मज़हब है. किसी ज़माने
में मिस्र, सऊदी, इराक़, ईरान, अफनिस्तान, पाकिस्तान, कश्मीर, बंगलादेश और कमो बेश निस्फ़
दुनिया कुफ्र से भरी पड़ी थी लेकिन आज क्या हालात हैं. इनका खात्मा सिर्फ और सिर्फ ज़ुल्म की वजह से हुआ.
और भारत में भी इनका ख़तम कसरत से किये हुए ज़ुल्म के सबब होगा.
फिल
वक़्त इन हिन्दू शिद्दत पसंदों को अपनी जीत नज़र आ रही होगी, ये लोग मुस्लिम नस्ल को
ख़त्म करने का अज़्म करतें हैं और हमारी नस्लों
को बर्बाद कर देंगे ऐसा सोचते हैं.
मुस्लिम नस्लें अपने वजूद को और अपने बाप दादा को कोसेगीं. ऐसी ही सोच सऊदी में अबू जेहल और अबू लहब जैसे काफिरों
और दीगर इस्लाम दुश्मनों की थी आज उनका कोई वली वारिस ना रहा और जिस मुस्लिम नस्ल को
बर्बाद करने का अज़्म भर के उनके आबो अजदाद को अज़ीयत पहुचाते थे उनकी नस्ल और वारिसों
को अल्लाह ने इतना नवाज़ा की दुनियाँ आज उनके सामने भिकारी नज़र आती है. जिस इंसान को अल्लाह उस्त, क़ुव्वत और ताक़त फ़राहम
करता है उसको किसी के पास जाने की ज़रुरत नहीं दुनियाँ वाले खुद उसके पास आते हैं. दलील मौजूद है सऊदी किंग किसी भी मुल्क़ का दौरा
नहीं करते सभी मुल्क के हाकिम अमेरिका को मिला के उनके दर पे जातें हैं. और अगर करतें भी हैं तो बोहोत कम ना के बराबर.
