Monday, 31 May 2021

साधू का एक और एरिया कमांडेंट ढेर।

३१ मई २०२१ शाम ८:१५ मिनिट 

ब्रेकिंग न्यूज़ ताज़ा खबर अलीगढ़ हूश सानेहा में मरने वालों की तादात ८३ पहुंची। २ ताजिरों को गिरफ्तार किया गया. 

नाज़रीन

मेरे मज़मून २ का बदला………….” की पेश है अगली क़िस्त। आपके साथ हो रही नाइंसाफी का बदला बराबर लिया जाएगाइसमें हिन्दू मुस्लिमजैनसिखबोधकिच्चंनकिसी भी समाज क़ौम या मज़हब का मानने वाला होगा और नाइंसाफी हुई होगी तो हम उस वीडियो या ऑडियो को देख कर बराबर हिकमते अमली करेगें।   वैसे यह बात हमारी ख़ान-काह (ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट) मेम्बरान में ते हो चुकी हैकी एक एक संघी दहशतगर्दएक एक शिद्दत पसंद काफिर, एक एक बीजेपी वाले को लुढ़का कर इस मट्टी को शिर्ककुफ्रग़द्दारी से पाक करना है।  २४ मई को २०२१ को मज़ीद एक क़रारदार पर एहद लिया (Pass the resolution) जितना साधू मुसलमानों को मारेगा परेशान करेगा उससे २ गुना ज़्यादा साधू के अपने मारेगें।  साधू को एक चुनौती भी दे डाली साधू तेरे कितने मुहाफ़िज़ मारे जातें हैं उसका हिसाब किताब रख। 

नाज़रीन ३५ को लुढ़काने के बाद अब अगला नंबर भारतीय जनखा पार्टी के एरिया कमेंडेण्ट्स का था। और हिट लिस्ट में पहला नंबर लगा शुमाली सूबे के कासगंज से रकूने असेंबली देवेंद्र प्रताप सिंह का, जिसका सीना चीर दिल फाड़ के दीफ़ाई फौजों ने हलाक कर दिया।   मतलब हार्ट अटैक से ढेर हुआ।

हुआ यह की किसी ने हो सकता है एरिया कमेंडेन्ट को धमकाने के लिए बोल दिया होगा ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट का फ़िज़ाई दस्ता (उड़न दस्ता) आ गयाऔर अमांपुर सीट से रकूने असेंबली देवेंद्र प्रताप सिंह की यकायक तबियत ख़राब हुई।   उसे एटा के शिफ़ा ख़ाने में भर्ती किया गयाफिर एक बार ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम किसी के पीछे पड़ जाती है तो वोह पाताल में जा कर गुफा में जा कर पोशीदा हो जाये लेकिन उसको ढेर कर के ही छोड़ती है।  इसके साथ भी ऐसा ही हुआदेवेंद्र को शिफ़ा ख़ाने में भर्ती तो किया गया लेकिन दीफ़ाई फौजों ने उसको ढेर कर दियामतलब दौरान इलाज वोह मारा गया।  तबीबों और जर्राहों का कहना है की उसकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई। 

सूबे का सर्वे सर्वा रंडवा आदित्यनाथ ने देवेंद्र प्रताप सिंह की मौत पर ताज़ियात पेश की है।  बस रंडवे तू तो देखता जा,  तू पूड़े जा।  रड़वा आदित्यनाथ ने कहा की 'अमांपुरा रकूने अस्सेब्ली सीट से श्री देवेंद्र प्रताप सिंह जी के निधन पर अत्यंत दुःख हैप्रभु श्री राम से प्राथना है की दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व शोकाकुल को यह दारुण दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे'

रंडवे २४ मई को हम तेरे को चूनौती दे चुकें हैं की हिसाब किताब रख तेरे कितने मारे जातें हैं।  ताज़ियाती अलफ़ाज़ संभाल कर रख अभी आगे बोहोत काम आने वाले हैं।  तेरे पास अलफ़ाज़ की कमी हो जाएगीएक के बाद दूसरा दुसरे के बाद तीसरा।  लाशें ही लाशें बस लाशें।  जंग शुरू हो चुकी है। 

अरे शार्प शूटरों उस हरामखोर गुज्जु आतंकी प्रफुल पटेल का क्या हुआ।  हमें जल्दी है और हाँ अगर तुम से काम नहीं होता तो बोल दो हम किसी और को दे देंगे।   तैयार रह पटेल।   हम तेरे पीछे पीछे लक्षदीप पहुंच गए हैं,  तेरे को मौत की आहट हर दम दूनाई देगी।  

दूसरी एक चीज़ और देखने को मिल रही है की अब मरा हुआ अवाम जाग रहा है जिस अवाम को ज़ाफ़रानीखाकी दहशत ने इतना ख़ौफ़ ज़दा कर दिया था की वोह हर ज़ुल्म को अपनी तक़दीर समझ कर अपना लेते थे।  लेकिन अब ऐसा नहीं होगाहम तो २०१४ से आप लोगों को जगाने की कोशिश में लगे हुए थे।  इतनी बर्बादी तबाही और अपनों को खोने के बाद अब आप लोग जागे।   ख़ैर जब जागे तभी सवेरा।  

हुआ यह की लखनऊ शुमाली सूबे की दारुल ख़लीफ़ा में चिनहट थाना से कुछ ख़ाकी दहशतगर्द सूँघते हुए एक ताजिर दुकानदार रामेश्वर लोधी की दूकान बंद करवाने पहुंचे थे।  और उसको लॉक डाऊन में दूकान चालू रखने पर तू तड़ाक करने लगे उसके साथ मार पीट वग़ैरा।   लेकिन हमने कल ही अवाम को आगाह कर दिया था की अगर कोई भी खाकी दहशतगर्द ना जाइज़ बात करे ग़ैर क़ानूनी बात करे दूकान वगेरा बंद करने का दबाव डाले किसी भी मज़हब की इबादत गाह पर हमला करे तो उनके ऊपर हुजूम के साथ हमलावर हो जाओ।   हूकूमती नुमाइंदा अगर नाइंसाफी कर रहा है तो उसको हलाक कर दो।बजाये तुम उनके हाथों मारे जाओ।   और हुआ यही पुलिस के ऊपर दुकानदार ने हमला बोल दिया और दो खाकी दहशतगर्दों को घायल कर दिया।   

अगर अवाम एक साथ एक जुट हो जाता है तो अच्छे अच्छे तानाशाह हिटलर और ज़ालिम की भी पूंगी बज जाती है।  याद रखो अगर आपके पड़ोस में कोई भी समाज का बन्दा है मुस्लिमहिन्दूसिखदलितकिच्चन और उसके साथ हूकूमती नाइंसाफी हो रही है तो आप सब मिल कर उन खाकी आतंकिओं या हूकूमती नुमाइंदों के ऊपर हमलावर हो जाओ।   फिर देखो यह लोग अपना ग़ैर क़ानूनी हुकुम और सियासत की मलाई ख़ाने के लिए एक दुसरे को लड़ाना ही भूल जायेगें। अभी तक हम मार रहे थे अब आपकी बारी है।  उतार दो मौत के घाट।  जहाँ कुछ एक हूकूमती ग़ैर इन्साफ मारे गए की दुसरे इन्साफ पसंद जो डरे हुए हैं अपने आप बेख़ौफ़ हो कर आगे आयेगें और हुकूमत को उसकी औक़ात बता कर बोलना शुरू करेंगे की आप ग़लत कर रहे हो हम नाइंसाफ़ी बर्दाश्त नहीं करेंगे। 

 

चाहे कुछ भी हो जाए।

Saturday, 29 May 2021

२ का बदला २० या २०० से लेंगें।

 

नाज़रीन जो कहा कर के दिखाया, इजराइल पुत्रों या हराम पुत्रों ने मुस्लिम अवाम को शुमाली सूबे में हूजूमी दहशत के साथ शहीद किया था।   २४ मई २०२१ का मज़मून क़िसास मुक्कम्मल, दीफ़ाई…………लिखे जाने तक इस सहाफी के पास २ मुस्लिम नौजवानों की शहादत की इत्तेला थी।  उस मज़मून में साधू और मंदिर पुत्र को साफ़ तौर पर चेतवानी दी गई थी की २ बदला २० से या २०० से लेंगें।   चल योगी तेरे कितने मारे जाते हैं और मुस्लिम कितने।   फिर शुरू हुई जंग।   २४ मई से ले कर अभी तक शुमाली सूबे में कुछ ३० से ४० अफ़राद मारे जा चुके हैं।   इसमें कोविद फ़ौजिओं की जानिब से मारे गए अफ़राद शामिल नहीं हैं।  नहीं तो अदद शुमारी हज़ारों में पहुंचेगी।   ख़ैर  अब आज की ताज़ा अमवातों के बारे में बात कर लेते हैं। 

लखनऊ शुमाली सूबे के हरदोई की संडीला सीट पर क़ाबिज़ सत्ता धारी भारतीय जनखा पार्टी (बीजेपी) के रकूने असेंबली राजकुमार अग्रवाल का लौंडा आशीष अग्रवाल की मौत पर विधायक महोदय ने हिन्दू शिफ़ा ख़ाने के ऊपर इलज़ाम तराशी का आगाज़ कर दिया है।   रकूने असेंबली ने अपने लौंडे की मौत पर अर्थव शिफ़ा ख़ाने पर इलज़ाम लगाया था, की ऑक्सीजन की कमी और इलाज में ग़फ़लत की वजह से उसका लौंडा मारा गया। 

शुमाली सूबे की दारुल ख़लीफ़ा लखनऊ के काकोरी हल्क़े में वाक़े अर्थव शिफ़ा ख़ाने के मालिक जर्राह संदीप गुप्ता ने बीजेपी के रकूने असेंबली की जानिब से की गयी इलज़ाम तराशी को बेबुनयाद बताया है।  उसका कहना है की रकूने अस्सेब्ली के लौंडे के इलाज में कोई गफलत नहीं की गई और ना ही किसी क़िस्म की ऑक्सीजन की कमी थी। 

दूसरा मामला शुमाली सूबे के सीतापुर से है जहाँ एक शादी खाना आबादी में मौत का मातम पसर गया।   हुआ यह की सीतापुर के कमलपुर थाना इलाक़े में हनुमानपुर गांव में राजेंद्र पाल की दुख्तर की शादी खाना आबादी का जश्न चल रहा था।  विसावा गांव से बरात आई हुई थी, तभी द्वारचार की रस्म से क़ब्ल तेज़ तूफ़ान आया और हाई टेंशन के ११००० वाट का तार शामयाने पर आ गिरा और करंट तमाम पंडाल में फ़ैल गया।   बिजली के करंट की ज़द में आ कर कुल १० अफ़राद शदीद झुलस गए जिसमे से ७ की जान दौरान इलाज चली गई।

तीसरा हिस्सा अलीगढ़ से ताल्लुक़ रखता है जहाँ ज़हरीले शराब पीने से कुल २२ अफ़राद मारे जा चुके हैं और कम से कम १०० से ज़्यादा बीमार हो चुके हैं।  मरने वालों की तादात मज़ीद बढ़ने के इमकान हैं।   

नाज़रीन इस जंग का आप भी हिस्सा बन सकतें हैं।  यह जंग हिन्दू मुस्लिम नहीं है और ना ही किसी ज़ात मज़हब के खिलाफ है बल्कि यह जंग इन्साफ और नाइंसाफी के खिलाफ है।  ज़ालिम और मज़लूम के दरमियान है.  शुमाली सूबे में साधू की क़साई और ज़ालिमाना फितरत से ख़ाकी दहशत खूब मुत्तासिर हो रहें हैं।  किसी भी मज़लूम पर तशद्दुत करना डंडे लाठी और दिगर हथियारों से बज़र्ब पीट पीट कर हलाक कर देना यह तो आम फितरत हो गई है।  रात की तारीकी में गिरोह गर्दाना ज़िना बिल जब्र की बच्ची को बग़ैर उसके एहले ख़ाना की इजाज़त के आतिशे नार कर देना।  

जो सहाफी इस मुद्दे पर मज़ीद तहक़ीक़ात करने पहुंचे उनमे से सिर्फ मुस्लिम सहाफी सिद्दीक़ी कप्पन को जेल में डाल देना क्योंकि साधू और मंदिर पुत्र को बरहना नहीं होना था.  और वोह जिस तरह से ज़ाफ़रानी नक़ाब के पीछे पोशीदा क़साई, जल्लाद, ओरतों की दलाली करने वाला बेरूपिया है उसका शैतानी चेहरा अवाम के सामने नही आने देना था.  इस तरह की तमाम नाइंसाफी और हक़तल्फ़ी से इस जंग का हिस्सा बनने के लिए आपको क्या करना है।  बस इन्साफ का साथ दीजिये अगर ख़ाकी दहशत बग़ैर किसी क़ानूनी और जाइज़ वजह के किसी भी अफ़राद पर हमला करतें हैं या किसी भी इबादत गाह को तोड़ते हैं किसी की निजी जायदात को तोड़ते हैं या दहशत मचाते हैं तो आप लोग हुजूम में निकल कर इन दहशतगर्दों पर हमलावर हो जाइये।  फिर देखिये एक दो जगह अगर यह ख़ाकी दहशत नाकाम हो गई तो इनकी हिम्मत पस्त हो जाएगी।       

इन ख़ाकी दहशत या हूकूमती ग़ुलामों पर हमला करते वक़्त आपको हिन्दू मुस्लिम के ज़ाविये से नहीं देखना है बल्कि इन्साफ और ना इंसाफ़ी के ज़ाविये से देखना है।  और आपको मज़लूम का साथ देना है और ज़ालिम पर हमला करना है।  अगर आप ऐसा करते हैं तो हो गए मेरे साथी और मेरी जंग का हिस्सा। 

Zuber

Friday, 28 May 2021

ग़द्दारों की करो समाजी और सियासी अलहदगी।

 अज़ीज़ नाज़रीन,

बीजेपी एक ऐसी तंज़ीम है, जो सदा अपने ही वालों के ख़िलाफ़ ग़द्दारी करती है।   जो उसका मुहाफ़िज़ होता है जो उसको हमदर्द होता है उसी के गले लग कर पीठ में खंजर घोंप देती है।  भलें ही वोह शिव सेना हो, अकाली दल हो या तेलगू देशम हो या कोई और शख्स जो उससे हमदर्दी का इज़हार करे उसके ही पीठ में अपना मुवाफ़िक़ और अच्छा वक़्त देख कर पीठ में खंजर उतार देना उसकी पुरानी आदत है।   "ग़द्दार"  इस ग़द्दारी में बीजेपी की माता जी भी आ गई, जी हाँ भारत माता की पीठ में भी कई दफा खंजर खोपा गया है। 

नाज़रीन यह सही वक़्त है जब ऐसी ग़द्दार और एतेबार का क़तल करने वाली तंज़ीम का सियासी और समाजी बॉयकॉट किया जाए।  उस तंज़ीम को अलहदा कर दिया जाए ना तो उसकी कोई बात सूने और ना ही उसके किसी भी नुमाइंदे से कोई गुफ्तगू की जाए। 

यह सहाफी किसी भी मुजरिम जिस ने कोई गुनाह किया है, उसके समाजी अलहदगी का हामी रहा है।  इस ज़िम्न में बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू, और संघी दहशत हर क़िस्म के जुर्म, भारत और तमाम आलम में दहशत के लिए मशहूर हो चुके हैं।  अब इन जैसे अनासिरों की समाजी और सियासी अलहदगी ज़रूरी है।   गोया की वोह माशारती और सियासी अछूत हैं।

इस सहाफी ने आलमी बरदारी से इसी क़िस्म की समाजी और सियासी अलहदगी की गुज़ारिश इजराइल के लिए भी की है।  और अब यही अमल संघी और बीजेपी तंज़ीम के लिए भारत में भी तवक़्क़ो करता हूँ।

शिद्दत पसंद हिन्दू, संघी दहशत और बीजेपी का समाजी बायकाट उसकी इन्तेहापसन्दी, शातिर मुजरिमाना सोच की वजह से नहीं है बल्कि उसकी भारत के साथ ग़द्दारी की वजह से है।  यह अपने ख़ुद के मुहाफ़िज़, हमदर्द और क़ानून की खिलाफवर्जी करती है और अपने आपको वतन का सबसे बड़ा वफादार होने का दावा करती है।  १९९२ में नरसिम्हा राव जो की संघ का कारकून और बीजेपी का मुहाफ़िज़ था उसने एक क़ानून बनाया, की १९४७ के बाद से जो भी मज़हबी इमारतें हैं वोह जिस हालात में थी वैसी ही रहेगीं और उसके ऊपर किसी क़िस्म का दावा माना नहीं जाएगा।  लेकिन २०२१ में भारत की अदालिया ने दिल्ली और वाराणसी की मस्जिदों की निस्बत से हिकमते अमली का नोटिस जारी कर दिए।    उत्तर प्रदेश में दो १००० साल पुरानी मस्जिदों को मिस्मार कर दिया गया।  क्या इन लोगों ने अपने ख़ुद के सिपाहसालार नरसिम्हा राव के बनाये गए क़ानून की खिलाफवर्जी नहीं की है।  

इस तरह की फ़िरक़ावारना हरकतें इन्तेख़ाब से क़ब्ल होती हैंताके इन्तेख़ाब को मज़हब के नाम पर मुत्तासिर किया जा सके और वोट बैंक सियासत कर के अक्सरियत तबक़े के वोट बीजेपी के हक़ में एक जा किया जा सकें।    यह तमाम दहशत अगले साल उत्तर प्रदेश के इन्तेख़ाब को मुत्तासिर करने के लिए हो रही है।   ताहम ३ मुद्दों से मज़ीद जिसकी वज़ाहत होती है।  की अभी मज़हब की सियासत मज़ीद आगे बढ़ेगी।  

१.          धूनी रमाओ मोहीम:  संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू और तंज़ीम बीजपी ने किसी मंदर की राख जला कर धुँआ करने का आगाज़ किया है।  ऐसा करते वक़्त यह लोग अजीब किस्म बेहूदा कलेमात पढ़तें हुए तमाम इलाक़े में फिरते हैं।  इनका मानना है की मंदिर के इस धुँवे से हम कोविद जंग जीत जायेगें।  जबकी तिब्बी महरिनों, जांच और साइंसदानों से यह साबित होता है की धूवाँ धुल धमासा कोविद मरीज़ों के लिए ज़हर हैं।

२.     मध्य प्रदेश में पाकिस्तानी बेगम और हाफिज सईद की बीवी कोविद के एक इजलास को खिताब करते हुए बोलती है की गाये के पखाने पेशाब से कोविद ठीक हो सकता है।   उसने गाये का पेशाब पी पी कर अपने फेफड़ों को तंदुरस्त रखा है।   जबकि तिब्बी उलूम के महरीन, तहक़ीक़ीन, साइंसदानों ने इस बात की कभी तस्दीक़ नहीं की है की किसी जानवर का पख़ाना, पेशाब खाने पीने से किसी बीमारी से शिफा हासिल होती है।  अगर पाकिस्तानी बेगम का नजरिया दुरुस्त है तो ज़ाफ़रानी हुकूमत को तमाम शिफ़ा ख़ाने, तहक़ीक़ाती इदारे, ईएमएस बंद कर के गोशाला खोल देना चाहिए।  अब मरीज़ों को बजाये शफाखाने के दाखिल करने के गोशाला में भेजना चाहिए।

३.             बिल आख़िर शिद्दत पसंद हिन्दू अपनी हक़ीक़ी मादर गाये पर लौट आये, और वही हूजूमी दहशत का रास्ता इख़्तेयार किया।  उत्तर प्रदेश में गुजिश्ता हफ्ते एक मुस्लिम ताजिर को बज़र्ब मारा पीटा गया उनके ऊपर इलज़ाम था की वोह गाये का गोश्त फरोख्त करने जा रहें हैं।  पुलिस ने भी मज़लूम को हिरासत में ले लिया जबकी दहशतगर्द सरे आम घूम रहे हैं।  उत्तर प्रदेश के हादसे के बाद आसाम का एक दहशतगर बोलता है की हमें गाये का क़त्ल बंद कर उसको मेहफ़ूज़ करना होगा।  उत्तर प्रदेश में ज़ाफ़रानी हुकूमत है आसाम में दूसरी बार ज़ाफ़रानी हुकूमत आ गई फिर आप किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हो।  फिर यह तमाम बातें महज़ इन्तेख़ाब से क़ब्ल ही काहे को हरकत में आतें हैं।  महज़ एक हफ्ते में उत्तर प्रदेश में ३ हूजूमी दहशत से मुस्लिम नौजवानों की मौत वाक़े हुई।   एक खाकी दहशत ने की और २ ज़ाफ़रानी।  २ ७०० से ८०० साल पुरानी मस्जिदें मिस्मार कर दी गई।  महज़ वोट बैंक पॉलिटिक्स को देखते हुए। 

यह तीन क़िस्से इस बात को समझने के लिए काफी हैं की उत्तर प्रदेश में इन्तेख़ाब होने वाले हैं।  आगे के दिनों में मज़ीद फ़िरक़ावाराना माहौल गर्म होगा।  जैसे जैसे इन्तेख़ाब नज़दीक आयेगें जंग में पाकिस्तान, मुस्लिम, इस्लाम, मुग़ल और बोहोत से लायानी मुद्दे अवाम का ज़हन मोड़ने के लिए पैदा होंगे।  ताजनगर की मुतानाज़ा इमारत फिर से पैदा होगी।

ऐसे लायानी और ग़ैर मुनासिब मुद्दों को इन्तेख़ाब से क़ब्ल अवाम के दरमियान पेश कर उनके ज़हन में वस्वसे डाल करबुनयादी मुद्दों से ज़हन हटाना होता है।  क्योंकि गुजिश्ता ५ साल तो कुछ काम किया ही नहीं, ना उत्तर प्रदेश जुर्म से पाक हो सका, ना ही कोई विकास पैदा हुआ, ना मुलाज़मत उसके ऊपर कोविद की जंग में इन्तेज़ामियाँ और हुकूमत की बदनज़्मी, बदइंतज़ामी।  तो किस मुद्दे पर यह बीजेपी पुर जोश पुर एतेमाद तरीके से वोट मांगेगी।  ऐसी सूरते हाल में ज़हन में इन्तेशार पैदा कर के दूसरी जानिब माइल कर दो।  इसीलिए वोह फिर से मज़हब की सियासत पर आ गए।  अब हिन्दू मज़हब और उसनसे जुड़े जज़्बाती मुद्दों पर वोट माँगेगें।  मंदिर मस्जिद के नाम पर गाये के नाम पर।  शमशान और गंगा के नाम पर वोट मांगेंगे। 

बिल फ़र्ज़ उत्तर प्रदेश में फिर से बीजेपी आती है तो साबित हो जाएगा की उत्तर प्रदेश का अवाम बेहद अनपढ़ और ग़ुलाम हैं, एक ऐसी तंज़ीम को फिर से गले लगा कर काम करने के मौक़ा दिया जो ग़द्दार है, एहसान फरामोश और गले लग कर पीठ में खंजर उतारने वाली तंज़ीम है। 

Zuber

Monday, 24 May 2021

क़िसास मुक्कम्मल, दीफ़ाई फौजियों ने लिया भाई की मौत का बदला।

अज़ीज़ नाज़रीन,

ऐसा नहीं है की अब मुस्लिम अवाम और दीफ़ाई फौजी कमज़ोर रह गए हैं।   हर मुस्लिम की शहादत का बदला बराबर लिया जा रहा है।   अभी तो पार्टी शुरू हुई है।   अभी ५ रोज़ क़ब्ल आसिफ नाम के जिम ट्रेनर (पहलवान) को काफिर शिद्दत पसंदों ने डंडों, रोड, और त्रिशूल, भाला, बल्लम से पीट पीट के गोद गोद कर शहीद कर दिया था।   उसका क़िसास आज दो हिन्दू अवाम ने चुकाया।  

पहला गुरूग्राम में एक ३८ साला युवक हरगोविदं को लाठी, डंडों, लोहे की राडों से पीट पीट कर हलाक कर बदला पूरा किया। ।  हलाक शुदा की बीवी की शिकायत पर गैंगस्टर राकेश हयातपुर के गुर्गों के ख़िलाफ़ क़तल का मामला दर्ज कर लिया गया है।  

यह क़त्ल खेतकी डोला थाना इलाक़े का है।   मामले की तफ्तीश में पुलिस को आपसी रंजिश और बेशक़ीमती ज़मीन के पैसे के लैन दैन का मामला सामने आया है।   लेकिन पुलिस हर ज़ाविया से जांच कर रही है।      

दूसरा क़िसास पहलवान से लिया गया।   क्योंकि आसिफ को लाठी, डंडों, लोहे की राडों से पीट पीट कर शहीद किया गया था सो ऊपर वाले क़िसास में पूरा हुआ।   लेकिन आसिफ तो पहलवान था तो उसका भी बदला किसी पहलवान को ही चुकाना था।  सो वोह आज शाम जवानों ने मुकम्मल कर दिया।  Boys are doing well.   बरोज़ पीर शाम वेश्या शिक्षण संस्थान (नाम तो संघी दिख रहा है) के ग्राऊंड में मश्क़ कर रहा पहलवान पर दो ना वाक़िफ़ अनासिरों (दीफ़ाई) जवानों ने अंधाधुन गोलिओं की बारिश कर दी।   जिससे वोह नामुराद काफिर मौके पर ही हलाक हो गया मजे ढेर हो गया।  

मारा गया काफिर पहलवान की पहचान अंकुश के रूप में हुई है, जो रोहतक के विजय नगर इलाक़े का रहने वाला था।  नाज़रीन जैसा खुशदिल खूबसूरत आसिफ था वैसा ही यह काफिर भी है।   मतलब बदला बराबर का छूटा। 

संघी पहलवान पर सात से आठ गोलियों की बौछार की गई, अपने ऊपर गोलियों की बौछार सेहेन नहीं कर पाया और पहलवान जगह पर ही ढेर हो गया और उसके ही ख़ून से ज़मीन को सुर्ख कर दिया गाया।   आगे यह तमाम ज़मीन पाक होगी।   मतलब पाकिस्तान की होगी।    

साधू तेरे सूबे में दो मुस्लिम नोजवावो को शहीद किया है।   एक १७ साला सब्ज़ी फरोश दूसरा बरेली जिला पंचायत के सदर मौलाना साहब को गोली मारी गई है।   इन दो का बदला या तो २० से लेंगे या फिर २०० से लेंगे।  उखाड़ ले साधू जो उखाड़ना है।   यह सब उधेड़ बून तू इंतेखाब जीतने के लिए कर रहा है ना।  क्योंकि उत्तर प्रदेश में होने वाले हैं इंतेखाब, बस फिर तैयार रह, तेरे कितने मारे जाते हैं और मुस्लिम कितने मारे जाते हैं।  

में जवानों को आगाह करता हूँ की उत्तर प्रदेश, हरयाणा, मध्य प्रदेश, दिल्ली की पुलिस अगर हमलावर हो तो उसको गोलिओं से भून डालो।   आगे की आगे से देखी जाएगी।  इन ज़ालिमों, ना इंसाफों, क़ातिलों का ख़ून तुम्हारे ऊपर हलाल है।   इनको जहाँ देखो पकड़ पकड़ कर काट डालो।  Boys listen, the orders. 

में तो उन हिन्दू अवाम को भी कहना चाहता हूँ जिनकी पिछले इंतेखाब में हुई गफलत के बाद आँखे खुल गई होगी और जिन्होंने शमशान के ऊपर अपना वोट दिया था अब ऐसी किसी भी हिन्दू मुस्लिम वाली एक तरफा बात पर वोह खुद ही ऐसे अनासिरों और शिद्दत पसंदों को पीट पीट कर मार डालेंगे।  फिर से गाये का मास और गाये की हत्या का मामला सर चढ़ने लगा है।   ऐसे लोगों का साथ देने के जो ऐसी झूठी बातों पर एक अकेले निहत्ते बेगुनाह मुस्लिम पर हमलावर होतें हैं तो इन गौ सेवकों पर ही हिन्दू अवाम को पत्थरों और लाठियों से हमला कर देना चाहिए।   क्योंकि यह तमाम दहशत और कवायत सिर्फ और सिर्फ इंतेखाब में हिन्दू मुस्लिम, पाकिस्तान हिंदुस्तान, हिंदु धर्म खतरे में है और ना जाने क्या क्या बोल कर जीतने की कोशिश करेगें.

Zuber

Friday, 21 May 2021

यहूद दहशत घुटने टैक दिए।

अज़ीज़ नाज़रीन,

जैसा की क़यास लगाया जा रहा था की आलमी दहशतगर्द और उसका सरगना अबू अल नेतन बगदादी की हालत इस  जंग के बाद ऐसी हो जाएगी की आगे कुव्वा पीछे खाई।   वही हुआ, जिस अंदाज़ में इस दहशतगर्द ने जंग का आगाज़ किया था और इसकी तंज़ीम यहूद स्टेट के दहशतगर्दों ने मासूम अवाम की गर्दन क़लम करना शुरू की थी, उसके बाद जंग जारी रखने और अमन मोहायेदा करने दोनों ही सूरतों में इस दहशतगर्द की फ़ज़ीहत और बेइज़्ज़ती हर ज़हीन तालीमी आफ़ता सहाफी, आलमी बरादरी और जंगी ताज़ियाकार महसूस कर सकते थे।   

अगर अबू अल नेतन बगदादी जंग जारी रखता तो उसके वतन दहशतगर्द इजराइल की माशी हालत पतली पर पतली होती चली जा रही थी।   ख़ाना जंगी का खादशा बढ़ता जा रहा था और अमन क़रार किया तो घुटनों के बल रेंगने जैसा होगा।  वोह भी एक ऐसी तंज़ीम हमास जो बेहद कमज़ोर है और इजराइल के मुक़ाबले में जिसका वजूद अभी तो आलमी सतह पर पहचान बनाने भी नहीं पाया है। वोह हमास सुपर पावर, आयरन डोम वाले, आला दर्जे की फौजी सलाहियत वाले, बेहतर जदीद हथियारों से आरास्ता, बेहतरीन क़ुव्वत वाले फ़िज़ाई फौजी और तमाम क़ुव्वत से आरास्ता इजराइल को जंग बंद करने पर मजबूर कर देता है।  हमास की तमाम शर्तों पर इजराइल अमन मोहायदा करता है।  क्या यह बड़ी बात नहीं है।  इस  मसले को तमाम सहाफी और आलमी जंग ताजियादार हमास की जीत तस्सव्वुर कर रहें हैं।  क्योंकि जिस क़ुव्वत और सुपर पावर इजराइल से एक अदना बेहद अदना मुल्क नहीं बल्कि तंज़ीम ने अमन मोहायदा अपनी शर्तों पर मुक्कम्मल किया है यह किस जीत से कम नहीं है।           

अबू अल नेतन बगदादी और उसके ज़ालिम तरीन दहशतगर्द तो दुनियां के सबसे खतरनाक और बर्बर दहशतगर्दों की फेहरिस्त में दाख़िल हो चुके है।  लेकिन इसको कोई करिश्मा ही कहा जाएगा एक करामात की एक सुपर पावर एक तंज़ीम के सामने घुटने टैंक देता है।   इस जीत के साथ फलस्तीन अवाम में जश्न का माहौल है और यहूद दहशत में मातम।   ग़ाज़ा शहर में फलीस्तीनी अवाम सड़कों पर निकल आये और जश्न में शामिल हुए ईद मुबारक के नारे लगाए।  

नाज़रीन जैसा की इस सहाफी का नज़ारिया १७ रमज़ानुल मुबारक जंगे बद्र के बाद था वोह अब मुकम्मल होता दिख रहा है।   दहशतगर्द अबू अल नेतन बगदादी अपने खुद के गड रक़्क़ा (इजराइल) में घिर गया है।  उसके ख़ास दहशत के लूटिनेंट और सियासत के माहेरीनों ने अबू अल नेतन पर नुक़्ता चीनी करना शुरू कर दिया है।  

अबू अल नेतन बगदादी के मुहाफ़िज़ वज़रा के बोर्ड की जानिब से गाज़ा पट्टी पर ११ रोज़ से चले आ रहे फौजी मोहीम को रोकने की एक तरफा सीज़ फायर की मंज़ूरी दे दी है।    दरसअल दहशतगर्द बगदादी और उसके बर्बर रवैये मासूम बच्चो को एक क़तार में खड़ा कर के क़तल करने, अवाम पर तशद्दुत करने और दिगार सज़ा देने के फैसलों के ख़िलाफ़ आलमी बरदारी में सख्त तशवीश और गुस्सा देखा जा रहा था।   रूस ने अमेरिका समेत दहशतगर्द इजराइल को धमकाया था अगर बर्बरता और यहूदी दहशतगर्दों का क़त्ल करने का खून बहाने का रव्वैया नहीं रुका तो वोह भी इस जंग का हिस्सा बन इजराइल की दहशत को जड़ से ख़तम कर देगा। 

अब बगदादी पहले से मज़ीद मुफ़लिस और अपना विक़ार, इज़्ज़त खोने वाला अपने ही अवाम और वज़ीरों की नज़रों से गिरने वाला वज़ीर बन गया है।   जिस कैबिने में सीज़ फायर का फैसला लेना था उस से क़ब्ल हॉप के सियासतदां गीदेयोन सार ने नेतन्याहू हुकूमत को कटघरे में खड़ा करते हुए सीज़ फायर की मज़्ज़म्मत की है।  उसका सोचना था की सीज़ फायर का फैसला हमास और और दिगार तंज़ीमों के ख़िलाफ़ दहशतगर्द इजराइल को हिकमते अमली को बेहद नुकसान पहुचायेगा।   इजराइल को फलस्तीन को उसके नुक़सान की भरपाई करना होगी।  मीडिया के दफ्तरों पर जो बम दिराये उसका माक़ूल जवाज़ देना होगा।  नहीं तो हर्जाना और माशी, हथियारों पर पाबन्दी। 

उसका कहना था की सीज़ फायर हमास को मज़ीद मज़बूत और मक़बूल बनाएगा और ऐसा करने से क़ब्ल इजराइल को यहूदी दहशतगर्द जो हमास के क़ब्ज़े में हैं और यहूदी शिद्दत पसंद जो हमास ने क़ैद कर लिए हैं उनको बरी करवाने के बारे में बात करना थी।  

ख़ैर यह तो आगाज़ है अभी भी वक़्त है दहशतगर्द नीतिनयाहू अगर मज़ीद तू तेरी और तेरी क़ौम यहूदी दहशतगर्दों को लाशें नहीं देखना चाहता तो इजराइल को छोड़ दे।   अगर मज़ीद तेरे बड़े भाई भुफा जी के तरह हठधर्मी दिखाई में माफ़ी नहीं मांगूगा में रोज़े रखूंगा तो तेरा हशर तो उस फ़िरों और यज़ीद से भी बत्तर होने वाला है।  फ़िरों की लाश आती दुनिया के लिए इबरत है और यज़ीद की लाश को चील कव्वे और कुत्तों ने नोचा था।   उसकी लाश में कीड़े पड़े थे जबकी सबसे बड़ी ममलेकत का बादशाह थालेकिन मालिके कायनात ने ऐसी जगह ले जा कर मौत दी के हफ़्तों उसकी लाश का कोई वली वारिस ना था। 

इतना ही नहीं उसको मारने वाली एक यहूदी ख़ातून थी।  उस बच्ची को इमामे हुसैन के ऊपर की गई ज्यात्ति और उनके एहले ख़ाना के ऊपर बे जा जब्र तशद्दुत करने से इमामे हुसैन से हक़ीक़ी इश्क़ हो गया फिर उस बच्ची ने उनकी शहादत के बाद क़सम खाई की इमाम हुसैन का क़िसास वोह इस ज़ालिम बादशाह से ले कर रहेगी।

उस बच्ची के अज़्म को देखते हुए अल्लाह ने उसकी मदद की और उसने अपने ज़िम्नी इश्क़ में यज़ीद को ऐसी जगह मौत दी जहाँ कोई मादर ज़ात बच्चा और दूर दूर तक ना कोई बस्ती थी।   हफ़्तों बाद जब उसकी लाश सड़ गल गई चील कव्वों ने नौच लिया कीड़े पड़ गए तब जा कर फ़ौजिओं ने ख़ामोशी से उसको दफ़न कर दिया।  मलून।  

वोह भी मारा गया था तू भी मारा जाएगा।   हट छोड़ दे इजराइल छोड़ दे।   तू हरगिज़ हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत पायेगा।   जिसका ज़िक्र यह सहाफी अपनी कई अंग्रेज़ी और हिंदी मज़्मूनों में कर चूका है।  अगर भारत और इजराइल यह समझ रहें हैं की हम जंग जीत जायेगें तो ऐसा हरगिज़ नहीं होगा।   क्योंकि इस बार जंग पाकिस्तान या मुसलमानों से नहीं है बरक्स खुद मालिके कायनात से है।  

अभी तो इजराइल में बड़ी तबाही आना बाक़ी है, एक नहीं दो नहीं तीन नहीं बल्कि पांच हाँ हाँ पूरे पांच और पांचवी आखिर होंगी जिसके बाद तमाम यहूदी साफ़।  इजराइल पाक।   

नितिन याहू अगर तूने भारत के हिटलर के जैसे हठधर्मी दिखाई तो हम तुझे मार डालेगें।   लेकिन तू अपनी ही क़ौम यहूद की मौत और बर्बादी का भी ज़िम्मेदार होगा।   #भारत 

Zuber

दीफ़ाई फौजियों ने फिर मिग जंगी तय्यारा मारा गिराया।

चंडीगढ़ २१ मई २०२१ 

दहशतगर्दों के साथ जंग में हर रोज़ नए नए आयाम जुड़ते जा रहें हैं।   जिसमे बड़ी तादात में भारतीय जंगी तय्यारे और जंगी बड़े की तबाही भी शामिल है।   जंग में ताज़ा सूरते हाल यह है की २० मई को देर रात चंडीगढ़ में भारतीय फ़िज़ाई फौज (इंडियन एयर फाॅर्स) का मिग २१ जंगी तय्यारा पंजाब के मोगा ज़िले के लंगियाना के नज़दीक दीफ़ाई फौजों ने मार गिराया है।   जिसमे दहशतगर्दों का फ़िज़ाई पाइलेट अभिनव चौधरी भी मारा गया है।  तय्यारे ने राजिस्थान के सूरतगढ़ एयर बेस से फ़िज़ा में परवाज़ की थी।  लेकिन पंजाब आते ही जैसे ही वोह दीफ़ाई फौजों के राडार सिस्टम में दाख़िल हुआ उसको फ़ौरन मार गिराया गया।   दहशतगर्द अभिनव चौधरी की लाश खेत में पड़ी मिली है।  बेहतर है की दहशतगर्दों के इस पायलेट की लाश को कुत्तों ने नहीं नोचा।  जिस तरह से उत्तर प्रदेश गंगा में तैरती लाशों, लकड़ियों की क़िल्लात और शमशान में जगह ना मिलने के सबब रेत में दबाई गई लाशों को कुत्ते कुरेद कुरेद कर निकाल कर बेहुरमती कर रहें हैं।

भारतीय फ़िज़ाई फौज ने तमाम तहक़ीक़ात का हुकुम नाफ़िज़ कर दिया है। 

ज़ाराये इत्तेला मसूल मालूमात के मुताबिक़ राजिस्थान के सूरत गड एयरबेस से पायलट अभिनव चौधरी ने जगराओं के नज़दीक इनायतपुर के लिए परवाज़ की थी।  जब इनायतपुर से सूरतगढ़ घर वापसी के लिए परवाज़ का आगाज़ किया तो मोगा के गांव लांगेआना के नज़दीक उसको मार गिराया गया।    बेहतर यह हुआ की तय्यारा रिहायशी हल्क़े में नहीं गिरा नहीं तो जाहांबाक होने वाले अफ़राद की तादात में इज़ाफ़ा होता। 

तय्यारे के गिरते ही पंजाब पुलिस हरकत मे आई और बेहतरीन कारगरदेगी दिखाते हुए अस पी हेड क्वार्टर गुरदीप सिंह को हादसे का पैग़ाम मसूल हुआ।  मोगा अस पी हरमनबीर सिंह गिल और पुलिस के आला ओहदेदार मौक़ा ऐ वारदात पर पहुंचे और उन्होंने पाइलट की तलाश जारी कर दी। जल्द ही उनको अपने मक़सद में कामयाबी मिल गई और २४ घंटों की मेहनत का नतीजा रंग लाया।  आख़िरकार अभिनव चौधरी की लाश खेतों से बरामद हुई।   


Zuber 

Sunday, 16 May 2021

हराम की जनी और नाजाइज़ औलादों को वालिद का झटका।


ऐसा कहतें हैं जो औलादें मर्द और औरत के नाजाइज़ रिश्ते और हरामकारी से पैदा हुई होती हैं उनको आगे चल कर ऐसे वाल्दैन भी पूछना बंद कर देतें हैं जो उनकी गलती और ज़िना के नतीजे में पैदा हुई होती हैं।   अब ऐसी नाजाइज़ ओलादे गटर से चाय बनाने के नुस्खे खोजती हैं और अपने बच्चो को पकोड़े बनाने का तरीक़ा सिखाती हैं।   या फिर गाये का पख़ाना पेशाब खाना पीना सिखाती हैं, और बजाये क़लम हाथ में देने के तलवार हाथों में दे कर नफरत और तास्सुब का ज़हर पीला पीला कर उनको बड़ा किया जाता है। ऐसे ही ज़हरीले हरामिहयों में से एक है  तेजस्वी सूर्य नाजाइज़ और हरामी, और अवामी जायदाद कगना राणावत।  इस अवामी जायदाद कंगना राणावत को हर वक़्त अपने सूखे हुए कुव्वे (भोग) में से पानी निकालने की खवाहिश रहती है। किसी भी सड़क चलते राह गिर को पकड़ लिया और लगी उससे मेहनत मशक़्क़त करवाने। 

दूसरा है तेजस्वी सूर्य।  इस नाजाइज़ औलाद ने अपनी माता जी (भारत) को ले कर अपने नाजाइज़ बाप इजराइल के लिए हेश टैग चलाया था।   #India stand with Israel.

अब इस हराम के जने की ऐसी फ़ज़ीहत हो गई की इसके नाजाइज़ बाप इजराइल ने इसको अपना बेटा तस्सव्वुर करने से इंकार कर दिया।  हुआ यह की जिस माता जी (भारत) को इन भक्तों, संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसंद काफिरों और बीजेपी वालों ने बड़ा सजा धजा कर नाजाइज़ बाप के पास भेजा था उस भारत माता के साथ कई बार मौज मज़े कर लिए और इन जैसे नाजाइज़ बच्चे पैदा किये, लेकिन जब इनको अपना नाम देना था तो इनके नाजाइज़ बाप इजराइल ने इनका नाम ही नहीं लिया। 

हुआ यह है की हाल ही में फलस्तीन और दहशत के बाप इजराइल के दरमियान जंग के इमकानात को देखते हुए कई मुमालिकों ने इजराइल की हिमायत में ट्वीट्स किये। इजराइल का बगदादी बेंजामिन नीतिंयाहू ने उसके मुवाफ़ेक़त में ट्वीट करने वाले २५ मुमालिकों का नाम लिया और उनका शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस जंग में उसका साथ दिया है.  लेकिन अपनी नाजाइज़ औलाद भारत के भक्तों का नाम नहीं लिया। जिन्होंने फलस्तीन और दहशतगर्द इजराइल के माबेन जंग की सूरते हाल में इजराइल की हमदर्दी में ट्वीट किये थे।  इस २५ मुमालिकों में माता जी (भारत) का नाम दूर दूर तक कहीं नज़र नहीं आ रहा है।  

अब ऐसी सूरते हाल में नाजाइज़  और हराम के बच्चों को तीखा लग गया और लगे अपने ही नाजाइज़ बाप इजराइल पर लान तान करने बदला लेने के ट्वीट करने। फेमिली को तोड़ने और हम तो एक फेमिली है हमको कैसे फरामोश कर दिया आपने। 

भक्तों की हराम और नाजाइज़ पैदावार और तीखा लगने हालत देख कर १९७८ को शाया हुई फिल्म त्रिशूल की कहानी से काफी मेल खाती है।  शांति देवी (भारत माता) जो  मुफलिसी और ग़ुरबत की ज़िन्दगी जी रही है।  उसकी ग़ुरबत का फायदा उठा कर शांति देवी (भारत माता) का नाजाइज़ आशिक़ इजराइल (फिल्म में संजीव कुमार) ने मौज मस्ती की और उस अय्याशी को प्यार का नाम दे कर उस हद तक बढ़ गया की अमिताभ बच्चन (भक्त) जैसे नाजाइज़ औलादें पैदा कर डाली।   जब जिस्म की दर्जे हरारत ठंडी पड़ी और गरीब मुफ़लिस भिकारी शांति देवी (भारत माता) मज़ीद ग़ुरबत और बीमारी का शिकार हुए तो उस के नाजाइज़ आशिक़ ने दौलत, पोजीशन स्टेटस के साथ एक करोड़ पती सेठ की बेटी से शादी कर ली।  और शांति देवी (भारत माता) को ज़िन्दगी की जंग में तनहे तनहा छोड़ दिया।  बेसाहारा।  उस हरामी बच्चे (भक्तों) ने अपनी माता जी (भारत) को तिल तिल हर रोज़ मरते देखा था।  बीमारी ग़ुरबत और तकलीफों से जंग लड़ते लड़ते बिल आखिर माता जी फ़ौत हो गई। लेकिन मरने से पहले अपने नाजाइज़ आशिक़ इजराइल का नाम बता गई और बोल गई तेरी तबाही और मेरी बर्बादी का ज़िम्मेदार तेरा नाजाइज़ बाप है।   अब बारी भक्तों की थी उनको अक़्ल आ चुकी थी की हमारी माता जी को इस्तेमाल कर के उसके साथ मौज मस्ती की है और हम उस गंदगी, हरामकारी की पैदावार है मतलब हरामी हैं। 

उम्मीद है जिस तरह फिल्म में नाजाइज़ हरामी बच्चे को अक़्ल आ जाती है उसी तरह भारत माता और इजराइल की नाजाइज़ औलादों को भी अब अक़्ल आ जाना चाहिए।  क्योंकि बोहोत जल्द यह सब हरामी यतीम होने वाले हैं।  इनकी माता जी (भारत) तो हर तकलीफों, बीमारी, ग़ुरबत, मुफलिसी से जंग लड़ते लड़ते पहले ही मर चुकी है अब बारी नाजाइज़ बाप इजराइल की है।     


Zuber

मणिपुर ज़ाफ़रानी दहशत का सरगना ढेर।

मणिपुर का ज़ाफ़रानी  दहशत का सरगना और  मणिपुर बीजेपी का सदर अस टिकेंद्र को करोना फ़ौजिओं ने ढेर कर दिया है.  उसको बरोज़ जुमेरात करोना  फ़ौजिओं ने घेर लिया था, शदीद ज़ख़्मी हालात में उसको एक निजी शिफ़ा ख़ाने में भर्ती किया गया था.  बरोज़ सनीचर  उसको मौत के पंजों ने जकड लिया और अपनी आगोश में ले  गए.  वज़ीरे दरिंदा मोदी उसको करोना  होने पर सख़्त ग़म का इज़हार किया है.  वज़ीरे दरिंदा ने अपने ट्वीट में कहा वोह  श्रीमान टिकेंद्र की मौत से दुखी हैं, वोह सदा एक हार्ड वोर्किंग कार्याकर्ता के जैसे याद रहेगें, जो की मणिपुर में तंज़ीम की क़ुव्वत थे.

वज़ीरे दरिंदा घर अमित शाह और बीजेपी का क़ौमी सदर जी पी नड्डा वज़ीरे खेल कूद किरण रिज्जू ने भी अपने अपने हिसाब से  ताज़ियाती पैगाम भेजे हैं.

करोना फ़ौजिओं के हाथों मारा गया ज़ाफ़रानी दहशतगर्द का एरिया कमांडेंट पेशे से  उस्दाद (प्रोफेसर) भी था.  यह ज़ाफ़रानी ज़हर हर शोबे में घूस चूका है. तालीम साज़ों के बीच में रह कर यह ज़ाफ़रानी ज़हर आला तालीमी आफ़्ता और जानकार प्रोफेसरों को भी मुत्तासिर करने से पीछे नहीं हटा.   हालात यहाँ तक पहुंच गए की तालीम भी ज़ाफ़रानी होने लगी थी.  साइंस में गाये का पेशाब पाखाना और  टेक्नोलॉजी में रॉकेट रामायण और राम के वक़्त में ईजाद हुआ था ऐसे ऐसे फलसफे दिए जाने लगे.  जोग्राफिया में मौजूदा दौर में अफगानिस्तान से ले कर बंगलादेश तक और कश्मीर से ले कर तो कन्यकुमारी तक भारत का हिस्सा होने के मज़मून पढ़ाये जाने लगे.  फिर तारीख़ में अकबर महान से दहशतगर्द राणा प्रताप जीता था और मोहम्मद गोरी से दहशतगर्द पृथ्वी राज चौहान। जबकी  मग़रिबी और ब्रिटिश तारीख़ के माहरीन तो दोनों ही हिन्दू दहशतगर्दों को ज़ालिम तरीन हारे हुए जेल गए हुए राजा तस्लीम  करतें हैं. 

ख़ैर मारा गया एक और ज़ाफ़रानी कीड़ा, अब इसको अगर जलाने के लकडिया कम पड़ जाएँ तो इसकी लाश को इजराइल भेज दो।  जहाँ हमास के राकेट से जल भून के राख हो जाएगा।  और इसका मौत के बाद का काम काज भी हो जाएग।   मुफ्त मुफ्त मुफ्त।    

आगे और है, और है......... 

जुबेर 

 

   

Saturday, 15 May 2021

अल्लाहबाद हाई दहशत अड्डे के जज को करोना फ़ौजिओं ने किया ढेर।

 

नाज़रीन जैसा की पहले ही यह बात ते हो चुकी है, शिद्दत पसंद काफिर, ज़ाफ़रानी दहशत (संघ) और हर बीजेपी वाले को ढेर करने के बाद अदलिया में मौजूद उन जजों को मारेगें जो मुत्तसिब और फ़िरक़ावारना ज़ेहनियत के साथ इन्साफ का क़तल करते थे।   इस इन्साफ के क़तल में करोना फ़ौजिओं को अल्लाहाबाद हाई कोर्ट और उसकी लखनऊ बेंच सबसे अव्वल दर्जे में खड़ी पाई गई थी।  अभी तो पार्टी शुरू हुई है, अभी तो हिन्दुस्तान को बोहोत कुछ देखना बाक़ी है।  

२०१९ में करोना की इस जंग के आगाज़ के बाद अदलिया में बैठे कई जजेस यहाँ तक की सुप्रीम कोर्ट के जजेस को करोना फौजियों ने मौत के घाट उतार दिया है।  

इस ज़िम्न में अल्लाहबाद हाई कोर्ट का मौजूदा जज जस्टिस वि के श्रीवास्तव को करोना फ़ौजिओं ने ढेर कर दिया।   लेकिन उसको जिस अंदाज़ में तड़पा तड़पा कर ढेर किया गया, अब वोह बड़ा मुद्दा बन गया है।   कश्मीर, बाबरी, ट्रिपल तलाक़ और तमाम मुसलमानों से ताल्लुक़ रखने वाले मुद्दों पर इन ज़ेहनी मरीज़ों अदलिया में बैठे जजेस का काफी मनफ़ी किरदार रहा है।   तो उसका कफ़्फ़ारा अदलिया, सियासत, शिद्दत पसद (हर ज़ाफ़रानी) अवाम और सहाफत को देना होगा। 

फिर कश्मीर में भाई बुरहान वानी और दिगार मुजाहिदीनों को जिस अंदाज़ में तड़पा तड़पा कर भारतीय दहशतगर्द फोर्स (फौज) शहीद करने के बाद मीडिया इजलास में उनको दहशतगर्द बोल कर बदनाम करती थी इस जज को ढेर करने के बाद वोह क़िसास भी मुक्कम्मल हुआ।    

नाज़रीन कुछ अर्से क़ब्ल अल्लाहाबाद हाई कोर्ट का जस्टिस वीरेंदर कुमार श्रीवास्तव (कायस्त) को करोना फ़ौजिओं ने घेर लिया था।   उसके बाद उसको मौत के घाट उतार दिया गया।   लेकिन जिस अंदाज़ में साधू की इन्तेज़ामियाँ ने उसके ज़ख़्मी जिस्म के साथ बेक़द्री और अनदेखी की है उसको यही बोल सकते हैं कोई तो गैबी ताक़त ऐसा करने के लिए इन लोगों को मजबूर कर रही है ताके मुसलमानों का क़िसास मुक्कम्मल हो सके।   उस जज को कोई भी ख़ादिम नहीं मिला, हुकूमत की जानिब से उसको ना ही कोई ख़िदमतगुज़ार मिला और ना ही बेहतर सुविधाएं।  

नाज़रीन जितना यह शिद्दत पसंद और ज़ाफ़रानी कीड़े भौंकेगे उतना है इनके लिए आगे की राहें तकलीफकुन होती जायेगीं।  बर्मा फतह करने के बाद अभी हम फलस्तीन के मुजाहिदों के साथ इजराइल में तबाही मचाने में मसरूफ हैं।  और जो कुछ भी हिन्द में हो रहा है वोह महज़ हमारे शागिर्दों के ज़ारिये हो रहा है।  जल्द हम हिन्द की जानिब रूख़ करेंगें।  फिर कोई भी शिद्दत पसंद काफिर, कोई संघी दहशतगर्द, कोई बीजेपी वाला कोई ज़ाफ़रानी ज़हर नहीं बच पायेगा।   हर एक मारा जाएगा।  

नाज़रीन मुस्लिम नस्लों को बर्बाद करने का अज़्म रखते थे, ज़ाफ़रानी ज़हर संबित पात्रा, ओसामा बिन लादेन पर तंज़ कसता था।   ज़मीन भी नसीब नहीं हुई पानी में बहना पड़ा।  २०१७-१८ में नव भारत टाइम्स और आज तक पर कमेंट किया था, तुमको भी तुम्हारे अपने पानी में बहाना पड़ेगें, इतना ही नहीं तुम्हारे अपनों की लाशों को चील कव्वे गिद्ध और कुत्ते नोचेगें।   और ऐसे कमैंट्स फेसबुक, ट्वीटर पर शेयर किये थे, लेकिन ट्वीटर ब्लॉक है और फेसबुक से वोह तमाम कमैंट्स हटा दिए गए हैं. लेकिन आज तक और नव भारत के एडिटर इन चीफ के पास अगर वोह तमाम कमैंट्स मेहफ़ूज़ हो तो देख सकतें हैं, जो कहा वोह हो रहा है. 

जितना भोंकते जायेगें यह ज़ाफ़रानी कुत्ते उतना ही इनके ऊपर अज़ीयत सख्त कर दी जाएगी। 

India stand with Israel,  ठीक है, now India will stand with dead bodies.  

Zuber

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...