Tuesday, 15 December 2020

फरारी इंसान का सबसे अदना दर्जा

 अज़ीज़ नाज़रीन,

संसद का पूरा विंटर सेशन मंसूख करना किसी फरारी से कम नहीं है।  जमूरियत का एक और क़त्ल।  जमहूरी अंदाज़ में अवाम के मसाइल कैसे हल होंगे सिवाए संसद के।  है कोई जो अवाम की बात सुन सके बग़ैर संसद का सेशन बुलाये।   

अभी ३-४ रोज़ क़ब्ल इंसान की ५ सिफ़त इस सहाफी ने बयान की थी।   जिसमे सबसे आला क़िस्म उस इंसान की बताई थी जो ईमानदारी से, हक़ और इन्साफ से अपने काम को अंजाम देता है। उसको काम को मुकम्मल करने का एक जूनून होता है।   वहीँ सबसे अदना और निचली सिफ़त उस इंसान की बयान की थी, जिसमे हालात से निबटने और उनसे मुक़ाबला करने की क़ुव्वत और ताक़त नहीं होती है और वोह हर मसले पर फरारी इख़्तेयार करता है।  

इस ज़िम्न में मोदी इन्तेज़ामियाँ फिर से एक बार अदना दर्जे के इंसानों वाली कैफियत वाली जमात साबित हुई।   ऐवान का सरमाई इजलास (विंटर सेशन) ना बुलाने का ऐलान करना मोदी हुकूमत का तमाम आतिशी मुद्दों से किसी फरारी से कम नहीं है। 

आज भारत बारूद के ढेर पर मौजूद है, हिन्दू दहशत अपने उरूज पर है, किसान सैकड़ों पर हैं, चीन नेपाल अपनी अपनी फौज के साथ सरहद को तब्दील कर चुके हैं।   फिर भी ऐसी मौके पर किसी भी ला यानी बातों पर पूरे इजलास को मन्सूख़ करना किसी तानाशाही हिकमते अमली से कम नहीं है।  ऐसी चीज़े जमुहरियाती मुमालिकों में सख्त मज़्ज़म्मत का बाइस होतीं हैं।  

अभी दिसम्बर २०२० तक हैदराबाद की बल्दिया जैसी अदना इंतेखाब में पूरी पूरी बीजेपी की फौज लग गई थी तब कोविद-१९ के ख़तरात का मोदी इंतेज़ामिया को ख़्याल नहीं आया।  लाडिया (नड्डा) से ले कर तो साधू, तवायफ (नचनिया) से ले कर तो हिजड़ा ऐ दाखला और इन सब की मिली झूली मेहनत से बहार आया छुटभय्या नेता इन सबके ऊपर खुद मोदी जी पहुंच गए थे हैदराबाद बस विकास को पैदा करने के लिए ट्रम्प की मालिश और पसीना बहाने की ज़रुरत थी।  लेकिन हुआ क्या विकास तो पैदा नहीं हुआ।   जब इंतेखाब में तमाम फौज और अमला खड़ा हो सकता है तो अवाम के सवालों का जवाब देते वक़्त ऐवान का इजलास क्यों नहीं बुलाया जा सकता है।    

अगर ऐसे ही तानाशाही हुकुमरानी चला रहे हो तो अपने आपको दुनियां की सबसे बड़ी जमुहरियत कहलाने का कोई हक़ नहीं है।   जिस पाकिस्तान को पानी पी पी के कोसते हो उसने भी अपने तमाम इजलास कोविद में पूरे किये हैं और किसी भी इजलास का ना ही वक़्त कम किया और ना ही सवाल जवाब का।   वही भारत के साथ यह तीसरा इजलास है जिसको पूरी तरह से मंसूख कर दिया गया।   इससे पेश्तर इजलास का वक़्त कम महज़ १० दिनों में ख़तम कर दिया था।   वही उससे क़ब्ल इजलास को ताख़ीर से शुरू किया था और जल्द ख़तम कर दिया था। 

यह बात सही है की हरयाणा से ले कर कन्याकुमारी तक भारत एक हैं और यह बात भी सही है और तारिख के सफों में दर्ज हो चुकी है की मोदी अपने हर मुद्दे से फरारी इख़्तेयार कर चूका है।  चाहे वोह कश्मीर को हाथ से गवाने का मुद्दा हो या केरला का, चाहे वोह चाय की दूकान का मामला हो या अज़वाजी (घरेलू) ज़िन्दगी।   चाहे वोह भारत को संभालने का मसला हो या कोई और हर मुद्दे पर फरारी।   फरार........ 

अब तो इजलास ही नहीं हो रहा है।  मुद्दे कैसे हल होंगे।  यह क्या हो रहा है।

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...