Wednesday, 30 November 2022

लंगूर बिन्दु या Monkey point.

अज़ीज़, मोहसिन, फरिश्ता।  

खारघर नई बम्बई का एक आला और जदीद क़स्बों में से एक है।  जहाँ आला माशी मआशरा रहता है।  ख़ुशक़िस्मती से सहाफ़ी भी इस शहर खारघर में रहता है।  अब सहाफ़ी के मज़मूनों और ख़बरनामों में दिए गए तब्सिरों का असर हूकूमती निज़ाम पर भी पड़ने लगा है। खारघर में सायन पनवेल हाईवे पर तमाम महाराष्ट्र और महाराष्ट्र के बहार जाने के लिए बस टैक्सी मिलती है।  उस पॉइंट को आधिकारिक तोर पर हिंदी में लंगूर बिन्दु और अंग्रेज़ी में मंकी पॉइंट के नाम से जाना जाता है।  यह चौराहा ३ लंगूर बिन्दु अब आहिस्ता आहिस्ता काफी मशहूर होने लगा है।  ज़ोमेटो में ३ मंकी रेस्टोरेंट में खाने की सहूलियत दी है।  वहीं बिल्डर लॉबी भी अपने फ्लैट की अच्छी क़ीमत मिलने के इश्तेहार दे रहें हैं प्रॉपर्टी नियर ३ मंकी पॉइंट।  

इस मसरूफ चौराहे को लंगूर बिन्दु नाम देने की भी बोहोत अहम वजह है।  चौराहे के बीच में ३ लंगूरों के बड़े मुजस्समे नसब किये गए हैं।  जिसकी वजह से इस चौराहे का नाम ३ लंगूर बिन्दु या ३ मंकी पॉइंट पड़ गया।

भारतिय मिडिया के ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियों ने वतन के लिए कुछ कमाया हो या नहीं लेकिन सहाफत की साख कम करने में अपना मखौल उड़वाने में अपने जिस्म की नुमाइश करवाने में खूब नाम कमाया है। 

जैसे एक तवायफ अपने आक़ा को पूरा मुत्मइन करती है लेकिन उसको जिस्म फ़रोश बोला जाता है वैसे ही लँगूरनियों को जो अपने सियासी आक़ा को पूरा सियासी नफ़ा देने के लिए अपनी जिस्मानी फरोशी के बजाये ज़हन फरोशी करती है तो उनको ज़हन फ़रोश बोला जाता है और मीडिया के लंगूरों को सियासी एजेंट।   

इन लंगूर और लँगूरनियों की जमात ने जितना भारत का नुकसान २०१४ से किया है उतना तो बरतानिया हुकूमत में भी नहीं हुआ था। अगर यह ग़द्दारे वतन लंगूर और लँगूरनियाँ अपने आक़ा का मफ़ात देखने के बजाये वतन के बारे में सोचते और हुकूमत की किसी भी ऐसे मुद्दे पर खिचाई करते जो  वतन की साख आलमी बरादरी के सामने कम करती है, तो आज भारत की बेइज़्ज़ती उस दर्जे तक नहीं पहुँचती की उसको बेनक़वामी सतह पर अब बोलने की भी इजाज़त नहीं है।  वहीँ अदना से अदना मुमालिक भारत को आँख दिखा रहे हैं।  जो बांग्लादेश भारत के रहमो करम पर क़ायम हुआ था हिन्दू मुस्लिम फसाद पर वहां की वज़ीरे आज़म ने मोदी और बीजेपी को नसीहत दे डाली।  बोलतीं हैं मोदी हुकूमत बीजेपी और संघ के ज़हरीले बोलों पर पाबन्दी लगाए उनकी ज़हरीली ज़ेहनियत से हमारे मुल्क में काशीदगी पैदा हो रही है और भारत की वजह से हमारे अवाम में ज़हर भर रहा है। 

वहीँ दूसरी जानिब जिस कश्मीर फाइल की झूठी फरेबी और मुतासिब कहानी को खुद मोदी ने सराहा था और उस फिल्म की तारीफ की थी इसराइल के डायरेक्टर जनाब लुपिड ने आलमी अवार्ड में उस फिल्म को बकवास, बोगस स्टोरी बोल कर कोई दर्जा ही नहीं दिया।  फिर उस फिल्म के बारे में तो लंगूर लँगूरनियाँ क़सीदे कस रहे थे उसका इश्तेहार कर रहे थे।  लेकिन आलमी सतह पर मामला सब टाये टाये फिस्स हो गया।     

क्या यह लंगूरों के लिए किसी ज़लालत से कम नहीं। 

सहाफ़ी ज़ुबेर की क़लम से।

Tuesday, 22 November 2022

शैतानी क़दमों की मनहूसियत अब इंडोनेशिया में ज़ाहिर हुई।

ना मानों ज़ुबेर की सीख ले कर ठीकरा मांगों भिक। 

अज़ीज़ नाज़रीन,

सहाफ़ी जुबेर ने ज़ालिम दरिंदे कसाई जल्लाद दहशतगर्द मोदी के बारे में २०१४ से हर वक़्त लिखा है की यह शैतान की नस्ल वाला शक़्स मनहूस है और इसके क़दम जिस ज़मीन पर पड़ेगें वोह तबाह हो जाएगी।  इस ज़ालिम शैतान दरिंदे मोदी की २०१४ में भारत पर बंदूक और बर्बरियत से क़ाबिज़ होने के बाद सबसे पहली सिफारती दौरे के बाद नेपाल में ज़बरदस्त ज़लज़ला आया था जिसमे कमो बेश २००० अफ़राद जहांबाक़ हुए थे।   उसके बाद हर वक़्त मज़मून कुशाई की है और सिलसिले वार बताया है की मोदी जिस जिस मुल्क में पहली दफा दौरे पर गया वहां पर आफ़त आई। 

मौत के सौदागर मोदी के मनहूस क़दमों और उसके जाने के बाद आने वाली आफत की इस कड़ी में अब इंडोनेशिया का भी नाम दर्ज हो गया है।  गुजिश्ता हफ्ते दरिंदा जल्लाद ज़ालिम शैतानी मरकज़ का हामी मोदी G-२० इजलास में गया था।  महज़ एक हफ्ता भी नहीं गुज़रा की उस शैतान दरिंदे मौत के सौदागर के मनहूस क़दमों के नताइज मिलने लगे। 

जहाँ इंडोनेशिया के एहम जज़ीरे जावा में बरोज़ पीर को आए ज़बरदस्त ज़लज़ले के सबब रिहायशी इमारतें गिर गई।  इस सानेहा में अभी तक कम से कम १६२ अफ़राद के हलाक होने की इत्तेला है और कई हज़ार मलबे में दबे होने का खदशा।  ज़लज़ले से दर्जनों इमारतें तबाह हो गई और अवाम अपनी जान बचाने के लिए सड़कों और गलियों में भागते देखे गए।  इस हादसे में कई हज़ार अफ़राद ज़ख़्मी हुए हैं।  

जावा के गवर्नर रिदवान कामिल ने बताया 'मरने वालों में ज्यादातर बच्चे हैं।' उन्होंने बताया कि ज़लज़ले के वक्त पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे अपनी पढ़ाई खत्म होने के बाद दिगर तालीम ले रहे थे।

नाज़रीन २०१८ में इस सहाफ़ी ने सिलसिलेवार अपने मज़मून में तहरीर किया है की दरिंदा शैतान पनोतीबाज़ मौत का सौदागर मोदी जिस मुल्क में पहली बार गया उस मुल्क में किस तरह की कुदरती आफत आई।  इतना ही नहीं मौत के सौदागर मोदी ने भारत के जिस जिस सूबे का २०१४ के बाद दौरा किया उस सूबे में तबाही आई है।  चाहे वोह कश्मीर का सैलाब हो या मगरिबी बंगाल का तूफ़ान या केरला की बारिश जिसके सबब १५०० अफ़राद हलाक हुए थे। 

में तमाम इस्लामिक और क्रिस्टी मुमालिकों से गुज़ारिश करना चाहूंगा इस शैतानी अमलियात के माहिर दरिंदे आतंक के आक़ा को अपनी सरज़मीन पर हरगिज़ हरगिज़ दाख़िल ना होने दें नहीं तो यह पनोतीबाज़ शापित इंसान उस ज़मीन को तबाह कर देगा।  हक़ीक़त में भारत और उसके दहशत के आक़ा मोदी को सियासी, समाजी और माशी अछूत बना दो।  ना किसी भी आलमी हल्क़े में इसको मदू किया जाए और ना ही उसको अपनी बात कहने का हक़ दिया जाए।  ऐसे मुल्क और उसके दहशतगर्द सरबराह के तमाम हुक़ूक़ छीन लिए जाएँ जो इंसानी हुक़ूक़, अक़लियती हुक़ूक़, मज़हबी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वर्ज़ी करता हो।  भारत जैसे दहशतगर्द और इंसानी हुक़ूक़ का क़ातिल, अक़लियतों की नस्ल कूशी करने वाले मुल्क के ऊपर सख़्त तरीन पाबन्दी लगाने की ज़रुरत है। 

Zuber

Friday, 11 November 2022

क्रिकेट में मिली सज़ा, अब ज़मीन की बारी।

अज़ीज़ नाज़रीन,

जिसकी तवक़्क़ो की जा रही थी वही हुआ और भारत वर्ल्ड कप क्रिकेट से बहार हुआ।  नाज़रीन अब ब्रिटिश टीम से बेदर्द धुलाई पर जराहत (ऑपरेशन) का हुआ आगाज़।  लंगूर और लँगूरनियाँ कहीं इसको कहीं उसको मुरीदे इलज़ाम ठहरा रहे हैं, लेकिन अपनी गिरेबान में नहीं देख रहें हैं।  भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने शाकिस्त के बाद इस बात का इक़रार किया की वोह सख्त दबाव को नहीं झेल पाए और शाकिस्त हुई। 

नाज़रीन जिस अंदाज़ में लंगूर और लँगूरनियाँ जराहत (ऑपरेशन) कर रहें हैं।  शाकिस्त की असली वजह तो यही ज़ाफ़रानी मीडिया के ग़द्दार हैं जिन्होंने अपने मालिक को नफ़ा पहुंचाने और अपने चेंनल की टी आर पी बढ़ाने के लिए इस क़दर दबाव की तामीर की थी की टीम भारत उसको फेस नहीं कर पाई और अब घड़ियाली आंसू बहा रहें हैं।

नाज़रीन भारतीय टीम और खेल के लिए ग़द्दार भारत के अवाम को यह शाकिस्त दरअसल सज़ा भी है।  लंगूर हर मुद्दे पर जंग की बात करतें हैं।  ख़ास अगर मुक़ाबिल पाकिस्तान हो तो अलफ़ाज़ लंगूर लँगूरनियों को ज़हरीले हो जातें हैं अब पाकिस्तान से होगी जंग, भारतीय टीम पाकिस्तान से भिड़ेगी,  भारतीय टीम पाकिस्तान को धुल चटाएगी वग़ैरा।  फिर क्या लंगूर क्या भारतीय खिलाड़ी और क्या भारतीय अवाम सब खेल के साथ ग़द्दारी पर आमादा हो जातें हैं। अब तो पाकिस्तान से जीतना ही है नहीं तो होगी बदनामी।  फिर उसमे बईमानी हो या गुंडागिर्दी या आतंक बस पाकिस्तान से जीतना ही भारतीय खिलाड़ियों का मक़सद हो जाता है।

भारतियों की इसी ग़लीज़ और गन्दी जंग वाली सोच और हमें हर हाल में पाकिस्तान से जीतना है, ने लीग मैच में पाकिस्तान से बईमानी से जीत दर्ज की थी। फिर मैच में फतह के बाद काफिरों ने उधम मचा डाला था इतने पटाखे फोड़े थे की रात भर नींद नहीं।  लंगूर क़सीदे कस रहे थे।  छोटी दिवाली पर ही कोहली ने बड़ी गिफ्ट दी और ना जाने क्या क्या।  दहशतगर्द ज़ेहनियत शिद्दत ख़ून सुनील गवास्कर अपने खेल जज़बात से बरक्स नाचने लगा।  अब उसमे थोड़ी सी भी खेल भावना होगी तो इंग्लैंड ने जो धोया है तमाम काफिरों को क़तल किया है और अपना एक भी क्रिस्टी फौजी नहीं हलाक होने दिया तो अब नाचे और दिखाए खेल भावना कियोंके यह खले की जीत हुई है।   

पाकिस्तान के साथ बईमानी से जीते मैच पर मेने २७ अक्टूबर को  "क्रिकेट का खेल और हक़ीक़ी हालात।" नाम के उन्वान के साथ मज़मून लिखा है उसमे साफ़ यही बोला गया है की जुव्वे में चीटिंग कर के जीत तो गए थे कौरव लेकिन उसके बाद उनकी क्या हालत हुई थी तड़प तड़प बेदर्दी से हलाक हुए थे।  और जिनके साथ बईमानी हुई है उनको कुछ नसीहतें कही थी।  हो गया वाटोला।  अब भारत के ५ हिस्सा चाहिए। 

भारत की शाकिस्त पाकिस्तान के साथ की गई बईमानी की सज़ा है कियोंके भारत पाकिस्तान से बईमानी से जीता था।  नहीं तो तमाम काफिर १२० पर ढेर हो गए थे।  जिस कोहली को बड़े बड़े मरआत से नवाज़ रहे थे लंगूर वोह आउट हो गया था लेकिन घुटनों से ऊपर बोल को नो दे दिया। फिर फ्री हीट पर भी आउट था मतलब रब ने दिखा दिया की उसको आउट ही देना था बईमानी हुई है।  तीसरी बात ३ रन छोटे छोटे लिए।  अगर एम्पायर ग़ैर जानिबदार होता तो १ ही रन बना है ऐसा बोलता।  लेकिन एम्पायर को ही फोड़ लिया था अब ख़ुद फुट गए।

इतना ही नहीं पाकिस्तान को उस बईमानी से दी गई शाकिस्त पर लंगूर-लँगूरनियाँ अवाम ने उधम मचा डाला था जैसे की हक़ीक़ी जंग फतह हो गई होगी।  बस इनके दिलों दिमाग़ में हर वक़्त पाकिस्तान ही गर्दिश करता रहता है।  जिस कोहली को एशिया कप में भद्दा मुज़ाहेरा करने पर  दुआ दी थी उसके फ़ौरन बाद आखिर मैच में खूब चमका था उसका बल्ला।  इतना ही नहीं उसका खोया हुआ फॉर्म वापिस लौट आया लेकिन दुआ इंसानियत के नाते दी थी बईमानी करने के लिए नहीं।  या किसी भी फ़रीक़ को दहशत में डाल कर अपना नफ़ा लेने के लिए नहीं दी थी।  तुमने बईमानी की और आउट होने के बाद भी नॉट आउट का दबाव बनाया तो उसका ख़मयाज़ा भुगता। 

भारतीय अवाम हर वक़्त ग़द्दार ही होतें हैं।  सियासत में आयेगें तो एवान में ऊल जलूल ख़िलाफ़े दस्तूर बिल बनायेगें।  हूकूमती ओहदों पर होंगे तो अपने फ़र्ज़ से ग़द्दारी करेगें।  सहाफत में होंगें तो झूटी सच्ची ज़हरीली खबरे चलायेगें।  मैदान में ख़ेल भावना से ग़द्दारी करेगें।  अवाम तो सदा एक तरफ़ा ही फैसला करता है उसको भारत की हार क़त्तई तस्लीम नहीं सिर्फ जीतते ही देखना चाहता है।  अब अज़ीम खिलाड़ी भी अगर पाकिस्तान से महज़ लीग मैच में भारत ने फतह हासिल कर ली तो ज़हरीली बोली बोलने लगेगें  तो होना वही है जो होता आया है। 


Zuber

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...