Monday, 30 November 2020

मुजाहिदे आज़म का पुर खुलूस और मोहब्बत भरा पैग़ाम

मुजाहिदे आज़म इमरान ख़ान ने आज बाबा नानक के यौमे विलादत पर सिख बरादरी को पुर खुलूस मुबारकबाद दी।   उन्होंने अज़्म किया की पाकिस्तान में सिख बरादरी के फलाही कामो को तवज्जो दी जाएगी और उनकी मुक्क़द्दस इबादत गाहों के तहफूज़ की ज़िम्मेदारी उनकी रहेगी।   इस मौक़े पर उन्होंने एक रेलवे स्टेशन का भी ज़िक्र किया जिसके नज़दीक एक क़दीमी सिख गुरूदवारा है और सिख ब्रादरान को माज़ी में यहाँ तक पहुंचने में काफी मशक़्क़त और दुशवारियों का सामना करना पड़ता था।  लेकिन अब उस रेलवे स्टेशन को पूरी तरह नया किया हुआ है।

 

नाज़रीन दो मुल्क दो शख़्सियत दो तंज़ीमेजी हाँ एक भारत एक पाकिस्तान एक इमरान ख़ान एक मोदी एक तहरीके इन्साफ एक भारतीय जनता।   अब फ़र्क़ आप खुद ही देख लीजिये।   जिस बीजेपी की सियासत ही लाशों पर है वोह भले ही सिख हो, मुस्लिम, दलित या फौजी कोई भी चलेगा बस हमें तो हमारा ओजड़ा भरा हुआ चाहिए।   जिस बीजेपी को कांग्रेस को शाकिस्त देने के लिए दिल्ली का ८४ हर दम याद रहता है वोह उन मज़लूम किसानों के ऊपर दिल्ली के ८ और ९ डिग्री ठण्ड में पानी की बौछार छोड़ते हुए शर्म नहीं आई।   ज़ाइफ़ ६० और ७० साल के बूढ़े किसानों पर लाठियां भाँचि कई किसानों के चेहरों पर शदीद ज़ख़्म लग गए।  

 

इससे ज़ाहिर होता है की हर बीजेपी वाला हराम का जना है, इनकी नस्ल में ही गड़बड़ है।   उसपे कट्टर बोलता है की यह हमारे किसान नहीं हैं, दूसरा बीजेपी का आतंकी बोलता है यह तो खालिस्तानी समर्थन हैंबेशर्मी की हद हो गई।  तालिबे इल्म, मस्तूरात, तालीमी आफ़ता, दानिशमंद, किसान अरे भाई किसी को तो बकश दो।   तुम जब अपने हम वतनों के खिलाफ साजिश के साथ इलज़ाम लगा सकते हो, चलो मुस्लिम अवाम से तुमको बोहोत चीड़ है लेकिन सिख बरादरी के लिए तो तुम्हारी  अम्मी की छाती से सदा दूध टपकता रहता है हमदर्दी सदा सबसे ऊपर होती है, हर मुद्दे पर ८४ याद आ जाता है फिर इनके साथ क्यों एक आतंकवादी जैसा बर्ताव किया जा रहा है।   फिर यह कोई आम सिख नहीं हैं यह लोग किसान हैं और इनके हक़ के ऊपर ज़ाफ़रानी हुकूमत ने डाका डाला है, तब यह लोग हुकूमत से बात करने आये हैं।   जब यह बीजेपी वाले अपने खुद के अवाम को बदनाम कर सकतें हैं टुकड़े टुकड़े गेंग, शाहीन की मस्तूरातें ५०० रूपये वाली, शहरी नक्सलवाद, तालिबे इल्म नहीं आतंकवादी तो उसी तर्ज़ पर पाक को सिर्फ बदनाम किया जाता है, असल मुजरिम तो ज़ाफ़रानी गलीज़ और ना जाइज़ नुत्फा है।   हैदरबाद में सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे लेकिन चीन पर फटी पड़ी है।  नेपाल के ऊपर ख़ामोशी तारी हो गई।  एक गलत हो दो गलत हो तीन गलत हो।  अगर सभी जगह सिर्फ तुमसे ही कहा सूनी हो रही है और उसके बाद तुम कुछ ना कुछ इलज़ाम  लगा कर अपने आपको जाइज़ ठहराने की कोशिश कर रहे हो तो साबित होता है की गलती तुम्हारी ही तरफ है।   जब हज़ार लोगों को एक जैसी गलती सिर्फ भारत की तरफ से हो रही है, तो हज़ार गलत होने के बजाये एक भारत ही गलत होगा।    हर उस इंसान के खिलाफ मुखालिफ हवा बहाना  शुरू कर देते हैं यह बीजेपी की ना जाइज़ पैदावार जो इनसे और हुकूमत से लाल लाल आँखे कर के सवाल करता है या अपने हक़ के लिए एहतेजाज करता है।  

 

इससे ज़ाहिर होता है बीजेपी, संघ और हर एक शिद्दत पसंद हिन्दू अपने वाल्दैन की ना जाइज़ औलादें हैं।   जो यह लोग बोलतें हैं उसमे इनकी कोई गलती नहीं है बल्कि इनके हराम और ना जाइज़ नुत्फे की गलती है।   अगर इंसान जाइज़ पैदा हुआ होगा तो बात भी जाइज़ करेगा और ना जाइज़ होगा तो बात उसकी वैसी ही होगी।


जहाँ तबाही और बर्बादी मचाना हो वहां इन बीजेपी वालों को भेज दो, ३०००० पाकिस्तानी और रोहंगिया मौजूद हैंहैदराबाद में सर्जिकल स्ट्राइक करेंगेंहैदराबाद का नाम बदलूंगा, निज़ाम की गुलामी और पुरानी तहज़ीब से अवाम को आज़ादी दिलवा कर रहूंगा।   सियासत करो किसने रोका है लेकिन अपनी नाजाइज़ बातों से अपनी अम्मी की बदकिरदारी और अपने वजूद को तो मत खोलो, तमाम बीजेपी वालों की (नीचे से ले कर तो ऊपर तक) नाजाइज़, झूटी फरेबी, फ़िरक़ापरस्त बातों से उनकी अम्मी किस किस के साथ मुँह काला कर के आई उसके बाद इन लोगों की पैदावार हुई यह ज़ाहिर होता है। 


अगर यह लोग मर्द होते तो अपने किये हुए कामों के जारिए वोट मांगते फिर इनको इस तरह से फिरकावाराना माहौल नहीं पैदा करना पढता। 


बीजेपी वालों ने तक़रीबन समाज और भारत के हर नागरिक के एहतेजाज को कुछ ना कुछ गलीज़ नाम दे कर कुचलना चाहा मुस्लिम, तालिबे इल्म, दानिशमंद, किसान, तालीमी आफ़ता अवाम बस अब तो हिन्दू ही बचे हैं।   उनके खिलाफ जब बीजेपी कुछ ऐसा काला क़ानून बनाएगी तब वोह भी ऐसे ही एहतेजाज करेंगे फिर उनको क्या नाम देगी।   और उसमे आला ज़ात ब्राह्मण, ठाकुर जैसे हिन्दू होंगे। 


इन बेजीपी वालों को किसी से भी हमदर्दी नहीं है और ना ही वतन की मोहब्बत बस इनको अपने आप से मतलब हैआश्रम बिलकुल सही उसी तर्ज़ पर बनी वेब सीरीज़ है।   हरामी काम करना और मस्तूरातों नौजवानों को नशे का आदि बना कर उनका इस्तसाल करना और जिस किसी भक्त की बीवी खूसूरत हो तो उसको नपुंसक बना कर उसकी बीवी के साथ हर रोज़ रात को हरामकारी करना यही काम है बीजेपी वालों का।  इन ६ सालों में तो ना जाने कितने भक्त नए हिजड़े बन गए होंगे और उनकी बीवियां इन बीजेपी वालों के हरम की ज़ीनत। 


तभी तो खुदकशीयों के केसेस बेपनाह बढ़ गए हैं 

Sunday, 29 November 2020

Mujahide Azam Imran Khan overpower India its all radical Hindus and State Sponsored Terrorism.

AUTONOMOUS JOURNALIST

Mujahide Azam Imran Khan overpower India its all radical Hindus and State Sponsored Terrorism. 

https://autojourna.wordpress.com/2020/11/29/mujahide-azam-imran-khan-overpower-india-its-all-radical-hindus-and-state-sponsored-terrorism/


नस्ले तो तबाह हो गई अब तो लाशें उठानी बाक़ी हैं।

 

अज़ीज़ नाज़रीन,

जैसा की इस सहाफी ने अपने हर मज़मून में अवाम को बताने की कोशिश की है की हाकिमे वक़्त का अवाम के अच्छे बुरे अमल में बोहोत नुमाया किरदार होता है।   जैसा हाकिम का किरदार होगा वैसे ही असरात अवाम पर नुमाया होंगे।  आज जो हिन्द के हालात है हर जानिब मार काट फ़िरक़ापरस्ती, लूट, मस्तूरातों के साथ ज़िना, फरेब धोख़ा, दहशतगर्दी उसकी वजह ही हाकिमे वक़्त के बदआमाल और बदकिरदार होने की दलील है।

अब जिस मुल्क में इन्साफ के लिए अदलिया का बाब खटखटाने पर लंगूर और लँगूरनियाँ बवाल मचा डालें तो उस मुल्क की नस्लों को मज़ीद तबाह और बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता।   और यह किसी हाकिम का फैसला हो या ना हो बल्कि मालिके मुतलक़ का फैसला है, और अल्लाह ना इंसाफों को हरगिज़ पसंद नहीं करता है। 

नाज़रीन आपको याद होगा बाबरी मस्जिद पर भगवा की सुप्रीम रंडी ने केसा तमाम वकीलों और भरी पंचायत में अपने संघी आशिक़ों के साथ ज़िना कारी की थी.  इन्साफ की उस देवी की आबरू लूट ली थी.   इन्साफ की उस देवी की मजमूई अस्मतदरी की खबरे और वीडियो महज़ भारत तक ही महदूत नहीं रहे बल्कि बरुन मुल्क पाकिस्तान, तुर्की, अमेरिका, बरतानिया, कुवैत, मलेशिया जैसे तमाम मुल्कों ने उस लाइव अस्मतदरी का मुताला किया और भारत में इन्साफ के मुजसमे की अदलिया ने खुद इज़्ज़त लूट ली उसके ऊपर खूब थू थू हुई।   इतना ही नहीं अब इस मसले और मजमूई अस्मतदरी के मुख़ालेफ़त में बेरुन मुल्क भी बोलने लगे।  अभी तक तुम्हारे यहाँ मस्तूरातें मेहफ़ूज़ नहीं थी, उनकी जब भी कोई संघी दहशतगर्द चाहे इज़्ज़त लूट सकता था लेकिन अब तो इन्साफ के मुजस्समे की इज़्ज़तरेज़ी कर रहे हो, फिर कुवैत, तुर्की और पाकिस्तान में इस मसले पर आलमी अदलिया के दरवाज़े खटखटाये गये।   

फिर जब मुस्लिम अवाम ने देखा की तमाम सबूत हमारे मुवाफ़ेक़त में हैं तमाम बातें सुप्रीम तवायफ ने मानी की रात की तारीकी में मूर्तिया रखना साजिश का एक हिस्सा थे, मस्जिद तोडना गुनाहे कबीरा और जुर्म था.  वहां कभी भी किसी भी वक़्त कोई मंदिर नाही था.  राम मंदिर के वजूद का कोई भी सबूत नहीं मिला फिर भी उस सुप्रीम रंडी ने इन्साफ के साथ हक़ और हलाल काम निकाह नहीं किया बल्कि ज़ाफ़रानी हाकिमों के साथ बरहना हुई और ज़िना किया। 

उसके बाद जब मुस्लिम अवाम ने फैसले पर नज़रे सानी की अपील की दरख्वास्त डाली तो लंगूर और लँगूरनियों का अगवाड़ा और पिछवाड़े सुलगने लगा, हर मुस्लिम नुमाइंदे को अपने अय्याशी के अड्डे पर बुला बुला कर लँगूरनियाँ उसको रिझाने की कोशिस करने लगी और आधी नंगी हो कर आधी झुक कर अपनी छाती दिखाने लगी।   आप रिवीव पेटिशन क्यों डाल रहे हो, आप तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का खैर मक़दम करने वाले थे तो फिर से क्यों आप अदालती पचड़े में मसले को डाल रहे होजब मसला हल हो गया है तो आप लोग क्यों उसको फिर से पेचीदा कर रहे हो। 

नाज़रीन एक इन्साफ पसंद हाकिम और हक़ बोलने वाले ख़लीफ़ा की हुकूमत का वोह जलाल और क़ुव्वत होती है की हज़रते उमर के दौरे खिलाफत में कभी भेड़िये ने बकरी पर हमला नहीं किया।   और उनकी खिलाफत एक दो किलोमीटर की नहीं बल्कि ३२ हज़ार मुर्रब्बा किलोमीटर की खिलाफत के हाकिम थे।  जब आपने इस रूहे फानी से पर्दा किया तो फ़ौरन एक चरवाहे की बकरी को भेड़िया उठा ले गया और मार डाला।  वोह चरवाहा ज़ारो क़तार फुट फुट के रोने लगा लोगों ने कहा अरे एक बकरी के मारे जाने पर इतना ग़मज़दा क्यों हो रहे हो तुम्हारे पास तो अभी भी बकरा बकरी का झुण्ड मौजद है तो उसने कहा मुझे गम एक बकरी के जाने का नहीं है लेकिन हो सकता है की आज खलीफा ए वक़्त ना रहे होंगे।  बाद में पता चला की जब बकरी पर हमला हुआ तब हज़रते उमर रदिअल्लहा दुनाये फानी से कूच कर चुके थे।

अज़ीज़ नाज़रीन बताने का मक़सद वही है की ख़लीफ़ा या हाकिम सिर्फ ज़मीन का नहीं बल्कि अपने मुल्क की अवाम, हजर, शजर, हैवान बकरा बकरी सब का होता है।  और असली हाकिम वही जिसके हक़ और इन्साफ के आगे हवाएं अपना रूख बदल दें, आया हुआ तूफ़ान ठंडा हो जाए, क्योंकि उसको पता होता है की यह खिलाफत और हाकिमियत ऐसे बादशाह के हाथ में है जहाँ इन्साफ और अमन हैअगर कुछ भी बदअमनी हमारी वजह से हुई तो शिकायत सीधी मालिके कायनात तक पहुंचेगी फिर हमको सुबह क़यामत तक अपनी दहशत ना मचाने के लिए क़ैद कर दिया जाएगा।   

एक और किस्सा मशहूर है दौरे कुफ्रिया में दरियाए नील में हर साल तुग़यानी  (बाढ़) आती थी।  फिर एक हसीन कुँवारी बच्ची की गर्दन काट कर उस की बली दे कर उस के गुस्से को ठंडा किया जाता था।   जब हज़रते उमर मिस्र पहुंचे तो उस साल भी ऐसा ही हुआ और अवाम ढोल ताशो के साथ एक हसीन लड़की की बली देने दरिया के किनारे पहुंचे आप ने लोगों से पुछा तुम क्या कर रहे हो उन्होंने बोला आप नए खलीफा हो हम हर साल इस दरिया की बाढ़ को ठंडा करने के लिए एक कुँवारी हसीन लड़की की बली देंतें हैं और दरिया ठंडी हो जाती है।  आपने कहा यह गलत है कुफ्रिया अक़ीदा है।  और आपने एक छोटा सा रुक़्क़ा लिखा " ए नील अगर तू अल्लाह के हुकुम से बहती है तो अपनी तुग़यानी बंद कर में खलीफा उमर तेरे को हुकुम देता हूँ नहीं तो तुझको सुबह क़यामत तक के लिए सूखा दूंगावोह रुक़्क़ा डालना था की दरिया ठंडी हो गई और फिर कभी भी उसमे बाढ़ नहीं आई।

नाज़रीन आज जिन मुगलों के नाम से लंगूर लँगूरनियाँ, शिद्दत पसंद हिन्दू, बीजेपी वाले और संघी दहशतगर्द आग बबूला होतें हैं उसकी वजह ही यही है की मुगलों ने हाकिमियत की और कभी भी कोई बवाल ना मचा भारत को उस वक़्त सोने की चिड़िया कहा जाता था जब ना फैक्ट्रियां थी ना कमाई के दुसरे साधन बल्कि अवाम काश्त पर ही जीता था लेकिन मुगलों का खज़ाना भरा पड़ा था।   दूसरी बात जिस बादशाह औरग़ज़ेब को आज तमाम शिद्दत पसंद हिन्दू पानी पी पी कर कोसते हैं उन्ही बादशाह औरग़ज़ेब की वजह से आज उनको चीन में जा कर कैलाश मानसरोवर के दर्शन का ऐजाज़ हैसिल हुआ है। मुगलिया सल्तनत इन्साफ और हक़ पसंदी की वजह से बेपनाह ऊरूज पर पहुंची और औरंगज़ेब ने तो फारस से ले कर तो बर्मा तक तमाम हिन्द पर हुकूमत की थी।   वजह वही इन्साफ हर इंसान के साथ हुसने सुलूक, प्यार मोहात इखलास भरा पड़ा था ख़ास औरंगज़ेब में तो हमदर्दी और इन्साफ कूट कूट कर भरा था।   

अब तो लगता नहीं की किसी भी काफिर ना इन्साफ, ज़ालिम, दरिंदा, क़साई, दहशतगर्द बादशाह में इतनी क़ुव्वत बची होगी की भारत को फारस से बर्मा तक एक कर सके।   वोह जिस्मानी और रूहानी क़ुव्वत की बदौलत होता है।  जिस इंसान से एक लुगाई नहीं संभाली जाती है वोह क्या मुल्क की हिफाज़त करेगा।  तभी तो संघी जल भून कर ४-४ कैसे रख लेते हो नहीं रखने देंगे ऐसे ऐसे क़ानून बनाने की वकालत करते हैं।   अरे तुम नपुंसक हो तुम्हारे अंदर इतनी क़ुव्वत नहीं की एक को संभाल सको उसको भी अपने पडोसी और साधू संतों के पास भेजते हो और एतेराज़ हम पर करते हो।   

आज के हाकिम की बात करें तो जो भी बाप दादा ने कमाया था चाय का ठेला वोह तो बेच ही दिया बल्कि अब तो डाका मुल्क के असासों पर डाला जा रहा है।  भारत की तारीख़ और जोग्राफिया (इतिहास भूगोल) तब्दील हो गया।  बंगलादेश को भारत की १६०० किलोमीटर ज़मीन दे दी। जम्मू कश्मीर गया, लद्दाख गया, काला पानी और लिपूलेख गया।  जो था वोह भी गवा दिया।  रही सही भारत माता की इज़्ज़त आबरू वोह भी लूट गई, इनके दरिंदा सिफ़त अमल, ना इंसाफ़ी, खून खराबा, फ़िरक़ापरस्ती, मुस्लिम अवाम पर दहशत की वजह से पूरी दुनिया ने भारत माता की लूटती हुई इज़्ज़त को देखा और खूब थू थू हुई।       

सब कुछ बर्बाद और तबाह होने के बाद अब बारी नस्लों की है।   उसकी दो वजह बताता हूँ, एक तो हिन्दू अवाम में बड़े पैमाने में नपुंसकता आ रही है, मस्तूरातें बाँझ हो रही हैं।   फिर जो भी मौजूद नस्लें हैं वोह आये दिन हादसात, बीमारी, खुदकशी, कुदरती आफ़ात में बड़े पैमाने में मारी जा रही हैं।   तो अब नस्लें तो ख़तम होना ही हैं ते है।   उसकी वजह ही तुम्हारे गुनाह, बदकारी, अय्याशी, दहशत, फ़िरक़ापरस्ती, ज़ुल्म, नाइंसाफी हैं।   इस बात का एहसास तुमको आज नहीं हो रहा है लेकिन ज़रा २०-२५ साल बाद जाकर फिर से अपने मज़हब के अफ़राद की रआयेशूमारी करना।  तुम्हारा मज़हब खतरे में मुस्लिम अवाम की वजह से नहीं है और ना है मुस्लिम अवाम के लड़कों से शादी करने से तुम्हारी आबादी कम होगी बल्कि तुम्हारे गुनाहों की वजह से जो इज्तेमाई अज़ाब और कुदरती आफ़ात तुम्हारे ऊपर आ रही हैं उससे तुम्हारी नस्ले ख़तम होंगी।   कोई नाम लेवा ना रहेगा तुम आज मंदिर बना तो रहे हो लेकिन उसमे पूजा कौन करेगा, वोह सब वापिस से हमारे पास ही आने वाली हैं। 

जिस हिसाब से बीजेपी, तमाम शिद्दत पसंद हिन्दू, संघी दहशतगर्द और मुनाफ़िक़ मुस्लिम अवाम की निस्बत से एक बदगुमानी आम तोर पर फैलातें हैं की लव जिहाद और मुसलमानों की दिगर हिकमत बंद नहीं की तो हिन्दू अक़लियत में आ जाएग।  तो उन तमाम साधू संत, और सियासी रहनुमाओं से कहना चाहूंगा की हिन्दू ना सिर्फ अक़लियत में आएगा बल्कि साफ़ भी हो जाएगा। हिन्दू अगर हिन्दुस्तान में मेहफ़ूज़ था तो मुगलिया सल्तनत की बदौलत और मुस्लिम इन्साफ पसंद हाकिमों की वजह से औरंगज़ेब, टीपू सुलतान की हिन्दू अवाम को मेहफ़ूज़ करने की हिकमते अमली इन्साफ पसंद क़ानून बनवाने की बदौलत. लेकिन अब हिन्दू मेहफ़ूज़ नहीं है क्योंकि इन लोगों की नाइंसाफी, हक़ तल्फ़ी, क़त्लों ग़ारत की वजह से तुम्हारे हाकिम मोदी, बीजेपी और संघी दहशत की बदौलत। फिर जिस क़ौम को मालिके कायनात खुद ही ख़त्म करने का अज़्म कर चूका हो है कोई उस क़ौम को मेहफ़ूज़ करने वाला।   

मचालो जितना ग़दर मचाना है लेकिन इस बार तुम्हारी जंग मालिके मुतलक़ से है और तुम्हारी नस्ले ख़त्म हो जाएगी, जिस लूत की क़ौम का कोई नाम लेवा नहीं बचा, फ़िरोन, यज़ीद का कोई वली वारिस नहीं बचा वैसे ही तुम्हारा भी नहीं बचेगा।

वह रे, नसरानी गुलामों अब किसान भी हुए हमारे तुम्हारे

अज़ीज़ नाज़रीन,

अभी तक तो सिर्फ अवाम ही दो हिस्सों में तक़सीम था हिन्दू बनाम मुस्लिम, उसके बाद हर वोह चीज़ दो हिस्सों में तक़सीम हो गई जो हुकूमत से सवाल जवाब करने की हिम्मत जुटा रही थी। जो हुकूमत से सवाल करे वोह गद्दार पाकिस्तानी, टुकड़े टुकड़े गेंगे वगेरा। और जो चाटुकारिता करे लंगूर तलवे चाट कर गंदगी साफ़ करें तो वोह वतन परास्त भारत का वफादार. उसके बाद सब्ज़ी, गाये, बकरा हर वोह चीज़ दो हिस्सों में बट गई जिसको अक्सरियत तबक़े की हमदर्दी हासिल थी, और जिसको अदना समझ कर बे दखल किया जाता रहा वोह दुसरे हिस्से में आ गई।  लेकिन यह क्या बात है की ज़ाफ़रानी अब रिज़्क़, रोटी, हवा पानी को भी दो हिस्सों में बाँट रहें हैं।   हुकूमत से जो सवाल करें वोह हमारा नहीं तो मुख़ालिफ़ों का है।   

हाल ही में दिल्ली में मरकज़ के सियाह क़ानून के मुखालिफत में किसानों ने एहतेजाज किया तो कट्टर बोलता है की वोह किसान हमारे नहीं हैं वोह मुख़ालिफ़ों के हैं।   अब इन अक़्ल के अंधों को कोई समझाए की किसान किसी मज़हब को देख कर रिज़्क़ नहीं लगाता वोह शेवा तुम्हारा होगा की सब्ज़ी फरोश, फल फरोश से मज़हब और नाम पूछ कर उसको बे ज़र्ब मारा पीटा जाए, किसानों का नहीं होता।

किसान तो रिज़्क़ गेहूं, चावल, बाजरा, मक्का, दाल, दलिया हर इंसान के लिए उगाता है, और काश्त करते वक़्त उसके ज़हन में यह गंदगी होती भी नहीं होगी की हमारे लगाए हुए काश्त से सिर्फ हिन्दू ही फायदा उठायें।   अरे जब फसल पैदा करने वाले ने कोई मज़हब नहीं देखा तो तुम नपुंसक कैसे हर मुद्दे को हमारा तुमहारा में तक़सीम कर रहे हो।   फिर कट्टर से में पूछता हूँ क्या उसके पास जो रोटी आती है उसको यक़ीन है की वोह रोटी उसके ही मुवाकिफ़ किसान के खेतों से लगाए हुए गेहूं से आ रही है।

अब अगर वतन के अन्न दाता भी हमारे तुम्हारे हो गये जो सवाल पूछे वोह मुखालिफ केम्प का और जो हमारी चाटुकारिता करे वोह हामरे ग्रुप का तो फिर में ना सिर्फ कट्टर बल्कि हर बीजेपी वाले से, हर शिद्दत पसंद हिन्दू से, हर संघी काफिर दहशतगर्द से कहूंगा की भारत में उगने वाले रिज़्क़ पर अब तुम्हारा कोई हक़ नहीं है।  क्योंकि तुमको क्या मालूम जो रोटी तुम खा रहे हो वोह मुवाफ़िक़ किसान के खेत की है या मुखालिफ।   फिर अब ऐसे हालात में तुम बाहर से गेहूं मंगा  कर अपने लिए रोटी का इंतज़ाम करो। कट्टर को में ललकारता हूँ अगर वोह एक वालिद की पैदावार है तो मगाये बहार के खेतों में तैयार की गई रोटी जैसे की उसका बाप मोदी भारत के खेतों में तैयार की गई रोटी नहीं खाता है बल्कि जापान और बेरुन मुल्क से मशरूम मगवा कर ख़ाता है।   तो कट्टर साहब भी ऐसा ही करें और अपने एक वालिद के होने का सबूत दें।  

नाज़रीन आज कल हिन्द में नाम तब्दील करने की एक होड़ लगी है, इस ज़िम्न में कल भगवा क़साई हैदराबाद गया और वहां पर बयान दे कर आया की हम हैदराबाद का नाम भाग्यनगर में बदलेगें।  उसको भी चुनौती है चेलेंज, तू हैदराबाद का नाम बदलने की बात करता है पहले अपने माता जी से पूछ कर आ की तू किसकी औलाद है, और अपना नाम बदल।  दूसरी बात पहले जो मुख्तार, शनवाज़ जैसे मुनाफ़िक़ तेरी तंज़ीम में मौजूद हैं और बीजेपी की चाटुकारिता करतें हैं उनके नाम बदल उनकी संतानों के नाम बदल, और सिर्फ ज़ुबानी जमाखर्च नहीं बल्कि हूकूमती दस्तावेज़ के साथ नाम बदल के दिखा।   अगर ऐसा नहीं होता है तो तू भी १० वालिद की कोशिश और मुशक़्क़त का नतीजा समझा जाएगा।   तेरे को १५ दिनों का वक़्त दिया जाता है,  और तेरा वक़्त शुरू होता है अब से १५ दिनों तक के लिए।

इससे पेश्तर अपने कई मज़मूनों और अंग्रेज़ी हिंदी के ख़बरनामों के तब्सिरों में इस बात को मन्ज़रे आम कर चूका हूँ की इंसान जैसे माहौल में रहता है वैसी ही ख़स्लत उसकी होती जाती है।  दूसरी बात जो कही थी की अवाम के ऊपर हाकिमे वक़्त की अय्याशी, बदकारी, हरामख़ोरी, क़त्लो ग़ारत जैसे अमल भी वैसे ही असरात डालतें हैं।  यहाँ पर यह बात वाज़े करता चलूँ की इंसान के ऊपर ३ जमातों के असरात वैसे ही होतें हैं। 

.  रूहानी शख़्सियत, वालियों की सोहबत 

.  दुनयावी इंसान लेकिन आला किरदार, हक़ पसंद इंसानो की सोहबत

.  शैतान दरिंदों ज़ालिम ना इंसाफों की सोहबत.

यहाँ आपको इंसानो की सिफ़त बयान करता हूँ।  पहली होती है वलियों या अल्लाह वालों की सिफ़त, ऐसे इंसानों की सोहबत में बैठने से इंसान के किरदार, अज़्वाजी ज़िन्दगी, लेन देन में ज़बरदस्त तब्दीली आती है।  जो अल्लाह के सच्चे वली होतें हैं गरीब नवाज़, निज़ामुद्दीन ओलिया शाहे मीरा के बारे में मशहूर है की उनकी सूरत को देख कर बदबख़्त ज़ारो क़तार रोने लगता था और अपने गुनाहों पर पशेमान होता था।   अल्लाह के सच्चे वली कभी भी किसी बदबख़्त, बदकार, अय्याश को नमाज़ रोज़े और हक़ की तरग़ीब नहीं करते थे।   लेकिन पहले उसके अंदर पोशीदा कुदूरत, गंदगी, गलाज़त को बहार निकाल कर उसको पाक करते थे फिर जब वोह बंदा बातिनी पाक हो जाता था तो उसको ज़ाहिरी ग़ुसल करने को कहते थे और जब गुलामी में दाखिल हो गया तो उसको हक़ की तरग़ीब करते थे।  लेकिन यहाँ यह बात वाज़े करता चलूँ की यह ज़रूरी नहीं की सिर्फ मुस्लिम ही वली हो सकता है, नहीं, हर वोह इंसान जो वहदहु ला शरीक पर यक़ीन रखता है और एक अल्लाह की इबादत करता है भले ही वोह अल्लाह को किसी भी नाम से पुकारे, वोह वली हो सकता है।  लेकिन अगर वोह नूरे मोहम्मद पर यक़ीन नहीं रखता है तो उसकी विलायत मुक्कमल नहीं होगी।   अगर उसको हक़ीक़ी रौशनी की तलाश है तो उसको नूरे मोहम्मद पर यक़ीन करना होगा।  फिर वोह दुनियां के अंधेरों से उजाले की जानिब आएगा और उस नूर का एहसास करेगा जिसकी तलाश में वोह इधर उधर भटक रहा था। 

उनको हक़ीक़ी रौशनी का एहसास तभी होगा जब वोह नूरे मोहम्मदी पर यक़ीन रखेंगे और इस बात पर कामिल यक़ीन होगा जब कुछ ना था तब भी रब था और जब कुछ ना होगा तब भी रब होगा, और उसी नूर का एक टुकड़ा बना नूरे मोहम्मद। 

दूसरी सिफ़त होती है दुनयावी लोगों की जो दुनियां के कामों में कभी भी हरामकारी नहीं करते जो काम करते हैं ईमानदारी से, हक़ और इन्साफ से, पैसा कमातें हैं वोह भी हक़ और हलाल का, रोज़गार धंधा करेगें तो हलाल।   ऐसे लोगों की सोहबत में बैठने से इंसान में हक़ की कमाई का ज़ौक़ पैदा होगा।  ऐसे लोग मज़हब और दुनियां को साथ साथ ले कर चलते हैं पस्त इबादत करतें हैं और हक़ हलाल की कमाई खातें हैं।   इनमे बोहोत से पोशीदा वली हो सकतें हैं जो अपने आप को ज़ाहिर नहीं करते जब तक हुकुमे इलाही इनके ऊपर नाफ़िज़ नहीं हो जाता.

तीसरी और इंसान की सबसे अदना सिफ़त होती है शैतान, दरिंदों, ज़ालिमों, हक़ तल्फ़ों, नाइंसाफों, क़ातिलों वाली सिफ़त।   अब ऐसे इंसान रेहमान पर यक़ीन नहीं रखतें हैं बरक्स शैतान ही इनका वाली और हाकिम होता है।  ऐसे इंसान हर काम झूट, फरेब, धोख़ेबाज़ी, अय्याशी, हरामख़ोरी, ख़ौफ़ और दहशत मचा कर करना चाहतें हैं।  अल गरज़ ऐसे लोगों का हर काम गुनाहों वाला होता है।  यहाँ तक की ऐसे  फरेबी और झूठे दग़ाबाज़ लोग हर काम में अपना नफा देखतें हैं वतन की मोहब्बत से ले कर तो धर्म खतरे में हैं, हर काम को करने के पीछे इन लोगों की पोशीदा अपना नफ़ा करने की हिकमत होती है। 

नाज़रीन आप लोगों को इंसान की सिफ़त बयान कर दी अब आप खुद अपने आप का महज़बा करें की आप किस किस्म के लोगों में उठते बैठते हैं और उसके मुज़िर असरात आप पर, आपकी अज़वाजी  ज़िन्दगी और नस्लों पर क्या पड़ रहें हैं।  आज कल जो हालात से हिन्द का अवाम गुज़र रहा है,  उसकी वाहिद वजह हाकिम की हराम खोरी, अय्याशी, ख़ुदग़र्ज़ी, झूट, फरेब, धोख़ा, क़त्ल, दहशतगर्दी, वतन के असासे बेचने की हिकमत है। 

नाज़रीन इससे पहले वाले मज़मून में भी बोल चूका हूँ की हर बीजेपी वाला, हर शिद्दत पसंद, हर संघी और हर उनका मुवाफ़िक़ ज़न्खा होता है।  और बिल फ़र्ज़ कोई मर्द इन लोगों में पहुंच गया तो उसको भी अपने जैसा हिजड़ा बना देतें हैं।   इसके पीछे की इनकी हिकमत वही होती है की जो टॉप लेवल पर बैठा हुआ इंसान हैं उसको हर खुशी फ़राहम की जाए, यहाँ तक की यह लोग गुलामी के इस क़दर आदी हो जातें हैं की इनके घरों की मस्तूरातों को इनके सामने से आ कर ले जाया जाता है लेकिन इन लोगों में प्रतिकार की ताक़त और क़ुव्वत नहीं बचती है।  

जो ज़हर की काश्त यह बीजेपी वालों ने की है, उसके बोहोत ही मुज़िर और भयानक असरात अवाम पर नुमाया हुए हैं।   इनकी वतन परस्ती, फौज की हमदर्दी, हुकूमत की गुलामी, मोदी भक्ति का ज़हर जो अवाम में भरा जा रहा था उससे इन लोगों की सोचने समझने की ताक़त और क़ुव्वत को छीन लिया है।  जिससे इन लोगों में नपुंसकता आ गई है,  और यह महज़ इस सहाफी का दिमागी फुतूर नहीं है बल्कि तिब्बी महेरीनों ने इस बात की तस्दीक़ की है की भारत में तब्दील हुई हवा और ज़हर की वजह से अवाम में सख्त तरीन मुज़िर असरात देखे जा रहें हैं, मर्दों में नपुंसकता बढ़ रही है, मस्तूरातों में बाँझ पन बढ़ रहा है,  हार्ट अटैक, कैंसर, जैसी मुज़िर बीमारियां तेज़ी से भारत की जानिब बढ़ कर अपना घर बना चुकी हैं।आज के हलाते हाजरा में अवामे हिन्द सख़्त तरीन दिमाग़ी दबाओ (डिप्रेशन) का शिकार हैं।    

इन्ही सभी बातों पर पर्दा पड़ा रहें उसकी वजह से गुलामे नसरानी ज़ाफ़रानी हर उस झूट, और फरेबी मुद्दे का ज़हर और ड्रग का एक्स्ट्रा डोज़ अवाम के ज़हन में डालते रहतें हैं जिससे अवाम का भला तो हरगिज़ ना होता है ब्लकि उनका ज़हन फील वक़्त थोड़ा हल्का महसूस करता है।  और ऐसे झूठें फरेबी इलज़ाम कभी भी सच्चे साबित नहीं हुए।  

  लव जिहाद

  मदरसों में दहशतगर्दी की तालीम

  हर मुस्लिम गद्दार या पाकिस्तानी

  ट्रिपल तलाक़

  बाबरी मस्जिद

  कश्मीर

  इस्लाम, क़ुरान और मोहम्मद सल्लम पर हमला.

नाज़रीन जिस बात का ज़िक्र यह सहाफी हर बार अपने मज़मूनों में करता था और जो हिन्द के हालात देख रहा था जब यह हिन्द का अवाम सख़्त नशे का आदी हो कर मोदी मोदी मोदी के नारे लगाता था और अगर किसी शख्स ने उससे मोदी के बारे में कुछ भी बूरा बोल दिया तो उसको क़तल कर डालते थे उसी वक़्त बोला था की अवाम के अंदर साजिश के जारिए हिन्दू मुस्लिम के इस ज़हर को पेवस्त किया जा रहा है और वतन परस्ती के फरेब में अपना गुलाम बनाया जा रहा है।  और वजह सिर्फ एक है हमारे खिलाफ कोई बगावत ना कर सके और हमसे हमारी हरामकारी पर सवाल ना पूछ सके।  इस ज़हर के असरात अवाम के ऊपर भयानक होंगे और जब इस ज़हर और सेहर का नशा उतरेगा तब अवाम को सिवाए पछताने के अलावा कुछ ना होगा।   और अब वही कैफियत आ चुकी है। आज भारत के अवाम के पास सिवाए पछताने और हाथ मलने के अलावा कुछ ना रहा

वतन परस्ती का अज़्म भरने वाली ज़ाफ़रानी तंज़ीम और उसके रहबर ने तक़रीबन भारत की हर असासे को बेच डाला, हवाई जहाज़ से ले कर तो लाइफ इन्शुरन्स तक, भारत की तमाम हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम काम करने वाली कम्पनिया रेलवे, बैंक, बेच दी।   भारत का फख्र और तहज़ीब लाल क़िला बेचा फिरंगी ताजिर को और जहाँ तक इस सहाफी की तहक़ीक़ात है ताज बेचा पाकिस्तान को।  अब ताज से होने वाली ८० फीसद इनकम जाएगी पाक को और २० फीसद रहेगी भारत के खाते में उस २० फीसद में उस की रख रखाव की ज़िम्मेदारी भी पूरी भारत की होगी।   अगर कोई भी शिकायत रख रखाव की निस्बत से या बदइंतज़ामी की निस्बत से होती है तो पाक की सिक्योरिटी एजेंसी उसको भी अपने हाथों में ले लेंगे।   यह सब कारगरदेगी उसी ज़हर का नतीजा है जो ताज को ताजो महल तस्लीम करते थे, और एक शिद्दत पसंद पूजा करने गया था।  एतेराज़ वही था जब नमाज़ हो सकती है तो पूजा काहे को नहीं, अब कर लो जो करना है।  आलमी फौजे मौजूद है ताज के चारो जानिब।  तुम लोगों की शिद्दत पसंदी से तुम्हारा ही नुकसान हुआ फायदा पाक को हुआ।  जम्मू कश्मीर और ताज पाक के खाते गया।   

कुल मिला कर इस बात को कहने में मुझे ज़रा सा भी गुरेज़ नहीं की झूट, फरेब, इलज़ाम लगाना और भोंकना तो ज़न्खो कुत्तों की आदत होती है लेकिन असली मर्द वोह जो इलज़ाम साबित करे और असली वफादार कुत्ता वोह जो चोर को घर में दाखिल ना होने दे।  वैसे हाथी जब बाजार जाता है तो ऐसे हज़ारों गली के कुत्ते भोंकते हैं लेकिन उनको कोई भी समझदार शहरी अपने घर में हिफाज़त के लिए नहीं रखता और आज हम भारत के अवाम इतने तालीमी आफ्ता और समझदार हैं की कुत्ते की नस्ल ना पहचान सके जो भोंकते हैं वोह वफादार नहीं होते और हमने ऐसे भोंकने वालों के हवाले मुल्क की हिफ़ज़ात की ज़िम्मेदारी दे दी।   

Wednesday, 25 November 2020

India is in trouble to spread State policy of terrorism in Pakistan.

AUTONOMOUS JOURNALIST

India is in trouble to spread State policy of terrorism in Pakistan.

https://autojourna.wordpress.com/2020/11/25/india-is-in-trouble-to-spread-state-policy-of-terrorism-in-pakistan/ via @journalistzuber

तुम्हारे गुनाहों का कफ़्फ़ारा अवाम क्यों भरे।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज जिस मुद्दे पर आप लोगों के रू बरू आया हूँ वह, हरामकारी और ज़िना से पैदा हुई औलाद से मुतालिक़ है।  अभी तीन रोज़ क़ब्ल एक मज़मून में यही बात कही थी, हराम और ज़िना से पैदा हुई औलाद हरामी होती है, उसको भले ही नाम मिल जाए शोहरत मिल जाए लेकिन अल्लाह और उसके फरिश्तों की लानत उसके पीछे पीछे रहती है। अब ऐसा शख्स जहाँ जाता है अपने पीछे तबाही और बर्बादी के निशान छोड़ जाता है।   दर असल वह नहीं बल्कि उसके जाने के बाद उसके गुनाहों और बदकारी हरामकारी का कफ़्फ़ारा अवाम को भोगना पड़ता है। 

यह बात बीजेपी के तमाम सियासतदानों, उसके मुवाफ़िक़ों, संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम पर सो फि सद लागू होती है, के तक़रीबन यह तमाम लोग ज़न्खे होते हैं (नपुंसक) इनके अंदर क़ुव्वते जिस्मानी, नहीं होती और यह लोग दिमागी मुफ़लिस होते हैं।  इन ज़नख़ों कमज़ोर आदमियों और दिमागी मुफ़लिसों में वह मुस्लिम भी आ गए जो बीजेपी से मुनसलिक हैं। इन बीजेपी, शिद्दत पसंद और संघी दहशतगर्दों की पैदाइश ही उसी तर्ज़े अमल पर होती है जिसका दर्स इनका मज़हब देता है। 

ऐसी पैदाइश और नस्ल का ज़िक्र इस सहाफी ने अपने गुजिश्ता मज़मून में किया है।   ऐसे अफ़राद और अवाम भले ही बड़े बड़े ओहदों पर फ़ाइज़ हो जाएँ नाम, शोहरत कमा लें लेकिन यह लोग अज़ाबे इलाही और उसके फरिश्तों की लानत का मुर्तक़िब होतें हैं।   यह लोग जहाँ जातें हैं बड़ी तादात में तबाही और बर्बादी अपने साथ ले जातें हैं क्योंकि इनके पीछे फरिश्तों की लानत होती है।  इनके मज़हबी एतेक़ाद के हिसाब से अगर किसी शख़्स में मर्दानगी नहीं है और वह ज़न्खा (नपुंसक) है तो उसकी घरवाली पडोसी, देवर या साधू, संतों से नियोग प्रथा के तहत हमबिस्तर हो कर वंश को आगे बढ़ाने वाला दे सकती है।  उसी हिसाब से अगर शोहर अकाल मौत मारा गया तो भी उसकी बीवी देवर के साथ हमबिस्तर हो कर वंश बड़ा सकती है।   अब ऐसी सूरत में रिश्ता और बच्चा कैसे जाइज़ होगा।  और जब विकास पुरुष ही नपुंसक है तो उसका पैदा किया हुआ विकास भी हरामी होगा।  फिर ऐसा विकास अब जहाँ जाएगा लाएगा तबाही और बर्बादी। क्योंकि उसके पीछे पीछे फरिश्तों और मालिके कायनात की लानत और फटकार भाग रही होगी।  ऐसा शख़्स पनोती बाज़ होता है।  जहाँ जाता है पनोती लाता है। 

नाज़रीन शुरूवात मोदी से ही करतें हैं, जिसका ज़िक्र इससे पेश्तर जब से सहाफत की दुनिया में २०१० से क़दम रखा था कई मज़मूनों हिंदी और अंग्रेज़ी में कर चूका हूँ।  २००१ में मोदी गुजरात का वज़ीरे आला बनाया गया था उसी साल २६ जनवरी को गुजरात में सख़्त तरीन ज़लज़ले से देहल उठा।   उसके बाद २००२ में हिन्दू दहशत की साबरमती ट्रैन में आतिशबाज़ी और मुस्लिम नस्लकुशी।  उसके बाद २००५ में गुजरात में बाढ़ जिसमे तमाम गुजरात पानी में डूब गया था जिसमे हज़ारो जाने गई लाखो बेघर हुए वोह अलग बल्कि खरबों रूपये का नुकसान हुआ था। 

उसके बाद भी गुजरात गाहे बा गाहे आसमानी आफत और बाला में मुत्तासिर होता रहा।  फिर मोदी २०१४ में वज़ीरे आज़म मुन्तख़िब हुआ, फिर क्या था, बतौर वज़ीरे आज़म जहाँ गया आफत और बला अपने साथ ले गया।  उसका पहला नेपाल दौरा और वहां से वापिस होते ही नेपाल ज़बरदस्त ज़लज़ले की नज़र हो गया।  

अमेरिका दौरे के बाद वहां जंगल में ज़बरदस्त आग लग गई।  कश्मीर गया वहां तूफ़ान आ गया और बाढ़ से हज़ारों अफ़राद मुत्तासिर हुए।  अल गज़रज हिन्दुस्तान के जिस हिस्से में गया कुछ ना कुछ तबाही और बर्बादी दे कर वापिस लोटा।   फिर २०१९ का तो हाल उससे भी बूरा रहा, जून २०१९ में मुन्तख़िब हो कर आया और नवंबर से ना सिर्फ हिन्दुस्तान बल्कि पूरी दुनिया को तबाही के टिकट दे कर लौटा।  जिस इज़राइल के दौरे पर गया था उसको भी तबाह कर डाला। 

अब बात करतें हैं उसके नौकर अमित शाह की जो एक दरिंदा सिफ़त, शैतान, खुनी, दहशतगर्द, ना जाइज़ औलाद, जल्लाद है। अभी हाल ही में वह वेस्ट बंगाल और तमिल नाडु गया था फिर क्या है तमिल नाडु और वेस्ट बंगाल भी हो गया तबाही और तूफ़ान की नज़र। 

दर-असल इन लोगों के ऊपर ख़ुदा ऐ ज़ुलजलाल की दोहरी मार है।  एक तो इनका नुत्फा जाइज़ नहीं है दूसरा इनकी बदकारियों, बदआमालियों, हरामख़ोरी , नाइंसाफी, दहशत, क़त्ल, ज़िना बिल जब्र जैसे गुनाहों की लानत और फटकार इनके पीछे पीछे भागती है। हमारे मआशरे में एक कहावत कहतें हैं एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा।  करेला वैसे ही कड़वा होता है ऊपर से उसकी बैल को अगर नीम के झाड़ के सहारे ऊपर चढ़ा दी, तो फिर करेले के ज़ायक़े का क्या आलम होगा।  वही हालत इन तमाम ज़ाफ़रानियों, संघियों, बीजेपी वालों के साथ है एक तो इनकी पैदाइश में ही गडबढ़ है, दूसरा इनकी बदबख्ती और गुनाहों का बोझ।  

नाज़रीन अमित शाह अभी तीन रोज़ पहले वेस्ट बंगाल और तमिल नाडु का दौरा याद होगाअभी वह नामुराद दरिंदा डाकू वेस्ट बंगाल और तमिल नाडु से वापिस भी नहीं हुआ था के तूफ़ान के बादल गहरा गए, आज तीन रोज़ बाद तमिलनाडु तूफ़ान की ज़द में आ गया।  

नाज़रीन यह महज़ इत्तिफ़ाक़ नहीं है, बल्कि इस सहाफी ने हर एक संघी, ग़द्दार, गले लग कर सर क़लम करने वाले दरिंदे, मीठा मीठा बोल कर अक़लियतों के वोट ले कर उनको हलाक करने वालों का क़दम बा क़दम हिसाब रखा है की कब किस गद्दार, संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू,दहशतगर्द के गुनाहों का कफ़्फ़ारा और हिसाब अवाम को देना पड़ा।   नितीश कुमार पिछली राये शुमारी में सेक्युलर महाज़ से मुन्तख़िब हो कर आया था, फिर उसने गद्दारी कर के ज़ाफ़रानी महाज़ का दमान थाम लिया। उसके बाद शुरू हुई बिहार में ज़बरदस्त बारिश और तूफ़ान आया था, जिसका ज़िक्र कई अंग्रेजी, हिंदी मज़मूनों और आज तक, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स (अंग्रेज़ी) के खबरनामों में इस सहाफी ने अपना तब्सिरा दिया है। 

उसके बाद आज़ादी के बाद पहली बार ज़ाफ़रानी पार्टी आसाम में आई और तारिख़ की सबसे ज़्यादा ज़बर्दस्त बाढ़ उस साल आई थी पिछले २०० साल का रिकॉर्ड असम का टूटा था और १५० साल का बिहार में नितीश की गद्दार के बाद टूटा था। 

यही हाल अब दहशतगर्द, आतंकवादी, शैतान, दरिंदा, कसाई अमित की तमिलनाडु और वेस्ट बंगाल की दौरे के बाद तबाही हुई।  जैसा की मेने कहा है यह उमूमन देखा गया है की संघियों और इस कसाई अमित का बिल्कुल रिकॉर्ड ठीक नहीं है।  जिस किसी भी जगह वोह जाता है तूफ़ान, बाढ़ या कोई और मुख़तलिफ़ कुदरती आफत उस जगह को तबाह और बर्बाद कर देती है। जून २०१८ के महीने में उसके पहले केरल दौरे ने उस सूबे को तबाह और बर्बाद कर दिया था।   क्योंकि वह वहां दहशत फैलाने, हिन्दू मुस्लिम करने, नफरत और ज़हर के बीज बोने, फ़िरक़ा परस्ती का शैतानी जगा कर हिन्दू वोट की यकजेहदी करने गया था।  उसको संघ या हिन्दू अवाम से कुछ मतलब नहीं था बल्कि वह अपनी वोट बैंक की सियसत और हिन्दू तस्कीन (तुष्टिगुण) के लिए गया था।  उसने संघी दहशतगर्दों के क़त्ल पर रोड शो किया और हुकूमत को उसका ज़िम्मेदार ठराया था जिसका सीधा फैयदा वोह इंतेखाब में लेना चाहता था।  उसकी इस हरामकारी और केरला से लौटने के बाद फ़ौरन वहाँ पर अगस्त २०१८ के महीने में मूसलाधार बारिश हुई जिसमें कम से कम १५०० अफ़राद जाहांबाक हो गए। केरल ने कभी एक सदी में इतनी भारी बाढ़ और बारिश नहीं देखी थी। अवाम ने मस्जिदों में पनाह (शरण) ली और मुसलमानों ने उन्हें ख़ाना और माशी इमदाद की। भारी बारिश के वजह से ज़्यादातर मंदिर ज़मींदोज़ हो गए। उस वक़्त भी इस सहाफी ने अपने कई हिंदी और अंग्रेज़ी मज़मूनों में जिसका ज़िक्र किया था कि इस भारी से बहुत भारी बारिश की वजह कसाई का केरल दौरा है और उसके मनहूस क़दम की वजह से केरल आज तबाह हो गया।  क्योंकि दरिंदे ने केरला के हिंदू मुस्लिम ख़ुलूस और मोहब्बत को मारने की कोशिश है। संघी ख़ास बोलीवूड की नचौड़ी ने इस बारिश की वजह ख़ालिस गाय के क़तल को बताया था। मैंने उन तमाम एहमकों, ज़ेहनी मरीज़ों और मुफ़लिसों को जवाब में कहा की गाये का जबीहा केरला में सदियों से होता आ रहा है यहाँ तक की जब केरल में ६०० ईस्वी इस्लाम आया था उससे पहले भी गाये का जबीहा होता था।   लेकिन एक सदी में कभी इतनी भारी तूफ़ान और बारिश नहीं हुई और जून २०१८ में अमित शाह केरला में फ़िर्क़ापरस्ती के ज़हरीले बीज बो कर आया और अगस्त २०१८ में भारी बारिश हुई।   तो तुम लोगों का गाये के ज़बीहे का फलसफा ज़्यादा पुख़्ता लगता है या इस सहाफी का; की अमित की बदबख्ती, गुनाहों, बदकारी का कफ़्फ़ारा केरल का अवाम भोग रहा है।

इस तमाम मज़मून और तहक़ीक़ात से साबित होता है की संघी, बीजेपी वाले, कट्टरपंथी हिन्दू अपने वाल्दैन की जाइज़ औलादें नहीं हो सकते, फिर यह लोग नपुंसक भी होते हैं, सिर्फ ताली बजाना और घोगरी आवाज़ में चीखना और चिल्लाना ही आता है। जब इनसे किसी भी भोंकने के ऊपर सबूत मांगो तो जैसा साधू करता है इधर उधर की बातों से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं।  भारत में तबाही और बर्बादी मचा कर मालिके मुतलक़ ने इन संघियों, बीजेपी वालों, शिद्दत पसंद हिन्दू नाजाइज़ पैदावार हैं इसका सबूत दे दिया है।  

इनके नपुंसक होने का सबूत खुद इन लोगों ने दे दिया जब इन्होने हैदराबाद में ३०००० रोहंगिया मुस्लिम वोटर लिस्ट में ना जाइज़ तरीकेकार हिकमत इख़्तेयार कर के शामिल हो गए हैंऐसा उल जलूल झूठा बयान दिया, उसके ऊपर असदुद्दीन ने इनको ललकारा की शाम तक ३०००० तो छोड़ो १००० भी ऐसे वोटर ला कर बताओ।  

मेने मेरे कल लिखे माज़ून में कहा था अब अगर यह लोग मर्द होंगे तो सबूत ला कर देंगे, नहीं तो साबित होगा की यह सब अमित को मिला कर ना मर्द हैं।   शाम हो गई ख़तम और अभी तक सबूत हाज़िर नहीं हुआ।   मतलब साबित हुआ की तमाम बीजेपी के कारिंदे, संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू अमित को मिला कर ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ ना मर्द हैंसिर्फ भोंकना और इलज़ाम लगाना जानतें हैं उसको साबित करना नहीं.

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...