अज़ीज़ नाज़रीन,
अभी तक तो सिर्फ अवाम ही दो हिस्सों में तक़सीम था हिन्दू बनाम
मुस्लिम,
उसके बाद हर वोह चीज़ दो हिस्सों में तक़सीम हो गई जो हुकूमत से
सवाल जवाब करने की हिम्मत जुटा रही थी। जो हुकूमत से सवाल करे वोह गद्दार पाकिस्तानी, टुकड़े टुकड़े गेंगे वगेरा। और जो चाटुकारिता करे लंगूर तलवे चाट कर गंदगी साफ़ करें तो वोह वतन परास्त भारत का वफादार. उसके बाद सब्ज़ी, गाये,
बकरा हर वोह चीज़ दो हिस्सों में बट गई जिसको अक्सरियत तबक़े की
हमदर्दी हासिल थी, और जिसको अदना समझ कर बे दखल किया जाता रहा वोह दुसरे हिस्से में आ गई। लेकिन यह क्या बात है की ज़ाफ़रानी अब रिज़्क़,
रोटी, हवा पानी को भी दो हिस्सों में बाँट रहें हैं। हुकूमत से जो सवाल करें वोह हमारा नहीं तो मुख़ालिफ़ों
का है।
हाल ही में दिल्ली में मरकज़ के सियाह क़ानून के मुखालिफत में
किसानों ने एहतेजाज किया तो कट्टर बोलता है की वोह किसान हमारे नहीं हैं वोह मुख़ालिफ़ों
के हैं। अब इन अक़्ल के अंधों को कोई समझाए
की किसान किसी मज़हब को देख कर रिज़्क़ नहीं लगाता वोह शेवा तुम्हारा होगा की सब्ज़ी फरोश,
फल फरोश से मज़हब और नाम पूछ कर उसको बे ज़र्ब मारा पीटा जाए,
किसानों का नहीं होता।
किसान तो रिज़्क़ गेहूं, चावल, बाजरा, मक्का, दाल, दलिया हर इंसान के लिए उगाता है, और काश्त करते वक़्त उसके ज़हन में यह गंदगी होती भी नहीं होगी
की हमारे लगाए हुए काश्त से सिर्फ हिन्दू ही फायदा उठायें। अरे जब फसल पैदा करने वाले ने कोई मज़हब नहीं देखा
तो तुम नपुंसक कैसे हर मुद्दे को हमारा तुमहारा में तक़सीम कर रहे हो। फिर कट्टर से में पूछता हूँ क्या उसके पास जो रोटी
आती है उसको यक़ीन है की वोह रोटी उसके ही मुवाकिफ़ किसान के खेतों से लगाए हुए गेहूं
से आ रही है।
अब अगर वतन के अन्न दाता भी हमारे तुम्हारे हो गये जो सवाल पूछे
वोह मुखालिफ केम्प का और जो हमारी चाटुकारिता करे वोह हामरे ग्रुप का तो फिर में ना
सिर्फ कट्टर बल्कि हर बीजेपी वाले से, हर शिद्दत पसंद हिन्दू से, हर संघी काफिर दहशतगर्द से कहूंगा की भारत में उगने वाले रिज़्क़
पर अब तुम्हारा कोई हक़ नहीं है। क्योंकि तुमको
क्या मालूम जो रोटी तुम खा रहे हो वोह मुवाफ़िक़ किसान के खेत की है या मुखालिफ। फिर अब ऐसे हालात में तुम बाहर से गेहूं मंगा कर अपने लिए रोटी का इंतज़ाम करो। कट्टर को में ललकारता हूँ अगर वोह एक वालिद की
पैदावार है तो मगाये बहार के खेतों में तैयार की गई रोटी जैसे की उसका बाप मोदी भारत
के खेतों में तैयार की गई रोटी नहीं खाता है बल्कि जापान और बेरुन मुल्क से मशरूम मगवा
कर ख़ाता है। तो कट्टर साहब भी ऐसा ही करें
और अपने एक वालिद के होने का सबूत दें।
नाज़रीन आज कल हिन्द में नाम तब्दील करने की एक होड़ लगी है,
इस ज़िम्न में कल भगवा क़साई हैदराबाद गया और वहां पर बयान दे
कर आया की हम हैदराबाद का नाम भाग्यनगर में बदलेगें। उसको भी चुनौती है चेलेंज,
तू हैदराबाद का नाम बदलने की बात करता है पहले अपने माता जी
से पूछ कर आ की तू किसकी औलाद है, और अपना नाम बदल। दूसरी
बात पहले जो मुख्तार, शनवाज़ जैसे मुनाफ़िक़ तेरी तंज़ीम में मौजूद हैं और बीजेपी की चाटुकारिता करतें हैं उनके
नाम बदल उनकी संतानों के नाम बदल, और सिर्फ ज़ुबानी जमाखर्च नहीं बल्कि हूकूमती दस्तावेज़ के साथ
नाम बदल के दिखा। अगर ऐसा नहीं होता है तो
तू भी १० वालिद की कोशिश और मुशक़्क़त का नतीजा समझा जाएगा। तेरे को १५ दिनों का वक़्त दिया जाता है, और तेरा
वक़्त शुरू होता है अब से १५ दिनों तक के लिए।
इससे पेश्तर अपने कई मज़मूनों और अंग्रेज़ी हिंदी के ख़बरनामों
के तब्सिरों में इस बात को मन्ज़रे आम कर चूका हूँ की इंसान जैसे माहौल में रहता है
वैसी ही ख़स्लत उसकी होती जाती है। दूसरी बात
जो कही थी की अवाम के ऊपर हाकिमे वक़्त की अय्याशी, बदकारी, हरामख़ोरी, क़त्लो ग़ारत जैसे अमल भी वैसे ही असरात डालतें हैं। यहाँ पर यह बात वाज़े करता चलूँ की इंसान के ऊपर
३ जमातों के असरात वैसे ही होतें हैं।
१. रूहानी शख़्सियत,
वालियों की सोहबत
२. दुनयावी इंसान लेकिन आला किरदार,
हक़ पसंद इंसानो की सोहबत
३. शैतान दरिंदों ज़ालिम ना इंसाफों की सोहबत.
यहाँ आपको इंसानो की सिफ़त बयान करता हूँ। पहली होती है वलियों या अल्लाह वालों की सिफ़त,
ऐसे इंसानों की सोहबत में बैठने से इंसान के किरदार,
अज़्वाजी ज़िन्दगी, लेन देन में ज़बरदस्त तब्दीली आती है। जो अल्लाह के सच्चे वली होतें हैं गरीब नवाज़,
निज़ामुद्दीन ओलिया शाहे मीरा के बारे में मशहूर है की उनकी सूरत
को देख कर बदबख़्त ज़ारो क़तार रोने लगता था और अपने गुनाहों पर पशेमान होता था। अल्लाह के सच्चे वली कभी भी किसी बदबख़्त,
बदकार, अय्याश को नमाज़ रोज़े और हक़ की तरग़ीब नहीं करते थे। लेकिन पहले उसके अंदर पोशीदा कुदूरत,
गंदगी, गलाज़त को बहार निकाल कर उसको पाक करते थे फिर जब वोह बंदा बातिनी
पाक हो जाता था तो उसको ज़ाहिरी ग़ुसल करने को कहते थे और जब गुलामी में दाखिल हो गया
तो उसको हक़ की तरग़ीब करते थे। लेकिन यहाँ यह बात वाज़े करता चलूँ की यह ज़रूरी नहीं की सिर्फ
मुस्लिम ही वली हो सकता है, नहीं, हर वोह इंसान जो वहदहु ला शरीक पर यक़ीन रखता है और एक अल्लाह की इबादत करता
है भले ही वोह अल्लाह को किसी भी नाम से पुकारे, वोह वली हो सकता
है। लेकिन अगर वोह नूरे मोहम्मद पर यक़ीन नहीं
रखता है तो उसकी विलायत मुक्कमल नहीं होगी।
अगर उसको हक़ीक़ी रौशनी की तलाश है तो उसको नूरे मोहम्मद पर यक़ीन करना होगा। फिर वोह दुनियां के अंधेरों से उजाले की जानिब आएगा
और उस नूर का एहसास करेगा जिसकी तलाश में वोह इधर उधर भटक रहा था।
उनको हक़ीक़ी रौशनी का एहसास तभी होगा जब वोह नूरे मोहम्मदी पर
यक़ीन रखेंगे और इस बात पर कामिल यक़ीन होगा जब कुछ ना था तब भी रब था और जब कुछ ना होगा
तब भी रब होगा, और उसी
नूर का एक टुकड़ा बना नूरे मोहम्मद।
दूसरी सिफ़त होती है दुनयावी लोगों की जो दुनियां के कामों में
कभी भी हरामकारी नहीं करते जो काम करते हैं ईमानदारी से, हक़ और इन्साफ से,
पैसा कमातें हैं वोह भी हक़ और हलाल का,
रोज़गार धंधा करेगें तो हलाल। ऐसे लोगों की सोहबत में बैठने से इंसान में हक़
की कमाई का ज़ौक़ पैदा होगा। ऐसे लोग मज़हब और
दुनियां को साथ साथ ले कर चलते हैं पस्त इबादत करतें हैं और हक़ हलाल की कमाई खातें
हैं। इनमे बोहोत से पोशीदा वली हो सकतें हैं
जो अपने आप को ज़ाहिर नहीं करते जब तक हुकुमे इलाही इनके ऊपर नाफ़िज़ नहीं हो जाता.
तीसरी और इंसान की सबसे अदना सिफ़त होती है शैतान,
दरिंदों, ज़ालिमों, हक़ तल्फ़ों, नाइंसाफों, क़ातिलों वाली सिफ़त।
अब ऐसे इंसान रेहमान पर यक़ीन नहीं रखतें हैं बरक्स शैतान ही इनका वाली और हाकिम
होता है। ऐसे इंसान हर काम झूट,
फरेब, धोख़ेबाज़ी, अय्याशी, हरामख़ोरी, ख़ौफ़ और दहशत मचा कर करना चाहतें हैं। अल गरज़ ऐसे लोगों का हर काम गुनाहों वाला होता है। यहाँ तक की ऐसे फरेबी और झूठे दग़ाबाज़ लोग हर काम में अपना नफा देखतें
हैं वतन की मोहब्बत से ले कर तो धर्म खतरे में हैं, हर काम को करने के पीछे इन लोगों की पोशीदा अपना नफ़ा करने की
हिकमत होती है।
नाज़रीन आप लोगों को इंसान की सिफ़त बयान कर दी अब आप खुद अपने
आप का महज़बा करें की आप किस किस्म के लोगों में उठते बैठते हैं और उसके मुज़िर असरात
आप पर,
आपकी अज़वाजी ज़िन्दगी
और नस्लों पर क्या पड़ रहें हैं। आज कल जो हालात
से हिन्द का अवाम गुज़र रहा है, उसकी वाहिद वजह हाकिम की हराम खोरी,
अय्याशी, ख़ुदग़र्ज़ी, झूट, फरेब,
धोख़ा, क़त्ल, दहशतगर्दी, वतन के असासे बेचने की हिकमत है।
नाज़रीन इससे पहले वाले मज़मून में भी बोल चूका हूँ की हर बीजेपी
वाला,
हर शिद्दत पसंद, हर संघी और हर उनका मुवाफ़िक़ ज़न्खा होता है। और बिल फ़र्ज़ कोई मर्द इन लोगों में पहुंच गया तो
उसको भी अपने जैसा हिजड़ा बना देतें हैं। इसके
पीछे की इनकी हिकमत वही होती है की जो टॉप लेवल पर बैठा हुआ इंसान हैं उसको हर खुशी
फ़राहम की जाए, यहाँ
तक की यह लोग गुलामी के इस क़दर आदी हो जातें हैं की इनके घरों की मस्तूरातों को इनके
सामने से आ कर ले जाया जाता है लेकिन इन लोगों में प्रतिकार की ताक़त और क़ुव्वत नहीं
बचती है।
जो ज़हर की काश्त यह बीजेपी वालों ने की है, उसके बोहोत ही मुज़िर और भयानक असरात अवाम पर
नुमाया हुए हैं। इनकी वतन परस्ती,
फौज की हमदर्दी, हुकूमत की गुलामी, मोदी भक्ति का ज़हर जो अवाम में भरा जा रहा था उससे इन लोगों
की सोचने समझने की ताक़त और क़ुव्वत को छीन लिया है। जिससे इन लोगों में नपुंसकता आ गई है, और यह
महज़ इस सहाफी का दिमागी फुतूर नहीं है बल्कि तिब्बी महेरीनों ने इस बात की तस्दीक़ की
है की भारत में तब्दील हुई हवा और ज़हर की वजह से अवाम में सख्त तरीन मुज़िर असरात देखे
जा रहें हैं, मर्दों
में नपुंसकता बढ़ रही है, मस्तूरातों में बाँझ पन बढ़ रहा है, हार्ट
अटैक,
कैंसर, जैसी मुज़िर बीमारियां तेज़ी से भारत की जानिब बढ़ कर अपना घर बना
चुकी हैं।आज के हलाते हाजरा में अवामे हिन्द
सख़्त तरीन दिमाग़ी दबाओ (डिप्रेशन) का शिकार हैं।
इन्ही सभी बातों पर पर्दा पड़ा रहें उसकी वजह से गुलामे नसरानी
ज़ाफ़रानी हर उस झूट, और फरेबी मुद्दे का ज़हर और ड्रग का एक्स्ट्रा डोज़ अवाम के ज़हन में डालते रहतें
हैं जिससे अवाम का भला तो हरगिज़ ना होता है ब्लकि उनका ज़हन फील वक़्त थोड़ा हल्का महसूस
करता है। और ऐसे झूठें फरेबी इलज़ाम कभी भी
सच्चे साबित नहीं हुए।
१ लव जिहाद
२ मदरसों
में दहशतगर्दी की तालीम
३ हर मुस्लिम
गद्दार या पाकिस्तानी
४ ट्रिपल
तलाक़
५ बाबरी
मस्जिद
६ कश्मीर
७ इस्लाम,
क़ुरान और मोहम्मद सल्लम पर हमला.
नाज़रीन जिस बात का ज़िक्र यह सहाफी हर बार अपने मज़मूनों में करता
था और जो हिन्द के हालात देख रहा था जब यह हिन्द का अवाम सख़्त नशे का आदी हो कर मोदी
मोदी मोदी के नारे लगाता था और अगर किसी शख्स ने उससे मोदी के बारे में कुछ भी बूरा
बोल दिया तो उसको क़तल कर डालते थे उसी वक़्त बोला था की अवाम के अंदर साजिश के जारिए
हिन्दू मुस्लिम के इस ज़हर को पेवस्त किया जा रहा है और वतन परस्ती के फरेब में अपना
गुलाम बनाया जा रहा है। और वजह सिर्फ एक है हमारे खिलाफ कोई बगावत ना कर सके और हमसे हमारी हरामकारी पर सवाल ना पूछ सके। इस ज़हर के असरात अवाम
के ऊपर भयानक होंगे और जब इस ज़हर और सेहर का नशा उतरेगा तब अवाम को सिवाए पछताने के
अलावा कुछ ना होगा। और अब वही कैफियत आ चुकी
है। आज भारत के अवाम के पास सिवाए पछताने और हाथ मलने के अलावा कुछ ना रहा.
वतन परस्ती का अज़्म भरने वाली ज़ाफ़रानी तंज़ीम और उसके रहबर ने
तक़रीबन भारत की हर असासे को बेच डाला, हवाई जहाज़ से ले कर तो लाइफ इन्शुरन्स तक,
भारत की तमाम हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम काम करने वाली कम्पनिया
रेलवे,
बैंक, बेच
दी। भारत का फख्र और तहज़ीब लाल क़िला बेचा
फिरंगी ताजिर को और जहाँ तक इस सहाफी की तहक़ीक़ात है ताज बेचा पाकिस्तान को। अब ताज से होने वाली ८० फीसद इनकम जाएगी पाक को और
२० फीसद रहेगी भारत के खाते में उस २० फीसद में उस की रख रखाव की ज़िम्मेदारी भी पूरी
भारत की होगी। अगर कोई भी शिकायत रख रखाव
की निस्बत से या बदइंतज़ामी की निस्बत से होती है तो पाक की सिक्योरिटी एजेंसी उसको
भी अपने हाथों में ले लेंगे। यह सब कारगरदेगी
उसी ज़हर का नतीजा है जो ताज को ताजो महल तस्लीम करते थे,
और एक शिद्दत पसंद पूजा करने गया था। एतेराज़ वही था जब नमाज़ हो सकती है तो पूजा काहे
को नहीं,
अब कर लो जो करना है।
आलमी फौजे मौजूद है ताज के चारो जानिब।
तुम लोगों की शिद्दत पसंदी से तुम्हारा ही नुकसान हुआ फायदा पाक को हुआ। जम्मू कश्मीर और ताज पाक के खाते गया।
कुल मिला कर इस बात को कहने में मुझे ज़रा सा भी गुरेज़ नहीं की
झूट,
फरेब, इलज़ाम लगाना और भोंकना तो ज़न्खो कुत्तों की आदत होती है लेकिन
असली मर्द वोह जो इलज़ाम साबित करे और असली वफादार कुत्ता वोह जो चोर को घर में दाखिल
ना होने दे। वैसे हाथी जब बाजार जाता है तो
ऐसे हज़ारों गली के कुत्ते भोंकते हैं लेकिन उनको कोई भी समझदार शहरी अपने घर में हिफाज़त
के लिए नहीं रखता और आज हम भारत के अवाम इतने तालीमी आफ्ता और समझदार हैं की कुत्ते
की नस्ल ना पहचान सके जो भोंकते हैं वोह वफादार नहीं होते और हमने ऐसे भोंकने वालों
के हवाले मुल्क की हिफ़ज़ात की ज़िम्मेदारी दे दी।