Thursday, 3 December 2020

ज़ाफ़रानी दहशत के लिए २०२१ सख़्त बोहोत सख़्त

तूने जो फेंका कीचड वलियों पर,

लौट के आया तेरे अपनों पर।

तूने जो थूका चाँद पर

दे गया दाग़ तेरे रुख़सार पर।


सहाफी जुबेर 

अज़ीज़ाने मिल्लते इस्लामियां और तमाम खुश दिल, खुले ज़हन के अवाम,

यह खबर बेहद पुर सुकून और मुसर्रत अन्दोज़ है उसको खुसूसी तवज्जो के साथ मुताला करें। 

नाज़रीन ख़तरनाक और खूंखार आलमी ज़ाफ़रानी दहशत आर.अस.अस. पर अब बर्बादी तबाही के सियाह अबर छा चुके हैं और जल्द ही जो अब्र यहाँ से उठेगा, वोह अब्र सारे जहाँ पर बरसेगा।  यह अब्र हमेशां से बरसा है यह अब्र हमेशां बरसेगा।

गुजिश्ता जनवरी यानी जनवरी २०२० से ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों और उनके हिमायती, उनको माशी इमदाद फ़राहम करने वाले अफ़राद और तंज़ीमे आलमी तहक़ीक़ाती इदारों के हाशिये पर थे।   ख़ास यह तहक़ीक़ात और इन ज़ालिमों, दहशतगर्दों, दरिंदों की बर्बाद तब शुरू हुई जब इन्होने भारत की अदलिया को अपनी लौंडी ग़ुलाम बना हर रोज़ रात को इन ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों की जानिब से उसकी असमतऱेज़ी की जाती थी।   ख़ास नवंबर में जब बाबरी का मुत्तसिब फैसला आया तब तमाम आलम में उस फैसले और क़त्ले इन्साफ के खिलाफ अक़वामे मुताहिदा की जानिब रुख़ किया। 

और इन ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों की शुरू हुई तहक़ीक़ात जो जनवरी २०२० उसके बाद फ़रवरी २०२० में भारत की दारुल ख़िलाफ़त दिल्ली में हुए दहशतगर्दाना हमले के बाद मज़ीद तेज़ हो गई थी।   इस हमले को मुन्नज़म तरीक़े से सोची समझी साजिश के तहत व्हाट्सअप, फेसबुक और दीगर सोशल मीडिया अकाउंट बना कर मुस्लिम नस्ल कुशी करने के सबूत आलमी जांच एजेंसियों को हाथ लगे। 

ताज़ा सूरते हाल यह है की ज़ाफ़रानी दहशत पर लगाम कसने की तैयारी पूरी हो गई है और फील वक़्त जर्मनी, कुवैत, अमेरिका, इंग्लैंड ने उसके ऊपर अमल किया है और बेन कर दिया है।   इन दहशतगर्दों की माशी नब्ज़ काट दी गई है, और इनके तमाम ज़ारिया ऐ माश फ्रीज़ कर दिए गए हैं।  

इस खूंखार दहशतगर्द तंज़ीम ने अपने ख़ुफ़िया अड्डे पाकिस्तान, दुबाई, कुवैत, सऊदी, अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया  जैसे अमीर मुल्कों में बना रखे थे।   इन अड्डों की तफ्सील जानकारी, अकाउंट नंबर, अड्डों पर काम करने वाले मौजूद दहशतगर्द उनकी तस्वीर सब कुछ आलमी बारादरी को फ़राहम की गई थी।   उसके बाद इनके ऊपर एक्शन शुरू हुआ।   इन दहशतगर्दों के अड्डों पर मस्तूरातें भी थी, जो दुर्गा वाहिनी की कारकून होती हैं, और वक़्तन फा वक़्तन दहशतगर्दों के साथ हमबिस्तर हो कर उनको सुकून फ़राहम करतीं हैं।   जो जवान होती हैं उनको किसी भी मुल्क के आला ओहदेदारों को लुभा कर उसके साथ हमबिस्तर हो कर दहशतगर्दों के मंसूबे पूरे करने और नए अड्डे क़ायम करने की ज़िम्मेदारी दी जाती है।   जो अधेड़ हो जाती हैं वोह सिर्फ संघटन में एक ओहदेदार की हैसियत से काम करती हैं और उस जगह मुक़ीम दहशतगर्दों की तस्कीन को पूरा करती हैं।   

कुवैत और जर्मनी से शुरू हुई इनकी धर पकड़ के बाद तहक़ीक़ात ने तमाम राज़ फाश कर दिए और एक एक नए ख़ुलासे हो रहे हैं।   इन लोगों ने ३०,००० से ज़्यादा दहशतगर्दों की मज़बूत फौज अमेरिका में तैयार की हुई है।   यह लोग चूहों की तरह हमला कर के बिल में छुप जाते थे। अमेरिका, इंग्लैंड, जेर्मनी, न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका से ले कर तमाम मुस्लिम मुमालिकों में बम ब्लास्ट करने के पीछे इनका हाथ था इस बात को क़ुबूल किया है।   यहाँ तक की भारत में मंदिरों की बेहुरमती करना और गाये का गोश्त मंदिरों में डालना उनमे भी इनका ही हाथ था। 

नाज़रीन जिस तरह से इन दहशतगर्दों को अरब मुमालिकों और जेर्मनी में उल्टा लटका कर बर्फ की सिल्ला पर औंधा लिटा कर इनका पिछवाड़ा लाल किया जा रहा है यह दीमक सब उगल रहें हैं।   लेकिन इस सब कारगरदेगी में मुल्के हिन्द की जो साख़ एक अमन पसंद मुल्क के रूप में अभी तक क़ायम थी उसको ज़बरदस्त झटका लगा है।   मज़ीद जमुहरियत, अदलिया के नाम पर जो फरेब और दहशत भारत की ज़ाफ़रानी हुकूमत ने मचाई है उससे मोदी इंतेज़ामिया की हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम दहशत के फलसफे का पूरा कच्चा चिठ्ठा खोल कर रख दिया है।   यही पाकिस्तान बारहा बोलता था की हम नहीं असली मुजरिम भारत है और वही अफ़ग़ानिस्तान में अमन कारवां को बम ब्लास्ट कर के अफ़ग़ानी फौजियों को हलाक कर पाकिस्तान की जानिब से शुरू की गई अमन की तहरीक को डिरेल करने की हिकमते अमली में मुलव्विस रहता है। 

ख़ैर अभी जेर्मनी, कुवैत, पाकिस्तान, अमेरिका ने ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को बेन किया है और इनकी ज़बरदस्त धड़ पकड़ चालू है।   इनकी ठुकाई से ले कर तो पिछवाड़े की सूजाई तक तमाम हिकमत इख़्तेयार की जा रही है।   भारत की किफ़ालत में जो ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों ने ग़दर मचाया था और नाम बदनाम मुस्लिम अवाम का "जिहादी" पाकिस्तान का आतंकवादी मुल्क है उसकी पोल खुल गई है।   आलमी सतह पर मसला अब अक़वामे मुताहिदा पहुंच गया है।  

ताज़ा सूरते हाल यह ही की जैसा इस सहाफी के पास राये आती है और मालूमात तहक़ीक़ात के हिसाब से एक साल पहले इस बात को मन्ज़रे आम किया जा चूका है की भारत अगर ऐसी ही कारगरदेगी इख़्तेयार करता रहा और अपने मुल्क में दहशतगर्दी को फ़रोग़ देता रहा तो उसको आलमी सतह पर अलग थलग डाल कर मुत्तहिदा अफ़वाज हमला कर सकतें हैं।   

अब भारत को इन ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों पर एक्शन लेना होगा और इनको अंजाम फ़ासी तक पहुँचाना होगा जैसा इनके अब्बू नाथूराम को फ़ासी पर लटकाया था नहीं तो मुताहिदा अफ़वाज लटकायेगे जैसा सद्दाम और उनके हामियों को लटकाया था।  दूसरी बात भारत को अडानी, अम्बानी, बिरला जैसे ज़ाफ़रानी दहशत को माशी इमदाद करने वाले ज़ाफ़रानी दहशत की माशियत की नब्ज़ काटना होगी नहीं तो आलमी बरादरी उनको अपने हिसाब से काट डालेगी।   

कुल मिला कर भारत के लिए २०२० सख़्त अज़ीयत और मुश्किलों में गया था अब २०२१ में नस्ले तबाह, बर्बाद और ख़तम होने का वक़्त आया है।   सिसक सिसक कर मरेगी।  योगी हैदराबाद का नाम बदलेगा, अमित निज़ाम कल्चर से हैदराबाद को आज़ादी दिलवाएगा, भारतीय जनखा पार्टी पहले तुम तैयार रहो कैसे निबटोगे आलमी अफ़वाज से फिर दूसरी बात करना। 


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