Saturday, 31 March 2018

मुस्लिम महिला शक्ति: विशाल रैली



जयपुर, अजमेर, लखनऊ, गुलबर्गा, बैंगलोर, हैदराबाद, भटकल, मालेगांव, औरंगाबाद, नागपुर, भिवंडी, मुम्ब्रा आखिरकार 'मुस्लिम महिला संरक्षण विधेयक' के खिलाफ विरोध बंबई तक पहुंच गया।  

३१ मार्च २०१८  के दिन आजाद मैदान, बॉम्बे में विरोध प्रदर्शन का आयोजन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बैनर के तहत मुंबई की महिला शाखा द्वारा किया गया। इस विरोध प्रदर्शन  में कम से कम १.५  से २ लाख महिलाओं के विशाल जन  समूह ने विरोध में भाग लिया। यह एक काला शनिवार की तरह प्रतीत हो रहा था जो पूरे वी.टी. स्टेशन से आजाद मैदान तक सड़क पर काले बुर्क़े पहने महिलाओं की काली आंधी की तरह दिखाई दे रहा था। मुंबई पुलिस को भी यातायात को नियंत्रित करने में अतिरिक्त प्रयास करना पड़ा क्योंकि महिलाओं की क्षमता बहुत अधिक थी। और महिलाओ को सुचारू मार्ग देने के लिए पुलिस ने कुछ देर के लिए अवरोध लगा के यातायात को रोक दिया। 

रैली को मुंबई शहर की प्रतिष्ठित मुस्लिम महिलाओ ने संबोधित किया जिनमे मुख्य हैं प्रोफेसर शबाना खान, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय मुबाई, श्रीमती अर्शिया शकील जमात-ए-इस्लामी, श्रीमती सुमैय्या सज्जाद नोमानी  सदस्य ए.आई.एम.पी.एल.बी., सुश्री आइना रजा, अहले सुन्नत वल जमात, श्रीमती मुनव्वरा अलवारे एडवोकेट, प्रो. मोनिसा बुशरा अबीदी सदस्य कार्यकारी समिति ए.आई.एम.पी.एल.बी, सुश्री फराह जाफरी शिया जमात।

डॉ असमा ज़ेहरा ए.आई.एम.पी.एल.बी की महिला शाखा अध्यक्ष ने भी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) बिल, २०१७ कानूनी तौर पर दोषपूर्ण है, यह महिलाओं को कानूनी और सामाजिक जटिलता में जोड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि बिल में पति को जेल भेजने के ऊपर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है और किसी भी तरह महिलाओ की मदद नहीं है। 

सभी २  लाख महिलाओं ने शरिया कानून की सुरक्षा के लिए चिलचिलाती,  कड़क धुप में सरकार दूआरा प्रायोजित बिल के विरोध में भाग लिया, लेकिन आम तौर पर हस्बे आदत लंगूर पत्रकारों को मोदी सरकार के खिलाफ मुस्लिम महिलाओ का ये विशाल जन  समूह हज़म नहीं हुआ, और वो इस सशक्त महिला शक्ति को देख के खासे परेशान दिखे विशेष रूप से आजतक इंडिया टुडे के रिपोर्टर को और उन्होंने भीड़ को गुमराह करना शुरू कर दिया ये कह कि सभी महिलाओ ने अपने पुरुष सदस्यों के दबाव के कारण विरोध में भाग लिया हैं। यह कैसे संभव है कि सभी २ लाख महिलाओं की भीड़ पर उनके पुरुष सदस्यों द्वारा दबाव डाला गया है और उन्होंने अपनी मर्ज़ी से विरोध में भाग नहीं लिया है। 


दूसरे, आजतक इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने प्रतिनिधि से अपमानित सवाल पूछा कि कब तक आप इस गेम को सरकार के साथ खेलेंगे, आपको सफलता नहीं मिलेगी। रिपोर्टर के अनुसार सभी २ लाख महिलाएं खेल खेल रही हैं या वे सरकार को ब्लैकमेलिंग कर रही हैं। ये लंगूर का अर्थहिन् और भद्दा अवलोकन है।  फिर किसलिए मुस्लिम महिलाएं एक आतंकवादी, राजा, हिटलर, निर्लज्ज को ब्लैक मेल करेंगी जो दूसरों को ब्लैकमेल करने के लिए प्रसिद्ध है।



English Version


Muslim Women Power: Massive Rally
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/03/31/mus

Friday, 30 March 2018

आतंकी आक़ा के आतंकी भक्त


हिन्दू आतंकी हमेशा की तरह अपने आतंकी आक़ा के नाम पे दंगा फसाद, मार काट, आगजानि और आतंकवादी हमले करने में कामयाब रहे. बिहार की आग अब आगे की तरफ नावदा हिन्दू आतंकी लेफ्टनेंट कमेंडेन्ट गिरिराज के लुटे हुए इलाके तक पहुंच गयी है.  जिस प्रकार से इस पत्रकार ने हर उस प्रकरण की सबसे पहली अपनी रिपोर्ट दी है जो बाद में सही साबित हुई. चाहे वो ३९ भारतीओ के मसूल में मारे जाने की रिपोर्ट हो या हिन्दू आतंकिओ की एजेंट जो सुषमा सुवराज के कहने पे पाकिस्तान गई और उसको बदनाम करने के लिए झूठा इलज़ाम लगाया फिर इस पत्रकार ने उसको बे नक़ाब किया के वो तो विदेश मंत्रालय की पपेट है. चाहे वो तूसी जैसे पाखण्डिओ को या लंगूर पत्रकारों बे नक़ाब करने की रिपोर्ट हो या फिर वो नजीब के गायब होने के बाद हत्या की रिपोर्ट हो और उसके पीछे हिन्दू विद्यार्थी ऐ.बी.वि.पि. का हाथ हो.   सबसे पहले इस पत्रकार ने पहली रिपोर्ट जमा की फिर बाद में मीडिया में ये बात सिद्ध हुई. या कासगंज हिंसा की पहली रिपोर्ट हो


बिहार में भी रामनवमी के रोज़ जो दंगा हुआ उसमे भी समूची जानकारी ये पत्रकार उसकी २८ मार्च २०१८ को 'राम के नाम पे फिर बवाल' नामक खबर के शीर्षक के साथ पहले ही दे चूका है.  रामनवमी के जुलूस में आतंकवादी तलवारो, लाठीओ, त्रिशूलों से लेस डीजे पे इश्तेआल अंगेज़ी भरे गाने चला रहे थे. ये खबर आज ३० मार्च २०१८ को मीडिया के गलियारों तक पहुंची है के इनसब के पीछे शोभायात्राओं में शामिल किए गए डीजे और उसमें बजाए जा रहे कुछ गानों को कारण बताया जा रहा है.  इस मौके पर बिहार के भागलपुर, औरंगाबाद, समस्तीपुर और मुंगेर में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प, आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं.


अगर आपको हमारी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है तो इन गानों पर एक नजर डाल लीजिए.-
'पाकिस्तान में भेजो या कत्लेआम कर डालो, आस्तिन के सांपों को न दुग्ध पिलाकर पालो

 
  

'...टोपी वाला भी सर झुकाकर जय श्री राम बोलेगा...’


'रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे.
दूर हटो, अल्लाह वालों क्यों जन्मभूमि को घेरा है
मस्जिद कहीं और बनाओ तुम, ये रामलला का डेरा है...’
 


 
'सुन लो मुल्ले पाकिस्तानी, गुस्से में हैं बाबा बर्फानी...'


'जय श्री राम...जय श्री राम
जलते हुए दिए को परवाने क्या बुझाएंगे
जो मुर्दों को नहीं जला पाते वो जिंदों को क्या जलाएंगे’




'जो छुएगा हिंदुओं की हस्ती को, मिटा डालेंगे उसकी हरेक बस्ती को
रहना है तो वहीं मुर्दास्तान बनकर रहो, औरंगजेब, बाबर बने तो खाक में मिला देंगे तुम्हारी हर बस्ती को’





वैसे तो बिहार में रामनवमी के मौके पर शोभायात्रा निकालने का चलन बहुत पुराना नहीं है. पिछले चार-पांच साल से ऐसी शोभा यात्राएं निकाली जाने लगी हैं. वहीं पिछले दो-एक साल से इन शोभा यात्राओं में डीजे को प्रमुखता से शामिल करने और इनके माध्यम से ऐसे गाने बजाने या नारे लगाने का चलन बढ़ा है जिसमें एक समुदाय विशेष को टारगेट किया जाता है.

दंगो का मुख्य कारण हिन्दू आतंकिओ का हमला था ये बात एक दम निराधार, झूटी और बे बुनियाद है के किसी ने मस्जिद से पत्थर फेंके उसके ऊपर दंगा हुआ. अब जिनको आतंक मचाना है तो मस्जिद किया और मंदिर किया फिर इश्तेआल अंगेज़ी भरे गाने काहे को बजाना चाहिए और जुलूस हथियारों के साथ निकालने की क्या ज़रुरत थी.  मस्जिद से पत्थर फेकने के बाद दंगे हुए ये बात भी उतनी ही झूटी है जितनी के नवदा में एक लंगूर की मूर्ती तोड़ने की खबर पे दंगा भड़कने की बात. असल में ये आतंकवादी न मस्जिद देखते है और न मंदिर. पहले मस्जिद को गन्दा किया फिर खुद ही अपने राम के भक्त लंगूर को बदनाम किया. लेकिन ये नामुराद पूरी तरह से भूल गए के उनको जल्द ही रूसवा होना पड़ेगा और बदनामी का जाम पीना पड़ेगा.


अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...