Thursday, 28 July 2022

गुस्ताख़े नबी की एक ही सज़ा सर तन से जुदा, सर तन से जुदा।

नज़रिने गिरामी,

नबी की बेहुरमती करने वालों के ऊपर मौत के फ़रिश्ते हज़रते इज़राईल का क़ेहर ऐसा टूट रहा है, जैसे की दहशत की पनाह गाहा हिन्दुस्तान में पहाड़ टूट कर गिर रहें हैं।  रब्बे कायनात की एलाने जंग का आग़ाज़ हो चुका है।  जितना काफ़िर शिद्दत पसंदों ने मुस्लिम और बे गुनाह इंसानियत (क्रिस्टी, सिख, दलित) अवाम के ऊपर दहशत मचाई थी उतनी ही उनकी जान तकलीफ और अज़ीयत से निकलेगी।  

नाज़रीन नबी ऐ मुक्कर्रम की बेहुरमती ख़ास उस नाज़ेबा ख़ातून नूपुर शर्मा ने जब बदकलामी की थी उसके बाद तो सर तन से जुदा करने वालों की एक होड़ सी लग गई।  हर कोई बोल रहा था की में इस मुक्क़द्दस और कारे ख़ैर में हम भी हमारी इमदाद देना चाहतें हैं।  लेकिन अल्लाह को अपना मक़सद मुकम्मल करने के लिए किस की मदद दरकार होती है यह तो वोह ख़ुद ही फ़ैसला करता है।  उसके फ़रिश्ते उसकी मर्ज़ी के काम को सर अंजाम देंगें या वोह किसी इंसान में वोह क़ुव्वत और ताक़त फ़रहाम कर देगा की उसकी मर्ज़ी के हिसाब से काम हो जाएँ।  हालांके अल्लाह को अपनी मर्ज़ी के हिसाब से काम करवाने में किसी की हाजत नहीं।  अल्लाह अज़्ज़ा वजल के हिसाब से काम होने में एक सेकंड नहीं लगेगा।  अगर उसने कहा "कून" होजा "फयाकून" और फ़ौरन हो जाएगा।   लेकिन यह दुनिया आलमे असबाब है।  फिर अगर एक सेकंड में सब कुछ तब्दील हो गया तो कुर्फ, ज़ालिम, नाइंसाफ, फ़िर्क़ापरस्त, दहशतगर्द को अपनी ग़लती ग़फ़लत का एहसास कैसे होगा।  

नाज़रीन जिस हिसाब से नबी ऐ मुक्कर्रम की हुरमत को अदना किया था उसके बाद तमाम शुमाल हरयाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजिस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक में सर क़लम होते ही चले जा रहें हैं।  ताहम आसमानी आफ़ात और हादसों से शिद्दत पसंद दो चार हैं। 

किसी कव्वाल के अशार याद आ गए, "भर गए लेने वालों के दामन मगर देने वाला कोई ना आया नज़र"।ऐसे ही हर गुस्ताख़ के सर तन से जुदा तो हो रहे हैं, लेकिन जुदा करने वाला कोई नज़र नहीं आ रहा है। 

यहाँ तक की अब तो जिसने उस गटर की पैदाइश नूपुर शर्मा के मुवाफ़ेक़त में बयान दे दिए उसका भी सर तन से जुदा हो रहा है।  नाज़रीन एक लम्बी फेहरिस्त है और मेरे मज़मूनों का मुताला करने वाले आप तमाम हज़रात के इल्म में इज़ाफ़े के लिए इतना बता देना चाहता हूँ की हर गुस्ताख़ का नंबर लगेगा।  ख़्वाहा वोह शिद्दत पसंद काफिर हो या दज्जाल एहमदिया, क़ादयानी।  नूपुर शर्मा, नवीन जिंदाल जैसे कीड़ों को एक सेकंड में कुचला जा सकता है, सर तन से जुदा किया जा सकता है।  लेकिन उनको दिखाना मक़सद है अल्लाह की जिस ताक़त और क़ुव्वत के ऊपर इन्होने मज़ाक बनाया था और नबी की बेहुरमती की थी तो अब उनके आँखों के सामने ऐसे वाक़ेयात होंगे की उनकी रूह कांप जाएगी।  कोई दिखाई नहीं देगा और सर क़लम, हाथ क़लम, पैर क़लम।    

ऐसे तमाम गुस्ताख़ अनासिर अल्लाह के फरिश्तों के हिसार में हैं।  और वोह हर वक़्त उनको देख रहें हैं, यहाँ तक की बरहना, पोशीदा, छुप कर किये हुए काम ज़ाहिरी काम हर चीज़ उनकी अब बेपर्दा हो चुकी है।  कहीं भी किसी भी गली नुक्कड़ पर गुस्ताख़ का सर तन से जुदा हो जाएगा।  योगी बोलता था की मुसलमान मर्द तो रज़ाई में सो रहें हैं और अपने घरों की औरतों को हर गली नुक्कड़ चौराहों पर बिठा दिया है।  योगी जी आपको भी रज़ाई में सोता हुआ मेरे रब के फ़रिश्ते देख सकतें हैं।  क्या पता अगला सर आपका हो और जुदा करने वाला कोई फ़रिश्ता। संभल के रहिये।  

हर काफ़िर शिद्दत, दहशत और ज़ाफ़रानी बात का जवाब दिया जाएगा एक लम्बी बोहोत लम्बी फेहरिस्त है।  हिसाब किताब पूरा तभी होगा जब बाक़िया कुछ भी नहीं रहेगा।  बैलेंस ज़ीरो।  ० बटे सन्नाटा।

नाज़रीन हाल ही के कुछ सालों में हिन्दुस्तान में पत्थरों की बारिश होने का नये सिलसिले का आग़ाज़ हुआ है।  जहाँ तहाँ पहाड़ टूट कर गिर रहें हैं।  दरसल आज के भारत की बर्बादी और तबाही के ज़िम्मेदार लंगूर ख़ास हर्राफ़ लँगूरनियों की झूठी फरेबी ख़बरें हैं।  जिसकी वजह से कश्मीर में हर मासूम को पत्थर बाज़ बोल कर बदनाम किया जाता था फिर वही फलसफा मुसलमानों के लिए इख़्तेयार किया गया।  अब इन लंगूर लँगूरनियों का झूट मालिके कायनात ने उनके ही मुल्क पर सच्चा कर दिखाया।  मुझे मेरी एक नज़म  एक पत्थर इधर भी याद गई जब लंगूर और लँगूरनियाँ कश्मीर में ख़ूब बवाल मचाते थे।  यहाँ भी पत्थर चले वहां भी पत्थर चले।

सभी गुस्ताख़ों का नाम शामिल है इस फेहरिस्त की किताब में, यहाँ सिर्फ अकेले तुम ही गुस्ताख़ थोड़ी हैं। क्या बोलते थे संघी आसमानी किताब।  अब आसमान से पत्थर बरस रहें हैं।  बिजली का क़ेहर टूट रहा है।  ७२ हूरें, है है है।  उन सब बकवास करने वालों के सर तन से जुदा होंगे।  आज नहीं तो कल।  

जितना भौंकोगे, उतना भोगोगे।  उखाड़ लो जो उखाड़ना है।  सर तन से जुदा तो होगा अगला नंबर तेरा।

Monday, 25 July 2022

मुनाफ़िक़ों, इस्लाम दुश्मनों के मुँह पर दुख्तराने मिल्लत का तमाचा।

ना ही शैतान कुर्सी पर अपना बस्ता रखता और ना ही बात उसके ऊपर आती।

नाज़रीने गिरामी,

जैसा की मुस्लिम अवाम के ऊपर इलज़ाम तराशी की जाती है और उनको हर मुद्दे पर लंगूरों की टोली बदनाम करती है, लेकिन मेरा सहाफत में आने का मक़सद लगता है मुकम्मल हो रहा है।  कियोंके हर उस मुद्दे पर सच्ची और दुरुस्त खबर अवाम के रू बरू पहुंच जा रही है, जिनमे मुस्लिम अवाम को बदनाम किया जाता है।  अब अवाम बख़ूबी जान रहा है की कौन शर पसंद है कौन अमन पसंद है।  कौन क़ानून का एहतेराम करने वाला है और कौन क़ानून तोड़ने वाला है।  हर बार ऐसा ही होता आया है शैतान की तरह चाशनी की बूँद दिवार पर लगा कर उसको दंगा फसाद में तब्दील कर दिया जाता है क़त्ले आम हो जाता है लंगूर लँगूरनियों की टोली तमाम शर और फसाद का ज़िम्मेदार मुस्लिम अवाम को ठहराते है।  जब तक हक़ीक़त और तहक़ीक़ात निकल कर आती है अदलिया में सच्चाई सामने आती है तब तक बोहोत देर हो चुकी होती है। और जो बदनामी मुस्लिम अवाम की इस्लाम की निस्बत से लंगूर और लँगूरनियाँ कर चुके होते हैं वोह अवाम के दिलों दिमाग़ में चस्पा हो जाती है।

मसला इन्तेज़ामियाँ की जानिब से हुकुम नाफ़िज़ करने का है।  जब योगी इन्तेज़ामियाँ ने हुकुम नाफ़िज़ कर दिया की कोई भी मज़हबी रिवायत रोड पर नहीं होगी और ख़ास कावड़ियों को हिदायत दी थी की ना कोई तलवार, भाला, बल्लम, लाठी ले कर चलेगा और ना ही ते शुदा रस्ते की ख़िलाफ़वर्ज़ी करेगा।  

फिर वही हुआ जिसका खदशा था।  उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कावड़ यात्रा निकालने को लेकर यकायक दो मज़हबी अवाम आमने सामने आ गए।  हुआ यह की कांवड़ियें अपना ते शुदा रास्ता छोड़ कर मुस्लिम मोहल्लों से निकल रहे थे।  बड़ी तादात में दुख्तराने मिल्लत ने चारपाई लगाकर रास्ता बंद कर दिया। जिससे कांवड़िये न निकल सके।  मुस्लिम ख़ातूनों का इलज़ाम है कि कांवड़ यात्रा तय शुदा रस्ते से नहीं निकल रही थी. काफी देर तक बहस और हंगामा होता रहा. 

दरअसल, मुरादाबाद के बिलारी में थाना सोनकपुर के ग्राम इब्राहिमपुर में कांवड़ियों ने अपना रास्ता तब्दील कर दिया और गांव की ही मुस्लिम हल्क़े से निकलने लगे।  दुख्तराने मिल्लत ने जब देखा तो उनका रास्ता रोक दिया.  अब दोनों ही मज़हब के अवाम आमने सामने आ गए और टकराव की हालात पैदा हो गई।  मज़ीद पुलिस फाॅर्स बुला ली गई और बमुश्किल तमाम दोनों ही फ़रीक़ों को समझा बूझा कर मसले का हल निकाला गया। 

अब मसला वही है जब योगी इन्तेज़ामियाँ ने एक हुकुम नाफ़िज़ कर दिया की कोई किसी के मज़हबी अक़ीदे को चोट ना पहुचाय।  और ऐसा काम ना करे की दुसरे मज़हब के अवाम को दुशवारी का सामना करना पड़े।  तो फिर कावड़िये  ते शुदा रास्ता छोड़ कर मुस्लिम हल्क़े से काहे को निकलने लगे।  मतलब साफ़ ज़ाहिर हो रहा है शर फैलाना और दंगा फसाद करना मक़सद था। 

दुख्तराने मिल्लत ने जो किया बिलकुल सही किया। क्या तमाम क़ाइदे क़ानून सिर्फ मुस्लिम लोगों के लिए ही हैं।  जबकी योगी ने सख्त हिदायत दी है की कावड़ यात्रा में कोई भी गैर क़ानूनी काम नहीं होना चाहिए।  ना ही तलवार ले कर कोई चलेगा और ना ही ते शुदा रुट का रास्ता भंग करेगा। अगर ऐसा कोई करता है तो उसके ऊपर क़ानूनी कारवाही होगी।  इन ख़ातूनों ने रास्ता रोक लिया अब बारी पुलिस और इन्तेज़ामियाँ की है।  करें क़ानूनी कारवाही और डाले जेल में। 

वैसे दुख्तराने मिल्लत को ही अब हर मुद्दे पर मोर्चा संभालना पडेगा।  कियोंके जो मर्द थे उनको जेल में डाल दिया है। जो बचें हैं वोह मुस्लिम मर्द तो अब ज़न्खे हो गए हैं उनको हुकूमत ने पीट पीट के दुम्बा बना दिया है बदिया बकरा।  वोह अब सिर्फ हुकूमत की चाटुकारिता के लिए ही बचे हैं।  जैसा की मुनाफ़िक़ बाबरी मस्जिद का क़ातिल डाकू इक़बाल अंसारी।  बोलता है की नमाज़ पढ़ने वाले साजिशी हैं।  इनको गिरफ्तार कर के जेल में डालो जब इन्तेज़ामियाँ ने हुकुम नाफ़िज़ कर दिया की नमाज़ खुले में नहीं पढ़ना है फिर भी हुकुम की ख़िलाफ़वर्ज़ी कर रहें हैं तो इनके ऊपर एक्शन होना चाहिए।  अब उस मुनाफ़िक़ छक्के से में पूछता हूँ कुछ इन गैर क़ानूनी कांवड़िओं पर भी बोल दे।   

नाज़रीन एक बात तो ते है की मुस्लिम अवाम कभी भी ख़ुद हो कर किसी को तकलीफ नहीं देते और ना ही किसी भी दुसरे मज़हबी रिवायत को, अक़ीदे को ईज़ा पहुंचाने जैसा अमल करतें हैं।   हाँ लेकिन जवाब देना खूब आता है।  अब अगर कोई तलवार ले कर सर पर खड़ा हो जाएगा की बोल जय जय श्री....... नहीं तो सर क़लम कर देंगे  तो हो सकता है वोह मुस्लिम उस काफिर का ही सर तन से जुदा कर दे। 

फिर अगर झूट फरेब धोके बाज़ी से किसी मस्जिद को शिव लिंग बोल कर ग़सप करने की साजिश करेगा तो हो सकता है उसके जवाब में कोई मुस्लिम शिव लिंग के ऊपर ही कुछ बोल देगा।  फिर आस्मां तक उछलने वालों से सवाल वही है की शुरूवात किस ने की थी।  तुमने तो क़सम खा रखी है इस्लाम को नीचा दिखाने के लिए मुलसमानों की मस्जिदों को ग़सप करने के लिए हेंड पंप की भी पूजा करवा दोगे तो उसके ऊपर लोग हसेंगे भी और मज़ाक़ भी बनायेगें।  

बात वही है शैतानी फितरत।  एक क़िस्से के साथ बात को ख़तम करता हूँ।  एक मुफ़्ती आलिम साहब ने शैतान से सवाल किया तू इतने फसाद दंगे करवाता है क़त्लो ग़ारत करवाता है तुझको क्या मिलता है।  उसने बोला में कहाँ करवाता हूँ यह इंसानी फितरत है की झगड़ते रहतें हैं।  उसने कहा में तुमको दिखाता हूँ में कुछ नहीं करता।  आप मेरे साथ हलवाई की दूकान पर आईये।

चुनाचे दोनों हलवाई की दूकान पर पहुंचे।  शैतान ने हलवाई के अलावे से चाशनी की एक बूँद ले कर दिवार पर लगा दी।  फिर दूर खड़ा तमाशा देखने लगा।  अब उस बूँद पर मक्खी आई,  मक्खी को देख कर छिपकली उसको पकड़ने आई, छिपकली को देख कर हलवाई की बिल्ली उसके ऊपर लपकी, बिल्ली को लपकते देख कर दूकान के बाज़ू में बैठा एक कुत्ता उस बिल्ली के ऊपर लपका और हुआ यह की छिपकली, बिल्ली, कुत्ता हलवाई के अलावे में गिर गया।  अब दोनों फ़रीक़ों के बीच बेहेस शुरू हुई हलवाई कुत्ते के मालिक से हर्जाना मांगने लगा।  कुत्ते के मालिक ने उलटा हलवाई से हर्जाना मांगने लगा क्योंकि बिल्ली हलवाई की थी।  और उसको देख कर कुत्ता लपका था।  बात हाथा पाई तक पहुंच गई और लठ तलवारे निकल गई। 

अब शैतान ने यह सारा माजरा देख कर मुफ़्ती साहब से बोला अब आप बताइये की इन सब में मेरी कोई गलती है में अब यहाँ से चला।  लेकिन सवाल तो वही उठता है की चाशनी की बूँद दिवार पर तो शैतान ने ही लगाई थी और मक़सद भी वही था की झगड़े को फरोग मिले। 

Sunday, 24 July 2022

नमाज़ पर बेन कावड़ियों के फेंन।

अज़ीज़ाने मिल्लते  इस्लामियां, 

हूकूमते हिन्द और ज़ाफ़रानी हुकूमत में मुस्लिम, क्रिस्टी, दलितों के लिए हुकूमत की सख़्ती बढ़ती जा रही है।  हालात ऐसे हो गए हैं की अब तो नमाज़ पढ़ने पर भी गिरफ्तारी हो रही है। हालात ऐसे हो गए की जहाँ किसी भी मुस्लिम को नमाज़ पढ़ते हुए देखा फ़ौरन गिफ्तार किया जा रहा है।  उसपर सितम देखिये मुनाफ़िक़े इस्लाम बाबरी मस्जिद के दुश्मन वाराणसी से ऊल जलूल बयान बाज़ी कर रहें हैं की नमाज़ पढ़ना एक साजिश है और ऐसे लोगों को फ़ौरन गिरफ्तार किया जाना चाहिए।  ऐसे मुसलमान अब्दुल्लाह बिन ऊबाई, अबू लहब और ख़ोवारा जैसे  मुनाफ़िक़ों की नस्लों से हैं।  जो नबी के दौरे नबूवत में मौजूद थे नबवी शरीफ़ में नबी सल्लम के पीछे ५ वक़्त की नमाज़ अदा करते थे लेकिन उनका हर अमल सहाबा और एहले इस्लाम को इज़ा पहुंचाने जैसा होता था।  हुकूमत की चाटुकारिता और गुलामी का पट्टा अपने गले में बांदे रखते थे।  

महज़ नाम मुसलमान रखना या मस्जिदों में नमाज़ पढ़ लेना दाढ़ी बढ़ा लेना सुन्नत की बात करना ही सिर्फ मुसलमान होने के लिए काफी नहीं है।  बल्कि तुम्हारे दिल में इस्लाम और मुसलमानों के लिए कितनी तड़प है वोह भी बोहोत मायने रखता है।  तुम्हारे अंदर ज़ालिम, नाइंसाफ, क़ातिल की तलवार को ज़ुल्म करते वक़्त पकड़ने की क़ुव्वत है के नहीं है।  अगर नहीं तो उसको ज़ुबान से ग़लत बोलने की क़ुव्वत है के नहीं और उतना भी नहीं तो उसको दिल से ग़लत समझने की हिम्मत है के नहीं है।  यहाँ तो मुसलमानों को ही नमाज़ियों को ही कोसने लगे तो दिल में हुकूमत की नाइंसाफी और ज़ुल्म को बूरा तसव्वुर करने की भी लायक़ नहीं हो। तुम हुकूमत की बोली बोल रहे हो मतलब तुम्हारे अंदर तीसरे दर्जे की भी इस्लामिक जज़बा नहीं है तो तुम मुनाफ़िक़ ही हो।

एक बीजेपी का ग़ुलाम संघ का रकून जमात उलेमा हिन्द का दरिंदा दज्जाल एहमदिया सोएब क़ासमी शाने रिसालत में बेहुरमती करनी वाली तवाइफ़ की मुवाफ़ेक़त में बयानबाज़ी करता है।  बोलता है असदुद्दीन ओवेसी और मेहमूद मदनी ने मुसलमानों को नूपुर शमा के खिलाफ भड़काया।  मज़ीद बोलता है की नबी की शान में जो बेहुरमती की गई वोह नहीं करना चाहिए थी लेकिन जो हो गया उसके ऊपर एहतेजाज करना गिरफ्तारी की मांग करना और बड़ी ग़फ़लत है।  हमारी तंज़ीम के रकून ऐसे एहतेजाजियों को देखते ही पिटाई कर रहें हैं और उनको फ़ौरन पुलिस के हवाले कर रहें हैं।  ऐसी मुनाफ़िक़ों की बातों को लंगूर ब्रेकिंग न्यूज़ बता कर चलाते हैं, मुस्लिम मौलाना क़ासमी ने ऐसा बोला वैसा बोला हदीस बताई क़ुरआन का क़ौल समझाया।  ऐसे मुनाफ़िक़ २ रूपये में मेसेज भेजने वाले ना तो मुसलमानों के रहनुमा है और ना ही इस्लाम की नुमाइंदगी करतें हैं।  हाँ यह ज़ाफ़रानी हुकुम के ताबेदार हैं और जैसा ज़ाफ़रानी हेड कूवाटर नागपुर से इनके लिए हुकुम आता है यह वैसा ही बयान दे देतें हैं।  २ रूपये के मेसेज में बिकने वाले यह लोग ग़द्दार है मौलाना नहीं।   

साधू ने सूबे शुमाल में अवामी हल्क़े या आमदो रफ़्त पर हर क़िस्म के मजहबी रिवायत पर पाबन्दी लगा दी।  फिर क्या वजह है कावड़ियों पर पाबन्दी नहीं लगी, सिर्फ नमाज़ पर ही पाबन्दी लगाई गई।  एक नमाज़ पढ़ते हुए मुसलमान को गिरफ्तार किया जाता है वहीँ हज़ारों लाखो की तादात में कावड़िये हुजूम बना कर निकलते हैं रोड जाम करतें हैं आवामी और हूकूमती जायदात की तोड़ फोड़ करतें हैं आतिशे नार करतें हैं तब भी उनकी गिरफ्तारी नहीं होती ब्लकि इन्तेज़ामियाँ की जानिब से आसमान से फूल बरसाए जातें हैं।  वोह फूलों के पैसा किधर से आया हेलीकाप्टर का खर्चा कहाँ से आया।  क्या यह सूबे शुमाल के मुस्लिम टेक्स पेयर के पैसे की बर्बादी नहीं है।  यहाँ तक के तमाम तालीमी इदारे कावड़ियों को देखते हुए १५ से २० दिनों के लिए बंद कर दिए गए।

अब तो हर जगह नमाज़ पढ़ी जाएगी।  आज नहीं तो कल।  में २१ मार्च २०२२ से १ अप्रैल २०२२ तक उत्तर प्रदेश में था।  सफर में पुष्पक एक्सप्रेस में बिंदास्त नमाज़ पढ़ी।  इटारसी से एक औरत मेरी ही बोगी में चढ़ी थी मेरे को नमाज़ पढता हुआ देख कर आग बबूला हो गई।  लगी मुगलों औरग़ज़ेब को गाली गलोच करने।  में तो बिंदास्त नमाज़ पढता रहा।  उसको उसके लग्गे भग्गे भगवाधारी ठाकुर दीदी ठाकुर दीदी कह कर बुला रहे थे।  अपने एक अक़ीदत मंद से बोली इसका वीडियो बनाओ।  फिर होशंगादाब आते आते चिकन करी खा कर सो गया।  जब गाडी भोपाल के हबीबगंज पहुंची तो चीख पुकार हो रही थी तब अंदाज़ा हुआ वोह कोई नेता वेता होगी।   तो क्या उसने ट्रैन से या भोपाल पहुंच कर शिकायत दर्ज नहीं की होगी।  लेकिन मेरे साथ क्या हुआ कुछ नहीं।  

इतना ही नहीं लखनऊ पहुंच कर हर अवामी हलके में नमाज़ अदा की थी।  यहाँ तक की वापसी में चार बाग़ रेलवे स्टेशन पर ईशा की नमाज़ अदा की थी।  तमाम पुलिस वाले ३ सितारा २ सितारा टोपी वाले हेट वाले सी आर पी ऑफ के जवान घूम रहे थे लेकिन कुछ भी नहीं हुआ और ना ही किसी ने टोंका।  या तो वोह लोग मुझे देख नहीं पाए या देख कर अनदेखा कर दिया।  तो बताने का मक़सद यही है आप किसी को नमाज़ पढ़ने से नहीं रोक सकते।  अवामी हल्क़े में नमाज़ पढ़ी तो वोह जगह उस नमाज़ी की थोड़ी हो जाती है।   नमाज़ के लिए जगह का पाक होना शर्त है, दूसरी कोई शर्त नहीं है। 

आज के दौर में नहीं बल्कि नबी ये मुक्कर्रम के दौर से बल्कि हर दौर से ज़र ख़रीद मुसलमान ही इस्लाम के दुश्मन रहें हैं।  आज उन मुजाहिदों की शान में बद कलामी वाले अलफ़ाज़ के मज़मून सांझा किये जा रहें हैं, जो कश्मीर में अपनी फलाह और तहज़ीब को मेहफ़ूज़ करने की जद्दो जेहद में मुजरिम क़रार कर दिए गए।  जुर्म साबित नहीं हुआ और हूकूमते हिन्द के नावाक़िफ़ इलज़ाम की वजह से जेल में हैं।  आज कल नमाज़ पढ़ने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है।  फिर इस्लाम और मुसलमानों से बुग्ज़ और कीना रखे वाले मुनाफ़िक़ उनको साजिशी बोल रहें हैं नमाज़ बंद करने की वकालत कर रहें हैं।  कल तुमको तुम्हारा मुस्लिम नाम और शिनाख़्त ज़ाहिर करने पर गिरफ्तार किया जाएगा।  तुम दुसरे दर्जे के अवाम हो जाओगे ना कोई हुक़ूक़ ना कोई एहमियत।  नाग फन उठाये उससे पहले ही उसके फन को कुचल देना चाहिए इससे क़ब्ल की वोह तुमको डस ले।  इनकी तरफदारी करो हिमायत करो नहीं तो कल तुम्हारा नंबर होगा।  और अगर वोह सब नहीं कर सकते इतनी ताक़त क़ुव्वत नहीं है तुम ज़नखे हो तो ऐसे ना ज़ेबा अलफ़ाज़ वाले मज़मून तो सांझा मत करो। 

साफ़ बात है मेरे नज़दीक सबसे पहले मेरा मज़हब है मज़हबे इस्लाम फिर नबी की अज़मत क़ुरान की मोहब्बत उसके बाद मेरे एहले खाना की मोहब्बत फिर मुस्लिमानों की मोहब्बत।  वतन की मोहब्बत का मेरे नज़दीक कोई फलसफा नहीं है और ना ही में हूबूल वतनी की कोई भी हदीस या क़ुरान का क़ौल देखता हूँ।  फिर अगर हूबूल वतनी का दर्स इस्लाम के अव्वलीन फ़राइज़ होता तो जितने भी पैग़म्बरे इस्लाम आये हज़रत इब्राहीम से ले कर मूसा अलैहे सलाम ईसा मसीह पैगम्बर सल्लम सभी ने अपने ही वतन में कुफ्र, ज़ुल्म और नइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की थी।  बल्कि हज़रते मूसा ने तो फ़िरोंन के यहाँ ही परवरिश पाई शीर ख्वारी से जवानी तक फ़िरोन के यहाँ ही रहे।  लेकिन इस्लाम और वहदहू ला शरीक पर उसके ख़िलाफ़ एलाने जंग किया और फतहयाब हुए।  

Zuber

Saturday, 23 July 2022

शिव लिंग की दहशत के बाद कावड़ियों की दहशत।

 नाज़रीने गिरामी,

झूट फरेब फ़ैलाना दंगा फसाद करना दुसरे मज़हबी अवाम का क़त्ले आम करना हिन्दू शिद्दत पसंदों, संघी दहशतगर्दों और बीजेपी वालों की यह एक आम  आदत होती है।  ताहम २०१४ के बाद ऐसे झूटी सच्ची बातों पर ख़ास मज़हब के अवाम को हरासा करना गिरफ्तार करना या उनका क़तल कर देना यह तो एक आम हिन्दू रिवायत हो गई है।  बच्चा चोरी, गाये चोरी, लव जिहाद, लड़की छेड़ना, गोमांस, तब्लीगी, शिव लिंग निकला हनुमान मंदिर यह कुछ एक ऐसे फरेबी बातें हैं जिनमे अनगिनत मुस्लिम अवाम को अपनी जानों की क़ुर्बानी देनी पड़ी है।   तब्लीग़ी जमात और बाबरी मस्जिद किसी मंदिर को तोड़ कर बनाया गया है इन मुद्दों पर अदलिया ने कौन सच्चा और कौन झूटा इस का पर्दा फाश कर दिया है।  फिर भी इन साजिशी काफिर अनासिरों को अक़ल नहीं आ रही है।  अदलिया के बाद अब मालिके कायनात की इन ग़द्दारों, एहसान फरामोशों को बदला देने की बारी है।

जैसा की हिन्दू शिद्दत पसंदों का एक आम रूझान है झूट फरेब लाद कर किसी ख़ास फ़रीक़ को हलाक किया जाए तो इस बार कावड़ दहशतगर्दों ने जम कर बवाल काटा।  मेरठ के कंकरखेड़ा में नेशनल हाइवे नंबर-५८ पर कांवड़ियों की दहशत इतनी की तमाम सड़क को जाम कर दिया.  इलज़ाम लगाया अमन पसंद मज़हबी लोगों पर की उन में से दो ने कावड़ पर थूक दिया है।   सूबे शुमाल की पुलिस भी इतनी मुस्तहिद की बग़ैर किसी तहक़ीक़ात के एक शख्स को फ़ौरन हिरासत में ले लिया। 

अब इन काफ़िर ज़ालिमों के झूठ का पर्दा फाश करतें हैं।  माजरा क्या हुआ है दिल्ली-देहरादून हाइवे पर राजस्थान के रहने वाले कांवड़ियों ने इलज़ाम लगाया कि उनकी कांवड़ पर दो नावाक़िफ़ अफ़राद ने थूक कर कांवड़ को तोड़ दिया है। 

पुलिस ने आनन फानन में एक शख़्स को गिरफ्तार कर लिया और पुलिस चौकी में ले कर आई।  पुलिस ने इस बात की ज़हमत नहीं दिखाई की दरअसल माजरा क्या है।  क्या वाक़ाई किसी ने कावड़ पर थूका था।  महज़ गिरफ्तारी इतने पर भी इन कावड़ के दहशतगर्दों का दिल नहीं भरा उनको तो असल में दंगा फसाद करना था खून बहाना था सो यह आतंवादी उस मासूम शख़्स को उनके हवाले करने की ज़िद करने लगे।  और जब इन काफिरों के खून की प्यास इनकी देवी दुर्गा के जैसी पूरी नहीं हुई तो इन आतंकवादिओं ने पुलिस चौकी को आतिशे नार कर दिया।  और पुलिस के ऊपर हमलावर हो गए।  इस दहशत के हमले में इन कावड़ियों ने काई निजी गाडिओं को तोड़ फोड़ डाला आग लगा दी और हूकूमती जायदाद को ज़बरदस्त तरीके से तेहेस नहस कर या तो  तबाह कर दिया या आग लगा दी।    

कावड़ के आतंकवादिओं के हमले तेज़ होते देख मज़ीद पुलिस फाॅर्स बुला ली गई और आला पुलिस अधिकारी आतंकवादी हमले की जगह पहुंच गए।  बाद में सूबे के एस.पी. ने कहा की कोई नावाक़िफ़ अफ़राद कावड़ को इज़ा पहुंचा सकता है इस खदशे को देखते हुए कांवड़िओं ने बवाल मचाया था।  मतलब कावड़ तोड़ दिया गया यह बात झूट पर मब्नी थी।  कावड़ टूटा ही नहीं है महज़ शक की बुनयाद पर दहशतगर्द हमला कर दिया।  गाड़ियों को आग लगा दी पुलिस चौकी आतिशे नार कर दी।  हूकूमती साज सामान को आग लगा दी।  फिर जो शख्स गिरफ्तार किया गया था उस मासूम का क्या बना।  जब उसके कोई गुनाह ही नहीं किया तो उसको क्यों आज़ाद नहीं किया गया। 

नाज़रीन ऐसे ही हर  झूट  पर  यह  काफिर  अपनों  को  गवाते  रहेगें . अब  इसका  भी अंजाम भयानक तरीक़े से इन कावड़िओं को मिलेगा।  कोई क़ियों थूकेगा  इनके  कावड़  पर।  इस तरह की ज़लील और साजिशी हरकतें तो  हिन्दू शिद्दत पसंदों, संघी दहशतगर्दों और  BJP वालों  की होती हैं।  दुसरे  के  मज़हब  को  कोसना  गन्दी ग़ाज़ीज अदना ज़ुबान बोलना  उनके  मज़हबी  पेशवाओं  को  गाली गलोच  करना।  कावड़ पर थूक दिया कावड़ तोड़ दिया यह सब उस ख़ौफ़ का नतीजा है जो इनको इनकी मौत के रूप में दिख रहा है।  इसीलिए ऐसी झूठी  सच्ची  कहानी  बक  रहें  हैं।  लेकिन हर  बार जैसे इन कट्टरपंथी  काफिरों  का  झूट  का  पर्दा  फाश  हो  रहा  है  मारे  जा  रहें  हैं  इस बार भी होगा।  लेकिन इतना ज़लील और रुस्वा होने के बाद भी अक़ल नहीं  आ  रही  है. कश्मीर  में  मुस्लिम  पुलिस  वालों  को  शहीद  करने  का  इलज़ाम  आज़ादी के जंगजूओं पर  लगाया  था।  मेने  उस  ख़बर  पर बोला था  की  यह  संघी  दहशतगर्दों का  काम  है  हमारा  नहीं  है।  इस झूट का  जवाब  ऊपर  वाला  इन  काफ़िरों  और  आतंकी  हुकूमत  को  जल्द देगा।   उसके  दो  दिन  बाद  मोदी  नेपाल  गया  और  भारत  का  वफंद का  हवाई जहाज़ क्रेश हो गया।  २४  भारतियों समेत कुछ नेपाली भी हलाक हो गए।

अम्बरनाथ यात्रा से क़ब्ल हर शिद्दत पसंद में बोहोत अंगार दिख रही थी हर मस्जिद में शिव लिंग निकल रहा था। उस झूट फरेब का जवाब ख़ुद इनके महादेव ने दे दिया जब अम्बरनाथ में १५ हज़ार शिव भक्तों को हलाक कर डाला। क्योंकि उन्होंने ही दुसरे के मज़हब पर झूट लादा था। अब कावड़ियों की बारी है। जैसा अम्बरनाथ यात्रा बंद हुई वैसे ही कावड़ यात्र बंद करो। जितना झूट फरेब फैलाओगे उतना ही गवाओगे।  जितना भोकोगे उतना भोगोगे।  

Zuber

Friday, 22 July 2022

क़ायद ऐ मुल्क असदुद्दीन ओवेसी को खुली तहरीर।

English version 

Open letter to Qaide Mulk Asaduddin Owaisi

https://autojourna.wordpress.com/2022/07/22/open-letter-to-qaide-mulk-asaduddin-owaisi/

इज़्ज़त माब जनाब असदुद्दीन ओवेसी बदिउल मुल्क।

अल्लाह अज़्ज़ा वजल और उसके फरिश्तों की रेहमत आप पर, आपके भाई, एहले ख़ाना और तमाम अमले पर बना रहे।

सबसे क़ब्ल AIMIM की फ़तहयाबी और हिन्द के दरमियान (एमपी) में फ़ौजिओं के दाख़िल होने पर मेरी जानिब से पुर ख़ुलूस मुबारकबाद क़ुबूल करें।  सूबे दरमियान (MP) में जगहों पर फतह इस बात की गवाह है कि अवाम क़ानून की बालादस्ती चाहता है।  जिसमे सभी के लिए इन्साफ हो साथ ही यह फतह इस बात की भी दलील है की अवाम अपने दस्तूरी हक़ की क़ीमत को समझते हैं।

खरगोन के नताईज देख कर मग़लूब हूँ जहाँ पाकीज़ा फ़ौजिओं ने नाम निहाद धर्म सेनिकों को तीन हल्क़ों पर शिक़स्त किया है।

मैं बहन अरुणा उपाध्याय को मुबारकबाद देता हूं, जो आला ज़ात हिन्दू घराने से ताल्लुक़ रखतीं हैं, फिर भी सब्ज़ इंक़लाबी मोहीम के तहत तहफ़्फ़ुज़ का इख़्तियार चुना।  यह तो बस आग़ाज़ है, जैसा कि मैंने २०१९ से क़ब्ल ही इशारा कर दिया है कि जब सच बनाम झूठ, इन्साफ बनाम नाइंसाफ, फ़र्ज़ी बनाम हक़ीक़ी, ज़हीन बनाम बेवक़ूफ़ के दरमियान जंग का आग़ाज़ हो जाएगा, जो भी सच्चाई के ज़ेरे परचम आएगा उसे कामयाबी मिलेगी। 

मैं क़ौम के रहबर अकबरुद्दीन ओवेसी को तहे दिल से शुक्रिया देता हूं जिन्होंने औरंगाबाद में ओवेसी स्कूल की संगे बुनयाद रखी और फ़क़ीरे  दीन वली कामिल हजरत मुही उद्दीन मुहम्मद रहमतुल्लाह अल्हाहे उर्फ ​​आलमगीर मुगल बादशाह औरगजेब की दरगाह पर खिराजे अक़ीदत पेश की। १५ मिनट के बाद शिद्दत पसंदों, संघी और भाजपा के रकूनों के लिए यह एक और तीखी मिर्ची लगाने जैसा है।

मजलिस के ग़ैर  रजिस्टर्ड तर्जुमान और केडर होने के नाते आपके लिए कुछ तजवीज़ हैं।

१.       फ़ख़्रे मिल्लत असदुद्दीन, अकबरुद्दीन आसमान आकाश आपके और आपके एहले ख़ाना के लिए हुदूत नहीं है। ख़बरदार ख़बरदार रहें क्योंकि मैंने आपको इससे क़ब्ल ही इंतेबाह दी है कि पाकिस्तान के लिए किसी भी अदना दर्जे की ऊल जलूल बातों का इस्तेमाल ना करें। अगर तुम ऐसा करोगे तो तुम मुझे अपने मुक़ाबिल पाओगे। आपने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपनी अदना दर्जे की ज़ुबान का नतीजा कई बार देखे होंगे। ताज़ा मामला सूबे शुमाल का इन्तेख़ाब है, जहां आपकी तंज़ीम अच्छी कारगरदेगी कर रही थी, बिल आख़िर आपने वही किया जो नहीं करना था, आप पाकिस्तान पर इलज़ाम तराशी करने लगे, आपको नतीजा मिल गया। सिफर बटे सन्नाटा। 0/एस.

२.          अगर मुमकिन हो तो तंज़ीम के आईंन में तरमीम करें और ग़ैर-मुस्लिम नुमाइंदगी के लिए सीटें या या या ११ या १२ सीटें मेहफ़ूज़ करें। फिलहाल इस तजवीज़ पर फ़ौरी अमल पेरा होने की ज़रुरत नहीं है लेकिन कम से कम मुस्तक़बिल के लिए पालिसी पर नज़र रखें।

३.          आने वाले इन्तेख़ाब में कुछ नर्म रुख़ के हक़ गोई वाले नुमाइंदों की नुमाइंदगी पर ग़ौर करें। अगर वोह वतन परस्ती के हामी हैं और वतन के लिए अपनी ख़िदमात देने के लिए तैयार हैं और अवाम को जहालत, फ़िरक़ापरस्ती, नाइंसाफी, ख़िलाफ़े आईंन कामों, इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी जैसे अमलों की तारीकी से दूर करने को तैयार हैं।

आ.   रवीश कुमार

बा.    अभिसार शर्मा

सी.    साक्षी जोशी

डी.   प्रज्ञा मिश्रा   मेन स्ट्रीम से।

ऑन लाइन न्यूज इंडिया।

आ.  आदित्य कुमार

बी.   जयंती झा

सी.   धर्मेंद्र

एर्टुगरुल ग़ाज़ी आप और तुर्गुत, बंसी, दूआन की आपकी टीम उम्दा कारगरदेगी कर रही है। आप ख़िज़र को क्यों तलाश रहे हैं कि आकर आपकी मदद करें। आपको दूसरों के लिए ख़िज़र बनना चाहिए ताकि लोग अपनी मदद के लिए  आपकी तलाश शुरू कर दें।

Zuber 

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...