Thursday, 10 December 2020

भारत की अडानी-अम्बानी हुकूमत को ज़बर्दस्त चोट

 अज़ीज़ नाज़रीन,

९२ के दशक में एक इश्तेहार दूरदर्शन पर दिखाया जाता था, जिसमे एक नौजवान कुछ ही सीढ़ियां चढ़ कर थक जाता है, और एक ज़ईफ़ पगड़ी वाले सिख सीना तान कर कड़क अंदाज़ में पूरी उचाई तक जातें हैं।   फिर इश्तेहार में बोला जाता है ६० साल के बूढ़े या ६० साल के जवान।   वही बात आज इस सहाफी को फिर से याद आ गई।   जब ६०-७० साल के किसानों के जोश और जज़्बे में ज़र्रा बराबर कोई कमज़ोरी और थकान नहीं देखी जा रही है।  

नाज़रीन किसान एहतेजाज मज़ीद पेचीदा होने जा रहा है, किसानों ने हूकूमते रिलायंस और अडानी के तमाम आशियात का बायकॉट करने का एलान किया है।   वही १२ तारीख़ से किसान और हुकूमते अडानी-अम्बानी के दरमियान कशीदगी और सख़्त होने जा रही है।   किसानों ने एलान किया है तमाम टोल प्लाजा फ्री कर देंगे और जयपुर दिल्ली नेशनल हाई वे जाम कर डालेंगे।  

किसानों ने एलान किया है अगर काश्त बिल रिलायंस और अडानी हुकूमत की रबर स्टाम्प मोदी ने वापिस नहीं लिया तो तमाम भारत में इसको फैलाया जाएगा।   नाज़रीन ज़ाफ़रानी गुलाम मीडिया किसानों से बेतुके सवाल कर रहें हैं।   इस एहतेजाज में ज़्यादातर पंजाब और हरयाणा के किसान ही क्यों बढ़ चढ़ के हिस्सा ले रहें हैं।  उसका भी जवाब इनके पास मौजूद है।   उनका कहना है भारत के दिगार किसानों का खून पहले ही यह अम्बानी और अडानी जैसे ताजिर हुकूमत की मिलीभगत से चूस चुके हैं अब उनके पास बचा क्या हैं जिसके लिए वोह एहतेजाज का हिस्सा बनेगें।   लेकिन हमारे पास अभी बोहोत कुछ बाक़ी है और उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजिस्थान के जिन किसानों के पास बचा है वोह इस एहतेजाज का हिस्सा हैं।

नाज़रीन दौरे हाजरा में भारत की हुकूमत बिलकुल वैसा ही काम कर रही है जैसा की अंग्रेज़ किया करते थे।   हड़प नीति के नाम से एक नया क़ानून ले कर आये थे।   जिसमे जिस राजा का कोई वारिस नहीं होता था उसकी ज़मीन, जायदाद अंग्रेज़ी हुकूमत की ईस्ट इंडिया कंपनी यानी कंपनी बहादुर की मिलकियत हो जाती थी।   फिर वोह राजा अंग्रेजी भीख (चैरिटी) पर ही ज़िंदा रहता था। 

वैसा ही बिल कुछ भारत की हुकूमत अडानी और अम्बानी को फायदा पहुंचाने के लिए लाये हैं।   पहले भारत के आशियात बेचे, फिर ताज, लाल क़िला, उसके बात हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम तिजारत को फरोख्त कर दिया।   अब प्राइवेट प्रॉपर्टी बिल के नाम से यह हुकूमत किसानों की ज़मीन पर नज़रे गड़ाए हुए हैं। 

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