अज़ीज़ नाज़रीन,
दीफ़ाई फ़ौजिओं को बड़ी बड़ी कामयाबी हाथ लग रही है। दीफ़ाई फौज के सिपेहसालार मेजर जुबेर या सहाफ़ी ज़ुबैर, जौर्नालिस्ट जुबेर, ज़ुबैर सर, बिलडोज़र जुबेर, जुबेर अहमद खान पहले ही आगाह कर चुके हैं की कश्मीर के बाद शुमाल में ख़ाकी दहशशतगर्दों का नंबर लगेगा। एक एक ज़ालिम को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। एक ही नाम का हिस्सा हैं। ज़ुबैर सर ने ख़ाकी दहशतगर्दों को फ़ासी पर लटकाने के बाद शुक्र इलाही अदा किया है।
सूबे शुमाल (उत्तर प्रदेश) में एक ख़ाकी दरोगा वेद प्रकाश ने खुद को फ़ासी के फंदे से लटक कर खुदकशी कर ली है। यह ख़ाकी दहशतगर्द फतेहपुर थाना में तैनात था और अकेला ही रहता था। उसका एहले खाना लखनऊ में रहते हैं। यह दहशतगर्द काफ़ी रोज़ से परेशान चल रहा था।
रात की ड्यूटी मुकम्मल करने के बाद वोह अपने कमरे में गया और तक़रीबन रात की तारीकी में १२ से १ के दरमियान उसको फ़ासी दी गयी।
दूसरा खाकी दहशतगर्द हेड कॉन्स्टेबल जिसको फ़ासी पर लटकाया
गया है वोह हरयाणा के पलवल का था। हेड कॉस्टेबल
रणजीत तेवतिया को बरोज़ जुमा उसके कमरे में फ़ासी पर लटकाया गया है।
अभी २३ फ़रवरी को हरयाणा के फरीदाबाद में सरोज नामी एक ज़नाना
पुलिस कॉन्स्टेबल को उसके अंजाम तक पहुंचा दिया गया है। इन ज़नाना पुलिस वालिओं ने ताला बंदी के वक़्त बुर्क़ा
पोश अपने बच्चे की दवाई लेने जाती हुए दुख्तराने मिल्लत पर ख़ूब लाठियां भांची थी। फिर "का" और एन आर सी एहतेजाज में जो
ज़ुल्म खातूनों पर किया गया था उसका कफ़्फ़ारा इन ज़नाना पुलिस वालिओं को देना होगा। इतना ही नहीं उसके शोहार की भी गर्दन क़लम कर दी
गयी थी।
नाज़रीन ज़ालिम से दिफ़ा करना ज़ुल्म नहीं होता और ना ही वोह
जुर्म है। अपनी जान की हिफाज़त करना दुसरे मज़लूमों
की ज़ालिम, नाइंसाफ, दरिंदे, दहशतगर्दों से हिफाज़त करना महज़ इन्साफ का तक़ाज़ा है। अब इसमें जो ज़ालिम है जिसने ज़ुल्म किया अपने सियासी
आकाओं के कहने पर अवाम को गोलिओं से भूना उसका कफ़्फ़ारा उनको अपनी जानों से देना होगा।
आगे और है, और है।
बिलडोज़र जुबेर