Saturday, 26 February 2022

दीफ़ाई फ़ौजिओं ने दो खाकी दहशतगर्दों को फ़ासी पर लटकाया।

अज़ीज़ नाज़रीन,

दीफ़ाई फ़ौजिओं को बड़ी बड़ी कामयाबी हाथ लग रही है।  दीफ़ाई फौज के सिपेहसालार मेजर जुबेर या सहाफ़ी ज़ुबैर, जौर्नालिस्ट जुबेर, ज़ुबैर सर, बिलडोज़र जुबेर, जुबेर अहमद खान पहले ही आगाह कर चुके हैं की कश्मीर के बाद शुमाल में ख़ाकी दहशशतगर्दों का नंबर लगेगा।  एक एक ज़ालिम को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।   एक ही नाम का हिस्सा हैं।  ज़ुबैर सर ने ख़ाकी दहशतगर्दों को फ़ासी पर लटकाने के बाद शुक्र इलाही अदा किया है।  

सूबे शुमाल (उत्तर प्रदेश) में एक ख़ाकी दरोगा वेद प्रकाश ने खुद को फ़ासी के फंदे से लटक कर खुदकशी कर ली है।   यह ख़ाकी दहशतगर्द फतेहपुर थाना में तैनात था और अकेला ही रहता था।  उसका एहले खाना लखनऊ में रहते हैं।  यह दहशतगर्द काफ़ी रोज़ से परेशान चल रहा था। 

रात की ड्यूटी मुकम्मल करने के  बाद वोह अपने कमरे में गया और तक़रीबन रात की तारीकी में १२ से १ के दरमियान उसको फ़ासी दी गयी। 

दूसरा खाकी दहशतगर्द हेड कॉन्स्टेबल जिसको फ़ासी पर लटकाया गया है वोह हरयाणा के पलवल का था।   हेड कॉस्टेबल रणजीत तेवतिया को बरोज़ जुमा उसके कमरे में फ़ासी पर लटकाया गया है। 

अभी २३ फ़रवरी को हरयाणा के फरीदाबाद में सरोज नामी एक ज़नाना पुलिस कॉन्स्टेबल को उसके अंजाम तक पहुंचा दिया गया है।  इन ज़नाना पुलिस वालिओं ने ताला बंदी के वक़्त बुर्क़ा पोश अपने बच्चे की दवाई लेने जाती हुए दुख्तराने मिल्लत पर ख़ूब लाठियां भांची थी।  फिर "का" और एन आर सी एहतेजाज में जो ज़ुल्म खातूनों पर किया गया था उसका कफ़्फ़ारा इन ज़नाना पुलिस वालिओं को देना होगा।    इतना ही नहीं उसके शोहार की भी गर्दन क़लम कर दी गयी थी। 

नाज़रीन ज़ालिम से दिफ़ा करना ज़ुल्म नहीं होता और ना ही वोह जुर्म है।  अपनी जान की हिफाज़त करना दुसरे मज़लूमों की ज़ालिम, नाइंसाफ, दरिंदे, दहशतगर्दों से हिफाज़त करना महज़ इन्साफ का तक़ाज़ा है।  अब इसमें जो ज़ालिम है जिसने ज़ुल्म किया अपने सियासी आकाओं के कहने पर अवाम को गोलिओं से भूना उसका कफ़्फ़ारा उनको अपनी जानों से देना होगा। 

आगे और है, और है। 

बिलडोज़र जुबेर

Friday, 25 February 2022

सूबे ज़ाफ़रान में दीफ़ाई फ़ौजिओं का हमला।

अज़ीज़ नाज़रीन,

ज़ाफ़रानी सूबे हरयाणा में दीफ़ाई फ़ौजिओं को बड़ी कामयाबी हाथ लगना शुरू हो गयी हैं।  अब ज़ाफ़रानी जेल अधिकारिओं के ऊपर मौत के सियाह बादल मड़लाने लगें हैं।  क्योंकि ज़ैल अब दीफ़ाई  क़ब्ज़े में है।  ख़बर है ४५ साला डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट कुलदीप हुड्डा को मौत के घाट उतार दिया गया है।    डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट कुलदीप हुड्डा नारनौल जेल में तैनात था।  नाज़रीन यह देखिये मालिके मुतलक़ का इन्साफ जिस ज़हर की काश्त ज़ाफ़रानी धड़ल्ले से ज़हर की काश्त कर रहे थे अब उसी ज़हर को पी कर उनके अपने मौत के आग़ोश में जा रहे हैं।   जिस तरह इस जेलर ने ज़हरीला पी कर अपनी ज़िन्दगी को ख़तम कर लिया। 

इस जेलर के ख़िलाफ़ निगरानी दस्ते (विजियन्स) इदारे ने रिश्वतख़ोरी का मामला दर्ज किया था।  उसकी बैल एप्लीकेशन हाई कोर्ट ने कुछ अर्से क़ब्ल मुस्तरद कर दी थी।  जिसके सबब वोह मायूस था और गिरफ्तारी की तलवार उसके ऊपर लटकी हुई थी।   जिसके चलते उसने ज़हरीली आशियात निगल ली।  उसको आनन फानन में शिफ़ाख़ाने ले जाया गया जहाँ जर्राहों ने उसकी मौत की तस्दीक़ की है। 

निगरानी दस्ते (विजियन्स) ने जेल में छापा मार कर जेल को रिश्वत लेते हुए पकड़ा था इस सिलसिले में दो वार्डन गिरफ्तार हो चुके हैं और हूडा की बैल हाई कोर्ट से मुस्तरद हो गई थी। 

जुबेर

Tuesday, 22 February 2022

हिजाब का तूफ़ान

अज़ीज़ नाज़रीन,

ज़ाफ़रानी दहशत ग़ैर ज़रूरी मुद्दों को तूल दे कर ख़ुद अपनी फ़ज़ीहत करवा रहे हैं और मुल्के हिन्द की आलमी सतह पर रूस्वाई।  ट्रिपल तलाक़, "का", एन.आर.सी. को जिस हिसाब से बेतहाशा इश्तेहार किया गया उससे तमाम आलम में रूस्वाई हूकूमते ज़ाफ़रान की ख़ूब हुई।  अब मुद्दा हिजाब का था।  जिसमे ज़ाफ़रानी हाकिम बैक फुट पर खेलने को मजबूर हो गए।  दरअसल यह ज़ाफ़रानी हर मुद्दे पर सियासी नफ़ा लेने की हिकमत करतें हैं लेकिन हर बार उनकी बाज़ी उलटी पड़ जाती है।ट्रिपल तलाक़, "का", एन.आर.सी. क़ानून तो बना दिया लेकिन नाफ़िज़ नहीं कर पाए ज़ाफ़रानी फिर लंगूर-लँगूरनियों के जारिए इतना उछल कूद करने की क्या ज़रुरत थी।  ज़ाफ़रानियों को इस सहाफी के उस अलफ़ाज़ का ख़ूब तीखा लगा था यह सुप्रीम कोर्ट कौन होता है हमारे मज़हब में मदाखलत करने वाला।  अब वैसा ही हिजाब तनज़िया पर ज़ाफ़रानियों को ज़िल्लत और रूस्वाई देखने को मिल रही है। 

कर्नाटक से हिजाब का ग़ैर ज़रूरी तनज़िया का आगाज़ किया जो अब तमाम हिन्द को अपनी आग़ोश में ले चूका है।  अब हो यह रहा है जो  दुख्तराने मिल्लत हिजाब नहीं पहनती थी या पहले कभी भी हिजाब नहीं पहना, वोह भी उसको तवज्जो देने लगी हैं।  जिसकी वजह से हिजाब या स्कार्फ की मांग काफी बढ़ गई है।  हिजाब अब महज़ दुख्तराने मिल्लत तक महदूत नहीं रह गया बरक्स जो ख़ातून (हिन्दू, क्रिस्टी, सिख, दलित) बरहना (नंगी) तस्वीरें देने वालिओं से हिजाब को बेहतर समझ रही हैं वोह भी हिजाब पहन कर घरों से निकल रही हैं।   बॉलिवुड की एक ओबाश नंगी आवारा ख़ातून है जिसको मीडिया में पराये मर्दों के सामने अपनी नंगी छाती, जाँघे और जिस्म की नुमाइश करने का बड़ा ही शौक़ है।  ऐसी ओबाश आवारा लड़कियां ही जिस्म फरोशी के धंदे में शामिल रहती हैं।  जिनके नज़दीक हर रोज़ नया मर्द बदलना एक फैशन समझा जाता है।  फिर ऐसी ओबाश लड़कियां अपने वाल्दैन को भी कुछ नहीं समझती और उनको भी जूते की नोक पर रखती हैं।   

हिजाब की बढ़ती हुई मांग को ले कर बाज़ारों में बुर्क़े या हिजाब की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है।  क्योंकि अब हिजाब महज़ दुख्तराने मिल्लत तक महदूत नहीं रह गया अब वोह ऐसा मुद्दा बन गया है की जिस्म की नुमाइश करने से अच्छा अपने जिस्म और छुपाने के आज़ा को पोशीदा किया जाए।नाज़रीन जैसा की इससे क़ब्ल इस सहाफी ने कहा था की आप ज़बर्दस्ती एक खातून से उसका हिजाब क्यों उतार रहे हो।  वोह बात तमाम खातूनों को अच्छी लगी जिसको पहनना है उसको पहनने दो जिनके नहीं पहनना है उसको आप ज़बरदस्ती नहीं पहनाओ।  लेकिन जो हिजाब पहने है उसको रोड पर उतारना कहाँ तक जाइज़ है। 

बम्बई के मुस्लिम हल्क़ों मोहम्मद अली रोड, मदन पूरा, गोवंडी, मुम्ब्रा में बुर्क़े और हिजाब की ज़बरदस्त बिक्री हुई।  अब दिगर दुकानदार दादर वग़ैरा भी बुर्क़े की बिक्री के बारे में सोच रहें हैं।  रमज़ान और ईद से क़ब्ल बोहोत से अहले हूनूद (मारवाड़ी, गुजराती) ताजिरों ने नए बुर्क़े बनाने के बारे में एक हिकमत तैयार कर ली है। 

मोहम्मद अली रोड पर बुर्क़े के ताजिरों का कहना है की कर्नाटक में हिजाब तनाज़िया के बाद बुर्क़े की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है।  जिसमे सिन रसीदा ख़ातून के बजाये अब स्कूल, कॉलेज के तुलबात के अंदर इसका ज़बरदस्त असर देखा गया है।  ख़ास मुस्कान एपिसोड के बाद तो कॉलेज की तुलबात में एक होड़ से लग गई है।  ताजिरों का कहना है की वोह मुस्कान बुर्क़ा, मुस्कान हिजाब के नाम से ब्रांड का आगाज़ करेगें और उससे होने वाली आमदनी का कुछ हिस्सा पड़ने लिखने की खवाइशमंद ग़रीब तुलबात को वक़्फ़ कर देंगे। 

Zuber 

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...