Saturday, 5 December 2020

सबसे बड़ी वोट हिजड़ा पार्टी कटुआ साबित हुई।

ज़ाराये इत्तेला सहाफी जुबेर

 हैदराबाद निज़ाम स्टेट बा तारिख ०५ दिसम्बर वक़्त सुब ०७.१६ निज़ाम स्टैंडर्ड टाइम

सबसे बड़ी पार्टी वोट कटुआ साबित हुई।   तुम्हारा फेंका हुआ कचरा तुम्हारे ही ऊपर आ कर गिरा।  कट्टरपंथीहिजड़े सदा ओवेसी को वोट कटुआ बोल कर तंज़ कस्ते थे।  लेकिन जो ज़लालत हैदरबाद में हिजड़ों की हुई है उसको वोह तमाम ज़िन्दगी याद रखेंगे।  जिस तरह १५ मिनिट का धमाका आज तक जलन पैदा करता ज़र्ब देता है। लंगूर लँगूरनियों से ले कर तो भारतीय जनखा पार्टी के हिजड़ेशिद्दत पसंद हिजड़ेसंघ के हिजड़े और कभी कभी कांग्रेस के नुमाइंदे १५ मिनिट को गाहे बगाहे याद कर के अपने पिछवाड़े में हुई जलन का एहसास दिला ही देतें हैं।  

नाज़रीन टी आर अस के गुजिश्ता बार २०१६ में ९९ रकूने बल्दिया मुंतखिब हो कर आये थेऔर इस बार महज़ ५६ रह गए वहीँ मजलिस के  पिछली बार ४४ मुंतखिब हो कर आये थे इस बार भी वही फिगर रहा।   दूसरी बात मजलिस ने ५० नुमाइंदों को टिकिट दिए थे और मुंतखिब हो कर ४९ आये वहीँ हिजड़ों ने १५० को नया फौजी बोल कर जंग में ले कर गए थे और उनको तालीम, दरस और मश्क़ देने बड़े बड़े ब्रिगेडियर, मेजर, कर्नल से ले कर तो आतंकवादी धमाका करने वाले आतंकवादियों की फौज खड़ी की थी लेकिन क्या हुआ कितने मौत की आग़ोश में चले गए (हार गए) और कितने जीत कर आये और कितनों ने ओवेसी के इलाक़े में धमाका किया।   जैसे तुम लोग अपने खुद के मुल्क को तबाह करते हो अपने खुद के अवाम को मौत के घाट उतारते हो वैसे ही तुमने धमाका तो किया लेकिन हिन्दू जनता को मौत के घाट उतारा और नुक़सान किया तो टी आर अस का कर डाला।  

नाज़रीन इससे पेश्तर अभी कुछ ४ या ५ रोज़ पहले के एक मज़मून में मेने यही बात कही है पोरस के हाथी, जिन्होंने सिकंदर महान के फौज के हज़ारों फौजी और जंग के मैदान से घबरा कर अपनी ही फौज को कुचल डाला था।  और पोरस क़ैद हुआ उसको चुन चुन के सजा दी गई थी और इतिहास गवाह है उसको फ़ासी भी दी गई थी।  वही हाल इन हिजड़ों का है, इलाक़ा भी तुम्हारा और धमाका भी तुम्हारा।  अवाम भी तुम्हारे तंज़ीम भी तुम्हारे जैसी नुक़सान भी तुम्हारा।  

अब वही बात है अपने ही लोगों की मौत पर बना लो ख़ुशी, जिस तरह से एक दिन का लॉक डाऊन कर के हिजड़ा ऐ आज़म मोदी चाह रहा था की कोविद ख़तम हो जाएगा लंगूर लँगूरनियाँ पुर इत्मीनान थे लेकिन हुआ क्या असर क्या हुआ।  १,५०,००० अभी तक मौत की आग़ोश में चले गए।  

हम तो हमारी जीत पर गदगद हैं। दूसरी बात महाराष्ट्र जहाँ से धक्के मार कर इन ज़ालिमों को निकाला गया है वहां पर अब घुसने की सोच रहे थे वज़ीरे आला उद्धव जी की हुकूमत का तख़्ता पलट करने की फ़िराक में थे घुसपैठिये।  क्या हुआ जूते पड़े।   तीसरी और सबसे एहम बात कोविद से जितने भी ज़ालिम, संघी, बीजेपी (भारतीय जनखा पार्टी) वाले थे वोह मारे जा रहें हैं अब बचेगें तो सिर्फ अच्छे और खुले ज़हन के इन्साफ पसंद अवाम जो फिर कभी उस ज़ालिम दरिंदा सिफ़त, रावण रुपी बादशाह और उसकी फौज को महाराष्ट्र में दाखिल नहीं होने देंगें।

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