Tuesday, 30 April 2024

चीन का बढ़ता रूतबा, ज़ाफ़रानी दहशत की वजह से भारत का ज़वाल।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

ज़ाफ़रानी दहशत, नाइंसाफ़ी, क़त्ल ए आम, बदनज़मी और मोदी की दरन्दगी तानाशाही की वजह से भारत की साख को आलमी हल्क़े में शदीद बट्टा लगा है और भारत का ना सिर्फ़ इज़्ज़त और विकार में बल्कि हर मुद्दे पर तेज़ी से ज़वाल देखा जा सकता है।  

हाल ही के कुछ सालों में ख़ास २०१९-२० से भारत के ना सिर्फ़ तिजारती बल्कि सिफ़ारती रिश्ते भी बेनक़वामी सतह पर काफी कशीदा हुए हैं।  आज की तारिख में कोई भी मुल्क भारत के अशियात को क़ुबूल नहीं कर रहा है।  उनको वापिस लौटा दिया जा रहा है। 

जिस हिसाब से ज़ाफ़रानी महाज़ ने २०१९ में मुतलक़ अक्सरियत हासिल की थी उसका भर पूर फ़ायदा भारत बेन अक़वामी हल्क़े में उठा सकता था।  लेकिन जब वतन की सरपरस्ती एक जाहिल अदना काम करने वाले ऐसे शख़्स के हाथों में होगी जो ज़हर की काश्त करने अक़लियतों ख़ास मुसलमान, क्रिस्टी और सिखों से नफ़रत और पड़ोसी मुल्कों की ज़मीन पर जंग का ख़ौफ़ दिखा कर क़ब्ज़ा करने की ज़ेहनियत रखता होगा तो तमाम आलमी बरादरी में ऐसे मुल्क की मट्टी पलीद होना लाज़िम होता है।    

भारत में बढ़ती हुई मिलावट की वजह से भारत में तय्यार शुदा अशिया और खाने पीने के सामान को आलमी मुमालिक रिजेक्ट कर रहें हैं।  जिसकी वजह से भारत के बेरुन मुल्क फंड में ज़बरदस्त ज़वाल देखा गया है।  मिलावटी और दुसरे तीसरे दर्जे के खाने पीने के सामान बनाने वाली कंपनियों पर भारत की हुकूमत की जानिब से कोई भी हिकमत ए अमली ना करना ज़ाफ़रानी ताजिरों का अपने खाने पीने के सामान में गाये के पेशाब पख़ाने का मिलाना क्रिस्टी और मुस्लिम मुमालिकों में भारत के खाने पीने के सामान को वापिस करने की बड़ी वजह रही है। 

यह बात महज़ भारत को तिजारती अलहदा करने तक महदूत नहीं रही बल्कि २०१४ के ज़ाफ़रानी ग़ुलाम भारत को आलमी हल्क़े से आहिस्ता आहिस्ता अलग थलग किया जाने लगा।  तिजारती सिफारती अलहदगी के बाद भारत में बढ़ती हुई बदअमनी, ज़ाफ़रानी दहशत की शिद्दत पसंदी के चलते भारत में मुक़ीम कई बेरुन मुल्क कपनीज़ ने अपनी तिजारत को बंद कर दिया।  हर मुद्दे पर ज़ाफ़रानी इन्तेहापसन्द हिन्दू अवाम के मज़हबी जज़बात टूट जाते थे।  कम्पनीज़ पर दहशगर्द हमले ज़ाफ़रानी परचम लगाने की ज़िद्द, गाये के पेशाब पख़ाने की नुमाइश, नाग, पत्थर, पानी हवा को पूजने की ज़िद्द कपनीज़ में चर्च या मुस्लिम अवाम के लिए नमाज़ का एहतेमाम करने पर कम्पनीज़ के मुलाज़िमों और आला ओहदेदारों को हर वक़्त अपनी जान का ख़तरा रहता था।  बेरुन मुल्क ज़्यादातर कम्पनीज़ क्रिस्टी मुल्कों के ताजिरों की होती हैं हिन्दू इन्तेहापसन्द अपने मज़हब की रिवायत जब उनके ऊपर थोपेंगे, नहीं मानने की सूरत पर उनको उनके मुलाज़िमों पर तशद्दुत करना मार पीट करना यहाँ तक जान से मार डालना उसके ऊपर भारत की हुकूमत की ख़ामोशी के चलते भारत के अवाम को आला तन्ख़्वाह देने वाली तमाम बेरुन मुल्क कम्पनीज़ या तो पाकिस्तान चली गई या चीन।   ऐसे ही यह शिद्दत पसंद हिन्दू अपने ही मुल्क की अर्थ व्यवस्था को तबाह करने और बेरोज़गारी बढ़ाने में बड़े कारसाज़ साबित हुए।

२०१४ के बाद कोई भी बड़ी बेरुन मुल्क कंपनी भारत में अपनी सरमायाकारी नहीं की है।  अब तो इस देश की क़िस्मत मे तबाही ही लिखी जायेगी।  यहाँ तक हालात ऐसे हो गए जो अवाम कभी बड़ी बड़ी कपनीज़ में मुलाज़िम थे वोह ८०% वाले अवाम किलो सरकारी ख़ैरात पर ज़िंदा है।  अभी तो इन ८०% को भीख मागते हुए देखेगें दुनियाँ वाले।   कियोंके अभी भी ज़हर का पैमाना लबरेज़ है।  हिन्दू मुस्लिम से ऊपर ना ही बीजेपी के सियसतदाँ उठे हैं और ना ही यह ८०% वाले।  २०% वाले तो जैसा पहले थे वैसा ही अभी हैं।  उनके अंदर कोई तबदीली नहीं आई लेकिन इन २०% को बर्बाद करने के चक्कर में ८०% तबाह और बर्बाद हो गए। 

नाज़रीन अब तो हो ऐसा रहा है बेरुन मुल्क सफ़ीर और सदर भारत को ज़लील कर रहें हैं।  इसी साल जनवरी २०२४ को फ्रांस के सदर एमुअल मेक्रो भारत के दौरे पर आये थे, मोदी हस्ब आदत ज़ाफ़रानी बातें और हिंदुत्व की तरफ़दारी करने लगा और उनको गीता तोहफे में दी।  हालांके  सदर मेक्रो आये तो भारत के योम जम्हूरिया में बतौर मेहमान ख़ुसूसी लेकिन वोह निज़ामुद्दीन ओलिया के आस्ताने पर चले गए। क़व्वाली सुनी और घंटों बैठे रहे।   यह वैसा ही है जब मोदी जापान गया था उसने शिंज़ो अबे के लिए भारत से भगवत गीता का तोहफा ले कर गया।  आज जापान में इस्लाम सबसे तेज़ी से फ़ैलने वाला मज़हब है। 

मोदी और यह भगवा वायरस अपनी गलीज़ और गंदी करतूतों की वजह से हर ख़ित्ते में सामाजिक, माशी और सियासी अछूत के जैसे तस्लीम किये जा रहें हैं।  खबर थी के ट्वीटर के सर्वे सर्वा और तिसला मोटरस के चीफ़ एग्जीक्यूटिव  एलान मास्क भारत रहें हैं।  फ़िर यकायक उन्होंने अपना भारत का दौरा केंसल कर के चीन की जानिब रूख़ किया।  जी हाँ नाज़रीन यह वही चीन है जिसने मोदी नाम के इस ज़ालिम दरिंदे को ख़ूब रगड़ा है और चीन महान,  पाकिस्तान का नाम आते ही मोदी, बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू और संघी दहशत को बुख़ार आने लगता है। ऊल जलूल बकवास करतें हैं एक दिन आज़ाद कश्मीर भारत का होगा अगर भारत मे टेस्ला की कंपनी खुलती तो रोज़गार पैसा भारत को सब मिलता।    

नाज़रीन जिस ख़ालिस्तान, शरिया और हलाल से इन ज़ाफ़रानी वायरस के ज़ालिमों को अंगार लगती है उस ही ख़ालिस्तान की हिमायत कनाडा के बाद अब अमेरिका भी आ गया है।  अमेरिका में ख़ालिस्तानी सियसतदांओं को मोदी के इशारे पर ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों रॉ के एजेंटों ने मौत के घाट  उतारा है। 

वहीँ कनाडा के वज़ीर ए आज़म हलाल बैंकिंग और शरिया के उसूलों में तवज्जो दे रहें हैं।   इस साल के बजेट में उन्होंने मुस्लिम अवाम के लिए हलाल मॉर्गेज लोन देने का एलान किया है।  वहीँ भारत में मस्जिदों, मदरसों को तबाह कर उनकी ज़मीन हड़प ली।  मुस्लिम अवाम को तबाह करने के क़ानून बनाये गए उनकी ज़मीनें, बंगले महल सब पर बेदर्दी से बिलडोज़र चला दिया गया। 

अब्दुल की बद्दुआ बोहोत सख़्त होती है जिस जिस मुल्क या शख्स ने अब्दुल की बद्दुआ ली वोह मुल्क और शख़्स बर्बाद हो गया इस बर्बादी में बर्मा, इजराइल के बाद भारत का ही नंबर है।  और जिस ने दुआ ली इंसाफ़ से काम किया उनका जो हक़ है उनको दे दिया अब्दुल की हक़तल्फ़ी ना की वोह मुल्क और शख्स सरसब्ज़ और शादाब हो गया। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Sunday, 28 April 2024

रावण के ज़हरीले क़र्ज़ का हिसाब दरअंदाज़ (घुसपैठिये) चूका रहें हैं।

अज़ीज़ नाज़रीन,

ज़हरीले ज़ाफ़रानी नाग, रावण, दरिंदे, ज़ालिम, डाकू माफ़िया और उसके तमाम ज़ाफ़रानी नागों के ज़हर का क़र्ज़ भारत की अवाम ख़ास गुज्जु, मारवाड़ी, बनियाँ, सिंधी और दीगर कट्टरपंथी हिन्दू अवाम अपनी मौत से चूका रहें हैं।  इन मौतों में ख़ास उसी सूबे के अवाम शामिल हैं जो ज़ाफ़रानी दहशत और माफियां डाकू रावण की तंज़ीम बीजेपी के क़ब्ज़े वाली ज़मीन में रहतें हैं।     

बेरुन मुल्क भारत के दरअंदाज़ों (घुसपैठियों) की मौत की अदद दिन बा दिन बढ़ती ही जा रही है।  जिन मुल्कों में भारत के अवाम की मौतें हो रहीं हैं उनमे ख़ास हैं अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, इजराइल, रूस, ऑस्ट्रेलिया। 

अमेरिका में एक सड़क हादसे में ३ गुज्जु घुसपैठी ख़ातूनों की हलाकत हो गई है।  अमेरिकी सूबे केरोलिना में एक ज़बरदस्त सड़क हादसे में गुजरात की रहने वाली ३ ख़ातून मौक़ा ए हादसे पर ही ढेर हो गई।   अमेरिका में घुसपैठ करवाई गई गुज्जु ख़ातूनों की तेज़ रफ़्तार कार एक पेड़ से टकराए और २० फिट ऊपर हवा में उछलकर ज़मीन में गिर गई।  ऐसा महसूस हो रहा था जैसे किसी ग़ैबी अनदेखी मख़लूक़ ने गाड़ी को ग़ुस्से में हवा में उछाल पर ज़मीन पर दबोच डाला। 

यह तीनों घुसपैठी ख़ातूने गुजरात के आनंद ज़िले की रहने वाली थी जिनकी पहचान रेखा दिलीप पटेल, संगीता भवनेश पटेल और मनीषा राजेंद्र पटेल के रूप में इन घुसपैठी ख़ातूनों के अहले ख़ाना ने की है।

नाज़रीन माफ़िया डाकू मोदी ने २०१४ के बाद अपने मज़हब और सूबे के कई हिन्दू अवाम की घुसपैठ बेरुन मुल्क करवाई है।   इस शैतान दरिंदे को आलमी उस्ताद (विश्व गुरू) बनने की आरज़ू थी जिसके चलते इसने अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ख़लीज मुमालिकों में अपने एजेंटों की घुसपैठ करवाई है जो आये दिन कुत्ते बिल्ली की तरह ढेर हो रहें हैं। 

नाज़रीन इन मौतों से कई बातें साफ़ हो जाती हैं।  एक जो यह सहाफ़ी हर वक़्त मोदी, योगी, अमित, धामी, हेमंत, कट्टर और बीजेपी से निकले हर ज़हरीले नागों को चूनौती देता है जितना भौंकोगे उतना भोगोगे।  दूसरी बात कहता हूँ सीढ़ी सीढ़ी पानी है जैसा करोगे वैसा पाओगे।  

मुसलमानों को घुसपैठी बोला उसके ख़ुद के घुसपैठ किये गए अवाम बेरुन मुल्क आये दिन मारे जा रहें हैं। मंगलसूत्र बिक जाएगा इन ३ मौतों से यह बात तो फिक्स हो गई अब सरकार किसी की भी आये इन ३ का तो मंगल सूत्र बचा रहेगा। कियोंके अब यह तीनों इस दुनियाँ में नहीं है और इनके मंगल सूत्र को कोई भी तंज़ीम मरने के बाद नहीं बेच सकती और ना ही उनकी ख़ैरात कोई भी ज़्यादा बच्चे पैदा करने वाला मुसलमान और घुसपैठी क़ुबूल करेगा। 

मुसलमान ऐसे मसलों में बोहोत हस्सास तबियत होतें हैं।  वोट लेने के लिए डाकू माफियां कुछ भी मुँह से गंदगी निकालेगा तो नहीं चलेगा।  एक मुसलमान मय्यत का खाना नहीं खाता है तो हिन्दू ख़ातून के मरने के बाद उसके मंगल सूत्र का पैसा कैसे खायेगा।  

दरअसल गुजरात का और  हिन्दू अवाम ही बेहिस हो गया है।  मोदी का क्या गया जो मरे वोह अवाम ही थे।  और ऐसे कितने ही मोदी योगी अमित और तमाम बीजेपी के सियसतदांओं की ऊल जलूल बकवास के बाद मारे गए लेकिन अभी तक किसी हिन्दू ने मोदी योगी अमित या किसी भी बीजेपी वाले की ऐसी झूठी फरेबी बातों पर उसको अच्छे से पीट नहीं दिया।  पुलिस वालों को ही ऐसे हालात करना चाहिए की जनता अपना विवेक खो दे फिर जो भी बीजेपी का कारिंदा मंच पर झूठी फरेबी मज़हबी उन्माद फैलाने की बातें करता है उसको अच्छे से लठों से पीट देना चाहिए।  हिन्दू मुस्लिम, हिंदुस्तान पाकिस्तान, मंदिर मस्जिद इसके अलावा कोई मुद्दा ही नहीं हैं। 

जो लंगूर लँगूरनियाँ आ कर बीजेपी के लिए बेटिंग करते हैं उनको भी अच्छे से पीट देना चाहिए।  एक बार दो तीन लंगूर लँगूरनियों की पिटाई हुई हॉस्पिटल में भर्ती हुई के हिन्दू मुस्लिम का भूत फ़ौरन उतर जाएगा। 

ख़ैर अभी तो इन्तेख़ाब के २ ही मरहले पार पड़े हैं अभी ५ फेस मज़ीद बाक़ी है अभी तो हिन्दू अवाम को बोहोत कुछ देखना है और बोहोत कुछ भोगना है।  लेकिन एक बात तो ते है जब जब कोई भी बीजेपी का नुमाइंदा मुस्लिम अवाम के ख़िलाफ़ गलत बयानी करेगा झूट परोसेगा तब  तब  इन को माक़ूल जवाब दिया जाएगा। 

उधर पाकिस्तान ने सख़्त अलफ़ाज़ में डाकू माफ़िया और उसकी हुकूमत को फटकार लगाई है तुम अपनी गंदी ग़लीज़ सियासत में वोट पाने के लिए पाकिस्तान के नाम को मत घसीटों।  जूते पड़े पाकिस्तानी।   

सहाफ़ी ज़ुबेर

Sunday, 14 April 2024

कनाडा में दहशत की नस्ल का The End, ‘इस्लामोफ़ोबिया फ़ैलाने के लिए था ज़िम्मेदार’, नावाक़िफ़ हमलावरों ने गोली मार किया ढेर।

अज़ीज़ नाज़रीन,

जहाँ एक जानिब पूरी दुनियां जंग ए अज़ीम के आगाज़ होने की फ़िक्र में मुब्तेला है वहीँ ज़ाफ़रानी दहशतगर्द अपनी ख़ुद की ज़मीन और मेहफ़ूज़ जन्नत ना सिर्फ हिंदुस्तान में मारे जा रहें है बल्कि बेरुन मुल्क भी चुन चुन कर ढेर किया जा रहा है।  अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, रूस, इजराइल जैसे मुल्क तो ज़ाफ़रानी वाइरस के लिए मौत का फ़रिश्ता साबित हो रहें हैं।  कनाडा में दो रोज़ क़ब्ल भारत के एक ताजिर को गोली मार कर हलाक करने के बाद अब ज़ाफ़रानी ज़हर और दहशत की ज़मीन हरियाणा के एक २३ साला तालिब ए इल्म चिराग़ अंतिल को गोली मारकर ढेर कर दिया। 

क़ाबिल ए एतेमाद ज़ाराये से मालूम हुआ है की मारा गया चिराग़ अंतिल हरयाणा का रहने वाला था और एबीवीपी का मेंबर था।  उसके ज़ेहन में ख़ास मज़हब के अवाम के लिए अज़हद ज़हर और नफ़रत भरी हुई थी।  उसको वैंकूवर में एक कार के अंदर दबोच कर बड़ी बेदर्दी से गोली मारी गई थी।  पुलिस ने एक बयान में कहा कि जब मुक़ामियों ने गोलियों की आवाज सुनी, तो उन्होंने इलाके में एक कार के अंदर  इसको मरा हुआ पाया।  

चिराग अंतिल ने कहने को २०२२ में एमबीए करने के लिए तालीमी वीज़ा पर हरियाणा के सोनीपत से वैंकूवर गया था।  लेकिन पुलिस को शक है की उसको भारत के इशारे पर कनाडा में दरअंदाज़ी करवाई गई थी।  पुलिस का कहना है उसके तमाम वीसा दस्तावेज़ और तालीमी वीसा के ख़तम होने के बाद वर्किंग वीसा के दस्तावेज़ देखने के बाद ही कोई फ़ैसला लिया जाएगा।  कियोंके उसने अपनी डिग्री मुक्कम्मल कर ली थी और नौकरी करने लगा था।  लेकिन हो सकता है वोह काम के नाम पर ज़हर की काश्त करने लगा था।  हरयाणा में भी ज़हर फैलाता था कनाडा में भी वही काम करने लगा था। 

मारा गया ज़ाफ़रानी दहशत की नस्ल का अहल ए ख़ाना ने आक़ा नरेंद्र मोदी और ख़ारजा एस जयशंकर से इंसाफ की गुज़ारिश की है और उसकी लाश को जाला कर खाक़ करने के लिए दहशत की पनाहगाह और दहशतगर्दों के लिए मेहफ़ूज़ जहन्नुम लाने की मांग की है। 

चिराग ए.बी.वी.पी. से जुड़ा हुआ था और बीजेपी के लिए नर्म रूख रखता था।  मक़तूल का भाई रोनित बोला कि उसने १२ अप्रैल की सुबह चिराग अंतिल से बात की थी. उसका भाई बोहोत खुश दिख रहा था फ़िर १३ की की देर शाम उसको गोली मार कर ढेर कर दिया गया। 

जब तक यह साबित नहीं हो जाता की वोह दरअंदाज़ी कर के भारत की इन्तेज़ामियाँ की मदद से कनाडा में गैर क़ानूनी रह रहा था तब तक उसको लाश को कहीं नहीं भेजा जाएगा।  ना ही किसी को सौपा जाएगा।  यह एक आलमी क़ानून है किसी भी मुल्क में ऐसे ही दहशत मचाने के लिए मन माने तरीके से नहीं घूस सकते। 

उसके खानदान के दुसरे अफ़राद से पूछ ताछ की जाएगी।  कनाडा पुलिस उसके भाई को तलाश रही है कभी भी उसकी भी गिरफ्तारी हो सकती है।  इन अफ़राद की मंशा क्या थी और किस गिरोह और दहशतगर्दों से उनका ताल्लुक़ था यह सारे सवाल हैं जिसका जवाब अभी तक पुलिस के पास नहीं है। 

नाज़रीन वाज़े रहे की २०१५ के बाद भाजपा के इशारे पर बेइंतेहा दरअंदाज़ गैर क़ानूनी तरीके से बेरुन मुल्क घुसाए गए हैं।  कभी तालीम के नाम पर फ़र्ज़ी डिग्री ले कर कभी काम के नाम पर दरअंदाज़ी करवाई गई है।  जहाँ भारत के दहशगर्द बड़े पैमाने पर घुसाए गए हैं उनमे शामिल हैं अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, दुबाई, अबू धाबी, शारजाह, बहरैन, पाकिस्तान, अफग़ानिस्तान।

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Saturday, 6 April 2024

अमेरिका में फ़िर हुई हिन्दू तालिब ए इल्म की मौत।

 अज़ीज़ नाज़रीन,

एक बार फ़िर अमेरिका में भारत के तालिब ए इल्म की मौत हो गई।  अमेरिका में भारतियों की बढ़ती हुई अमवात से भारत का सिफारातखाना खासा परेशान है।  लेकिन राजा को इसकी कोई फ़िक्र नहीं हैं वोह तो मार काट की बातें किये बग़ैर रह नहीं सकता।   

इस बार अमेरिका के ओहियो में एक भारतीय हिन्दू तालिब ए इल्म हलाक हो गया।  मारा गया तालिब इल्म उमा सत्य साईं गड्डे की मौत से सिफरातखाने को शदीद धक्का लगा है।  नई यॉर्क में भारत के सिफरातख़ाने ने कहा की उसकी लाश को भारत पहुंचाने में हर मुमकिन मदद की जाएगी।  जहाँ की गंदगी वही पर जलेगी वहीँ पर ख़ाक होगी और उस ही जगह के पानी में बहेगी।  जैसा करोगे वैसा भरोगे। 

#भाई मुख़्तार साहब

नाज़रीन ऐसा कहतें हैं अगर वतन का हाकिम जल्लाद सिफ़त, दरिंदा, ज़ालिम, नाइंसाफ होगा तो उसको हर जानिब मार काट ही दिखेगी।  वोह दरिंदा इंसानी लाशों और उनके सरों को काटने पर अपनी कामयाबी दिखायेगा।  ऐसा करते वक़्त वोह यह भूल जाएगा की तुमने महज़ २० मारे होंगे और तुम्हारे ८० मारे गए वोह क्या है। 

पाकिस्तान में २० दहशतगर्दों की हलाकत को ज़ालिम राजा इन्तेख़ाबी मोहीम बना रहा है और अपनी तरक़्क़ी के कामों से उनकी हलाकत को जोड़ रहा है।  बेवक़ूफ़ है।  जितनी गंदगी इसके ज़ेहन में गाये के नाजिस्त (पखाने, पेशाब) के नाम पर भरी हुई है उतनी ही गंदगी उसके मुँह से अलफ़ाज़ के रूप में निकल रही है।   तुमने २० दहशतगर्दों को मार गिराया लेकिन ४० से ज़ाईद मेहेज़ इस साल के आगाज़ से अब तक बेरुन मुल्क तुम्हारे जो तालिब ए इल्म नौजवान सलाहियत मारी गई उसका क्या?  अकेले अमेरिका में कमो बेश १० भारतीय नौजवान अभी तक हलाक हो गए हैं। 

फ़िर यह सभी तालीम लेने गए थे।  कियोंके तुम्हारे मुल्क में नफ़रत का बाजार इतना गर्म है की हर ख़ित्ते में ज़हर भर चूका है।  स्कूल, कॉलेज से ले कर यूनिवर्सिटीज़ और आला तालीम में हर जगह वही ज़ाफ़रानी दहशत और ज़हरीली सोच।  यह सभी भारत का मुस्तक़बिल थे कोई B.Tech  M.Tech कोई और कोई स्पेस रिसर्च में दीगर आला तालीम लेने गया था।  अगर २० दहशतगर्दों की मौत तुमको सुकून देती है और तुम भारत के आला तालीम ज़ेहन नौजवानों की मौत को उसका कफ़्फ़ारा मान कर जश्न मना रहे हो तो तुमसे बड़ा जाहिल और कम अक़्ल कोई दूसरा हाकिम हो ही नहीं सकता। 

एक तुम अपने नौजवान हुनर को दहशत से मुमासलत दे रहे हो दूसरा तुम अपने तालिब ए इल्मों को "दहशतगर्द" से मिला रहे हो।  उनकी मौत का जश्न मना रहे हो लेकिन इनकी मौत का कोई ग़म नहीं है।

बढ़ती हुई मौतों से बेरुन मुल्क रहने वाले भारतीय अवाम के लिए ख़तरे की घंटी बजना शुरू हो गई है और वोह अब भारत के बहार भी अपने तहफ़्फ़ुज़ के लिए परेशान हैं।  उन्होंने भारत में बढ़ती हुई नफ़रत, फ़िरक़ापरस्ती, मार काट को देखते हुए भारत को छोड़ा था लेकिन भारत की हुकूमत की गंदगी और अक़लियतों ख़ास मुस्लिम, क्रिस्टी और सिख्खों के साथ की गई मार काट की हिकमत ए अमली अब बेरुन मुल्क क्रिस्टी और मुस्लिम मुल्कों में भारतीय  अवाम के लिए मौत का फ़रमान ले कर आ रही है। 

वहीँ अहमदाबाद  गुजरात का ज़ाफ़रानी दहशतगर्द माफिया डॉन आशीष कूकड़िया बीकॉम कर कर दुबाई से स्मग्ग्लिंग करने के इलज़ाम में गिरफ्तार किया गया है।  उसका जोड़ीदार ज़ाफ़रानी दहशतगर्द माफ़िया, डॉन, दरिंदा अनंत शाह और उसके ५ स्मगलरों को गिरफ्तार किया है।  जो इनका कल्चर है वही इन लोगों ने दिखाया।  इसको सिखाया ही यही जाता है मुस्लिम मुल्कों को तबाह करो लेकिन यह अपने ही मुल्क को बर्बाद कर बैठे।  गुजरात का माफिया डॉन दरिंदा मुस्लिम मुल्कों को माशी दहशतगर्द हमला करने के अपनी मोहीम में दुबाई से अहमदाबाद गुजरात में सोना स्मगल करते थे कियोंके दुबाई में सोना सस्ता है और उसके ऊपर कोई टेक्स नहीं है।   

तमाम मीडिया के लोग बड़ी बड़ी बातें हुकूमत के नाम से करतें हैं।  अगर भारत में आला तालीम के नाम पर ज़हर ना भरा जाता मेडिकल और टेक्नोलॉजी में आरएसएस और माफ़ी वीर के सब्जेक्ट नहीं पढाये जाते तो काहे को तालिब ए इल्म बेरुन मुल्क जाते।  अगर भारत में सभी के लिए रोज़गार के मौक़े होते, अमन होता, फ़िरक़ापरस्ती का नाग कहीं नहीं होता तो काहे को भारत का नौजवान नौकरी करने अपनी जान को खतरे में डाल कर जंगी महाज़ पर रूस और इजराइल जाता। 

हुकूमत ने तो ज़हर भरने का काम करना है अब्दुल को टाइट रखना है।  कोई ज़ाफ़रानी साधू उठ कर राम के नाम पर मज़ीद ज़हर भरेगा।  हम राम का मंदिर बनातें हैं और राम नाम सत्य भी करतें हैं।  लेकिन उस राम नाम सत्य में तुम्हारे कितने मारे गए वोह नहीं बताएगा।  अगर मंदिर बनने से ही तमाम मसले हल हो जातें तो २०१५ से ले कर अभी करोड़ों भारीतय भारत से बेरुन मुल्क काहे को चले गए।  सिर्फ़ अमन और अपनी जानी की अमान की वजह से चले गए। 

लेकिन इस शैतान की काली साया बेरुन मुल्क रह रहे भारतीय ख़ास हिन्दू अवाम को मौत की भयानक अंदर में निगलती जा रही है।  कियोंके मुस्लिम, क्रिस्टी और सिखों पर ज़ुल्म नाइंसाफी हिन्दू हुकूमत कर रही है और उनका क़तल हिन्दू दहशतगर्द कर रहें हैं तो उसका कफ़्फ़ारा हिन्दू अवाम को भी देना होगा।भारत में और भारत के बहार भी। 

 

सहाफ़ी ज़ुबेर की पेशकश।

Friday, 5 April 2024

इजराइल और ईरान के दरमियान जंग का ख़तरा बढ़ा।

मोहतरम आली जनाब

मौलाना क़ल्ब जव्वाद साहब

मुस्लिम मज़हबी रहनुमा और दानिशमंद

लखनऊ सूबा शुमाल

 

अज़ीज़ मौलाना साहब,

 

इजराइल की जारिहाना दहशत से ग़ाज़ा तो तबाह हो चूका है, अब उसकी ग़लीज़ और गंदी नियत इस्लामिक ममलेकत ईरान की जानिब हैं।  अभी दो रोज़ क़ब्ल सीरिया में ईरान के सिफ़ारात ख़ाने पर मिसाइल हमला करने के बाद  बोहोत मुमकिन है की एक दो रोज़ के अंदर इजराइल की दहशत का आगाज़ ईरान की जानिब हो जाए।  

इससे क़ब्ल अक़वाम मुत्तहिदा की जानिब से मज़लूम ग़ज़ा के मासूम बच्चों और ख़ातूनों को खाना फ़राहम करने वाली टीम पर मिसाइल हमले में बेरुन मुल्क अफ़राद हलाक हुए थे। 

आपसे, हिन्द में आपके हमख़याल तमाम मौलानाओं और बोहरी उलेमाओं से गुज़ारिश है की वोह ज़ाफ़रानी हुकूमत से पुर ज़ोर तरीक़े से कहें  की इजराइल अपनी जारिहाना दहशत को फ़ौरन बंद करे नहीं तो हुकूमत हिन्द उसका सिफ़ारत ख़ाना बंद कर देगी और जंग में इजराइली दहशत के ख़िलाफ़ फौज उतारेगी। 

हिन्द में इंतेखाब होने वाले हैं अगर हुकूमत हिन्द इजराइल के ख़िलाफ़ फौजी हिकमत करती है तो हमारी पूरी कम्युनिटी का वोट आपको मिलेगा नहीं तो हम आपको वोट नहीं करेगें। 

मोदी हुकूमत की ईरान के सिफारातखाने पर इसरायली दहशतगर्द हमले की मज़्ज़म्मत काफी नहीं है इजराइल से तमाम ताल्लुक़ तोड़ने होंगे।  अगर इजराइल का हमला ईरान पर होता है और मोदी हुकूमत खामोश तमाशबीन बन कर एक और इस्लामिक मुल्क की तबाही देखती रहती है तो लखनऊ, शुमाल और तमाम हिन्द से किसी भी शियाबोहरी मुस्लिम को मोदी और बीजेपी को वोट नहीं करना चाहिए। 

दूसरी बात मोदी इन्तेज़ामियाँ ईरान को ख़ामोश रहने की तरग़ीब करेगा कियोंके वोह नहीं चाहता है की उसके ताल्लुक़ात इजराइल की दहशत से कशीदा हों।  ईरान को अपने नुकसान का पूरा बदला लेने का हक़ है।  जब इजराइल ने ईरान के सिफ़ारात ख़ाने पर हमला किया था तब उसको सोचना चाहिए था की जंग का तीसरा मरहला खोलने से नुकसान किस को ज़्यादा होगा।  यह जंग आलमी जंग की जानिब गामज़न हैं। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...