Tuesday, 30 May 2023

भारत के दरअंदाज़ मुल्क कश्मीर में दाखिल होते ही मार गिराय गए।

अज़ीज़ नाज़रीन,

दिफ़ाई सरबराह ने फिर एक बार मोदी इन्तेज़ामियाँ को सख़्त इंतेबाह की है कश्मीर भारत का लाज़मी हिस्सा नहीं है और भारत अपनी नापाक हरकते अपने जासूसों दरअंदाज़ों को हमारी जन्नत जैसे ज़मीन में घुसाने की हिमाक़त ना करें नहीं तो हिन्द इन्तेज़ामियाँ अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

वहीँ बरोज़ मंगल एक बड़ा हादसा हो गया अमृतसर से कटरा (जम्मू कश्मीर) वैष्णो देवी जाते हुए खाई में गिरी बस १२ यात्री जहन्नुम वासिल हो गए और २५ शदीद ज़खीमी हो गए हैं।  इस हादसे पर दिफ़ाई सरबराह ने कहा है भारत की हवा को क़ब्ज़े में करने की जंग कश्मीर से ही शुरू हुई थी आज दो साल बाद पूरे भारत की हवा दिफ़ाई फ़ौजिओं के क़ब्ज़े में है।  उसी हिसाब से अब सड़क और ज़मीन को क़ब्ज़े में करने की जंग भी कश्मीर से ही शुरू हो चुकी है जल्द ही कश्मीर की पूरी सड़क और ज़मीन हमारे क़ब्ज़े में होगी उसके बाद ज़मीनी जंग में पूरे भारत की ज़मीन को क़ब्ज़े में करने की होगी जंग शुरू। 

वहीँ एक और हमले में भारत हुकूमत का जासूस और काफिर दीपक उर्फ़ दीपू को दिफ़ाई फ़ौजिओं ने कश्मीर में गोलिओं से भून कर छलनी कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई।  उसको भारत हुकूमत की फौज का महफ़ूज़ कवर हासिल था फिर भी मारा गया जासूस।  मोदी भक्त बीजेपी के ज़ाफ़रानी कीड़े १० लाख भारत की फ़ौज और २ लाख संघी दहशतगर्दों के कश्मीर में मौजूद होते हुए भी मेहफ़ूज़ नहीं हैं।  पर्यटन और संस्कृती को नहीं दिखा पा रहे तो बेरुन मुल्क अवाम क्या ख़ाक मेहफ़ूज़ होंगें. लँगूर लँगूरनियाँ बड़ी बड़ी बातें करतें हैं की श्रीनगर मे भारत का पर्यटन अधिवेशन कामयाब रहा.  मोदी जी जीत हुई पाकिस्तान को शाकिस्त हुई वग़ैरा। 

३७० मंसूख किया उसका क्या असर हुआ बल्कि कश्मीर गया हाथ से।  अब इन्तेख़ाब से क़ब्ल अपनी कामयाबी को बतायेगें और ३७० पर हिन्दू अवाम के ज़ेहनों लंगूर लँगूरनियों की जानिब से ज़हर भरेगें।  लेकिन उन अहमक़ों को इतना भी शऊर नहीं होगा की मक़सद ३७० हटाना था ही नहीं।  बल्कि कश्मीर को भारत का लाज़मी हिस्सा तसव्वुर करवाना था और पंडितों को वहां पर मुक़ीम करना था।  और खून ख़राबे को रोकना था।  तो क्या वोह हदफ़ भारत हुकूमत हासिल कर पाई।  बल्कि कश्मीर तो गया हाथ से।  लेकिन वोह बात नहीं बताई जाएगी की भारत सरकार कश्मीर खो चुकी है और अब भारत के दीगर हिस्सों के ऊपर सख़्त मुश्किल में फसी हुई है।   

लंगूर लँगूरनियों और भक्तों अपने पापा की जितने भी तारीफ़ करना है करते रहो मोदी मोदी मोदी लेकिन पनोती है मोदी मान लो इस बात को।  जो भी काम पहली दफा किया बर्बाद हुआ।  कश्मीर भारत से टूटा वोह किस लिए २०१९ में पहली दफा वोह काम कर दिया जो सदियों से नहीं हुआ।  गया हाथ से।  १० चीते लाया था मोदी तो परलोक सिधार गए।  अभी तो नए ऐवांन का कुछ सच्ची नहीं हैं।  जो लंगूर लँगूरनियाँ मोदी की बड़ी कामयाबी बता रहें हैं।  खाकी चड्डियाँ फोटों सांझा कर रहें हैं।  सेल्फी ले रहें हैं क्या पता यह उनकी आख़िर सेल्फी हो।  पहले ही इजलास  ऐसा कुछ हो जाए की सभी बीजेपी वाले मारे जाएँ।  नील नदी में जैसे तमाम फ़िरोनी समा गए थे और मारे गए थे।

दिफ़ाई सरबराह ने मोदी को इंतेबाह की है कश्मीर पर ज़िद्द की कश्मीर गया भारत पर ज़िद्द करोगे भारत जाएगा।  बेहतर है जितना मिल रहा है उतना ले लो और अपने भक्तों शिद्दत पसंद काफिरों बीजपी वालों लंगूर लँगूरनियों को ले कर दफा हो जाओ।  ओर्रिसा वाला हिस्सा जो भगवा दिखाया गया है ५ जून २०२२ के नक़्शे में वही होगा भारत बाक़ी हिस्सा पाकिस्तान का होगा और कुछ आज़ाद रियासतें होंगीं।   

इस हिस्से में तस्लीमा नसरीन, रिज़वान जैसे वोह तमाम मुनाफ़िक़ भी जायेगें जो मुस्लिम नाम रख कर मिडिया के सामने इस्लाम के ख़िलाफ़ ऊल जलूल झूठी बकवास करते थे या नहीं तो वोह सब मारे जायेगें। तारिक फतह मारा गया अगला हदफ़ जल्द ज़ाहिर होगा। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Monday, 29 May 2023

हम जन्नत डंडे के ज़ोर पर ले लेंगें।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज की कहानी मिल्लत के नौवजवान बच्चों को वक़्फ़ है और ख़ाकसार का सवाल है मुफ़्तियाने इकराम और फतवा देने वाले हज़रात से है की क्या ऐसा हो सकता है।   

अरब से कोसों दूर एक तीन साहीली मुल्क था।  इस्लाम का इब्तेदाई मरहले का आग़ाज़ हो चूका था।  और इस्लाम अरब की हुदूद से बहार निकल कर अब बेरुन मुल्क मुमालिकों में भी पहुंच चूका था।  वोह तीन साहिली मुल्क भी इस्लाम की ख़ुश्बू से बेअसर ना रह सका और अवाम के अंदर इस्लाम दाख़िल होना शुरू हो गया। 

उस मुल्क के एक क़स्बे में अभी उस हद तक इस्लाम नहीं पहुंचा था।  मुसलमानों की बस्ती काफ़ी कम थी।  लेकिन जितने भी थे सब पुख़्ता ईमान वाले थे।  हालांके नवजवान तबक़े में नमाज़ की उस तक तक तड़प नहीं देखी जाती थी।  कभी पढ़ ली कभी छोड़ दी।  नवजवान पस्त इबादत करते थे लेकिन किरदार उनका आला था।  ऐसा ही मामला चलता था।  उस क़स्बे के चारों जानिब कुफ्र की बादशाहत थी।  उस क़स्बे में सिर्फ एक मस्जिद थी। 

नवजवान तबक़ा बजाये नमाज़ और मज़हब पर ज़्यादा तवज्जो देने के वर्ज़िश और लाठी डंडे की मश्क करने में ज़्यादा तवज्जो देता था।  सुबह के वक़्त लठ से करतब करना और वर्ज़िश में मशग़ूल रहना।  वक़्त मिलता तो नमाज़ भी पढ़ लेते थे।  जब भी इमाम साहब मस्जिद में नमाज़ पढ़ाने जाते नवजवानों को नमाज़ की दावत देते। 

इमाम साहब कहते नमाज़ नहीं पढोगे तो जन्नत कैसे मिलेगी।  उस पर एक नवजवान कहता में जन्नत डंडे के ज़ोर पर ले लूंगा।  इमाम साहब “ला होल वला क़ुव्वत” बोलते और आगे चल देतें। 

एक रोज़ रात के आख़िर पहर फज्र से क़ब्ल शिद्दत पसंद काफ़िरों ने मस्जिद पर हमला बोल दिया, जैसे की हज पर जाते हुए ज़ायरीन मक्का पर हाल ही में हमला कर काफ़ी को सख़्त ज़ख़्मी कर दिया और बस को भी तोड़ फोड़ दिया।  एक शोर उठा मस्जिद पर हमला हो गया है।  वोह तमाम नवजवान कुछ वर्जिश में मशग़ूल थे कुछ अभी तक उठे ही नहीं थे सो रहे थे।  मस्जिद पर हमले की बात सुनते ही जो सो रहे थे वोह उठ खड़े हुए और जो वर्ज़िश में मशग़ूल थे उन्होंने सभी ने अपने अपने डंडे उठाये और मस्जिद की जानिब भागे। 

अब कुफ्र और मोमीनों के दरमियान ज़बरदस्त तसादुम हुआ।  जिसमे कई शिद्दत पसंद दहशतगर्द हलाक हुए कई ज़ख़्मी और बचे कूचे फ़रार हो गए।  लेकिन हक़ और बातिल की इस जंग में कई नौवजवान शदीद ज़ख़्मी हो गए। 

इमाम साहब नमाज़ के लिए मस्जिद की जानिब आ रहे थे ज़ख़्मियों की तीमारदारी की और शदीद ज़ख़्मी का सर अपनी ज़ानों पर रख उसके सर को सहलाने लगे।  उस नौजवान ने इमाम साहब से पूछा मस्जिद के क्या हाल हैं उन्होंने ने जवाब दिया अल्लाह का शुक्र है बिलकुल मेहफ़ूज़ है।  फिर उसने इमाम साहब से कहा इमाम साहब में मर रहा हूँ क्या मुझे शहीद का दर्जा मिलेगा।  मेरे डंडे की वजह से मस्जिद मेहफ़ूज़ रही तो क्या अब मुझे जन्नत मिलेगी।  और अगर मिलेगी तो क्या मेने जन्नत डंडे के दम पर हासिल नहीं कर ली।  और वोह नौजवान फ़ौत हो गया। 

इमाम साहब उसकी शहादत पर बेसाख़्ता चीख़ पड़े हक़ हक़ हक़ और अपने दोनों हाथों को बारगाहे ख़ुदावन्दी में उठा कर शहीद के खून से भीगे अपने दामन को फ़ैला कर दुआ की ऐ बारी ताला मेरी जितने भी नेकी है इस बन्दे के नाम लिख दे और इसके गुनाहों को बक्श दे इसको जन्नतुल फ़िरदौस में हज़रते इमाम हुसैन के शाना बा शाना महल आता फ़रमा। 

नौजवान की शहादत पर तमाम क़स्बे के अवाम ना सिर्फ मुस्लिम बल्कि हर तबक़े के अवाम उन दहशतगर्दों को कौस रहे थे और सबकी आँखे उस नौजवान की शाहदत पर आंसू बहा रही थी। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

Sunday, 28 May 2023

मरदूत मोदी की मनहूसियत का एक और सबूत मिल गया। हाई टेक नए ऐवान पर आफ़त के बादल।

अज़ीज़ नाज़रीन,

मोदी नाम के इस शैतान की मनहूसियत का काला साया हिंदुस्तान के मुस्तक़बिल पर जब से पड़ा है भारत देश जो कभी आलमी बरादरी के लिए हर मुद्दे पर एक मिसाल हुआ करता था वोह अब  फ़िरक़ापरस्ती, दहशत, नाइन्साफ़ी, जुर्म, नस्ल कूशी के लिए मिसाल बन गया है।  जिसके लिए मोदी के मनहूस मरदूत, लानती काला साया ज़िम्मेदार है।

तबाही और बर्बादी की इस दास्ताँन में ज़ाफ़रानी दहशत बीजेपी के सूबे दरमियान (मध्य प्रदेश) से है।  जहाँ हिन्दू अक़ीदत के शहर उज्जैन में क़ुदरत के तबाही और बर्बादी की दास्ताँन बता रहें हैं।   जिले में तेज आंधी तूफ़ान के साथ करीब आधा घंटे तक भारी बारिश हुई. आंधी की वजह से तबाही का शैतान महाकाल लोक में नसब की गई सप्त ऋषियो के ६ मुजस्समे टूट कर गिर गए और वहां मौजूद अकीदतमंद बाल-बाल बच गए. हालांकि, इस दौरान कोई इंसानी जान नहीं गयी।  क़ुदरती क़ेहर और तबाही की इत्तेला मिलने पर कलेक्टर मौके पर पहुंचे और मुजस्समों को दोबारा नसब करने के हुकुम नाफ़िज़ किये हैं।  अब सवाल यह उठता है की ऐसी हर बार क़ुदरती क़ेहर के आगे हूकूमती निज़ाम बेबस और लाचार दिखेगा और एक बार के किये हुए काम को दुबारा करने में क्या मुस्लिम टेक्स दीदगान के टेक्स के साथ बदसुलूक नहीं है।

नाज़रीन इन मुजस्समों को ज़ालिम तरीन सनकी तानाशाह और मौजूदा हिटलर नरेंद्र मोदी ने ११ अक्टूबर २०२२ को 'महाकाल लोक' का लोकार्पण किया था. महाकाल लोक में सप्त ऋषियों के ६ मुजस्सम्मे गिरकर टूट गए हैं.  जिसमे १० से २५ फीट बुलंद मुजस्समे के क़ुदरत की मार ने हाथ पैर तोड़ डाले।  और इन्तेज़ामियाँ एक नपुंसक के जैसे क़ुदरत की इस पिटाई मार से बेबस, कमज़ोर और लाचार दिखी।  इस कमज़ोरी में अपने आपको सख़्त तरीन ज़ालिम तरीन शैतान नाथूराम का नाजाइज़ नस्ल नरोत्तम मिश्रा भी शामिल है।  जो सिर्फ़ भोंकना जानता है लेकिन क़ुदरत की मार के आगे अपनी बेबसी और नपुंसकता को पोशीदा नहीं कर सकता।  यह मुजस्समें लाल पत्थर और फाइबर रेनफोर्स प्लास्टिक से बने हैं. इन पर एमपी बाबरिया फर्म से जुड़े गुजरात, ओडिशा और राजस्थान के कलाकारों ने कारीगरी की है.  अब क़ुदरत ने इनके हाथ पैर तोड़ डाले और सर क़लम कर दिया।  

। सर तन से जुदा ।  

सूबे दरमियान में हर हिन्दू शिद्दत पसंद मोदी गुलाम है और दहशत का हामी।  फिर हर हिन्दू दे पैसा और उन मुजस्समों को नसब करवाए।  वैसे भी मुस्लिम अवाम का किसी मूर्थी और मुजस्समे से कोई लेना देना नहीं है।  ठीक है एक बार मुजस्समों को नसब करने में मुस्लिम के टेक्स का पैसा लगा दिया हर बार ऐसा होगा तो हुकूमत के ऊपर यह इख़राजात काहे को पढ़ रहा है।  खरगोन में मुस्लिम बस्तियां बेदर्दी से तबाह कर दी थी कोई हिन्दू आगे आया था मुसलमानों को इमदाद देने।  या कलेक्टर ने फौरी गिराए हुए मकानों को दुबारा बनवाने का हुकुम नाफ़िज़ किया था।  जबकी हर घर बेगुनाहों का गिराया गया था।  

नाज़रीन ज़ालिम तरीन सनकी तानाशाह और हिटलर मोदी द्वारा किया गया हर काम बर्बाद हो रहा है।  गंदे एक्सप्रेस से ले कर भारत का हर वोह हिस्सा जहाँ यह शैतान पहली बार गया तबाही साथ ले कर गया।  यहाँ तक की अब तो बेरुन मुल्क में जहाँ जहाँ पहली बार गया वहां बर्बादी हुई है।  इस ज़ालिम ने नया  ऐवांन बनाया तो है लेकिन मुझे तो कुछ सच्ची नहीं लग रहा है।  जितने भी बीजेपी के और कट्टरपंथी काफिर संघी दहशतगर्द इसको मोदी की कामयाबी  बता रहें हैं कहीं सभी बीजेपी के रकून पार्लिअमान एक साथ क़ुदरती केहर से ना मारे जाएँ।  ना रहे बांस और ना बजे बासुरी।  क़ुदरत के आगे यह शैतान मोदी भी बेबस है।  जब फ़िरोंन, क़ारून, शद्दाब सभी मारे गए तो मोदी किस खेत की मूली है।

शद्दाब ने अल्लाह के मुक़ाबले में अपनी जन्नत बनाई थी।  उसने निहायत ही हाई टेक जन्नत बनाई थी किसी चीज़ की कमी नहीं छोड़ी थी।  कहीं से कहीं तक कोई कमी नहीं निकाल सकता था।  लेकिन उसके अंदर दाखिल होने से पहले ही घोड़े से उतरा और मारा गया।  शद्दाब के पैदा होने और परवरिश से मौत तक की भी बोहोत ही दिलचस्प दास्ताँ हैं।  यहाँ तक की उसकी मौत पर जिब्राईल अमीन भी थोड़ी देर सोचने पर मजूबर हो गए की इस शैतान जल्लाद ने अल्लाह से टक्कर ले कर इतनी हाई जन्नत बनाई लेकिन उसका सूख एक लम्हा भी नहीं भोग पाया।  तब अल्लाह ने पूरी इसकी परवरिश से जवानी तक की कहानी जिब्राइल अमीन को सुना दी।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब चाँद तारे पर सियासत।

अज़ीज़ नाज़रीन,

मेरठ में हुए हिन्दू ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों के पसंदीदा नग़्मे पर मुस्लिम वतन परस्त मजलिस के रकून बल्दिया के दर्ज एतेराज़ पर ज़ाफ़रानी बीजेपी के दहशतगर्दों का मजलिस के रकूनों पर जान लेवा हमला करने वाली ख़बर पर लिखे मज़मून पर अब सियासत का आगाज़ हो गया है।  जिसमे चाँद तारे का भी ज़िक्र था।  

नाज़रीन मजलिस एक वतन परस्त और बाबा साहब आंबेडकर के बनाये हुए दस्तूर का पासो लिहाज़ रखने वाली तंज़ीम है।  फिर पाकिस्तान जिन्ना ऐसे बेहूदा फ़लसफ़े और तास्सुरात किसी और ने नहीं बल्कि बीजपी की जानिब से ही किये गए थे।  जब AIMIM  के नुमाइंदों ने उस ग़लीज़ बेहूदा और दहशत को फ़रोग़ देने वाले नग़्मे के ख़िलाफ़ एहतेजाज दर्ज किया तो बीजेपी सियासतदां और रकून राज्यसभा लक्ष्मीकांत वाजपेयी वहीं बीजेपी के पार्षदों का कहना था कि:-

१.           यह जिन्ना को मानने वाले लोग हैं। 

२.          यह ओवैसी के लोग हैं।

३.          यह देश का बंटवारा चाहते हैं।

४.          यह दूसरा पाकिस्तान बनाना चाहतें हैं। 

५.          जो वंदे मातरम् नहीं गाएगा, उसको मुंहतोड़ जवाब देंगे।

अब में पूछना चाहता हूँ उन तमाम ज़ाफ़रानी गुंडों से जो दहशत की दूकान को फ़रोग़ देतें हैं कहाँ दस्तूर में इस नग़्मे का ज़िक्र है जिसको दहशतगर्द नाथूराम गोडसे, माफ़ी वीर और उसके वारिस गाना फख्र समझते हैं। 

जो ज़ाफ़रानी दहशतगर्द धमकी दे रहें हैं, जो यह नगमा नहीं गाएगा उसको मुँह तोड़ जवाब दिया जाएगा।  तो में उनसे कहना चाहता हूँ मोहन भगवत में नहीं गाता यह नगमा क्या करते मेरा।  मेरे गले पर छूरी भी रख दोगे तो नहीं पडूगा में वन्दे….. 

याद रखो ज़ाफ़रानी भेड़ियों तुम्हारी धमकी कांग्रेस, सपा, बसपा, आप जैसे कमज़ोर मुख़ालिफ़ों पर असरअंदोज़ होती होगी और वोह तुम्हारी धमकियों से ख़ौफ़ज़दा होते होंगे लेकिन अब मुक़ाबिल तुम्हारे मजलिस के मुजाहिद हैं तो बेहतर है तुम ज़ाफ़रानी, साधू को मिला कर अपनी तमाम पुरानी ग़लीज़ हरामकारी, नाइन्साफ़ी, क़त्लो ग़ारत, फ़िरक़ापरस्ती और भड़वा गिरी (भगवा गिरी) की आदतें बदल डालो और जान लो तुम्हारे मुक़ाबले में अब गीदड नहीं जो शिकार से बचे हुए सड़े गले गोश्त पर ज़िंदा रहता है बल्कि मजलिस के शेर आये हैं जो दुश्मन को चीर फाड़ डालता है। 

दूसरी एक और बात याद रखो मजलिस के नुमाइंदे मुजाहिद हैं और जब भी मुजाहिद जंग में दुश्मन के ख़िलाफ़ यलग़ार करता है तो उसकी सिर्फ़ दो आरज़ू होती है या तो वोह दुशमन के ख़िलाफ़ जामे शहादत पी ले या दुश्मन को सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा दे तबाह कर दे बर्बाद कर दे। 

वैसे भी तुम ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों की अब आम सक़ाफ़त तमाम भारत में मशहूर हो चुकी है।  जहाँ किसी मुख़ालिफ़ ने दस्तूर, क़ानून की बात की के तुम उसको पाकिस्तानी जिन्ना की औलाद बोल देते हो।  भले ही वोह किसी भी तंज़ीम से हो किसी भी मज़हब से हो।  किसी ने हुकूमत से अपना हक़ लेने की बात कही की वोह आतंकवादी हो जातें हैं।  इसमें भी मज़हब और तंज़ीम नहीं देखी जाती।  किसी ने हुकूमत और मोदी से ज़्यादा सवाल किये की वोह हो जाता है अर्बन नक्सल।   किसी ने बोहोत सख़्त अलफ़ाज़ में तनक़ीद की के वोह भारत का गद्दार है और बटवारा चाहता है। 

२०१४ से तुम दहशतगर्दों, शिद्दतपसंदों ने किया ही क्या है सिर्फ़ पाकिस्तान, मुसलमान, कश्मीर, मंदिर मस्जिद इन्ही मुद्दों पर इन्तेख़ाब जीता है।  भारत के बटवारे के ज़िम्मेदार मुखालिफ नहीं बल्कि तुम्हारी तंज़ीम बीजेपी, संघ और हिन्दू अवाम के दिलों दिमाग में भरी हुई ज़हर की वोह शिद्दत होगी जिसकी वजह से तुम जमहूरियत का क़तल करते आये थे।  मुख़ालिफ़ों का तो काम ही हुकूमत को हर ख़िलाफ़ ऐ दस्तूर, ख़िलाफ़ ऐ क़ानून काम पर घेरना होता है वोह तो एक मज़बूत जमहूरियत का हिस्सा होता था।  जिस जमुहरियत का संघी, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद हिन्दू हर वक़्त दम भरते थे मोदी बेरुन मुल्क जा कर बड़े से बोलता था हम दुनियां की सबसे बड़ी जमुहरियत भारत की नुमाइंदगी करते हैं।  दरअसल तुम लोगों ने अदलिया,  ऐवान, दस्तूर की धज्जियाँ उड़ा कर उस जमुहरियत को पिजरे में क़ैद कर के एक ज़न्खा बना दिया था।  

वोह जमुहरियत एक ऐसी कमज़ोर मुख़ालिफ़ों के हाथ में थी जहाँ पर किसी ने भी मोदी नामक जल्लाद ज़ालिम तरीन बादशाह की तानशाही की ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई के होती थी उसको फ़ौरन जेल।  

तो तुम्हारा वही पुराना फलसफा पाकिस्तान, कश्मीर, मुसलमान, हिजाब, मस्जिद यह सब अब नहीं चलेगा।  कियोंके तमाम अवाम को पता चल चूका है ऐसे हस्सास मसले सिर्फ़ और सिर्फ़ इन्तेख़ाब आने पर ही उठाये जाते हैं।  जिनका अवाम की रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी से कोई लेना देना नहीं होता है।  ना ही यह मसले एक बेरोज़गार को काम दिलवा सकतें हैं  और ना ही बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगा सकतें हैं और ना ही पेट्रोल डीज़ल की कीमतें कम कर सकतें हैं। 

रहा सवाल कश्मीर से ३७० हटाने का मामला तो सिर्फ़ और सिर्फ़ मोदी और बीजेपी ने उस मसले पर अपनी सियासी रोटी पकाई है और मलाई खाई है।  दरअसल मसला ३७० हटाने का था ही नहीं मसला कश्मीर में पंडितों को आबाद करने का था कश्मीर को भारत का लाज़मी हिस्सा तस्सव्वुर करने का था।  मेरा सवाल है:-

क्या मोदी बीजेपी संघी दहशत और फौज उस हदफ़ को हासिल कर पाए

आज कश्मीर में १० लाख से ज़्यदा भारत की फौज मौजूद है २.५ से ३ लाख संघी दशहतगर्द मौजूद हैं तो फिर भी भारत के किसी भी अवाम को वहां जाने से क़ब्ल मरकज़ की इजाज़त की कियों ज़रुरत पढ़ती है। 

२०२४ की ज़मीन अभी से मोदी बीजपी और संघी दहशतगर्द तय्यार कर रहें हैं।  फ़िज़ूल के मुद्दे ले कर आयेगें और हिन्दू अवाम के दिलों को आलूद से भरेगें।  लेकिन उसमे वोह नुकसान भारत का ही करेगें और इलज़ाम मजलिस पर देंगें की भारत का बटवार कर दिया जिन्ना के वंशज पाकिस्तानी वग़ैरा।  दरअसल यह बीजेपी वाले संघी ही गद्दार हैं और पाकिस्तान को मदद करने वाले कीड़े।  इनसे मोहताद रहो  

सहाफ़ी ज़ुबेर

Friday, 26 May 2023

मजलिस के पहले ही झटके ने साधू, ज़ाफ़रानी दहशत को चाँद तारे दिखा दिये।

अज़ीज़ नाज़रीन 

जैसा की सालार ऐ मिल्लत और आल इंडिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लेमीन AIMIM के सदर जनाब बेरिस्टर असदुद्दीन ओवेसी का आप तमाम अक़लियतों, दबे कुचले, दलितों, बेहद दलित अवाम से वादा था की ऐवान में कोई भी काम खिलाफ ऐ दस्तूर नहीं होने दिया जाएगा और कोई भी काम वोह ख़िलाफ़ दस्तूर बर्दाश्त नहीं करेगें  मजलिस के नुमाइंदे दस्तूर के मुहाफ़िज़ और एक ज़िम्मेदार मुख्लिफ का किरदार अदा करेगें।   जिसका आग़ाज़ सूबे शुमाल में देखने को मिला और साधू की ज़ाफ़रानी दहशत को थोड़ा अंकुश लगा है। 

दरअसल सूबे शुमाल के मेरठ में हाल में हुए बल्दिया इंतेखाब में मुन्तख़िब हुए रकूनों की हलफबरदारी के दौरान वही ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों का हर मुद्दे पर खिलाफ ऐ दस्तूर काम पर जमकर हंगामा हुआ.  वंदे..... गाने को लेकर हुए तनज़िये में ज़ाफ़रानी दहशत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी क़ौमी AIMIM के रकून बल्दिया के बीच मारपीट भी हुई. इसके बाद हूकूमती इन्तेज़ामियाँ के आला -अराकीन मौक़े पर पहुंच गए और AIMIM के रकून बल्दिया को समझा बूझा कर खामोश किया। 

मेरठ के सीसीएस यूनिवर्सिटी के सुभाष चन्द्र बोस ऑडिटोरियम में मुंतखिब मेयर और रकून बल्दिया का हलफ़ बरदारी चल रहा था. इसी दौरान शातिर शरारती बीजेपी के रकूनों ने वंदे ..... का गान शुरू कर दिया. AIMIM के पार्षदों ने इसका विरोध किया और बैठे रहे. इस दौरान बीजेपी और AIMIM के पार्षदों के बीच तू-तू मैं-मैं भी हुई और नौबत मारपीट तक आ गई.

नाज़रीन इतना जान लीजिये की मजलिस के नुमाइंदे हर वक़्त इन्साफ के अलम्बरदार और दस्तूर के मुहाफ़िज़ साबित होंगें।   साधू, ज़ाफ़रानी और ख़ाकी दहशत को जल्द ही ताला लगने वाला है।  नाज़रीन शुमाल में अगले इंतेखाब में AIMIM को खुल कर वोट करें और अपने मजलिस के नुमाइंदों को कामयाब करें।  आज की सियासत में हुकूमत, अदलिया और इन्तेज़ामियाँ अवाम की सियासी क़ुव्वत देखती है, उसके ऊपर फ़ैसले होंतें हैं।

नाज़रीन आज मजलिस के महज़ ८३ पार्षद, ३३ रकून बलिदया, २१ कौंसलर, २२ नगर पंचायत के कौंसलर कामयाब हुए। ५ चेयरमैन मुन्तख़िब हो कर आये और सर आज़म ख़ान को बरोज़ मंगल अदालत ने इश्तेआल अंगेज़ी तक़रीर के जुर्म से बरी कर दिया।  इसी  तक़रीर में उनका जुर्म साबित हो चूका था  उनको जेल हुई और ऐवान से उनको बरतरफ़ किया गया था।  क्या अखिलेश यादव उनके हक़ में कभी खड़े हुए थे।  नहीं।  लकिन जब मजलिस के नुमाइंदे मुन्तख़िब हो कर आये तो साधू को भी एहसास हुआ की अब उसका बचना नामुमकिन है तो उसने ऐसे हस्सास मामलों को रफ़ा दफ़ा करना शुरू कर दिया।     

सूबे शुमाल की असेंबली में कमो बेश ७५ से ८० और पार्लियामेंट में ३० से ३५ हल्क़े ऐसे हैं जहाँ मुस्लिम आबादी ६० से ७० फीसद है।  और कम से कम ७५ हल्क़े ऐसे हैं जहाँ २५ से ३० फीसद मुस्लिम आबादी है।  उस हिसाब से अगर सीटों का तनासुब निकाला जाए तो असेंबली में ६० से ७० और पार्लियामेंट में २० से २५ सीटों पर मुस्लिम अपनी तंज़ीम और अपने पसंदीदा नुमाइंदों को मुन्तख़िब कर कामयाब कर सकतें हैं। 

नाज़रीन इन्तेख़ाब के वक़्त जुम्मन अमजद अली ख़ान जैसे क़ौम और मजलिस के ग़द्दार आपके ज़हन को पुर आलूद करने की कोशिश करेगें।  ऐसे क़ौम के ग़द्दार सिर्फ ज़ाफ़रानी गुलाम होतें हैं।  जो मोदी, बीजेपी और संघी दहशत के पैसों पर पलते हैं और क़ौम का क़त्ले आम भी पसंद करतें हैं।  वैसे भी अहले तशियो हज़रात में ८० फीसद ज़ाफ़रानी ग़ुलाम और मोदी की बोली बोलतें है। सिर्फ २० फीसद ही हक़ की बोली बोलतें हैं। 

नाज़रीन याद रखिये एक बार मजलिस के नुमाइंदे ऐवांन में पहुंच गए तो साधू, पुलिस और अदलिया में बैठे नाइंसाफ जज जिन्होंने क़ानून और दस्तूर की ख़िलाफ़वर्ज़ी के फ़ैसले दिये थे वोह सब जेल में होंगे।  उनके गले में क़ानून और दस्तूर का फंदा होगा।  सब नाइंसाफों, दहशतगर्दों का क़ानून के दायरे में रह कर हिसाब किताब पूरा होगा। 

नाज़रीन यह जान लीजिये की अभी तो आग़ाज़ है अगर मजलिस के माक़ूल नुमाइंदे ऐवांन पार्लियामेंट और शुमाल की असेम्ली में पहुंच गए तो इन ज़ाफ़रानी दहशत का जीना दुशवार हो जाएगा। याद रखो योगी, यह अखिलेश मायावती या राहुल की तंज़ीम नहीं है जो महज़ दिखावे का उधम करते हैं और दस्तूर के हिफ़ाज़त की बात आये तो मुँह में दही जमा लेते हैं। यह ओवेसी की तंज़ीम हैं नाक में दम कर देगी। असली मुख़ालिफ़ और दस्तूर मुहाफ़िज़ का किरदार अदा करेगी। तैयार रहो अगली टक्कर के लिए।

सहाफ़ी ज़ुबेर की मजलिस से दरख़्वास्त

सबसे क़ब्ल मुस्लिम हल्क़ों से शराब की दुकाने जुव्वे के अड्डे फौरी बंद करवाएं और मुस्लिम हल्क़ों में स्कूल, तालीमी इदारे खोलने का आग़ाज़ करें।  बक़रा ईद पर बैल के ज़बीहे और उसके बाद दुकानों पर उसके गोश्त की फ़रोख़्त के लिए जद्दो जेहद करना।  कियोंके दस्तूर में सिर्फ गाये के ज़बीहे पर पाबन्दी की बात कही गई है बैल को ज़िबह भी कर सकतें हैं और दूकान पर फ़रोख़्त भी कर सकतें हैं।    बेगुनाहों को जेल से रिहा करवाने के लिए असेम्ली में मजलिस की नुमाइंदगी बोहोत ज़रूरी है।  उसके लिए मुस्लिम, क्रिस्टी, सिख और दलित अवाम बढ़ चढ़ कर मजलिस को कामयाब करें। 

सहाफ़ी जुबेर

Thursday, 25 May 2023

मग़रूर को उसका ग़ुरूर मार डालता है।

अज़ीज़ नाज़रीन,

इराक के शहर बग़दाद में एक नाई और एक मुफ्ती साहब और हाकिम ऐ वक़्त तीनों गुरूर और तककब्बुर से भरी बड़ी बड़ी बातें करतें थे।  तीनों को अपने अपने फन पर बोहोत ही ग़ुरूर था।  मुफ्ती साहब को इस बात का ग़ुरूर था की उन्होंने कभी कोई ग़ैर शराई फतवा नहीं दिया नाई को इस बात का ग़ुरूर था की उसने कभी भी ग़ैर शरई हजामत नहीं की और हाकिम को इस बात का गुरूर था की उसने अपनी रियासत में कभी भी कोई ग़ैर शराई हुकुम नाफ़िज़ नहीं होने दिया। 

रात को हाकिमे वक़्त ने नबी सल्लम का दीदार किया आप सल्लम ने हाकिमे वक़्त को बोला की ऐसा हुकुम नाफ़िज़ करो की फलां क़ाज़ी ऐसा फतवा दे की उसकी दाढ़ी फलां नाई मूंड दें। 

हाकिम ने हुकुम जारी किया क़ाज़ी ने अपनी ही दाढ़ी मुंडवाने का फतवा दिया और नाई ने दाड़ी मूंडी। 

आज भारत का भी वही हाल है हाकिम वक़्त ज़ालिम तरीन बादशाह भी गुरूर में डूबा हुआ है।  पाकिस्तान से कोई बात चीत नहीं होगी।  हम एक ताक़तवर मुल्क हैं पाकिस्तान हमसे अदना है।  लंगूर लँगूरनियाँ, शिद्दत पसंद क़ाफ़िर, संघी दहशतगर्द और बीजेपी वाले सदा पाकिस्तान के ऊपर इल्म फ़लसफ़े और माशी हालात पर मखौल उड़ाना अपने वतन भारत पर ग़ुरूर करना बड़ी बड़ी बातें करना। 

और पस यह जान लो की घमंडियों मग़रूर हाकिम हो रियाया हो या लंगूर-लँगूरनियाँ उनका घमंड तो ऐसे टूटता है जैसे ताश के पत्तों से बना महल।  पाश पाश हो जाता है।  कियोंके हाकिमों के हाकिम मालिकों के मालिक क़ायनात को चलाने वाले अल्लाह को घमंड हरगिज़ हरगिज़ पसंद नहीं है।  जो हाल रावण, मेघनाथ, कुम्भकर्ण और रावण सेना का हुआ वही मोदी और भक्तों का होगा। 

अमन की जुस्तजू लिए अपने कुनबे से दूर हो गया ज़ालिम 

ख़ूंरेज़ीआदमख़ोरी की बातें छोड़ 

मज़हब  अमन की बातें करने लगा ज़ालिम

 

तेरा ठिकाना तलाश लेंगें अमन के फ़ौजी 

तू लाख रहे फ़रार बेरुन मुल्क 

तुझको तलाश लेंगें फ़ौजी ताहम

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...