Thursday, 3 December 2020

तेरे जुर्म के निशान और भी हैं, अभी तेरे इम्तेहान और भी हैं।

 एक जाता है, एक आता है

दोनों होतें हैं तो तू मुस्कुराता है

बन गई है अजब दास्ताने मोहब्बत

या रब, ज़ख्म भी तू ही देता

और दवा भी तू ही लाता है। 

 

सहाफी जुबेर

 

मुंबई: महाराष्ट्र के ज़ेरे इंतिज़ाम  POK नहीं. 

कोविड ‘ज़लज़ले' के बाद सफ़ेद जिगर (Lungs Fibrosis) ‘सुनामी' की तरह आ सकती है.  हिन्द सफ़ेद जिगर अंजुमन (इंडियन चेस्ट सोसायटी) के सिन रसीदा तबीब और चेस्ट फ़िज़िशियंस ने कागज़ का जायज़े में चेताया है कि ५ से १०% कोविड मुत्तसरीनों में सफ़ेद जिगर (फेफड़े) की ये बीमारी है और संजीदा हालात में ये बीमारी हार्ट की पम्पिंग पर असर करती है.  मज़ीद उन्होंने बताया की ICU,वेंटिलेटर पर रहे मरीज़, बुज़ुर्ग, सिगरेट नोश, शराब नोश   कोविड मरीज़ ज़्यादा मुत्तासिर हुये हैं।   

'Post‐COVID lung fibrosis: The tsunami that will follow the earthquake' इन उन्वान से यह रिव्यू पेपर छपा है. कोरोना के ख़ामोश हमले ने फेफड़ों की ख़ालियात (सेल्स) को ज़बरदस्त ईज़ा पहुंचाई है.  मुंबई-ब्रीच कैंडी, SKIMS, श्रीनगर और इटली के सिन रसीदा चेस्ट फ़िज़िशियन्स की जानिब से तैयार किए गए ‘इंडियन चेस्ट सोसाइटी' जर्नल में छपे इस रिव्यू पेपर में  कहा गया है की कोविड के ‘ज़लज़ले' के बाद पोस्ट-कोविड लंग्स फायब्रोसिस ‘सुनामी' की तरह हो सकती है. 

मालूम रहे की सफेद जिगर फाइब्रोसिस बीमारी में जिगर के अंदर मौजूद टिश्यू सूजने लगते हैं. जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. इससे जिस्म में खून का बहावकम होने लगता है. हालात पेचीदा हुए तो दिल सही तोर तरीक़े से काम नहीं करता. नतीजा कसीर आज़ा की नाकामी, हार्ट अटैक के सबब भयानक हालात में मौत वाक़े हो सकती है. रिव्यू पेपर में बताया गया है की ५ से १०% कोविड मरीज़ों में लंग फाइब्रोसिस की शिकायत दिख रही है. 

माना गया है की तवील अर्से दरास तक आईसीयू,वेंटिलेटर पर रहे मरीज़, बुज़ुर्ग, सिगरेट, नशा और शराब ख़ोर अफ़राद को ज़्यादा मुत्तासिर करता है. पेपर में इसे पोस्ट कोविड-19 इंटरस्टिशियल लंग डिजीस (PC-ILD) कहा गया है, कई मरीज़ हैं जिन्हें आईवी के ज़रिए स्टेरॉइड दिया गया और तवील अर्से के लिए एंटीवायरल लेते रहे. 

फ़ोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ फ़रहा इंग्ले ने कहा, ‘सफ़ेद जिगर के मुत्तादी मरीज़ों के कागज़ात से हम मुत्मइन हैं, हमारे यहां भी तक़रीबन यही तादाद  है, ५-१०% मरीज़ वेंटिलेटर पर जाकर, पहले से इन्हें सांस सम्बंधी दिक्कतें थीं, ये लंग फायब्रोसिस के शिकार होते हैं.''

कोविड टास्क फोर्स के डायरेक्टर ऑफ क्रिटिकल केयर डॉ राहुल पंडित ने कहा,‘आज भी जिन मरीज़ों में हमें फायब्रोसिस लग रहा है उनमें २०% ऐसे मरीज़ हैं जो सच में फायब्रोसिस से मुत्तासिर हैं. ज़्यादा बेहतरी उनमें नहीं दिख रही है, कुछ की हालत तो बदतर दिख रही है.'' 

मुंबई के आयुष अस्पताल के डॉ सुहास देसाई ने बताया, ‘सीटी स्कैन पर अगर आप जिगर के ढांचे को देखेंगे, तो उनमें नुक़सान आपको नज़र आएगी. पोस्ट कोविड नेमोनयटिस जो तरक़्क़ी करता है, देखा जा सकता है. ये असर मरीज़ों में कुछ वक़्त तक दिखता है.' उन्होंने कहा कि इसका हार्ट पर असर होता है. हार्ट की पम्पिंग कम होती है. 

रिव्यू पेपर में बाज़याफ़्त होने के लिए वक़्त पर कई दवाइयों के साथ होम ऑक्सीजन थेरेपी, चेस्ट फिजियोथेरेपी, अच्छी तग़ज़िया वाली ग़िज़ा जैसे कई हल समझाए गए हैं. माहरीन मानते हैं की चूंकि बीमारी का फ़िलहाल तय इलाज नहीं इसलिए सबसे बड़ा इलाज है बचाव.

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