Sunday, 31 December 2023

मुसलमानों की औक़ात बल्दिया हद से बाहर।

अज़ीज़ नाज़रीन

बाबरपुर से ६० किलोमीटर दूर धन्नी पुर में मोदी मस्जिद के लिए ज़मीन भीख में दिए जाने पर ज़मीर फ़रोश ग़ुलाम नस्ल बोहोत खुश दिख रही है।  लँगूर-लँगूरनियाँ हैं की मोदी, संघी दहशत, ज़ाफ़रानी साजिश को दुरुस्त क़रार देने के लिए बाबरपुर से ६० किलोमीटर दूर धन्नी पुर गाँव में मोदी की जानिब से मुस्लिम अवाम को ख़ैरात भीक में दी गई ज़मीन पर भी क़सीदे कस रहें हैं।   मक्का के इमाम की क़ियादत में मस्जिद की इफ्तेताह होगी उसमे शिफ़ाख़ाना होगा बॉवर्चीख़ाना होगा क़ुतुब ख़ाना होगा वग़ैरा।   

लँगूर लँगूरनियाँ ऐसा कर के मोदी नामक ज़ालिम तरीन का भर्म कम इल्म मुस्लिम अवाम पर बने रहने देना चाहते हैं।  के मुसलमानों के साथ कोई धोखा नहीं हुआ है उनका सौदा तो मुफ़ीद का हुआ है।  एक बाबरी मस्जिद खो कर उनको इतनी ज़्यादा सूहूलियतें मिल रही हैं।  लेकिन खूंखार जानवर लँगूर लँगूरनियों की ऐसी बेहयाई की बातें मुसलमानों की सिर्फ जमातों को अच्छी लगेगी। 

१.   एक वोह जो ज़ाफ़रानी तंज़ीम का ग़ुलाम होगा और ज़मीर फ़रोश

२.         जिसको ख़रीद लिया होगा अब उसको ज़ाफ़रानी तंज़ीम की हर हिकमत अच्छी लगेगी

३.  तीसरा कम इल्म जिसको मुस्लिम अवाम के साथ हुई साजिश और ग़द्दारी का इल्म ही नहीं होगा

नाज़रीन यहाँ पर दो तीन चीज़ें आप हज़रात के इल्म में ले कर आना चाहता हूँ।  पहली बाबरपुर (अयोध्या) में बाबरी मस्जिद पर डाका डाला वोह ज़मीन शहर के क़ल्ब (दिल) में है।  उस शहर की मुस्लिम आबादी कमो बेश १३ फ़ीसद के क़रीब है। 

दूसरी बात बाबरपुर (अयोध्या) से ६० किलोमीटर दूर जहाँ पर मस्जिद के लिए जगह दी गई है उस जगह ज़मीन का भाव और जो असल बाबरी मस्जिद की ज़मीन थी उस जगह के ज़मीन के भाव में कितना फ़र्क़ है।  ज़ाहिर सी बात है बाबरी मस्जिद की सोने जैसी अरबों की ज़मीन ले कर ६० किलोमीटर दूर जंगल बयाबान में कोड़ी के भाव की ज़मीन मुस्लिम अवाम को भीक में दे दी। 

तीसरी बात जिस धन्नी पुर गांव में मस्जिद के लिए ज़मीन दी गई है वहां पर मुस्लिम आबादी महज़ फीसद है।  फिर वहां नमाज़ अदा करने कौन आएगा।  आसपास अतराफ़ में यादव, दलित, और अदना हिन्दू समाज रहता है। 

चौथी बात बल्दिया क़ानून के हिसाब से सुव्वर बाड़ा कारपोरेशन लिमिट से ५०-६० किलोमीटर दूर बसाया जाए।  जिससे सुव्वर से पैदा होने वाली बीमारी और गंदगी से शहर का अवाम मुत्तासिर ना हो सके। 

पांचवी बात १३ फ़ीसद मुस्लिम आबादी वाली जगह में मस्जिद की ज़मीन ले कर धन्नी पुर से हज़ार  आबादी वाले गाँव में ज़मीन दी गई जहाँ पर मुस्लिम आबादी फ़ीसद के क़रीब है। फिर नमाज़ ६० किलोमीटर कौन पढ़ने आएगा।  

साफ़ ज़ाहिर हो रहा है मुस्लिम अवाम के साथ धोखा और साजिश हुई है।  उनकी अरबों खरबों की सोने जैसी ज़मीन ले कर जंगल में कोड़ी की ज़मीन दे दी।  फिर जिस हिसाब से सूबे शुमाल के बीजेपी के एक वज़ीर ने २०१६ बाबरी मस्जिद तनज़िये पर बोला था की हम मुसलमानों की मस्जिदों में सुव्वर बाड़ा खोलेगें और सुव्वर पालन करेगें।  मज़ीद बोलता है की इनको गंदगी में रखेगें उनको शहर में घुसने का कोई हक़ नहीं होगा। 

यह बात ज़ाहिर हो रही है की मुस्लिम अवाम की औक़ात और हैसियत ज़ाफ़रानी तंज़ीम ने दिखा दी जिस तरह से कारपोरेशन क़ानून है सुव्वर बाड़ा शहर की हद से ६० किलोमीटर दूर रखा जाए वोह कर के दिखा दिया। 

मोदी बड़ी बड़ी बातें करता है पसमांदा मुसलमान लेकिन हक़ तल्फ़ी तो पसमांदा मुसलमानों की ही कर रहा है।  सूबे शुमाल में योगी के बिलडोज़र ने जितने भी घरों को गिराया गया उसमे से ९० फ़ीसद पसमांदा मुस्लिम अवाम ही था।  जिसके ऊपर लँगूर लँगूरनियाँ इज़हार खुशी कर रहे थे। 

खरगोन में जितने भी घर गिराए गए वोह सब पसमांदा मुस्लिम ही थे।  उत्तराखंड की ग़फ़ूर बस्ती पसमांदा मुस्लिम अवाम ही की थी।  जिसको ज़ाफ़रानी दरिंदा गिराना चाहता था।  वोह तो उपरवाले की ऐसी लाठी पडी की सर मुड़वाते ही ओले पड़े तो दुम दबा कर भागा।  हाल ही में भोपाल ने नए नए वज़ीर आला यादव ने एक फ़ारूक़ नामक पसमांदा मुस्लिम का घर गिरा दिया। 

मोदी सिर्फ़ बड़ी बड़ी बातें करता ज़्यादा है लेकिन जब फवाइद की बारी आती है। तो जैसा लुगाई को देख कर हुआ था फ़रार वैसे ही हो जाता है फ़रार।  

कुछ ज़मीर फ़रोश खरीदे हुए ग़ुलाम मुसलमान ऐसे गंदी और गलीज़ सोच वाले मोदी के ऊपर सुर्ख़ गुलाब की बारिश कर रहा है।  कोई उसके बारे में क़सीदे कस रहा है।  ख़तना बाज़ पूनावाला कभी तो हिन्दू हो जाता है कभी मुस्लिम।  कभी राम भक्त हो जाता है कभी बाबर को कोसता है।  में इस ख़तना बाज़ पूनावाला से पूछना चाहता हूँ अगर तू हिन्दू है तो डंके की चोट पर अपनी ख़तना को साबूत कर के बोल हाँ आज से में सनातनी हिन्दू हूँ मेरा इस्लाम और मसुलमानों से कोई वास्ता नहीं।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...