Monday, 30 January 2023

बागेश्वर के शैतान को चूनौती है।

अज़ीज़ नाज़रीन

बागेश्वर का शैतान का पुजारी धीरेन्द्र शास्त्री परेशान कून अवाम के दुःख दर्द दूर करने का दावा करता है।  वोह बोहोत ही अज़ीम काम कर रहा था जब तक उसने मुस्लिम मज़हब की मुक़द्दस किताब क़ुरान के बारे में ऊल जलूल बकवास ना की थी।  दूसरी बात हिन्दू राष्ट्र बनाने की अपने मोतक़ीदों और पैरोकारों को उकसाया ना था।  मुसलमानों के क़त्ले आम की बातें और ज़हरीली तक़रीरें ना की थी।   अब यह शैतान हाशिये पर गया है और पहला केस रेजिस्टरड हुआ है। 

कमज़ोर आदमी बागेश्वर का चेला अपनी लुगाई के साथ।

सूबे दरमियान (Madhya Pradesh) के पन्ना में बरोज़ हफ्ता सनीचर दोपहर घर में कारोबारी और उसकी लुगाई ने ख़ुदकशी कर ली है।  लाश मिली है।  कारोबारी ने पहले अपनी लुगाई को गोली मारी फिर खुद भी गोली मारकर अपनी ज़िन्दगी ख़तम कर ली।  वारदात के बाद से ही पूरे शहर में सनसनी फैली हुई है।  इस दौरान बरोज़ सनीचर रात क़ब्ल ख़ुदकशी १२ बजे कारोबारी के फेसबुक आईडी से सुसाइड नोट और वीडियो पोस्ट किए गए थे।  उसके बाद दोनों ने ख़ुदकशी कर ली है।  वीडियो में कारोबारी संजय सेठ और उसकी लुगाई नज़र रहे हैं. दोनों ही रो रहे हैं और परेशानकुन हालात बयान कर रहें हैं।  

वहीँ कमज़ोर आदमी ज़नख़ा संजय ने बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर शैतान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का नाम लेते हुए कहा, ''गुरुजी में आपका चेला हूं, माफ करना कमजोर पड़ गयासनातन की अलख जलाते रहना.'   

कमज़ोर आदमी अपने शैतानी आक़ा धीरेन्द्र शास्त्री के साथ।

इस शैतान धीरेन्द्र शास्त्री को चूनौती देता हूँ जो भूत पलीत जिन्नों का इलाज करता है और अपनी शैतानी ताक़त से किसी को भी फ़ना कर सकता है, चल मेरे ऊपर अपनी शैतानी ताक़त का इस्तेमाल कर के दिखा।  तू क़ुरान का मज़ाक़ बनाता है और मुसलमानों को देश से निकालने की बातें करता है।  चल में मुसलमान हूँ निकाल मुझे भारत से, अगर यह इतना ही बड़ा संत होता तो इसके खुद के चेले को ख़ुदकशी जैसा कमज़ोर काम करने के लिए मजबूर ना होना पड़ता। 

नाज़रीन दरवेशों सूफियों अल्लाह के वलिओं की बात ही निराली होती है।  और जो भी हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई इनका मखौल उड़ाएगा तबाह कर दिया जाएगा।  उसके खुद के एहले खाना उसको सबक़ दिखायेगें।  कियोंके कोई भी वली और दरवेश अपनी मर्ज़ी का हाकिम नहीं होता है और ना ही वोह अपने आप बनता है बल्कि अर्शे मोअल्ला पर अल्लाह उसको यह ख़िताब और सनद देता है।  फिर उसको ताक़त और क़ुव्वत भी अल्लाह ही देता है जो किसी बन्दे के पास नहीं होती है।  वोह दिलों के हाल जान जाता है।   नाज़रीन एक हक़ीक़ी किस्से से अपनी बात ख़तम करूंगा। 

अल्लामा इक़बाल रेहमतुल्लाह अलैहे के पीरो मुर्शिद के एक बोहोत ही पसंदीदा मुरीद थे।  वोह पीर साहब उस मुरीद से बोहोत ही मोहब्बत करते थे और मुरीद भी उनसे उतनी ही।  ऐसे ही दिन गुज़रते गए।  अब अर्श पर जो तक़दीर का लिखा था उसको तब्दील करने की बारी आई। तो मुरीद किसी नसरानी दुःखतार के इश्क़ में पड़ गए। और बात शादी तक जा पहुंची।  उस लड़की ने कहा तुम तो मुसलमान हो और में नसरानी अगर मुझसे शादी करनी है तो तुमको तुम्हारा मज़हब छोड़ कर नसरानी होना पडेगा और मेरे सुव्वर बाड़े की हिफाज़त करनी होगी।  अब जो तक़दीर में लिखा था वही हुआ कियोंके इश्क़ का भूत जो सवार था।   हत्ता के उनके मुरीद शादी कर के मुर्तद हो गए। 

और उस खातून के सुव्वरों की हिफाज़त करने लगे उनको चराने लगे।  यह सब बातें जब पीर साहब के इल्म में आई तो आपको बड़ा ही रन्झ हुआ।  अब जो क़ौम के ग़द्दार थे, उनको पीर साहब के ऊपर मज़ीद तनक़ीद करने का मौक़ा मिल गया।  कोई वली नहीं होता वोह अपने शैतानों से दिल का हाल जानता है, और हम बोलतें अरे यार बड़ा वाली है जो दिल की कैफियत को जान गया।  ग़द्दार निफ़ाक़ डालने वाले तरह तरह की बातें करने लगे।  आप अल्लाहमा साहब के पीरो मुर्शिद को यह सब देख कर अज़हद सदमा हुआ, लेकिन मशीयत इलाही जान कर ख़ामोशी इख़्तेयार की हुई थी।   लेकिन जब ग़द्दार क़ौम ने उनकी रूहानियत को शैतानियत से मिलाया तो आपका वजूद हिल गया।  एक वली को शैतानी ताक़त वाला बोलते हो।  आप मुराग़बे में गए, यह जान्ने के लिए की माजरा किया है।  पहला आस्मां दूसरा तीसरा अर्श कुर्सी लोह किताब सब का मुताला किया।  तक़दीर के उस सफ़े में गए जहाँ मुरीद का नाम दर्ज था।  मुरीद की तक़दीर का मुताला किया।  तो उसमे "मोहब्बत" की जगह "मुर्तद" लिखा था।  आपने क़लम लिया और मुर्तद को मिटा कर मोहब्बत कर दिया। 

जैसे ही मोहब्बत किया की मुरीद के ऊपर से ग़लबा और अबर सफ़ हुए और अपनी हक़ीक़ी कैफियत में आये।  तो अपने आप को एक नाजिस्त जानवर का रखवाला पाया।   बोहोत ही रन्झ हुआ की यह किया मामला है में तो मुसलमान था, फिर अपने पीरो मुर्शिद को याद किया जिसका हुकुम भी है अगर मुरीद किसी भी परेशानी में मुब्तेला हो जाए तो अपने पीर को याद करे। 

भागते हुए उसी हालात में गंदे बोसीदा कपड़े बे तरतीब दाढ़ी बड़ी हुई सर के बाल बेहद बड़े हुए अपने पीर के हुज़ूर आये।  जब दूर थे तो मुरीदों ने बोला हज़रत वोह मुर्तद मुरीद रहा है, आपने कहा आने दो हमने ही उसको बुलाया है।  जब पीर साहब के पास पहुंचे तो उनके क़दम पकड़ कर ज़ारो क़तार रोने लगे।  अश्कों का दरिया जब कुछ कम हुआ तो पीर साहब बोले इसमें तुम्हारी कोई ग़फ़लत और गुनाह नहीं था। तुम्हारी तक़दीर में ही मोहब्बत की जगह मुर्तद हो गया था लेकिन अब हमने सब कुछ ठीक कर दिया है।  फिर उनको ग़ुस्ल करवाया नए कपड़े दिए और वापिस से कलमा पढ़वाया। इस पूरे माजरे को अल्लामा साहब ने एक शेर में समेट दिया।

“की जो मोहम्मद से वफ़ा तूने तो हम तेरे हैं,

यह जहाँ क्या चीज़ है लोह क़लम तेरे हैं”

हम से मुराद अल्लाह खुद बोल रहा है। 

नाज़रीन ऐसा कहते भी हैं जिसका कोई पीर नहीं उसका पीर शैतान होता है।  कहीं भी बहका सकता है।  पीर क़ुव्वत वाला ताक़त वाला होना चाहिए।  

  सहाफ़ी ज़ुबेर

Sunday, 29 January 2023

बिहार के बाद लखनऊ। क़िसास बराबर ले रहा है मेरा रब।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

जिस क़िसास और जंग का आग़ाज़  रामचरित्र मानुस पर बिहार से महज़ ज़ुबानी हमले के रूप में हुआ था सूबे शुमाल में दाख़िल हो कर भयानक रूप इख़्तेयार करते हुए फ़ाइर में तब्दील हो गया है।  सूबे शुमाल की दारुल ख़िलाफत लखनऊ और योगी के गड में घूस कर स्वामी प्रसाद मोरिया जी के हिमायतियों ने राम चरित्र की कॉपियां आतिशे नार कर दी।  यह मेरे रब का क़ेहर और क़िसास है।  कभी हिन्दू राष्ट्र में क़ुरान के ख़िलाफ़ शिद्दत पसंद काफिर बदगुमानी फ़ैलाते थे।  ऊल जलूल बकवास करते थे।  इश्तेआल अंगेज़ी किताब है उसको बेन करने की सिफ़ारिश करते थे।  वैसा ही हू बहू हिन्दू किताबों के साथ हो रहा है।    क़ुरान को जलाया जाता था, अब राम को जलाया जा रहा है।  ऐसा तो कभी देखने को नहीं मिला की हिन्दू ह्रदय सम्राट दिल्ली पर क़ाबिज़ हो सूबे में भगवा शासन लागू और जलाई जा रहीं हैं राम चरित्र माणूस की प्रतियां।  यह क़ुव्वत और ताक़त सिर्फ और सिर्फ मेरे रब की जानिब से आ सकती है।  और जब अल्लाह जिस बन्दे को कुछ भी काम करने के लिए चुन लेता है उससे वोह काम बराबर लेता है। 

वहीँ दूसरा मुद्दा है तब्दील मज़हब।  जिस पर शिद्दत पसंद बेहद बवाल मचाते थे।  धर्म जिहाद बहका फुसला पैसों का लालच दे कर मुस्लिम बनाया वग़ैरा।  लेकिन उन सभी शिद्दत पसंदों को पहले भी कई बार लिख चूका हूँ जिसको इस्लाम की खुशबू और हक़ीक़ी रौशनी मिल जाती है फिर वोह किसी मज़हब में नहीं जाता है।   सूबे शुमाल के कौशाम्बी के रहने वाले उदयराज जो बॉम्बे में मुक़ीम थे और अब तब्दील मज़हब कर के एहमद हुसैन बन गए हैं।   जब वोह कौशाम्बी अपने घर गए तो मस्जिद में नमाज़ पढ़ते देख उनके एहबाब सन्न रह गए।  उनके वालिद ने पुलिस में झूटी और फरेबी शिकायत कर डाली की उनके फ़रज़न्द को बेहला फुसला कर पैसों का लालच दे कर मुस्लिम बनाया गया है।  जिन मौलवी साहब ने मुसलमान बनाया उनको भी इस मुद्दे में घसीटा जा रहा है।  पुलिस ने एहमद को पुलिस स्टेशन बुलाया उन्होंने साफ़ बोल दिया की मेने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम से मुत्तासिर हो और इसकी खूबियां जान कर  उस मज़हब को इख़्तेयार किया है।   कियोंके उनके साथ काम करने वाले दानिश हर वक़्त वाज़ू से रहते थे और नमाज़ अदा करते थे तो में उनसे बोहोत मुत्तासिर हुआ और इस्लाम इख़्तेयार कर लिया।  लेकिन पुलिस है की मामले तूल दे रही है और मौलवी साहब दानिश साहब के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है

पुलिस और इन्तेज़ामियाँ हर मसले में बेजा मदाखलत ना करे। नहीं तो भारत में ख़ाना जंगी मज़ीद पेचीदा मरहले में पहुंच जाएगी।  पहले ही माता जी फ़ौत होने की राह पर हैं। माता जी मतलब भारत। आई सी यू में बिस्तर मृग (मृत शय्या) पर पड़ी हुई हैं ऊपर से अगर ख़ाना जंगी पेचीदा हुई तो भारी पडेगा पुलिस को भी और इन्तेज़ामियाँ को भी। एक तो कंगाली ऊपर से होगा आटा गीला।

कोई भी किसी को दबाव या लालच दे कर इंसान से उसकी सबसे अज़ीज़ चीज़ तब्दील मज़हब नहीं करवा सकता। यह तो इंसान की अंदुरूनी रूह की आवाज़ होती है जिसको वोह सुनता है और इख़्तेयार करता है।  जो बात दिल को अच्छी लगी कर ली। अगर पुलिस ने बेजा मुदखेलत किया तो होगी बग़ावत। कियोंके जिसने दिल से किसी बात को क़ुबूल कर लिया अब उससे ज़बरदस्ती वापिस से नाजिस्त (पख़ाना पेशाब) खाने पीने को कहोगे तो वोह मर जाएगा लेकिन ऐसा हरगिज़ नहीं करेगा। इस्लाम की इब्तेदाई तारिख उठा कर देख ले आज के अबू जेहल।

बिलाल हब्शी एक ग़ुलाम थे और उन्होंने अल ऐलानियाँ इस्लाम अपना लिया था फिर उनके आक़ा हाकिम ने उनको जलती हुई आग में सेका  अज़ीयत दी लहू लूहान कर देता; आप बिलाल बेहोश हो जाते, जब होश आता और आक़ा पूछता बोल मोहम्म्मद के कलमे के बारे में क्या बोलता है तो आप बोल उठते "अशहदो अल्लाह इल्लाहा इललल्हा वा अशहदो अन्ना मोहम्मदन अब्दोहू रसूलहू"

दूसरी बात पैसों का लालच दे कर जान से मार डालने का ख़ौफ़ दिखा कर दबाव में कर जो लोग किसी भी मज़हब को इख़्तेयार करते हैं वोह झूठे और फरेबी होते हैं।  ऐसे लोग अगर इस्लाम में रहें हैं तो वोह मुनाफ़िक़ों की फेहरिस्त में हैं।  लेकिन जो दिल से किसी भी बात को क़ुबूल करता है अब पुलिस क्या दुनियां की बड़ी से बड़ी ताक़त जाए उसको अपने मक़सद से वापिस नहीं पलटा सकती।

Zuber

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...