नाज़रीन
कमलेश क़त्ल में जिस अंदाज़ में उत्तर प्रदेश पुलिस बली के लिए बकरे की तलाश करते फिर
रहे हैं उनको किसी सूरत कामयाबी हाथ नहीं लगेगी.
बिल आखिर हार पस्ता के उनको असली मुजरिम को सामने लाना ही पड़ेगा.
इस
क़त्ल की पहली खबर मीडिया की सुर्खिया बनी तब से लेकर अब तक के इस सहाफी के तमाम सिलसिलेवार
ट्वीट पेशे ख़िदमत हैं.
ट्वीट 1
इस हिन्दू आतंकवादी ने मुस्लिम अवाम के लिए दिल ओ दिमाग में बे पनाह ज़हर रखता था. इतना ही नहीं इस नामुराद ने प्रोफेट सल्लम की शाने मुबारक में गुस्ताखाना अलफ़ाज़ बोले थे. उम्मुल मोमीन की शान मुबारक में हर चंद गुस्ताखी करता था. इतना ही नहीं इस हिन्दू आतंकवादी ने गौ आतंकिओं के साथ मिल के मुस्लिम अवाम की उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पे खून रेज़ी की थी और उनके रोज़गार को तबाह किया था. उत्तर प्रदेश की हापुड़ में कासिम की मौत के लिए भी ये ही मुख्य सूत्र धार था लेकिन आतंकिओं की हुकूमत होने के सबब ये आतंकी बचता गया. लेकिन अब खुद ही अपनी मौत मारा गया. पुष्पेंद्र कुलशेठ ये नाम ज़हन में घर कर गया है. तैयार रह आतंकी तूने भी कुछ कम बदकलामी क़ुरआन और इस्लाम के एहकाम के लिए, गलत बयानी कुछ कम नहीं की है. मुस्लिम अवाम की कुछ कम दिल अज़ारी नहीं की है. तूने जो क़र्ज़ लिया है वो तो तेरे को चुकाना ही पड़ेगा. या तो आ के क़र्ज़ माफ़ करवा या नहीं तो अगर तू नहीं चूका सका तो तेरे बच्चे तेरे घर के कोई भी दुसरे मेंबर को चुकाना पड़ेगा. अगर कुछ नहीं तो तेरी प्रॉपर्टी से लिया जाएगा.
ट्वीट 2
प्रश्न विक्रम: इस आतंकी की खुदकशी को हत्या का रंग दे कर एक आतंकी इसकी मौत की हिमायत में आ खड़ा हुआ और बोलता है अवार्ड वापसी गेंग किधर है, किधर है ह्यूमन राइट्स एक्टिविट्स, किधर है केंडल मार्च. उसके इस वक्तव पे इस पत्रकार का जवाब.
उत्तर जुबेर: यहीं है कहीं नहीं गई बे फ़िक्र रहिये ये आतंकी अपनी मौत मरा है. इसको मौत का खौफ इतना हावी हो गया था की खुद ही खुदकशी कर ली. और मारा गया अकाल मौत. अब इसकी पत्नी और इसका भाई अर्थात देवर भाभी रंग रलिया मनाएंगे.
दूसरी बात इंसानों की मौत पे गम होता है दानव शैतान और आतंकी की मौत पे नहीं. न्यू ज़ीलैंड में मस्जिद में ५० नमाज़िओं की मौत पे तो आप लोग ख़ुशी से नाच रहे थे जबकि वो तो कही से कही तक किसी भी आतंक में शामिल नहीं थे. और न्यू जीलैंड तो एक शान्ति प्रिय देश है. अवार्ड वापिस किया जाता है जब मज़लूम की हत्या होती है और ज़ालिम करता है. लेकिन जब ज़ालिम मारा जाता है और राक्षस का वध होता है तो लोग चेन की सांस लेते हैं. फिर रावण मेघनाथ और कुम्भकर्ण की मौत पे काहे को खुशी मनाते हो. वो तो पंडित घराने से थे और रावण तो बोहोत बड़ा ज्ञानी था फिर क्यों खुश होते हो काहे को मातम नहीं मनाते.
ट्वीट 3
एक दम
झूटी और फरेबी बात है खुद मौत के घाट उतरा है ये आतंकी. इसके ऊपर मौत का खौफ इतना
हावी हो गया था की आत्महत्या कर ली. फिर भी अगर हिन्दुत्वादी और आतंकी अपने दिल की
करना चाहते हैं तो कर ले फिर देख ले उनके साथ और क्या क्या होता है. इनका खुद का
देश बर्बाद हो गया मोदी को समझाया था मत पन्गा ले हमसे फिर भी आ खड़ा हुआ सामने.
फरेब और जालसाज़ी कर के ई.वी.ऍम अदला बदली कर डाली और हम तो चाहते ही यही थे की
बीजेपी आये और ये पेशनगोई भी थी हमारी की २०१९ में भारत सख्त गृह युद्ध की तपिश
भोगेगा और चाहे बीजेपी आये या दूसरी पार्टी गृह युद्ध तो होगा. यकीन नहीं आता तो
हमारे कमेंट देख लो और लेख पड़ लो. हिन्दू आतंकिओं को अगर फिर भी ग़दर मचाना हैं तो
मचाये फिर देखें क्या होता है उनके साथ. और हाँ कोई कुछ नहीं करेगा ये लोग खुद ही
अपनी क़बर खोद लेंगे.
ट्वीट 4
देखो ये लोग खुद ही
अपने बुने हुए जाल में फसते जायेगें. क्या हम ने नहीं की है पेशनगोई की ये लोग खुद
अपनी मौत मरेंगे. जितना जिस जिस ने मुस्लिम क़ौम को तबाह करने की साजिश की है वो सब
ऐसे ही मारे जायेगे. और ये महज़ धमकी नहीं है हमारा वादा है हर काफिर से. आतंकी अमित
शाह बोहोत उछल कूद कर रहा था महाराष्ट्र में परसों की एक एक घुसपैठिये को चुन चुन
के बहार निकालेंगे इधर उसने खाने की जगह से हगना शुरू किया उधर मेक्सिको से ३१३
काफिरों को धक्के मारे के आतंक की ज़मीन भारत डी पोर्ट कर दिया. फिर आतंकी मनोज तिवारी मोदी की भतीजी के पर्स चोरी पे
दोपहर में बोलता है की ये काम घुसपैठियों का है और शाम को रिपोर्ट आ जाती है की
दोनों चोर सोनू और दिनेश हिन्दू हैं फिर लगाया ज़ोरदार जूता उस ह@र@म की औलाद को इस
पत्रकार ने और बोला की मार अब गोली इन दोनों को. जैसा करोगे वैसा भरोगे. फिर भी
अगर हसरत फ़िज़ा को खराब करने की है तो करो लेकिन तुम काफिर कुछ भी नहीं कर पयोगे
चेहरे बदल दिए जायेगे और तुम खुद उस जाल में फस जाओगे जो दूसरों के लिए बुनी है.
उसी गड्डे में गिरोगे जो दूसरों के लिए खोदा था.
Zuber Ahmed Khan एक एक हिन्दू आतंकी दर्दनाक मौत मारा जाएगा. आतंकी अमित बोहोत बड़ी बड़ी
बातें कर रहा है उसको ऊपर वाले के इन्साफ पे शायद यक़ीन नहीं है वो और हिटलर बेहद
दर्दनाक मौत मरेंगे. यहाँ तक की मुँह में लिया हुआ पानी तक हलक़ में नहीं उतार
पाएंगे. सबर किया M0SLMANO तुमने तुम्हारे साथ जिस जिस ने ज़ुल्म किया था वो सब तड़प
तड़प के मरेगें. ऊपर वाले की लाठी बे आवाज़ है लेकिन जब चलती है सब कुछ तबाह कर देती
है रस्ते में जो कोई भी आता है गर्दन कट के गिर जाता है.
ट्वीट 5
देखो ये लोग खुद ही
अपने बुने हुए जाल में फसते जायेगें. क्या हम ने नहीं की है पेशनगोई की ये लोग खुद
अपनी मौत मरेंगे. जितना जिस जिस ने मुस्लिम क़ौम को तबाह करने की साजिश की है वो सब
ऐसे ही मारे जायेगे. और ये महज़ धमकी नहीं है हमारा वादा है हर काफिर से. आतंकी अमित
शाह बोहोत उछल कूद कर रहा था महाराष्ट्र में परसों की एक एक घुसपैठिये को चुन चुन
के बहार निकालेंगे इधर उसने खाने की जगह से हगना शुरू किया उधर मेक्सिको से ३१३
काफिरों को धक्के मारे के आतंक की ज़मीन भारत डी पोर्ट कर दिया. फिर आतंकी मनोज तिवारी मोदी की भतीजी के पर्स चोरी पे
दोपहर में बोलता है की ये काम घुसपैठियों का है और शाम को रिपोर्ट आ जाती है की
दोनों चोर सोनू और दिनेश हिन्दू हैं फिर लगाया ज़ोरदार जूता उस ह@र@म की औलाद को इस
पत्रकार ने और बोला की मार अब गोली इन दोनों को. जैसा करोगे वैसा भरोगे. फिर भी
अगर हसरत फ़िज़ा को खराब करने की है तो करो लेकिन तुम काफिर कुछ भी नहीं कर पयोगे
चेहरे बदल दिए जायेगे और तुम खुद उस जाल में फस जाओगे जो दूसरों के लिए बुनी है.
उसी गड्डे में गिरोगे जो दूसरों के लिए खोदा था.
ट्वीट 6
सब दिखावा
है छलावा है. पत्नी के आंसू भी झूठे हैं. पत्नी के साथ जिस तरह से पड़ताड़ना करता था
मार पीट करता था तो कोई बईद नहीं की इसकी पत्नी ही इसकी हत्या की सूत्र धार हो. और
जो गुंडे आये थे वो पत्नी के दूर के रिश्ते में लगतें होंगे. मीडिया और
हिन्दुत्वादी संघटन के दबाओ में आ कर मामले को ऐसे मोड़ दिया जा रहा है की एक वर्ग
विशेष की इमेज को धूमिल किया जा सके. मन में तो लड्डू फूट रहे होंगे. बस अपनी
नफ़्सानी ख्वाहिश सामने कर दी की इसको क्या चाहिए. देखो ये रोना धोना सब कुछ दिन
बाद बंद हो जाएगा और ये ऐश करेंगे सभी मिल के मौज करेंगे.
ट्वीट 7
सभी झूठी और फरेबी बात
है मौलाना वोलाना कुछ नहीं इस आतंकी की हत्या ससुराल पक्ष का किया धरा है. और हाँ
ऐसे ही पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ या तो मारा जाएगा या खुदकशी कर लेगा. हम बता रहें
हैं, गलती कर रहे हो आप लोग. कर लो जितनी उसकी सुरक्षा के इंतज़ाम करना है. वो नहीं
बचेगा. हाँ अगर उसको कोई चीज़ बचा सकती है तो अल एलानिया माफ़ी, मोमिन अवाम का दिल
अज़ारी करने और झूठ फरेब फैलाने के गुनाह का कफ़्फ़ारा. जिस तरह से उस बूढ़े शैतान ने
इजराइल के आतंकी की आमद पर उसके साथ सेल्फी ली थी और इस पत्रकार की बद्दुआ के बाद बॉलीवुड में जो जो उस फोटू में शरीक थे
एक के बाद एक सब मौत की आगोश में जाना शुरू हो गए थे. आखिर नंबर उस बूढ़े शैतान का
था लेकिन उसने ना सिर्फ माफ़ी मांगी बल्कि एक इंडिया टुडे के एक प्रेस हाल में कम
से कम १००० से २००० लोगों के सामने इस बात का एतेराफ किया की उसकी बैचेनी क़ुरान की
आयात पढ़ने से कम हुई और जब जब वो क़ुरान पढ़ता है उसको सुकून मिलता है. फिर उसने
माफ़ी मांगी और क़ुरान की आयत पढ़ी.
ट्वीट 8
उत्तर प्रदेश पुलिस के डी.जी.पी. और उनकी हसी मज़ाक़ वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस. मुझे समझ में नहीं आता की ऐसे लोगों को ऐसे ऊंचे सवेधानिक पद पे कौन आसीन करता है. एक तरफ तो उत्तर प्रदेश पुलिस ३ मुस्लिम नौजवानो को गिरफ्तार करने का दावा कर रही है दूसरी तरफ उनके तार किसी भी आतंकी संघटन से जुड़े नहीं होने का दावा कर रही है. फिर गिरफ़्तार किये हुए मुजरिमों को अपराधी बोल के सम्भोदित कर रही है. पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भरपूर विरोधाभास है. अगर किसी भी हिन्दुत्वादी वो भी कट्टर नेता की हत्या होती है और अगर उसमे किसी भी मुस्लिम की भूमिका होती है और गिरफ्तारी हो जाती तो अभी तक क्या पुलिस और क्या मीडिया उस अपराधी को आतंकी बोल बोल के वक़्त से पहले ही जान से मार डालते. फिर मीडिया के भोकने वाले कुत्ते और कुत्तियां उनके घरों तक पहुंच जाते और घर वालों को ख़ास महिला वर्ग को पडतडित करना शुरू कर देते. लेकिन पुलिस को भी प्राथमिक जांच में ये अंदाज़ हो गया होगा की मक़तूल और क़ातिल दोनों ही हिन्दू हैं. तभी बोहोत ही नार्मल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी और आतंकी संघटन से लिंक होने की बात को भी नकार दिया क्योंकि क़ातिल की राजनैतिक पहुंच और रसूख बोहोत ऊपर तक है.
ट्वीट 9
इस पत्रकार के वक्तव
पे की हत्या के पीछे राजनैतिक साजिश और गृह कलश की बदबू आ रही है. एक सज्जन बोलते
हैं की मत मानवता का पाठ पढ़ाओ. उनको इस पत्रकार का जवाब: मानवता का पाठ मानव को
पढ़ाया जाता है तुम जैसे शैतान हिन्दू आतंकी और जानवरों के लिए वो पाठ है ही नहीं.
दूसरी बात ये पाठ नहीं है इस आतंकी देश की हक़ीकत है और उससे मुँह नहीं मोड़ सकते.
अगर गलती से भी दूर दूर तक किसी मुस्लिम का हाथ होता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तो
तुम जैसे आतंकी तो अभी तक आग लगा देते और दंगा फसाद कर डालते.
जब तुम लोग सच्ची बात कहने वाले बुध्जीविओं को जान से मार
डालने की धमकी देते हो और पूरी शिद्दत से उसकी आवाज़ को दबा देते हो ताके तुम्हारे
आतंक और हूकात के कुकर्म बहार समाज तक ना आये तो ये कैसे मुमकिन है के एक आतंकी की
हुकूमत भारत में हो और कम से कम २० से ज़्यादा स्टेट्स में हो और जहाँ आतंकी को मौत
के घाट उतारा गया वो स्टेट भी आतंकिओं के कब्ज़े में हो और हत्यारा कोई और नहीं
बल्कि मुस्लिम हो फिर भी तुम इतनी ख़ामोशी इख्तियार करोगे. कैसे मुमकिन है. जब तुम
लोग निर्दोष लोगों को झूठे इलज़ाम में लीच कर देते हो बच्चा चोरी, गाये चोरी, मोटर
साइकिल चोरी तो एक हत्यारे की गिरफ्तारी पे काहे को बवाल नहीं मचा पा रहे हो. वजह
वही है क़ातिल भी हिन्दू है और मक़तूल भी
पुलिस
के हाथ जितने भी सबूत अभी तक लगे हैं या जिस किसी भी मुजरिम को पकड़ा है वो सब झूठे
हैं और पुलिस गलतबयानी कर रही है. दूसरी बात
जिस होटल के कमरे से खून से सने भगवा कपडे
और बैग मिले हैं वो सिर्फ और सिर्फ गुमराह करने की नियत है. कोई भी मुजरिम अगर क़त्ल करेगा और ख़ास कर के उस शख्स
का जो की हिन्दू शिद्दत पसंद और रसूख दार शख़्स होगा फिर अगर क़ातिल मुस्लिम होगा तो
क्या वो ऐसी बेवक़ूफ़ी करेगा की खून से सने कपडे और अपना बैग होटल में छोड़ जाएगा. क्या मुजरिम खुद ही पुलिस को सुराग़ दे रहा है. कुछ नहीं मुजरिम घर के अंदर ही है.
जब
भी ऐसा कोई भी कांड होता है तो पुलिस सबसे पहले उन लोगों पे शक करती है जो मक़तूल के
दुश्मन होतें हैं. या जिनसे कभी भी मक़तूल को
जान का खतरा होता है. और उन्ही को गिरफ्तार
किया जाता है. और जो मक़तूल के सबसे क़रीबी,
दोस्त एहबाब होतें हैं ना तो उनपे शक जाता है और ना ही उनको गिरफ्तार किया जाता है. और ये ही सबसे बड़ी गलती है.
नोट:
इस सहाफी के पास फोनों का ताँता
लग गया जब से उसने कमलेश तिवारी के क़त्ल की गुत्थी पे अपनी जानकारी दी है. तमाम सहाफिओं और उत्तर प्रदेश तथा भारतीय प्रशासन
को अब तक ये तो यकीन हो चला होगा की इस सहाफी की जानकारी ९८% सटीक रहती है. सभी पूछ रहे हैं की आखिर क्या राजनैतिक मजबूरी हो
सकती है जिसकी वजह से उनका क़तल किया गया. इस
सहाफी के पास जो जानकारी है उससे पता चलता है की कमलेश ने एक हिन्दू हिंतों की पार्टी
बनाई थी और वो तमाम उन कार्यों पे बीजेपी से अलग राये रखते थे जिसको बीजेपी सिर्फ चुनावी
मुद्दा बना के सिर्फ वोट बैंक और तुष्टिगुण की राजनीति करती थी. उससे बीजेपी को अपना परम्परिक हिन्दू वोट बैंक खसकता
हुआ नज़र आने लगा था. अगर कमलेश अगले चुनाव
तक नहीं क़त्ल किये गए होते तो वो ज़रूर बीजेपी की वोट बैंक में ज़बरदस्त सेंध लगा देते.
मुजरिम घर में ही है. घर
में जाइये आपको आपका मुजरिम मिलेगा.