Sunday, 14 November 2021

अल्ताफ और त्रिपुरा का बदला हिन्दू दहशतगर्द और दहशतगर्द फोर्स को मार कर लिया।

अज़ीज़ नाज़रीन,

(नोट: मुस्लिम अवाम से गुज़ारिश है की जिन लोगों ने मालेगाव, नांदेड़, बीड में त्रिपुरा हिन्दू दहशत हमले के खिलाफ एहतेजाज किया और महाराष्ट्र पुलिस पर पथराव किया वोह गलत अमल था।   उन अवाम के लिए जल्द पैग़ाम दिया जाएगा।  मुस्लिम अवाम जज़बात में आ कर मरकज़ की ज़ाफ़रानी हाकिम के दबाव में उद्धव हुकूमत को कमज़ोर ना करें।   अभी तक मौजूदा शिवराय में इस सहाफी को नाइंसाफी की कोई भी ऐसी बात नज़र नहीं आती जिसकी वजह से एहतेजाज किया जाए।) मज़ीद तफ़्सीली पैग़ाम का इंतज़ार करें।       

दो दिनों से बम्बाई से बहार गया हुआ था इसी वजह से हालात से आप हज़रात को आगाही नहीं कर सका।   हालांकि पाकीज़ा जंगजू जंग में मुस्तहेदी से बताये हुए हदफ़ पर गामज़न थे।   ताज़ा सूरते हाल यह है की शुमाल के ज़ाफ़रानी डाकू और मुसलमानों का खून बहाने वाला क़साई योगी आदित्यनाथ के ख़ाकी दहशतगर्दों ने जिस हिसाब से मासूम अल्ताफ को शहीद किया है उसका बदला हिन्दू दहशतगर्द बीजीपी का वेस्ट बंगाल की मदिनापुर में भास्कर बर्रा को दौड़ा दौड़ा कर तड़पा तड़पा कर पीट पीट कर दिल की जलन को उसके ही ख़ून से बूझा कर मार डाला। एक हफ्ते के अंदर यह दूसरा बीजेपी का मेंबर का क़तल किया गया है।  इस हिन्दू दहशतगर्द भास्कर बर्रा को बरोज़ इतवार  हलाक कर अल्ताफ की शहादत का बदला ले लिया गया है। (करो गिरफ्तार अगर एक बाप के हो)  जिन ख़ाकी दहशतगर्दों ने उस मासूम अल्ताफ को शहीद किया था उन सभी का नाम और सूरत इन दो दिनों में व्हाट्सअप ग्रुप पर आ गई है।  तैयार रहो ज़ालिमों तुमको मौत की आहट सुनाई देगी। 

दिफ़ाई फ़ौजिओं ने त्रिपुरा हिन्दू दहशतगर्द हमले में इस्लामिक इबादतगाहों, मुसलमानों के ज़ारियाये रोज़गार और घरों को आतिशे नार करने की हिमाक़ात का ज़ोरदार जवाब दिया है।   त्रिपुरा हिन्दू दहशतगर्द हमले का बदला मणिपुर में भारतीय दहशतगर्द फ़ोर्स (इंडियन आर्मी) को अपने ख़ून से चुकाना पड़ा है।  जहाँ दीफ़ाई फ़ौजिओं ने भारतीय दहशतगर्द फ़ोर्स के कर्नल के पूरे एहले ख़ाना समेत ७ हिन्दू दहशतगर्दों को उनके ही ख़ून से सुर्ख कर गुसल करवा दिया है।   दिफ़ाई हमले में कर्नल विप्लव देब त्रिपाठी उसकी लुगाई और ७ साल का लोंडा मौत की आगोश में चले गए।  

विप्लव त्रिपाठी हिन्दू दहशतगर्द फ़ोर्स में ४६ आसाम राइफल बटालियन का कमेन्डिंग अफसर था।   जो बरोज़ हफ्ते (सनीचर) को फॉरवर्ड केम्प का मुआएना करने गया था।  जहाँ से लौटते वक़्त उसका मुआएना दिफ़ाई फ़ौजिओं ने बंदूकों से किया और उस जंग में भारतीय ज़ाफ़रानी दहशतगर्द मौत की आगोश में चला गया मतलब ढेर हो गया।   साथ में अपनी लुगाई, ७ साल के लोंडे और मज़ीद ८ फ़ौजिओं की बली दे कर गया।   उस कर्नल को यक़ीन होगा की उसकी मौत के बात हस्बे रिवायत और मज़हबी अक़ीदे के हिसाब से उसकी लुगाई को देवर इस्तेमाल करेगा।  क्योंकि यह हिन्दू मज़हबी अक़ीदा है अगर शोहर ज़न्खा हो या अकाल मौत मारा जाए जंग में ख़ून से सुर्ख हो जाए मौत की आगोश में चला जाए तो देवर उसकी विधवा लुगाई को इस्तेमाल कर सकता है और नस्ल को आगे बड़ा सकता है।  इसीलिए उस कर्नल ने अपनी लुगाई और लोंडे को भी मरवा डाला।  

अभी ५ रोज़ क़ब्ल छत्तीसगढ़ के सुकमा नक्सली दिफ़ाई हल्क़े में एक CRPF के जवान ने शदीद गोलीबारी कर के ४ CRPF जवानों को उनके ही खून से ग़ुसल कर हलाक कर दिया था।   

इस हिन्दू दहशतगर्द पर हमला बर्मा हिन्द सरहद के नज़दीक हुआ है।   यह वही बर्मा की सरज़मीन है जहाँ हिन्दू दहशतगर्दों का सरग़ना मोदी ने अपनी नाजाइज़ लुगाई सू की को बहका कर मुस्लिम नस्ल कुशी की नाकाम कोशिश की थी।   आज उसकी हालात भी किसी बाज़ारू औरत से कम ना रही।   इज़्ज़त विक़ार तो गया हाथ से पावर पोजीशन कुर्सी भी गई और हाथ लगी जेल ज़लालत रूसवाई, और हो सकता है की इसको फ़ासी हो।   यह है दीफ़ाई  बदला।       

Zuber 

Friday, 12 November 2021

ज़ाफ़रानी दहशत के सबसे पहले क़िले गुजरात की जानिब कूच करो।


ज़ाफ़रानी भारत में ए.आई.एम.आई.एम. के पाकीज़ा सियासी फ़ौजिओं शुमाल फतह करने के बाद ज़ाफ़रानी दहशत की मादर सरज़मीन की जानिब कूच कीजिये।  जिस गोधरा को हर बेहेस और मुबाहिसे में हिन्दू शिद्दत पसंद मुस्लिम अवाम और सहाफियों को याद दिहानी करते रहते थे, की गोधरा भूल गए हो तो मुज़्ज़फ़्फ़रनगर याद करो.  गोधरा को हिन्दू दहशत और गुलामी से सियासी पाकीज़ा फ़ौजिओं ने फतह कर लिया है।  गोधरा बल्दिया ज़ाफ़रानी हाकिमों, दहशत और २५ साल की ज़ाफ़रानी क़त्ले आम, ज़ुल्म, और ग़ुलामी से आज़ाद है। अब जंग शुमाल और मुज़्ज़फ़्फ़रपुर फतह करने की है. 

अभी तक ज़ाफ़रानी दहशतगर्द भारत को ग़ुलाम बना कर उस पर हुकूमत कर रहे थे क्योके कांग्रेस और तमाम नो निहाद सेक्युलर ग़द्दार उन ज़ालिमों, मौत के सौदागरों, ज़ाफ़रानी साधू के साथ मौजूद थे।  दूसरी बात किसी भी ज़ालिम की तलवार रोकने और उसका हाथ पकड़ कर उसकी ही ज़ुबान में उसको जवाब देने के लिए जिस्मानी क़ुव्वत से ज़्यादा रूहानी क़ुव्वत की ज़रुरत होती है।  और जहाँ तक कांग्रेस, सपा, बसपा और दिगर नो निहाद सेक्युलर जमातें हैं वोह तो किसी ज़नखे की मानिंद जंग लड़ने से क़ब्ल ही हथियार डाल देतें हैं।  चाहे वोह जंग एवान में किसी मुद्दे पर मुबाहिसा हो या इन्तेख़ाबी मरहले में सियासी हिकमते अमली हो मुखालिफ तंज़ीमें तो जंग लड़ने से क़ब्ल ही ज़ाफ़रानी दहशत और हुकूमत से मरऊब और ख़ौफ़ज़दा हो कर वैसा ही करतें हैं जैसा की ज़ाफ़रानी तंज़ीम चाहती है। 

गुजरात जिसको अभी तक ज़ाफ़रानी दहशत ने अवाम को ग़ुलाम बना रखा था जो अब आहिस्ते आहिस्ते ग़ुलामी की ज़ंजीरों को तोड़ने की हिकमते अमली की जानिब गामज़न है।   ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों का अब हर मंसूबा तबाह करना होगा।   गुजरात के अहमदाबाद बल्दिया ने ऐसा क़ानून नाफ़िज़ करने की बात कही है जिसमे सड़क के किनारे भूने हुए गोश्त और मुर्गे की दुकानों को बंद किया जाएगा।   ऐसा ही फैसला राजकोट और बड़ोदा बल्दिया भी लेने वाली है।   इन ज़ाफ़रानिओं की ख़बासत महज़ मुस्लिम माश को तबाह करने की है।  इनके दिलों दिमाग में ज़हर और आलूद उस हद तक पेवस्त हो चूका है की इनको हर मुद्दे पर मुस्लिम ही याद आतें हैं।   गाये, बेल, सांड और गाये के बच्चे को काटने पर यह लोग बोलते हैं की हमारे मज़हबी अक़ीदे पर चोट पहुँचती है।   फिर यही ज़ाफ़रानी गुजराती, मारवाड़ी यहाँ तक की जेनी और साधू पंडित खुद ना सिर्फ बकरे के गोश्त बल्कि गाये, बैल का गोश्त कसाब की दूकान से खरीद फरोख्त करते हुए देखे जातें हैं तब इनका मज़हबी अक़ीदा कहाँ चला जाता है।    

फिर बड़े जानवर का गोश्त का शोरबा और नल्ली खाते हुए कई वीडियो वायरल हुए।   साधुओं को ज़ाफ़रानी कपड़ों में वोह सब वीडियो देख कर यह बात साबित हो जाती है की गाये के जाबीहे पर पाबन्दी महज़ सियासी है उसका मज़हब से कोई ताल्लुक़ नहीं है।   फिर अगर कोई भी ज़ाफ़रानी सियसतदाँ वीडियो को झूठा बोलता है, तो यह सहाफी इस बात की गवाही देता है और उसने खुद मारवाड़ी, जैनी और गुजराती अवाम को अपने साथ मॉस का सेवन करते देखा है।   बल्कि खुद ही गुजराती, मारवाड़ी और जैनी बोलते हैं खान साहब गोश्त की पार्टी दो।   यह बात अलहदा है की वोह बकरे या मुर्गी का गोश्त खातें हैं।   फिर बात वहीँ आ जाती है जिसका ज़िक्र ज़ाफ़रानी दहशतगर्द कर रहें हैं की अवाम को भूने हुए गोश्त की खुश्बू से तकलीफ होती है।  जब खुद गुजराती, मारवाड़ी, सिंघी, जैनी, हिन्दू जम के सिका हुआ, शोरबे वाला, मुगलाई, बिरयानी, कबाब खा रहें हैं उनको कोई तकलीफ नहीं होती तो अवाम की तकलीफ वाला फलसफा तो महज़ ख़बासत साबित हो रहा है।  अब बात वही है जब खुद बकरा हलाल होने आ रहा है तो बरियानी पकेगी भी और सब के अंदर बटेगी भी।    

Zuber  

Sunday, 7 November 2021

बड़ा बेआबरू हो कर दुबाई के कूचे से भारत निकला।

 अज़ीज़ नाज़रीन,

 जिस तरह मोहब्बत और नफरत का एक पैमाना होता है, उसी तरह इंसान के खुशी और ग़म का पसंद और नापसंद एक पैमाना होता हैं।  ना तो मोहब्बत में किसी का ज़ोर होता है और ना ही इज़हारे खुशी पर किसी का ज़ोर होता है।   जिस तरह एक आशिक़ का दीदारे यार दुनियां की हर नेमत से हर नज़ारों से अफ़ज़ल होता है जिसका आस्क माशूक़ के चेहरे पर साफ़ दिखाई देता है।  उसी तरह खुशी इंसान के चेहरे पर रवां तास्सुरात से ज़ाहिर हो जाती है। 

जिस तरह पाक टीम की भारत पर फतह को इन्तेख़ाबी मोहीम बना कर मुस्लिम और कश्मीरी तालिबे इल्मों को हरासा किया गया उनको गिरफ्तार किया गया तब आज तक की गिरफ्तारी की उन ख़बरों में से एक खबर पर नूज़ीलैण्ड के मैच से क़ब्ल इस सहाफी ने अपने एक तास्सुरात में कहा था।   अब बात पाक की जीत पर इज़हारे खुशी तक महदूत नहीं रह गई, बरक्स अब भारत जब भी किसी भी टीम से हारेगा हम खुशी का इज़हार करेगें।   चलो करो गिरफ्तार।

अब जब अफ़ग़ानिस्तान तालिबान ने भारत को इस्लामिक ज़मीन से धक्के मार कर निकाल दिया।  तो हम इस खुशी को कैसे फरामोश कर सकते थे।  हम तो खुशी भी बनायेगें और पटाखे भी छोड़ेगे।  बागी ज़ाफ़रानी गुलाम तैयार कर रहें हैं।  हम भारत की ज़लालत पर उसकी हार पर सेमी फ़ाइनल से धक्के मार के हाकल दिए जाने पर खुशी का इजाहर करते हैं। 

जैसे ही अफ़ग़ानिस्तान तालिबान ने भारत को दुबाई से धक्के मार कर हकाला खारघर में पटाखों और धमाकों की बाढ़ आ गयी।  अवाम दिवाली की खुशी में पटाखे छोड़ रहे थे और हम अफ़ग़ानिस्तान ने भारत को पछाड़ दिया और सेमी फ़ाइनल की उम्मीद को तबाह कर दिया फोड़ दिया उस खुशी में पटाखे छोड़ रहे थे।  

सदा भारत के ज़ाफ़रानी लंगूर और सियासतदान पाक के लिए अदना दर्जे के ज़ुबान का इस्तेमाल करते थे।  ना सिर्फ हर वर्ल्ड कप के मैच से क़ब्ल बल्कि दुसरे मैचों में भी पाकिस्तान की तनक़ीद करना भारत को अफ़ज़ल तरीन तसव्वुर करना, पाकिस्तान की टीम का मखौल उड़ाना।   भारत की टीम दीगर टीमों के रन रेट की वजह से कहीं इस टीम की जीत की दुआ कही उस टीम की जीत की दुआ लेकिन रूस्वाई जो भारत की तक़दीर में लिख दी गई थी वोह हुआ।  ज़ाफ़रानी और दीगर सियासत को हर मुद्दे पर  पाकिस्तान याद आ ही जाता है. इनकी पाकिस्तान से नफरत उस हद तक ऊपर पहुंच गई है की अगर भारत में तेज़ तूफ़ान बारिश और आग लगेगी तो उसमे भी इनको पाकिस्तान का हाथ ही नज़र आएगा। 

असदुद्दीन बोलतें हैं की पाकिस्तान की भारत से नफरत का पैमाना उस हद तक बड़ा हुआ है की हर चीज़ में उनको भारत नज़र आता है।  वही बात भारत के ज़ाफ़रानी और शिद्दत पसंदों यहाँ तक की कांग्रेस और खुद असदुद्दीन जैसे मुसलमानों पर लागू होती है।   भारत को हर चीज़ में पाकिस्तानी दिखाई देतें हैं।   हर मुद्दे को पाकिस्तान की जानिब मोड़ देना भारत की अवाम को आता है।   इनकी पाकिस्तान से नफरत उस हद तक बढ़ चुकी है की हर जानिब इनको पाकिस्तान ही नज़र आता है।  हर मुद्दे पर पाकिस्तान ही नज़र आता है।

इससे क़ब्ल तालिबान ने काफिर शिद्दत पसंदों, दहशतगर्दों, ज़ाफ़रानी ज़ालिमों (बीजेपी) मोदी गुलामों को धक्के मार कर अफ़ग़ानिस्तान की सरज़मीं से निकाला और अब अफ़ग़ानिस्तान ने दुबाई से हकाल दिया।

Zuber

Tuesday, 2 November 2021

मुनाफ़िक़ सोच के ऊपर अल्लाह और उसके फरिश्तों की लानत है।

अज़ीज़ नाज़रीन,

पाकिस्तान के वज़ीर और मुसलमानों के सबसे क़वी मुल्क और अज़ीम रहनुमा के बयान ने काफिर मुल्क के तमाम ज़ाफ़रानी कीड़ों और उसके मुवाफ़िक़ो को अंगार लगा दी है।   अब मुसलमानों की सबसे अदना और छोटी सोच रखने वाली तंज़ीम जमीयतुल ओलमा ए ज़ाफ़रान हिन्द का अदना मुलाज़िम मौलाना मेहमूद ज़ाफ़रानी की अदना सोच, मुसलमानों के साथ ग़द्दारी, काफिर मुल्क मुसलमानों के दुश्मन की ज़ाफ़रानी हामी सोच सामने आई है।   उस काफ़िर गुलाम ज़ाफ़रानी के सवालों का जवाब दे कर सहाफी जुबेर ने धज्जियाँ उड़ा दी.  पेश ख़िदमत हैं उसके सवालों पर सहाफी जुबेर के जवाब।

सवाल:  पाकिस्तान कौन होता है मुसलमानों के बारे में फ़िक्र करने वाला।  

जवाब: जवाब है जब तुम कुफ्र के साथ हो गए ज़ाफ़रानी गद्दारों के साथ मिल कर मुसलमानों का गला काटने लगे तो फिर पाकिस्तान की जानिब ही हर मोमिन देखेगा।   त्रिपुरा में इतना बवाल मचा मस्जिदे जला दी, क़ुरान जला दिए गए मुस्लिम क़त्ले आम किया, नबी अल्लाह की शान में बेहद अदना दर्जे की बकवास की गयी, किस गुफा में घुसे हुए थे। जब पाकिस्तान ने मज़म्मत की उसकी जानिब से बयान आया तब गुफा से बहार आये और बैदार हुए।  

सवाल: फिर वोह मुनाफ़िक़ बोलता है की हिन्द का मुसलमान पाकिस्तान के मुसलमान से ज़्यादा इस्लाम पसंद हैं। 

जवाब: उसको जवाब जब तुम्हारी सोच यह है की हमने पाकिस्तान के निज़ामे मुस्तुफा और शरीयत के क़ानून को ठोकर मार दी और हिन्दू क़ानून की पैरवी कर हिन्द में रहे, तो तुम्हारे पैरोकार मुसलमान भी वैसे ही इस्लाम पसंद होंगे।   अब जिसने निज़ामे मुस्तुफा और शरीयत के क़ानून को ठोकर मार दी फिर उसके लिए बचता ही क्या है।  ना दीन और ना दुनिया।  फिर भी अबू लहब की तरह हुज़ूर के चचा ज़ाद भाई होने का दम भरना है तो भरो।   सभी को तुम्हारी मुनाफ़ेक़त और कुफ्र  से रग़बत के बारे में पता पड़ चूका है।  

तुम्हारी सौच शैतानी सोच है अना ख़ैरूम मिनहूम, में इससे अफ़ज़ल हूँ में इससे ज़्यादा सजदे करने वाला हूँ।   आदम और शैतान में जंग किस बात की थी वोह महज़ एक सजदे की नहीं थी।   बल्कि अफ़ज़लियत की थी।  और तुम भी वही बोल रहे हो की पाकिस्तान के मुसलमानों से काफिर मुल्क का मुस्लिम अफ़ज़ल है ज़्यादा इस्लाम पसंद है तो तुम्हारी सोच शैतानी है।  और तुम कौन होते हो तमाम मुसलमानों की जानिब से बात करने वाले, क्या तुमने हिन्द के तमाम मुसलमानों का ठेका लिया है।  जिस तरह तुम पाकिस्तान के ऊपर तनक़ीद कर सकते हो की पाकिस्तान कौन होता है हिंदुस्तान के मुसलमानों के बारे में बात करने वाला तो हम भी वही कह सकतें हैं तुम किस हैसियत से मुस्लिम अवाम की बात कर रहे हो जब तुम्हारी सोच में मुनाफ़ेक़त की बू आती है।   उससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा है की तुमको ज़ाफ़रानी हाकिमों से ग़ुलामी करने की और ऐसे बयानात देने की हिदायत है।  जबकी क़ुरान और हदीस में हर मोमिन हर मोमिना के लिए तड़प का, हुसने सुलूक का वाज़े हुकुम है।  अगर मुल्क से मोहब्बत का तस्सव्वुर होता तो दौरे पैग़म्बरीयत में जितनी भी जंगे हुई वोह मक्का में ही तो हुई।  मुल्क से मोहब्बत का कोई तस्सव्वुर नहीं अगरचे तुम काफिर हाकिम के हाथों में गुलाम भी हो तो तुम्हारी सौच में मुस्लिम हमदर्दी और इस्लाम के लिए तड़प दिखना चाहिए चाहे वोह तुम्हारे मुल्क का नहीं बल्कि तुम्हारा हमसाया ही क्यों ना हो।

सवाल: वोह बोलता है पाकिस्तान ने इस्लाम और मुसलमानों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।  

जवाब:  पाकिस्तान ने नहीं तुम जैसे मुनाफ़िक़ों और मुनाफ़िक़ सौच ने माज़ी में और आज के दौर में इस्लाम और मुसलमानों को नुकसान पहुंचाया है।  

यज़ीद भी अपने आप को मुसलमान कहता था और आज के दौरे हाजरा में लानत का बाईस बना।  उस दौर में हाकिम की पैरवी करना इस्लाम समझा जाता था और हक़ की बात करने वाले को ग़द्दार।   और तुम तो यज़ीद के हामी दिख रहे हो इमामे हुसैन के सब्ज़ परचम के नीचे तो नहीं हो।  जबकी इमामे हुसैन हक़ के परचम के अलमबरदार थे और यज़ीद हाकिमियत के ग़ुरूर और तकब्बुर से चूर था। 

आज कुफ्र बनाम इस्लाम या हक़ बनाम बातिल की इस जंग में तुम बातिल ताक़तों के साथ खड़े हो और जो भी सेक्युलर हिन्दू हैं वोह यह समझ रहें हैं की कौन ग़लत है और कौन सही वोह हक़ के परचम के नीचे हैं, तो तारीख में तुमको लोग रज़ूली अल अज़बई जैसे ग़द्दार तसव्वुर करेगें और उन हिन्दुओं को जो हक़ के परचम के नीचे थे उनको हुर्र बोलके इज़्ज़त से मुख़ातिब करेंगे।

एक और हैं जमीयत के असद वोह पहुंच गए मुसलमानों के साबसे बड़े दुश्मन अबू जेहल के पास उसके सुदर्शन टीवी पर इंटरव्यू देने उसने जो बेइज़्ज़त्ती इस्लाम अल्लाह और नबी सल्लम की शान में की है वोह सब सुन कर गए।   क्या ज़रुरत थी किसी काफिर वोह भी दहशतगर्दों के चैनल पर इंटरव्यू देने की।   इन काफिर शिद्दत पसंदों और दहशतगर्दों से किसी भी क़िस्म की कोई भी गुफ्तगू नहीं होना चाहिए।उसके बाद दम भरते हो की हम मुसलमानों के साबसे बड़े रहनुमा हैं।  ख़ैरख़्वाह हैं।   पाकिस्तान मुसलमानों का दुश्मन है।   तुमने नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले काफिर शिद्दत पसंदों के लिए क्या किया।   पाकिस्तान ने उस मसले को आलमी सतह पर लाया, अक़वामे मुत्तहिदा में मसले को उठाया।पाकिस्तानी क़रारदार की हिमायत बरतानिया ने की एयरोपियन यूनियन ने की और ब्रिटेन ने ऐसे गुस्ताख़े नबी के ख़िलाफ़ क़ानून नाफ़िज़ किया है।  तुमने क्या किया महज़ कुफ्र और काफिर मुल्क, ज़ाफ़रानी हुकूमत के तलवे चाटने और उसकी जी हूज़ूरी में अपने ही मज़हबी भाई को मुसलमानों को कोसने के अलावा क्या किया है।  सहाबा की तारिख पड़ो जब कुफ्र और इस्लाम की जंग होती थी तब एक क़बीले के मुस्लिम दुसरे नावाक़िफ़ क़ाबिले के मुसलमान सहाबा अपनी अज़वाज तक दे दिया करते थे।  

Zuber

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...