अज़ीज़
नाज़रीन,
हिंदुस्तान
के सूबे महाराष्ट्र और दीगर हल्क़ों में इन्तेख़ाबात का खुमार चढ़ने लगा है. सियासी जमातें अपने अपने नुमाइंदों के साथ पिछले
अपने किये हुए कामों का तज़किरा खूब ज़ोर और शोर से कर रहें हैं. बहर कैफ दीगर सूबों की बात ना करते हुए फिल वक़्त
महाराष्ट्र की बात करतें हैं. इन्तेख़ाबात तो
महाराष्ट्र में बाद में होंगे लेकिन उसका रिजल्ट और वज़ीरे आला का इन्तेख़ाब तो पहले ही
हो चूका है. दुनियां वालों के पास कोई भी तहक़ीक़ाति मालूमात बाद में पहुँचती है पहले तो वो अल्लाह के ख़ास बन्दों के पास पहुंच जाती है. दुनिया में चीज़ें बाद में मंज़रे आम पे आतीं हैं
पहले तो उसके ऊपर मोहर वली कामिल लगा देतें है और फैसला कर देतें हैं.
महाराष्ट्र
में भी इन्तेख़ाब तो बाद में होंगें लेकिन उसका फैसला तो पहले ही हो चूका है. इस इन्तेख़ाब में दो जुड़ी हुई सियासी जमातों का इक़्तेदार तक़रीबन
ख़त्म हो जाएगा. तीन जामात उभर कर आएंगीं और
सियासी अखाड़े की जंग इन तीनों के बीच में ही रहेगी. एक जमात बोहोत ज़्यादा सीटें ले कर आएगी दूसरी काफी
कम लाएगी और तीसरी उससे कम. लेकिन दूसरी और
तीसरी जमात के बीच जंग काफी दिलचस्प मरहले में पहुंचेगी. कभी दूसरी जमात आगे होगी तो कभी तीसरी. बिल आखिर होगा वही जो मालिके हक़ीक़ी को मंज़ूर होगा.
महाराष्ट्र
की हुकूमत एक नंबर वाली जामत को तीन या दो नंबर वाली जमात की हिमायत से बनेगी. उस ख़ास जामत की अवाम का एक ख़ास तपका वज़ीरे आला
की कुर्सी पे अपने नुमाइंदे को फ़ाइज़ देखना चाहेगा. लेकिन उस जमात के सरबराह को कुर्बानी पेश करनी होंगी
और अवाम की अर्ज़ी को मुस्तरद कर के वज़ीरे आला की कुर्सी पे हमारी पसंद के नौजवान और
उनके फ़रज़न्द को फ़ाइज़ करना पड़ेगा.
फिर
कुर्सी पे नए वज़ीरे आला फ़ाइज़ होंगे. नई कैबिनेट
में एक ख़ास ख़वातीन को वज़ीर की पोस्ट दी जायेगी.
तमाम अवाम भौंचक्का और अचभित हो जाएगा.
वज़ीरे आला के इस इन्तेख़ाब से तमाम महाराष्ट्र और दिल्ली की सल्तनत में एक भूचाल
आ जाएगा. अवाम और मीडिया के लंगूर उधम मचा
डालेंगे. बिल आखिर वज़ीरे आला अपने फैसले को
हरगिज़ नहीं बदलेंगे, और वो ख़वातीन वज़ीर बनेगी और अपनी ज़िम्मेदारी को बा खूबी अंजाम
देगी.
नई
बम्बई के एक ख़ास खित्ते पे वज़ीरे आला की ख़ास तवज्जो होगी और उस खित्ते की खूब तरक़्क़ी
होगी. जो खित्ता कभी मीडिया के लंगूरों के
लिए दहशत का एक हिस्सा होता था उसी खित्ते में अब मीडिया आ कर अपना डेरा जमाया करेगा. और बड़ी बड़ी मरात से उसको नवाज़ा करेगा.
अगले
पांच सालों में महाराष्ट्र में नए वज़ीरे आला कई कामयाब फैसले करेगें. महाराष्ट्र की खूब तरक़्क़ी होगी. किसानों, अक़लियतों और एहले हुनूद की कोई हक़तल्फ़ी
नहीं होगी. बरक्स शर पसंद तंज़ीमे शिद्दत मचाने की जुर्रत करेगीं लेकिन उनको अपनी सूझ बूझ और आला ओहदेदारों से सलाह मशोरा कर के वज़ीरे
आला उस शर के बीज को पेड बनने से पहले ही कुचल डालेंगे.
महाराष्ट्र
हिन्दुस्तान का एक वाहिद ऐसा सूबा बनेगा जहाँ की अवाम की माशी हालत तमाम हिंदुस्तान
के किसी भी सूबे के अवाम से कई गुना ज़्यादा होगी. नई फैक्ट्रिया खुलेंगी अवाम के लिए रोज़गार मोहिय्या
होंगे. महाराष्ट्र में हिंदुस्तान के किसी
भी सूबे से ज़्यदा सस्ता साज सामान मिलेगा.
ये देख कर दीगर सूबे के अवाम महाराष्ट्र में पानी की तरह बहते आयेगें. वज़ीरे आला उनको रोकने के लिए और महाराष्ट्र की माशी
हालात को ख़राब ना करने के लिए ख़ास तवज्जो देंगे और फिर महाराष्ट्र में वही अवाम रह
सकेगा जो किसी ख़ास वक़्त तक महाराष्ट्र में आ कर बस गया होंगे. इस मोहीम को तमाम सियासी और वज़ीरे आला की हिमायती
जमात का पूरा ताऊन और हिमायत मिलेगी क्योंकि महाराष्ट्र में दीगर सूबे के अवाम की रोक
थाम किसी मज़हब की बुनयाद पे नहीं होगी बल्कि महाराष्ट्र की फलाह के लिए होगी.
अगले
पांच साल महाराष्ट्र में कोई बद अमनी नहीं होगी कोई ख़ाना जंगी नहीं होगी कोई सयासी
बवाल नहीं उभरेगा. महाराष्ट्र में फलाही कामो को खूब फरोग मिलेगी और
उसकी तार्राकी होगी.