Saturday, 30 May 2020
Thursday, 28 May 2020
मुल्के हिन्द पर ३ तरफा क़ुदरती क़ेहर
قید کر سکوگے نہ تم
مجھکو
الفاظ میں نہ قلم کی
سیاہے میں
ہوا کا جھونکا ہوں
میں
اڈا کے
لے جاونگا تم سب کو
صحافی زبیر
क़ैद कर सकोगे ना तुम मुझको
अलफ़ाज़ में ना क़लम की सियाही में
हवा का झोंका हूँ में
उड़ा के ले जाऊँगा तुम सबको.
सहाफी ज़ुबेर
अज़ीज़
नाज़रीन,
कोई
भी दानिशमंद, तालीमसाज़, प्रोफेसर या सहाफी किसी भी मुल्क के मौजूदा हालात देख कर उस
मुल्क में आने वाली तबाही को साफ़ तोर से महसूस कर सकतें हैं. मुल्के हिन्द में भी जिस तरह से हवा का रूख बह रहा
था और २०१४ के बाद से जो ज़हर और आलूद की काश्त की जा रही थी उसकी फसल महज़ तबाही और
बर्बादी होगी इस बात को हर बार इस सहाफी ने अपने तमाम गुजिश्ता मज़मूनों में पेश किया
था. हर मज़मून में यही बात कही थी की भारत सख़्त
तबाह होगा बर्बाद हो जाएगा.
इस
सहाफी को मुल्के हिन्द के सियासतदाँ, दानिशमंद और सहाफी (लंगूर-लँगूरनियाँ) भारत मुखालिफ
या गद्दार तस्सव्वुर कर के इसके मज़मूनों में दी हुई नसीहतों को हवा में उड़ा देते थे. लेकिन वही बात २०१६-१७ के बाद तक़रीबन हर खुले ज़ेहन
वाले सहाफी ने कही. जिसमे ख़ास नाम लेना चाहूंगा अभिसार शर्मा, प्रसून कुमार वाजपाई,
रविश कुमार, विनय दुबे, बॉलीवुड के आशुतोष राणा.
लेकिन सही कहतें हैं सहाफी जुबेर
क्या
बात थी, तेरे सेहर के नशे में ऐ साक़ी
की
सहर होने तक सब तबाह हो गया.
आज
ज़ाफ़रानी मिडिया के लंगूर और लँगूरनियों की वही हालत हो चुकी है. जो कभी वतन की मोहब्बत के फरेब और झूट में सिर्फ
और सिर्फ मोदी मोहब्बत का दम भरते रहे और हूकूमते हिन्द को उसकी गफलत, गलती की जानिब
तव्वज्जो ही नहीं दिलवाई और हुआ ये की सब कुछ बर्बाद होने के बाद इन लंगूरों की आँखों
से जादू की जो परत चढ़ी हुई थे साफ़ हुई, तब इनको इस बात का एहसास हुआ की इनकी गुलामी
ने इनके खुद के मुल्क को तबाह और बर्बाद कर दिया है.
मुल्के
हिन्द पर २०२० सख़्त आज़माइश ले कर आया है. यूं
तो जनवरी २०२० से ही कुछ ना कुछ आफ़ात और बला से हुकूमत को दो चार होना पड़ा. लेकिन अप्रैल २०२० से ले कर मई २०२० तक तीन तरफ़ा
क़ुदरती क़ेहर ने भारत को तक़रीबन तबाह कर दिया.
१.
करोना हमला
२.
तूफ़ान का हमला
३.
टिड्डी फौज का हमला.
इन
हमलों में एक वबा का हमला है (करोना) और दो हवा के हमले हैं. तूफ़ान और टिड्डी. ऐसा भी
नहीं है की आगाही नहीं की गई थी. फरवरी में
अपनी ऊपर दी हुई उन्वान वाली उर्दू नज़म में साफ़ अलफ़ाज़ में लिखा था.
"हवा
का झोंका हूँ में उड़ा के ले जाऊँगा तुम सबको"
फिर
भी बीजीपी और उनके कारकून गफलत में रहे और हर मसले पर बजाये अपनी गफलत मानने के कभी
जमाती कभी तब्लीगी कभी मुसलमान कभी पाकिस्तना इन्ही मसलो में उलझे रहे.
ख़ैर जो होना था हो चूका. लेकिन एक बात वाज़े है, इस जंग के बाद तमाम आलम के सुपर पावर तस्सवुर किये जाने वाले मुल्क अमेरिका बर्बाद होगा. और जिन तीन मुल्कों के बाशिंदो के ऊपर ज़ाफ़रानी दहशत ने अपनी सियासत चमकाने का अधूरा ख़्वाब देखा था उनमे से कोई एक मुल्क ज़बरदस्त क़ुव्वत वाला और ताक़तवर बन के उभरेगा.
Zuber Ahmed Khan shared a link. Admin· 3 May at 20:41
करोना की इस यूध के बाद अमेरिका रूस जेसी बड़ी बड़ी सूपर पवर आर्थिक हल्क़े मे पूरी तरह टूट जायेगे. एशिया के अभी तक के सबसे कमज़ौर समझे जाने वाले 3 देश उभर कर आयेगे. वो इनमे से होंगे. पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका या आफ्गानिस्तान. दो देश मिल कर एक बड़ा सूपर पावर बनेगा. ओर विश्व मे फिर उसी की बात को तरजीह दी जायेगी.
इसकी मज़ीद वज़ाहत इस सहाफी ने अपने फरवरी २०२० को लिखे ब्लॉग
में की है.
Wednesday, 27 May 2020
दहशतगर्दी पर ख़ामोशी मतलब दहशत का साथ देना.
अज़ीज़ नाज़रीन,
आज कल मुल्के हिन्द के हालात बेहद पेचीदा और नाज़ुक बने हुए हैं. ना सिर्फ मुल्क के अवाम बल्कि अब तो तमाम मग़रिबी मुमालिकों के साथ साथ हिन्द के हमसाये (पड़ोसी) नेपाल, चीन, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान भारत के तानाशाह और ज़ालिम, दरिंदा सिफ़त बादशाह के ज़ुल्म, सितम और ना इंसाफ़ी से नाराज़ नज़र आ रहे हैं. इससे पेश्तर इस हाकिम के ज़ुल्म और सितम के गवाह सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम अवाम हुआ करते थे. लेकिन लोक डाऊन १,२,३ और ४ में जिस तरह से मुफ़लिस मुहाजिर मज़दूरों पर जो पुलिस ने ज़ुल्म, शिद्दत और बे ज़र्ब मार पीट की है वोह किसी भी बा विक़ार, इज़्ज़तदार शहरी को झिंझोड़ने के लिए काफी हैं. कई अफ़राद ख़ाकी बेज़र्ब क़ेहर की ताप बर्दाश्त ना कर सके और जांबाहक हो गए. कुछ मुस्लिम हैं और कुछ हिन्दू. उसके ऊपर मज़ीद इन मासूम मज़दूरों की हर दुसरे रोज़ की हलाकत. कभी रेल की पटरी पर, कभी बसों, ट्रकों से हादसे, कभी रोड पर जाते हुए कुचल कर हलाकत. अब तो वही सब देख देख और सेह कर अलफ़ाज़ भी अश्क़ बार नहीं रहे बल्कि खुश्क हो गए. वीडियो ख़बरनामे की महज़ सुर्खिया ही किसी भी ज़मीर वाले इंसान की रूह तक को झिंझोड़ सकते हैं. फिर पूरी खबर तो हर हाल में हिन्द की तक़दीर पर आँसू बहाने के सिवाए कुछ नहीं कर सकती.
पूरी पूरी मज़दूरों की बस्ती को ट्रक ने कुचल दिया और मासूम ६ माह का बच्चा अपनी हलाक़ हुई वालेदा के पड़ोस में रो रहा है. दूसरे वीडियो में भूक और मुफलिसी से वालेदा हलाक हो गई मगर एक-डेढ़ साल का मासूम बच्चा अपनी माँ को सोते हुए जान कर कभी उसकी गोदड़ी उठा रहा है कभी उसके आस पास खेल रहा है. अपने शिकम में पल रहे बच्चे को रोड पर पैदा किया लेकिन चलने को मजबूर मुफ़लिस हिजरती वालेदा. ऐसे मंज़र भी क्या हाकिम के कलेजे को नहीं पसीज रहे हैं.
उसके ऊपर सितम देखिये हुकूमत की जानिब से नोटिस जारी किया जाता है उन लोगों के खिलाफ आफ.आई.आर. दर्ज की जाती है जिन्होंने हाई वे पर अपने वतन जाते हुए मुहाजिर मजूदर, ग़ुरबत के मारे मुफ़लिस अवाम की बिला तफ़रीक़ क़ौम और मिल्लत मदद की थी. अब अवाम को ये बताने ज़रुरत ही नहीं की हिमाचल से ले कर कन्याकुमारी तक भारत एक है. और इस हिमाचल से ले कर कन्याकुमारी तक अपने वतन के लिए ८०% हिन्दू हिजरत के लिए निकले थे और उनकी मदद के लिए ९०% मुस्लिम अवाम आया था. नाज़रीन आपको मालूम होना चाहिए की लोक डाऊन १ से ले कर तो ४ तक जहाँ एक जानिब हर किस्म की इमदाद मुस्लिम अवाम ने बढ़ चढ़ कर की है. वहीँ दूसरी जानिब ज़ाफ़रानी मीडिया ने मुस्लिम, जमाती और मरकज़ निजामुद्दीन के नाम पर मुस्लिम अवाम और इस्लाम को बदनाम करने का कोई भी मौक़ा नहीं गवाया. इस १ से ४ तक की मियाद में मुस्लिम अवाम का पाकीज़ा महीना रमज़ान भी जारी रहा. इसमें खुद मुस्लिम अवाम रोज़े से रहे लेकिन हिजरत करते हुए अपने हमवतनों की बिला तफ़रीक़ क़ौम और मिल्लत खाने का एहतेमाम करते रहे.
हर रोज़ की मरकज़ निज़ामुद्दीन के ऊपर कुछ ना कुछ खबरे अगर खबरनामे में शाया नहीं हुई तो वोह दिन मेहफ़ूज़ माना जाता था. इस मुद्दे पर हर लंगूर को इस सहाफी ने माक़ूल जवाब दिया है.
जब तक हठधर्मी करते रहोगे मारे जाते रहोगे. केंसेर के लिये कौन ज़िम्मेदार है. आतंकी गड गुजरात पेहला प्रदेश है जहां सबसे ज़्यादा केंसेर मरीज़ है.
2014 के बाद केंसेर मरीज़ों की बाढ़ आ गई डॉक्टर खूद परेशान हैं. चलो हमारी वजह से हूआ है उखाड़ लो जो उखाड़ ना है. जमातिओं को सफाया करेगा. पेहले अपना घर सॉफ कर. जमतिओं का सफाया करेगा. एक एक बात हर्फ बा हर्फ लिख ली गई है. हर हैमाक़त का जवाब सही वक़्त पर दिया जायेगा. जमातियों की वजह से हूआ है. अब तुम खूद मानोगे की तुम ज़िम्मेदार हो इस आफत के लिये. जिस तरह तुम्हारे आक़ा ने 2002
के बाद पेहली बार माफी मांगी लेकिन उसको मांगने मे बोहोत देर कर दी. ओर वही हाल तुम संघिओं का होगा. जब पूरी तरह लुप्त हो जाओगे ओर खात्मे की कगार पर होगे तब बोलोगे हम से कुछ तो गलती हो गई होगी जो आज हमारी ए हालात है. जमातिओं की वजह से हूआ ठीक है. हमारी कचहेरी मे इस मुद्दे को नोट किया गय है. डिफेन्स को कुछ केहना है. अगर हमारी कचहेरी मे तुम मुजरिम साबित हूए तो सिर्फ ओर सिर्फ सज़ा ए मौत होगी तुम लोगों के लिये.
फिर जब चीज़े हद से आगे बढ़ी तो इश्तेआल में जो कुछ बोल दिया वही हो गया. इस ट्वीट में आंधी तूफ़ान की बात कही गई है. और फिर तूफ़ान भी आया और ऐसा की पिछले २०० सालों में ऐसा तूफ़ान नहीं आया था.
ये वज्ञानिक जमाती है. जो ऐसी बातें करता है. ही ही ही अब भक्त बोलेगे या नहीं. अगर बोले तो तब्लीगी बीमारी होगी नहीं बोले तो दिल ही दिल में घुट के रह जायेगे. अरे हाँ याद आया कुछ सांस लेने की भी बात कही है. अब भक्त तो अपने ही देश में पराये हो जायेगे. इनके देश की फ़िज़ा जो ज़हरीली है जहाँ सांस ली जामती इनकी साँसों में घूस जायेगे. ऐसे ही जमात और तब्लीग के खौफ से मारे जाओगे. इतना तुम्हारे ऊपर ग़लबा और ख़ौफ़ तारी हो जाएगा की हर दुसरे इंसान को तुम जमाती या तब्लीगी समझोगे. तारिख अपने आपको दोहराती है. एहमद शाह अब्दाली
......... याद आया ........ उन मर्द मुजाहिद के नाम से तुम लोगों के पख़ाने निकल जाते थे. जहाँ घोड़ों के हिनहिनाने या टापों की आवाज़ आयी के घरों में घूस जाय करते थे. वही हाल तुम्हारा २०वी सदी में हो रहा है. हर जगह तुमको पहले पाकिस्तान, कश्मीर, मुस्लिम दिखते थे और अब जमाती, तब्लीगी, दिखतें हैं. सोचो इतना खौफ की अब बीमारी भी तुम हमारे नाम पर वक़्फ़ कर रहे हों. कल से तूफ़ान, दुर्घटना, कैंसर, मौत, ज़िन्दगी हर चीज़ को तुम मुस्लिम अवाम से जोड़ दोगे. सच्ची बात तो ये है की तुम लोग खौफ ज़दा हो गए हो, तुमको लगने लगा है की नमाज़ी, परेहज़गार, मुतक़्क़ी मुस्लिम के पास बोहोत पावर होता है और वो जो चाहे दुआ करे उसका ख़ुदा उसकी दुआ रद्द नहीं करता. तुम खुदा का इंकार कर रहे हो मुस्लिम समाज को बदनाम कर रहे हो इस बात की दलील है की तुम इस बात का इक़रार कर रहे हो की उनका खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है. हर काम कर सकता है. वोह सून भी सकता है देख भी सकता है और दिलों के राज़ भी जानता है.
नाज़रीन में तो हर उस इंसान को इस जुर्म, साजिश और दहशत, इंसानी हुक़ूक़ का क़ातिल मानता हूँ जिसने बावजूद सब कुछ जानते हुए भी उस शख्स की वज़ीरे आज़म इमदादी अकाउंट में रूपये पैसे से इमदाद की, जो की जालसाज़ है ज़ालिम हैं दरिंदा है मौत का सौदागर है.
उनकी ज़ुल्म, क़त्ल, इज्तेमाई क़त्ले आम, नाइंसाफी, दहशतगर्दी पर ख़ामोशी
उनको हर जुर्म के हिस्सेदार या उकसाने वालों में तस्लीम कर रही है. उनकी ख़ामोशी भी
उतनी ही मुजरिम है जितना की हुकूमत का जुर्म.
जिस किसी ने भी हुकूमत के वज़ीरे आज़म इमदादी रक़म में अपनी इमदाद जमा की है वो
सभी दहशतगर्दी को फरोग देने वालों में शुमार हो गए हैं. क्योंकि इन सभी को मालूम था
की २०१४ से कई मौक़ों पर वज़ीरे आज़म इमदाद में दी हुई इनकी इमदाद हक़ीक़ी ज़रूरतमंदों तक
तो नहीं पहुंची बरक्स ज़ाफ़रानी तंज़ीम ज़ाफ़रानी तरबियती इदारों और अपनों के क़र्ज़ माफ़ करने
में और दहशतगर्दी को फरोग देने में लगी. भाजपा
का हाई टेक ५ सितारा ऑफिस मरकज़ के क़ल्ब में कैसे बना. जिसकी क़ीमत हज़ारों में नहीं करोड़ों और अरबों में
है.
इन ताजिरों की इमदाद में सो फि सद मुसलमान हैं जिन्होंने इमदाद के नाम
पर दहशतगर्दी, ज़ुल्म, शिद्दत, ख़ूंरेज़ी में मोदी की मदद की है और इंसानी हुक़ूक़ के क़त्ले
आम में हिस्सेदार बन गए हैं. खुसूसी मुस्लिम
अवाम पर इंतेज़ामिया और हुकूमत का खूब नज़ला फुट रहा है. हर दुसरे रोज़ मुस्लिम अवाम के साथ सख्त मार पीट. पिजरा तोड़ो तंज़ीम की मुस्लिम बच्चियों को गिरफ्तार
करना. मरकज़ और दीगर हलकों में जिस जिस ने एन.आर.सी.
के ख़िलाफ़ हुकूमत के सियाह दिल और हिटलर रवय्ये के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी उस सभी कारकूनों
को चुन चुन कर गिरफ्तार कर रही है या उनको सख्त तरीन अज़ीयत पहुंचाई जा रही है.
बुर्कापोश मुस्लिम मस्तूरातों के साथ पुलिस की सख्त तरीन मार पीट करना.
पुलिस का मुस्लिम नौजवानों को घरों से रातों की तारीकी में गिरफ्तार करना उनको ज़लील करना
कपडे फाड़ देना. पुलिस का घरों में घूस कर मासूम
बच्चो को अपने अस्लेह और बंदूक से खौफ ज़दा करना, फिर डाटना और वाल्दैन पर ज़ोर और जब्र
करना की बच्चो को खामोश रहने के लिए बोला जाए.
पुलिस का इफ्तारी (रिज़्क़) को अपने पैरों में रौंदना ऐसे अमल हैं जो ना सिर्फ
मुस्लिम बल्कि एक आम हिन्दू अवाम को भी इश्तेआल दिला सकते हैं. क्योंकि यह सब उस वक़्त
हुआ जब मुस्लिम अवाम ने बढ़ चढ़ कर अपने रौज़े की परवाह किये बग़ैर हर हिजरत करते हुए हिन्दू
मज़दूर और मुफ़लिसों की मदद की थी. और मुस्लिम ताजिरों ने वज़ीरे आज़म इमदाद फण्ड में
अरबों रूपये की इमदाद जमा की थी.
मज़हबे इस्लाम और मुसलमानों पर तनक़ीद करती हुई लँगूरनिया और लंगूर ऐसे
मामलों को अपने टीवी की ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं बना सकते. अगर उन्होंने ऐसा कोई भी क़दम उठाया की उनके न्यूज़
का हुक्का पानी बंद. मौलानाओं की जमात को भी
इन सभी वाक़ियात ने दहशत में डाल दिया गया है.
अब संघी बोलेगे तो मुसलमान हिन्दुस्तान मे ईद बनायेगे ओर नही बोलेगे तो नही
मना करेगी. दरअसल इन लोगों को इस क़दर ख़ौफ़ज़दा
कर दिया है की यह लोग दहशतगर्दियों, ज़ालीमो, क़ातिलो, ना इंसाफों की हाँ में हाँ मिलाने
को ही मज़हब का एक फ़रीज़ा समझने लगे हैं. और ताजिरों को अपनी तिजारत चलाने के लिए
इन दहशतगर्दों को वसूली देना ही पड़ती है उस वसूली को ही यह ताजिर वतन परस्ती समझ बैठे
हैं. और अपने हक़ के लिए आवाज़ बुलंद करने से
ख़ौफ़ज़दा हैं कही मज़ीद हम पर कोई हूकूमती नोटिस ना जाए.
लेकिन इस सहाफी को सच्ची बात कहने और लिखने में किसी किस्म का खौफ नहीं. हूकूमते हिन्द अगर गुनाहे अज़ीम करेगी तो उसके खिलाफ
लिखा भी जायेगा ओर बोला भी जायेगा. हम लंगूर ओर लंगूर्निया नही हैं की हूकूमत के ग़ुलाम
बन कर गले मे पालतू पट्टा डाल कर चौकीदार के घर के बहार चौकीदारी करें. लंगूर ओर लंगूर्नियों हर मसले पर मुस्लिम, कश्मीर,
पाकिस्तान, बाबरी, ट्रिपल तलाक़ इससे अलहदा कोई मसला ही नहीं है. और इन लंगूरों की हर जांच ओर तेहक़ीक़ात की इस सहाफी
ने धज्जिया उड़ा दी है. मरकज़ निज़ामुद्दीन तबलीगी जमात की ताज़ा मिसाल मौजूद है. फिर
मे सहाफत मे आया ही इन जेसे दोगले, दो मूही मुनाफ़िक़ों को उखाड़ फेकने के लिये हू. पूलवामा,
बालाकोट, पठानकोट, ऊरी, हैदराबाद, सहारंगपूर ओर तमाम ज़ेरे आतिश मुद्दों पर पेहली दुरुस्त
ओर सही तेहक़ीक़ाती रिपोर्ट इस सहाफी ने जारी की है.
उसके बाद वही बात हूकूमते हिन्द की तहक़ीक़ाति इदारों और जांच एजेंसियों ने कही है. हक़ पसंदी को सेहना सीखो. मुल्क के ताज़ा हालात और अवाम पर हुकूमत के सख्त तरीन ज़ुल्म और शिद्दत उन ज़मीर फरोश लोगो के लिए एक सबक़ है, हर मुद्दे पर ग़ुलामी का पट्टा गले मे बाँध कर तय्यार हो जाते थे. मुल्क की बक़ा, मुल्क की सालमियत, हिन्दुस्तान की एकज़ेहादी, या अल्लाह हमारे मुल्क की हिफाज़त फार्मा वगेरा वगेरा. यहाँ तक की जब दहशतगर्दों, दरिंदों मौत के सौदागरों से जंग करने का वक़्त आया दरिंदों के ख़िलाफ़ ऐलान जंग करने के बजाये हिस्बे बहर पढ़ना शुरू कर दिया.
तुम लोग मोदी की दहशत से ख़ौफ़ज़दा हो कर या कोई वजह से हिन्दुस्तान की मोहब्बत का दम भर रहे हो मतलब तुम दहशतगर्दी का साथ दे रहे हो. दहशतगर्दी, दरिंदे, ज़ालिम, मौत के सौदागरों, ना इंसाफों के खिलाफ बगावत करना पूरी क़ुव्वत और शिद्दत से आवाज़ बुलंद करना यह तो मेहज़ ही वतन परस्ती है. क्योंके तुम अवाम को दरिंदे, ज़ालिम, शैतान के शिकंजे से आज़ाद कर रहे हो. अगर तुम ऐसा नही करते हो मतलब तुम भी ज़ालीमों दरिंदो और दहशतगर्दों के साथ हो.
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