Wednesday, 29 April 2020

दुबाई के बाद ICC ने दिखाए तल्ख़ तेवर

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने हिंदी ताजिर दीपक अग्रवाल को (बेन) ममनूअ कर दिया, जो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में २०१८ में हुई टी १० लीग में एक फ्रेंचाइजी का मालिक था.  इस हिंदुस्तानी को उसके ख़िलाफ़ चल रही बदउनवानी, बदबख्ती की जांच में ज़बरदस्त धमकी और हूकूमति इदारों को दहशत का ख़ौफ़ दिखाने और हिंदी हुकूमत का रौब व दबाव डालने की बात मंज़ूर करने के बाद अग्रवाल के ख़िलाफ़ यह फैसला लिया गया.

उस पैसे का घपला करने वाले दरिंदे को बदउनवानी रोधी संहिता के खिलाफवर्जी करने की बात को मानने के बाद जांच में ताऊन करने की पेशकश की, जिससे उस दरिंदे और पैसे के गुलाम पर दो साल का बेन और छह महीने मुअत्तिली की सजा है.

अग्रवाल कुछ वक़्त के लिए टी १० टीम सिंधीज का जालसाज़ी और फरेब के ज़रिये मालिक बन बैठा था.  उसे जालसाज़ी, फ्राड और शर्तों की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने के तहत २०१८ के दौरान जुर्म का हिस्सेदार होने के नाते चार्ज किया गया.  पैसे की जालसाज़ी (भ्रष्टाचार) की रोक थाम करने वाली यूनिट की मुक्कम्मल रिपोर्ट के हिसाब से अग्रवाल को नावाक़िफ़ ‘मिस्टर एक्स’ के साथ मिलकर सबूत मिटाने के लिए मुजरिम क़रार दिया गया जिसके बाद उस दरिंदा सिफ़त हिंदुस्तानी शैतान पर बेन भी लगाया गया है.

आईसीसी ने अपने हुकुम नामे (फरमान) में कहा के , ‘दरिंदे, दहशतगर्दों के ज़ारिया ये माश अग्रवाल ने ‘मिस्टर एक्स’ को एक-दूसरे के बीच हई बातचीत के सारे मेसेज ‘डिलीट’ करने को कहा और एसीयू की जांच में शामिल होने से पहले उसने उसका नंबर भी ‘डिलीट’ कर दिया.’ अग्रवाल को ज़ाब्ताये अख़लाक़ के 2.4.7 आर्टिकल (अनुच्छेद) के हिसाब से मुजरिम किया गया है जो चल रही जांच में किसी भी दस्तावेज को तबाह करने, दीगर मालूमात और तहक़ीक़ात को पोशीदा (छुपाने) रखने या इनसे छेड़छाड़ करने से मुत्तालिक है. 

आईसीसी के महाप्रबंधक (इंटीग्रीटी) एलेक्स मार्शल ने कहा, ‘सिर्फ एक नहीं, ऐसी कई मिसालें हैं जहां दीपक की जानिब से जांच में ताख़ीर करने और जांच को मुत्तासिर करने और सबूतों को मिटाने के सुराग़ मिलते हैं. उस माशी दहशतगर्द ने हालांकि आईसीसी के भ्रष्टाचार रोधी क़ानूनों के खिलाफवर्जी करने की बात को कबूल किया और एसीयू को दीगर हिस्सेदारों के बारे में चल रही जांच में जरूरी मदद मुहैया कराने के बात कही हैं. इस मदद का उसकी सजा में दिखेगा या नहीं यह तो वक़्त ही बताएगा.  फिलहाल दरिंदा और हिन्दू माशी दहशतगर्द जेल की हवा खा रहा है.

सहाफी जुबेर का नुक़्तए नज़र

जहाँ तक हिन्दुस्तानियों का सवाल है वो नंबर १ के जुर्म पेशा, दहशत को फरोग देने वाले, ज़िना, क़त्ल, डाका, चोरी, फ्राड, जालसाज़ी, फ़िर्क़ापरास्त, और तमाम क़िस्म के जुर्म में मुलव्विस होतें हैं.  जो मुल्क इन लोगों के ऊपर भरोसा कर रहा है मतलब अपने ही मुल्क की माशी हालात को मज़ीद कमज़ोर कर रहा है.  जिस मुल्क में अमन चेन, सुकून और माशी फरोग है वहां सिर्फ एक हिंदुस्तानी (शिद्दतपसन्द) ज़ेहनियत को भेज दो.  मज़ीद कुछ करने की ज़रुरत ही नहीं चंद सालों में वोह हरा भरा दरख़्त सूख के मर जाएगा.  ये लोग अपने खुद के वतन भारत को तबाह और बर्बाद कर चुके खोकला कर के बेरुन मुल्क भाग गए.   तो इन लोगों से ये तवक़्क़ो कैसे की जा सकती है की ये लोग पराये मुल्क वोह भी माशी हालात से बे हद बेहतर उसको तबाह नहीं करेंगे.  वहां पर फ्राड, और भ्रष्टाचार नहीं फेलायेंगे.  

हर हिन्दुस्तानी आज कल हिन्दू दहशतगर्दों का मुहाफ़िज़ हो चूका है और बेरुन मुल्क से बड़ी तादात में पैसे का कारोबार कर के ये स्लिपर सेल हिन्दुस्तान में हिन्दू दहशतगर्दों को इमदाद फ़राहम करतें हैं. 

अब वक़्त आ चूका है की ना सिर्फ अरब मुमालिंकों से बल्कि तमाम दुनिया से हिन्दू अवाम को निकाल देना चाहिए.  हिंदुस्तान से तमाम दुनिया को अपने सभी तिजारती मोहायेदे मुनतक़ा कर देना चाहिए.  ख़ास अमेरिका और मग़रिबी मुमालिकों को हर हिंदुस्तानी को अपने मुल्कों से निकाल देना चाहिए.  कियोंके इस मुल्कों से कमाई हुई बड़ी रक़म हिन्दुस्तान भेजी जाती है जो हिन्दू दहशतगर्दों को फरोग देने में काम आ रही है.  

अगर आलमी बरादरी ऐसा नहीं करतें हैं तो ये समझने में देर नहीं लगेगी की खुद आलमी बरादरी हिन्दुस्तान में दहशतगर्दी को फ़रोग़ दे रही है.  और इलज़ाम मुस्लिम अवाम पर लाद रही है.

India expected to get some more trouble in forthcoming days.

भारतीय हिन्दू शिद्दत पसंदों, दहशतगर्दों के ऊपर हुई सख़्त दुबाई हुकूमत.


UAE Government tough on Money Launderer Hindu Terror.

                                                   दरिंदा और हिन्दू आतंक का मुहाफ़िज़ बी आर शेट्टी

दुबई: ताजिर के भेस में हिन्दू दहशतगर्दों का स्लिपर सेल बी.आर. शेट्टी. बर्बाद, हो गया उसके सभी खाते किए सीज, उसकी तमाम कम्पनियां ब्लैक लिस्ट, कर दी गई हैं.  इस खुनी, दरिंदे, मौत के सौदागर का ताल्लुक़ तमाम अलाम के लिए मुसीबत का बाइस बनी भारत की खूंखार ज़ालिम दहशतगर्द तंज़ीम RSS से था.  दुबाई हुक्काम दहशतगदी पर अपने सिफर रवादारी को क़ायम रखते हुए और गुजिश्ता मोदी के दौरे पर हुए क़रार पर अमल करदा है. 


दुबई- मुत्तहिदा अरब अमीरात की मरकज़ी बैंक (CBUAE) ने मुल्क में तिजारती बुनयादी ताऊन तंज़ीम को हिंदी अरबपति बी.आर. शेट्टी. और उनके एहले ख़ाना के सभी बैंक खातों की तलाश करने और उन्हें फ्रीज करने का हूकूम जारी किया है.  इस हिन्दू दहशतगर्द के मुहाफ़िज़ दरिंदे शेट्टी और उसके तमाम सीनियर अमले उनसे जुड़ी हुई तक़रीबन सभी कम्पनीज को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया है।

गुजिश्ता हफ्ते मरकज़ी बैंक दुबाई ने सभी माशियाती विंग को हूकूम दिया कि वे शेट्टी के खातों से रक़म की लेन देन और ख़ास ट्रांसफर को रोकें और रक़म जमा बॉक्स तक पहुंच से उसके अकाउंट को बार करें। यह दरिंदा पिछले कई सालों से दुबाई में छुपा हुआ था और पोशीदा हिकमत इख़्तियार कर के आलामी खूंखार दहशतगर्द भारत की आर अस अस को माशी मदद फ़राहम करता था.  दुबाई हुकूमत के अटॉर्नी जनरल के फैसलों का हवाला देते हुए मज़ीद बयान जारी किया है की दुबाई में बैंको और माशी तंज़ीमों को शेट्टी या उसके खानदान के किसी भी फर्द के नाम से किसी भी बैंक खाते, जमा या किसी भी किस्म की सरमायाकारी को तलाशने और फ्रीज करने के लिए कहा।   दुबई: ताजिर के भेस में हिन्दू दहशतगर्दों का स्लिपर सेल बी.आर. शेट्टी. बर्बाद, हो गया उसके सभी खाते किए सीज, उसकी तमाम कम्पनियां ब्लैक लिस्ट, कर दी गई हैं.  इस खुनी, दरिंदे, मौत के सौदागर का ताल्लुक़ तमाम अलाम के लिए मुसीबत का बाइस बनी भारत की खूंखार ज़ालिम दहशतगर्द तंज़ीम RSS से था.  दुबाई हुक्काम दहशतगदी पर अपने सिफर रवादारी को क़ायम रखते हुए और गुजिश्ता मोदी के दौरे पर हुए क़रार पर अमल करदा है. 


शेट्टी जो की दहशतगर्दों को माशी मदद फ़राहम करता था अब इन जैसे छुपे हुए भारत के एक एक दहशतगर्द को चुन चुन के तलाशा जा रहा है और तमाम अलाम के लिए वबाल बनी हिन्द की खूखार दहशतगर्द तंज़ीम R S S की गले की माशी नब्ज़ काटी जायेगी, पहल अरबों की जानिब से हुई है.  अब इस शेट्टी जैसे ज़ालिमों की तिजारत को करारा झटका लगा है.  ऐसे ज़ालिम ना सिर्फ मुल्के हिन्द में बल्कि बेरुन मुल्क अपनी जुर्म की दुनिया और हरामखोरी, से बाज़ नहीं आतें हैं.  जिसका ज़िक्र इस सहाफी ने अपने अंग्रेजी मज़मून में किया है की हिंदी अवाम कस्दन मुस्लिम मुमालिकों में अपनी तिजारत फ़ैलाने की कोशिश में खूब जालसाज़ी और फरेब कर रहे हैं.  ऐसे कई अनासिर गिरफ्तार किये जा चुके हैं जो अरब शेखों को माशी नुकसान दे चुके हैं. 

ये ज़ालिम दरिंदा शेट्टी भी जब उजागर हुआ जब पिछले साल दिसंबर में मड्डी वाटर रिसर्च के फाउंडर तथा शॉर्ट सेलर कारसन ब्लॉक ने अपनी एक रिपोर्ट में एनएमसी हेल्थ पर माशी और जायदाद का फर्जी आंकड़ा देने तथा कंपनी की जायदाद के ऊपर डाका डालने और चोरी का इलज़ाम लगाया। इसके महज तीन महीने के बाद ही एनएमसी के शेयरों को लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार करने से रोक दिया गया और दो सप्ताह पहले इसने एलान किया कि उसपर तक़रीबन ५ अरब डॉलर (४० हजार करोड़ रुपये) का कर्ज है।

दुबाई मरकज़ी बैंक जांच  शुरू की.

इस खूखार दहशतगर्द ज़ालिम शेट्टी का बुर्ज खलीफा में दो फ्लोर है.  यू.ए.ई. में शेट्टी की ज़ाती जायदाद में दुनिया की सबसे आला  इमारत बुर्ज खलीफा में दो फ्लोर और पॉम जुमेरिया में एक विला है। पिछले साल सितंबर में इस दहशतगर्द ने अरेबियन बिजनस से बातचीत में कहा था, ‘चॅलेंजे हर वक्त होती हैं, लेकिन जब आप उनके सामने नहीं झुकते हैं और सही तरीके से काम करते हैं तो वह आपके रास्ता से हट जाता है। हम नंबर वन हैं।’

इसकी इसी बात को मद्दे नज़र रखते हुए दुबाई पुलिस इसके पीछे लग गई और उसके कहे जुमले ने आज उसको फ़ासी के फंदे तक पंहुचा दिया.  नाज़रीन आपको बता दे  बी.आर. शेट्टी. हिन्दू दहशतगर्द तंज़ीम आर.एस.एस. से जुड़ा हुआ है और इस दहशतगर्द तंज़ीम को माशी मदद फ़राहम करता है.   ये शख्स दुबई में मंदिर की तामीर का एक एहम किरदार था जिसके ऊपर भी अब हुकूमत की कारवाही होना लाज़िम है.  क्योंकि अगर रुपए पैसे की फ़राहम किसी दहशतगर्द ने की है तो ऐसे मंदिर को मिस्मार करने का क़ानून है।

Wednesday, 22 April 2020

हिन्दू शिद्दत पसंदों, दहशतगर्दों के पुराने ट्वीट्स पर अरबों का बवाल.

अज़ीज़ नाज़रीन,

सबसे पहले तो आलमे इस्लाम और तमाम मुसलमानों को रमज़ान शरीफ की आमद पर पुर ख़ुलूस मुबारकबाद पेश करना चाहूंगा.  उसके बाद में दुआ गौ हूँ की सूबे महाराष्ट्र को अल्लाह खूब तर्रकी दे फलाह दे और सूबे के मौजूदा वज़ीरे आला जो निहायत ही मुनसेफाना, ईमानदारी और इन्साफ पसंदी से काम कर रहें है उनके बाज़ूओं को मज़ीद मज़बूत बनाये.  और उनकी जानिब बढ़ने वाली आने वाली हर बला आफत कोसों दूर ही हलाक हो जाए.  

नाज़रीन आज जो मुल्के हिन्द के हालात है और तमाम आलम में एक वबा क़ेहर बरपा कर रही है उसकी सिर्फ और सिर्फ वाहिद वजह है ना इंसाफ़ी और इंसानियत का क़त्ले आम.  जब से इस वबाई वायरस ने मुल्के हिन्द में क़ेहर बरपा करना शुरू किया था और तमाम मग़रिबी मुमालिकों के बाद हर ना इंसाफ़ी और जंग की अज़ीयत देने वाले दादा अब्बा अमेरिका को अपनी आग़ोश में ले लिया था तो सबसे पहले इस सहाफी ने इस बात को मन्ज़रे आम किया की यह खुदा का क़ेहर और अज़ाब है.  लेकिन मुसलमानों के ऊपर नहीं बल्कि ना इन्साफ, क़ातिल, मजमूई क़ातिल और दरिंदा सिफ़त लोगों के ऊपर है.   जिसका ज़िक्र इस सहाफी ने अपने मज़मून  मक्का बंद मदीना बंद. में किया है. उसके बाद कुछ चुनिंदा अफ़रादों ने इस बात को तस्लीम करना शुरू किया की ये खुदा का क़ेहर है. 
फिर भी कुछ ज़मीर फरोश हूकूमती गुलाम जिसमे ज़ाफ़रानी लंगूर लँगूरनियाँ और घटिया मुसलमानों का वोह तब्क़ा है जो इस बात को तस्लीम करने को राज़ी नहीं है की यह इताबे इलाही है, हमारे बद अमाल, बदकारियों की सजा है और कुछ नहीं.  ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ अभी तक तब्लीग़ी जमात तक ही महदूत हैं.  इन जाहिलों दिमाग़ी मरीज़ों की जहालत पर अब तो तरस भी नहीं आता. क्योंकि ऐसे अनासिर महज़ जानवरों तक ही महदूत होते हैं. हक़ की आवाज़ इनके कानों तक पहुंच ही नहीं पाती है. जिस तरह से अल्लाह का पहले की उम्मतों के ऊपर अज़ाब से पहले उनके कानों में सीसा पिघला कर डाल दिया जाता था और उसी को हिदायत मिलती थी जो इसके एहल होता था.  बाक़िया सभी ग़र्क़ाब हो जाते थे. वही हाल आज के मुस्लिम माशरे के ऐसे घटिया अनासिरों का है जो मौलाना के भेस में हक़ीक़त में अबू जेहल का किरदार अदा कर रहें हैं.  ऐसे लोग हक़ की बात को तस्लीम करने के बजाये उन लोगों पर तनक़ीद कर रहें हैं जो हक़ की तरग़ीब करतें हैं, जो अँधेरे से रौशनी की जानिब आने की बात करतें हैं.  इस मौजूं पर एक ट्वीट इस सहाफी ने हिंदुस्तान टाइम्स अंग्रेजी ख़बरनामे के एक मज़मून में की थी.
              Zuber Ahmed Khan  3 April at 10:50·

Ghatiya people will omit shit of garbage from mouth. All such types of Ghatiya people who are in fact Jummans. These people are the agents of Hindu Terror who adopted the Muslim costumes just to mislead the Umma. I had stated in my Hindi articulations Mecca Band Madina Band and scolded to Sanghi Terrorists. Now Saudi imposed curfew in two holiest cities of Muslims. Total curfew ban on namaz too. Word to word is proving correct which this Journo stated long back and in my latest Hindi Article Meeca Band Madina Band. Total restriction and prohibitory orders for the people to enter in limits of Masjide haram 
and Madina.
 
आज मग़रिबी मुमालिकों और अमेरिका जैसे अज़ीम सुपर पवार पर जो क़ेहर नाज़िल हुआ है उसका बयान महज़ अलफ़ाज़ की अदाएगी से नहीं होगा, बरक्स आती नस्ले ऐसे अज़ाब से इबरत हासिल करेगी.  क्योंकि जो ज़ुल्म और शिद्दत बुश ने इराक़ पर मचाई थी जिसको करने की कोई भी ज़रुरत नहीं थी लेकिन अपने एहम और तकब्बुर को क़ायम रखने के लिए एक हस्ते खेलते मुल्क को तबाह और बर्बाद कर दिया.  जिसका ज़िक्र २०१० के बाद सहाफत की रूहानी दुनिया में क़दम रखने के बाद कई मज़मूनों में किया है.  और साफ़ अलफ़ाज़ में जॉर्ज बुश और इंग्लैंड के तब के वज़ीरे आज़म टोनी ब्लैयर पर नाम बनाम तनक़ीद की है.  अलाइड फोर्सेज को भी हाशिये पर लिया है.  कई सख़्त तन्क़ीदी मज़मून और हालते इश्तेआल में लिखे हुए २०१५ के हादसे के बाद ऐ.टी.अस. से मशोरा कर के डिलीट कर दिए हैं.  फिर भी काफी सारे अभी भी मौजूद होंगे.     
 
फिर जिस हिसाब से सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम मुमालिकों को अलाइड फोर्सेज तबाह और बर्बाद कर रहे थे उसके पीछे इस्लामोफोबिया का वाइरस काम कर रहा है इस बात को साफ़ तोर पर देखा जा सकता था.  इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, लीबिया, मिस्र, सिरया उसके बाद ईरान पर हमले की तैयारी थी लेकिन ईरान थोड़ा ताक़तवर साबित हुआ सो अमीरिका ने उससे जंग करने की हिमाक़त नहीं की.  जिसका ज़िक्र २०१० के बाद कई एक मज़मूनों में किया जा चूका है. 

अरब मुमालिकों और मुस्लिम वर्ल्ड में मौजूदा वबा का इतना असर नहीं हुआ, जानी तो काफी कम है और जो कुछ भी होंगे उसमे हिन्दुस्तानी हिन्दू ही होंगे लेकिन मुस्लिम नहीं.  माली जो नुकसान हुआ है और लॉक डाउन की मौजूदा हालत हैं वोह भी इसलिए की तमाम मुस्लिम अवाम पर ज़ुल्म सितम होते रहे नबी सल्लम की अज़मत को तार तार किया जाता रहा क़ुरान को आतिशे नार किया जाता रहा लेकिन ये मुल्क बावजूद तमाम क़ुव्वत और माली ताक़त होने के ख़ामोशी की हिकमत पर यक़ीन रखते रहे. 

हिन्दुस्तानी दहशतगर्द संघ, बजरंगदल और वी ही पी से जुड़े हुए उनके स्लिपर सेल तमाम मुस्लिम मुमालिको में फेल गए थे और उनका एजेंडा सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम मुमालिकों की इख़्तेसादि हालात पर चोट पंहुचा कर वहां की तिजारत को अपने हाथों में लेना था और अरबों को अपना गुलाम बना कर जिस तरह से हिंदुस्तान में मुसलमानों का इसतेसाल किया जाता है उसी अंदाज़ में अरबी अवाम का करना था.  इन हिन्दू दहशतगर्दों के अजेंडे में अरबी मस्तूरातों को जिन्सी गुलाम बना कर इनके जिस्म के साथ तमाम भारत के दहशतगर्दों को फरोग करने का मंसूबा था.  क्योंकि जिस अंदाज़ में इस सहाफी के साथ हिन्दू दहशतगर्दों का मुबाहिसा और बहस होती थी उससे उनके दिलों दिमाग में अरब मस्तूरातों के लिए कितना ज़हर भरा है इसका खूब मुज़ाहेरा होता था.   और अरबो की माशी हालात को कैसे तबाह करने की साजिश है वोह सब साफ़ हो जाती थी.  एक नहीं हिन्दुस्तान में तक़रीबन हर हिन्दू हर एक हिन्दू उसी ज़हरीली ज़ेहनियत का है.  २०१४ के बाद अगर सेक्युलर हिन्दू बचे होंगे तो बोहोत कम. शायद १०० में १. जितनों से बेहेस होती सब मुस्लिम, इस्लाम, क़ुरान  और अरबों को गाली देते हुए उनके सख़्त इस्लामी क़ानून का मज़ाक बनाते हुए पाए जाते थे.  जिसका ज़िक्र हर बार इस साहाफी ने अपने इंग्लिश आर्टिकल्स में किया है.  लेकिन मोदी के आने के बाद अरब मज़ीद उस सेहर का शिकार हो गए जो इस शैतानी ताक़त ने उनके दिलों दिगाम पर कर दिया था.  अब तो हिन्दुस्तानी मीडिया में दुबाई में हिंदुस्तानी कागज़ात और मोदी जी की मर्ज़ी के हिसाब से तिजारत शुरू करने के इश्तेहरात रेडिओ मिर्ची और दीगर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में खुले आम शाया होने लगे.

जिस अंदाज़ में भारत में झूटी सच्ची फिल्मे बना कर दुबाई के अरब शेखों को हिन्दुस्तान की मस्तूरातों के साथ जिन्सी ग़ुलामी के झूठे फरेबी खेल को बताया जाता है वही ज़हर हिन्दू दहशतगर्दों की नसों में हिन्दू फिल्मकारों ने भरा था.  और जब भारत की सबसे पहली फिल्म पाकीज़ा सरज़मीन सऊदी अरब में शाया हुई तो इस सहाफी को सख़्त तकलीफ हुई थी.  वो भी उस ज़हरीली ज़ेहनियत अदाकार अक्षय कुमार की थी जो मुसलमानों और इस्लाम से सख़्त नफरत और बुग्ज़ रखता है.

यहाँ तक की ज़ाफ़रानी मीडिया के दिलों दिमाग में इतना ज़हर भरा है की जब ईरान के साथ छाबड पोर्ट को तैयार करने के लिए हूकूमते हिन्द ने मोहायदा किया था तब मिडिया की सुर्खियां बनी थी अब ईरान पर हुआ भारत का क़ब्ज़ा छाबड पोर्ट भारत के क़ब्ज़े में.

बिल आख़िर अरब शेख़ों और मुस्लिम मुमालिकों के अंदर बैदारी आई और हिंद्स्तान के हिन्दू अवाम को जो मुस्लिम मुल्कों से तिजारत करतें हैं कमातें हैं और मुसलमानों के खिलाफ ही बे हद ज़हर और आलूद रखतें हैं.  हर चंद मुस्लिम अवाम को बर्बाद करने की मंसूबा बंदी करतें रहतें हैं, उनको ख़ारिज करने की मोहीम तेज़ हुई.  अरब मुमालिकों  से गुज़ारिश है की हिन्दुस्तान से तमाम तिजारती मुहायदे मुनतक़ा कर देना चाहिए.  और जितने भी हिन्दू ताजिर अरबों से तिजारत करतें हैं उन सबका तिजारती मोहायेदा रद्द कर देना चाहिए.  क्योंकि अरब मुमालिकों में सेक्युलर हिन्दू नहीं बरक्स शिद्दत पसंद ज़ेहनियत ही गए हैं.  और ऐसे अनासिर साजिश के तहत जान बूझ कर अरब मुमालिकों और मुस्लिम मुल्कों में घुसाए गए हैं. इनकी ज़ेहनियत गलीज़ और आलूद से भरी होती है.  सिर्फ मुस्लिम माशी हालत पर हमला कर के वहां पर हिन्दू राष्ट्र क़ायम करना और मुस्लिम मस्तूरातों को जिन्सी गुलाम बनानां.

जहां तक सब्ज़ परचम के नीचे आने वाले हर शख्स को अमान होगी वोह फलसफा सिर्फ हिन्द के लिए है.  हिन्द में जो भी सब्ज़ परचम के नीचे आ गया उसको अमान होगा.  फिर जंग की धुल थमने के बाद फिर से दुसरे मोहायेदे क़ायदे क़ानून बना कर उसपे उस तरीके से अमल करना होगा.     

कुल मिला के मसले का लब्बो लुआब ये निकल कर आता है, जिस बीमारी को हिन्द के ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ मुस्लिम अवाम और तब्लीग़ी जमात के ऊपर इलज़ाम तराशी कर रहें हैं वो दर-असल हिन्द और दुनियाँ के इंसानियत और मुसलमानों के खिलाफ ज़ुल्म सितम शिद्दत और दहशत का उस मालिके हक़ीक़ी का जवाब है. 

Sunday, 19 April 2020

सख़्त हुए हालात, बेकाबू हुई करोना जंग.

अज़ीज़ नाज़रीन

करोना जंग बेक़ाबू होती जा रही है.  हुकूमत की हर हिकमते अमली बे असर साबित हो रही है.  जिस तरह से हूकूमते इस तबाही और अनदेखी जंग को अपने बद अमाल, ना इंसाफ़ी, ज़ुल्म, जब्र, शिद्दत के सबब उस मालिके हक़ीक़ी का गज़ब और गुस्सा नहीं तस्लीम कर रहें हैं बरक्स एक रूह पोश सा वायरस तो ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा की यह अदना सा कीड़ा हूकूमते हिन्द और तमाम अलाम का सख़्त इम्तेहान ले रहा है. 
इस जंग ने अकेले भारत को अभी तक कुछ ९००० करोड़ का नुकसान कर दिया है मज़ीद जो जानी नुकसान हुआ वोह तो अलहदा है.

इतना सब कुछ होने के बाद भी जहाबाक होने वालों और मरीज़ों की अदद शुमारी लगातार बढ़ती जा रही है.  अभी तक सिर्फ अवाम ही इस बीमारी से मुत्तासिर हो रहा था.  लेकिन अब तो जर्राह (तबीब) पुलिस की टीम यहाँ तक की फौज को भी इस वाइरस ने अपनी आगोश में ले लिया है. 

कल लुधियाना के ऐ.सी.पी. की मौत की खबर को अभी १२ घटें भी नहीं गुज़रे थे की दो पुलिस वालों की मज़ीद मौत हो चुकी है. एक रेवाड़ी में हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर ने खुदकुशी कर ली है। मय्यत इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार फिलहाल गुरुग्राम में तैनात थे, और  उन्होंने अपने घर पर ही खुदकुशी कर ली है।  ज़ाराये इत्तेला के मुताबिक सत्येंद्र कुमार साल २००८ में स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस में भर्ती हुए थे। उन्होंने रेवाड़ी समेत कई जगहों पर अपनी ख़िदमत को अंजाम दिया था।
मय्यत इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार
 मय्यत इंस्पेक्टर कालका रोड पर मुक़ीम एक सोसायटी में किराए के फ्लैट में रहते थे.   सतेंद्र सिंह ने बरोज़ हफ्ते (सनीचर) की रात को फांसी लगा कर जान दे दी। इंस्पेक्टर की ख़ुदकशी करने की वजह का अभी तक इल्म नहीं हो पाया है। पुलिस ने बताया कि इंस्पेक्टर सतेंद्र सिंह रात को करीब ११ बजे ड्यूटी से वापस घर आए थे।  रात को खाना खाने के बाद वह सो गए थे। सुबह उनका जिस्म बगल के कमरे में फांसी लगा ली।  बरोज़ इतवार की सुबह उनका जिस्म कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। सतेंद्र सिंह गुरुग्राम में आमदो रफ़्त (ट्रैफिक) में तैनात थे।  पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम कराने के लिए हूकूमते के ज़ेरे इंतज़ाम हॉस्पिटल में भेज दिया है।

दूसरी खबर इंदौर से है जहाँ कोरोना वायरस का केहर सबसे ज़्यादा देखने को मिल रहा है.  मध्य प्रदेश और भारत में जहाबाक होने वाले अफ़रादों की अदद शुमारी लगातार बढ़ती जा रहा है.  मध्य प्रदेश में कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं. इसी बीच कोरोना के खिलाफ जारी जंग में कोरोना पॉजिटिव पुलिस इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी की मौत हो गई है.
पुलिस इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी 
कोरोना वायरस की आग़ोश में सेहत ख़ादिम, तबीबों से लेकर पुलिस महकमा भी आ चूका है. वहीं मध्य प्रदेश का इंदौर कोरोना वायरस का बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है. इंदौर में गुजिश्ता दिनों कई सेहत ख़ादिम और पुलिस अमला भी कोरोना वायरस का शिकार हो गए हैं. इनमें पुलिस इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव पाई गई थी.

कोरोना से पॉजिटिव पाए जाने के बाद पुलिस इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ४५ साला देवेंद्र चंद्रवंशी जूनी पुलिस स्टेशन के थाना इंचार्ज थे. पिछले १० दिन से अरविंदों अस्पताल में वह ज़ेरे इलाज थे.  देर रात तीन बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

इस वाइरस ने भारतीय फौज में भी घुसपैठ कर ली है.  ज़ाराये इत्तेला मालूम हुआ है की भारतीय नेवी के कुछ २७ जवान करोना पोसिटिव पाए गए हैं.  इस बात से फौज में हड़कंप मचा हुआ है.  वज़ीरे दिफ़ा जनाब राजनाथ सिंह ने ऐसे हालात में एक सहाफी इजलास से ख़िताब किया और उन्होंने कहा की उन्होंने इस क़िस्म की जंग अपनी ज़िन्दगी में पहली बार देखी है. मज़ीद उन्होंने कहा की हम एक ऐसी पोशीदा मख़लूक़ से जंग लड़ रहे हैं जिसको हम देखने से क़ासिर हैं.  उन्होंने कहा हमारी फौज के तमाम हथियार मेहफ़ूज़ हैं लेकिन हमारे फौजी और अवाम जहांबाक हो रहें हैं.    

जिस हिसाब से करोना केहर बरपा रहा है हूकूमते हिन्द की ताला बंदी के कोई असरात नज़र नहीं आ रहें हैं.  ऐसे हालात में इस सहाफी कोई ऐसी कोई सूरत नज़र नहीं आती की ३ मई के बाद भी ताला बंदी में कुछ रियायत मिल सकेगी.  अगर हालात ऐसे ही रहे तो ये सहाफी ताला बंदी मज़ीद बढ़ते हुए देख रहा है.

India will never be satisfy its communal lust.

Monday, 13 April 2020

हिन्दू दहशतगर्दों ने किया पुलिस चौकी पर क़ब्ज़ा.

हैदराबाद
जहाँ हक़ और बातिन की इस जंग में दिफ़ाई फौजी एक के बाद एक हिन्दू दहशतगर्दों के क़िलों को फतह करते जा रहें हैं वही मुस्लिम रियासत दक्खन के निज़ाम की दारुल ख़िलाफ़ा हैदराबाद  में एक पुलिस चौकी पर हिन्दू दहशतगर्द आर.एस.एस. के क़ब्ज़े की खबरें आ रही हैं.  ऐसी ख़बरे सोशल मीडिया पर हिन्दू दहशतगर्दों के हथियारों के साथ तसावीरों के वायरल होने के बाद आना शुरू हुई. जैसे ही सोशल मीडिया से ख़बरें निकल कर मीडिया की सूर्खिया बनी, इस पर तनाज़िया खड़ा हो गया है।  इन्तेज़ामियाँ के होश फ़ाख्ता हैं और उसने आनन फानन में वहां के पुलिस महकमे के इंस्पेक्टर को हटा दिया है। आला ओहदेदारों ने जब बात का बतंगड़ बना तो ये कह कर लीपा पोती करना शुरू कर दी है कि दहशतगर्दों को इसकी इजाजात नहीं दी गई थी, मज़ीद अफसर ने कहा हमने दहशतगर्दों से हाथ जोड़ कर चले जाने की इल्तेजा की थी। वहीं, हिन्दू दहशतगर्द स्पोक पर्सन ने इन खबरों को झूठी बात बताते हुए सिरे से ख़ारिज कर दिया कि उसने कहा की दहशतगर्द पुलिस चौकी पर अवाम की शिनाख़्त खत की तफ्तीश कर रहे थे।
 
हिन्दू दहशतगर्द जमात संघ ने इस मुद्दे पर कहा कि ऐसी खबरें 'अदना दर्जे और ख़ुद ग़र्ज़ी' से मुत्तासिर हैं। सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीरों में आर.एस.एस. के दहशतगर्द कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान यदाद्री भोंगीर जिले में एक चौकी पर हथियारों के साथ तैनात दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई अफ़रादों ने इसपर सख़्त एतेराज़ दर्ज करवाया हैं। उन्होंने पूछा कि 'लाठी लिए' आरएसएस के दहशतगर्दों को को चौकी से गुजरने वाले वाहन सवार लोगों के कागज जांचने की इजाज़त किसने दी।

वज़ीरे आला से जवाब तलब 

अवाम ने ऐसे फरेबी अनासिरों के खिलाफ मामला दर्ज करने की भी मांग की है। मजलिस बचाओ तहरीक पार्टी के तर्जुमान अमजद उल्ला खान ने एक बयान में वज़ीरे आला चंद्रशेखर राव से इस मामले पर वज़ाहत की मांगा की है। उन्होंने पूछा कि क्या यह टीआरएस सरकार की नरम हिंदुत्व की हिकमत है या फिर आर.एस.एस. मुवाफ़िक़ तेलंगाना सरकार के आला ओहदेदार अपनी मर्जी से ऐसा ना ज़ेबा और वाहियात काम कर रहे हैं।
हालांकि पुलिस ने कहा कि गुजिश्ता हफ्ते कॉलेज के कुछ तुलबा के साथ दहशतगर्दों ने सादे कपड़ों में कुछ चौकियों पर ख़ाने और पानी की तक़सीम करने में पुलिस की मदद की पेशकश की थी। अब मसले की अंदर जा कर ये एहसास हो रहा है की इन तुलबा के साथ दहशतगर्दों ने पुलिस चौकी में अपनी पैठ बना ली थी.  फिर जो तुलबा ज़रूरतमंदों में जारूरी एशिया तक़सीम कर रहे थे उसमे ये दहशतगर्द घुसपैठियों के जैसे घूस गए.  और जब सब कुछ उनके क़ब्ज़े में आ गया उन्होंने पुलिस चौकी पर धावा बोल दिया.  जिसकी तस्दीक़ पुलिस के एक आला ओहदेदार की ज़ुबानी से हो रहा है जिन्होंने कहा कि अचानक वे सब ९ अप्रैल को दहशतगर्द आर.एस.एस. की ड्रेस में आए और फिर उन्होंने चौकी को अपने क़ब्ज़े में ले कर नजदीक कुछ तस्वीरें भी लीं।
पुलिस स्टेशन कूप (बगावत) को देखते हुए ओहदेदारों के होश फ़ाख्ता हैं और उनसे कुछ भी कहने की नहीं बन रही है. एक ओहदेदार ने कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर (अलायर चौकी के तहत आने वाली चौकी के इंचार्ज) को फौरी तौर से दूसरी जगह भेज दिया गया और इस कूप (बगावत) की इत्तेला हेड कवाटर को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इस बगावत के सिलसिले में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। सूबे तेलंगाना का हिन्दू दहशतगर्दों का एरिया कमेंडेन्ट के. रमेश ने कहा कि दहशतगर्द इन्तेज़ामियाँ के कामकाज में दखल नहीं देते और पूरी तरह इजाज़त मिलने के बाद ही अपना काम करते हैं।

सहाफी ज़ुबैर की इस मुद्दे पर नुक़्ता ऐ नज़र

पुलिस स्टेशन पर हिन्दू दहशतगर्दों की हथियारों के साथ तैनाती पर दो चीज़े निकल कर सामने आ रहीं हैं.  एक या तो हिन्दू दहशतगर्द कूप (बगावत) में पुलिस की भी मिली भगत थी जिसकी वजह से एक चौकी हुकूमत को गवानी पड़ी और उसपे आज दहशतगर्दों का क़ब्ज़ा है. दूसरी बात दहशतगर्दों ने इस चौकी को हथियारों के साथ हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम पुलिस वालों को बड़ी तादात में हलाक कर के हासिल की है.  क्योंकि जैसा की हिन्दू दहशतगर्दों का एरिया कमेंडेन्ट के. रमेश ने कहा की दहशतगर्द बग़ैर इजज़ात हुकूमत के काम काज को मुत्तासिर नहीं करते.  तो ऐसी सूरत में हुकूमत और पुलिस की मिली भगत के साफ़ इमकान नज़र आ रहें हैं. पुलिस स्टेशन पर हिन्दू दहशतगर्दों की तैनाती की इजाज़त किस अफसर ने दी.  और क्या वोह इजाज़त ज़ुबानी थी या तहरीरी.  फिर ऐसी बगावत में सरकारी हुक्काम के शामिल होना मतलब वतन के साथ गद्दारी.  फिर ऐसे ओहदेदारों के खिलाफ वतन के साथ गद्दारी का मुक़दमा दर्ज होना चाहिए.  

फिर हुकूमत के काम काज में दहशतगर्दों का क्या किरदार हो सकता है.  सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम अवाम के खिलाफ़ दहशत, जब्र और बर्बरियत करना.  क्योंकि इस बात की तस्दीक़ ख़ुद  हिन्दू दहशतगर्द स्पोक पर्सन कर रहा है की दहशतगर्द पुलिस चौकी पर अवाम की शिनाख़्त ख़त की तस्दीक़ कर रहे थे.  अब सवाल ये ही उठता है की किस ने इन देशतगर्दों को हथियारों के साथ मुस्लिम अक्सरियत वाले इलाक़ों में शिनाख़्त करने की इजाज़त दी है.  क्या ये दहशतगर्द आई.पी.अस. या आई.ऐ.अस. इम्तेहान को पास कर के पुलिस स्टेशन पर तैनात हुए हैं.  अगर नहीं तो हुकूमत के महकमे में मदाखलत करने की इनकी क्या हैसियत और औक़ात है.  क्या ये हुकूमत के काम काज को मुत्तासिर नहीं कर रहें हैं.  फिर दहशतगर्दों के हथियारों के साथ मौजूदगी में कैसे कोई सरकारी अमला ग़ैर जानिबदार, मुनसेफाना तोर पर काम कर सकेगा.   

और यह ही वजह है की २३ मार्च के बाद अवाम के ऊपर सख़्त तरीन बर्बरियत और दहशत देखी गई.  बुर्का पोश मुस्लिम खातून अपने ६ माह के बच्चे के साथ हाथ में हॉस्पिटल का पेपर, लेकिन वो इन जैसे खाकी गुंडों की बर्बरियत का शिकार हो रही है.  दूसरी बात अगर बात लॉक डाउन की है, तो मार पीट करने और दहशत फ़ैलाने के पीछे की हिकमत क्या है.  हुकूमत ने इन देशतगर्दों को आवारा कुत्तों की टोली के जैसे अवाम के ऊपर छोड़ दिया है.  ऐसे ही अनासिर सब्ज़ी और फ्रूट मंडिओं में जा कर दहशत मचा रहें हैं.  और नाम पूछ कर ताजिरों के साथ मार पीट कर रहें हैं.  अगर फ़िरोज़ या ज़ाकिर हुआ तो उसके फल और सब्ज़ी फेक दी जाती है वहीँ बनवारी या पटवर्धन रहा तो उसको इजाज़त दी जाती है.  ऐसा करने के पीछे इन देशतगर्दों की हिकमत यह होती है की करोना का वबाल आया हुआ है तुम घर में बैठों.  तो क्या करोना सिर्फ मुस्लिम ताजिरों को जकडेगा और हिन्दुओं को नहीं.   ऐसे किस्सों से साफ़ ज़ाहिर हो रहा है करोना तो सिर्फ बहाना है.  हुकूमत को अपने किसी बड़े अजेंडे को हासिल करना है.  और मरकज़ की बोली आज तमाम वज़ीरे आला बोल रहें हैं जो केजरीवाल कल तक मुस्लिम मुहाफ़िज़ बना फिरता था मुस्लिम अवाम के वोट के ऊपर अपना इक़्तेदार हासिल किया वोह भी एक तरफा बोली बोल रहा है. 

मर्कज़ सामाजिक दूरी इख़्तेयार करने की बात करता है लेकिन क्या वजह है की उस हूकूम की अनदेखी ख़ुद बीजेपी के आला ओहदेदार रकूने असेंबली, वज़ीरे आला और शिद्दत पसंद अवाम ख़ुद करतें हैं. मस्जिदों में नमाज़ तर्क कर दी गई लेकिन मंदिरों में खुले आम आरती पूजा हो रही है. महावीर जयंती ०६ अप्रैल को मध्य प्रदेश के एक मंदिर में खुले आम हज़ारों की तादात में हुजूम जमा हुआ फिर किसी मुद्दे पर दो फ़रीक़ों में बेहेस हो गई और खूब कुशतम पछाड़ा (नूरा कुश्ती) हुई. ऐसे ही अनासिर सामाजिक दूरी की धज्जिया उड़ा रहें हैं, और पुलिस की मदाख़लत पर मंदिरों के पुजारी अपने अक़ीदत मंदों के साथ हमलरेज़ हो रहे हैं.  अब ऐसे विडिओ और ख़बरें हुकूमत की जानकारी के लिए शाया किये जातें हैं तो मज़ीद ग़फ़लत इख़्तेयार कर के हुकूमत निजामुद्दीन, जमात, तब्लीगी पर हमलरेज़ हो जाती है.  और अपने पालतू ज़ाफ़रानी मीडिया के जानवरों को जो असली मुद्दे हैं उनसे ज़हन हटाने के लिए ला लायानी मुद्दे झूट, फरेब की बुनयाद पर हाथ में दे देती है.     

कुल मिला कर वाइरस करोना का जिन्न  या हव्वा जो हुकूमत दिखा रही है उसके पीछे की हिकमत कुछ और है.  और हुकूमत तमाम हिन्द के अवाम को क़ैद कर के अपने किसी बोहोत ही बड़े अजेंडे की जानिब गामज़न है और उसको पूरा करने की उधेड़ बून में है.   जिसकी तीन वजह बताना चाहूंगा. 

१.        क्योंकि अगर करोना एक बीमारी है तो उसके पीछे बर्बरियत मचाने की क्या हिकमत है. 
२.          मुस्लिम ताजिरों को घर जाने और हिन्दू ताजिरों को काम करने की इजाज़त देने की क्या वजह हो सकती है.   
३.      तीसरी चीज़ क्या तमाम सामाजिक दूरी सिर्फ मुस्लिम अवाम के लिए ही है.  क्योंकि हिन्दू तो मज़हबी इज्लासों में भी शरीक हो रहें हैं (राम मूर्ती नसब), हिन्दू तो सियासी हलकों में भी शरीक हो रहें हैं (हलफ बरदारी), हिन्दू तो शादी पार्टी में भी शरीक हो रहें हैं, (कर्णाटक), हिन्दू तो बर्थडे (बरियानी) पार्टी में भी शरीक हो रहे हैं (कर्णाटक). मज़े की बात तो यह है की ऐ सभी किसी और जमात से नहीं और ना ही किसी ख़ास मज़हब “मुस्लिम” से है बल्कि एक ही जमात से हैं.  "ज़ाफ़रानी"  और मज़हब शिद्दत पसंदी.  उसके ऊपर मज़ीद मोदी जी की जानिब से ताली बाज़, दिया बाज़ तमाम हिन्द में रोडों पर निकल कर आतें हैं.  तो यह बात साफ़ ज़ाहिर हो रही है हाथी के दांत ख़ाने के और दिखाने के और. 

Sunday, 12 April 2020

Terror of Saffron Media.

Article written by Advocate Moin Uddin Ahmed Khan
On false allegations that they spread covid 19,  7 Muslims were attacked in Karnataka,  while they were distributing essential commodities.  In similar incidences, in UP also at several places  Muslims were thrashed,  putting false blame on Muslims that they have secret mission of spreading corona virus.  Similar tendencies are being developed in amongst Hindu community in almost every place of India.  Whats App messages are brimmed with hatred and poison spewing clippings against Muslims.    Almost all clippings which were circulated not only in whatsApp groups but also by TV News Media, were pertaining to any other incidents which alleged happened long ago, giving false colour of recent incidence of Muslims.  In Utter Pradesh Jamatees were quarantined and were alleged to have behave indecently with Nurses, as well as raising unreasonable demands of seeking beedees, cigarette, non veg.  However, Saharanpur Police in  its inquiry submitted report falsifying all such allegations.

The incidences are sequel to News Media (ABP, News18, Aaj Tak, Zee News ) fake news, giving unreasonable coverage to the incident of  Nizamuddin Markaz Ijtema, giving it communal colour and using objectionable words such as “CORONA JEEHAD”  “CORONA TERRORISM’ AND “ISLAMIC INSURRECTION” with impunity,  without any restrictions and restrain.

However, anyone had anytime ever tried to decipher the meaning of word Iztema or Ishtema or Ijtema.  The work ijtema means congregation of people.  The Tablighi Jamaat 150 year old history of such Ijtema in India as well as other part of world, and had never done such ijtema without Govt permission.  In the incident in limelight means Nizamuddin Markaz Ijtema, they said Tablighi Jamaat had approached Mumbai Police, govt other local body, for permission of such congregation, however, when it was refused, they sought permission from Delhi Police, which obviously comes under Home Ministry (Shri Amit Shah), and permission was granted to such congregation by Delhi Police for 12.3.20 to 15.3.20.

Whatever may be the reason, the question is very simple if the News Media has such powers to propagate the fake news for any particular incident and against a particular community and that too with impunity without any fear of law of land.  In India TV news Media is being controlled by Regulations issued by Ministry of Information and Broadcasting which is responsible for administration of Channels.  If such things are happening means no existing laws are sufficient to control and regulate electronic media.

Hon’ble Supreme Court of India time and again and lately in recent judgement of Tehseen Poonawala and Kodungallur Film Society, deprecated in strong words such practice of spreading fake news and issued following directions

“State Govt. shall designate a senior police officer below the rank of superintendent of Police as nodal officer in each dist.  They should constitute a special task force so as to procure intelligence report about the people who are likely to commit such crimes or who are involved in spreading hate speeches, provocative statement and fake news”

Despite such directions no control have been found upon these crooked News Media reporters as well as anchors; hence it high time to raise voice to seek cancellation of those News Channels’ licenses and stop advertisements to them.  They are contemnor of order and direction of Supreme Court of India.  Such practice of contempt and violation of regulations by these crooked media persons, are required to be spread around the world, so such media persons’ aid stops from any country.
Why they are left free hands.
Advocate Moin Uddin Ahmed Khan is the Senior leading Advocate High Court Bombay / Supreme Court.

9821477604 

Terror of Saffron Media.


O R D E R

Saturday, 11 April 2020

तब्लीग़ी नहीं ....... तुम्हारे गुनाहों की सज़ा है ..... करोना

नई दिल्ली अप्रैल ११, २०२०

अज़ीज़ नाज़रीन

इंसान चाहे कितना भी क़वी क़ुव्वत वाला ताक़तवर क्यों ना हो जाए, और वोह अपने ग़ुरूर और तककब्बुर की वजह से हद दर्जे के ज़ुल्म, दहशत, नाइंसाफी, इज्तेमाई ख़ून, क़त्लों ग़ारत करता रहे और यह समझे की वोह तो दुनियाँ का अज़ीम तरीन शख़्स है उसके पास ताक़त है क़ुव्वत है हर साजो सामान है उसका क्या कोई बाल बीका कर सकेगा.   और ये ही ग़फ़लत उस ज़ालिम को फ़ासी के फंदे तक ले जाती है. क्योंकि ज़ालिम भलें ही अपने गुनाहों का हिसाब ना रखे लेकिन ऊपर वाला जिसने सारी कायनात बनाई और दोनों जहाँ का मालिकों मुख्तार है वो तो ज़र्रा ज़र्रा नेकी और बदी का हिसाब रखता है.

वही हाल भारत के प्रधान मोदी का हो गया है.  जिस करोना को भारत के शिद्दत पसंद हिन्दू, ज़ाफ़रानी मीडिया जामत के लंगूर और लँगूरनियाँ, ज़ाफ़रानी बीजेपी जमात के कारकून तब्लीग़ी जमात के ऊपर झूट और फरेब के साथ लाद रहें हैं असल में वोह ग़फ़लत है उनके खुद के वज़ीरे आज़म की जो करोना का जिन्न अब हर शिद्दत पसंदों को ख़ौफ़ ज़दा कर रहा है.

यह खबरनामा लिखे जाने तक मुल्के हिन्द में कोरोना वायरस से मुत्तासरीनों की अदद शुमारी ८००० से ज़ाइद हो चुकी है, वहीं इस वबा में  मरने वालों की अदद भी 200 से ज़ाइद हो चुकी है।

लेकिन सबसे हैरानी की बात तो ये है की जिस करोना की वबा के लिए तब्लीग़ी जमात को मुरदे इलज़ाम ठराया जा रहा है अदद शुमारी तो कुछ और ही बयान कर रही है जो हुकूमत के लिए दुशवारी और परेशान कुन सबब है.  सबसे ज़्यादा परेशान कर रहें हैं पिछले दो दिनों में हुए करोना मरीज़ों की तादात में मशुमार इज़ाफ़े की अदद शुमारी।  ९ अप्रैल को ७८७ मामले सामने आए और १० अप्रैल को ८६३ मामले सामने आए हैं।  इस बात का इल्म हर किसी को होना चाहिए की जिस हिसाब से ५ अप्रैल को मोदी ने अपने अक़ीदत मंदों को "अँधेरी रात में दिया था हाथ में"  उसके बाद इन अदद शुमारी से एक ख़ौफ़ का माहौल बन रहा है कहीं भारत तीसरे मरहले की जानिब गामज़न तो नहीं करने वाला। वहीं १४ अप्रैल को लॉकडाउन ख़लास होना था, लेकिन पिछले दो दिनों के मरीज़ों की बे शुमार इज़ाफ़े ने उस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है।

तारीख
मुत्तासारिन 
 मार्च तक
3
2  मार्च
6
5  मार्च
29
6  मार्च
30
7  मार्च
31
8  मार्च
34
9  मार्च
39
10  मार्च
45
12  मार्च
60
13  मार्च
76
14  मार्च
81
15  मार्च
98
16  मार्च
107
17 मार्च
114
18 मार्च
151
19 मार्च
176
20 मार्च
236
21 मार्च
315
22 मार्च
396
23 मार्च
480
24 मार्च
519
25 मार्च
606
26 मार्च
694
27 मार्च
918
28 मार्च
918
29 मार्च
1024
30 मार्च
1215
31 मार्च
1397
                   
तारीख
मुत्तासारिन 
1 अप्रैल
1834
2 अप्रैल
2069
3 अप्रैल
2547
4 अप्रैल
3072
5 अप्रैल
3577
6 अप्रैल
4281
7 अप्रैल
4789
8 अप्रैल
5274
9 अप्रैल
5865
10 अप्रैल
6761
11 अप्रैल
7447*
दूसरी 
एक और वजह मोदी इन्तेज़ामियाँ को ख़ौफ़ ज़दा कर सकती है वोह ये है जहाँ एक जानिब वायरस से मुत्तासरीन लोगों के इलाज के लिए जद्दोजहद जारी है, वहीं जुनूबी कोरिया से खबर आई है की बरोज़ जुमे को कोरोना से ठीक हो चुके ९१ मरीजों में फिर से वायरस का इन्फेक्शन पाया गया है। इस बात को ले कर दुनिया भर के तबीबों की फ़िक्र मज़ीद बढ़ा दी है।

आज की ताज़ा खबर.

करोना का वायरस ठीक हुए मरीज़ों पर फिर से दो गुना ताक़त से हमला कर रहा है.  तहक़ीक़ाती अमले और डॉक्टर्स ये देख कर भौच्चके रह गए, जब उन्होंने कुछ ठीक हो चुके अफ़रादों में वापिस से करोना के ख़ुसूसियात देखने को मिल रही हैं.

कुल मिला कर ये नतीजा अख़्ज़ किया जा सकता है की महज़ लोक डाउन ही इस वबा से निबटने का हल नहीं है. अगर लोक डाउन से ही इस बीमारी को काबू में कर लिया होता तो २३ मार्च को जो मरीज़ों की तादात थी वो २१ दिनों के लोक डाउन के बाद मज़ीद बढ़ी है. सबसे ज़्यदा मरीज़ ९ अप्रैल के बाद ७७८ और १० अप्रैल को १२०० हो गए.  दूसरी बात अगर तब्लीग़ी ही इस मर्ज़ को फैलाने के लिए ज़िम्मेदार हैं तो ५ अप्रैल के बाद जिस अंदाज़ में तमाम भारत में हुजूम इकठ्ठा हुआ था और आतिशबाज़ी की गई थी वो कैसे ज़िम्मदेआर नहीं हैं.  इस मर्ज़ को फ़रोग़ देने में राजा सिंह की मशाल साजिश भी काम कर गई. उस मशाल साजिश में राजा सिंह और बीजेपी के कई मुत्तासरीन शामिल हुए थे. राजा सिंह के ऊपर आफ आई आर करो. फिर जिस हिसाब से ये वाइरस ठीक हुए मरीज़ों पर दू गुनी ताक़त से हमला कर रहा है तो उसके लिए क्या क़दम हुकूमत ने उठाये हैं.

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...