Monday, 30 April 2018

पुलिस के बाद अब आर्मी ने किया रूसवा


भारतीय आर्मी सदा से ही महिलाओं पे बलात्कार और सामूहिक बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में शामिल रहती है. चाहे वो नार्थ ईस्ट में किये गए सैन्य अभियान हो या आसाम, पंजाब या फिर श्रीलंका में भेजे गए शांति सैनिक. हर जगह भारतीय सैनिक ले के तो शांति का परचम जाते है लेकिन रूसवा और ज़लालत का तोग ले के आते है.  नार्थ ईस्ट में शर्मीला अर्रोम ने २० साल तक भूक हड़ताल की थी क्योके वहां पे भारतीय सेनिको ने १ लाख से ज़्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार किया था. राजिव गांघी की हत्या भी भारतीय सैनिकों द्वारा श्रीलंका में महिलाओं के ऊपर किये गए दुष्कर्म का नतीजा था.

जब भारतीय फौज बदनाम है अपने कुकर्म, अपराधिक और साम्प्रदाइक मानसिकता की वजह तो इस तरह की भारतीय फौज की कामुक मानसिकता जम्मू कश्मीर देश की महिलाओं पे भी दिखाई देती है.  जब से भारतीय फौज ने कश्मीर पे बन्दुक के ज़ोर पे कब्ज़ा किया है तब से फौज का मिशन है के मुस्लिम नस्ल को या तो ख़त्म कर दो या उनकी नस्ल ख़राब कर दो.  इस मिशन के तेहत कमो बेष २ लाख से ज़ाइद महिलाओं के ऊपर भारतीय फौज ने बलात्कार या सामूहिक बलात्कार किया है.

इस कड़ी में नया केस सामने आया है जम्मू में ३ भारतीय जवानो ने एक महिला के ऊपर बलात्कार किया है.  जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में २४ वर्षीय एक महिला (नाज़नीन) काल्पनिक नाम ने सीआरपीएफ जवानों पर गलत तरीके से कैद करने और एक जवान पर बलात्कार करने का आरोप लगाया। इसके बाद तीनों जवानों को बर्खास्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। यह जानकारी रविवार को पुलिस के अधिकारियों ने दी।


अधिकारियों ने बताया कि महिला ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने इस घटना का विडियो बना लिया और धमकी दी कि किसी को बताया तो विडियो सोशल मीडिया पर जारी कर देंगे। उन्होंने बताया कि पुंछ जिले के मंडी इलाके की रहने वाली महिला ने डोमाना पुलिस थाने में शनिवार को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि सीआरपीएफ जवान पीड़िता को अपने शिविर में ले गए और उनमें से एक ने बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया।

उक्त महिला शाम ७ बजकर ३० मिनट पर एक बस से उतरीं और अपने रिश्तेदार के घर जा रही थी लेकिन रास्ता भटक गईं। आधे घंटे बाद वर्दी में मौजूद तीन लोगों ने शिविर के बाहर उन्हें रोका। वह मदद करने के बहाने उन्हें शिविर में ले गए और उनमें से एक ने बलात्कार किया। अधिकारी ने बताया कि बलात्कार और गलत तरीके से बंद करने समेत रणबीर दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एक मामला दर्ज कर लिया गया है और इस मामले की जांच की जा रही है।  सीआरपीएफ के प्रवक्ता आशीष कुमार झा ने बताया कि तीनों आरोपी सीआरपीएफ के जवानों को बर्खास्त कर दिया गया है और बल पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।  

जम्मू कश्मीर देश में भारतीय फौज दूआरा बलात्कार का ये पहला मामला नहीं है. लेखक इस विषय पे कई लेख लिख चूका है. एक लेख में लेखक ने एक मुस्लिम पीड़िता का बी.बी.सी. को दिया हुआ इंटरव्यू वीडियो के साथ Kashmir a burning sensation लेख लिखा है.  जिस वक्त उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया तब वो महज़ ११ साल की थी और स्कूल से घर जा रही थी. उनके ऊपर भारतीय सेना के भेड़िये इस तरह टूटे जिस तरह अपने शिकार को पाने के लिए शैतान टूटता है.  फिर उस बच्ची की यूनिफार्म  चिंदे चिंदे कर के उसको पूरा बरहना कर दिया फिर उसको एक प्याले में लाल रंग का एक द्रव पीने को दिया और उसके साथ बारी बारी से बलात्कार को अंजाम दिया. और उसको अधमरी हालत पे बहते खून के साथ नग्न छोड़ के फरार हो गए.  वो विडिओ लेख अभी भी लेखक के ०६ दिसंबर २०१६ के ब्लॉग पे मौजूद है.  

English version of the News

After Police now it is turn of Army to commit act of humiliation. autonomousjournalist.wordpress.com/2018/04/30/aft
 







Sunday, 29 April 2018

इलाही बा हुरमते राज़ो नियाज़ेक


बुलंद कड़क आवाज़ नबी करीम की जानिब आते आते अदब और एहतेराम की वजह से पस्त होती चली गई.

अल्लाह का कलाम ।।

अरे ये आप क्या कलाम पड़ रहें है,  ये किताब हमारी तो नहीं।।

आपने कितनी किताबें लिखीं है ।।

हमने कोई किताब नहीं लिखी,

ये कलाम किसका है ।।

बे शक अल्लाह का ।।

नबी करीम आपके यहाँ काहे पे तशरीफ़ लाये थे ।।

ऊंटनी पे ।।

वो क्या करने आये थे ।।

घर बंधवाने ।।

वो आपके यहाँ कितने दिन रुके थे ।।

६ महीने और ४० दिन ।।

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आपके आस्तानों से;  बुतखानों से है निस्बत मेरी ।।

तेरे आस्ताने से और आपके रौज़े से मिलती है कुव्वत रूहानी ।।
मिटाने शर बुतखानो के शैतानों की शैतानी ।।

हर जगह मौजूद है तू, जहाँ देखू तू ही तू बस तू ही तू
आस्तानों में भी है तेरा जलवा, बुतखानों में भी है हाज़िर तू ।।
तेरा अक्स आस्तानों में रहमानी, और बुतखानों में है तू शैतानी ।।

मजमा जमा है फ़रज़न्दाने तौहीद का मैदान में;
आप आये निकल के पहलवानो में
ले के दस्ते शफ़क़त, बड़ाई हिम्मत बोसा किया गालों पे.

उन पाँचों में शामिल हुआ, सोने के सिक्कों पे रियाज़ है जारी ।।.
मिला दिया सिक्काए रियाज़ुल वक़्त पाकि है तुझको बाकी ।।


हाकिम बन के कुर्सी पे बैठा हूँ, आई शैतान की है आज शामत
मज़लूमों के साथ हो इन्साफ.
तीनों को ज़लील करने, हुए तीन तैयार,
पंडित, साधू, तेली तीनो है अभी बाकी
पर तीन शैतानो पे बस एक है काफी.
जो मुजरिम है बस उसको है आज फ़ासी
हर अमन पसंद को है आज माफ़ी

कुछ पुराने केस हल करना है कुछ बोसीदा फाइलें है बाकी. 
पड़ के फूक दिया हुई जमी धुल गायब. 

आदम और शैतान में बस झुकाने और उठाने का है इतना ही फर्क, 
आदम ने सर झुकाया, शैतान ने सर उठाया.
हुआ गलती पे पशेमान वो, रूसवा हुआ घमंड से था चूर जो,
फिर शैतान की हर जगह रूसवाई आदम की है पारसाई ।।


एक तजल्ली,
है चिराग रोशन,
हर परवाने में उसत नहीं के पा ले उसको फ़ौरन
हुकुम नहीं पास जाने का.
हद महदूद है हर परवाने का;
एक ने खो दिया होश जो पाया सिर्फ एक छोटा सा पैमाना तजल्ली का
दूसरा, जल जाए जो बढ़ाये एक क़दम भी आगे का;


वो सुर्ख गेसू वो सफ़ेद चेहरा ना सिर्फ तज्जलिओं को पातें है बल्कि सौगात
राज़ों नियाज़ के सरगोशी की हमारे आपके लिए लातें हैं.

रोशनदान से भीक मांग रहा था, लगा शैतान झांक रहा था,
पड़ा कलामे रब्बानी खैर नहीं अब शैतानी.
आया वो अपनी कैफियत में,
वो भी थे अपने वज्द में
फिर कहाँ उसमे इतनी उसत के ले आये उनसे ज़्यादा कुव्वत,
टिक न सका उनके हुज़ूर पल भर भी, ले के आया था जो क़ुव्वते आसमानी.
हक़ है कलामे रब्बानी, बहका ना सकेगा फिर भी तू वली ए नफ़्सानी.




जौर्नालिस्ट जुबेर पाक शायरी : इलाही बा हुरमते राज़ो नियाज़ेक 

Saturday, 28 April 2018

मीडिया की लोकतांत्रिक हत्या।


भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता था, लेकिन २०१४ के बाद भारत की इस जनसांख्यिकी में काफी बदलाव आया है। २०१४ के पहले के सभी नारे;  सरकार जनता के लिए,  जनता के द्वारा, जनता की, बदल गए है। जो अब हो गए है सरकार आतंकवादीओ दूआरा, हिटलर के लिए, भगवा की बन गया है। चूंकि नारे बदल दिए गए हैं इसलिए लोकतंत्र का अर्थ भी भारत में बदल गया है। अब भारत एक लोकतांत्रिक देश नहीं है बल्कि यह हिटलर प्रकार लोकतंत्र बन गया है।

भारतीय संविधान ने लोकतांत्रिक भारत के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी दी; लेकिन चूंकि २०१४ के बाद जब गलत दिशाओं में हवाएं बहने लगीं, जो लोकतंत्र के अर्थ को बदलती है तो इस असवैंधानिक सोच से भाषण की आजादी का अधिकार कैसे अछूता रह सकता था। पत्रकारों का कहना है कि वे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके प्रशासन की आलोचनात्मक कहानियों को चलाने से रोकने के उद्देश्य से धमकी का सामना कर रहे हैं।

कम से कम तीन वरिष्ठ संपादकों ने पिछले छह महीनों में विभिन्न प्रभावशाली मीडिया आउटलेटों से दबाव के कारण अपनी नौकरियों का त्याग करना पड़ा है, जिन्होंने मोदी के हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सरकार या उसके समर्थकों के खिलाफ आलोचक रिपोर्ट पब्लिश की थी, सहकर्मियों ने बताया।

कुछ पत्रकारों के साथ-साथ टेलीविजन एंकरों ने रॉयटर्स को बताया है कि उन्हें शारीरिक नुकसान, सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार, और मोदी के प्रशासन द्वारा बहिष्कृत किया गया है।

यह गंभीर चिंता का विषय है और मोदी प्रशासन को अपनी नीतियों को फिर से परिभाषित करना होगा।  बजाये बीजीपी प्रवक्ता संबित पात्रा  और संघ विचारक राकेश सिन्हा का बातो को घुमा फिरा के  अपनी सरकार का झूठी, निराशाजनक, आधारहीन बहाने दे कर बचाव करने के.  भारत सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों से अपनी पिछली स्थिति खो रहा है चाहे वो तेजी से आर्थिक रूप से विकसित देशों की सूची हो या प्रेस की आजादी और मीडिया की स्वायत्तता का मामले हो, जनता की संतुष्टि, महिलाओं के खिलाफ अपराध , धार्मिक पक्षपातपूर्ण, सहनशीलता आदि।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता ने बुधवार को अपना वार्षिक सूचकांक जारी किया; पेरिस स्थित रिपोर्टर ऑफ बॉर्डर्स ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत  दुनिया के १८०  देशों में से  अब १३८ वें स्थान पर है। भारत २०१७ से भी दो पायदान नीचे खसका है और जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और म्यांमार जैसे देशों की तुलना में कम हो गया। जब २००२ में इंडेक्स शुरू किया गया था, जब सर्वेक्षण की गई १३९ देशों में से भारत की स्थिति ८० वें स्थान पर थी।


रिपोर्टर्स बिना सीमा के ने कहा कि "हिंदू राष्ट्रवादी राष्ट्रीय बहस से 'राष्ट्र विरोधी' विचारों के सभी अभिव्यक्तियों को राष्ट्रीय बहस में शुद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं, मुख्यधारा के मीडिया में आत्म-सेंसरशिप बढ़ रही है और पत्रकार तेजी से सबसे कट्टरपंथी राष्ट्रवादियों द्वारा ऑनलाइन स्मीयर अभियानों के लक्ष्य पे हैं, जो उन्हें गाली गलौच करते हैं और यहां तक ​​कि शारीरिक प्रतिशोध की धमकियाँ भी देतें हैं। "समूह ने कहा कि" नफरत भाषण लक्ष्यीकरण पत्रकारों को सामाजिक नेटवर्क पर साझा किया जाता है और प्रायः ट्रोल सेनाओं द्वारा बढ़ाया जाता है " सरकार के प्रवक्ता ने पत्रकारों के आरोपों पर टिप्पणी अस्वीकार कर दी। उन्होंने रिपोर्टर्स के बिना सीमा के रिपोर्टर्स को तुरंत जवाब नहीं दिया।

भारत के कुछ पत्रकारों का कहना है कि उनका मानना ​​है कि अगले साल होने वाले चुनाव में मीडिया की स्वतंत्रता अब और भी ज्यादा खतरे में है। मोदी की आर्थिक नीतियों और बीजेपी के शक्तिपूर्ण हिंदू राष्ट्रवाद के विरोध में कुछ संकेत मिले हैं।

मोदी शासन में प्रजातंत्र की हत्या हो रही है न्याय की हत्या हो रही है उसपे अगर कोई पत्रकार बंधू मोदी प्रशासन की आलोचना करता है उसकी कार्यप्रणली पे कटाक्ष करता है तो उसको खामोश रहने की हिदायत दी जाती है फिर भी अगर पत्रकार अपनी आवाज़ बुलंद करता रहता है तो उसकी आवाज़ को फ़ासी दे दी जाती है उसके तमाम स्त्रोतों को बंद कर दिया जाता है या उसकी आवाज़ बंद कर दी जाती है यानि की हत्या।

English version. 

Democratic assassination of Media. autonomousjournalist.wordpress.com/2018/04/27/dem

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...