गुरूवार को
श्री श्री की मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी और सुन्नी वक्फ बोर्ड
के सदस्यों के बीच बैठक हुई. इस बैठक में श्री श्री ने एक निहायत वहहियात और बेहूदा
पेशकश की है के बाबरी मस्जिद अपनी बूनयादि जगह राम के नाम पे छोड़ दे और मस्जिद थोड़ी
दूर बनाई जाए. इस बेहूदा पेशकश पे जहा मुस्लिम मौलाना भड़क गए वही वकील ज़फ़रयाब जीलानी
ने अपने वादी की और से तजवीज़ की सख्त मज़मत की है.
पत्रकार जुबेर का विश्लेषण:
ऐसी तज़वीज़
तो ज़मीर फरोश मुस्लिम बोहोत पहले ही ला चुके है लेकिन ये हमको कुबूल नहीं है.
श्री श्री
मुस्लिमो को हलाल करने की कवायत क्यों तेज़ कर रहे है. इस पत्रकार के कल लिखे लेख मालदीव: नशीद ने मांगी
है नज़ीस्त से मदद अल्लाह खैर ... और तमाम पहले लिखे हुए लेख में बात का लब्बे लुबाब
यही निकल के आता है के हिन्दू गले लग के गर्दन उतार लेते है. श्री श्री हिन्दू समाज
से ये अपील क्यों नहीं करते जो मुस्लिमो से की जा रही है. हर जगह मुस्लिम समाज ही क्यों
कुर्बानी दे. फिर भी इतिहास के पन्नो में उनको आक्रमणकारी, दमनकारी ऐसी संज्ञा दी जाती
है. अब बस हम कुर्बानी देने को तैयार नहीं है. जिन मुस्लिम बादशाहो ने भारत के लिए
अपने प्राणो की आहूति दी उनको आज क्या बोल के याद किया जा रहा है. जिन मुस्लिम जांबाज़ों
ने भारत की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी आज उनके वंशजो को पाकिस्तानी कह के सम्भोदित किया
जाता है.
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