Thursday, 22 February 2018

ट्रिपल तलाक़ के खात्मे के खिलाफ मौलाना की दहाड़


मुस्लिम पर्सनल लॉ के शेर की दहाड़ के सामने हिन्दू स्टेट के सबसे बड़े पाखंडी और आतंकी सरगना की गीदड़ भबकी बोहोत ही दबी हुई जान पड़ती है.  पिछले सप्ताह औरंगाबाद, मालेगाव, लातूर, नांदेड़, भिवंडी और तमाम महाराष्ट्र से आये हुए कमो बेष एक लाख से ऊपर मुसलमानो के एक इजलास को खिताब करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ के सरबराह ने ट्रिपल तलाक़ की निस्बत से अपनी बात हुकूमत के जानिब रखी.  मौलाना अपनी तक़रीर के दौरान कभी हुकूमत को चूनौती देते हुए दिखे तो कभी वतन पे मर मिटने की कस्मे खाते हुए दिखे.  उनकी रूहानी तक़रीर ने मुस्लिम नौजवानो को बांधे रखा और उनकी छुपी हुई बुज़ुर्गी जो अब तक पौशीदा थी कई बार पैमाने से छलक गई. उनका एक एक अलफ़ाज़ तीर की मानिंद इस्लाम और मुसलमानो के दुश्मनो के दिलो पे पेवस्त होता चला गया उनकी बातो से उनका रूहानी फेस साफ़ ज़ाहिर हो रहा था.

यूं तो लेखक मुसलमानो के निजी कानून में आतंकी हस्तक्षेप और हिन्दू लॉ नाफ़िज़ करने के षड्यंत्र पे बोहोत से लेख इस विषय पे लिख चूका है और आतंकिओ को चुनौती भी दे चूका है. जिसमे प्रमुख चुनौती है नव भारत टाइम्स के एक डेबिट और वेंकैया नायडू के कथानाक पे जिसमे नायडू ने कहा था अगर ट्रिपल तलाक़ कानून में मुसलमानो ने बाधा डाली तो उनके ऊपर कानून थोप के रहेंगे. जिसके जवाब में लेखक ने कहा था नायडू जी ज़्यादा बड़ा बोल मत बोलो अगर तुम थोपोगे तो हम तोड़ेगे. रस्सी को ज़्यादा खींचोगे तो वो टूटेगी. अगर हमारी शरीयत में मदाखलत की तो हम हिन्दू स्टेट के नक़्शे को बदल देंगे. सन ४७ शायद भूल गए होंगे तुम फिर से याद आ जाएगा.

प्रधान सेवक मोदी और उसका समूचा कैबिनेट मुस्लिम महिलाओ से सहानुभूति दिखाने का जो पाखंड कर रहे है वो अब मुस्लिम महिलाओ के सामने भी खुल के आ गया है. के ये सहानुभूति सिर्फ इस्लामिक शरीयत को तब्दील करके हिन्दू कानून नफीस करने की एक साजिश है और सहानुभूति का एक बहाना. अगर मुस्लिम महिलाओ से सहानुभूति ही है तो संसद में ५% मुस्लिम महिलाओ के रिजर्वेशन का बिल कहे को पास नहीं किया जाता.

मोदी सरकार, उसके गुलाम मंत्री संत्री, लंगूर पत्रकार और भक्तो को ये हुजूम मुस्लिम महिलाओ का भी देख लेना चाहिए जो ट्रिपल तलाक़ बिल के खिलाफ जमा हुई है और खुल के कलेक्टर, और जिला पुलिस अध्यक्ष के सामने अपनी एहतेजाजी पेटिशन फाइल की है. मोदी, संघी भक्त, ज़र खरीद, ज़मीर फरोश, ४ आवारा भाड़े की टट्टूओं की एप्लीकेशन को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए और उनको बहकाया, पोस्ट का लालच दिया और ऐसा दिखाया गया जैसे समूची मुस्लिम महिलाये ट्रिपल तलाक़ के खिलाफ है. लंगूरो की टीम ने ४ ज़मीर फरोश मुस्लिम महिलाओ को बुर्का पहना के टी.वि. के सामने उनका डेबिट लिया. अब बुर्का पेहेन लेना इस बात की दलील तो नहीं है के वो औरत इस्लाम की पेकर है और शरीयत की मुहाफ़िज़ और ऐसी ही औरते बुर्के और इस्लाम की अज़मत को कम करती है.  जो औरत इस्लामिक शरीयत को ही तब्दील कर के हिन्दू कानून नाफ़िज़ करवाना चाहती है वो बुर्का तो किया अगर सर से ले कर पाँव तक ढकी रहे लेकिन बरहना दिखेगी.

इन ओरतो को लंगूरो की टीम ने संघी आतंकिओ ने और मोदी के गुलामो ने बलगलाया था इस बात का भी सबूत इस पत्रकार के पास आ चूका है. लंगूरो के मीडिया ने जान बूझ कर इन ओरतो को इकठ्ठा किया और इन ओरतो से पहले ही सब कुछ फिक्स कर लिया के हम किया सवाल पूछेंगे और तुम उसके ऊपर क्या जवाब देना.  फिर आज तक की एक लँगूरनी अंजना ॐ कश्यप डीबेट करती है और मुजाहिदे इस्लाम असदुद्दीन साहब से एक औरत सवाल करती है हमें हैदराबाद क्या हलाला करवाने की नियत से बुला रहे हो. उसके इस सवाल पे लागूरनी अंजना नंगी और और वैशियना हसी हसती है जिस तरह एक बाज़ारू औरत पराये मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए बरहना हसी हसती है. 


इस लँगूरनी अंजना का भी कच्चा चिट्ठा इस पत्रकार के पास है. ये पत्रकार कम और बीजेपी की दलाल ज़्यादा है और अपने पति का नाम छोड़ के मोदी का नाम अपने नाम के पीछे नेशनल न्यूज़ में लगाती है. अब जो महिला समूचे भारत के सामने एक पराये मर्द का नाम अपने नाम के साथ जोड़ रही है उसकी इज़्ज़त का अंदाज़ा लगाया जा सकता है के वो अपने पति को छोड़ के मोदी के सामने अपने तन मन धन का समर्पण करने को तत्पर है.  

लंगूर और लँगूरनिया चंद बद ईमान ओरतो को टी.वि. के सामने ला कर ऐसा दिखा रहे थे जैसे समूची मुस्लिम महिलाये इस्लामिक शरीयत से आजिज़ है और समूची मुस्लिम महिलाये इस्लामिक कानून से परेशान हो कर हिन्दू कानून के नाफ़िज़ करने की हिमायत करती है. जबकि कम से कम ५० से ६० हज़ार मुस्लिम महिलाये काफिरो के शरीयत में मदाखलत के खिलाफ मोर्चे में शामिल हुई जिला अध्यक्ष, पुलिस प्रमुख के समक्ष अपनी पेटिशन दायर की और देश के राष्ट्रपति के खिलाफ आवाज़ बुलंद की जो अपने सवेधानिक पद की गरिमा को भूल के मुस्लिम महिलाओ के लिए ट्रिपल तलाक़ पे आतंकवाद की भाषा बोल रहा था फिर भी मीडिया ने उसको खबरों का हैडिंग नहीं बनाया और ४ आवारा ओरतो का ट्रिपल तलाक़ को ख़त्म करने का एहतेजाज को समूची मीडिया ने दिखाया.

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