Friday, 16 February 2018

इस्लाम में अंधश्रद्धा के लिए कोई जगह नहीं है



प्यारे इस्लामिक भाईओ, बहनो और दोस्तों...

लेखक कोई इस्लामिक विद्वान नहीं है और ना ही वो बोहोत ज्ञानी है लेकिन जितनी भी उसको मालूमात है उसके आधार पे कुछ बाते आप सभी से साँझा करना चाहता है.

"कल मेरे व्हाट्सअप ग्रुप पे किसी ने मेसेज भेजा सऊदी अरब के इमाम ने खवाब में नबी सल्ला ला हो अलैहेये वस्सलम की एक बशारत की निस्बत से और उसके बाद उस मेसेज को ५ लोगो तक फॉरवर्ड करने की अपील की गई. जिसने उसको फॉरवर्ड किया उसका बोहोत अच्छा होगा और जिसने नहीं किया उसका बोहोत बूरा होगा."

आप सभी इस्लामिक भाईओ और बहनो से एक गुज़ारिश है के इस्लाम किसी भी तरह के अंधविश्वास या अंधश्रद्धा पे यकीन नहीं रखता है. और इस्लाम में अंधश्रद्धा को सख्ती से मना किया गया है.  अगर ख़ुशी मिलने का पैमाना किसी मेसेज को ५ लोगो तक भेजना और गम का मिलना उस मेसेज को न भेजना है तो अल्लाह अज़्ज़वजल का क्या वजूद है. इस्तग्फ़िरउल्लाह....

याद रखो ख़ुशी और गम अल्लाह इंसान के अमाल देख कर देता है. रहा सवाल के नबी सल्लालाओ अलैहेवस्सलम का ख्वाब में दीदार करना तो ऐसे अज़मत वाले ख्वाब आम लोगो को बताना भी नहीं चाहिए कोई बोहोत ही बुज़ुर्ग या ख़ास बन्दे को बताया तो कोई हर्ज नहीं.

आज हम लोग अपनी गाड़िओ में छोटे जूते लटका के रखते है या घर के दरवाज़े पे घोड़े की नाल लगा देते है. और सोचते है हम हर आफत और बला से मेहफ़ूज़ रहेंगे. ऐसी बाते पक्की गुमराही है और गेरो का चलन ये चीज़े तुम्हे अल्लाह के अज़ाब से हरगिज़ नहीं बचाएगी. 

आज पाखंडी, फरेबी और इस्लाम के दुश्मनो ने अपने नामो के आगे सय्यद लगा लिया है. सिर्फ मुस्लिम समाज को गुमराह करने के लिए के हम सय्यद और सदाद में से है फिर अगर ये लोग ऐसा सोचते है के हम हर काम गलत करेंगे और इस्लाम को तबाह करने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे फिर भी हम अल्लाह के अज़ाब और केहर से बचे रहेंगे तो उनका ये सोचना गलत है.

अगर कुछ लोगो ने अपने नाम के आगे सय्यद लगाया और वो असल सदाद में से नहीं है तो वो सभी रूसवा होंगे. और अगर वो असली सय्यद और सदाद में से है और गलत कर रहे है और गुमराही में जी रहे है इस्लाम और मुसलमानो को नुकसान पहुंचाने के काम कर रहे है तो वो भी अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सकते. क्योके जब नूह अलैहिसालाम का बेटा जो गुमराही के अंधेरो में भटक गया था अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सका तो हर वो इंसान नहीं बच सकेगा जो इस्लाम और मुसलमानो को नुकसान पहुंचाने का जरिया बनता है.

फिर नूह अलैहिस्लाम ने अल्लाह से इल्तेजा की या अल्लाह मेरा बेटा भी गारकाब हो रहा है तो अल्लाह ने फ़रमाया अब वो तेरा बेटा रहा ही किधर जिसने अल्लाह का और तेरा फरमान नहीं माना वो तेरा है है नहीं. और जिस तरह से अस्हाबे कहफ़ के कुछ नेक और ईमानदार लोगो के साथ इक नाजीस्थ जानवर कुत्ता बैठा और उनकी हिफाज़त फ़रमाई और उनकी बाते सुनी तो उस कुत्ते के ऊपर भी अल्लाह ने रेहम फ़रमाया.

तो ये जान लो अगर तुम सय्यद और सदाद हो लेकिन तुम्हारे आमाल गलत है और तुम लोग गलत लोगो की सोहबत इख्तयार करते हो बोली बोलते हो उनका रेहन सेहन इख्तियार करते हो इस्लाम और मुसलमानो को नुकसान पहुचाने का जरिया बनते हो तो तुम्हारे ऊपर भी अल्लाह का अज़ाब आएगा. फिर तुम सय्यद हो या सदाद.




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