पहला भाग
लेखक का लेख दो हिस्सों पे
मुश्तमिल है. पहला हिस्सा है हिन्दू स्टेट की बहिन लेखिका तस्लीमा नसरीन के १३ फरवरी
को किये हुए ट्वीट पे जिसमे उसने हस्तमैथुन को सही ठहराया था. और दूसरा हिस्सा है एक
बेरूपये मौलाना का जो सही में संघी आतंकवाद का हामी और गुलाम है.
हाल ही में राजधानी दिल्ली
में डीटीसी की चलती बस में एक कामुक मानसिकता वाले इंसान ने एक महिला के सामने हस्तमैथुन
करना शुरू कर दिया. फिर उसकी शिकायत पुलिस में की गई और उस नामुराद को गिरफ्तार किया
गया. लेकिन उसके सपोर्ट में हिन्दू स्टेट की
बहिन जिसको हर हिन्दू स्टेट का नागरिक चाहता है और सपोर्ट करता है आ गई और कहती है
हस्तमैथुन सही है. कम से कम में हस्तमैथुन की सिर्फ किर्या ही देख सकती हूँ और रेप
से बची रह सकती हूँ और हस्थमैथुन करना कोई क्राइम नहीं है. तस्लीमा के वक्तव पे इस
पत्रकार ने उनको ट्वीट किया था.
Replying to @taslimanasreen
Grt pepl of Hindu State look at your beloved sister to whom U always
supported, what she said, grabbing panis in front of unknown lady masturbate in
front of unknown lady is not crime. What an ideology Masturbation in bathroom
or bedroom is not crime it z crime in frnt of lady.
Replying to @taslimanasreen
U bloody
fool now where is your 'Lajja' you are criticizing to entire male members even
those who don't have bad feeling against women come under the category of bad
as per your tweet.
हिन्दू स्टेट की जनता भी अपनी
बेहेन की बोहोत ही आज्ञाकारी निकली तस्लीमा ने दो दिन पहले किये हुए ट्वीट को आधार
बना के फिर एक कामुक ने दो महिलाओ के सामने हस्थमैथुन किया. अब इस बात से ये भी साबित हो गया के किस हद तक हिन्दू
स्टेट की जनता एक पाखंडी मानसिकता को सपोर्ट करती है सिर्फ इसलिए क्योकि उसका लेखन इस्लाम
और मुस्लिम समाज के खिलाफ झूट और फरेब फैलता है.
पंचकूला में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां मंगलवार
शाम ओल्ड पंचकूला में नशे की हालत में एक युवक को सरेराह दो महिला पुलिसकर्मियों के
सामने मास्टरबेट करने के लिए गिरफ्तार किया गया।
मंगलवार शाम लगभग ६:३० बजे पंचकूला सेक्टर ५ पुलिस स्टेशन में तैनात महिला हेड
कॉन्स्टेबल अपनी एक साथी सब इंस्पेक्टर के साथ एक केस के सिलसिले में किसी से मिलने
जा रही थीं।ओल्ड पंचकूला ट्रैफिक लाइट प्वॉइंट
पर रेड लाइट होने के चलते उन्होंने अपनी स्कूटी रोकी। पीछे बैठी एसआई ने देखा की लाइट
के ग्रीन होने का इंतजार करने के दौरान सड़क के बाईं ओर खड़ा एक युवक उन्हें घूर रहा
है। फिर उसने अपने पैंट की जिप खोली और मास्टरबेट
करने लगा। हैरान महिला पुलिसकर्मियों ने पीसीआर जिप्सी को इसकी सूचना दी और पुलिस ने
आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
दूसरा भाग
दुसरे भाग
में लेखक उस पाखंडी साधू को बेनाकाब करेगा जो मुसलमानो के नाम पे संघी आतंकिओ से
ठगी में लिप्त था और इस्लाम के नाम पे धब्बा. लेखक इन जैसे पाखण्डिओ के बारे में अपने १ नवंबर के लेख एक और पाखंडी निकला
बहार...... में पहले ही
लिख चुका है.
अब मामला खुल
के सामने आ गया के किस तरह से पाखंडी नदवी को संघ ने खरीदा था मस्जिद और इस्लाम को
इज़ा पहुंचाने के लिए. फिर लंगूर मीडिया की टीम इस पाखंडी के बारे में कसीदे लिख रहा
था. लेकिन जैसा की इस पत्रकार ने कहा है ये
सब पाखंडी रूसवा होंगे जो झूट और फरेब फैला के अपना उल्लू सीधा करने की कोशिश करते
है.
ऑल इंडिया
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मेंबर रहे सलमान नदवी के खिलाफ श्री श्री
रविशंकर के करीबी अमरनाथ मिश्रा ने लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन जाकर पुलिस से नदवी
के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि राम मंदिर के नाम पर मस्जिद का दावा छोड़ने के एवज
में वो ५ हजार करोड़ की डील चाहते थे.
मिश्रा ने कहा था कि यह फॉर्मूला दरअसल उनका था जो उन्होंने ५ फरवरी को सलमान नदवी और दूसरे मुस्लिम नेताओं को दिया था, लेकिन उसी मुलाकात के दौरान सलमान नदवी ने इस डील के एवज में ५००० करोड़ रुपए, अयोध्या में २०० एकड़ जमीन और राज्यसभा की एक सीट मांगी थी. अमरनाथ मिश्रा के मुताबिक उनसे यह बात इसलिए की गई ताकि नदवी ये बात सुन्नी बोर्ड और मुस्लिम पक्षकारों से करें. ताकि समझौते का कोई फॉर्मूला निकल सके. ताकि इस पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में चर्चा हो सके. इस चर्चा का भरोसा सलमान नदवी ने अमरनाथ मिश्रा को भी दिया था.' मिश्रा का दावा है कि इस मामले पर बोर्ड में चर्चा करने के बजाए सलमान नदवी इस फॉर्मूले को लेकर सीधे श्रीश्री रविशंकर के पास चले गए और वहां से उन्होंने इस फॉर्मूले का ऐलान कर दिया.
तो ऐसे पाखंडी
जो अभी तक निकल गए वो सब बे नकाब होंगे. एक और पाखंडी है जो सबसे पहले निकला था और
अपने आपको मुग़ल वंशज कहता है. उसके मुताबिक बाबरी मस्जिद की ज़मीन उसकी जागीर है और
वो उसका मुतवल्ली बनेगा. फिर वो जिसे चाहे वो ज़मीन दे दे वो उसके इख्तियार में है.
असल में ये भी एक संघी पाखंडी है जो संघ का मोहरा है और इसको मुग़ल नाम या बाबर का वंशज
सिर्फ मुस्लिम सहानुभूति लेने के लिए दिया गया है. ताके मुस्लिम सहानुभूति इस पाखंडी
के पास आ जाये और ये मस्जिद का मुतवल्ली बन जाए फिर जब ये खुद हमको ज़मीन देगा तो किसी
भी मुस्लिम समाज को एतेराज़ नहीं होगा और हम कह सकेंगे खुद बाबर के वंशंज ने हमको ज़मीन
दी है. लेकिन संघी शायद ये भूल गए जिसको अल्लाह
इल्म देता है उसको वो तो क्या खुद शैतान भी गुमराह नहीं कर सकता और ये बाबर का न जाइज़
वंशज भी उसी तरह बे नकाब और रूसवा होगा जिस तरह ये पाखड़ी मौलाना हुआ है जिसको सपोर्ट
समूचे लंगूर मीडिया और हिन्दू स्टेट की जनता का था. कुछ तो उसको राम भक्त कह रहे थे
और कहते थे तुम्हारी जीत होगी क्योके तुम राम भक्त हो बाबर भक्त नहीं. अब अगर राम भक्त
५ करोड़ में अपना ज़मीर बेच देते हो तो १० करोड़ में राम के साथ सीता को बेचने में कमी
नहीं करेंगे. ऐसे बिकाऊ राम भक्तो से कम से कम ज़मीर वाले बाबर भक्त अच्छे.
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