लेखक का ये लेख उन तमाम छुपे हुए इंसानो को समर्पित है जो सच्चे प्यार
की एहमियत को जान चुके है और जो जामे आशिकी पी चुके है. और अब उनको किसी और से प्यार
हो ही नहीं सकता और न ही किसी दूसरी शराब का नशा ग़ालिब हो सकता है. क्योके साकी की
पिलाई हुई शाराब का नशा सुबह क़यामत तक रहेगा.
ऐसे लोगो के ऊपर अब न कोई और रंग चढ़ेगा और न ही कोई मौसम उनके ऊपर ग़ालिब होगा.
क्योके जो प्यार का रंग उनके ऊपर चढ़ गया वो हर रंग के ऊपर ग़ालिब रहेगा और हर मौसम में
उनके ऊपर प्यार का नशा ग़ालिब रहेगा. और हर रंग उनके प्यार के आगे फीका दिखेगा, और हर
मौसम उनके प्यार को कम करने में बेअसर साबित होगा.
जितना प्यार करते जायेगे उतनी क़ुरबत बढ़ती जायेगी और एक दिन ला मका पे
पहुंच जायेगे जिसकी हर इंसान को तमन्ना होती है. जहा पहुंचने को हर इंसान बे क़रार होता
है लेकिन सिर्फ वही उस मुकाम को पाता है जो इसके लायक होता है.
जहा
देखा तेरी वहदत जहा देखा तेरी रेहमत जहा देखा तेरी करामात जहा देखा तेरी…………….
लेखक की शायरी उसके इस ब्लॉग पे देखिए
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