हाल ही में
आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लेमीन के सरबराह और सालारे मिल्लत संसद में मुसलमानो
की नुमाइंदगी करने वाले अकेले संसद असदुद्दीन ओवेसी ने नई जंग का आगाज़ कर दिया है.
उन्होंने संसद से मुतालबा किया के जो कोई भी मुस्लिमो को पाकिस्तानी कह के संबोधित
करे उसको ३ साल के सख्त कारावास का बिल पास होना चाहिए. उनके इस मतालबे पे बोहोत से संघी और हिन्दू स्टेट
के कट्टरपंथी एक एक कर के बहार निकल के आना शुरू हो गए. और वही गन्दी, ओछी गलीज़ भाषा के साथ गाली गलोच करने लगे इनमे कुछ एक
बीजेपी और संघ के रसूख दार नेता भी शामिल थे. कुछ का कहना था ठीक है जो मुस्लिमो को
पाकिस्तानी कहे उसको ३ साल का कारावास लेकिन जो भी ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ कहे उसको फ़ौरन गोली मार दो.
पहली बात
तो में उन सभी संघीयो, भाजपाइओ और कट्टरपंथी हिन्दू स्टेट के नागरिको से कहना चाहता
हूँ के कोई भी मुसलमान पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे नहीं लगाता फिर भी तुम लोगो ने उनको
सच्चा भारतीय नहीं समझा. १९४७ के बाद जिन्होंने पाकिस्तान की मांग की थी वो सभी चले
गए लेकिन जिनको अपनी फलाह हिन्द में दिखी वो भारत में ही रुके रह गए. लेकिन ये क्या १९४७ से ले कर मार्च १९९३ तक मुसलमानो
को कभी भी सच्चा भारतीय नहीं समझा गया और हमेशा से उनको पाकिस्तानी नाम से खिताब किया
गया. जिसका ज़िक्र इस पत्रकार ने अपनी किताब में पूर्ण अनुसंधान के बाद किया है. और उनको सुरक्षा से जुड़े हुए मुद्दों पे हमेशा से
अलग किया जाता और उनकी देश भक्ति के ऊपर सदा ही शक किया जाता रहा. फिर मार्च १९९३ के
बाद उनके नाम के साथ एक नाम और जुड़ गया आतंकवादी. जबकि ०६ दिसंबर १९९२ को जिन्होंने
बाबरी मस्जिद शहीद की थी जिसकी वजह से समूचे भारत में दंगल हुआ और अनगिनत मुस्लिम जनता
को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा उनको सराहा गया और उनको लक़ब दिया गया शूरवीर. फिर ९/११ के बाद मुस्लिम समाज के साथ एक और नाम
जुड़ गया गद्दार.
१९९३ के बाद
समूची कट्टरपंथी पार्टिया चाहे वो शिव सेना हो, भाजपा हो या संघ से जुड़ा हुआ और कोई
भी संघटन उनको हर मुस्लिम में पाकिस्तानी और बंगलादेशी नज़र आने लगा. फिर कट्टरपंथी सोच और आगे की तरफ बढ़ी और राजनैतिक
पार्टिओ ने मुहिम चालू की के जिस किसी भी पाकिस्तानी ने या बंगलादेशी ने अवैध रूप से पासपोर्ट और राशनकार्ड बनवाया है उसका राशन
कार्ड और पासपोर्ट रद्द करके उनको पाकिस्तान भेजेंगे या जेल. फिर कट्टरपंथी सोच ने शुरू किया झूटी शिकायतो और
ऑफ.आई.आर. का सिलसिला इससे मुस्लिम समाज को पाकिस्तानी बोल के प्रताड़ित किया जा सके. जिसमे कई मुस्लिम परिवारों की गिरफ्तारियां भी की
गई और उनकी बच्चीओ के साथ पुलिस दुवारा ज़ोर ज़बरदस्ती की गई. ऐसे किसी भी केस में पुलिस
आमतौर पे रात के समय घर पे धावा बोलती थी जिसमे पुलिस के साथ मौजूद होते थे कट्टरपंथी
हिन्दू जो मामले को और पेचीदा करते थे. मीडिया
का रोल आज के दौर की तरह ही एक तरफ खबर देने वाला होता था.
“एक पाकिस्तानी अपने परिवार के साथ बरसो से भारत की ज़मीन पे झूठे दस्तावेज़ बना
के रह रहा था उसको पुलिस ने गिरफ्तार किया है ”
कांग्रेस
की सरकार ने तो हद ही कर दी थी हर दुसरे रोज़ एक आई.अस.आई. का एजेंट या पाकिस्तानी गिरफ्तार
किया जाता था. शिव सेना के विपक्षी दल के नेता रामदास कदम ने एक थुत्कार रैली का आयोजन
कर के स्लोगन दिया "इन पाकिस्तानी दलालो को
जूते मारो सालो को"
फिर
आज हिन्दू स्टेट की ऐसी जनता मुस्लिमो को गोली मारने की बात करती है जो खुद पाक को
भारतीय सेना की खुफिया जानकारी मोहिय्या करते है.
और अपने साइबर ऑफिस से समूचा स्कैंडल चलाते थे तो ऐसी सूरत में पहली गोली उन
जैसे गद्दारो को मारनी चाहिए. और दूसरी गोली उस गद्दार को मारनी चाहिए जो पाकिस्तान
की बरियानी बगैर बुलाये खा के चला आया. फिर मुसलमानो को गोली मारने की वकालत करना चाहिए. दूसरी बात सिर्फ पाकिस्तान ज़िंदाबाद ये स्लोगन बोलने
पे कोई भी कानून की धारा नहीं है या अपराध नहीं बनता है. सविधान
में साफ़ तौर पे लिखा है देश की जनता और सरकार पडोसी देशो से मैत्री पूर्ण रिश्ते बना के चले. पडोसी देशो की वियख्या भी की गई है
जिसमे शामिल है पाकिस्तान, नेपाल, भूटान और श्रीलंका सविधान लिखे जाने तक बंगलादेश
नहीं बना था इसलिए उसका ज़िक्र नहीं है.
इतना
सब होने के बावजूद भी मोदी जी मुस्लिम समाज के ३ बड़े मसले हल कर देते है तो ये तो उनके पहले किये हुए समूचे गुनाह ऊपरवाला माफ़ कर देगा.
… अगर
…
बाबरी मस्जिद मसला: मोदी जी
अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए बाबरी मस्जिद की वास्तविक ज़मीन मुस्लिम समाज को सौंप
देते है और वहां पे भव्य मस्जिद निर्माण करने की इजाज़त मिलती है.
कश्मीर मुद्दा: कश्मीरी
जनता की भावना को ध्यान में रखते हुए हल कर देते है. कश्मीर या तो पाकिस्तान को सौंप
दिया जाता है या १९५० की वास्तविक स्थिति फिर बहाल कर दी जाती है. जहा कश्मीर का अपना
अलग प्रधान मंत्री होता था, अलग राष्ट्रपति और उच्चतम न्यायलय. और भारत के संसद दुवारा
पास किया हुआ कोई भी नियम तथा उच्चतम न्यायलय का कोई भी आदेश कश्मीर पे लागू नहीं होता
था. सेना को वापिस कश्मीर से वापिस बुला लिया
जाता है.
फलस्तीन मुद्दा: फलस्तीन
को फिर से आज़ाद करवा देते है और १९३० के बाद की यथावत स्तिथि देने में कामयाब हो जाते
है. मोदी जी चाहे तो अपनी शक्तियों में से एक का इस्तेमाल कर इजराइल के ६५ लाख यहूदि
तथा समूचे विश्व के १,४४,१०,००० यहूदिओं को गोवा में बसाने का निर्णय दे सकते है. गोवा
१९६० तक पुर्तगाल के अधीन था तो उसको एक अलग देश बनाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं
होना चाहिए.
लेखक का अटूट विशवास है
सिर्फ पकिस्तान ज़िंदाबाद कह देने भर से कोई अपराधी हो जाता है और न ही ये स्लोगन अपराधी श्रेणी में आता है
और न ही कहने वाला गद्दार हो जाता है, लेकिन पाकिस्तान के साथ मिल के विघटन कारी गतिविधिओ में लिप्त पाया जाना तथा सेना की
खुफिया जानकारी पाकिस्तान के साथ सांझा करना तथा भारत को विघटन करने का षड्यंत्र रचना
ये अपराध है और देश के साथ गद्दारी. और ऐसे गद्दारो को गोली मारने की ये पत्रकार वकालत
करता है.
See the English version of this
news feed.
Why scourge on “Pakistan Zindabad”
???
No comments:
Post a Comment