जयपुर/कोलकाता
हालांकि मोदी ने ४ साल पहले स्वच्छ भारत की शूरूआत की
थी लेकिन ४ सालो के बाद बीजेपी, हिन्दू आतंकवादी भारत को स्वच्छ करने और मोदी के मिशन
को आगे बढ़ाने के बजाये दंगे, फसाद, गौ हत्या, लव जिहाद, जैसे मुद्दों पे ही अटके रहे
और विपक्ष ख़ास कर के कांग्रेस ने स्वछता अभियान में बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया और उसकी झलक
अब देखने को भी मिल रही है. गुरदसपुर से ले कर, केरला, राजिस्थान वेस्ट बंगाल इन सभी
बी पोल में कांग्रेस को जीत मिली है अगर केरला की एक सीट को छोड़ दिया जाए जिसमे मुस्लिम
लीग जीती थी.
राजस्थान
में कांग्रेस की जीत
हाल ही में २९ जनवरी को हुए उप चुनाव में राजिस्थान की २ संसदीय और १ विधान सभा की सीटों पे वोट डाले गए थे. तथा वेस्ट बंगाल की एक लोक सभा की सीट के लिए और एक विधान सभा की सीट के लिए वोटिंग हुई थी. जिनके नतीजे आज गुरूवर को आ गए। सभी सीटों पर बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी है। जहां राजस्थान की दो लोकसभा सीटों अजमेर और अलवर, जबकि मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की। वहीं पश्चिम बंगाल की उलुबेरिया लोकसभा सीट और नुआपाड़ा विधानसभा सीट तृणमूल की झोली में गईं।
इस तरह से सत्ताधारी पक्ष की सामूहिक हार से उत्तर प्रदेश
और गुजरात की जीत पे सवालिया निशान लगना अब लाज़मी हो गए है. क्योके आम चुनाव बीजेपी
के लिए प्रतिष्ठिा का प्रश्न बन जाता है और वो इ.वि ऍम. के ज़रिये या वोटर्स को लुभा
के चुनाव जीतती आ रहे है लेकिन उप चुनाव में जनता इतना ध्यान नहीं देती तो बीजेपी भी
दुर्लक्ष करती है और नतीजा हाज़िर है.
फिर बीजेपी ने उत्तर प्रदेश और गुजरात दोनों प्रदेशो को
प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पे लिए उस हिसाब से बीजेपी को चुनाव जीतना बेसिक मुद्दा था
अब कैसे जीतना है वो पहले ही ते था. प्रजातंत्र की हत्या कर के या मुख्य निर्वाचन आयोग
को खरीद कर जिसका ज़िक्र इस पत्रकार ने अपने लेखो में गुजरात चुनाव से पहले ही कर चूका है.
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