रविवार ११ फरवरी २०१८ को हिन्दू स्टेट
के आतंकी संघटन संघ का आतंकी चीफ अपने आतंकिओ को भारतीय सेना के ऊपर तरजीह देता है
और कहता है जो काम सेना ६ से ७ महीने करने में लगाती है उसके आतंकी ३ दिन में कर सकते
है क्योके उनके पास उस प्रकार की योग्यता और प्रशिक्षण होता है. अब सवाल ये उठता है
क्या सेना के जवान बगैर प्रशिक्षण के वॉर जोन में भेजे जाते है या सम्पूर्ण प्रशिक्षण
ले के भेजे जाते है. और अगर सेना के जवानो को सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है तो वो
कोनसा नया फॉर्मूला हिन्दू आतंकिओ के आका ने ईजाद किया है जिसकी बिना पे वो कह रहा
है के भारतीय सेना से ज़्यादा प्रशिक्षित और अनुशासित उसके आतंकी है. उस बयान को दिए हुए आज कम से कम ३ दिन हो गए लेकिन
भारतीय सेना की तरफ से ना ही कोई आधिकारिक बयान आया ना आतंकी मोहन भगवत के बयान की
बर्त्सना की गई.
फिर जिस तरह से मुस्लिम सेना के जवान वॉर जोन पे शहीद हो रहे है २०१७ में भी कश्मीर में शहीद होने वाले जवानो की संख्या ज़्यादा थी बजाये हिन्दू जवानो के. और हाल ही में जम्मू कश्मीर में वॉर जोन में ६ मुस्लिम जवानो ने जामे शहादत पिया और सिर्फ एक हिन्दू जवान मारा गया. उसके ऊपर सालार मिल्लत असदुद्दीन ओवेसी साहब का मुस्लिम समाज के लिए दर्द साफ़ झलक के आया और उनके आखो के आँसू जो अब मुस्लिम समाज की शहादत देख देख के सूख गए थे कभी हिन्दू आतंकवादीओ दुवारा कभी पुलिस दुवारा कभी
सेना की गोली से और कभी मुस्लिम सेना की जवानो की शहादत से जुबां के ज़रिये कड़वे सवालों के रूप में निकले. और उन्होंने हिन्दू स्टेट की जनता आतंकवादीओ और सरकारी नुमाइंदो से सवाल कर ही डाला. तुम जिनको पाकिस्तानी कहते हो उन्होंने ही देश की रक्षा के लिए अपने जान की क़ुर्बानी दी है.
सलारे मिल्लत असद साहब का मुस्लिम नौजवानो की शहादत पे
सवाल करना था के भारतीय सेना (जो के अब मुत्तसिब हो कर आतंकवादीओ की सेना हो गई है)
तिलमिला गई. और असद साहब के कल किये हुए सवाल पे एक ही दिन यानी आज सेना की तरफ से
आधिकारिक जवाब आ गया. सेना ने साफ कहा है कि बयान देने वाले सेना को नहीं जानते हैं,
शहीदों का कोई धर्म नहीं होता है.
उन्होंने साफ कहा कि हम सेना में किसी की शहादत को सांप्रदायिक
रंग नहीं देते हैं, सेना में सभी एक समान हैं.
सेना की नॉर्थन कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू ने बुधवार को कहा
कि इस वक्त दुश्मन पूरी तरह से परेशान है, क्योंकि वह बॉर्डर पर कुछ नहीं कर पा रहा
है. इसलिए इस तरह अंदर घुसकर हमले कर रहा है.
अब सवाल यहाँ पे ये बड़ा उठ रहा है क्या भारतीय सेना भी हिन्दू स्टेट के आतंकवादीओ को सपोर्ट कर रही है. अगर नहीं तो भागवत ने तो सेना की कार्य प्रणाली पे ही सवाल लगा दिए थे फिर भी सेना की तरफ से कोई आधिकारिक टिप्पड़ी नहीं आई. और असद साहब ने सिर्फ जवानो की शहादत पे ऊँगली उठाई तो एक ही दिन में सेना की नॉर्थन कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू की तरफ से असद साहब के बयान का खंडन किया जाता है.
आइये असद साहब हिन्दू आतंकवादी और सेना के सवाल जवाब का ऑपरेशन करते है. पहले आतंकवादी ने सेना के बारे में कुछ अपशब्द बोले फिर भी सेना की तरफ से उसका खंडन नहीं किया गया. फिर जम्मू आर्मी केम्प में और २०१७ में जान देने वाले ज़्यादातर आर्मी जवान मुस्लिम थे जिसके ऊपर असद साहब ने संशय व्यक्त किया. अब यहाँ दो बाते निकल के आ रही है या तो सेना भी साम्प्रदाइक हो गई है और हिन्दू आतंकवादीओ से जा मिली है या फिर जैसा के हिन्दू आतंकी ने सेना के जवानो की कुशलता पे सवाल उठाया था वो सही है. जब भी जान देने का मौका आता होगा हिन्दू जवान गीदड़ की तरह डर के मारे अपने बंकर में छुप जाते होंगे और फिर कमान सँभालते होंगे मुस्लिम जवान.
तभी तो मुस्लिम जवानो की ज़्यादा शहादत हो रही है. या सेना मुत्तसिब हो कर आर्डर सिर्फ मुस्लिम जवानो को ही देती होगी क्योके वो लड़ाई जीहदिओ से है तो सेना का सोचना होगा के काहे को हमारे हिन्दू जवान जीहदिओ की गोली का शिकार बने.
इस बात की सम्पूर्ण जाँच होनी चाहिए. २०१७ में भी कुछ कम से कम २५ से ३० मुस्लिम जवान शहीद हुए थे. उसके ऊपर इस पत्रकार ने अपने एक लेख में कहा भी है के ये भारतीय सेना खुद मुस्लिम पुलिस वालो को और आर्मी के जवानो को मार के जीहदिओ के ऊपर इलज़ाम लगा रही है. अब इस प्रकरण की सम्पूर्ण जाँच होनी चाहिए. और अगर कुछ भी असामान्य पाया जाता है और भारतीय सेना साम्प्रदाइक मानसिकता के साथ हिन्दू जवानो को छोड़ के मुस्लिम जवानो को जान बूझकर वॉर जोन में भेज रहि है तो सेना में मुस्लिम जवानो को और कश्मीर पुलिस के जवानो को अब वॉर जोन में जाने से मना कर देना चाहिए.
जिस तरह से एक लेख में इस पत्रकार ने कश्मीर देश की प्रधान मंत्री मेहबूबा मुफ़्ती से आग्रह किया है के जिस तरह से भारतीय सेना सांप्रदायिक मानसिकता के साथ पत्थरबाज़ी के झूठे इलज़ाम में मुस्लिम नौजवानो को मौत के घाट उतार रही है तो अब पुलिस को सेना के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहिए जैसा के राजिस्थान, हरयाणा, उत्तरप्रदेश के मुख्य मंत्री करते है मिली भगत आतंकवादीओ से रहती है और दिखावा देशभक्ति का करते है.
See the English version of this Article.
Politics done on both the statements.
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/02/15/politics-done-on-both-the-statements/ …
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