Sunday, 25 February 2018

हिन्दू स्टेट में बेगुनाह मुस्लिम की हत्या पे खामोशी क्यों?



लेखक का ५ फरवरी २०१८ को लिखा नाटकीय लेख एक था राजा……. भाग - १ जो वर्तमान के राजा, मंत्रीओ संत्रीओ, अंध भक्तो और लंगूर लँगूरनियो पे सटीक अवलोकन है. इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है जिसके सदैव नाजाइज़ ट्वीट्स और बयानों से वो अपनी माता जी के चरित्र और अपनी पैदावार को संशय के घेरे में खड़ा कर रहा है. क्योके एक जाइज़ मनुष्य कभी भी नाजाइज़ बात नहीं करेगा. नाजाइज़ बयान देने से अच्छा वो खामोश रहना मुनासिब समझेगा. जी हां आपने सही पहचाना लेखक के लेख का अगला नाजाइज़ अंध भक्त वीरेंद्र सेहवाग ही है. इस नाजाइज़ पात्र को बीजेपी, हिन्दू आतंकवादी, लंगूर और लँगूरनिओ, मंत्री संत्रीओ के बाद लेखक समाज नंगा करना चाहता है.


हिन्दू स्टेट के आतंकिओ दूआरा कब्ज़ा किये हुए भाग राजस्थान की राजधानी जयपुर में २२ फरवरी २०१८ को एक दिल दहला देने वाले मामले में सिर्फ शक के आधार पर एक बेगुनाह मुस्लिम युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी जाती है.  मृतक युवक यूपी के कानपुर शहर का निवासी फैजल था.  इस घटना का वीडियो वायरल होने पर पुलिस हरकत में आई और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया. 

घटना जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया में रोड नंबर १७ की है जहां इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया, जिस तरह से उस बेगुनाह की जान ली गई, उसे देखकर किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े हो जाएंगे.   वो मरने से पहले लगातार खुद के बेगुनाह होने की दुहाई देता रहा. लगातार लोगों से कहता रहा कि उसने कुछ नहीं किया, लेकिन बेकाबू भीड़ की शक्ल में वहां खड़े लोगों के सिर पर शैतान सवार था. उन्होंने उसकी एक नहीं सुनी वे लगातार उसे पीटते रहे.  फिर भी जब मन नहीं भरा तो फैजल को एक खंबे से बांधकर उस पर खूब लात घूसे बरसाए. फैजल के मुंह से खून निकलने लगा, लेकिन उन लोगों को उस पर तरस नहीं आया, और तब तक उसको पीटते रहे जब तक उसने रिएक्ट करना बंद नहीं कर दिया. अधमरी हालत में उसे एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया. फैसल गरीब मज़दूर था जो यूं.पी. से कई किलो मीटर दूर मज़दूरी कर के अपने परिवार का पेट पालता था और मुश्किल से गुजर बसर करके अपनी जीविका चलाता था. फैजल ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसे एक ऐसे गुनाह की सजा मिलेगी, जो उसने किया ही नहीं. 

फिर ऐसा ही एक मामला केरला में सामने आया जहां २३ फरवरी २०१८ को भीड़ ने उसी अंदाज़ में जिस तरह हिन्दू स्टेट के आतंकवादीओ ने राजिस्थान में एक मुस्लिम बेगुनाह को मौत के घाट उतार दिया था एक भील समाज के मधु कडुकुमन्ना नामक युवक को मौत के घाट उतार दिया.  अगर  दोनों मामलो की समानताये देखे तो ९०% एक जैसे लगेंगे. जैसा के फैसल ने अस्पताल में दम तोड़ा उसी तरह मधु ने अस्पताल में दम तोड़ा.  जिस तरह हिन्दू स्टेट के आतंकी जब मुस्लिम युवक के ऊपर ज़ुल्म कर रहे थी भीड़ विडिओ बनाने में मसरूफ थी और किसी ने भी आतंकिओ को रोकने या मकतूल को बचाने की पहल नहीं की उसी तरह मधु को जब भीड़ पीट रही थी तो किसी ने उसको बचाने की पहल नहीं की और उसका विडिओ बनाते रहे.  फिर जिस तरह से फैसल की मौत की खबर सोशल मीडिया पे वायरल होने के बाद लंगूर मीडिया के नज़रो में आई ठीक उसी तरह मधु की मौत की खबर लंगूरो के पास सोशल मीडिया पे वायरल होने के बाद आई.

पहली बात राजिस्थान में जो कुछ हुआ वो धर्म और ज़ात के आधार पे एक बेगुनाह की हत्या का मामला था क्योके वीडियो में फैसल साफ़ बोलता दिख रहा है मुझे काहे को मार रहे हो मेने कुछ नहीं किया. और गिरफ्तारी भी निशांत मोदी और महेंद्र के रूप में हुई जो हिन्दू युवक है.  लेकिन केरल में जो मधु नामक युवक की मौत हुई है वो चोरी के मामले में हुई है. और गिरफ्तारी भी कुल १० लोगो की हुई है जिसमे शामिल है हिन्दू, मुस्लिम और क्रिस्टी.  फिर भी फैसल का मामला दबा दिया जाता है और मधु का मामला संघी और बीजेपी राजनीतिक लाभ लेने के लिए लंगूर मीडिया से ज़्यादा हवा दिलवाते है.  उसपे नाजाइज़ संतान सेहवाग जैसे हिन्दू स्टेट के आतंकिओ से सहानुभूति रखने वाले लोग मधु की मौत को साम्प्रदाइक रंग देने की कोशिश कर रहे है. और उसका ट्वीट एक हत्या को साम्प्रदाइक रंग देने की कोशिश कर रहा है ताके केरला को बदनाम किया जा सके जिसका हिन्दू स्टेट के आतंकवादीओ को सीधा राजनैतिक लाभ मिल सके. वही हिन्दू स्टेट के राजिस्थान में धर्म के नाम पे की हुई हत्या के मामले को दबा दिया जाता है ताके हिन्दू स्टेट के आतंकिओ की बदनामी न हो.

कुछ बाते में इन नाजाइज़ औलादो से ज़रूर पूछूँगा. अगर सेहवाग का ट्वीट इंसानियत के नाते है तो उसने ऐसा ही ट्वीट बेगुनाह फैसल की मौत पे काहे को नहीं किया.  दूसरी बात जब मधु की मौत के पीछे सभी वर्ग शामिल है तो सेहवाग ने गैरज़िम्मेदारी भरा ट्वीट सिर्फ मुस्लिम समाज को एक हिन्दू की मौत का ज़िम्मेदार बता के काहे को किया. तीसरी बात मधु हिन्दू किधर से हो गया वो तो भील था, और भील अपने आप को हिन्दू नहीं मानते है. फिर क्या सेहवाग और बीजेपी की हिन्दू हमदर्दी सिर्फ मधु तक ही सीमित है या ये हमदर्दी नक्सलवादीओ से भी है. क्योके सभी नक्सलवादी भील समाज से होते है और उनकी लड़ाई ही सरकार के भेदभावपूर्ण नीतिओ के खिलाफ है. फिर क्या सेहवाग, बीजेपी जो मधु को राजनीतिक मुद्दा बना रहे है वो सभी छत्तीसगढ़ में जनवरी २०१७ में जो ५७ भील महिलाओ की पुलिस ने सामूहिक अस्मतदरी की थी उसको काहे को मुद्दा नहीं बनाया. इतना ही नहीं पुलिस वालो ने भील महिलाओ के स्तन निचोड़ के कौमार्य परीक्षण के बाद उनका रेप किया.

जो हिन्दू स्टेट के आतंकी और उनसे सहानुभूति रखने वाले सेहवाग जैसे नाजाइज़ संतान सिर्फ अपने राजनीतिक कद को बड़ा करने के लिए हर उस मुद्दे को साम्प्रदाइक रंग देने की कवायत में रहते है जो असल में साम्प्रदाइक है ही नहीं. ऐसे लोग पाखंडी है धूर्त है जो सच्ची बात को दबा के झूट और फरेब को हवा देते है.

फिर सेहवाग अपनी ज़िन्दगी के उस मुकाम पे पहुंच गया है जहा अब उसको क्रिकेट में तो लोग सराहेंगे नहीं तो बस ऊल जलूल बयान देते रहो शायद किसी सरकारी दफ्तर में चपरासी की राजनीतिक नौकरी मिल जाए. लेकिन ऐसे लोग भूल जाते है उनके नाजाइज़ कमेंट, बयान और ट्वीट्स उनके माताजी के ऊपर शक को बढ़ाते है.  ठीक उसी तरह जिस तरह ये महाशय पाक को पानी पी पी की कोसते रहते है जिस तरह आतंकवादीओ का आर्मी चीफ उर्फ़ गली का गुंडा उर्फ़ जनरल डायर कश्मीर पे पाकिस्तान पे ऊल जलूल बयान देता रहता है कभी राजनीतिक बयान देता है. 

लेखक ने राजा जी, मंत्री संत्री, अंध भक्तो, लंगूर और लँगूरनिओ के माता जी के चरित्र का आकलन किया है बस अब भारतीय आर्मी ही बची थी जिसका जल्द ही आकलन करेगा के वो किस की संतान है. 


See the English version of this Article.




Why absolute silence on the Murder of innocent Muslim in Hindu State.
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/02/25/why

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...