महाराष्ट्र के नए वज़ीरे आला को कुछ नसीहतें.
सबसे पहले में महाराष्ट्र के नए वज़ीरे आला को मुबारकबाद पेश करना चाहूंगा. दूसरी बात कहना चाहूंगा, आपका वज़ीरे आला की कुर्सी पे फ़ाइज़ होना कोई कमाल नहीं है बल्कि उस कुर्सी की इज़्ज़त और लाज रखना अब आपके ऊपर बड़ी ज़िम्मेदारी है, और आपका असल इम्तिहान तो अब शुरू होगा.
क्योंकि आप अपने आपको हिटलर की तरह मेहफ़ूज़ नहीं समझ सकते हैं. जिसको किसी जमात के हिमायत की ज़रुरत नहीं थी अकेले बीजेपी ही काफी थी. फिर भी आज उसकी, उसकी जमात की और मुल्क हिंदुस्तान की क्या हालत
है फिर आपकी हुकूमत तो दो तंज़ीमों की हिमायत पे बनी है.
शर पसंद अनासिर, हारे हुए फौजी एक चोट खाए हुए सांप की तरह कभी भी आपके ऊपर या आपकी सरकार के ऊपर हमलारेज़ होंगे.
आपको हर चंद चौकन्ना और होशियार रहना होगा. वज़ीरे आला हो कर आपको मुत्मइन हरगिज़ ना होना है.
फिर हिटलर के पास तो मुतलक़ अक्सरियत थी और २०१९ में मज़ीद रकूने पार्लिअमान बढ़ गए लेकिन आज हिन्दुस्तान की क्या हालत है. तबाह और बर्बाद कर दिया माशी हालात बे इन्तहा खराब हो गए कोई भी बेरुन मुल्क ताजिर अपनी तिजारत भारत में नहीं करना चाहता है.
अमेरिका, रूस, पाकिस्तान, चीन, इंग्लैंड तो आँख दिखाते ही थे बल्कि अब तो नेपाल जैसे छोटे मुल्क जो कभी २०१४ तक साथ थे वो भी आँखे दिखाने लगे हैं. उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ हिटलर की शिद्दत पंसदी, ग़ुरूर
और अपने आपको बोहोत ही ज़्यादा अक़लमंद क़वी, ताक़तवर तस्सव्वुर करना.
आपका कोई भी अमल ऐसा
नहीं होना चाहिए जिसकी वजह से आपकी हुकूमत के ऊपर आंच आये. क्योंकि महज़ वज़ीरे आला आपकी आखिर मंज़िल नहीं है. अभी आपको बोहोत इम्तेहान पास करना हैं बोहोत आगे
बढ़ना है. उस हिसाब से आपका कोई भी अमल ऐसा
ना हो जिससे आपकी हुकूमत सख़्त सवाल जवाब के शिकंजे में आये.
लंगूर और लँगूरनियाँ ऐसे हालात पैदा करने की कोशिश करेगें, जिससे कर्णाटक जैसे हालात पैदा हो सकें और महाराष्ट्र शिद्दत के ज़ेरे
साये आ जाए. आप सिर्फ
१. सच्ची, ईमानदार और दुरुस्त सहाफत को फ़रोग़ दीजिये.
२. इन्साफ से काम कीजिये
३. किसी भी फ़रीक़ की हक़तल्फ़ी हरगिज़ मत करिये
४. अक़लियतों (ख़ास मुस्लिम,
क्रिस्टी, सिख), दलितों की आवाज़ को पस्त मत होने दीजिये, उनकी आवाज़ को जो दबाता है, पस्त करता है उसके ख़िलाफ़ एक्शन लीजिये.
५. मस्तूरातों की तहफ़्फ़ुज़ के इक़दाम कीजिये. वैसे तो महाराष्ट्र में मस्तूरात मेहफ़ूज़ हैं.
लेकिन अब हालात वैसे नहीं होंगे. मुख़ालिफ़ ऐसे हालत पैदा करेंगे जिससे मस्तूरातों के तहफ़्फ़ुज़ के लिए आपके ऊपर उंगलियां उठेगी.
उससे पहले आप ऐसा काम कर दीजिये जिससे वो रास्ता बंद हो जाए.
तनक़ीद करने वालों को हमेशा अपना हमदर्द जानिये और जो चापलूसी करतें हैं बे फज़ूल में हुकूमत की बढ़ाई बघारते हैं उसने मोहताद रहिये.
ऐसा हर शख़्स जो कड़वा बोलता है लेकिन सच्चा बोलता है हक़ पे होता है वो ही आपका
हमदर्द है, लेकिन जो मीठा बोलता है, चापलूसी करता है और झूट, फरेब, जालसाज़ी, धोखेबाज़ी,
ना इंसाफ़ी, क़त्ल पे भी आपकी जी हूज़ूरी करता है वो आपका सबसे बड़ा दुश्मन है. और ऐसे ही चापलूस, फिल वक़्त मीठे दिखने वाले लोग
ही बीमारी को ला इलाज करतें हैं. और कड़वे समझे
जाने वाले हक़ गोई से बात करने वालों की बातें आगे चल के बीमारी का इलाज साबित होती
हैं. क्योंकि मलेरिया में कड़वी कुनीन दी जाती
है. दूसरी बात नीम के दरख्त का हर हिस्सा मुफीद
होता है. जड़ से ले कर तो पत्ते, तना और फल
भी जबकि वो कड़वा होता है. वहीं पकी हुई इमली
मीठी लगती है लेकिन बीमारी करती है गले को तकलीफ देती है.
दस्तूर के हिसाब से इंसाफ़पंसदी से, बग़ैर जानिबदार, बग़ैर किसी की हक़तल्फ़ी करते हुए काम कीजिये. दानिशमंदों, दूरन्देशों, तालीमसाज़ों, प्रोफेसरों के राये मशवरों पे फ़ौरी अमल नहीं तो; कम अज़ कम ग़ौर फ़िक्र ज़रूर कीजिये.
ऐसे मशवरे मुस्तक़बिल में कारगार साबित हो सकतें हैं, जिससे महाराष्ट्र के फलाही कामों में इज़ाफ़ा होगा. हिटलर की तरह हर दानिशमंदों, दूरन्देशों के मशवरों को किसी ख़ुद ऐलान कर्दा चाणक्य के बहकावे में आ कर हवा में मत उड़ाइये.
दर असल ऐसे अनासिर निहायत ही जाहिल, कम अक़्ल, दहशतगर्द ज़ेहनियत होतें हैं और उनका मक़सद ही मुल्क और सूबे की माशी हालात, अमन और भाईचारे के पैगाम को तबाह करना होता है.
ऐसे लोग इंसानों के क़त्ल (गांधी, करकरे) के बाद उस भाईचारगी की सोच और शहीद की अज़मत का भी क़त्ल करना चाहतें हैं.
हर नए सियासतदां को ये
सहाफी अपनी उसत और समझ के हिसाब से नसीहत करता है जिसमे उसका मक़सदे ऊला इन्साफ की पैरवी
करना होता है, और हक़तल्फ़ी के ख़िलाफ़ जंग. हिटलर, केजरीवाल और राहुल को भी नसीयत की थी.
केजरीवाल ने मानी लेकिन हिटलर हठधर्मी निकला. में माफ़ी नहीं मांगूगा, में रोज़े रखूंगा.
इस सहाफी ने उस मसख़रे,
नाटकबाज़ शख्स मोदी को भी मई २०१४ New Prime Minister of India and his
challenges. के एक
मज़मून में नसीहतें दी थी. लेकिन वो निकला हिटलर ज़ेहनियत का शिद्दत पसंद उसको
बे पनाह तकब्बुर और ग़ुरूर हो गया था की में तो अब सबसे बड़े रकबे वाले मुल्क का दुनिया
की अज़ीम जमुहरियत का वज़ीरे अज़ाम हूँ. अब में
काहे को किसी की बातों पे अमल करूँगा अपने हिसाब से मुल्क को चलाऊँगा. और वही पे ग़फ़लत
हो जाती है, जब इंसान अपने आपको आक़ा और हाकिम तस्सव्वुर करने लगता है, फिर वो जमुहरियत कहाँ रह गई वो तो राजशाही हो गई. हम किसी की नहीं सुनेगे हमारी सब सुनेगे.
और जो नहीं सुनेगा उसको क़त्ल करवा देंगे या उसकी बुलंद होती हुई आवाज़ को पस्त कर देंगे. उसके लिए कोई भी हिकमत क्यों न ऐख़्तियार करना पड़े.
मुल्क की आधी क़ुव्वत क्यों ना तबाह हो जाए, मुल्क माशी हालात से फ़क़ीरी की जानिब क्यों ना चला जाए लेकिन जिस आवाज़ ने हक़ गोई के परचम को बुलंद किया है पहले उसको तबाह करना है.
लेकिन ऐसे अनासिर और हिटलर ज़ेहनियत ये भूल जातें हैं की उनसे भी बड़ा एक इन्साफ करने वाला ऊपर बैठा है जो सब कुछ देख रहा है.
तुम्हारे दिलों के अंदर छुपे हुए मेल और गलीज़ ज़ेहनियत में उभरते हुए ख़यालात भी उसको रोशन हैं. और वो सही वक़्त पर बराबर हर उस हिकमत, हिमाक़त और नामाक़ूली का जवाब हर उस शिद्दत पसंद को दे देता है जो अपने आपको बोहोत अक़लमंद और ताक़तवर तस्सवुर करता है.
इंतेखाब जीतने के बाद वाराणसी में मोदी जैसे नाटकबाज़, मसख़रे की जब पहली ग़ैर सरकारी इजलास
से अवाम को खिताब करते हुए तक़रीर देखी, तब ये यक़ीन था की ये शख्स सिर्फ ज़ुबानी जमा
खर्च कर रहा है और इसकी सिर्फ लच्छे दार बातें हैं बरक्स इसके आने के बाद भारत में
फ़िर्क़ावाराना माहौल मज़ीद खराब होगा. लेकिन
जब वो ऐवान की सीढ़ियों पे सजदा रेज़ होता है और सदन के पटल पे अपने पहले सरकारी ख़िताब
पे अश्क़बार होता है. तब इस बात का एहसास हुआ की हो सकता है अब ये शख्स तब्दील हो गया होगा और अपने गुनाहों,
बदकारियों, हरामख़ोरी से अल एलानिया नहीं तो पोशीदा माफ़ी मांग ली होगी. लेकिन जल्द ही इस बात का इल्म हुआ की ये शख़्स इतना दिखावा कर रहा था, अब हिन्दुस्तान
की तक़दीर नाटक कंपनी और मसखरों के हाथों में चली गई है और अब उसका अल्लाह ही हाफ़िज़
है. और हुआ वहीं जिसकी उम्मीद थी मोदी को सिर्फ शिद्दत फ़ैलाने और अपने अना को क़ायम रखने के लिए लाया गया था.
फिर
२०१९ में जालसाज़ी, फरेब, धोखेबाज़ी से डाका
डाल के ये हिटलर इक़्तेदार में आ तो गया, लेकिन अपने साथ लाया भारत की मज़ीद तबाही, बर्बादी,
मौत, तेरा देश तो बर्बाद हूआ समझो. मौजूदा
हिटलर हुकूमत का निज़ाम तब्दील कर सकता है, लेकिन उपर वाले के इंसाफ उसके निज़ाम को केसे
तब्दील करेगा. दूसरी बात ये हिटलर तो इतना
बड़ा गद्दार ओर डाकू निकला के सुप्रीम कोर्ट के हाथ मे शमशीर ओर चाकू दे दिया. लेकिन
वह ये भूल गया जब मुल्क की अदलिया संसद ना इंसाफी करना शूरू कर देतें हैं तो समझ लो
उस मुल्क की बर्बादी शूरू हो गई है. अब देखना ये होगा की इस बर्बादी के निशान कितने
खतरनाक और तबाहकुन होतें हैं ओर वापिस भारत को इस बर्बादी ओर तबाही से पटरी पे लाने
मे कितनी सदियाँ लगतीं हैं.
दो
मुल्क एक जापान दूसरा मिस्र. एक ने दुनिया
के सुपर पावर अमेरिका के सामने हठधर्मी दिखाई दुसरे ने दोनों जहाँ के मालिके मुख्तार
के सामने दिखाई. इंसानी सुपर पावर अमेरिका ने हिरोशिमा ओर नागासाकी
मे एटम बॉम डाला था उसके बाद दो सदियों से ज़्यादा उसका असर जापान भोगता रहा ओर बच्चे
अपंग, मती मंद ओर गूंगे बेहरे पैदा होते रहे. दूसरा मिस्र जिसके हाकिम फिरोन ने मालिके
हक़ीक़ी के सामने हठधर्मी दिखाई थी उसका असर आज तक भोग रहा है.
जब
जापान पर इंसानी तबाही और बर्बादी के मंज़र और नक़्श दो सदिओं से ज़ाइद रहे और मिस्र पर
उस मालीके हक़ीक़ी के तबाही और बर्बादी के नक़श आज तक मौजूद हैं, तो भारत के हिटलर की
मालिक़े कायनात के सामने की हुई हठधर्मी के नक़्श भारत पर कब तक नुमाया रहेगें, शायद
सुबह क़यामत तक.
फिरोन
की ममी आज भी ५००० साल से ज़्यादा वक़्फ़ा गुज़रने के बाद भी इजिप्ट में मेहफ़ूज़ है. ओर
अवाम उसको देख कर इबरत हासिल करता है. क्योंके उसने भी उपर वाले के सामने हठधर्मी दिखाई
थी. मोदी ने भी दिखाई है. इजिप्ट में फिरोन
की लाश से अवाम इबरत हासिल कर रहा है और भारत में इंसानी लाशों तबाही, बर्बादी से
करेगा.
इसलिए वज़ीरे आला से गुज़ारिश है की हक़ और इन्साफ से बग़ैर जानिबदार किसी भी फ़रीक़
की हिमायत करे बिना काम करें.
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