Wednesday, 25 December 2019

ख़ाकी दहशतगर्द एक के बाद एक हुए नए खुलासे.

ख़ाकी दहशतगर्द बंदूकों और एक-४७ जैसे आला किस्म के जदीद तरीन जान लेवा हथियारों के साथ बे कुसूर मुसलमानों के घरों पर रातों की तारीकी में हमलावर हो रहें हैं.  ये दहशतगर्द उस तमाम साज सामान और इंसान को तबाह और बर्बाद कर दे रहें हैं जो उनके रास्तें में आ रहा है.  ये तारीख़ के सफों में दर्ज होगा की तानाशाह लूटेरे मोदी के फौजी किस तरह से हर खुश और खुर्रम मुस्लिम अवाम को तबाह और बर्बाद कर देते थे, और मुस्लिम अवाम का सोना चांदी ज़ेवर वग़ैरा लूट लेते थे.   इस तानाशाह और लूटेरे मोदी के ख़ौफ़, दहशत से बोहोत से कमज़ोर, गरीब और कम इल्म मुसलमान अपने घरों से हिजरत कर चुके हैं.  और उनके घरों पर अब ताला लगा हुआ है.  अभी तो एन.आर.सी. और "का" को पूरी तरह से हुकूमत ने अमल में लिया भी नहीं है और ये आलम है.  हुकूमत की जानिब से जारी करने की इत्तेला के बाद ३० करोड़ ना सिर्फ मुलसमान बल्कि हर अवाम इस से मुत्तासिर होगा.

में तमाम मुस्लिम सियासदाओं को गुज़ारिश करूंगा की वो अपनी जमात के वतन से मोहब्बत के पैग़ाम से ऊपर उठ कर अब सिर्फ ज़ुल्म और ना इंसाफ़ी की तरफ देखें.  और उस ज़ुल्म से फिल वक़्त सबसे ज़्यादा मुत्तासिर मुस्लिम अवाम हो रहा है.  अब वक़्त आ चूका है की अवाम ख़ास मुस्लिम इस मसले को बेन अक़वामी सतह पर ले जाया जाए और हम ख़्याल बेरुन मुल्कों से राब्ता क़ायम कर के मुसलमानों की तमाम अज़ीयत और तकलीफ से बेरुन मुल्कों को आगाह किया जाए.  और हिन्दुस्तान में मुसलमानों के लिए अलेहदा मुल्क की तहरीक को बेन अक़वामी बनाएं. 

अब तो मुसलमान भी हुकूमत की ज़ेरे सरपरस्ती में की जा रही इस हुकूमती दहशतगर्दी, ज़ुल्म और ना इंसाफ़ी से आजिज़ आ चूका हैं.  और वो भी अब एक नया बाब खोलना चाहतें हैं.  १९४७ में जो कुछ भी हुआ वो एक तारीख का एक सियाह सफा था. और जो मुसलमान पाकिस्तान के मुवाफ़िक़ थे वहां चले गए और जो हिंदुस्तान मुवाफ़िक़ थे यहाँ रह गए.  लेकिन ४७ के बाद कभी भी उन वतन परस्तों को इन शिद्दत पसंदों और संघी दहशतगर्दों और हुकूमत में संघी एजेंटों ने वतन परस्त और वतन का वफादार तस्लीम नहीं किया. 

इस मौज़ूं पर इस सहाफी ने एक किताब लिखी है उसमे वाज़े अलफ़ाज़ में इस बात को तहरीर किया है की पाकिस्तान का बनना मुस्लिम अवाम के लिए सख़्त ना ज़ेबा वाक़िया था.  उससे दो चीज़ें हुई एक मुस्लिम अक्सरियत तक़सीम हो गई दूसरा उनकी ताकात, क़ुव्वत, फनकार, मौसिक़ी, ज़हानत भी दो हिस्सों में तक़सीम हो गई.  लेकिन अब उस वक़्त और दौर के हालात को साफ़ तोर पर देख सकता हूँ.  क्या वुजूहात और हालात रहे होंगे मोहम्मद अली जिन्ना के सामने और जब वो अपने चश्मे नूर से हिन्दू दहशत के हाथों मासूम बच्चों को क़त्ल होते हुए, मस्तूरातों की अस्मतदरी होते हुए देखतें होंगे.  जब हर जानिब मुत्तसिब और ज़हरीली फ़िज़ा हो चुकी होगी. तब  जिसकी बुनयाद पर एक अलहदा मुल्क वजूद में आया पाकिस्तान.  जिन्ना एक वतन परस्त इंसान थे तक़सीम का दर्द उनको भी ऐसा ही हुआ था, जैसा की गांधी और नेहरू को हुआ था. लेकिन ये सभी आला सयसतदाँ मजबूर थे संघी दहशत के सामने और कुछ नहीं कर सके.   

ऐसा कहतें हैं तारीख़ वापिस दोहराती है.  मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान को बनाया तो सेकुलरिज्म के उसूलों पर था लेकिन बाद में वो एक इस्लामिक रियासत बन गया.   वहीँ भारत सेक्युलर मुल्क़ था जो अब शिद्दत पसंद और दहशतगर्द हो गया और हिन्दू राष्ट्र बन गया.  अब भारत की तक़सीम के बाद जो अब जो नया मुल्क बनेगा "नखलिस्तान" वो सेक्युलर होगा.
 
अब तो ना सिर्फ मुसलमान बल्कि सेक्युलर हिन्दू भी हुकूमत की जानिब से की जाने वाली, मुसलमानों की इस रोज़ रोज़ की  हक़तल्फ़ी से आजिज़ आ चुके हैं, और खुल के मज़्ज़म्मत कर रहें हैं.  अब तो उन हिन्दू अवाम को भी इस मुल्क में दहशत होने लगी है जो हक़ गोई करतें हैं और इन्साफ की बात करतें हैं.  हुकूमत के जानिब से फैलाई जाने वाली दहशत में अब सिर्फ शिद्दत पसंद हिन्दू, संघी दहशतगर्द और बीजेपी के नुमाइंदे ही रह गए हैं.  बाक़िया अवाम इन्साफ के परचम के नीचे हैं. 

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