मोदी हुकूमत कश्मीर में आज़ादी के मतवालों के ऊपर शिद्दत करती थी. उनकी आवाज़ को पस्त करती थी डंडे, लाठिया और गोलिओं
से उनकी आज़ादी आज़ादी आज़ादी, हम ले कर रहेंगे आज़ादी, दुश्मन से लेंगे आज़ादी, सेना से
लेंगे आज़ादी, आज़ादी आज़ादी आज़ादी दबा डालते थे.
भारतीय फौज जब्र और तशद्दुत करती थी गोलियां चलाती थी. ज़ालिम ज़ुल्म करता रहा मज़लूम सेहता रहा लेकिन तब
मोदी इंतेज़ामिया को ये होश नहीं था की वही आज़ादी की आवाज़ उसी अंदाज़ उसी तर्ज़ पर जब
तमाम मुल्क की फ़िज़ाओं में गूंजेगी तब हम कान बंद करने से भी क़ासिर रहेगें और हमको उन
शोर मचाती हुई आवाज़ों को सुनना ही पड़ेगा.
मोदी अपनी ग़फ़लत और अना में आ कर हर मसले को विक़ार का मसला बनाता गया और हर हूकूम
नाफ़िज़ करने पर तमाम अवाम पे लाज़िम कर दिया की जो मोदी हुकूमत ने बोल दिया वही सही. अब अगर किसी ने हुकुम अदूली की उसके ऊपर जब्र, ज़ुल्म और शिद्दत. वही सब कश्मीरी अवाम के साथ होता था. लेकिन मोदी को क्या मालूम था की एक ज़माना ऐसा भी
आएगा की तमाम भारत में उन मासूम कश्मीरी नौजवानो के बोले हुए अलफ़ाज़ हर कॉलेज का तालिबे
इल्म, हर नौजवान हर इंसान दोहराएगा. आज मुल्क
में जो फ़िज़ा खराब हुई है उसमे हर खित्ते, हर एहतेजाज हर मरहले पर कश्मीरी नौजवानों
के वही अलफ़ाज़ उसी तर्ज़े अमल पर उसी अंदाज़ में बोले जा रहे हैं. आज़ादी आज़ादी आज़ादी, हम ले कर रहेगें आज़ादी, दुश्मन
से लेंगे आज़ादी, ज़ालिम से लेंगे आज़ादी, हक़ तल्फ़ी से लेंगे आज़ादी, आज़ादी आज़ादी आज़ादी
ये हिजड़े की इस जंग में किसी शाकिस्त से कम नहीं है.
उस वक़्त ऐसे नारे और एहतजाज को देख कर हर आम हिन्दुस्तानी ख़्वाह हिन्दू, मुस्लिम, क्रिस्टी सब को बेहद गुस्सा आता था और उनके एहतेजाज पर सब को क़त्ल कर दो, गोली मार दो, आग लगा दो ऐसे तास्सुरात आते थे. उन मासूमों की आवाज़ अब मुल्क की आवाज़ बन गई है. कश्मीर में जितना जब्र और ज़ुल्म सेना को करना था कर चुकी. बच्चिओं की अस्मतदरी, मजमूई अस्मतदरी से ले कर इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफवर्जी क़त्ल मजमूई क़त्ल तमाम जुर्म से जब भारतीय हुक्काम का दिल भर गया तब उसने अपने ज़ुल्म और सितम की तलवार नए और ताज़ा खून की जानिब कर दिया. ये सहाफी हर मरहले पर हर बार ज़ुल्म के खिलाफ बोलता था और कश्मीरी अवाम के हक़ की बात करता था इसका यही कहना था जब अवाम आपके साथ नहीं रहना चाहता है और दस्तूर में उनके लिए अलहदा ख़ुसूसी फ़राहम की गई है तो उनको उनका हक़ दे दो. उस वक़्त भारतीय अवाम को इस सहाफी की बातें खूब ना गवार गुज़रती थी. तमाम अवाम इसको गद्दार, बागी और ना जाने क्या क्या बोलते थे. और खूब गफलत में थे की हमारे पास तो मोदी जी हैं हमको कुछ नहीं हो सकता. हम तो दुनिया के सुपर पावर हैं, हमारे पास दुनिया की अज़ीम फौज है.
कुछ का तास्सुर था हमें किसी से क्या जब हमारे ऊपर कोई आफत नहीं आई तो हम क्यों फ़िक्र करें. अब
आफत आपके दरवाज़े पर दस्तक दे चुकी है. अब तो
आपको भी बल्कि हर हिन्दुस्तानी को फिक्रमंद होने की ज़रुरत होगी ही. इस सहाफी को ऐसे हालात का पहले ही इल्म हो चूका था
और उसने हाल ही में १३ अक्टूबर को एक मज़मून २३ अक्टूबर २०१९ के बाद....... क्या होगा ..... क्या होने वाला
है...... कुछ ख़बर है लिखा था. दूसरी बात कुछ दिसम्बर २०१७ या उससे पेश्तर कश्मीर
के ही मामले पर नव भारत टाइम्स में कहा था की भारत में सख़्त तबाही आएगी लाशों के ढेर
होंगे. लाशें गिनते गिनते तुम लोग थक जाओगे. होगा वही सब होगा. तबाही तो आएगी सख़्त तबाही भी आएगी और बर्बादी भी
आएगी. किसी भी मज़लूम की बद्दुआ और आहा रायेगार
नहीं जाती. जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा.
बड़ी
तादात में अवाम की हलाकत होगी और वो होंगे करोड़ों में अब उस तकलीफ का एहसास करेगें
जो कश्मीरी नवजवानों ने भोगी थी और उस अज़ीयत को साफ़ तोर पर देखोगे जो उन्होंने देखी
थी. अभी हुकूमत हिन्दू हितों की बात कर रही
है. लेकिन जब बगावत उभरेगी और सब एक कश्ती
में सवार होंगे तब हुकूमत उनपे जब्र करते हुए ये ना देखेगी के कौन हिन्दू है और कौन
मुस्लिम.
आज
कश्मीर के नौजवानों का जो आज़ादी का नारा हूकूमते हिन्द लंगूर, लँगूरनियों और अवाम को
ना ज़ेबा लगता था तकलीफ देता था वैसे ही हालात अल्लाह ने भारत में कर दिए की वही नारा
हर जगह हर मौके हर एहतेजाज में गूँज रहा है.
और ये ख़िराजे तहसीन होगा उन कश्मीरी नौजवानों और कॉलेज के तालिबे
इल्मों के लिए जिनका कोई गुनाह नहीं था और ना ही वो किसी जुर्म या दहशत का हिस्सा थे
बरक्स वो अपने हक़ के लिए आवाज़ बुलंद करते थे और फौज, पुलिस उनपर गोलियाँ बरसा कर उनको
शहीद कर देती थी. क्योंकि उन्होंने आज़ादी का
नारा बुलंद किया.
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