Sunday, 22 December 2019

बरहना हुई वतन परस्ती.

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Traitor mentality exposed.


अज़ीज़ नाज़रीन,
२१ दिसम्बर २०१९ यानि कल हैदराबाद में अवाम के एक जलसे से खिताब करते हुए ऐ.आई.अम.आई.अम. के सदर असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के तमाम वतन परस्तों से कहा की अपने घरों की छतों पर क़ौमी परचम लहरा दो, दरों दरवाज़ों पर क़ौमी परचम लगा दो.  आगे उन्होंने मज़ीद कहा सियाह क़ानून "का" के खिलाफ आप एक हो और क़ौमी यकजेहदी दिखाने के लिए जब और जैसी ज़रुरत पड़े क़ौमी परचम लहरा दो.

माफिया डॉन और फरार गुंडा बीजेपी का रकूने असेंबली मिश्रा २१ दिसंबर २०१९ को क़ौमी परचम तिरंगे के साथ अवाम के हुजूम और पुलिस को एक जुलूस की शक्ल में भड़काता हुआ  देखा जा सकता था.  ये शख़्स बे हद ना ज़ेबा नारा लगा रहा था. "देश के ग़द्दारों को, गोली मारो सालों को".  इस तरह वो हुजूम और पुलिस को जुर्म करने की तरग़ीब और तालीम दे रहा था.  हुजूम के हाथों में आज कल क़ौमी परचम, सिर्फ सिर्फ सियासी दुकानदारी और साजिश करने के लिए ही लिया जाता है.  और उस जुलूस में भी ऐसा ही किया गया, तिरंगे का इस्तेमाल पुलिस और हुजूम को सिर्फ मुसलमानों का खून बहाने और क़त्ल करने के लिए किया गया था, जो अमन के साथ एन. आर.सी. के अमल के बाद "का" के सियाह और बेरहम क़ानून की खिलाफत में एहतेजाज दर्ज करवा रहे थे. 

उमूमन बीजेपी, संघी दहशतगर्द और शिद्दत पसंद हिन्दू अपने आपको क़ौमी मोहब्बत या वतन परस्ती जैसे दुशालों में पोशीदा रखते हैं, लेकिन जब उनसे यकजहदी दिखाने को कहा जाता है, तो उल्टा सवाल करने वाले पर ही हमलावर हो जातें हैं. 

यहाँ सबूत पेशे खिदमत है, दिल्ली की २२, दिसम्बर की उस रैली में बेहद पुर एतेमाद, वतनपरस्त और वतन से मोहब्बत करने वाले आली जनाब इज़्ज़त माब तालीमी आफ़्ता ज़हीन चायवाला मोदी लेकिन देखिये उसकी रैली में क़ौमी परचम हुजूम या भीड़ में शायद ही कहीं नज़र आएगा.   माफिया डॉन और गुंडा बीजेपी का रकूने असेंबली मिश्रा ने २१ दिसम्बर २०१९ को हाथों में तिरंगा लिए हुए अवाम और पुलिस को उकसाया, भड़काया की हर किसी शख़्स को क़त्ल कर दो, जो एन.आर.सी. और "का" के खिलाफत में खड़ा रहे.  लेकिन जब असदुद्दीन ओवैसी ने उस माफिया डॉन मिश्रा के नारे का माक़ूल जवाब वतन से मोहब्बत, भारत की यकजहदी और भाईचारे का दिया, फिर २२ दिसम्बर महज़ एक दिन में क्या हुआ कैसे हाथों से सबके तिरंगा ग़ायब हो गया और सबने उसको अपना क़ौमी परचम तस्लीम करने से मना कर दिया.  क्या इनकी यही वतनपरस्ती है की क़ौमी परचम को बजाये क़ौमी मसले के अपने मफ़ात और मक़सद के लिए इस्तेमाल किया जाए.  २२, दिसम्बर महज़ एक दिन बाद क्या हुआ, हर किसी ने क़ौमी परचम को नकार दिया. 
माफिया डॉन और बीजेपी के गुंडे रकूने असेंबली ने हुजूम को दिल्ली में उकसाया और उसने कन्नोट सिर्कल से नारा दिया "इन देश के.... गोली मारो सालों को".  उसका मक़सद साफ़ ज़ाहिर हो रहा था जो हिन्दू मुस्लिम भाईचारा इस एन.आर.सी.अमलकरदा होने के बाद जो "का" एक बिल वजूद में आया है उस भाईचारे को तबाह कर के वापिस से ज़हर भरने का था.
में भी यहाँ ऐसा ही दो नारे के साथ हर भारतीयों, इंकलाबियों और वतन परस्तों को देना चाहूंगा, की काकोरी दोहरा दो.  एक नारा "इन चड्डा चड्डी वालों को, गोली मारों सालों को", "इन चड्डा चड्डी वालों को, जूते मारो सालों को".

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