हिंदी अवाम अपने मुजरिमाना रवैय्ये और मस्तूरातों पर जिन्सी दहशत और हमलों की
वजह से बेरुन मुल्क भी मशहूर हो रहे हैं. ऐसे
मुजरिमाना सोच वाले हिन्दू मुजरिम अपने मुल्क का नाम बेरुन मुल्क और दुनिया में खूब
रोशन कर रहे हैं. वैसे तो हिन्दू अवाम दहशतगर्दी, इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी, अकलियतों के हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी, क़त्ल, इज्तेमाई क़त्ल, अस्मतदरी, इज्तेमाई अस्मतदरी, डकैती, फ्राड के लिए पहले ही मशहूर है. ताहम भारत में मस्तूरातों पर इन
हिन्दू अवाम के जिन्सी हमलों के चलते भारत अब बन चूका है रेपिस्तान, लेकिन २०१४ के
बाद बेरुन मुल्क हिंदुस्तानिओं के बढ़ते हुए जिन्सी दहशत के सबब हिन्दुस्तानी बदनाम
हो रहें हैं.
खबर है की हिंदुस्तानी नस्ल के डॉक्टर को ब्रितानिया की अदालत ने ख़वातीनों
पर जिस्मानी दहशत का मुजरिम पाया है। ये ज़ानी
जर्राह ख़वातीनों को जिन्सी शिकार बनाने के
लिए उनकी कमजोरी का सहारा लेता था. अपने ज़िम्नी
जाल में फ़साने के लिए यह जिस्मानी मरीज़ डॉक्टर हॉलिवुड और बरहना फिल्म दिखाता था. टीवी स्टार्स की कैंसर से जुड़ी खबरें सुनाकर वह
उन्हें डराता था।
इस दिमागी मरीज़ डॉक्टर का नाम मनीष शाह है. यह जनरल प्रैक्टिसनर (जीपी) अब तक २५ ख़वातीनों को
वह जिस्मानी शिकार बना चुका है। लंदन के ओल्ड
बैले कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि वह ख़वातीनों को डराने के लिए झूठी,
फरेबी ख़बरों का सहारा लेता था। एक ख़ातून को डराने के लिए उसने हॉलीवुड स्टार ऐंजलिना
जोली की बरहना तसावीर का भी सहारा लिया। उसने मरीज को कहानी सुनाई कि किस तरह ऐंजलिना
जोली को ब्रेस्ट कैंसर हुआ और मरीज को भी ब्रेस्ट चेकअप करा लेना चाहिए।
वकील केट बेक्स ने कोर्ट को बताया कि इस डॉक्टर ने अपने पेशे के साथ गद्दारी
की है. और अपने प्रफेशन का सहारा लेकर मस्तूरातों के साथ जिन्सी जुर्म करता था. वकील ने भरी अदालत में ये भी बताया ये दिमागी मरीज़
डॉक्टर और बिना किसी मेडिकल जरूरत के वह ब्रेस्ट और वजाइनल चेकअप करता था, और उनको
बरहना करता था।
मई २००९ से जून २०१३ के बीच मनीष ने कई नाबालिगों यहाँ तक की ६ साला बच्चियों
के साथ भी ज़िनाकारी की थी। जांच के बहाने वह मस्तूरातों के ज़ाती आज़ा को ना मुनासिब
और ग़ैर ज़रूरी छूता था। साल २०१३ में मामला सामने आने के बाद डॉक्टर को उसके पेशे से
मुअत्तिल कर दिया गया था और उसके खिलाफ पुलिस जांच शुरू हो गई थी। जांच में वोह जिन्सी
मरीज़ मुजरिम साबित हुआ. डॉक्टर को २५ ज़िना
के जुर्म के लिए ७ फरवरी २०२० को सजा सुनाई जाएगी।
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