नए दौर में दहशतगर्दी
ख़ुद ही एक मज़हब बन गया है, जो तमाम आलम में फ़ैल चूका है. लेकिन इसका दारुलहुकूमत और मरकज़ी नुक़्ता नए भारत
में मौजूद है. क्योंकि इस दहशत का कामिल दिमाग़
भारत में है, और वही से ये तमाम आलम में कही भी दहशतगर्दी हमलों की हिदायत दे अपने
तमाम दहशत के कारनामों को अंजाम देता है.
इंडिया सबसे क़वी दहशतगर्दी का अड्डा बन चूका है, जहाँ दहशत की मश्क़ की जाती
है, दहशत के तरबियती डेरे हैं और दहशत की फॅक्टरीस मौजूद हैं. अब हालत ऐसी हो गई है की आलमी बरादरी अपने शहरियों
को भारत भेजने में ख़ौफ़ज़दा होने लगी है. बरतानिया और अमेरिका ने अपने शहरियों के लिए
हिदायत जारी की है की वो भारत का सफर ना करें और अगर इरादा रखतें हो तो मुल्तवी कर
दें. हिदायत में नए साल के जश्न में भी शामिल
ना होने की हिदायत दी है ताके वो दहशतगर्दाना हमलों से मेहफ़ूज़ रह सकें.
कैब के ऊपर मौजूदा
हगामे और भारत में ख़ाना जंगी और हुकूमत के ज़ेरे क़यादत दहशतगर्दी के मरहले को देखते
हुए दुनिया के मुख़तलिफ़ मुमालिकों ने जिनमे शामिल हैं अमेरिका, यूं के, इज़ाराईल, कनाडा
और सिंगापोर ने अपने शहरियों को भारत ना जाने की सख़्त हिदायत दी है. जहाँ पर शहरियत तरमीम क़ानून के ख़िलाफ़ सख़्त एहतेजाज
गवाह है.
मौजूदा शहरियत
तरमीम क़ानून असल में कुछ नहीं है बरक्स ज़ाफ़रानी दहशत और हुकूमते हिन्द की जानिब से
एक और मुत्तास्सिब ज़ेहनियत और सख़्त तरीन मुसलमानों से नफरत का एक और मुज़ाहेरा और हरबा
है. नए शहरियत तरमीम क़ानून के तहत ग़ैर मुस्लिम
जो बंगलादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान में मज़हब की बुनयाद पर ज़ुल्म और जब्र का शिकार
हुए उनको तो शहरियत फ़राहम करेगा लेकिन जो मुसलमान श्री लंका और म्यांमार में ऐसे ही
हादसों और दहशत का शिकार हो रहे हैं उनको नहीं करेगा.
इस तरह के तमाम
हालात को देखते हुए ख़ास आसाम, नार्थ ईस्ट के हालात के देखते हुए अमेरिका हुकूमत ने
भारत में अपने सफारती सफर मुल्तवी कर दिए हैं और उन इलाक़ों को नो एयर का एलान किया
है.
नई दिल्ली में
मौजूद अमेरिका के सिफारत ख़ाने ने भारत में मुक़ीम और भारत में सफर करने वाले अपने शहरियों
के लिए एक हिदायत जारी की है. ख़ास नार्थ ईस्ट
के लिए की अमेरिका शहरी भारत में जाने से पहले शहरी तरमीम बिल के ख़िलाफ़ एहतेजाज को
देखते हुए मोहताद रहें.
उसी तर्ज़ पर यूं
.के. ने भी अपने शहरियों को हिदायत जारी की है.
सिंगापोर के वज़ारते ख़ारजा ने अपने शहरियों को नार्थ ईस्ट और भारत में ना जाने
की हिदायत जारी की है. कनाडा ने अपने शेहरिओं
को सलाह दी है की ग़ैर ज़रूरी अरुणाचल प्रदेश, आसाम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड
की जानिब सफर ना करें क्योंकि एहतेजाज अपने उरूज पर है.
इजराइल ने अपने
बाशिंदों को खुनी एहतेजाज के मद्दे नज़र पूरी तरह से आसाम ना जाने की हिदायत दी है.
इजराइल के वज़ारते खारजा ने तमाम भारत में खूनी एहतेजाज के इमकानात के मद्दे नज़र अपने
बाशिंदों को भारत के किसी भी सूबों और हिस्सों में भी ना जाने की सख़्त हिदायत दी है.
सहाफी जुबेर का हालाते हाजरा पर नुक़्ता ऐ नज़र
इजराइल भारत का
एक एहम साथी माना जाता रहा है. लेकिन ऐसा महसूस
होता है की इजराइल भी मोदी की हिकमते अमली से मुतमइन नहीं है. क्योंकि बीजेपी नाज़ी पार्टी के और मोदी हिटलर और
मोस्सिलिनी के नक़्शे क़दम चल रहा है. ये महज़
पहला मौक़ा नहीं है की जब इजराइल ने अपने शेहरिओं को भारत ना जाने की सलाह दी है. बल्कि इससे पेशतर एक सलाह २०१४-१५ में भी जारी की
गयी थी के इसराइल के अवाम गोवा ना जाएँ और नए साल के जश्न में शामिल ना हों, क्योंकि
उनके ऊपर दहशतगर्द हमले हो सकतें हैं. उस वक़्त
आधा टिकट निकर दहशतगर्द (संघी) फ़ौरन हिदायत के पीछे इस्लाम और मुसलमानों पर हमरेज़ होतें
हैं. और अपनी हमदर्दी तमाम यहूद शहरियों के
लिए दिखातें हैं. कुछ चड्डी धारी दहशतगर्द
बोलतें हैं की हम हर यहूद शहरी की हिफाज़त जिस्म में मौजूद अपने आखिर खून के क़तरे तक
करेगें. आपका ख़ैर मक़दम है. क्या वही अज़्म और बातें भारत के इन नेकर (चड्डी) धारी दहशतगर्दों की इजराइल के लिए
अभी भी क़ायम हैं.
याद रहे २०१४-१५
में गोवा दहशत के ज़ेरे क़यादत था और हिदायत उस वक़त ख़ास गोवा के लिए थी, और अब भारत के
लिए है जो की अब दहशत के ज़ेरे साये काम कर रहा
है. कांग्रेस के १० साला हूकूमरानी
में जबकि झूठे मन घडन्त इस्लामिक जिहादी किस्से खूब मशहूर थे लेकिन ऐसा मौक़ा एक बार
भी नहीं आया की किसी भी तरह की हिदायत किसी भी बेरुन मुल्क से कभी भी जारी की गई होगी.
सही देखा जाए तो
भारत महज़ दहशत का दारूल हुकूमत नहीं रह गया बरक्स ज़िना बिल जब्र, गिरोह गर्दना ज़िना
का भी दारूल हुकूमत बन गया है. राहुल गाँधी
ने बजा फर्माया, मोदी लोगों को बुलाता है आइये भारत में बनाइये, उसको कहना चाहिए आइये भारत में ज़िना कीजिए.
सही देखा जाए तो
ये शहरी तरमीम बिल नहीं है बल्कि मुसलमानों की शहरियत को तरमीम किया जा रहा है. और जब अवाम एहतेजाज करता है तो हुकूमत उनपे जब्र
और तशद्दुत और अवाम की आवाज़ को कुचलने के लिए सख़्त तरीन ज़ालिमाना इक़दाम उठाती है, जैसे
कर्फ्यू नाफ़िज़ करना, ख़बरों को ब्लॉक करना, इंटरनेट और मोबिल ब्लॉक करना. पुलिस और पेरा मिलिटरी फ़ोर्स फ़ौरन एक्टिव मोड में
आ जातें हैं और वो ऐसे अवाम को फ़ौरन हलाक कर देतें हैं जो मुसलमानों जैसा दिखता है. दो वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से चल रहें हैं पहले में एक आर्मी जवान एक
अधमरे खूनम झार सफ़ेद पाजामा कुरता पहने हुए दाढ़ी वाले शख़्स को बे ज़र्ब पीटते हुए देखा
जा सकता है आगे वोह उसकी छाती पर पैर रख कर गोली चला देता है. आर्मी और पुलिस झरोखे से देखती हुई खातूनों पर निशाना
लगा कर गोली मारते हुए देखे जा सकतें हैं. ज़ाफ़रानी हुक्काम को अगर ऐसा कोई हमला हुआ
है तो उसको वाज़े करना होगा.
एक दुसरे वीडियो
में एक ख़ाकी दहशतगर्द (पुलिस अफसर) एक मौलाना साहब के उससे किये हुए वाजिब सवाल पर
उनको धमकाते हुए देखा जा सकता है. दहशतगर्द
चिल्लाता है "चीर के रख देंगे, किसी होश में मत रहना, तू जानता नहीं है मेरेको"
उसके बाद वह बंदूक मौलाना साहब की जानिब कर के अपना मक़सद वाज़े करता है.
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