अज़ीज़ नाज़रीन,
हाल ही में हुए दो अहम इंतेख़ाब ने इस बात को वाज़े कर दिया है की अब दहशत, क़त्ल, ना इंसाफ़ी, इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी, मज़हबी आज़ादी की खिलाफ़वर्ज़ी, ख़ौफ़, हूजूमी दहशत, मस्तूरातों के हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी, अकलियतों के हुक़ूक़ की खिलाफवर्जी का दौर ख़त्म हो गया है। अमेरिका में डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन्स को धुल चटा दी और डोनाल्ड ट्रम्प की दहशत को ढेर किया वही बिहार में कबीर महाज़ या बड़े साहब का महाज़ या बड़े मियां का महाज़ (मुत्तहिदा सेक्युलर महाज़) ने बिहार में ज़ाफ़रानी दहशत का ख़ात्मा किया। एक एक दहशतगर्द को जंग में चुन चुन के मौत के घाट उतारा और ढेर किया। अब इन ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों, दरअंदाज़ों (घुस्पेठियों) को बिहार से चुन चुन के भगाया जाएगा। इस जंग में जो बचे कूचे दहशतगर्द हैं उनको फ़ासी दी जाएगी।
इस जंग में जैसा हाल अमेरिका में ज़ाफ़रानी दहशत के सरग़ना मोदी के क़रीबी और मुहाफ़िज़ डोनाल्ड ट्रम्प का हुआ वही हाल भारत में ज़ाफ़रानी दहशत का हुआ। दहशत का ख़ात्मा हुआ और तमाम दहशतगर्द, मुनाफ़िक़, शिद्दत पसंद काफिर एक एक कर के मारे गए। इन दो मुमालिकों में दहशत, नाइंसाफ, इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफवर्जी करने वाले दरिंदों की बुरी तरह से शाकिस्त हुई है।
नाज़रीन एक बात आप हज़रात ने ग़ौर की होगी वोह यह की जिस फ़िरक़ा
परस्ती,
मुसलमानो इस्लाम पैगम्बर से नफरत के ज़हरीले बीज ज़ालिम क़साइयों
और जल्लादों ने हिन्द से ले कर अमेरिका तक बोये थे उसका इक्तेदाम होना शुरू हो गया
है। अमेरिका से ले कर हिन्द और इजराइल से
ले कर स्पेन, फ्रांस
और बरतानिया तक इस बात को तस्लीम कर चुके हैं की अगर हम इंसानियत के ऊपर ना हक़ ज़ुल्म
करेगें तो उसका ख़मयाज़ा हमको नहीं तो हमारी नस्लों को भोगना पड़ेगा। केस मालिके कायनात की अदालत में दर्ज हो गया, तो आज नहीं तो कल इन्साफ होगा और हमें हमारे
गुनाहे अज़ीम (न हक़ इंसानो के क़तल) का हिसाब किताब और जवाब देना होगा।
करोना की वबा उस हिसाब किताब का ज़र्रा भर झलक है। जिसने जितना
क़ेहर बरपा अमेरिका, बरतानिया, स्पेन,
इटली, इजराइल, हिन्द में किया है उससे कई गुना कम या ना के बराबर इन्साफ पसंद
मुमालिकों सऊदी, दुबाई,
पाकिस्तान, इराक़, ईरान, टर्की, मलेशिया और दीगर मुस्लिम मुमालिकों में हुआ।
दूसरी एक और बात जो इस इंतेखाब से साबित हुई वोह यह की अब
अवाम राम मंदिर, पाकिस्तान,
कश्मीर, मुस्लिम अवाम के खिलाफ ज़हर और नफरत,
खून खारबे की सियासत से उक्ता चुके हैं। इनमे से एक भी मुद्दा ऐसा नहीं है जो की अवाम के
मसाइल जैसे रोज़गार, तालीम, और इक़्तेसादी
मसाइल हल कर सके। बीजेपी २०१४ में इनमे से
किसी भी मुद्दे पर नहीं आई थी बल्कि विकास और अवाम के मसाइल हम हल करेगें इन मुद्दों
पर आई थी। और हुआ क्या आने के बाद शुरू कर
दी ग़द्दारी, हक़तल्फ़ी,
क़त्ले आम। जिसका खामयाज़ा
अब भोगेंगे ज़ाफ़रानी दहशतगर्द।
हिन्द का अवाम भी मोदी के झूट,
फरेब और धोखेबाज़ी से आजिज़ आ चूका है,
यही वजह है मोदी ने जहाँ जहाँ जिस तंज़ीम जिस जिस शख़्स के लिए
इन्तेख़ाबी इजलास किये वहां वहां वोह तंज़ीम ग़ारत हुई। यहाँ तक की ना सिर्फ हिन्द बल्कि अमेरिका में भी
मोदी की साख को करारा झटका लगा है जब मोदी ने ट्रम्प के लिए हाहूडी मोदी और भारत में
नमस्ते ट्रैम्प का इंतज़ाम किया था। इतना ही
नहीं गुजिश्ता जितने भी इंतेखाब में मोदी ने शिरकत की सब जगह दीफाई फौजों ने दहशतगर्दों
को ना सिर्फ मौत के घाट उतारा है बल्कि बड़ी तादात में अमवात हुई (ज़ाफ़रानी पार्टी की करारी
शिकस्त) हुई है। राजिस्थान में वसुंधरा के
लिए रैली की क्या हुआ, महाराष्ट्र में फडणवीस के लिए रैली की क्या हुआ, दिल्ली में मनोज तिवारी के लिए रैली की क्या हुआ और अब बिहार
में नितीश के लिए क्या हुआ।
लेकिन इस सब कारगरदेगी में इन लोगों ने हिन्द को कई सदियों पीछे
धकेल दिया। इस जंग में सबसे ज़्यादा नुकसान
अगर किसी का हुआ है तो वोह है आम अवाम और भारत।
सियासतदाओं का क्या उनके पास तो इतना सारमाया होता है की उनकी साथ पुश्तें बग़ैर
कुछ काम किये खा सकती हैं। जिस तरह से दरिंदे
अमित शाह ने अपने बेटे को हर वोह सुख दिया जिसकी उसको हाजत थी,
बीसीआई का चेयरमैन से ले कर तो करोड़ों की फ़र्ज़ी कंपनी खुलवाने
तक। अमित शाह ग़द्दार मरकज़ की सियासत में आया
ही इसीलिए था एक उसको अपने ऊपर के तड़ी पार के तमाम जुर्म से साफ़ बहार आना था और अपनी
नस्लों को भारत के अवाम के पैसे पर पालना था और अवाम के खून से उसको सींचना था।
भारत में जितनी भी तबाही और बर्बादी आई है वोह दरिंदे,
ज़ालिम, दहशतगर्द, क़साई, जल्लाद अमित शाह के आने के बाद आई है। नहीं तो सब कुछ उतना जारिहाना और गुस्से से भरा
नहीं था। राजनाथ के वज़ीरे दाखला के ओहदे पर
होते हुए हूजूमी दहशत होती थी लेकिन बरहना अंदाज़ में खुल्लम खुल्ला अवाम के रू बरू
सब कुछ होना अमित के दौर से शुरू हुआ जिसका ख़मयाज़ा अब खुद अमित भुगत रहा है और मौत
के बिस्तर पर अपने दिन गिनते पड़ा हुआ है।
हर रोज़ उसको मौत की दस्तक सुनाई दे रही है।
जो बाइडन अमेरिका के नए सदर मुन्तख़िब कर लिए गए हैं। उनका रूझान भी बराक ओबामा और बिल किलिंटन की तरह हक़ और इन्साफ पर मब्नी है। उनको भी यक़ीन
है की तमाम आलम में इस्लाम और मुसलमानों के ख़िलाफ़ दहशत की निस्बत से ख़ून ख़राबा करने की निस्बत बदगुमानी पैदा की गई है। जबकी इस्लाम और मुसलमान अमन पसंद होंतें हैं, लेकिन उनके ख़िलाफ़ बदगुमानी ज़्यादा हावी
रही। जैसा की आम तोर पर होता है बद अच्छा
और बदनाम बूरा। इस सिलसिले और बदगुमानी को बाइडन तोड़ने की बात करतें हैं। बाइडन पाकिस्तान,
इस्लाम, प्रोफेट से मुत्तासिर हैं। उनको २००८ में पाकिस्तान की जानिब से हिलाले पकिस्तान
दोयम सबसे अज़ीम शहरी तमगे से नवाज़ा गया है।
उन्होंने अमेरिकी हमला कर के शहीद ओसामा बिन लादेन रेहमतुल्लाह अलैहे अका ओसामा
जी की शहादत पर भी सख़्त तनक़ीद की थी। अमेरिका
का वोह रव्वैया और बदला लेने की हिकमत उनको ज़र्रा बराबर माक़ूल नहीं लगी थी।
तमाम आलम का अवाम क़ुदरत और इंसान के दरमियान चल रही इस जंग से
बेज़ार हो चूका है। अब तो हर नाइन्साफों और
हक़तल्फ़ों के लिए माफ़ी तलाफ़ी का वक़्त है। अगर
अब भी नहीं सुधरे तो जिस तरह की मार अमेरिका और हिन्द में बेज़रब पड़ी है,
आगे भी पड़ती रहेगी।
हिन्द में इस कुदरती क़ेहर और दीफाई फौजों (फरिश्तों) के हमले में कितने ही शिद्दत
पसंद हिन्दू मारे गए, संघी दहशतगर्द और बीजेपी के नुमाइंदे मारे गए, मुनाफ़िक़ मारे गए अब जा कर हिन्द की अवाम को अक़्ल आई है की हमसे
कुछ तो ग़लत हो रहा है, तभी हमारे साथ यह बदला क़ुदरत ले रही है।
बोहोत से तो राम भक्त साधू संत भी मारे गए अगर राम का मंदिर ही हर मसले का हल होता तो यह सारा बवाल तो शुरू ही सुप्रीम कोर्ट के उस ना इन्साफ फैसले के बाद शुरू हुआ था जो राम के मंदिर पर आया था। ९ नवम्बर २०१९ को ना इंसाफ़ी भरा फैसला आया और १७ नवंबर २०१९ को चीन में पहला कोविद-१९ केस दर्ज हुआ। उसके बाद हिन्द में पंहुचा वोह जनवरी २०२० में जब वहां पहला केस दर्ज किया गया। और आज सूरते हाल यह हो गई है की अभी तक कुछ १.३० लाख अवाम मारा गया है और कमो बेश ८५ लाख ज़ख़्मी हो चुके हैं।
बीजेपी, ज़ाफ़रानी दहशत को बोहोत ही ग़ुरूर और तकब्बुर हो गया था,
उनको गुमान हो रहा था की इस कायनात का ख़ुदा तो सिर्फ मोदी जैसा
ज़ालिम,
दरिंदा, क़साई ही है। जो कुछ
भी कर सकता है। हर सियासी तंज़ीम का मखौल उड़ाना,
हर सियासी तंज़ीम को अपने से कमतर समझना,
हक़ीर समझना, अरे तुम क्या हमारा मुक़ाबला करोगे अकेला मोदी
तुम्हारी धज्जिया उड़ा देगें। आप तो वोट कटुआ
हो, आप तो कांग्रेस की बी टीम हो आप तो सयासत के सी ग्रेड नुमाईंदे
हो। यहाँ
तक की ज़ाफ़रानी सहाफिओं और शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम को गुमान यह हो चला था की हिन्द
में नहीं बल्कि अब तो अमेरिका और तमाम आलम के मोदी खुदा हैं,
जैसा मोदी कहेगा वैसा ही तमाम मुल्क करेगें। लेकिन इस दरिंदे, क़साई, ज़ालिम दहशतगर्द को अच्छा सबक़ सिखाया है।
इस शाकिस्त के बाद में तमाम खुले ज़ेहन के सहाफियों (ख़ास एन डी टीवी और आज़ाद) और तमाम सियासी जमातों के नुमाईंदों से गुज़ारिश है अब से जब भी किसी गुफ्तगू (डिबेट) में इन्तेख़ाब से क़ब्ल जाना हो तो बीजेपी के नुमाइंदों को इन पांच नामों में से जो कोई भी अच्छा लगे कहें। जैसे १ नंबर वाला इस तरह बोला जाएगा आप तो वोटों को नेस्त ताबूत कर दोगे उसी हिसाब से २ नंबर वाला आपका तो नामो निशान ख़लास-मिट जाएगा। ४ नंबर वाला ऐसे बोला जाए, "आप तो ज़नख़ों की जमात हो, आपको वोट तो ज़नख़ों का मिलेगा।
१. नेस्त नाबूत
२. नामो निशान खलास-मिट जाएगा
३. सर क़लम
४. ज़नख़ों (हिजड़ा, नपुंसक) की जमात हो
५. गीदड़ सफाया
एक बात वाज़े है अमेरिका में दहशत का तख़्ता पलट और भारत में ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों, क़ातिलों, दरिंदों, क़साइयों, ज़हरीले कीड़ों का ख़ात्मा शुरू हो चूका है। अब तो साधू जैसे भगवा क़साइयों को सुधरना होगा नहीं तो हम इनको सुधारेंगे। अगर अब भी साधू, ज़ाफ़रानी दहशत, हिन्दू शिद्दत पसंद, बीजेपी वाले, मुनाफ़िक़ नहीं सुधरे तो आगे की राहें बोहोत सख़्त होंगी। सुधर जाओ नहीं तो राम नाम सत्य होगा, ऐसा कई बार कह चुके थे, लेकिन अब हक़ीक़त में देखेगें यह ज़ाफ़रानी दहशतगर्द।
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