अमेरिका के अगले सदरे जमुहरिया जो बाइडन और नायब कमला हेरिस तक़रीबन मुंतख़िब होने के लिए तैयार हैं। हालांके इन दोनों का मुंतख़िब हो कर आना हुकूमते हिन्द के लिए किसी मुज़िर खबर और मज़ीद परेशानी से कम नहीं है। ख़ास कर के ज़ाफ़रानी दहशत और शिद्दत पसंद हिन्दू अफ़राद के लिए डेमोक्रेट्स की जीत मौत की आहट सुनाई देने जैसे लग रही होगी। हिन्दू दहशतगर्द वैसा ही महसूस कर रहें होंगे जैसा की पहले दहशतगर्द नाथूराम गोडसे ने सूली पर चढ़ते वक़्त महसूस किया होगा।
वैसे तो कमला हेरिस भारतीय मूल की हैं लेकिन उनके ख़यालात और
तास्सुरात ज़ाफ़रानी तंज़ीम और हिन्दू दहशत से एक दम मुख्तलिफ हैं। इन्तेख़ाब से क़ब्ल कश्मीर और पाकिस्तान पर उनके
बयानात भी भारत को परेशान कर रहें होंगे।
डेमोक्रेट्स की जीत पर पकिस्तान में ज़बरदस्त आतिशबाज़ी होगी और रिपब्लिक की हार
पर भारत में मातम। वैसे भी ज़्यादातर भारतीय
अमेरिकन जो अमेरिका में मुस्तक़िल तोर पर मुक़ीम हो चुके हैं और उनको सब्ज़ कार्ड मिल
चूका है वोह भारत से नफरत करतें हैं, भले ही उनकी नस्ल भारतीय हो और उनका डी एन ऐ भारत का हो लेकिन
अब वोह बजाये भारतीय कहलाने के अमेरिकन कहलाना ज़्यादा पसंद करतें हैं और उनको अच्छा
भी वही लगता है।
इंसानी हुक़ूक़, अकलियतों और मस्तूरातों के हुक़ूक़ पर भी जो बाइडेन और कमला हेरिस
की वाज़े राये है जो भारत के सख़्त तरीन खिलाफ जाती है। ज़ाहिर सी बात है बिल किलिंटन,
बराक ओबामा से जिस तरह की खुलूस और मोहब्बत अरब,
मुस्लिम मुमालिकों को मिला था उसकी तवक़्क़ो अब मुस्लिम मुल्क
और पाकिस्तान फिर से कर सकतें हैं। शहरियत तरमीम क़ानून को ले कर भी कमला
भारत के मौक़िफ़ की तनक़ीद कर चुकी हैं। अक़वामे
मुताहिदा में कश्मीर, अकलियतों के हुक़ूक़, मज़हबी
आज़ादी,
मस्तूरातों के हुक़ूक़ जैसे जलते हुए मुद्दों पर भारत के मौक़िफ़
को डेमोक्रेट्स की जानिब से झटका लगने के इमकान हैं।
रिपब्लिकन्स जो की दायां महज़ की मुवाफ़िक़ तंज़ीम मानी जाती है और अमेरिका के साबिक़ सदर ट्रम्प के होते हुए हिन्द और अमेरिका के रिश्ते कोई ख़ासा कमाल नहीं कर सके तो डेमोक्रेट्स जो की बायां महाज़ के मवाफ़िक़ तंज़ीम के होते हुए कैसे कोई ऐसी तवक़्क़ो कर सकता है की भारत और अमेरिका के रिश्ते अगले ५ सालों में परवान चढ़ेंगे और तारीख़ के सफों में नई दास्ताने दर्ज होंगी। हुकूमते हिन्द के वज़ीरे दाखला और दिल्ली की सल्तनत पर फ़ाइज़ बादशाह सलामत अगर ऐसे गुमान और तवक़्क़ो रखते हैं तो वोह लोग नियाहत ही अहमक़ और जाहिल हैं। उनको सियसत का ज़र्रा भर इल्म नहीं है।डेमोक्रेट्स के आने के बाद भारत और अमेरिका के रिश्ते मज़ीद खटास में पड़ेंगे। अगर भारत को अमेरिका के साथ दोस्ताना और मुखलिसना रिश्ते क़ायम करना हैं, तो अभी तक जो भी होता आ रहा था अक़लियतों की निस्बत से, कश्मीर, इंसानी हुक़ूक़, मज़हबी आज़ादी की निस्बत से उसको भारत को तब्दील करना ही होगा नहीं तो रिश्ते ख़राब होंगे और भारत को अक़वामे मुताहिदा में हर जानिब से चीन के साथ अब अमेरिका भी घेरेगा।


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